Thursday, November 5, 2015

FUN-MAZA-MASTI कभी चूत कभी सूखा--3

FUN-MAZA-MASTI

कभी चूत कभी सूखा--3


कल रात अंजली मारवाड़ी से और अनिता राजु से अच्छी तरह से चुद गई थी, सुबह अनिता उठकर नहाने जाती है वो जिस बाथरूम मे नहा रही थी वहा एक आइना था, अनिता पूरे कपड़े उतार देती है और खुद को नंगी आइने मे देखकर शरमा जाती है और उसकी झाटों से भरी चूत को हाथ से सहलाती है, नहाने के बाद अनिता साथ लाए हुए कपड़ों में से सफेद रंग की ब्रा और पँन्टी पहन लेती है, अनिता ने पहली बार ब्रा और पँन्टी पहनी थी इसलिए वो खुद को आइने ५ मिनट तक निहारती है और शरमा जाती है, फिर अनिता लाल रंग का ड्रेस पहन लेती है, अनिता उसके कमरे में जाकर राजु को उठाती है और नहाने भेज देती है. अनिता बाल सुखाकर उपर बांध देती है अनिता आज बहुत सेक्सी दिख रही थी, ब्रा पहनने के वजह से आज अनिता की चूचियां ज्यादा बहार नहीं दिख रही थी और दुपट्टा लेने के वजह से चूचियां उसके अंदर छिप गई थी.
फिर अनिता नाश्ते में क्या बनाना है ये पूछने के लिए अंजली के कमरे का दरवाजा खटखटाती है तो अंदर से मारवाड़ी दरवाजा खोलता है, सुबह सुबह अनिता का सेक्सी रूप देखकर मारवाड़ी का लंड खड़ा हो जाता है, अंजली अभी तक सोइ हुई थी.
मारवाड़ी(अनिता का पूरा बदन निहारते हुए): अरे अनिताजी आप, अंदर आइए ना.
अनिता: मालिक मैं तो बस यह पूछने आइ थी कि नाश्ते में क्या बनाना है.
मारवाड़ी: रूको मैं अंजली से पूछता हूँ.
मारवाड़ी अंजली को हिला कर उठाता है, अंजली आँखें मसलते हुए जाग जाती है, उसकी नाईटी से आधी चूचियां बहार आइ हुई थी और बाल बिखरे हुए थे.
मारवाड़ी: अंजली ये पूछ रही है कि नाश्ते में क्या बनाना है.
अंजली(आलस देते हुए): अनिता तुम चाय और उपमा बनाओ हम दोनों फ्रेश होकर नीचे आते है.
अनिता: जी दीदी.
फिर अनिता नीचे जाकर नाश्ता बनाती है, राजु और मारवाड़ी दोनों एक साथ नीचे आते है, मारवाड़ी नीचे आकर अखबार पढ़ने लगता है, राजु भी उसके साथ बैठकर अखबार पढ़ने लगता है. १० मिनट के बाद अंजली गांड मटकाते हुए नीचे आती है, आज उसने गुलाबी रंग का टाइट कमिज पहना था और निचे भी सफेद रंग का टाइट सलवार पहनी थी, इस ड्रेस पर दुपट्टे की जरूरत नहीं थी, अंजली की उभरी हुई गांड और चूचियां कमाल की दिख रही थी, अंजली ने चेहरे पर हलका सा मेकअप किया था इसलिए वो बहुत आकर्षित दिख रही थी. राजु बिना नजर हटायें बस अंजली की चूचियां घुर रहा था, अंजली तिरछी नज़र से राजु को देखते हुए बोलती है "अनिता नाश्ता तैयार हुआ या नहीं"
अनिता: दीदी नाश्ता कब का तैयार है सब आपका इंतजार कर रहे थे.
नाश्ता करके राजु और मारवाड़ी दोनों दुकान पर चले जाते हैं, मारवाड़ी के दिमाग में बस यही प्लॅन चल रहा था कि वो अनिता को चोदने के लिए कैसे राजी करेगा.
दोनों के जाने के बाद अंजली और अनिता दोनों बातें करने लगती है,
अनिता: दीदी आज आप बहुत खुश और खूबसूरत दिख रही है.
अंजली: अरे कुछ नहीं बस कल रात वो मेरे कमरे में सोने आए थे इसलिए आज मुड फ्रेश हो गया है.
अनिता(मुस्कुराते हुए): दीदी सब समझ गई मैं.
अंजली: अनिता तुझसे एक बात पूछूँ.
अनिता: हा बोलो ना दीदी.
अंजली: बुरा मत मान पर तेरे पति को गुजरें एक साल से ज्यादा हो गया, तो तु तेरे अंदर गरमी पर कैसे कंन्ट्रोल करती है, तु तो मुझसे भी जवान है.
अनिता मन ही मन सोचती है कि "अब इसे कैसे बताऊँ की मैं मेरे बेटे से चुदवाती हूँ"
अंजली: क्या सोच रही है बता ना.
अनिता(शरमाते हुए): जी दीदी अब तो मुझे उंगलियों की आदत पड़ चुकी है.
अंजली: मुझे लगा ही था और तुझे देखकर लगता नहीं तु किसी मर्द से संबंध बना सकती है.
अनिता: हा दीदी मुझे सिर्फ मेरे पति से प्यार था.
अंजली: तु कितने दिन ऐसे उंगलियों से काम करेगी, तु चाहे तो तेरे लिए भी एक डिलडो मंगवा दूँ.
अनिता: नहीं दीदी मुझे कोई जरूरत नहीं उस रबर के लौडे की.
अंजली: ठीक है और आज ब्रा पहनी है ना तुने
अनिता: हा दीदी अच्छा लग रहा है ब्रा पहन कर
अंजली: अब तुझे इसके आदत पड़ जाएगी, चल अब तु कल के कपड़े धो कर हॅाल मे आकर मेरे साथ टीवी देख.
मारवाड़ी दुकान में बैठे बैठे बस अनिता के बारे में सोच रहा था, अचानक उसके दिमाग में एक प्लॅन आता है और वो मुस्कुराने लगता है.

मारवाड़ी दुकान में बैठे बैठे बस अनिता के बारे में सोच रहा था, अचानक उसके दिमाग में एक प्लॅन आता है और वो मुस्कुराने लगता है. मारवाड़ी उसके प्लॅन के मुताबिक सब काम कैसे करने है ये सोचता है.
रात को घर जाते वक्त मारवाड़ी फिल्म के दो तिकट खरीदता है, घर जाकर सब एक साथ बैठकर खाना खाते है, सबका खाना खत्म होने के बाद मारवाड़ी अंजली के तरफ देखकर बोलता है "अंजली तुम्हारे लिए एक सरप्राईज है".
अंजली(खुश होकर): "वाव क्या सरप्राईज है, और अचानक कैसे सरप्राईज सुझा आपको".
मारवाड़ी: "क्या अब हम हमारी बीवी को सरप्राईज भी नही दे सकते".
अंजली: "हा हा पर सरप्राईज क्या है वो तो बताइये".
मारवाड़ी: "मैं तुम्हारे फेवरेट हिरो सलमान खान के नये मुव्ही के दो तिकट लाया हूँ".
अंजली: "क्या, आप सच बोल रहे हो ना".
मारवाड़ी(अंजली को तिकट देते हुए): "ये लो कल शाम ६ से ९ बजे तक का शो है, हम दोनों जा रहे हैं".
अंजली: "ये क्या आप अनिता और राजु के बारे में भूल गये, उन्हें भी साथ लेकर चलते हैं".
मारवाड़ी: "मुझे याद था, पर पुरा शो हाऊस फुल था मुश्किल से ये दो तिकट मिले हैं".
अनिता(बीच मे टोकते हुए): "अरे दीदी वैसे भी हम दोनों का क्या काम है आपके बीच आप दोनों देखकर आओ".
अंजली: "हम्मम्म चल ठीक है वैसे भी काफी समय के बाद ये मुझे कही घुमाने ले जा रहे है".
मारवाड़ी: "हा चलो अब मैं सोने जा रहा हूँ".
अंजली: "सुनिये आज आप कौनसे कमरे में सोने वाले है".
मारवाड़ी: "मैं आज मेरे ही कमरे में सोने वाला हूँ".
अंजली(थोड़ी नाराज होकर): "ओके जैसी आपकी मर्जी".
मारवाड़ी(उपर जाते हुए बोलता है): "सुन राजु मेरे पैरों में दर्द हो रहा है जरा मेरे कमरे में आकर मेरे पैर दबा दे".
राजु: "हा मालिक अभी आया".
फिर सब अपने अपने कमरे में सोने जाते हैं, राजु मारवाड़ी के कमरे उसके पैर दबाने जाता है. पैर दबाते दबाते वो दोनों दुकान के बारे में बात कर रहे थे, बाद में मारवाड़ी राजु को वही सोने के लिए जिद करता है. राजु बेचारा निराश होकर वही सो जाता है. अनिता भी राजु की राह देखकर सो जाती है.
सुबह अनिता रोज की तरह उठकर नहा धो कर नाश्ता बनाती है. अंजली भी रोज की तरह सजधज के निचे आ गई थी और राजु भी निचे आकर अखबार पढ़ रहा था. मारवाड़ी अभी तक निचे नही आया था, फिर ५ मिनट के बाद मारवाड़ी निचे आने लगता है, निचे आते वक्त मारवाड़ी जानबूझकर सीढ़ीयो से गिर जाता है और जोर से चिल्लाता है "उईई माँ मर गया रे"
मारवाड़ी को गिरा हुआ देखकर सब उठाने के लिए भागते है. राजु और अंजली दोनों मारवाड़ी के हाथों को पकड़कर उसे उठाते है, अनिता उसके लिए पानी ले आती है.
अंजली मारवाड़ी को कुर्सी पर बिठाते हुए बोलती है "अरे आप ठीक तो है ना".
अनिता(पानी देते हुए बोलती है): "थोड़ा पानी पी लो मालिक".
राजु: "आपको ज्यादा चोट तो नहीं लगी ना".
मारवाड़ी: "अरे रूको सब एक एक करके बोलो, लगता है मेरा पैर मे मोच आ गई है".
अंजली: "मैं अभी डॅाक्टर को बुलाती हूँ".
मारवाड़ी: "नही अंजली डॅाक्टर की कोई जरूरत नही".
अनिता: "दीदी आप डॅाक्टर को बुला लो अगर कुछ ज्यादा हो गया तो कौन जिम्मेदार".
अंजली: "तुम सही कह रही हो मैं अभी फोन लगाती हूँ".
मारवाड़ी: "अनिताजी, अंजली तुम दोनों मेरी बात तो सुनो, मुझे ज्यादा कुछ नही हुआ है".
अंजली: "पर हमे आपकी फिक्र हो रही है".
मारवाड़ी: "अरे फिक्र करने जैसी कोई बात नहीं है, अगर डॅाक्टर को बुलाया तो वो मुझे २-३ दिन आराम करने को कहेगा और दुकान पर ध्यान देने कोई नहीं है".
अंजली: "पर सच में आप ठीक है ना".
मारवाड़ी: "मैं ठीक हूँ बस थोड़ी सी मोच आइ है".
अंजली: "ओके तो आज आप घर पर आराम कर लो, वैसे भी आज हम दोनों मुव्ही देखने वाले थे, उसके जगह आप आराम कर लो".
मारवाड़ी: "आय अम साँरी अंजली, लगता है मैं आज तुम्हारे साथ नहीं आ पाऊँगा, तुम मेरी जगह राजु को साथ ले जाओ".
अंजली: "इट्स ओके आपने ये जानबूझकर नही किया".
मारवाड़ी(राजु की तरफ देखकर): "राजु बेटा आज तु दुकान पर मत जा, तु शाम को अंजली के साथ मुव्ही देखने जा".
राजु: "जी मालिक पर दुकान पर बहुत काम है आज".
मारवाड़ी: "तुम उसकी चिंता मत करो मैं फोन करके बाकी के बच्चों को सब काम समझा देता हूँ".
फिर सब नॅारमल हो जाते हैं, मारवाड़ी राजु का सहारा लेकर उपर उसके कमरे में जाकर आराम करने लगता है, मारवाड़ी मन ही मन खुश होकर मन में बोल रहा था "मैंने जैसा सोचा था वैसा ही हो गया, अब जल्द ही अनिता की चुत मे मेरा लंड होगा".
शाम ४ बजे अंजली राजु और अनिता को उसके कमरे में बुला लेती. अंजली राजु की तरफ देखकर बोलती है "देख राजु तु मुझे बार बार मालकिन मत बोल, आज से तु मुझे आंन्टी बोल समझा".
राजु: "समझ गया मालकिन".
अंजली(हाँसते हुए): "देख फिर से मालकिन बोला".
राजु की इस नादानी पर अनिता और अंजली दोनों हाँसती है,
राजु: "सॅारी आंन्टी".
अंजली: "हा अब ठीक है, जा तु जाकर अच्छे से तैयार होकर आ, हमें ४.३०बजे निकलना है".
राजु: "ठीक है".
अंजली: "अरे अनिता तु रूक मुझे कुछ काम है".
अनिता: "हा दीदी".
राजु के जाने के बाद अंजली अनिता को दरवाजा बंद करने को बोलती है और सलवार और कमिज उतार देती है, अब अंजली सिर्फ लाल रंग की ब्रा और पँन्टी में अनिता के सामने खड़ी थी. अनिता आँखें फाड फाड कर अंजली कि तरफ देख रही थी.
अंजली: "क्या हुआ ऐसे क्या देख रही है".
अनिता(अंजली की चूचियां निहारते हुए): "दीदी आप जब मेरे सामने कपडे उतारती हो तो मुझे शरम आ जाती है".
अंजली: "अरे इसमें शरमाने कि क्या बात है, तेरे पास जो है वही मेरे पास है".
अनिता: "वो तो है, फिर भी".
अंजली: "वो सब छोड़ अब ये बता की मैं कौनसा ड्रेस पहनू".
अंजली ५-६ ड्रेस अनिता के सामने रखती है, उसमे से अनिता एक लाल रंग का सेक्सी अनारकली ड्रेस चुनती है अंजली को भी वही ड्रेस पहनना था.

अंजली उस ड्रेस में काफी सेक्सी लग रही थी और उसकी चूचियों का हलका नजारा भी दिख रहा था. अंजली ने हलका मेकअप किया था, राजु तैयार होकर नीचे अंजली का इंतजार कर रहा था. अंजली पूरी तरह से तैयार होकर मारवाड़ी के कमरे में जाते, मारवाड़ी फोन पर किसी से बात कर रहा था. अंजली को देखकर मारवाड़ी फोन काट देता है और अंजली को बोलता है "अंजली आज बहुत खूबसूरत दिख रही हो"
अंजली: "थँक्स, मैं और राजु अभी जा रहे हैं"
मारवाड़ी: "अंजली तुम इतने जा रही हो"
अंजली: "हा अभी यहा से निकलने पर हम वहां वक्त पर पोहच जाएंगे"
मारवाड़ी: "तुम तुम्हारी गाड़ी लेकर चली जाओ"
अंजली: "हा मैं गाड़ी लेकर ही जाने वाली हूँ"
मारवाड़ी: "अच्छा संभल के जाना, अगर आने में देरी हो जाए तो कॅाल कर दो"
अंजली: "ओके चलो अब मैं निकलती हूँ"
अंजली के जाने के बाद मारवाड़ी बहुत खुश हो जाता है और उसके खड़े लंड पर हाथ से सहलाने लगता है.
अंजली मारवाड़ी के कमरे से निकलकर नीचे आती है, नीचे राजु और अनिता दोनों खड़े थे. राजु आज अच्छी तरह से तैयार हुआ था, उसने निले रंग की जीन्स कि पँन्ट और काले रंग का टी शर्ट पहना था, राजु भी आज काफी हॅन्डसम दिख रहा था. अंजली जाने से पहले अनिता से कहती है "अनिता हमे आने मे कम से कम १० बज जाएंगे, हमारे जाने के बाद तुम उनका पुरा खयाल रखो उनके कमरे में जाकर पूछो उन्हें क्या चाहिए"
अनिता: "दीदी आप चिंता मत करो मैं मालिक का पुरा खयाल रखूँगी"
अंजली: "और हा आज खाना तुम्हारी मर्जी से बनाओ"
अनिता: "ठीक है आप दोनों संभल के जाओ"
राजु: "हा माँ अब चलते है हम"
फिर अंजली और राजु दोनों घर से बाहर आते है, अंजली पार्किंग से उसकी स्कूटी बाहर निकलती है. स्कूटी पर बैठने के लिए जगह बहुत कम है, इसलिए गाड़ी पर बैठने के बाद दोनों के बदन का एक दूसरे से स्पर्श हो रहा था, जाते अंजली राजु से बात करने लगती है.
अंजली: "राजु तु इतना चुपचाप क्यों बैठा है"
राजु: "कुछ नहीं आंन्टी बस युही"
अंजली: "तुझे गाड़ी चलाने आती है"
राजु: "हा आती है"
अंजली: "पक्का आती है ना, मुझे गिराएगा तो नहीं ना"
राजु: "नहीं आंन्टी, मुझे अच्छी तरह से आती है"
अंजली: "ओके आते वक्त तु गाड़ी चला"
राजु: "ओके आंन्टी"
फिर दोनों चुप हो जाते है, रास्ते में जब कोई गड्ढा आ जाता तो राजु का लंड अंजली के गांड टकरा जाता था, इसलिए धीरे धीरे राजु का लंड खड़ा हो गया था, गाड़ी की सीट छोटी होने की वजह से दोनों पहले ही एक दूसरे से चिपक के बैठे थे और उसमें राजु का लंड भी खड़ा हो गया हो गया, अंजली राजु का लंड उसकी गांड पर महसूस कर रही थी. फिर आगे एक स्पीड ब्रेकर आ जाता है, वहां से गाड़ी थोड़ी उछलती है, और उसके धक्के से राजु का लंड अंजली की गांड के दरार पर चिपक जाता है. अंजली मन ही मन बोल रही थी "इसका लंड तो मेरी गांड को छु रहा है, अब क्या करू"
राजु भी मन में बोल रहा था "मेरा लंड खड़ा होके आंन्टी की गांड को छु रहा है, आंन्टी मेरे बारे में क्या सोच रही होगी" फिर राजु थोड़ा सा पीछे हट जाता है, आगे फिर से जब कोई गड्ढा या स्पीड ब्रेकर आ जाता तो राजु का लंड फिर से अंजली की गांड को छूता था, ऐसा होते होते वो दोनों थिएटर में पहुँच जाते है. अंजली उसकी गाड़ी पार्क करती है, राजु गाड़ी से नीचे उतरता है, तब अंजली की नजर राजु के लंड के उभार पर जाती है. अंजली उसे देखकर भी अनदेखा कर देती है और थोड़ा मुस्कुराते हुए राजु से बोलती है "राजु चल अब ३ घंटे आराम से मुव्ही देखते है"
राजु: "हा आंन्टी मुझे भी सलमान बहुत पसंद है"
दोनों बातें करते करते पार्किंग से थिएटर मे पहुँच जाते है.

अंजली और राजु के जाने के बाद ६ बजे अनिता मारवाड़ी के लिए चाय बनाके उसके कमरे में चली जाती है.
अनिता: "मालिक आपके लिए चाय लाया है"
मारवाड़ी: "अरे अनिताजी अंदर आइए ना"
अनिता मारवाड़ी को चाय देती है, और पूछती है "मालिक अब आपका पैर कैसा है"
मारवाड़ी: "अभी भी दर्द कर रहा है"
अनिता: "मालिक क्या मैं आपके पैरों की मालिश करू, आपके बहुत अच्छा लगेगा"
मारवाड़ी: "अनिताजी आपने तो मेरी मुँह की बात छीन ली, मैं भी यही कहने वाला था"
अनिता: "मालिक आप १० मिनट तक इंतजार करो मैं तेल गरम करके लाती हूँ"
मारवाड़ी: "हा तब तक मैं कपडे बदलता हूँ"
फिर अनिता तेल गरम करने किचन मे जाती है, मारवाड़ी उसके कपडे निकालकर कमर पर एक लुंगी लपेट लेता है, और उपर एक टी शर्ट पहन लेता है. मारवाड़ी मन ही मन बहुत खुश हो रहा था. फिर १० मिनट में अनिता तेल गरम करके मारवाड़ी के कमरे में ले आती है. आज अनिता ने गहरे गले का हरे रंग का कमिज और काले रंग की सलवार पहनी थी, अनिता मारवाड़ी की तरफ देखकर बोलती है "मालिक मैंने तेल गरम कर लिया है, अब आप लेट जाओ"
मारवाड़ी: "अनिताजी मेरे कपडे खराब ना हो इसलिए मैंने लुंगी पहन ली है, आपको बुरा तो नहीं ना लगा"
अनिता: "अरे नहीं मालिक भला मुझे क्यों बुरा लगेगा"
फिर मारवाड़ी बेड पर उलटा लेट जाता है औल अनिता मारवाड़ी के पैरों के पास बैठकर उसके पैरों पर तेल लगाती है, अनिता जब मारवाड़ी के पैरों की मालिश करने के लिए झुकती है तब उसका दुपट्टा उसकी चूचियों से हटकर तेल में गिर जाता है. अनिता उसका दुपट्टा उतारकर बाजु मे रख देती है, अब मारवाड़ी को तो जैसे सोने पर सुहागा मिल गया था. मारवाड़ी उलटा लेटे लेटे पीछे मुडकर अनिता की चूचियों को घुर रहा था. अनिता पैर दबाने मे व्यस्त थी इसलिए उसको पता नहीं था कि मारवाड़ी उसकी चूचियां घुर रहा है. अनिता मारवाड़ी के तलवों की मालिश करते करते धीरे धीरे उसके घुटनों तक तेल लगा रही थी, ये सब करते हुए अनिता की चूचियां हिल रही थी, मारवाड़ी को अनिता के कमिज के गहरे गले के वजह उसकी काले रंग की ब्रा भी साफ़ साफ़ दिख रही थी और उसमें हिलती हुई बड़ी बड़ी चूचियों को देखकर तो मारवाड़ी का लंड खड़ा होकर लुंगी से बाहर आने के लिए तरस रहा था. अचानक अनिता और मारवाड़ी दोनों की नजरें एक दूसरे से टकरा जाती है. अनिता मुस्कुराते हुए पूछती है "मालिक अब कैसा लग रहा, दर्द कम हुआ या नहीं"
मारवाड़ी: "अनिताजी आपके हाथों में जरूर कोई जादू है, मेरा तो पुरा दर्द गायब हो गया"
अनिता: "सच में मालिक"
मारवाड़ी: "हा तुम मालिश करती रहो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है"
अनिता: "ठीक है मालिक"
मारवाड़ी अब फिर से अनिता की चूचियां घुरने लगता है, इसबार अनिता मारवाड़ी को उसकी चूचियां घुरते हुए देख लेती है, मारवाड़ी उसकी नज़र दुसरी तरफ करता है कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं. अनिता एक हाथ से उसकी कमिज उपर खिचकर चूचियां छिपाने की नाकाम कोशिश करती है. फिर मारवाड़ी अनिता को बोलता है "अनिताजी रोज काम कर कर के मैं थक जाता हूँ, आपने मेरी पैरों की मालिश की उससे काफी अच्छा महसूस हो रहा है"
अनिता: "मालिक कोई बात नहीं ये तो मेरा फर्ज है"
मारवाड़ी: "अनिताजी आप बुरा ना मानों तो क्या आप मेरा एक और काम कर सकती है"
अनिता: "मालिक आप की सेवा करना यही तो मेरा काम है, आप सिर्फ काम बताइए"
मारवाड़ी: "अनिताजी मेरा बदन बहुत दर्द कर रहा है क्या आप मेरे बदन की मालिश कर सकती है"
अनिता: "इसमें कौनसी बड़ी बात है अभी कर देती हूँ"
मारवाड़ी: "तो मैं ये शर्ट निकाल दूँ"
अनिता: "हा और आपकी लुंगी भी उतार दो वरना गंदी हो जाएगी"
मारवाड़ी झटसे उसका शर्ट और लुंगी उतारकर फिरसे बेडपर उलटा लेट जाता है, अनिता मारवाड़ी को देखकर शरमा जाती है. और उठकर उसके बगल में बैठ जाती है, अब मारवाड़ी को अनिता की चूचियां और भी ज्यादा अच्छी तरह से दिख रही थी. फिर अनिता तेल लेकर मारवाड़ी के पीठ पर मालिश करने को शुरूआत करती है, अनिता के हाथों का मुलायम स्पर्श से मारवाड़ी को बहुत मजा आ रहा था. फिर अनिता मारवाड़ी की पीठ पर १०-१५ मिनट तक मालिश करती है, बाद में अनिता मारवाड़ी को सीधे लेटने को कहती है. मारवाड़ी धीरे धीरे सीधे लेट जाता है, मारवाड़ी जब सीधे लेट जाता है तब मारवाड़ी की अंडरवेअर मे बने हुए तंबू पर अनिता की नजर पड़ती है. अनिता उसके अंडरवेअर में बना तंबू देखकर कर शरम के मारे लाल हो जाती है. अनिता बिना कुछ बोले मारवाड़ी के बालो से भरे छाती पर तेल लगाकर मालिश करने लगते है, अनिता की नजर बार बार मारवाड़ी के लंड के तंबू पर जा रही थी और मारवाड़ी के छाती की मालिश करते करते उसकी छाती के बालो को सहला रही थी. मारवाड़ी को पता था कि अनिता उसके लंड को घुर रही है, मारवाड़ी धीरे से उसका एक हाथ अनिता के कमर पर रख देता है, इस तरह अचानक हाथ कमर पर रखने के वजह से अनिता चौक जाती है और मारवाड़ी की तरफ देखकर बोलती है "क्या हुआ मालिक"
मारवाड़ी: "कुछ नहीं मुझे अच्छा लग रहा है"











राज शर्मा स्टॉरीज पर पढ़ें हजारों नई कहानियाँ

No comments:

Raj-Sharma-Stories.com

Raj-Sharma-Stories.com

erotic_art_and_fentency Headline Animator