FUN-MAZA-MASTI
सविता भाभी--2
गतान्क से आगे,,,,,,,,,,,,,,
मेरे झड़ने के बाद जीजा ने लण्ड चुत में से निकाला और मेरी गाण्ड के नीचे एक तकिया रख कर मेरी टाँगे खुली कर दी | मैं देख तो नहीं सकती थी पर जीजा ने बताया की मेरी गाण्ड किसी फुल की तरह खिली हुई थी | जीजा ने पास में रखी एक तेल की शीशी से कुछ तेल लेकर मेरी गाण्ड पर लगाया तो मैं सिंहर उठी | अब मुझे डर सताने लगा था की जीजा आज लण्ड से मेरी गाण्ड फाड़ देगा | पर जीजा तेल ले लेकर मेरी गाण्ड पर और गाण्ड के अंदर लगाने लगा | मेरे अंदर मस्ती भरती जा रही थी | जीजा की तेल से सनी ऊँगली मुझे मेरी गाण्ड में बहुत मज़ा दे रही थी | जीजा ने तेल लगा लगा कर मेरी गाण्ड पुरी चिकनी कर दी और फिर अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा तो मैंने डर के मारे अपनी गाण्ड टाईट कर ली | पर कितनी देर.... गाण्ड तो आज फटनी ही थी |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
जीजा ने मेरी टाँगे अच्छे से खुली की और मेरी गाण्ड के छेद पर लण्ड रख कर अंदर की तरफ दबाने लगा | मुझे दर्द का एहसास हुआ पर तेल जीजा की मदद कर रहा था और जब जीजा ने थोड़ा जोर लगा कर लण्ड को अंदर सरकाया तो जीजा का मोटा सुपाड़ा मेरी गाण्ड को भेद कर अंदर घुस गया | मेरी चींख निकल गई | दर्द के मारे आँखे फट पड़ी | जीजा ने मेरी हालत की तरफ ध्यान नहीं दिया और थोड़ा सा उचक कर एक और धक्का लगा कर करीब दो इंच लण्ड मेरी गाण्ड में उतार दिया | मैं दुगनी आवाज में चींख पड़ी |
“आह्ह्ह्ह्ह्ह..... जीजा मेरी गाण्ड फट गैईईईईईई.... निकाल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल लो बाहर,....”
पर जीजा तो पक्का खिलाड़ी था | वो तो बस मुझे मजबूती से पकड़ कर लण्ड को ज्यादा से ज्यादा अंदर तक उतारने में लगा था | मैं चींखती रही और जीजा मेरी हालत का मज़ा लेता रहा | हर बार थोड़ा रुक कर जीजा एक धक्का लगाता और लण्ड को और ज्यादा मेरी गाण्ड में उतार देता | गाण्ड में बहुत दर्द हो रहा था | मेरी आँखों से आँसू बह निकले थे | दर्द मुझ से बर्दास्त नहीं हो रहा था | मैं पुरजोर कोशिश कर रही थी जीजा का लण्ड अपनी गाण्ड से बाहर निकालने की पर जीजा ने मुझे ऐसे जकड़ रखा था की मैं हिल भी नहीं सकती थी |
लण्ड आधे से ज्यादा मेरी गाण्ड में चला गया था | जीजा ने थोड़ा तेल मेरी गाण्ड और अपने लण्ड पर टपकाया और फिर जितना लण्ड गाण्ड में घुसा था उसे ही अंदर बाहर करने लगे | हर धक्के के साथ मेरी दर्द भरी चींख निकल रही थी | जीजा अगले पाँच मिनिट तक ऐसे ही मेरी गाण्ड में लण्ड पेलता रहा और हर धक्के के साथ थोड़ा सा लण्ड मेरी गाण्ड में सरकता रहा | मैं दर्द के मारे रो रही थी | जब लण्ड थोड़ा सा रह गया तो जीजा ने एक जोरदार धक्का लगाया और पुरा लण्ड मेरी गाण्ड में फिट कर दिया |
लण्ड पुरा घुसते ही जीजा ने थोड़ा सा तेल और टपकाया और फिर पहले धीरे धीरे और फिर तेज गति से लण्ड को मेरी गाण्ड में अंदर बाहर करने लगा | कुछ देर तो मैं भी दर्द से तडपती रही पर फिर मुझे भी ये अच्छा लगने लगा | जीजा ने मेरे आँसू साफ़ किये और मेरे होंठो पर चुम्बन देने लगा | मेरी चुचियाँ मसलने लगा |
मेरी गाण्ड धीरे धीरे जीजा के लण्ड की अभ्यस्त हो गई और अब लण्ड आराम से अंदर बाहर हो रहा था | जीजा ने अपना लण्ड बाहर निकाला और मुझे घोड़ी बना कर मेरे ऊपर आ गए और पीछे से लण्ड मेरी गाण्ड में उतार दिया | इस आसन में लण्ड आराम से गाण्ड में आ जा रहा था और मुझे इस में मज़ा भी ज्यादा आया | अब जीजा मेरी दोनों चुचियों को पकड़ कर मसल रहे थे और पीछे से लण्ड मेरी गाण्ड में पेल रहे थे | मेरी दर्द भरी चींखे अब मस्ती भरी आहो में बदल गई थी | मेरी चुत से भी मस्ती भरा रस टपक रहा था | जीजा मस्त होकर मेरी गाण्ड मार रहा था और मैं मस्ती में गाण्ड उचका उचका कर जीजा का लण्ड अपनी गाण्ड में ले रही थी | चुत चुदवाने से भी ज्यादा मज़ा महसूस हो रहा था क्यूंकि लण्ड पुरा रगड़ रगड़ कर अंदर आ जा रहा था |
पन्द्रह मिनट की धक्कमपेल के बाद मैं घोड़ी बनी बनी थक गई थी | जीजा ने भी मेरी हालत को समझा और मुझे सीधा लेटा कर एक बार फिर लण्ड अंदर डाल दिया | सीधे लेटने के बाद जीजा मस्ती के मूड में था तो वो लण्ड एक बार मेरी गाण्ड में डालता और फिर निकाल कर मेरी चुत में घुसा देता | इस तरह जीजा मुझे दो दो मज़े एक साथ दे रहा था | कुछ देर की मस्ती के बाद जीजा ने लण्ड मेरी चुत में घुसा दिया और जोर जोर से धक्के मरने लगा | मैं समझ गई थी की जीजा का लण्ड अब रस की बौछार करने वाला है | मैं भी गाण्ड उठा उठा कर लण्ड अंदर लेने लगी |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
करीब बीस पच्चीस धक्को के बाद जीजा के लण्ड से फव्वारा चल पड़ा और मेरी चुत को अपने गर्म गर्म वीर्य से भरने लगा | वीर्य की गर्मी मात्र से ही मेरी चुत झड गई | जीजा ने लण्ड के रस से मेरी चुत को लबालब भर दिया |
झड़ने के बाद जीजा मेरे ऊपर ही लेट गया | कुछ देर लेटने के बाद जीजा फिर से हरकत में आया और मेरी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा | मेरी गाण्ड तो मोटे से लण्ड से पिटाई के बाद सूज कर लाल हो गई थी | जीजा के हाथ लगाने मात्र से ही दर्द हो रहा था पर जीजा बेदर्दी ने फिर से तेल लगा कर लण्ड को एक बार फिर मेरी दुखती गाण्ड में उतार दिया | मैं चींखती रही और जीजा बेदर्दी से मेरी गाण्ड मारता रहा |
सच में मेरे प्यारे जीजा को चींखे निकलवाने में बहुत मज़ा आता है | हम लोग शादी में तीन दिन रुके और जीजा ने भी तीन के तीन दिन मेरी गाण्ड और चुत का भुरता बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी | शादी के व्यस्त कार्यक्रम में भी उसने मेरी चुदाई के लिए समय निकाल ही लिया | जब मैं वापिस जयपुर आई तो गाड़ी की सीट पर भी मैं सही से नहीं बैठ पा रही थी क्यूंकि मेरी गाण्ड दुःख रही थी | घर आकर भी कम से कम तीन चार दिन बाद मेरी गाण्ड का दर्द ठीक हुआ और मैंने सुख की साँस ली |
आज की कहानी मेरी चुत को मिले तीसरे लण्ड की है जो ना चाहते हुए भी मेरी चुत में घुस गया | मैं अपने पति से बहुत प्यार करती थी | पर जब जीजा का लण्ड मिला तो मैं और मेरी चुत दोनों ही जीजा की दीवानी हो गयी और मैंने मेरे पति से बेवफाई कर डाली | अब तो सोते जागते जीजा और जीजा का मस्ताना लण्ड आँखों के सामने घूमता रहता | जीजा भी अक्सर फोन करके अपनी याद दिलवाता रहता था और मौका मिलते ही मेरी चुत की गर्मी को ठंडी करने आ जाता था | अब तो मैंने भी एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका की नौकरी कर ली थी | क्यूंकि घर पर अब समय नहीं कटता था |
ये तब की बात है जब जीजा करीब दो महीने से नहीं आया मेरी चुदाई करने | जीजा को काम के सिलसिले में बाहर जाना पड़ गया था | तभी पतिदेव को भी अपने काम के सिलसिले में टूर पर जाना पड़ गया | अब मैं एक बार फिर अकेली थी घर पर | उस दिन भी मैं हर रोज की तरह स्कूल में गयी थी पर जाते ही ना जाने क्या हुआ और मेरी तबीयत खराब हो गयी और मुझे छुट्टी लेकर वापिस घर आना पड़ा |
स्कूल का ही एक अध्यापक मुझे मेरे घर छोड़ने आया | वो मुझे दवाई दे कर वापिस चला गया | तबीयत खराब होने से मैं अगले दो तीन दिन स्कूल नहीं जा सकी तो वो ही अध्यापक जिसका नाम अजय था मेरे घर मेरा हालचाल पूछने आया |
मैं अजय के बारे में बता दूँ वो एक हट्टा-कट्टा नौजवान था | देखने में भी मस्त | मेरे ही स्कूल की एक दूसरी अध्यापिका के साथ उसका आँख मटक्का चल रहा था | मुझे पता था की वो दोनों चुदाई का भरपूर मज़ा ले चुके थे | एक बार जब मैंने उस अध्यापिका जिसका नाम सुमन था को कुरेदा तो उसने मुझे सब कुछ बता दिया था की कैसे अजय ने उसे चोदा और जब ये भी बताया की अजय का लण्ड बहुत मस्त लंबा और मोटा है तो मेरी तो चुत गीली हो गयी थी सुन कर |
अब पिछले दो महीने से अच्छे से चुदाई नहीं हुई थी तो मेरा मन भी अजय की तरफ झुकने लगा था | चुत की गर्मी बढ़ने लगी थी | जब बुखार हुआ तो दो तीन दिन पलंग पर पड़े पड़े बोर हो गयी | उस दिन जब अजय मेरा हालचाल पूछने आया तो मेरा दिल बेचैन हो उठा उस के कसरती बदन से अपने बदन की मालिश करवाने को | पर शर्म भी तो कोई चीज है यार | मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल सकती थी | बस उसके कुछ करने का इंतज़ार करना पड़ रहा था |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
अजय ने भी ज्यादा देर इंतज़ार नहीं करवाया | आते ही मेरा हालचाल पूछा और फिर पहले मेरे माथे को छू कर देखा फिर मेरा हाथ पकड़ कर बुखार देखा | उसके स्पर्श से मेरे बदन में झुरझुरी सी आई जिसे वो भांप गया था | एक बार जो उसने हाथ पकड़ा तो छोड़ा ही नहीं और मेरे हाथ को अपने हाथ में लिए लिए ही बाते करता रहा | उसका ये सब करना मुझे अच्छा लग रहा था |
उस दिन शुक्रवार का दिन था | बातों बातों में सुमन के साथ अजय के सम्बन्ध की बात चल निकली तो अजय ने जो बोला वो मेरा दिल हिलाने के लिए काफी था |
अजय बोला –“यार सुमन तो मेरे पीछे पड़ी है नहीं तो मैं तो किसी और का दीवाना हूँ |”
“कौन है वो” मैंने उत्सुक होते हुए पूछा...|
“बस है कोई..” अजय ने मेरी उत्सुकता को बढ़ाते हुए कहा |
“मैंने अजय के हाथ को दबाते हुए दुबारा जोर दे कर पूछा-“प्लीज अजय बताओ ना.. कौन है वो”
अजय ने सस्पेंस बढ़ाते हुए कहा –“यार है कोई...पर वो शादीशुदा है तो हिम्मत नहीं होती उसको अपने दिल की बात कहने की..”
शादीशुदा शब्द सुनते है मेरे दिल की धडकन और बढ़ गयी |
“फिर भी बताओ तो कौन है वो” मैंने बेचैनी दिखाते हुए अजय को पूछा तो वो बोला की कल बताऊंगा | मैं आगे कुछ ना कह सकी | अजय थोड़ी देर और मेरे पास बैठा और फिर चला गया |
एक तो अकेलापन और उस पर अजय की बातें... मेरी तो दिल की धड़कने बढ़ गई थी | उस रात मैं सो नहीं सकी | सोचते सोचते ही रात गुजर गई की आखिर अजय की वो शादीशुदा पसंद कौन है... कही वो मैं तो नहीं... और फिर सुबह हो गई यही सब सोचते सोचते | अब तो बस अगले दिन अजय के आने का इंतज़ार था |
अजय स्कूल खत्म होने के बाद सीधा मेरे घर आ गया | मेरी तबीयत आज ठीक थी पर जैसे ही मैंने अजय के अपने घर के बाहर देखा मैं जाकर बेड पर लेट गयी | अजय ने दरवाजा खटखटाया तो मैंने आवाज देकर उसको अंदर बुला लिया | वो सीधा मेरे बेडरूम में आ गया | मेरे सिरहाने के पास बैठ कर उसने मेरे माथे को छुआ और फिर पिछले दिन की तरह ही मेरा हाथ पकड़ कर मेरा कुशलक्षेम पूछने लगा |
मैं तो कब से इस पल का इंतज़ार कर रही थी | बात शुरू होते ही मैंने पिछले दिन वाली बात शुरू कर दी और पूछा की आज बताओ उस शादीशुदा के बारे में | पहले तो अजय ने हंस कर बात टालने की कोशिश की पर जब मैंने जोर देकर पूछा और थोडा नाराज होने का नाटक किया तो अजय ने जो बोला मेरा दिल तो धाड़ धाड़ बजने लगा |
“शालू... तुम बहुत नादान हो... मेरे दिल की बात समझ में नहीं आ रही तुम्हे....”
“क्या...”
“आई लव यु शालू...”
“ये तुम क्या कह रहे हो... मैं शादीशुदा हूँ अजय... मेरी अपनी जिंदगी है...”
“शालू तुम जो भी कहो पर जो सच था मैंने तुम्हे बता दिया है अब फैसला तुम्हारा है...”
मैं अब उठ कर बैठ गई थी |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
“पर मैं....” इस से आगे मेरे मुँह से आवाज नहीं निकल पाई क्यूंकि अजय ने मेरे होंठो को अपने होंठो में जकड लिया था | मैंने हल्का सा विरोध किया पर अजय तब तक मुझे अपनी मजबूत बाहों में जकड चूका था | इन बाहों में आने के लिए तो मैं पहले से ही तड़प रही थी |
मैं तो जैसे खो गई अजय की बाहों में | उसके इस चुम्बन में मेरे तन मन दोनों को हिला दिया था | मेरे अपने हाथ भी अपने आप अजय के बालों को सहलाने लगे | अजय समझ चूका था की अब मैं उसके बस में हूँ | उसके हाथ भी अब हरकत में आने लगे थे और अब मैं उसके हाथ को अपनी चुचियों पर महसूस कर रही थी | उसने मेरी चुचियों को अपने हाथ में लेकर दबाना और मसलना शुरू कर दिया था |
मेरी आँखें भारी होने लगी थी | चुत से पानी निकलने लगा था | पैंटी गीली हो गई थी | अजय के हाथ अब मेरे ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश कर रहे थे | और एक दो हुक खोलने में तो कामयाब भी हो गए थे | तभी मैंने अजय को पीछे धकेल दिया और अपनी साँसों को दुरुस्त करने की कोशिश की | मेरी साँसे बहुत तेज चल रही थी |
अजय ने मुझे दुबारा अपनी बाहों में भरना चाहा तो मैंने उसको रोक दिया |
“नहीं अजय... ये सब ठीक नहीं है... मैं शादीशुदा हूँ और ...”
मेरी बात एक बार फिर से अधूरी रह गयी और अजय ने दुबारा थोडा जबरदस्ती करते हुए अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए | अगले ही पल अजय के हाथ मेरे बदन के कपडे कम करने लगे | पहले ब्लाउज, फिर ब्रा, |
मेरी मस्त चुचियाँ नंगी देख कर तो अजय बेकाबू हो गया और मेरी चुचियों के चूचक मुँह में लेकर चूसने लगा | वो बीच बीच में चूचक को दांतों से हल्का हल्का काट रहा था | मेरी चुचियों के चूचक तन कर खड़े हो गए थे और अजय को उनको दांतों से काटना मेरे बदन की गर्मी को और बढ़ा रहा था |
बदन मस्ती से भरता जा रहा था और मेरा हाथ भी अब अपने मतलब की चीज खोज रहा था और मैंने अजय की पेंट खोल कर उसके अंदर बैठा मस्त कलंदर अपने हाथ में पकड़ लिया था | करीब 8-9 इंच का मोटा सा लण्ड हाथ में आते ही मेरे पुरे शरीर में करंट सा दौड गया | मेरी समझ में आ रहा था की आज मेरी चुत बहुत दिनों के बाद एक मस्त चुदाई का मज़ा लेने वाली है |
अजय कुछ देर के लिए रुका और इस बीच हम दोनों ने जल्दी से एक दूसरे को नंगा कर दिया | अजय मेरा नंगा बदन देख कर मदहोश हो चूका था और लगभग यही हाल मेरा भी था अजय का मस्त लण्ड देख कर |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
अजय ने मुझे बेड पर लेटाया और मेरे बदन को चूमने लगा | उसने मेरे बदन के हर अंग को अपनी जीभ से चाटा और चूमा | फिर वो मेरी जांघों के बीच में खो गया और मैंने उसकी जीभ अपनी चुत के दाने पर महसूस की | यही वो पल था जब मैं अपनी उतेजना को काबू में नहीं रख पाई और मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया | अजय की जीभ मेरे सारे रस को चाट गई |
अजय उठ कर मेरे मुँह की तरफ आया तो मैं समझ गयी की अजय क्या चाहता है | अजय ने अपना लण्ड मेरे होंठो से लगाया तो मैंने भी उसको अपने मुँह में लेने में देर नहीं की | अगले करीब पांच मिनट तक मैंने अजय के लण्ड को लोलीपॉप की तरह मस्त होकर चूसा |
अब मेरी चुत लण्ड लेने के लिए बेचैन हो उठी थी | मैंने लण्ड मुँह में से निकाला तो अजय जैसे समझ गया की उसे आगे क्या करना है | अजय ने अब मेरी टाँगे ऊपर की और मेरी चुत के मुँह पर अपना मोटा और गर्म गर्म सुपाड़ा रख दिया | चुत पूरी गीली हो चुकी थी तो जैसे ही अजय ने थोडा सा दबाव दिया तो लण्ड चुत में सरकता चला गया | अजय का लण्ड कमान की तरह मुड़ा हुआ था इसीलिए वो चुत की दिवार को पूरा रगड़ता हुआ अंदर जा रहा था |
लण्ड पूरा अंदर जाते ही अजय ने जबरदस्त धक्को के साथ मेरी चुत चोदनी शुरू कर दी | बहुत मस्त और तेज तेज धक्के लगा रहा था अजय | मेरी सिस्कारियां और आहें गूंजने लगी थी कमरे में |
“आह्ह्ह... चोद दो मुझे... फाड़ दो मेरी...ओह्ह्ह जोर से चोद डालो...” मैं अब चिल्ला चिल्ला कर अपनी गांड उठा उठा कर अजय का लण्ड चुत में ले रही थी | मैं तो अजय का लण्ड चुत में लेकर मस्त हो गई थी | अजय भी पूरा मुस्टंड था खूब हुमच्च हुमच्च कर चोद रहा था मुझे | वो पूरा लण्ड अंदर डाल डाल कर मेरी चुदाई कर रहा था | चुत से पानी की नदी सी बह निकली थी | खूब पानी छोड़ रही थी मेरी चुत |
कुछ देर की चुदाई के बाद अजय ने मुझे कुतिया बनाया और पीछे से मेरी चुत में लण्ड घुसा दिया | मैं सीत्कार उठी | लण्ड पूरी चुत को रगड़ता हुआ अंदर तक समां गया था | अब अजय ने एक हाथ से मेरी चूची को और दूसरे हाथ से मेरी कमर को पकड़ा और पूरी गति से, पुरे जोश के साथ मेरी चुदाई करने लगा | अब तक मैं दो बार झड चुकी थी पर अजय था की अभी तक लोहे का लण्ड पेल रहा था मेरी चुत में | गर्म गर्म लोहे की तरह अकडा हुआ लण्ड भरपूर मज़ा दे रहा था |
करीब पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद अजय का बदन अकडा और फिर अजय के लण्ड से गर्म गर्म वीर्य का फव्वारा जो चला तो मेरी चुत लबालब भर गयी | अजय मेरे ऊपर ही लेट गया | अजय का ऐसे लेटना मुझे बहुत अच्छा लगा |
करीब दस मिनट अजय उठा तो मैंने उसका लण्ड और अपनी चुत पास पड़े मेरे पेटीकोट से साफ़ की | अजय ने मुझे फिर से बाहों में भर लिया और मेरे होंठो को चूसने लगा | बुखार के कारण मुझे कमजोरी महसूस हो रही थी पर अजय की चुदाई ने शरीर में तरावट सी ला दी थी |
कुछ देर के बाद मेरा दिल फिर से चुदवाने को हुआ तो मैं अजय के लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी | अजय भी मेरे बालो को सहलाने लगा | अजय का लण्ड फिर से खड़ा होने लगा था तो मैंने उसको अपने होंठो में दबा लिया | और फिर पूरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी | कुछ देर चूसने के बाद अजय का लण्ड अकड कर फिर से सर तान कर खड़ा हो गया | अब मैंने अजय को उठने का मौका नहीं दिया और खुद ही उठ कर उसके लण्ड को अपनी चुत पर सेट करके बैठ गई | लण्ड चुत में ऐसे घुस गया जैसे खरबूजे में छुरी घुस जाती है |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
लण्ड के अंदर जाते ही मैं गांड उठा उठा कर लण्ड पर मारने लगी | अजय भी नीचे से हर धक्के का जवाब दे रहा था | सच में बहुत मज़ा आ रहा था | इतना मज़ा की लिख कर बताना मुश्किल है | पांच मिनट के बाद मेरी चुत का बाँध टूट गया और मैं झड गई | झड़ने के बाद मैं थोड़ी सुस्त हुई तो अजय ने मुझे अपने नीचे लिया और फिर से एक जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी | फिर तो पुरे आधे घंटे तक अजय मुझे चोदता रहा और मैं चुदती रही | मुझे तो ये भी नहीं पता की मैं कितनी बार झड़ी | आधे घंटे बाद अजय ने एक बार फिर से मेरी चुत अपने गर्म गर्म वीर्य से भर दी |
दो बार चुदाई के बाद हम दोनों थक गए थे | कब नींद आई पता ही नहीं लगा | करीब दो अढ़ाई घंटे के बाद आँख खुली तो अजय अब भी गहरी नींद सो रहा था |
मैंने उठ कर चाय बनाई और फिर अजय को उठाया | चाय पीने के बाद अजय जाने लगा तो मेरा दिल बेचैन होने लगा | मेरे पति रात को नहीं आने वाले थे तो मैंने अजय को रात को रुकने के लिए कहा | अजय तो जैसे यही सुनने को बैठा था | वो रुक गया और फिर तो उस रात और अगले दिन और फिर अगली रात जो चुदाई हुई है मेरी चुत की कि चुत निहाल हो गई |
अजय मेरा दीवाना हो गया था और फिर अगले छ: सात महीने तक जब तक मैं उस स्कूल में अध्यापिका रही अजय ने मेरी भरपूर चुदाई की | आज भी जब चुत में चुदाई का कीड़ा कुलबुलाता है तो अजय की भी याद आती है |
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सविता भाभी--2
गतान्क से आगे,,,,,,,,,,,,,,
मेरे झड़ने के बाद जीजा ने लण्ड चुत में से निकाला और मेरी गाण्ड के नीचे एक तकिया रख कर मेरी टाँगे खुली कर दी | मैं देख तो नहीं सकती थी पर जीजा ने बताया की मेरी गाण्ड किसी फुल की तरह खिली हुई थी | जीजा ने पास में रखी एक तेल की शीशी से कुछ तेल लेकर मेरी गाण्ड पर लगाया तो मैं सिंहर उठी | अब मुझे डर सताने लगा था की जीजा आज लण्ड से मेरी गाण्ड फाड़ देगा | पर जीजा तेल ले लेकर मेरी गाण्ड पर और गाण्ड के अंदर लगाने लगा | मेरे अंदर मस्ती भरती जा रही थी | जीजा की तेल से सनी ऊँगली मुझे मेरी गाण्ड में बहुत मज़ा दे रही थी | जीजा ने तेल लगा लगा कर मेरी गाण्ड पुरी चिकनी कर दी और फिर अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा तो मैंने डर के मारे अपनी गाण्ड टाईट कर ली | पर कितनी देर.... गाण्ड तो आज फटनी ही थी |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
जीजा ने मेरी टाँगे अच्छे से खुली की और मेरी गाण्ड के छेद पर लण्ड रख कर अंदर की तरफ दबाने लगा | मुझे दर्द का एहसास हुआ पर तेल जीजा की मदद कर रहा था और जब जीजा ने थोड़ा जोर लगा कर लण्ड को अंदर सरकाया तो जीजा का मोटा सुपाड़ा मेरी गाण्ड को भेद कर अंदर घुस गया | मेरी चींख निकल गई | दर्द के मारे आँखे फट पड़ी | जीजा ने मेरी हालत की तरफ ध्यान नहीं दिया और थोड़ा सा उचक कर एक और धक्का लगा कर करीब दो इंच लण्ड मेरी गाण्ड में उतार दिया | मैं दुगनी आवाज में चींख पड़ी |
“आह्ह्ह्ह्ह्ह..... जीजा मेरी गाण्ड फट गैईईईईईई.... निकाल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल लो बाहर,....”
पर जीजा तो पक्का खिलाड़ी था | वो तो बस मुझे मजबूती से पकड़ कर लण्ड को ज्यादा से ज्यादा अंदर तक उतारने में लगा था | मैं चींखती रही और जीजा मेरी हालत का मज़ा लेता रहा | हर बार थोड़ा रुक कर जीजा एक धक्का लगाता और लण्ड को और ज्यादा मेरी गाण्ड में उतार देता | गाण्ड में बहुत दर्द हो रहा था | मेरी आँखों से आँसू बह निकले थे | दर्द मुझ से बर्दास्त नहीं हो रहा था | मैं पुरजोर कोशिश कर रही थी जीजा का लण्ड अपनी गाण्ड से बाहर निकालने की पर जीजा ने मुझे ऐसे जकड़ रखा था की मैं हिल भी नहीं सकती थी |
लण्ड आधे से ज्यादा मेरी गाण्ड में चला गया था | जीजा ने थोड़ा तेल मेरी गाण्ड और अपने लण्ड पर टपकाया और फिर जितना लण्ड गाण्ड में घुसा था उसे ही अंदर बाहर करने लगे | हर धक्के के साथ मेरी दर्द भरी चींख निकल रही थी | जीजा अगले पाँच मिनिट तक ऐसे ही मेरी गाण्ड में लण्ड पेलता रहा और हर धक्के के साथ थोड़ा सा लण्ड मेरी गाण्ड में सरकता रहा | मैं दर्द के मारे रो रही थी | जब लण्ड थोड़ा सा रह गया तो जीजा ने एक जोरदार धक्का लगाया और पुरा लण्ड मेरी गाण्ड में फिट कर दिया |
लण्ड पुरा घुसते ही जीजा ने थोड़ा सा तेल और टपकाया और फिर पहले धीरे धीरे और फिर तेज गति से लण्ड को मेरी गाण्ड में अंदर बाहर करने लगा | कुछ देर तो मैं भी दर्द से तडपती रही पर फिर मुझे भी ये अच्छा लगने लगा | जीजा ने मेरे आँसू साफ़ किये और मेरे होंठो पर चुम्बन देने लगा | मेरी चुचियाँ मसलने लगा |
मेरी गाण्ड धीरे धीरे जीजा के लण्ड की अभ्यस्त हो गई और अब लण्ड आराम से अंदर बाहर हो रहा था | जीजा ने अपना लण्ड बाहर निकाला और मुझे घोड़ी बना कर मेरे ऊपर आ गए और पीछे से लण्ड मेरी गाण्ड में उतार दिया | इस आसन में लण्ड आराम से गाण्ड में आ जा रहा था और मुझे इस में मज़ा भी ज्यादा आया | अब जीजा मेरी दोनों चुचियों को पकड़ कर मसल रहे थे और पीछे से लण्ड मेरी गाण्ड में पेल रहे थे | मेरी दर्द भरी चींखे अब मस्ती भरी आहो में बदल गई थी | मेरी चुत से भी मस्ती भरा रस टपक रहा था | जीजा मस्त होकर मेरी गाण्ड मार रहा था और मैं मस्ती में गाण्ड उचका उचका कर जीजा का लण्ड अपनी गाण्ड में ले रही थी | चुत चुदवाने से भी ज्यादा मज़ा महसूस हो रहा था क्यूंकि लण्ड पुरा रगड़ रगड़ कर अंदर आ जा रहा था |
पन्द्रह मिनट की धक्कमपेल के बाद मैं घोड़ी बनी बनी थक गई थी | जीजा ने भी मेरी हालत को समझा और मुझे सीधा लेटा कर एक बार फिर लण्ड अंदर डाल दिया | सीधे लेटने के बाद जीजा मस्ती के मूड में था तो वो लण्ड एक बार मेरी गाण्ड में डालता और फिर निकाल कर मेरी चुत में घुसा देता | इस तरह जीजा मुझे दो दो मज़े एक साथ दे रहा था | कुछ देर की मस्ती के बाद जीजा ने लण्ड मेरी चुत में घुसा दिया और जोर जोर से धक्के मरने लगा | मैं समझ गई थी की जीजा का लण्ड अब रस की बौछार करने वाला है | मैं भी गाण्ड उठा उठा कर लण्ड अंदर लेने लगी |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
करीब बीस पच्चीस धक्को के बाद जीजा के लण्ड से फव्वारा चल पड़ा और मेरी चुत को अपने गर्म गर्म वीर्य से भरने लगा | वीर्य की गर्मी मात्र से ही मेरी चुत झड गई | जीजा ने लण्ड के रस से मेरी चुत को लबालब भर दिया |
झड़ने के बाद जीजा मेरे ऊपर ही लेट गया | कुछ देर लेटने के बाद जीजा फिर से हरकत में आया और मेरी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा | मेरी गाण्ड तो मोटे से लण्ड से पिटाई के बाद सूज कर लाल हो गई थी | जीजा के हाथ लगाने मात्र से ही दर्द हो रहा था पर जीजा बेदर्दी ने फिर से तेल लगा कर लण्ड को एक बार फिर मेरी दुखती गाण्ड में उतार दिया | मैं चींखती रही और जीजा बेदर्दी से मेरी गाण्ड मारता रहा |
सच में मेरे प्यारे जीजा को चींखे निकलवाने में बहुत मज़ा आता है | हम लोग शादी में तीन दिन रुके और जीजा ने भी तीन के तीन दिन मेरी गाण्ड और चुत का भुरता बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी | शादी के व्यस्त कार्यक्रम में भी उसने मेरी चुदाई के लिए समय निकाल ही लिया | जब मैं वापिस जयपुर आई तो गाड़ी की सीट पर भी मैं सही से नहीं बैठ पा रही थी क्यूंकि मेरी गाण्ड दुःख रही थी | घर आकर भी कम से कम तीन चार दिन बाद मेरी गाण्ड का दर्द ठीक हुआ और मैंने सुख की साँस ली |
आज की कहानी मेरी चुत को मिले तीसरे लण्ड की है जो ना चाहते हुए भी मेरी चुत में घुस गया | मैं अपने पति से बहुत प्यार करती थी | पर जब जीजा का लण्ड मिला तो मैं और मेरी चुत दोनों ही जीजा की दीवानी हो गयी और मैंने मेरे पति से बेवफाई कर डाली | अब तो सोते जागते जीजा और जीजा का मस्ताना लण्ड आँखों के सामने घूमता रहता | जीजा भी अक्सर फोन करके अपनी याद दिलवाता रहता था और मौका मिलते ही मेरी चुत की गर्मी को ठंडी करने आ जाता था | अब तो मैंने भी एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका की नौकरी कर ली थी | क्यूंकि घर पर अब समय नहीं कटता था |
ये तब की बात है जब जीजा करीब दो महीने से नहीं आया मेरी चुदाई करने | जीजा को काम के सिलसिले में बाहर जाना पड़ गया था | तभी पतिदेव को भी अपने काम के सिलसिले में टूर पर जाना पड़ गया | अब मैं एक बार फिर अकेली थी घर पर | उस दिन भी मैं हर रोज की तरह स्कूल में गयी थी पर जाते ही ना जाने क्या हुआ और मेरी तबीयत खराब हो गयी और मुझे छुट्टी लेकर वापिस घर आना पड़ा |
स्कूल का ही एक अध्यापक मुझे मेरे घर छोड़ने आया | वो मुझे दवाई दे कर वापिस चला गया | तबीयत खराब होने से मैं अगले दो तीन दिन स्कूल नहीं जा सकी तो वो ही अध्यापक जिसका नाम अजय था मेरे घर मेरा हालचाल पूछने आया |
मैं अजय के बारे में बता दूँ वो एक हट्टा-कट्टा नौजवान था | देखने में भी मस्त | मेरे ही स्कूल की एक दूसरी अध्यापिका के साथ उसका आँख मटक्का चल रहा था | मुझे पता था की वो दोनों चुदाई का भरपूर मज़ा ले चुके थे | एक बार जब मैंने उस अध्यापिका जिसका नाम सुमन था को कुरेदा तो उसने मुझे सब कुछ बता दिया था की कैसे अजय ने उसे चोदा और जब ये भी बताया की अजय का लण्ड बहुत मस्त लंबा और मोटा है तो मेरी तो चुत गीली हो गयी थी सुन कर |
अब पिछले दो महीने से अच्छे से चुदाई नहीं हुई थी तो मेरा मन भी अजय की तरफ झुकने लगा था | चुत की गर्मी बढ़ने लगी थी | जब बुखार हुआ तो दो तीन दिन पलंग पर पड़े पड़े बोर हो गयी | उस दिन जब अजय मेरा हालचाल पूछने आया तो मेरा दिल बेचैन हो उठा उस के कसरती बदन से अपने बदन की मालिश करवाने को | पर शर्म भी तो कोई चीज है यार | मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल सकती थी | बस उसके कुछ करने का इंतज़ार करना पड़ रहा था |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
अजय ने भी ज्यादा देर इंतज़ार नहीं करवाया | आते ही मेरा हालचाल पूछा और फिर पहले मेरे माथे को छू कर देखा फिर मेरा हाथ पकड़ कर बुखार देखा | उसके स्पर्श से मेरे बदन में झुरझुरी सी आई जिसे वो भांप गया था | एक बार जो उसने हाथ पकड़ा तो छोड़ा ही नहीं और मेरे हाथ को अपने हाथ में लिए लिए ही बाते करता रहा | उसका ये सब करना मुझे अच्छा लग रहा था |
उस दिन शुक्रवार का दिन था | बातों बातों में सुमन के साथ अजय के सम्बन्ध की बात चल निकली तो अजय ने जो बोला वो मेरा दिल हिलाने के लिए काफी था |
अजय बोला –“यार सुमन तो मेरे पीछे पड़ी है नहीं तो मैं तो किसी और का दीवाना हूँ |”
“कौन है वो” मैंने उत्सुक होते हुए पूछा...|
“बस है कोई..” अजय ने मेरी उत्सुकता को बढ़ाते हुए कहा |
“मैंने अजय के हाथ को दबाते हुए दुबारा जोर दे कर पूछा-“प्लीज अजय बताओ ना.. कौन है वो”
अजय ने सस्पेंस बढ़ाते हुए कहा –“यार है कोई...पर वो शादीशुदा है तो हिम्मत नहीं होती उसको अपने दिल की बात कहने की..”
शादीशुदा शब्द सुनते है मेरे दिल की धडकन और बढ़ गयी |
“फिर भी बताओ तो कौन है वो” मैंने बेचैनी दिखाते हुए अजय को पूछा तो वो बोला की कल बताऊंगा | मैं आगे कुछ ना कह सकी | अजय थोड़ी देर और मेरे पास बैठा और फिर चला गया |
एक तो अकेलापन और उस पर अजय की बातें... मेरी तो दिल की धड़कने बढ़ गई थी | उस रात मैं सो नहीं सकी | सोचते सोचते ही रात गुजर गई की आखिर अजय की वो शादीशुदा पसंद कौन है... कही वो मैं तो नहीं... और फिर सुबह हो गई यही सब सोचते सोचते | अब तो बस अगले दिन अजय के आने का इंतज़ार था |
अजय स्कूल खत्म होने के बाद सीधा मेरे घर आ गया | मेरी तबीयत आज ठीक थी पर जैसे ही मैंने अजय के अपने घर के बाहर देखा मैं जाकर बेड पर लेट गयी | अजय ने दरवाजा खटखटाया तो मैंने आवाज देकर उसको अंदर बुला लिया | वो सीधा मेरे बेडरूम में आ गया | मेरे सिरहाने के पास बैठ कर उसने मेरे माथे को छुआ और फिर पिछले दिन की तरह ही मेरा हाथ पकड़ कर मेरा कुशलक्षेम पूछने लगा |
मैं तो कब से इस पल का इंतज़ार कर रही थी | बात शुरू होते ही मैंने पिछले दिन वाली बात शुरू कर दी और पूछा की आज बताओ उस शादीशुदा के बारे में | पहले तो अजय ने हंस कर बात टालने की कोशिश की पर जब मैंने जोर देकर पूछा और थोडा नाराज होने का नाटक किया तो अजय ने जो बोला मेरा दिल तो धाड़ धाड़ बजने लगा |
“शालू... तुम बहुत नादान हो... मेरे दिल की बात समझ में नहीं आ रही तुम्हे....”
“क्या...”
“आई लव यु शालू...”
“ये तुम क्या कह रहे हो... मैं शादीशुदा हूँ अजय... मेरी अपनी जिंदगी है...”
“शालू तुम जो भी कहो पर जो सच था मैंने तुम्हे बता दिया है अब फैसला तुम्हारा है...”
मैं अब उठ कर बैठ गई थी |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
“पर मैं....” इस से आगे मेरे मुँह से आवाज नहीं निकल पाई क्यूंकि अजय ने मेरे होंठो को अपने होंठो में जकड लिया था | मैंने हल्का सा विरोध किया पर अजय तब तक मुझे अपनी मजबूत बाहों में जकड चूका था | इन बाहों में आने के लिए तो मैं पहले से ही तड़प रही थी |
मैं तो जैसे खो गई अजय की बाहों में | उसके इस चुम्बन में मेरे तन मन दोनों को हिला दिया था | मेरे अपने हाथ भी अपने आप अजय के बालों को सहलाने लगे | अजय समझ चूका था की अब मैं उसके बस में हूँ | उसके हाथ भी अब हरकत में आने लगे थे और अब मैं उसके हाथ को अपनी चुचियों पर महसूस कर रही थी | उसने मेरी चुचियों को अपने हाथ में लेकर दबाना और मसलना शुरू कर दिया था |
मेरी आँखें भारी होने लगी थी | चुत से पानी निकलने लगा था | पैंटी गीली हो गई थी | अजय के हाथ अब मेरे ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश कर रहे थे | और एक दो हुक खोलने में तो कामयाब भी हो गए थे | तभी मैंने अजय को पीछे धकेल दिया और अपनी साँसों को दुरुस्त करने की कोशिश की | मेरी साँसे बहुत तेज चल रही थी |
अजय ने मुझे दुबारा अपनी बाहों में भरना चाहा तो मैंने उसको रोक दिया |
“नहीं अजय... ये सब ठीक नहीं है... मैं शादीशुदा हूँ और ...”
मेरी बात एक बार फिर से अधूरी रह गयी और अजय ने दुबारा थोडा जबरदस्ती करते हुए अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए | अगले ही पल अजय के हाथ मेरे बदन के कपडे कम करने लगे | पहले ब्लाउज, फिर ब्रा, |
मेरी मस्त चुचियाँ नंगी देख कर तो अजय बेकाबू हो गया और मेरी चुचियों के चूचक मुँह में लेकर चूसने लगा | वो बीच बीच में चूचक को दांतों से हल्का हल्का काट रहा था | मेरी चुचियों के चूचक तन कर खड़े हो गए थे और अजय को उनको दांतों से काटना मेरे बदन की गर्मी को और बढ़ा रहा था |
बदन मस्ती से भरता जा रहा था और मेरा हाथ भी अब अपने मतलब की चीज खोज रहा था और मैंने अजय की पेंट खोल कर उसके अंदर बैठा मस्त कलंदर अपने हाथ में पकड़ लिया था | करीब 8-9 इंच का मोटा सा लण्ड हाथ में आते ही मेरे पुरे शरीर में करंट सा दौड गया | मेरी समझ में आ रहा था की आज मेरी चुत बहुत दिनों के बाद एक मस्त चुदाई का मज़ा लेने वाली है |
अजय कुछ देर के लिए रुका और इस बीच हम दोनों ने जल्दी से एक दूसरे को नंगा कर दिया | अजय मेरा नंगा बदन देख कर मदहोश हो चूका था और लगभग यही हाल मेरा भी था अजय का मस्त लण्ड देख कर |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
अजय ने मुझे बेड पर लेटाया और मेरे बदन को चूमने लगा | उसने मेरे बदन के हर अंग को अपनी जीभ से चाटा और चूमा | फिर वो मेरी जांघों के बीच में खो गया और मैंने उसकी जीभ अपनी चुत के दाने पर महसूस की | यही वो पल था जब मैं अपनी उतेजना को काबू में नहीं रख पाई और मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया | अजय की जीभ मेरे सारे रस को चाट गई |
अजय उठ कर मेरे मुँह की तरफ आया तो मैं समझ गयी की अजय क्या चाहता है | अजय ने अपना लण्ड मेरे होंठो से लगाया तो मैंने भी उसको अपने मुँह में लेने में देर नहीं की | अगले करीब पांच मिनट तक मैंने अजय के लण्ड को लोलीपॉप की तरह मस्त होकर चूसा |
अब मेरी चुत लण्ड लेने के लिए बेचैन हो उठी थी | मैंने लण्ड मुँह में से निकाला तो अजय जैसे समझ गया की उसे आगे क्या करना है | अजय ने अब मेरी टाँगे ऊपर की और मेरी चुत के मुँह पर अपना मोटा और गर्म गर्म सुपाड़ा रख दिया | चुत पूरी गीली हो चुकी थी तो जैसे ही अजय ने थोडा सा दबाव दिया तो लण्ड चुत में सरकता चला गया | अजय का लण्ड कमान की तरह मुड़ा हुआ था इसीलिए वो चुत की दिवार को पूरा रगड़ता हुआ अंदर जा रहा था |
लण्ड पूरा अंदर जाते ही अजय ने जबरदस्त धक्को के साथ मेरी चुत चोदनी शुरू कर दी | बहुत मस्त और तेज तेज धक्के लगा रहा था अजय | मेरी सिस्कारियां और आहें गूंजने लगी थी कमरे में |
“आह्ह्ह... चोद दो मुझे... फाड़ दो मेरी...ओह्ह्ह जोर से चोद डालो...” मैं अब चिल्ला चिल्ला कर अपनी गांड उठा उठा कर अजय का लण्ड चुत में ले रही थी | मैं तो अजय का लण्ड चुत में लेकर मस्त हो गई थी | अजय भी पूरा मुस्टंड था खूब हुमच्च हुमच्च कर चोद रहा था मुझे | वो पूरा लण्ड अंदर डाल डाल कर मेरी चुदाई कर रहा था | चुत से पानी की नदी सी बह निकली थी | खूब पानी छोड़ रही थी मेरी चुत |
कुछ देर की चुदाई के बाद अजय ने मुझे कुतिया बनाया और पीछे से मेरी चुत में लण्ड घुसा दिया | मैं सीत्कार उठी | लण्ड पूरी चुत को रगड़ता हुआ अंदर तक समां गया था | अब अजय ने एक हाथ से मेरी चूची को और दूसरे हाथ से मेरी कमर को पकड़ा और पूरी गति से, पुरे जोश के साथ मेरी चुदाई करने लगा | अब तक मैं दो बार झड चुकी थी पर अजय था की अभी तक लोहे का लण्ड पेल रहा था मेरी चुत में | गर्म गर्म लोहे की तरह अकडा हुआ लण्ड भरपूर मज़ा दे रहा था |
करीब पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद अजय का बदन अकडा और फिर अजय के लण्ड से गर्म गर्म वीर्य का फव्वारा जो चला तो मेरी चुत लबालब भर गयी | अजय मेरे ऊपर ही लेट गया | अजय का ऐसे लेटना मुझे बहुत अच्छा लगा |
करीब दस मिनट अजय उठा तो मैंने उसका लण्ड और अपनी चुत पास पड़े मेरे पेटीकोट से साफ़ की | अजय ने मुझे फिर से बाहों में भर लिया और मेरे होंठो को चूसने लगा | बुखार के कारण मुझे कमजोरी महसूस हो रही थी पर अजय की चुदाई ने शरीर में तरावट सी ला दी थी |
कुछ देर के बाद मेरा दिल फिर से चुदवाने को हुआ तो मैं अजय के लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी | अजय भी मेरे बालो को सहलाने लगा | अजय का लण्ड फिर से खड़ा होने लगा था तो मैंने उसको अपने होंठो में दबा लिया | और फिर पूरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी | कुछ देर चूसने के बाद अजय का लण्ड अकड कर फिर से सर तान कर खड़ा हो गया | अब मैंने अजय को उठने का मौका नहीं दिया और खुद ही उठ कर उसके लण्ड को अपनी चुत पर सेट करके बैठ गई | लण्ड चुत में ऐसे घुस गया जैसे खरबूजे में छुरी घुस जाती है |”यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
लण्ड के अंदर जाते ही मैं गांड उठा उठा कर लण्ड पर मारने लगी | अजय भी नीचे से हर धक्के का जवाब दे रहा था | सच में बहुत मज़ा आ रहा था | इतना मज़ा की लिख कर बताना मुश्किल है | पांच मिनट के बाद मेरी चुत का बाँध टूट गया और मैं झड गई | झड़ने के बाद मैं थोड़ी सुस्त हुई तो अजय ने मुझे अपने नीचे लिया और फिर से एक जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी | फिर तो पुरे आधे घंटे तक अजय मुझे चोदता रहा और मैं चुदती रही | मुझे तो ये भी नहीं पता की मैं कितनी बार झड़ी | आधे घंटे बाद अजय ने एक बार फिर से मेरी चुत अपने गर्म गर्म वीर्य से भर दी |
दो बार चुदाई के बाद हम दोनों थक गए थे | कब नींद आई पता ही नहीं लगा | करीब दो अढ़ाई घंटे के बाद आँख खुली तो अजय अब भी गहरी नींद सो रहा था |
मैंने उठ कर चाय बनाई और फिर अजय को उठाया | चाय पीने के बाद अजय जाने लगा तो मेरा दिल बेचैन होने लगा | मेरे पति रात को नहीं आने वाले थे तो मैंने अजय को रात को रुकने के लिए कहा | अजय तो जैसे यही सुनने को बैठा था | वो रुक गया और फिर तो उस रात और अगले दिन और फिर अगली रात जो चुदाई हुई है मेरी चुत की कि चुत निहाल हो गई |
अजय मेरा दीवाना हो गया था और फिर अगले छ: सात महीने तक जब तक मैं उस स्कूल में अध्यापिका रही अजय ने मेरी भरपूर चुदाई की | आज भी जब चुत में चुदाई का कीड़ा कुलबुलाता है तो अजय की भी याद आती है |
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