Saturday, November 30, 2013

FUN-MAZA-MASTI रोहन और रीमा--11

FUN-MAZA-MASTI
 रोहन और रीमा--11
 अरे यार अनीता तुम भी कमाल हो ........................अरे यार तुम कोन से ज़माने में जी रही हो ?
मेरी जान आज की दुनिया में अमीर गरीब ये सब कुछ नहीं है ....वो सब बीते ज़माने की बाते है
और वैसे भी मेरे घर वाले इन सब बातो को नहीं मानते मेरी पसंद ही मेरे घर वालो की पसंद है
और मुझे अपनी पसंद पर नाज़ है .... कहते हुए मयंक ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया .....

न जाने क्यों मुझे उस वक़्त मयंक का इस तरह से मुझे अपनी बाहों में भरना बिलकुल भी बुरा नहीं लग रहा था ,,,,
में भी मयंक के सीने में अपने मुंह को छुपा कर कहने लगी .....

मयंक में सच में दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हूँ जो मुझे तुम जैसे पवित्र विचारो वाला जीवन साथी
मिला है ..... तुम्हे पा कर मेने दुनिया की हर ख़ुशी हासिल कर ली है .....

में मयंक के गले लग कर इतनी भावुक हो गयी थी की मुझे इस बात का भी होश नहीं रहा की मयंक के हाथ
मेरे जिस्म के कोन-२ हिस्से पर रेंग रहे है इसका एहसास तो मुझे तब हुआ जब मयंक ने मेरे नितम्बो
को अपने हाथो से कस कर भींचा और में हडबडाते हुए अपने ख्वाबो की दुनिया से बाहर आई ...
हालाँकि मेने मयंक से कुछ कहा नहीं लेकिन मेने खुद को उसकी बाँहों की गिरफ्त से आज़ाद करवा लिया और
उस से कुछ दूरी बना कर खड़ी हो गयी , मयंक को भी शायद इस बात का एहसास हो चूका था की मुझे उसकी
हरकत ने चेता दिया है खैर मयंक ने मुझे फिर से छूने की कोशिश नहीं की और वो कुछ देर चुप रहने के बाद बोला
''चलो अनीता इसी ख़ुशी में एक एक गिलास शेम्पन का और पीते है '' ,
उसकी बात सुन कर मेने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा ...
''नहीं मयंक मेरे से ये और नहीं पी जाएगी इसका स्वाद बहुत बुरा है प्लीज मुझे पीने के लिए नहीं कहो''
मेरी बात सुन कर मयंक ने मायूसी वाला चेहरा बना लिया और बोला ...
तुम्हे शायद पता नहीं कि ये शेम्पेन मेने स्पेशली तुम्हारे लिए सिंगापूर से मंगवाई थी .....
खैर जाने दो जब तुम्हे अच्छी ही नहीं लगी तो कोई बात नहीं ......में भी अब इसको नहीं पियूँगा फेंक दूंगा
कहते हुए वो बोतल को ले कर टॉयलेट में जाने लगा......
मयंक की बाते और चेहरे के भाव देख कर न जाने मुझे क्या हुआ मेने मयंक को रोकते हुए कहा
रुक जाओ मयंक इसको फेंको नहीं ....... अगर तुम चाहते हो की में इसे पियु तो में जरूर पियूंगी
ये सुनते ही मयंक की आँखों में चमक बड़ने लगी लेकिन में उस वक़्त मयंक के प्यार में अंधी हो चुकी थी
इसलिए मुझे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था ..................
उसने कहा गुड अनीता तुमने ये बात कहकर आज मेरा दिल खुश कर दिया .......................
और उसने फिर से २ गिलासों में शेम्पेन भर दी .....
मेने अभी शेम्पेन का एक घूंट ही भर था की अचानक दरवाजे पर किसी ने ठक ठक करके दस्तक दी ....
मेने चोंकते हुए रोहन की और सवालिया निगाहों से देखा तो वो बोला मेने लंच का आर्डर देने के लिए
वेटर को बुलाया था शायद वही होगा जरा देखना तो ......
उसकी बात सुन कर में उठी और दरवाजा खोलने चली गयी दरवाजा खोलते ही मेने देखा की वेटर ही था
मेने वेटर को अन्दर आने दिया और वो अन्दर जाकर मयंक से आर्डर लेने लगा लेकिन में वही दरवाजे के
पास ही खड़ी रही २ मिनट बाद वेटर मयंक से लंच का आर्डर ले कर चला गया और में दरवाजे को फिर से
बंद करके वापिस आ गयी और मयंक के सामने अपनी चेयर पर जाकर बेठ गयी .....
मयंक ने कहा .... अनीता मेने तुमसे बिना पूछे ही अपनी पसंद के खाने का आर्डर दे तो दिया लेकिन अब
सोच रहा हूँ की पता नहीं तुम्हे अच्छा लगेगा की नहीं .....
मेने मयंक से कहा ....... कोई बात नहीं मयंक तुमने अच्छा किया जो अपनी पसंद का आर्डर दिया है ....
वैसे भी आज तुम्हारा बर्थडे है इसलिए सब कुछ तुम्हारी पसंद का ही होना चाहिए .......
मेरी बात सुन कर मयंक मुझे प्यार से देखता हुआ बोला ......
अनीता तुम सच में बहुत अच्छी हो तुम आज कल की लडकियों से बिलकुल अलग हो ......
मयंक के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर में मन ही मन खुश होने लगी थी की तभी मयंक ने कहा ....
''अनीता अब जल्दी से अपनी ड्रिंक फिनिश करो क्योकि खाना आने वाला है .......
उसकी बात सुन कर मेने फिर से अपने गिलास को उठा लिया और जैसे ही मेने अपने गिलास से सिप किया तो
मुझे इस बार अपने गिलास से किसी चीज़ की अजीब सी हीक आने लगी, में समझ नहीं पाई की वो क्या है
मेने बुरा सा मुंह बनाते हुए मयंक की और देखा तो उसने अनजान बनते हुए कहा
''क्या हुआ अनीता ........अगर अच्छी नहीं लगी तो मत पियो ... कोई जरूरत नहीं है फोर्मेल्टी करने की
मयंक के कहने का अंदाज़ ऐसा था की में फिर कुछ नहीं बोल पाई और मेने चुपचाप जैसे तैसे पूरा गिलास गटक लिया
जैसे ही वो शेम्पेन का पूरा गिलास मेरे अन्दर गया मेरे जिस्म में पता नहीं क्या होने लगा मेरी आँखे मदहोशी से मुंदने लगी
और मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मुझे बड़ी तेज़ नींद आ रही है मेरा सर बड़ी तेज़ी से घूमने लगा ......
मेने अपनी कुर्सी पर बेठे बेठे लड़खड़ाई हुई आवाज में मयंक से कहा
''पता नहीं मयंक मुझे क्या हो रहा है बड़ा अजीब सा लग रहा है ऐसा लग रहा है जैसे ये कमरा घूम रहा है ......
मेरी बात सुन कर मयंक ने मेरे गाल को थपथपा कर कहा ..... घबराओ नहीं कुछ नहीं होगा फिर उसने मेरे कंधे को
पकड़ कर कहा
'' तुम एक काम करो कुछ देर के लिए बेड पर अपनी आँखों क बंद करके लेट जाओ अभी सही हो जाओगी''
और फिर मयंक ने मुझे सहारा दे कर बेड पर लेटा दिया में तो उस वक़्त कुछ सोचने समझने की स्तिथि में
ही नहीं थे में चुपचाप पलंग पर लेट गयी और जैसे ही में लेटी मुझे अपनी सुध बुध नहीं रही और में
गहरी नींद में खो गयी और ..... ये बात कहते कहते अनीता की आँखों से आंसू गिरने लगे ...
रीमा भी जो अब तक अनीता की कहानी में ऐसी खो चुकी थी मानो वो खुद अनीता की आपबीती खुद के साथ
महसूस कर रही थी ......
रीमा ने अनीता को दिलासा देते हुए कहा ..........में सब समझ गयी अनीता की उसने तुम्हे नीदं की गोलिया
या और कोई नशीली चीज़ शेम्पेन में धोखे से डाल की पिला दी होंगी............. कितना जलील इन्सान था वो ..
ऐसे कमीनो को तो गोली मार देनी चाहिए कहते हुए रीमा का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा .......


अनीता ने अपनी आँखों से गिरते आंसुओ को पोंछते हुए कहा ......


 अनीता ने कहा ..... और फिर जब मुझे होश आया तो मुझे अपना पूरा जिस्म किसी फोड़े की तरह से दुखता
हुआ लग रहा था , सर में भी बहुत तेज़ दर्द हो रहा था जिसकी वजह से में अपनी आँखे भी सही से नहीं खोल
पा रही थी और फिर जैसे जैसे मुझमे चेतना आने लगी तो मुझे ऐसा एहसास हुआ की जैसे में निर्वस्त्र हूँ ,
और इस एहसास की अनुभूति होते ही मेने जैसे तैसे करके अपनी आँखों को खोलकर देखा तो मेरा जिस्म चादर
से ढंका हुआ था , और में चादर के अन्दर निर्वस्त्र पड़ी थी..... मुझे अपनी दोनों जांघो के बीच में दर्द और
चिपचिपाहट महसूस हो रही थी मेने अपने हाथ को चादर के अन्दर से ही सरकाकर अपनी जांघो के बीच में
स्पर्श करके देखा तो मेरी उंगलियों में कुछ लिसलिसा सा लगने लगा और फिर तो मेरी समझ में सब कुछ आने
लगा की मेरे साथ क्या हुआ है ,,
में अपनी पूरी जान लगा कर झटके से उठी और चादर को अपने जिस्म पर लपेट कर पलंग पर ही बेठ गयी
मेने अपनी नजरो को पुरे रूम में घुमाया तो मुझे मयंक कहीं भी दिखाई नहीं दिया में पलंग से उठ कर फर्श पर
खड़ी हो गयी ,, फर्श पर खड़े होते ही मुझे चक्कर से आने लगे और में एक बार फिर से पलंग पर बेठ गयी ...
में अभी खुद को संभालने की कोशिश ही कर रही थी की तभी दरवाजा खुला और मयंक कमरे में दाखिल हुआ
और मुझे पलंग पर बेठा देख कर उसने कहा ......'' उठ गयी अनीता डार्लिंग ......
मेने घर्णा भरी नजरो से मयंक की तरफ देखा और गुस्से से कहा
''' कमीने अपनी गन्दी जुबान से मेरा नाम मत ले नफरत करने लगी हूँ में तुझसे ''
तू मेरे साथ इतनी घटिया और जलील हरकत करेगा ये मेने सोचा न था ....कहते हुए मेरी आँखों से आंसू बहने लगे
मयंक तब तक मेरे पास आ चूका था और उसने मुस्कराते हुए मुझे देखा और बोला
अरे मेरी जान तू तो बेकार में लाल पीली हो रही है ......जरा सा स्वाद ही तो लिया है मेने तेरी जवानी का
और ये तो आजकल बड़ी नार्मल सी बात है... हाँ ये बात अलग है की तूने होश में नहीं करवाया इसलिए
तुझे मजा नहीं मिला लेकिन तू चिंता मत कर अगली बार जब तू अपने पुरे होश में करवाएगी तो
तुझे भी करवाने में बड़ा मजा आएगा कहते हुए वो कमीना जोर-२ से हंसने लगा ...
उसकी हंसी मेरे दिल में किसी शूल की तरह चुभ रही थी ......मेने बुरी तरह से तिलमिला कर कहा
हरामजादे तुने मेरे साथ जो ये घिनोनी हरकत की है इसके लिए में तुझे कभी माफ़ नहीं करुँगी और तू क्या
सोच रहा है की में चुप रहूंगी में तुझे पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दूंगी तुझे फांसी पर चढ़वा कर ही दम लुंगी
मेरी बात सुन कर मयंक बिलकुल भी नहीं घबराया बल्कि जोर से ठाहाका लगा कर हँसता हुआ बोला ...

अरी मेरी बुलबुल तू सच में बड़ी नादान है .... जरा सोच तू पुलिस में जाकर जब मेरी कम्प्लेंट करेगी तो क्या
कहेगी बता जरा ......
''ये कहेगी की मेने तुझे चोदा है या फिर तू ये कहेगी की मेने तेरी कुंवारी चूत की धज्जिया उड़ाई है ''
बोल क्या कहेगी बोल ...... वो बड़े मजे से मुझे चिडाता हुआ गन्दा -२ बोलने लगा ..

वो फिर से बोला .....चल अगर तूने ये सब वहां जाकर कह भी दिया तो तू जानती है की फिर क्या होगा .....
तरह तरह के सवाल तेरे से पूछे जायेंगे जिनका जवाब देना भी तुझे ऐसा लगेगा की जैसे तू बार बार चुद रही है
और फिर अखबारों में तेरी फोटो के साथ ये कहानी छपेगी और पूरी दुनिया को पता चलेगा की तू कैसे चुदी है
सोच जरा फिर तेरी कितनी बदनामी होगी लोग कितना मजा लेंगे तेरी इस चुदाई की कहानी का
तू दुनिया को अपना मुंह कैसे दिखाएगी .......और तू अपनी छोड़ पहले अपने माँ बाप की सोच
जब वो घर से बाहर निकलेंगे तो लोग उनसे कैसे कैसे सवाल करेंगे .....क्या जवाब देंगे तेरे माँ बाप ?


अक्ल से काम ले और इस कमरे की बात को इसी कमरे में दफ़न करदे वरना में तो किसी न किसी तरह से
बच ही जाऊंगा लेकिन तू किसी को मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेगी .....


मयंक की बात सुन कर मेरा सारा गुस्सा साबुन की झाग की तरह बह गया और में सोचने लगी की मयंक
जो कह रहा है वो कितना सही है ...... और सच ही तो कह रहा था वो ......वो एक अमीर बाप की औलाद थी
जिसको बचाने के लिए उसके घर वाले बेशुमार पैसा खर्च कर सकते थे और इधर में गरीब की बेटी ......


अगले कुछ पलो तक में अपनी इस बेबसी पर मुंह झुकाए रोती रही फिर मेने सुबकते हुए मयंक से कहा ...

मुझे मेरे घर जाना है ............

मेरी बात सुन कर मयंक ने कहा ...... लगता है मेरी बात तेरी अक्ल में आ गयी चल जा पहले अपना
हाथ मुंह धो कर हुलिया सही कर ले फिर तुझे जहाँ कहेगी छोड़ दूंगा ,


में पलंग से उठी और लडखडाती हुई बाथरूम में चली गयी और वहां जाकर में शावर के नीचे खड़ी हो गयी
और ठन्डे पानी की फुवारे मेरे जिस्म को भिगोने लगी जो मुझे उस वक़्त बड़ी अच्छी लग रही थी कुछ देर
तक में अपने जिस्म को रगड़ -२ कर नहाती रही और फिर में टोवल से अपने जिस्म को पोंछ कर बाहर आ गयी ,,,,
नहाने से मेरे शरीर में थोड़ी सफुर्ती आ गयी थी मेने बाहर आकर अपने कपडे उठाये और फिर से बाथरूम में
जाने लगी तो मयंक ने मुझे छेड़ते हुए कहा .....
अब मेरे से किस बात की शर्म कर रही है तेरा सब कुछ तो मेने देख ही लिया .......यही बदल ले कपडे ....


लेकिन मेने उसकी किसी बात का जवाब नहीं दिया और कपडे उठा कर बाथरूम में चली गयी और कपडे
बदलने लगी लेकिन कपडे बदलते वक़्त में अपने आंसुओ को बहने से नहीं रोक पा रही थी मुझे खुद पर
और अपनी बेबसी पर उस वक़्त इतना गुस्सा आ रहा था की मन कर रहा था की अपने आप को ख़तम कर दूँ ,


लेकिन वो भी उस वक़्त मेरे लिए संभव नहीं था .... में अपने कपडे बदल कर बाहर आई और मुझे देख कर मयंक
उठ कर खड़ा हो गया और कमरे से बाहर निकलने लगा में भी उसके पीछे पीछे चुपचाप अपनी बदनसीबी
के आंसू बहाती हुई चल दी ,


बाहर आने के बाद मयंक ने मुझे कार में बैठाया और फिर उसने मुझे मेरे घर के पास छोड़ दिया ,


में अपने घर पहुंची तो माँ ने मुझे देखते ही कहा ..

 माँ ने बड़े ही प्यार से मुझे कहा ....... अनीता बेटा बड़ी देर लगा दी आने में में तेरी ही राह देख रही थी
मेरे मुंह से कुछ नहीं निकला बस में माँ को देखती रही ,,
माँ ने फिर से कहा ...... क्या हुआ बेटी तू बड़ी थकी थकी सी लग रही है तबियत ठीक नहीं है क्या ?

मेने कहा .... हाँ माँ वो ऑटो नहीं मिला न इसलिए पैदल ही आना पड़ा इसलिए देर भी हो गयी और में थक गयी
माँ ने कहा .... अच्छा -२ कोई बात नहीं .... जा तू आराम कर ले में तेरे लिए चाय बना देती हूँ
में फिर वहां रुकी नहीं और अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर औंधे मुंह पड़ गयी और फूट-२ कर रोने लगी
लेकिन में घुटी हुई आवाज में रो रही थी ताकि माँ को मेरे रोने की आवाज न चली जाये कुछ देर तक रोने के
बाद मेरे दिल को थोड़ी शांति मिली और फिर में अपने आंसुओ को पोंछ कर बिस्तर पर बेठ गयी ,
तभी माँ चाय बना कर ले आई और मुझे चाय देकर वो मेरे पास वही बिस्तर पर ही बेठ गयी और कहने लगी

तुझे पता है अनीता वो जो लड़की थी न बड़ी सुन्दर सी जो हमारे साथ वाले घर में पहले किराये पर रहती थी
पता है उसके साथ क्या हुआ ....
माँ की बात सुन कर में चोंकती हुई बोली ...वो संगीता ...... क्या हुआ उसको मुझे नहीं पता आप बताओ ?

माँ ने कहा .... क्या बताऊ बेटी बड़ा ही बुरा हुआ उसके साथ तो .......सुना है वो पढाई के लिए यहाँ से किसी दुसरे
शहर में गयी थी और वहां वो जिस हॉस्टल में रहती थी वहीँ की एक और लड़की ने उसकी सहेली बनकर उसको
धोखे से कहीं ले जाकर उसका ...... कहते हुए माँ रुक गयी ,,

मेने बड़ी अधीरता से कहा........ क्या हुआ माँ पूरी बात तो बताओ क्या किया है उसकी सहेली ने उसके साथ ?
माँ ने अपनी साड़ी के पल्लू से अपने मुंह को ढंकते हुए बड़ी धीमी आवाज में कहा ....
सुना है उसकी सहेली ने पैसो के लालच में उस बेचारी की इज्ज़त लुटवा दी उसकी अस्मत को तार तार करवा दिया
हाय हाय कैसा जमाना आ गया है जवान लड़की को घर से बाहर भेजना अपनी इज्ज़त को दांव पर लगाना है ,
माँ बड़े अफ़सोस जनक स्वर में बोली ............

माँ की बात सुन कर मेरा भी मन भर आया मन तो किया की में माँ को सब बता दूँ ....
की आज आपकी बेटी के साथ क्या सितम हुआ है आपकी बेटी भी आज अपनी इज्ज़त को तार -२ करवा कर आई है
आप सही थी माँ में ही गलत थी जो आपकी बातो को नहीं समझ पायी काश मेने कॉलेज जाने की जिद्द न की होती
तो आज में इस वक़्त अपनी किस्मत को बेठी न कोस रही होती .... लेकिन अगले ही पल मेने खुद को संभाला और
अपने आप पर काबू पाते हुए कहा ..... हाँ माँ तुम सही कह रही हो आजकल जमाना बहुत खराब हो गया है
लडकियों का घर से निकलना बड़ा ही खतरनाक होता जा रहा है ,

मेरी बात सुन कर माँ ने कहा ....मेरी बात मान तो बेटी तू भी अब ज्यादा पडाकू न बन और कॉलेज जाना बंद कर दे
में तेरे पिताजी से कहकर जल्दी से कहीं तेरी शादी की बात चलवाती हूँ .....कहते हुए माँ मुझे देखने लगी .....

न जाने क्यों मुझे आज माँ की हर बात अपने दिल को छूती हुई महसूस हो रही थी इसलिए मेने बिना
कुछ सोचे माँ से कह दिया .....
''माँ अगर आप यही चाहती हो तो जो आपका मन करे वो करो मुझे आपकी हर बात मंजूर है ,,

मेरी बात सुन कर माँ हेरानी से मेरा मुंह ताकने लगी शायद माँ को मुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी
माँ को ऐसे देखता देख कर मेने कहा ..... हाँ माँ में सच कह रही हूँ मुझे भी अब कॉलेज नहीं जाना तुम
जो ठीक लगे वो करो ,,,,

माँ मेरी बात सुन कर खुश हो गयी और फिर चाय का खाली कप उठा कर चली गयी में भी मानसिक और
शारीरिक रूप से बुरी तरह थकी हुई थी इसलिए बिस्तर पर ढेर होकर सो गयी ,

अगले दिन सुबह में कॉलेज नहीं गयी .... पूरा दिन घर पर माँ के साथ घर के काम में उनका हाथ बंटाती रही
मुझे उस दिन ऐसा लग रहा था जैसे में किसी क़ैद से छुट कर खुले आसमान में आ गयी हूँ ,

और फिर इसी तरह से अगले ३-४ दिन बीत गए और फिर एक दिन सुबह करीब ११ बजे जब में नाश्ता कर रही थी
तो माँ ने मुझे आवाज देकर कहा ...... अनीता बेटी देख तो जरा कोन आया है तेरे कॉलेज से .....

माँ की बात सुन कर मेरी सांसे रुक गयी और में हेरान हो कर बाहर निकली की देखू तो सही कोन आया है ...
और जैसे ही में बाहर निकल कर आई और आने वाले शख्स को देखा तो मेरे पैरो के नीचे से जमीन निकल गयी
मेरी हालत ऐसी हो गयी जैसे मेने साक्षात् यमराज को देख लिया हो ........
इस से पहले की में कुछ बोलती वो शख्स मुस्कराते हुए मेरी और बड़ने लगा .....
जैसे जैसे वो मेरी और बड रहा था वैसे वैसे मेरी रूह फ़ना होती जा रही थी और जब वो शख्स ठीक मेरे
सामने आकर खड़ा हो गया और उसने कहा ........


कैसी हो अनीता ...... क्या हुआ ...... कॉलेज क्यों नहीं आ रही ३-४ दिन से ?
उसकी बाते सुन कर मेरा कलेजा मुंह को आने लगा और में पसीने पसीने हो गयी मेने थूक सटकते हुए कहा
तुम यहाँ कैसे आये तुम्हे मेरे घर का पता किसने दिया ?
उसने मुस्कराते हुए कहा .... सच्ची चाहत हो तो लोग भगवान् को भी ढूंड लेते है तुम तो इंसान हो ....
माँ हम दोनों के बीच हो रही बात को देख रही थी इसलिए मेने उसको कहा आओ अन्दर आ जाओ
और में उसको अपने कमरे में ले गयी ,
कमरे में जाते ही मेने गुर्राते हुए कहा ....अब यहाँ किस लिए आये हो ?
मेरी बात सुनकर मयंक मुस्कराते हुए बोला ..... मेरी जान लगता है तुम अभी तक मेरे से नाराज हो
मेने कहा .... बकवास मत करो चुपचाप यहाँ से चले जाओ नहीं तो अच्छा नहीं होगा ...
मयंक ने कहा ..... चला जाऊंगा लेकिन पहले ये बताओ की तुम कॉलेज कब आओगी ?
मेने तड़फ कर कहा ..... में अब कॉलेज कभी नहीं आउंगी .... में तुम्हारे हाथ जोडती हूँ प्लीज मेरी
जिन्दगी को और बर्बाद मत करो भगवान् के लिए यहाँ से चले जाओ .....
मयंक ने इस बार सुर बदलते हुए कहा ..... चला जाऊंगा लेकिन पहले तुम्हे कुछ दिखाना है ....
उसकी बात सुन कर में इतना घबरा गयी की मेरे मुंह से आवाज तक नहीं निकली मेने सवालिया निगाहों
से उसकी और देखा तो मयंक ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और एक विडियो प्ले करके मेरी और
बड़ा दिया ,, मेने कांपते हाथो से मोबाइल को अपने हाथो में पकड़ा और फिर जो कुछ मेने देखा वो देख
कर मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी और में शर्म से जमीन में गड़ती चली गयी .....
मयंक ने मेरे हाथ से मोबाइल लेते हुआ कहा ..... कितनी मस्त क्लिप है देखकर मजा आया की नहीं ?
मेरे मुंह से कोई आवाज नहीं निकली ऐसा लगने लगा जैसे मेरी जुबान को लकवा मार गया हो
मयंक ने फिर से कहा .......इस जैसी और भी ३-४ क्लिप है तेरी........ कहे तो वो भी दिखाऊ ?
मेरी हालत ऐसी हो रही थी जैसे मुझे भरे बाजार नंगा कर दिया गया हो ....
मेने गिडगिडाते हुए मयंक के आगे हाथ जोड़ कर कहा ...... प्लीज इन विडियो को डिलीट कर दो नहीं तो में
बर्बाद हो जाउंगी ....... में तुम्हारे पाँव पड़ती हूँ ..... तुम जो कहोगे में वो करने को तैयार हूँ प्लीज ये सारे
विडियो डिलीट कर दो ,,
मेरी हालत देख कर मयंक को यकीन हो गया की अब में पूरी तरह से उसके चंगुल में फंस चुकी हूँ
उसने कहा ................कर दूंगा ..........लेकिन मेरी बुलबुल कल तू कॉलेज आ रही है समझी .....
और अगर तू नहीं आई तो में ये सब क्लिप कॉलेज में फैला दूंगा और उसके बाद क्या होगा तू जानती है ,,
मेरे अन्दर अब प्रतिरोध करने की कोई ताकत ही नहीं बची थी मेने अपने सर को झुकाते हुए कहा ...
हम्म ..............आ जाउंगी ....
हम अभी ये सब बाते कर ही रहे थे की माँ भी आ गयी माँ के आते ही मयंक ने पैंतरा बदलते हुए कहना
शुरू कर दिया ..... अनीता इस तरह घबराने से कुछ नहीं होगा तुम किसी बात की चिंता मत करो
तुम पढाई में इतनी होशियार हो अपना कैरियर बर्बाद मत करो ....
मयंक की बात सुन कर माँ ने कहा .....चाहते तो हम भी यही है की ये पड़े लेकिन ज़माने का दस्तूर देख
कर हिम्मत नहीं पड़ती की जवान लड़की को घर से बाहर अकेली भेजे ,
मयंक बहुत बड़ा कमीना था उसने माँ से कहा .......आंटी जी आप अनीता की बिलकुल भी चिंता मत करिए
हमारे कॉलेज में बड़ा अच्छा माहोल है और फिर हम सब भी तो है अनीता का ख़याल रखने के लिए ..
मयंक की बात सुन कर माँ ने कोई जवाब नहीं दिया और वो कुछ सोचने लगी फिर मयंक ने मेरी और देखा
और बोला अच्छा अनीता अब में चलता हूँ ..... तुम अच्छी तरह से सोच लो की तुम्हे क्या करना है ,,,,
फिर मयंक ने माँ से कहा .... अच्छा आंटी जी में अब चलता हूँ ,,,
माँ ने कहा .... बेटा बेठो तो कोई चाय पानी ....
मयंक ने कहा ..... आज नहीं आंटी जी फिर कभी ......अभी मुझे कॉलेज जाना है ......
कहते हुए वो चला गया उसके जाने के बाद माँ ने मेरे से कई सवाल किये की मयंक कोन है और वो
क्यों आया उसने क्या कहा लेकिन में मयंक के पास अपनी तबाही का सामान देख चुकी थी इसलिये मेने
माँ की हर बात का गोल मोल जवाब दे कर अपनी जान छुड़ाई और फिर सोने का बहाना करके बिस्तर
में लेट गयी ,,, में अपनी आँखों को बंद करके सिर्फ यही सोच रही थी की अब क्या होगा लेकिन मेरे किसी
भी सवाल का उस वक़्त मेरे पास कोई जवाब नहीं था ,,,,


मेरी किस्मत का फैसला अब मयंक के हाथ में था और मुझे उससे मिलने के लिया कल कॉलेज जाना था






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