Saturday, November 30, 2013

FUN-MAZA-MASTI रोहन और रीमा--15

FUN-MAZA-MASTI
 रोहन और रीमा--15

 और फिर राघव में और वो पुलिस वाला हम तीनो मयंक को उसी हालत में छोड़ कर गेस्ट हाउस से बाहर आ गए
बाहर आने के बाद वो पुलिस वाला अपनी बाइक से पता नहीं किधर चला गया और में राघव की ऑटो में बेठ गयी
रास्ते में मेने राघव से पुछा .. ये पुलिस वाला कोन था और तुम्हारे साथ क्यों आया था ?
राघव ने जोर से हँसते हुए कहा .....
अरे वो असली नहीं नकली पुलिस वाला था.... वैसे वो मेरा बहुत पुराना दोस्त है जो आजकल नाटक कंपनी में काम करता है
जब में प्लान बना रहा था तो अचानक ही मेरे दिमाग में उस का ख्याल आ गया और फिर मेने उसे अपने प्लान में शामिल कर लिया ...
मेने हेरानी से कहा ....
वो .... वो नकली था .........मुझे तो अब भी यकीन ही नहीं हो रहा की वो नकली था क्योकि वो जिस लहजे में मयंक से बात
कर रहा था वैसा लहजा सिर्फ पुलिस वालो का ही हो सकता है और उसके पास जो पिस्तौल थी वो भी बिलकुल असली जैसी थी
राघव ने कहा ....
यही तो एक अच्छे कलाकार की पहचान है की वो जिस चरित्र को निभाता है उसमे खुद को वैसा ही ढाल लेता है
और आजकल तो असली पिस्तौल हासिल करना भी कोई बड़ी बात नहीं है वैसे तुम्हे एक बात बताऊ वो पिस्तौल भी नकली थी ,,
लेकिन जो भी हुआ .......मुझे इस बात की ख़ुशी है की मेने जैसा सोचा था बिलकुल वैसे ही हुआ ,,
मेने भी खुश होते हुए आगे बड कर राघव के गाल को चूम लिया और कहा ...
तुमने न सिर्फ मुझे मयंक के चुंगल से आज़ाद करवाया है बल्कि उस कमीने का जो हश्र किया है वो मेरे लिए बड़े गर्व की बात है
लेकिन पता नहीं क्यों मुझे एक बात का डर लग रहा है ...
राघव ने पुछा ............... तुम्हे अब किस बात का डर लग रहा है ?
मेने कहा
मयंक बहुत पैसे वाला है और साथ ही साथ उसके यार दोस्त भी सब गुंडे बदमाश किस्म के है कहीं ऐसा न हो की वो
हमसे बदला लेने के लिए कुछ गलत न कर बेठे ,,
राघव ने कहा
तुम चिंता मत करो क्योकि मेने आज उसकी जो हालत की है इसके बाद वो ऐसा कुछ सोचने की हिम्मत तक नहीं करेगा
और वैसे भी हम कोनसा अब इस शहर में ज्यादा दिनों तक रहने वाले है
मेने चोंकते हुए कहा .......................................क्या मतलब
राघव ने कहा
हां अनीता मेने सोच लिया है की आज ही तुम्हारे बाबूजी से अपनी शादी की बात कर लूँगा और शादी के बाद हम फ़ौरन यहाँ से चले जायेंगे
राघव के मुंह से शादी की बात सुन कर में मन ही मन ख़ुशी से झूम उठी लेकिन बाहर जाने की बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी इसलिए
मेने कहा ................लेकिन राघव हम शादी के बाद यहाँ से जायेंगे कहाँ ?
राघव ने कहा
वहीँ जहाँ से में आया हूँ ........... शादी के बाद में तुम्हे भी अपने साथ वहीँ ले जाऊंगा तुम बिलकुल भी चिंता मत करो वहां मेरा अपना घर है
और अब तो माँ भी हमारे साथ चलेगी ... फिर हम सब साथ मिल कर रहेंगे ... राघव की आवाज में बड़ी ख़ुशी थी
राघव की बाते सुन कर मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था लेकिन बाहर जाने वाली बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी
मेने हिचकिचाते हुए कहा
लेकिन राघव मुझे भी तो कुछ बताओ न ..........की आखिर हम कहाँ जायेंगे ? और तो और तुमने मुझे अभी तक ये भी नहीं बताया की तुम
इतने दिनों तक कहाँ थे और क्या करते रहे ...और -- और............... फिर तुम अचानक यहाँ किस लिए आये थे ?

राघव ने कहा .. लगता है तुम्हे अब सब बताने का ठीक वक़्त आ गया है
राघव ने ऑटो सड़क की साइड में लगा कर कहा ..


 मेरे होश सँभालने से पहले ही मेरे सर से बाप का साया उठ गया था इसलिए मेने बचपन से जवान होने तक
अपनी जिन्दगी में कदम कदम पर बहुत मुसीबते झेली है और हद से ज्यादा गरीबी देखी है ,,

शायद यही वजह थी की आज से कुछ समय पहले तक मेरी जिन्दगी का सबसे बड़ा सपना सिर्फ पैसा कमाना ही था
तुम्हे तो शायद ये बात भी मालूम नहीं होगी की मे दिन में पढाई करता था और रात में एक वाइन बार में वेटर की नौकरी
लेकिन ये सब में अपनी ख़ुशी से नहीं कर रहा था बल्कि इसलिए कर रहा था क्योकि मेरे पास इसके सिवा अपनी पढाई को
जारी रखने का और कोई जरिया नहीं था क्योकि दिन में अगर में कोई और काम करता तो फिर में पढाई नहीं कर सकता था ,

और फिर एग्जाम के दिनों में मेरी जान पहचान फ़िरोज़ नाम के एक आदमी से हुई
फ़िरोज़ उन दिनों रोजाना हमारी बार में आता था अपने पहनावे और हाव भाव से फ़िरोज़ बहुत अमीर लगता था
वो मुझे टिप भी बाकि सब कस्टमर से ज्यादा दिया करता था इसलिए में लालच में ज्यादातर उसकी टेबल के इर्द गिर्द ही घूमता रहता था..
शायद उसने मेरी इस कमजोरी को भांप लिया था इसलिए एक दिन उसने मुझे बातो ही बातो में कहा.....
अगर तू पैसे कमाना चाहता है तो एक बार मेरे साथ राजनगर ( काल्पनिक नाम ) चल में तेरी लाइफ बना दूंगा ....
में भी लोगो के जूठे बर्तनों को उठाते -२ ऊब चूका था इसलिए बिना कुछ सोचे समझे उसकी बातो में आ गया
मेरे दिमाग पर उन दिनों सिर्फ पैसा कमाने का भूत सवार था इसलिए उसने जो कुछ भी कहा उसकी हर बात पर
मे आँख मूँद कर भरोसा करता चला गया ...ये तक भी जानने की कोशिश नहीं की कि फ़िरोज़ की असलियत क्या है ,,
और फिर आखरी एग्जाम देने के बाद में माँ को बिना कुछ बताये फिरोज के साथ राजनगर के लिए निकल गया
राजनगर पहुँचने के बाद फ़िरोज़ ने मुझे एक बहुत ही शानदार से होटल में ठहराया और खुद ये कहकर चला गया
तू अब यहाँ मौज मस्ती कर और अपने सफ़र की थकान को मिटा ........... में तुझे शाम को मिलता हूँ ,

उधर में होटल की चमक दमक और फ़िरोज़ की शान ओ शोकत से लबालब बातो में ही खो कर रह गया
और पूरा दिन सिर्फ अपने आने वाले खुशगवार दिनों के रंगीन सपने ही बुनता रहा ...

शाम को जब फ़िरोज़ मेरे पास आया तो उसने मुझसे इधर उधर की २-४ बाते करने के बाद कहा ..
यार राघव एक गड़बड़ हो गयी है ,,
गड़बड़ का लफ्ज़ सुनते ही में बुरी तरह से घबरा गया मुझे अपने सुनहरी सपने बिखरते नजर आने लगे
मेने हडबडाते हुए कहा ...........क्या गड़बड़ हो गयी फ़िरोज़ भाई ?
मुझे घबराता देखकर फ़िरोज़ ने मुझे दिलासा देते हुए कहा ...
अरे यार तू क्यों घबरा रहा है ...तेरे से थोड़े न कुछ गलत हुआ है .... गलती तो मेरे से हुई है
उसकी बात सुन कर मेने मन ही मन चैन की साँस ली और कहा ... लेकिन हुआ क्या है ? बताओ तो सही
फ़िरोज़ ने बड़ी उदास आवाज में कहा ...... दरअसल हुआ ये की कल वहां से आते वक़्त जल्दबाजी में मेने ध्यान नहीं दिया
और मेरा ब्रीफकेस होटल के लगेज रूम में किसी और के ब्रीफकेस से बदल गया ,,
मेने भी अफसोस जाहिर करते हुए कहा .... ओ ओ हो ........फिर अब क्या होगा ?
फिरोज बोला ... वैसे तो आज मेने होटल में फोन करके पता कर लिया है मेरा ब्रीफकेस वहीँ पर है लेकिन जिसका ब्रीफकेस में
गलती से अपने ब्रीफकेस की जगह ले आया हूँ वो बेचारा वहां परेशान हो रहा है इसलिए मुझे फ़ौरन ब्रीफकेस चेंज करने के लिए
वापिस जाना होगा ...............लेकिन .......कहते -२ वो रुक गया ...
मेने बड़ी अधीरता से पुछा .... लेकिन क्या ?
वो बोला .... यार दरअसल बात ये है की अगर में वहां ब्रीफकेस चेंज करने के लिए गया तो मुझे वापिस आते आते कल रात हो जाएगी
और यहाँ मेने तेरे काम के लिए जिस बन्दे से बात करनी है वो कल दोपहर की फ्लाइट से विदेश जा रहा है अब में इसी टेंशन में हूँ
की अगर कल में उस बन्दे से नहीं मिल पाया तो तेरा यहाँ आना बेकार हो जायेगा और दूसरी तरफ अगर में ब्रीफकेस को चेंज करने
के लिए आज नहीं गया तो कहीं ऐसा न हो की कहीं मेरा ब्रीफकेस इधर उधर हो जाये,,
मेने कहा ... फ़िरोज़ भाई लगता है आपके ब्रीफकेस में कोई बहुत जरूरी सामान है ?
फिरोज ने कहा .....हाँ यार उस ब्रीफकेस में मेरे बहुत जरूरी कागजात है अगर वो कहीं गम हो गए तो मेरा लाखो का नुक्सान हो जायेगा
कहते हुए वो ऐसी शक्ल बना कर बेठ गया जैसे वो बड़ी गहरी सोच मे पड़ा हो .....
में भी उसकी बात सुन कर बड़ी कशमकश में पड़ गया था ..और फिर पता नहीं मेरे मन में उस वक़्त क्या आया की मेने कहा ,,
फ़िरोज़ भाई क्यों न ऐसा करे की आपका ब्रीफकेस चेंज करने के लिए में चला जाता हूँ और आप कल यहाँ रहकर मेरे काम की बात कर लेना ...
मेरी बात सुन कर फिरोज ख़ुशी से उछल पड़ा और बोला .. वाह राघव क्या आईडिया दिया है तूने ...
तूने तो एक ही झटके में सारी मुश्किलें ख़तम कर दी ... वाह भाई वाह क्या दिमाग पाया है तूने ....
फ़िरोज़ के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर में मन ही मन इतराने लगा क्योकि में तब तक नहीं जानता था की फ़िरोज़ के मन में क्या है
और उधर शायद फिरोज मन ही मन अपनी कामयाबी पर खुश हो रहा था ,,
फिर उसी रात को में फ़िरोज़ का ब्रीफकेस ले कर वापिस अपने शहर की और चल दिया और अगले दिन सुबह फिरोज ने जिस
होटल का मुझे एड्रेस दिया था में वहां पहुँच गया और जिस आदमी से मिलने के लिए मुझे फ़िरोज़ ने कहा था में उससे जाकर मिला
उस आदमी ने मुझसे फ़िरोज़ का ब्रीफकेस ले लिया और हुबहू बिलकुल वैसा ही एक दूसरा ब्रीफकेस मुझे दे दिया
पहली नजर मे में भी दोनों ब्रीफकेसों को एक साथ देख कर यकीन कर बेठा की फ़िरोज़ की बात सोलह आने सच है
क्योकि वो दोनों ब्रीफकेस एक ही कंपनी और एक ही मॉडल के थे और साथ ही साथ कलर भी एक ही था ,,
खैर ब्रीफकेस वहां से ले कर में एक बार फिर से राजनगर के लिए निकल पड़ा ,,

में तब तक भी इस बात को नहीं जानता था की फ़िरोज़ कितनी होशियारी से मेरा इस्तेमाल कर रहा है और
जानता भी तो कैसे ..... क्योकि अभी तक तो सब कुछ ऐसे घट रहा था जैसे सबकुछ स्वभाविक हो ...

और फिर अगले दिन शाम को जैसे ही ट्रेन लालगंज स्टेशन पर पहुंची तो ८-१० पुलिस वालो ने मुझे प्लेटफोर्म पर उतारते ही
घेर लिया और घसीटते हुए अपने साथ जीप में बेठा कर पुलिस थाने ले गए ,
ये सब कुछ इतना अचानक और इतनी जल्दी हुआ की मेरी समझ में कुछ नहीं आया की माजरा क्या है
हालाँकि मेने पूछने की कोशिश जरुर की लेकिन उन लोगो ने मुझे घुड़क कर चुप रहने को मजबूर कर दिया और फिर
जब उन लोगो ने मुझे अपने ऑफिसर के सामने पेश किया तब मुझे हकीकत पता चली
और हकीकत का पता चलते ही मेरे पैरो के नीचे से धरती खिसक गयी ...... और मेरी सांसे थम गई ...
क्योकि मेरे ब्रीफकेस से लाखो रूपये के नकली नोट बरामद हुए थे ,,,
मेने अपनी बेगुनाही साबित करने की हर संभव कोशिश की लेकिन मेरे हाथ सिर्फ नाकामयाबी ही लगी
और तो और मेरी बेगुनाही का सबसे बड़ा सुबूत जोकी फिरोज था उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ हो चूका था ..
में समझ गया की फ़िरोज़ को मेरे अंजाम की खबर मिल चुकी है ....
पुलिस में मुझे ३-४ दिन तक हवालात में बंद रखा और सच्चाई उगलवाने के लिए जानवरों की तरह पीटा लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा
और लगता भी तो क्या ....क्योकि में तो कुछ जानता ही नहीं था और फिर शायद उन लोगो को भी इस बात का यकीन होने लगा था
इसलिए फिर मुझे जेल में भेज दिया गया और तकरीबन ६ महीने जेल में रहने के बाद पता नहीं क्यों एक दिन मुझे रिहा कर दिया गया ....
में जेल से तो रिहा हो चूका था लेकिन अब मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल ये था की में घर क्या मुंह ले कर जाऊंगा
क्योकि उस वक़्त मेरी जो हालत थी उसमें तो में माँ से नजरे मिलाने लायक भी नहीं रहा था ...
और फिर मेने मन ही मन इस बात का फैसला किया की में खाली हाथ घर वापिस नहीं जाऊंगा
में लालगंज में ही रहकर अपने लिए काम तलाश करने लगा और कुछ दिनों की जद्दोजेहद के बाद आख़िरकार
मुझे एक सर्विस स्टेशन में काम मिल गया मेरे पास चूँकि रहने का कोई ठिकाना नहीं था इसलिए में रात को वहीँ सोने लगा
और फिर कुछ ही दिनों में मेरी एक ऑटोरिक्शा वाले से दोस्ती हो गयी उसने जब मेरी कहानी सुनी तो उसको शायद मेरे
ऊपर तरस आया और उसने मुझे पहले ऑटो चलाना सिखाया और फिर उसी ने मुझे अपने सेठ से किराये पर ऑटो दिलवा दिया
और में ऑटो चलाने लगा और अगले कुछ महीनो में में पूरी तरह से अपने धंधे में सेट हो गया और फिर मेने अपने सेठ की
मदद से एक राजनगर में एक छोटा सा मकान भी ले लिया
और अब जब सबकुछ ठीक हो चूका था ......तो में माँ को अपने साथ ले जाने के लिए यहाँ आया था
और इक्तेफाक से तुम भी मुझे मिल गयी और उसके आगे तो फिर तुम्हे सब पता ही है ...
राघव की बात सुनने के बाद मुझे हेरानी के साथ साथ अच्छा भी लग रहा था क्योकि राघव ने मुझे सब कुछ सच सच बताया था
मेने राघव की और बड़े ही प्यार से देखते हुए कहा ...
राघव मुझे इस बात की सबसे ज्यादा ख़ुशी है की तुमने इतनी मुसीबते सहने के बाद भी अपने जमीर को जिन्दा रखा
और तुमने ऐसा कोई भी काम नहीं किया जिस से तुम्हारे चरित्र पर कोई दाग लगा हो तुम्हारी दास्तान सुनने के बाद
में तुमसे और भी ज्यादा प्यार करने लगी हूँ ...........लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आ रही ?

राघव ने मुझे घूरते हुए कहा ... अब कोनसी बात रह गयी जो समझ नहीं आ रही ?
मेने तिरछी निगाहों से राघव की और देखते हुए कहा ...
तुमने सब कुछ तो बता दिया लेकिन ये नहीं बताया की तुम्हे मुझसे प्यार कब हुआ ...?

राघव ने मेरी और प्यार से देखते हुए कहा ...
प्यार तो मुझे तुमसे उसी पल से हो गया था जब मेने तुम्हे पहली बार देखा था लेकिन अपने प्यार का इज़हार करने से डरता रहा ....
मेने राघव की और शिकायत भरी निगाहों से देखते हुए कहा ....
अच्छा जी तो आप डरते भी है लेकिन किस वजह से जरा वो भी तो बता दीजिये
राघव ने कहा ....
और किसी बात से नहीं .....डरता तो में सिर्फ अपनी गरीबी से था ... क्योकि उस वक़्त मेरी इतनी हैसियत भी नहीं थी की में तुम्हे
किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में बेठा कर एक कप चाय भी पिला सकता और दूसरी वजह ये भी थी की में मन ही मन ये सोचता था की
में तुमसे अपने प्यार का इजहार उस दिन करूँगा जिस दिन में किसी लायक बन जाऊंगा ....
न जाने क्यों राघव की एक एक बात मेरे दिल की गहराईयों में उतर रही थी मेने कहा ....
और अगर तुम्हे कहीं अपने प्यार का इज़हार करने में देर हो जाती और में किसी और की हो जाती तो क्या होता ,,
मेरी बात सुन राघव ने कहा .....
अगर ऐसा होता तो फिर में जिन्दगी भर कुंवारा रहकर तुम्हारे नाम की माला जपता ,,
राघव के कहने का अंदाज़ कुछ ऐसा था की बरबस ही मेरी हंसी छुट गयी और फिर मेने आगे बढकर राघव के गाल पर एक चुम्बन जड़ दिया



और अनायस ही मेरे मुंह से निकल गया.................................. आई लव यु













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