Saturday, November 30, 2013

FUN-MAZA-MASTI तकलीफ--3

FUN-MAZA-MASTI

 तकलीफ--3

 किचन का थोडा काम निपटाकर करीब १५-२० मिनट में रीना वापस आई. मेरे करीब आकर अपने होठों को मेरे होठों के इतने करीब लायी की मुजे उसकी सांसो की गर्मी महेसूस हो रही थी. ऐसा लग रहा था की वो मुझे अभी कच्चा चबा जायेगी. पर बिना चूमे ही वो मेरे से थोडा दूर जाकर सामने के सोफे पर बैठ गयी और ब्लाउज पर से ही अपने स्तन पर हाथ रखा और धीरे धीरे उसे मसलना शुरू किया. वो हलके से अपने स्तन को हथेली में ले कर मसल रही थी और मेरी हालत देख मुस्कुरा रही थी. मुझे बेहाल देख कर उसे माझा आ रहा था. अब उसने थोडा आगे बढकर अपने दोनो पैर फैलाये. पैर के फैलने से उसका पेटीकोट सरक कर घुटनों के ऊपर आ गया पर उसकी चूत की झलक तो अभीभी देखने को नहीं मिली. अब वो एक हाथ अपने पेटीकोट में ले गयी और धीरे धीरे अपने जांघो के बिच में रगड़ने लगी. मेरी नझर उसके दोनों पैर के बिच में ही गड़ी थी की कब उसका पेटीकोट थोडा और ऊपर सरके और उसकी गोरी गोरी जांघो के बिच चूत को देख सकू. पर वो बड़ा ख़याल रखती थी की उसके पैर के बिच का राज़ में ना जान सकू. अब उसकी हाथ रगड़ ने की स्पीड धीरे धीरे तेज हो रही थी और पुरे सोफे पर वो मचल रही थी. उसने अपने फैले हुए पैर को वापस करीब लाये और अपना हाथ दोनों पैर के बिचमें से बहार निकाला. वो अब सोफे में से खडी हो गयी और मेरी ओर झुक कर अपने स्तन की क्लीवेज दिखाई. अपने हाथसे पेटीकोट घुटनों तक उठाया और दो नो हाथों से अपनी पेंटी खिंच कर उतार दी. मेरी ये कल्पना करके ही जान जा रही थी की वो पेटीकोट के अन्दर पूरी नंगी थी. अब वापस उसने अपना पेटीकोट घुटनों तक उठाया और सोफे पर अपने पैर फैला कर बैठ गयी. अभी भी मैं उसकी गोरी चिकनी जांघो के आगे कुछ नहीं देख सकता था. उसने फिर से अपनी चूत रगड़ना चालू किया. बिच बिच में वो मुझे अपनी गिली उंगलिया दिखा कर परेशान कर रही थी. मै ये सोच कर परेशान था की उसकी उंगलिया कैसे गिली हुई? मेरी परेशानी को और बढाने के लिए उसने अपनी चूत को रगड़ना छोड़ कर स्तन को दोनों हाथों से मसलने लगी. अपने स्तन मसलते समय मदहोशी में उसकी आँखे मूंद जाती थी. मेरे लिए ये सब कंट्रोल से बाहर था. मै अबतक तो पूरा गर्म हो चुका था जैसे मुझे बुखार हो.
मैं बड़े दयनीय आवाज़ में बोला "रीना दीदी मुझसे रहा नहीं जाता. P lease मुझे चूत दिखाओ ना"
मेरे बात की परवाह ना करते हुए उसने धीरे धीरे अपने ब्लाउज के हुक एक के बाद एक खोलना शुरू किया. ब्लाउज खोल कर उसने मेरी और फेंका और उठ कर मेरे पास आई. अब उसके बदन पर मात्र ब्रा और पेटीकोट पहना हुआ था. उसने मेरा चहेरा पकड़ कर अपनी छाती पर रख दिया जैसे वो कह रही हो की मेरे स्तन से तुम जी भर के खेलो पर मात्र होठों से. मैं मुरख उसकी यह मरजी को समज नहीं सका और बिना हिले उसके दो स्तन की गहराइयों में मुश्किल से सांसे ले रहा था. उसने मेरे सर को पीछे से हल्का सा धक्का दिया और उसके स्तन पर मेरे होंठ ओर जोर से दबाये. अब मेरे लिए अपने आप को रोकना मुश्किल था. मैं रीना के स्तन की गहराई को अपने होठों से चूमने लगा. रीना को अपनी बाहों में भर कर उसके स्तन पर जहाँ जगह मिली वहां चूमने लगा. मैं पागलकी तरह उसके नाजुक स्तन को कभी मुह में खींचता था तो कभी जोर से चुमता था. धीरे धीरे उसके स्तन को होठों से खिंच कर ब्रा से बहार निकाल रहा था पर उसमे काफी देर लग रही थी. मैंने हाथोंसे उसकी ब्रा में से स्तन को निकालना चाहा पर उसने मुझे रोक दिया. वो चाहती थी की मैं जो कुछ भी करू अपने होठो से ही करू. मैंने फिर से उसके कोमल स्तन को अपने मुंहमें दबोचा और स्तन को ब्रा में से खींचा. उसकी निप्पल का कुछ भाग देखने को मिला पर वापस उसकी ब्रा के अन्दर चला गया. वो मेरे इस खेल का मझा ले रही थी और देख रही थी के मैं क्या करता हु. मैंने उसके स्तन को अपने मुह से खिंच कर निकाल ने की बहोत कोशीश की पर नाकाम रहा. आखिर में मैंने दूसरा रास्ता चुना. मैंने मेरे सर को थोडा ऊपर उठा कर उसके कंधे तक ले गया और उसकी ब्रा की पट्टी को मुह से पकड़ कर उतार दी. पट्टी उतारते ही उसकी ब्रा उसके स्तन पर से छुट गयी और स्तन खुल गए. उसके नंगे स्तन का रूप देख कर मै हैरान हो गया. एकदम ताज़ा खिले गुलाब के फुल जैसा उसके निप्पल का रंग था जो उसके दूध जैसे सफ़ेद और मख्खन जैसे मुलायम स्तनकी सुन्दरता को और भी खुबसूरत बना रहा था. मैंने उतनी ही कोमलता से उसकी निप्पल को चूमा. चुमते ही रीना मेरी बाहों में मचल उठी. धीरे से उसकी निप्पल को मुंह में लिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसके पुरे स्तनको निगलने लगा. रीना अपने आपे से बहार थी. वो मुझे अपने स्तन को चूमने के लिए और भी उकसा रही थी. उसके दोनों स्तन को जी भर कर चूमा और काटा भी. स्तन पर जगह जगह जोर से चूसने से उसका लहू उभर आया था तो कही पर दांत के निशान पड गए थे. अब उसने अपनी ब्रा निकाल फेंकी और मुझे उसकी नंगी पीठ का कुछ देर आनंद लेने दिया और फिर से अपने आप को छुड़ा कर जैसे ही वो किचन में जा रही थी की मैंने उसको पीछे से पकड़ किया. उसके दोनों स्तन को दबोच कर बोला "मैं तुम्हे अब नहीं जाने दूंगा".
उसने कहा "छोड़ दो वरना मैं तुम्हे वो नहीं दिखाउंगी. और तुम अपनी जगह से क्यों उठे? मैंने मना किया था ना?."
उसने अपने आप को छुडाने की कोशीश की पर मैंने उसके स्तन छोड़कर उसका पेटीकोट पकड़ा और ऊपर उठाया. जैसे ही घुटनों से थोडा ऊपर आया उसने अपने दोनों पैर जकड दिए और पेटीकोट को पैरों के बिच दबा दिया.
मैं लगभग रोने जैसा हो गया और चिल्लया “तुम क्यूँ मुझे परेशान कर रही हो? दिखाओना...”
उसने मुझे जोर से धक्का दिया. मेरे हाथ से उसका पेटीकोट छुट गया और मैं जा कर थोड़े दूर गिर पड़ा. वो चिल्लाई "एक कदम भी आगे बढाया तो मैं तुम्हारे साथ बात नहीं करुँगी..चुप चाप बैठे रहो...”
उसका गुस्सा देख कर मैं चुप चाप बैठ गया और वो किचनमें चली गयी.

थोडा और काम निपटाकर वो वापस आई. मेरा लंड तो वैसे भी कब से खड़ा हुआ था. आते ही उसने मेरे सब कपडे उतार दिए और मुझे पूरा नंगा कर दिया. वो आ कर मेरे आगे घुटनों पर बैठ गयी. अपने हाथों से मेरे खड़े लंड को पकड़ कर तुरंत अपने मुंह में डाल दिया और बड़ी अधीरता से चूसने लगी. हाला की मेरा लंड सुजन के समय जितना लम्बा होता है उतना लम्बा नहीं था पर जब रीना उसे पूरा का पूरा निगल जाती थी तो लंड जा कर उसके गले में अटकता था. उसके कोमल होंठ का अहेसास कुछ अलग ही आनंद दे था जो आर्टिफीसियल चूत से नहीं मिल रहा था. वो ऐसे लंड को चूम रही थी जैसे बरसों बाद उसे अपनी खोयी हुयी चीज मिली हो. वो लंड को खूब मज़े लेकर चूस रही थी और अपने मुंह में अन्दर-बाहर कर रही थी. मेरे आनंद की सीमा धीरे धीरे बढ़ रही थी और रीना लंड को चारों और से चूस रही थी. तभी अचानक मेरे पुरे बदन में एक लहर दौड़ गयी. मैंने रीना का चहेरा पकड़ का लंड को पूरा मुह में डाल दिया. रीना ने भी मुंह खोल कर लंड के लिए जगह कर दी. मैं जब शांत हुआ तब मेरा लंड मुंह में से निकाल कर अपने मुंह में छूटे हुए मेरे स्पर्म को दिखाया.
मैं बोला "रीना दीदी, बहोत मज़ा आया. और ये क्या है?”
रीना ने स्पर्म को हाथ में लिया और बोली "ये तुम्हारे स्पर्म है"
मै बोला "पर ये क्या होता है?”
रीना बोली "वो जो तुम्हे एकदम मज़ा आया ना? तब तुम्हारे लंड में से ये निकलता है? और ये अगर लड़की की चूत मैं जाए तो वो प्रेग्नेंट हो जाती है.”
मै स्पर्म को देख कर हैरान था. तभी वो उठी और अपने स्पर्म वाले हाथ धो कर वापस आई.
मैं रीना के नंगे स्तन की और देख कर बोला "दीदी तुम बहोर सुन्दर दिखती हो. तुम्हारे स्तन बहोत अच्छे है.”
रीना धीरे से मुस्कुराई और पास आकर अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए. मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उसके होठों का रस पिने लगा. हम एक दुसरे के आलिंगन में थे तभी मैं मेरा हाथ रीना की चूत की और ले गया और पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर रख दिया. हाथ रखते ही रीना ने अपने पैर मेरे हाथों के आस पास कस दिए. मेरे लिए हाथ निकालना भी मुश्किल था और हाथ हिलाना भी. मैं फिर से उसके रसीले होंठ चूमने में लीन हो गया. कुछ देर बाद उसके अपने पैर की पकड़ ढीली की. मैं धीरे धीरे उसका पेटीकोट उठाने लगा. रीना ने कोई एतराज़ नहीं जताया पर मुझे उसका पेटीकोट उठाने में दिक्कत हो रही थी. रीना मेरी बाहों में से उठी और मेरे सामने खडी हो गयी. उसने पेटीकोट का नाडा खोल कर उसे पकड़ कर खड़ी रह गयी और मेरे सामने देखने लगी. मेरे आँखे उसकी चूत देखने के लिए तरस रही थी वहा रीना पेटीकोट छोड़ नहीं रहीथी. मैं रूक नहीं पाया और झट से उसके हाथों से पेटीकोट छुडाकर निचे गिरा दिया. मेरी आँखे और मुह खुला का खुला ही रह गया. जिस पल का मैं बेसब्रीसे इंतज़ार कर रहा था वो मेरे सामने था. मै रीना की चूत देखने के लिए उसके करीब गया तो वो उठ कर सामने के सोफे पर बैठ गयी और अपने पैर फिर से कस दिए. मैं उसके करीब गया और अपने हाथों से उसके पैर को धीरे धीरे फैलाया. जैसे जैसे उसके पैर खुले वैसे वैसे उसकी चूतकी दरार साफ़ दिखने लगी. जब तक मैंने उसके पैर फैलाये मेरी आँखे एक पल के लिए भी उसकी चूत पर से हट नहीं रही थी. छोटे छोटे बालों के बिच एक छोटीसी पतली सी गुलाबी दरार. मैं आश्चर्य से उसकी चूत को और उसकी गोरी जांघो को देख रहा था और जो दिख रहा था उस पर विस्वास नहीं हो रहा था. मैंने अपने हाथ रीना की चूत पर रखा और धीरे धीरे चूत को रगड़ने लगा. उसकी चूत की कोमलता को अपने हाथ से महेसुस करने लगा. चूतको रगड़तेही उसमे से चिकनेपन की आवाज़ सुनाई दी. जैसे ही मैंने चूत के होंठो को फैलाया तो उसमेसे कुछ चिकनासा रस निकल कर बाहर आया.
मैंने रीना को पूछा "ये क्या है?”
रीना बोली "ये चूत का जैल है"
मैं बोला "यहाँ कैसे आया?”
वो अधीर हो कर बोली "ये हर लड़की की चूत में से निकलता है ताकि लंड आसानी से अन्दर चला जाये"
मैंने आश्चर्य से पूछा "पर इतने छोटे काने में लंड कैसे जा सकता है?”
अब रीना की धीरज का अंत आ गया. उसने थोडा जोर से बोला "अरे तुमको क्यों चिंता हो रही है? तुम अपना लंड मेरी चूत में डाल कर देखो ना?”
मैं मेरा लंड उसकी चूत के करीब ले गया और जैसे हे चूत के ऊपर रखा रीना ने अपने पैर फैला दिए और लंड के अन्दर घुसने का इंतझार करने लगी. और क्यों न हो? अभी अभी तो उसकी शादी हुई थी और अभी अभी उसने लंड का स्वाद चखा था. एक हफ्ते के हनीमून से क्या होता है उसमे तो प्यास भड़कती है. और एक महिना इस चुदाई की आग के साथ काटना कैसे संभव है? जब रीनाने यहाँ आकर देखा की मेरा लंड सूज कर लम्बा और मोटा हो जाता है तो उसकी चूत में पानी टपक पड़ा. एक तो चुदाई की तड़प और ऊपरसे लम्बा तगड़ा लंड. तभी रीना ने सोच लिया था की चुदाईकी आग बुझानेके लिए वो यही तगडा लंड लेगी. अब ये सुनहरा अवसर मिला है. लंड का सूपड़ा रीना की चूतकी दहेलीको चूम रहा है. चूत यही इंतजारमें अपना मुह खोले बैठी है की अभी लंड आएगा अभी मुझे पूरी तरह भर देगा.
तभी मेरे मन में फिर से वही सवाल आया "पर मेरा लंड तुम्हारी चूत में कैसे जाएगा?”
अब रीनाके लिए ये सब बर्दाश से बाहर था. उसने झट से मुझे कमर से खिंचा और पूरा लंड अपनी चूतमें ले लिया. जैसे ही लंड पूरा अन्दर चला गया तब उसके चहरे पे एक संतुष्टि का भाव छा गया. कुछ समय वो मेरा लंड अपने चूत में लिए ऐसे ही पड़ी रही. थोड़ी देर बाद बोली "देख ऐसे जाता है... अब रुकना मत....और कोई सवाल मत पूछना....”
मैंने रीना को अपनी बाँहों में लिया और उसके होठों के रस को चुमते हुए उसकी चुदाई शुरू की. एक के बाद एक उसका झडना शुरू हुआ. जैसे जैसे वो झड़ती थी वैसे मेरे लंड पर उसकी चूत की पकड़ मजबूत होती जा रही थी. अंत में मेरा झड़ने का समय आ गया. अब मेरा लंड रीना की चूत की गहराईयों को नाप रहा था. तभी थोड़ीही देर में स्पर्म की पिचकारी छूटी और रीना की चूत को भर गयी. रीना की चुदाई करना और उसकी चूत में झाडना एक परम आनंद की अनुभूति थी जो अर्तिफ़िसिअल चूत में कभी नहीं मिली.

हम काफी देर एक दुसरे की बांहों में पड़े रहे और कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला. शाम को जब उठे तो रीना ने फिर से चुदाई की मांग की. एक और बार जम कर चुदाई के बाद अब रीना कुछ शांत लगती थी पर वो ये तिन दिनका भरपूर उपयोग करना चाहती थी.

(क्रमशः)







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