Saturday, November 30, 2013

FUN-MAZA-MASTI तकलीफ--5

FUN-MAZA-MASTI

 तकलीफ--5

 चारो सहेलियों को कुछ समज में नहीं आ रहा था की क्या करे... उन्हों ने एक दुसरे के सामने देखा और फिर कुछ देर बाद सुषमाने रीना को कहा "ठीक है..अगर ऐसा ही है तो हम तुम्हारी राह देखतें है. जैसे ही ये ठीक हो जाय हम शोपिंग के लिए निकालेंगे..”
सब लोग सहमत हो गए. चारो सहेलियां हमारे सामने ही बैठी रही और आपस मैं बातें करने लगी. रीना भी उनके साथ बातों में जुड़ गयी. रीना का मुंह उनकी और था ओर पीठ मेरी और थी. उसक पेटीकोट जांघो के ऊपर तक चढ़ा हुआ था. सामने बैठे हुए को उसकी चूत साफ़ नज़र थी और चूत में घुसा हुआ मेरा लंड. उनकी बातें चालू थी और मैं अपने काम मैं जुट गया. मैंने रीना के अपने एक हाथ से रीना के स्तन को मसलना शुरू किया और दुसरा हाथ उसकी चूत के ऊपर रगड़ ने लगा. रीना को मज़ा आ रहा था और बात करते करते वो बिच में आहें भर लेती थी. चारो सहेलियां भी ये सब देख रही थी. "आह धीरे से दबाओ दुःखता है...” रीना ने मेरा हाथ रोक लिया.
मैंने कहा "रीना ब्लाउज खोलो ना...” और जवाब की परवाह किये बिना मैं उसका ब्लाउज खोलने लगा. रीना ने कोई एतराज नहीं किया....
ये सब देख कर नुपुर बोली "रीना तेरी तो शादी अभी अभी हुई है तो फिर.....?" उसके चहेरे पर सवाल था.
रीना ने कहा "नुपुर, मैं और प्रकाश जब हनीमून पर गए थे तब हमने खूब मजे किये थे. हम ने बेशुमार चुदाई की. मेरे लिए हम वाइन की बोतल मंगवाते थे और प्रकाश के लिए टकीला की. भरपूर नशे मैं हम जन्नत मैं चले जाते थे और फिर जम कर चुदाई. हम ना दिन देखते थे ना रात. हम चौबीसों घंटे नशे में धुत रहते थे और चुदाई के अलावा कोई काम नहीं था. और हनीमून के बाद तो प्रकाश वापस UK चला जायेगा इसीलिए हम कोई पल गंवाना नहीं चाहते थे और जब तक पूरी तरह से थक कर चूर नहीं हो जाते हमारी चुदाई चलती थी. कई बार तो मैं इतनी थक जाती थी की मैं कब सो जाती थी मुझे पता ही नहीं रहता था. पर प्रकाश ने तो एक बार चुदाई शुरू की तो ख़तम करके ही छोड़ता था. काफी बार तो उसने मुझे नींद मैं ही चोदा था. तिन दिन तक तो हम हमारे रूम मैं से बाहर नहीं निकले थे. जो भी मंगवाना था वो रूम सर्विस से मंगवा लेते थे. उन तिन दिन मे तो मेरी चूत काफी खुल गयी थी. प्रकाश जब उसका लंड डालता था तो बड़ी आसानी से अन्दर घुस जाता था. और कुछ देर बाद तो पता भी नहीं चलता था की उसका लंड मेरी चूत मैं है भी या नहीं. चौथी रात फिर से मन भर कर चुदाई की और हम दोनों थक कर बेड पर बिखर गए. थकान के मारे किसीकी हिलने की भी ताकत नहीं थी. प्रकाश तो दूसरी ही क्षण मे गहरी नींदमे खो गया. मैं भी तुरंत सो गयी थी. ”
रीना की बात सब लोग बड़े ध्यान से सुन रहे थे. रीना ने थोडा सांस लेकर आगे कहा "देर रात को वापस उसने मेरे पैर फैलाये. मैं नशे में चूर और आधी नींद मै थी और मुजमे हिलने का भी होश नहीं था. मेरी आँख भी नहीं खुल रही थी. नींद मै ही कहा "प्रकाश सोने दो न.. सुबह करेंगे...” पर उसने जैसे कुछ सूना ही नहीं और चूत मै लंड डाल ने लगा. जैसे जैसे वो अन्दर डालता गया मुझे एक अजीब संतोष की अनुभूति होने लगी. एसा लगा जैसे मेरी चूत पूरी भर गयी हो और जैसे मेरा मन इसीके लिए तरस रहा था और उसे मिल गया हो. ठीक वैसा ही मजा मुझे अभी आ रहा है. खैर, जब उसने चुदाई शुरू की तब तो मैं पागल ही हो गयी. मुझे ऐसी संतोष की अनुभूति पहले कभी नहीं हुई थी. ऐसा लगा की जैसे मेरी चूत कंवारी है और मैं पहली बार चुद रही हूँ. उसने दो-तिन धक्के जम कर मारा पर तुरंत झड गया और अपना लंड चूत मैं से निकाल दिया. मेरी प्यास जगा कर के वो खुद झड गया. मेरे पास हिलनेकी भी ताकत नहीं थी की उसको मेरी बाहों मै जकड कर रखु. मैंने बेहोशी मैं ही नाराज हो कर कहा "प्रकाश...करो ना... क्यों छोड़ दिया....". पर उसने मुझे प्यासी ही छोड़ दी.”

रीना ने आगे कहा "दुसरे दिन सुबह मैं नींद मे ही थी और उसने फिर से अपना लंड मेरी चूत मैं डाला. जैसे जैसे उसने अपना लंड मेरी चूत में डाला मेरे पुरे बदन मैं फिर से एक मदहोशी की लहर दौड़ गयी. उसका लंड और अन्दर डालने के लिए मैंने बंध आँख ही उसकी जांघो को दोनों हाथो पकड़ कर अपनी और खिंचा. जैसे ही उसके लंड ने मेरी चूत की गहराइयों को छुआ मुझे एक अजीब सुख की अनुभूति हुई. पर दूसरी ही क्षण मैं हैरान हो गयी की मैंने जिसे छुआ वो प्रकाश नहीं है. मैं तुरंत अपने बेड पर उठ गयी और देखा तो वो होटल के रूम सर्विस वाला करीब २० साल का लड़का था. मेरी सूझ बुझ चली गयी. मैंने प्रकाश को बुलाने के लिए चिल्लाई पर प्रकाश रूम मैं नहीं था. इस तरफ वो लड़का पूरी तरह से डर गया. वो दोनो हाथ जोड़कर माफ़ी माँगने लगा और शांत होने के लिए गिडगिडाने लगा. वो तुरंत मेरे पैरों में पड गया और अपनी गलती के लिए रोने लागा. मैं थोड़ी शांत हुई. वो लड़का सर झुका कर मेरे पैरो में रो रहा था और मैं अभी भी उसके आगे नंगी बैठी थी. मैंने अपना बदन रजाई से ढँक लिया और उसको चले जाने को कहा. उसने अपना पेंट पहना और फिर से हाथ जोड़ कर बिनती करने लागा की मैं उसकी शिकायत न करू और माफ़ कर दू. मैंने फिर से चिल्लाकर उसे रूम से चले जाने को कहा. वो घभराता हुआ धीरे धीरे दरवाजे की और जा रहा था. मैंने उसे रोक कर पूछा की क्या कल देर रात को तुम आये थे? उसने सर झुका कर दोनों हाथ जोड़ कर कहा "जी मैडम". मुझे और एक झटका लगा की क्या कल रात को मैं एक पराये लंड से चुद गयी? मैंने अपने आप को संभालते हुए पूछा "इससे पहले कितनी बार तुमने मेरे साथ ऐसा किया है?” उसने डरते हुए कहा "जी मैडम.. कभी नहीं". मैंने पूछा "तूम ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? उसने वो चुप रहा. मैंने फिर से चिल्लाकर पूछा तो वो घभराता हुआ बोला "जी मैडम, आप बहोत सुन्दर है" उसके मुंह से तारीफ़ सुन कर मन को अच्छा लगा और थोडा गुस्सा ठंडा हुआ. डर के मारे उसकी आवाज़ नहीं निकल रही थी. कुछ देर रुकने के बाद उसने आगे कहा "कल रात का डिनर के बाद जब मैं प्लेट लेने को आया तो आप और साब बेड पर गहरी नींद मैं पड़े थे. आप के कपडे कमर तक चढ़ गए थे. मैं आपको देख कर होश खो बैठा और गलती हो गयी.” वो फिर माफ़ी के लिए गिडगिडाने लगा. मैंने कहा "ठीक है इस बार जाने देती हूँ पर दुबारा ऐसा सोचना भी मत.” वो मुंडी हिला कर चला गया. मेरे पास बदनामी से बचने के लिए और कोई रास्ता नहीं था. अगर प्रकाश को मालुम पड़ता तो शायद वो मुझे कभी माफ़ नहीं करता और शायद मुझे छोड़ भी देता. मैं इसी ख्यालों मैं खोयी हुई थी की प्रकाश आया. मैंने पूछा की वो कहाँ था. तो उसने बताया की वो निचे होटल के रिसेप्शन डेस्क गया था और आस-पास शोपिंग के मार्केट के बारे में इनफार्मेशन ले रहा था. तभी मुझे समजमें आया की जैसे ही प्रकाश रूम मै से निकला होगा तब उस लडके ने मौका पा कर मेरी चुदाई का प्लान बनाया होगा. “

रीना ने आगे कहा "उस दिन मैं अपने आप को काफी कोसती रही. शोपिंग मैं भी मन नहीं लाग रहा था. शोपिंग के बाद दोपहर को हम फिर से रूम पर आये और बस फिर से चुदाई शुरू. पर इस बार बात कुछ अलग थी. प्रकाश का लंड मुझे मेरी चूत मैं महेसुस नहीं हो रहा था. ऐसा लग रहा था की कोई पतली पेन्सिल से मेरी चुदाई हो रही है. मुझे तुरंत उस लडके का खयाल आया. उसका हाथ जोडकर गिडगिडाना और दूसरी और उसके तगड़े लंड का मेरी आँखों के सामने झुलना. कहाँ उसका तगडा लंड और कहाँ ये पेन्सिल. पर ये सब खयालोंका कोई मतलब नहीं था और मुझे मेरी पेन्सिल से ही संतोष मानना था. में सब भूल कर चुदाई में लग गयी. दुसरे दिन शाम को हम निकल ने वाले थे तो जितना समय हमारे पास था उसका पूरा उपयोग करना था. पर जब भी चुदाई के बिच में हम ब्रेक लेते थे तो मुझे उस लडके का ही ख़याल आता था. मैं अनजाने मैं ही उसके लंड की कामना करने लगी थी. मुझे पता नहीं था पर शायद मैं उसके लंड को मेरी चूत मैं महसूस करना चाहती थी. मन को कहीं चाहत थी की एक बार पुरे होशमें मै उसके मोटे लंड का अनुभव करू. ऐसे सब विचार मनकी गहराइयों मैं चल रहे थे. वो लड़का रूम सर्विस के लिए काफी बार रूम मैं आया और गया. मेरा मन मेरे काबू मैं नहीं था. मैं उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए कभी मेरे स्तन खुले रख देती थी तो कभी अपने पैर फैला कर चूत को खुला कर देती थी. पर वो नीची मुंडी करके बिना इधर-उधर देखे आता था और चला जाता था. मेरी हर कोशीश नाकाम रहती थी. रात को चुदाई के बाद हमने डिनर किया और डिनर के बाद प्रकाश थकान के मारे तुरंत सो गया. में भी काफी थक गयी थी पर उसके इंतजार में मैं मुश्किल से जग रही थी. थोड़े समय बाद वो प्लेट्स लेने के लिए आया. मैं उसी का इंतजार कर रही थी. क्या पता जिंदगी मैं कभी ऐसा लंड मिले भी या नहीं. जैसे ही वो आया मैंने उसे आकर्षित करने की बहोत कोशीश की. मैं बेड पर नंगी लेटी हुई थी. उसके आते ही मैंने अपने दोनों पैर फैला कर चूत को अपनी उँगलियों से खोला ताकि वो मेरी गुलाबी चूत देख सके. पर वो कोशीश भी नाकाम रही. वो बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा था. मेरी इच्छा पर पानी फिर गया. मैं निराश हो कर उसके लंड के खयालों मैं सो गयी. मेरी इच्छा अधूरी रह गयी और हम हनीमून से वापस आये. आने के बाद मैं यहाँ सुमनदीदी के घर आई. जब मुझे नील के लंड की बिमारी के बारे मैं पता चला तो एक तरफ बुरा लगा और एक तरफ खुशी हुई. ऊपरवाले ने मेरी सुन ली. और जब ऊपरवाला देता है तो छप्पर फाड़के देता है. मुझे तिन दिन तक नील का लंड पाने की आज़ादी मिली. मुझे मेरी कल्पना से भी ज्यादा मिला. उस लडके का लंड तगड़ा जरुर था पर नील का लंड तगड़ा और लम्बा है. वो चूत फाड़ कर गहराइयों में ऐसे चला जाता है की में अपने आप को भूल जाती हूँ. अब तू ही बता ऐसे लंड के साथ तुझे फिरसे हनीमून का मौका मिले तो तू क्या करेगी?”

रीना का सवाल सुनते ही एसा लगा की सभी सहेलियां जैसे कोई स्वप्न से जगी हो. माया का सलवार खुल कर उसके पैरों में था. उसके पैंटी उतरकर घुटनों मैं आ चुकी थी. सुषमाने अपना टाईट पेंट उतार कर बाजु मैं रख दिया था और पैंटी पैरों मै गिरी पड़ी थी. नीला जो कंवारी थी उसका स्कर्ट कमर ऊपर तक चढ़ा हुआ था और पैंटी घुटनों में थी. और नुपुर की साडी सोफे पर खुली पड़ी थी और पेटीकोट और पैंटी उसके पैरों में थी. चारों अपने पैर फैला कर अपनी नंगी चूत को हाथों से रगड़ रही थी और उसमे उंगलियाँ डाल रही थी. रीना का सवाल सुनते ही वो सब होश मैं आये और रीना ने तगड़े लंड की ऐसी प्यास लगायी थी की उसे पाने के लिए सब के होंठ और गला सुख गया था.
अगर आप भूखे हैं और आप के सामने स्वादिष्ट खाना पड़ा है और खाने की ख्श्बू से कैसे मुंह में से पानी आता है वैसे ही सब की चूत में पानी आ गया. मेरी नज़रों के सामने चार खुबसूरत रस टपकाती हुई गिली चूतें थी और एक चूत जिसके अन्दर मेरा पूरा लंड गडा हुआ था. चारों चूत मैं से एक कंवारी थी जिसने कभी लंड का स्वाद नहीं चखा था और बाकी तिन चूतों को उनके पति के अलावा किसी और ने नही रगड़ा था. पर सभी चूतें जैसे एकदम सिल की हुई थी. चारों अपने पैर फैलाये हुए बैठी थी. मुझे लगा की पैर फैलने पर उनकी चूतें खुल जायेगी और मैं उनकी गुलाबी पंखडीयां देख सकूँगा पर इन सब की चूत बराबर से टाईट थी जैसे फेविकोल का मजबूत जोड़ हो. पर पानी अपना रास्ता बना ही लेता है और उसे तो चूत मैं से निकलना ही था. सभी अपनी चूतें अपने हाथों से मसल रही थी. जैसेही उनको होश आया तो शर्म के मारे सब अपनी अपनी चूतें पास मैं पड़े तकिये से ढकने लगी. पर नंगी जांघो को कैसे ढकें? मेरे आँखों के सामने चार चार गोरी चट्टी जांघे सिकुड़कर बंध हो गयी. रीना ने अपनी चुदाई रोककर कहा "रिलेक्स फ्रेंड्स.. इतना भी क्या शर्माना...”
माया बोली "शर्म तो आएगी ही ना? किसी के सामने मैं ऐसे नंगी नहीं हुई...”
सुषमा ने मजाक किया "अपने पति के सामने भी नहीं?”
नीला बोली "उसको तो अपनी चूत मै ही रखती है...”
माया शर्म के मारे गुस्से से बोली "हाँ तो चूत मैं ही रखूंगी न? तुम्हारे पतियों की तरह उनकी जॉब नहीं है. महीनोभर ट्रावेल पर मुझसे दूर रहते हैं. वापस आते हैं तो पता नहीं कब वापस जाना पड़े? फिर? ऐसे मैं तू क्या करेगी?”
नुपुर भी मजाक के मुड़ में बोली "तेरा पति tour पर जाता है इसमे नीला क्या करेगी? उसे तो कभी लंड लिया ही नहीं है तो उससे दूरी मैं कैसी तकलीफ होती है वो ये बेचारी क्या जाने?
माया बोली "मौका भी है नीला. आज हो ही जाए."
नीला बोली "चल साली मैं तेरे जैसी चुदक्कड नहीं हूँ. मैं तो मेरे पति से ही अपना सिल तुड़वाउंगी.”
माया बोली "तेरे लिए तो वोही ठीक रहेगा तू ये लंड ले भी नहीं सकती"
नीला बोली "तू ले सकती है तो जा न.. ले ले..”
नुपुर बिच मैं पड़ी "अरे ये तुम लोग नील के सामने क्या बोल रही हो? और अपने कपडे तो पहन लो"
सब को फिर से अहेसास हुआ की वे अभी भी नंगी है. सब उठकर अपने कपडे पहनने लगे.
रीना ने फिर से चुदाई से ब्रेक लेकर बोला "its ok.. नील के लिए ये सब अभी नया नहीं है. उसने तुम लोगों को नंगा देखने से पहले मुझे नंगा देखा है. और तो और कल से मैं उससे चुदवा रही हूँ. उससे अब क्या शर्माना?”
सुषमा बोली "तू तो UK चली जाएगी. हम तो यही रहने वाले है. नील ने हमें नंगा देख लिया है. किसीको पता चल गया तो?“
रीना बोली "कैसे पता चलेगा? कोई बाहर किसीको थोडे ही बोलेगा? और नील की गेरेंटी मैं लेती हूँ. आप लोग बेफ़िक्र हो जाओ. वो ऐसा लड़का नहीं है.”
सबको रीना की बात पर भरोसा था पर फिर भी सब शर्मा रहे थे.
रीना ने कहा "अब इतना भी क्या शर्माना. अभी तक तो आप सब नंगी थी तब शर्म नहीं आई. अब अचानक शर्म आने लगी?”
मैंने उनको आश्वासन देते हुए कहा "आप जरा भी चिंता न करे. मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगा. promise”.
सभी रीना की बात पर सहमत थी. वैसे भी नील ने हमारी चूतें देख ही ली है तो अब और क्या शर्माना. सहमत होना और शर्माना तो एक दिखावा था. हकीकत मैं तो सब अपने आप को रोकने मैं नाकाम रही थी. उनकी वासना उनकी बुध्धि पर सवार हो चुकी थी. वो दिमाग का कुछ सुनना नहीं चाहती थी. उन सब की वासना की आग भड़क उठी थी ऊपर से मैंने किसी को कुछ नहीं कहने का वचन दिया जो उनको बेशर्म बनाने के लिए काफी था. पहले नुपुरने, फिर माया ने, फिर सुषमा ने और अंत मैं निलाने एक के बाद एक शर्म को छोड़ कर सब ने अपने पैर फैलाये. पैर फैलाते ही सबकी चूत मैं से वो दबा हुआ रस निकल कर बहार आया. सबने वो देखा. मैंने भी देखा. रीना बोली "देखो तुम्हारी चूत तुम्हारा हाल बयां कर रही है.. मैं तो कहती हूँ...ऐसा मोका फिर कभी नहीं मिलेगा. नील का लंड अभी सुजा हुआ है..फिर नहीं होगा और बाद मैं जिंदगी भर अफ़सोस कराती रहोगी..” थोड़ी देर सबके चहरे का भाव देखकर बोली "मैं तो उसके साथ ही हूँ और मेरे पास तो आज, कल का पूरा दिन और कल की पूरी रात है. तब तक तो मैं उसके लंड को निचोड़ लुंगी. पर आप लोंगो के पास तो यही एक मौका है.” एसा बोलकर रीना धीरे धीरे खड़ी होकर उसकी चूत मैं से मेरा लंड निकाल ने लगी. सबकी नजरे रीना की चूत पर थी. रीना उठती गयी उठती गयी पर मेरा लंड ख़तम होने का नाम नहीं ले रहा था. सब यही सोच रहे थे की अभी लंड का सूपड़ा निकलेगा पर जब रीना काफी ऊपर तक उठी तब जाके सूपड़ा रीना की चूत के रस मैं नहाया हुआ दिखा. सबका मुंह और आँखे खुली की खुली रह गयी.

रीना उठकर मेरे पास बैठ गयी. हम लोग रह देख रहे थे की कोई तो चुदाई के लिए उठेगी. पर कोई हिम्मत नहीं कर रहा था. मै भी सब को देख रहा था. माया अपनी उंगलियाँ चूत की गहराईयों में डालने के लिए बड़ी मचल रही थी. मैं उठ कर माया के पास गया और उसके फैले हुए पैरों के बिच में अपने घुटनों के बल बैठ गया. बैठते ही मेरा लंड उसकी चूत में गडी हुई उँगलियों को छुआ. लंड के छूते ही उसकी साँसे तेज हो गयी और अपनी कमर से ऊपर उठ कर चूत मैं से उंगलियाँ निकाल कर लंड को अपने हाथों से चूत पर दबा दिया. मेरे लंड को बड़े प्यार से सहलाने लगी उसकी आँखे बंध हो गयी जैसे गहरी नींद मै चली गयी हो. उसकी चूत उछल-उछल कर मेरे लंड को टकरा रही थी. पर वो कुछ बोल नहीं पा रही थी. सबको माया की ये हालत देखकर बड़ी तरस आई. सब माया की मदद के लिए उसके पास गए. सुषमा ने माया को पूछा "कितना टाइम हुआ?” काफी समय बाद लंड का स्पर्श होने पर माया का बदन कांप रहा था. उसका बदन गर्म हो रहा था. वो कांपते हुए बोली "तत..तिन.. तिन मममहि...ने.. हु हु हुए".
नुपुर बोल पड़ी "ओह माय गॉड... इतना समय तूने कैसे काटा? तुम कैसे रह सकी?”
सुषमा बोली "मैं तो दो दिन होता है तो तरस जाती हूँ और तूने तिन महीने निकाले? पागल हो गयी है क्या? तू उनको इतने लंबे समय के लिए जाने क्यों देती हो?"
माया किसी का जवाब देने की हालत मैं नहीं थी. वो तो उछल-उछल कर अपनी चूत को लंड से टकरा रही थी और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी. ”
रीना बोली "माया, ओ माया....होश मैं आओ..”
नुपुर बोली "माया.. डाल दे..”
माया ने सर हिला कर मना किया.
नुपुर बोली "जिद मत कर.. तेरी हालत देख...तू ले ले..”
माया बोली "मेरा पति...कभी माफ़...नहीं..”
रीना ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही काट दिया...”तेरे पति को कुछ नहीं मालुम पड़ेगा..मैं सच कहती हूँ..मुझ पर भरोसा रख..”
मैंने पूछा "माया दीदी डालने दो ना... आपकी चूत बहोत सुन्दर है..please..."
माया ये सुनते ही मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे लंड के सुपडे को अपनी चूत मैं समाने के लिए तड़प ने लगी. मैंने भी उसकी चूत मैं डालने की कोशीश की पर मेरा लंड सरक कर यहाँ वहां चला जाता था. माया की चूत काफी कड़क हो चुकी थी और खुलने का नाम नहीं ले रही थी. इसीलिए मेरा लंड उसके अन्दर नहीं जा रहा था. सुषमा ने मुझे मायाके ऊपर से उठाने को कहा. मेरे उठने पर नीला ने मायाको सहारा देकर बिठाया और मायाका कमीज़ निकालने लगी. मायाके स्तन बहोत बड़े थे. शायद मेरे सर जितने बड़े होंगे. निकालते समय कमीज़ उसके स्तन पर अटक गया. निलाने जोर लगाकर कमिज़को ऊपर खिंचा. जैसे जैसे नीलाने कमिज़को ऊपर खींचा, मायाके दोनों स्तन कमिज़के साथ ऊपर उठे और कमिज़ निकलतेही वे गिरकर निचे पड़े. उसकी नीचेकी आधी ब्रा स्तनके ऊपर चढ़ गयी थी और निचेसे आधे स्तन नंगे दिखने लगे. बिना देर किये नीलाने उसके ब्रा के हुक खोल कर मायाके स्तन को आज़ाद किया. आज़ाद होते ही दोनों स्तन अपनी अपनी जगह झूलने लगे. नुपुरने मायाको वापस सोफे पर सुला दिया और माया के स्तन को सहलाने लागी. माया अब अपने आपे में नहीं रही. निलाने माया के बाल खुले कर दिए. सबने मायाको कमर से जकड दिया ताकि वो उछलना बंध करे. मायाकी कमर कंट्रोलमैं आते ही मैंने उसके पैर फैलाए और मेरा सूपड़ा फिरसे उसकी चूत पर रखा. मेरा लंड उसकी चूत मैं इतनी आसानी से जाने वाला नहीं था वो मैं जानता था. मैंने अपने दोनों हाथोंसे मायाकी चूत को खोला और सुपडे को उसकी चूत के काने पर दबाया. अब सुपडे की इधर-उधर जाने की कोई गुंजाइश नहीं थी. मेरा सूपड़ा गरम था पर माया की चूत उससे कई गुना गरम थी. उसको मेरा लंड ठंडा लग रहा था. उसकी चूत को कुछ ठंडा छुते ही माया कमर से उछल पड़ी और मेरा लंड फिरसे बहार निकल गया.

मैंने मायाकी कमरको दोनों हाथों से पकड़ा और लंड को उसके काने ऊपर रख कर एक जोर का धक्का मारा और माया के ऊपर गिर पड़ा. मेरा मुंह उसके दोनों स्तन की गहराई के बिच दब गया और लंड उसकी चूत को चिर कर उसकी गहराई को नाप रहा था. माया जोर से चीखी और लगभग बेहोश हो गई. मैं उसके ऊपर से उठा. सब लोग उसे हवा डालने लगे और उसका पसीना पोछने लगे. माया हिलने की हालत मैं नहीं थी और उसने मुझे भी हिलने से रोका. मैं रुक गया. माया की साँसे फूली हुई थी. उसका गला सुख रहा था. कुछ देर बाद वो शांत हुई और अपनी आँखे खोल कर आसपास देखा. उसने नीला को अपने पास खिंचा और उसके होठों को चूमने लगी. अपने हाथों से अपने स्तन को सहलाने लगी. उसके साथ नुपुर और रीना भी जुड़ गयी. मायाके हाथों को हटाकर


दोनो ने एक-एक स्तन पर कब्ज़ा कर लिया. उसे सहलाने लगे, चूमने लगे, चूसने लगे. दोनों के नंगे गोरे और मांसल चुतड मेरी और थे. मैंने दोनों के चुतड पर हाथ रखा और उसे सहलाने लगा. रीना के लिए ये नयी बात नहीं थी पर नुपुर के चुतड को छूते ही जैसे उसे करंट लगा. पहली बार कोई पराया हाथ उसकी चुतड को छू रहा था तो झटका तो लगेगा ही. करंट लगने पर कैसे हम अपने हाथों को तुरंत खिंच लेते है वैसे नुपुर ने अपने चुतड खिंच ली और पीछे मुड़कर मेरी और देखा. मेरी आँखों मैं आँखे डाली और फिरसे माया के स्तन सहलाने मैं जुट गयी. जैसे उसने मुझे उसके चुतड के साथ खेलने की अनुमती दे दी हो. मैंने फिरसे उसके चुतड पर हाथ रखा. अब उसका कोई रिएक्शन नहीं था. उसके चुतड पर एक चमाट मारी और उसे अपनी मुठ्ठी में दबाया. एसा लग रहाथा जैसे कोई मसका-बन हो. चमाट पड़तेही चुतड पर लहू उभर आया. दो चार और चमाट लगाने पर उसकी चुतड लाल हो गयी. वो द्रश्य बेहद खुबसूरत था. गोरी दूध जैसी चुतड पर लाल रंग और बिच मैं काले घने बालों मैं घिरी चूत और उसके बराबर बिच मैं लाल चूत पतली सी की दरार. दरार मैं से निकला हुआ चूत का रस उसके चूत के घने बालों मैं यहाँ वहां चिपका हुआ था. एक अदभुत नजारा था. मैंने अपनी पहली दो उंगलिओं को उसकी चूत पर रगडा और चूत का रस उसकी पूरी चूत पर और उसकी चुतड पर मल दिया. उसकी चूत बेहद मुलायम थी. उसमे अंगूठा डालते ही दबा हुआ रस निकल कर उसकी जांघो पर गिरा. रीना और नुपुर की चूतें सहलाते हुए मैंने धीरे धीरे मेरे लंड माया की चूत से बाहर निकाला. उसकी चूत मेरे लंड पर बड़ी मजबूती से चिपकी हुई थी. लंड निकालते हुए एसा लग रहा था की उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही हो. लंड निकालते ही मालुम पड़ा की उसकी चूत खुल चुकी थी और हलकीसी फट गयी थी और थोडा खून निकल आया था. बिना कुछ देर किये मैंने फिर से मेरा लंड उसकी चूत मैं गाड़ दिया. अब माया को कुछ संतोष की अनुभूति हो रही थी. लंड का उसकी गहराईयों को छूते ही उसने मरी सहूलियत के लिए अपने पैर और फैलाए. मैंने लंड को फिरसे निकाला और देखा तो माया की चूत अपना मुंह फाड़े बैठी है. अब मैं भी उसकी चुदाई के लिए उतावला था उसकी चुदाई शुरू की. हर एक धक्के पर वो मुझे और जोर से करने के लिए उकसा रही थी और मेरा लंड भी हर बार नयी गहराई को छू रहा था. एक लय से माया चुद रही थी और नीला के होंठ और जोर से चूस रही थी. इस तरफ सुषमा माया की चूत के पास बैठ गयी और मेरी गोटीयों से खेलने लगी. करीब पांच मिनट मै ही माया उछल पड़ी. सब लोग बाजु हट गए और मैं उसके ऊपर चढ़ गया. वो झड ने लगी थी उसकी चूतने मेरे लंड के ऊपर जोर की पकड़ जमा ली थी पर मैं उसी लय से उसकी चुदाई करता रहा. रीना की तरह वो भी बस झड़ती ही चली. एक के बाद एक सतत कई बार झड़ने से वो संतोष की सभी सीमाए पार कर चुकी थी. उसके चहरे पर एक परम शांति और परम सुख का भाव था. सबने माया का हाथ पकड़ कर रखा था नहीं तो वो मेरी पीठ को जरुर नोंच लेती. मेरी पीठ की चमड़ी उखेड लेती. अब मैंने मायाकी चूत मैं से लंड को निकाल दिया. माया अपना पूरा शरीर ढीला छोड़ कर सोफे पर आँख बंध करके सो गयी.






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