Friday, November 22, 2013

FUN-MAZA-MASTI भैया और सैंया--3

FUN-MAZA-MASTI

 भैया और सैंया--3

 निशु बोली- आप चलिए, मैं तैयार हो कर आती हूँ।

पर मेरे लिए अब रुकना मुश्किल था, बोला,"इसमें तैयार क्या होना है, नंगा होना है बस।"

और मैं अपने शर्ट के बटन खोलने लगा। कुछ समय में ही मैं सिर्फ़ अपने फ़्रेंची अंडरवीयर में था।

निशु पास खड़ी देख रही थी, बोली,"बहुत बेचैनी है क्या?"

वो मुझे चिढ़ाने के मूड में थी। मैं उसकी ये अदा देख मस्त हो रहा था, पर उपर से बोला- "अब जल्दी से आ और प्यार से चुदवा ले, वर्ना पटक के चूत चोद दूंगा। साले यार लोगों ने रोज़ पूछ पूछ कर कान पका दिया है।"

निशु अब सकपकाई और पूछा,"क्या आप अपने दोस्तों से मेरे बारे में बात करते हैं?"

उसके चेहरे से चिंता दिखी तो मैंने सच कह दिया,"सुमित और अनवर रोज़ पूछते हैं, उस दिन का ताश का खेल भी मेरे और तुम्हारे बीच यही करवाने के लिए ही तो था। असल में, जब से तुम आई हो उस दिन से वो दोनों तेरे बदन के पीछे पड़े हैं।"

निशु अब सामान्य हुई,"अच्छा वो दोनों, मुझे लगा कि कोई और दोस्त को भी आपने बताया हैं। क्या आप आज रात की बात भी उनको बताएँगें?"

मैंने देखा कि अब सब ठीक है, सो सच कह दिया- "जरूर, वो जरूर पूछेंगे, और तब मैं बता दूंगा !"

और मैंने निशु को पास खींच कर अपने सीने से लगा लिया और उसके होठों का रस पीने लगा।

निशु भी सहयोग कर रही थी, हम लोग कोई ५ मिनट तक सिर्फ़ होठ ही चूसते रहे। निशु की साँस थोड़ी गहरी हो गई थी।

मैंने निशु को कहा,"चलो अब बेड पर चलते हैं।" उसने एक बच्चे की तरह मचलते हुए कहा,"मैं खुद नहीं जाउंगी, गोदी मे ले चलो मुझे। मैं तुमसे छोटी हूँ या नहीं।"

उसे बच्चों की तरह मचलते देख मुझे मजा आया, बोला,"साली, नखरा कर रही है, छोटी है तू, अभी दो मिनट में जवानी चढ़ जायेगी !" और उसको मैंने गोदी में उठा लिया।

वो मेरे सीने से लग गई और बोली,"ऐसे कभी गोदी लेते क्या आप, अगर मैं न कहती !"

मैंने जवाब दिया,"अरे तेरे जैसी मस्त लौंडिया अगर बोले तो अपने सर पे बिठा के ले जाऊँ उसे !"

मैंने उसको अपने बेड पे ला कर पटक दिया। मुझे पेशाब आ रही थी, तो बाथरूम जाते हुए मैंने कहा,"अब उतार अपने कपड़े, और नंगी हो जा, जब तक मैं आता हूँ"।

मैं जब लौटा तब भी निशु अपने पूरे कपड़ों में बेड पर दिखी। मैं थोड़ा चिढ़ गया इस बात पर। मैं बोला - "क्या साली नखरे कर रही है, मेरा लण्ड खड़ा करके। मेरे से कपड़े उतरवाना है तो आ जरा लण्ड चूस मेरा।"

वो भी थोड़ा तुनक कर बोली,"अच्छा, तो अब मैं आपकी साली हो गई। आप दो बार मुझे साली बोल चुके हैं !"
फ़िर मुस्कुराने लगी।

मैंने हँसते हुए कहा,"तो क्या तुम मुझे बहनचोद बनाना चाहती हो?"

इस बार वह सेक्सी अंदाज़ में बोली,"आप मुझे रंडी बना रहे हो तो कोई बात नहीं और मैं आपको बहनचोद भी ना बनाऊँ ?"

और वो मेरे से सट गई। मैंने उससे नज़र मिला के कहा,"मैं तो तुम्हें अपनी रानी बना रहा हूँ जान, रन्डी नहीं। पर तुम्हारे लिये बहनचोद, क्या तू जो बोल वही बन जाऊँगा मेरी प्यारी निशु।"


 मैं फ़िर उसके होंठ, गाल चूमने लगा। वो साथ देते हुए बोली,"थैंक्स संजीव भैया, पर मुझे तो रन्डी बनना पड़ेगा अब। आपके दोनों दोस्त मुझे ज्यादा दिन छोड़ेंगे ही नहीं !"

मैंने उसकी हाँ में हाँ मिलाई,"यह बात तो है, निशु, पर कोइ बात नहीं एक-दो बार से ज्यादा वो लोग नहीं करेंगे। मैं जानता हूँ उनको !"

निशु थोड़ा गरम होने लगी थी, बोली,"अब छोड़ो ये सब बात और चलो शुरु करो संजीव भैया !"

मुझे यह सुनकर मजा आया,"क्या शुरु करे तुम्हारा संजीव भैया, जरा ठीक से तो कहो मेरी छोटी बहना।"

मेरा हाथ अब उसकी दाहिनी चुची को कपड़े के उपर से ही मसल रहा था। एक बार फ़िर मैंने पूछा,"बोल न मेरी बहना, क्या शुरु करे तुम्हारा भैया ! बात करते हुए ज्यादा मजा आयेगा मेरी जान। इसलिए बात करती रहो,

जितना गंदा बात बोलोगी, तुम्हारी चूत उतना ज्यादा पानी छोड़ेगी। अब जल्दी बोलो बहन, क्या शुरु करूँ मैं?"

उसकी आँखें बन्द थी, बोली -"मेरी चुदाई"

चुदाई या तेरे चूत की चुदाई?

"मेरी चूत की चुदाई", वह बोली।

मेरे दोनों हाथ अब उसके चूतड़ों पर थे, मैं हल्के हल्के उन्हें दबा रहा था।

फ़िर मैंने उसको बेड पर बिठा दिया, और उसकी कुर्ती धीरे धीरे सर के ऊपर से निकाल दी। इसके बाद मैंने उसकी सलवार खोल दी। अब निशु मेरे सामने एक सफ़ेद ब्रा और काली पैंटी में थी।

मैने कहा,"अब ठीक है, आओ लण्ड चूस कर एक पानी निकाल दो !"

निशु अब मजाक के मूड में थी, अपनी गोल गोल आँख नचाते हुए बोली,"किसका लण्ड चुसूँ, मुझे तो कोई लण्ड दिख नहीं रहा।"

मुझे उसकी ये अदा भा गई, मैने गन्दे तरीके से कहा,"अपने प्यारे भैया का लण्ड निकालो और फ़िर उसको मुँह से चूसो, मेरी रन्डी बहना ! अपने भैया को सैंया बना के चुदवाओ अपनी चूत और फ़िर अपनी गांड भी मरवाओ !"

मैं सीधा लेट गया। निशु ने मेरा लण्ड चूसना शुरु कर दिया। मैंने उसको लण्ड से खेलना सिखाया और वो जल्दी ही समझ गई और मुझे मजे देने शुरु कर दिये। कोई १० मिनट चुसाने के बाद मेरा लण्ड जब झरने वाला था, मैने निशु को कहा कि वो तैयार रहे और फ़िर मैं उसके मुँह में झर गया। मेरे कहने से उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।

अब मैने उसकी ब्रा और पैन्टी खोल दी। काली काली झांटों से भरी हुई उसकी चूत का एक बार फ़िर दर्शन कर मैं निहाल हो गया। जैसे ही मेरे हाथ निशु की चूत की तरफ़ गये, वो बोली,"भैया, कुछ होगा तो नहीं। डर लग रहा है, कहीं बदनामी ना हो जाए।"

मैंने समझाते हुए कहा,"कुछ नहीं होगा। आज तक जब तुम्हारी बदनामी नहीं हुई तो अब क्यो डर रही हो?"

उसका जवाव सुन के मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो बोली थी,"आज पहली बार करवाऊँगी, इसीलिए डर रही हूँ।"

मैं बोला-"क्या, क्या तुम कुँवारी हो अब तक?" उसके हाँ कहने पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। मैंने बोल ही दिया,"मुझे विश्वास नहीं हो रहा। एक कुँवारी लड़की होते हुए तुम उस दिन तीन तीन जवान लड़कों के सामने नंगी हो कर खेल रही थी?"

वो हँसते हुए बोली,"इसमें विश्वास न करने वाली बात क्या है? आप तीनों मुझ पर लाईन मार रहे थे कई दिन से, सो उस दिन मैं भी सोचा कि चलो आज लाईन दे देती हूँ, बस। आप लोग को मजा आया तो मुझे भी तो मजा आया।"

मैं हँस दिया,"बहुत कुत्ती चीज है तू बहना। चल लेट, जरा तेरी चूत की जाँच करूँ, कैसी कुँवारी कली है तू !"
और मैंने उसकी चूत की फ़ाँक खोल करके भीतर की गुलाबी झिल्ली की जांच की। साली सच में कुँवारी थी।

सांवले बदन की निशु की चूत थोड़ी काली थी, जिससे उसके चूत का फ़ूल ज्यादा ही गुलाबी दिख रहा था। करीब १० मिनट तक उसकी चुची और चूत को चुमने चाटने के बाद मैने उसकी टांगों को चौड़ा कर के उसकी चूत को खोल दिया और खुद बीच में बैठ के लण्ड को निशु की चूत की फ़ाँक पर सेट कर लिया। मजे से निशु की आँख बन्द थी। वह अब सिर्फ़ आह-आह-आह सी सी सी जैसा कर रही थी।

मैंने निशु से पूछा,"तैयार हो निशु रानी चुदवाने के लिए? मेरा लण्ड तुम्हारी चूत को चुम्मा ले रहा है। कहो तो पेल दूँ भीतर और फ़ाड़ दूँ तुम्हारी चूत की झिल्ली? बना दूँ तुम्हें लड़की से औरत? कर दूँ तुम्हारे कुँवारेपन का अंत? बोलो जान, बोलो मेरी रानी, बोल मेरी बहना, चुदवाएगी अपने भैया के लण्ड से अपना बूर?"

अब उससे रहा नहीं जा रहा था, वह बोल पड़ी,"हाँ मेरे भैया, चोद दो मेरी बूर अपने लण्ड से। बना दो मुझे औरत। अब मुझे कुँवारी नहीं रहना।"


 मैं अपना लण्ड पेलने लगा वो थोड़ा कसमसाई, शायद उसको दर्द हो रहा था। पर मैं नहीं रुका, उसकी गीली बूर में लण्ड ठाँसता चला गया। निशु इइइस्स्स्स आह करती जा रही थी और बोलती जा रही थी,"कर दो मेरे कुँवारेपन का अंत आज । मेरी बूर को जवानी का मजा दो मेरे भैया, लूट लो मेरे जवानी को और चोद कर बना दो मुझे रन्डी। चोदो मुझे भैया, खूब चोदो मुझे। मेरी जवानी का रस लूटो संजीव भैया।"

मैं जोश में चोदता जा रहा था। हम दोनों साथ साथ बोलते जा रहे थे। मैं बोल रहा था,"चुद साली चुद। अब फ़ट गई तेरे बूर की झिल्ली। गया तेरा कुँवारा पन। लूटो मजा अपनी जवानी का। साली अभी थोड़ी देर पहले बच्ची बनी हुई थी। गोदी में घूम रही थी। अब इसी चूत से बच्चे पैदा करेगी तू मेरी बहना। मैं तुम्हें चोद कर बच्चे पैदा करुँगा। चुदो साली चुदो, खूब चोदवाओ।"

निशु भी बड़बड़ा रही थी,"अभी बच्चा नहीं। अभी मुझे अपने बूर का मजा लूटना है। खूब चुदवाऊँगी। जवानी का मजा लूटूँगी। फ़िर बच्चे पैदा करुँगी। आआआहह चोदो और चोदो मुझे। रन्डी बना के चोदो। बीवी बना के चोदो। साली बना के चोदो। बहन बना के चोदो, नहीं बहन तो हूँ ही। और आप बहनचोद हो।

संजीव भैया, बहनचोद भैया, चोदो अपनी छोटी बहन को।" मैंने अब उसको पलट दिया और पीछे से उसकी बूर में लण्ड पेल दिया और एक बार फ़िर चुदाई चालू हो गई। अब वोह थक कर निढाल हो गई थी, मैने ८-१० जोर के धक्के लगाये और फ़िर मैं भी झर गया। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था, मेरा माल उसके नितम्बों पर फ़ैल गया।

निशु मेरे नीचे पेट के बल बेड पे थी और मैं उसके ऊपर था। मेरा लण्ड उसके गांड की दरार पर चिपका था। हम दोनों जोर जोर से हाँफ़ रहे थे, जैसे मैराथन दौड़ कर आये हों।

तभी घड़ी ने ११ बजे का घंटा बजाया।

मैने निशु से कहा,"अब?"

वोह हाँफ़ते हुए बोली,"अब कुछ नहीं, बस सोना है"

और उसने करवट बदल ली। हम दोनों नंगे ही सो गये।

जब एक बार निशु को मुझसे चुदाने का मजा मिल गया तब फ़िर क्या परेशानी होनी थी। हम दोनों उसके बाद खुल कर बेहिचक और बेझिझक एक दूसरे के साथ मस्ती करने लगे। निशु होस्टल नहीं गई और मेरे साथ ही रहने लगी।

पिछले चार महीने में हम दोनों ने सैकड़ों बार चुदाई का खेल खेला। कुछ नया ऐसा न हुआ कि आप सब को बताया जाए। मेरे दोनों दोस्त अनवर और सुमित भी आते तब भी कुछ खास न हुआ।

सुमित को एक नई लड़की मिल गई थी और वो उसके साथ व्यस्त था। अनवर ने भी निशु के साथ सेक्स करने की बात ना की, पर निशु अक्सर कहती कि पता नहीं कब आपके दोस्त लोग मेरे में अपना हिस्सा माँगेंगे।

मैं तब उसे समझाता कि वो ऐसे नहीं हैं, बहुत होगा तो एक दो बार वो तुम्हें कहेंगे पर अगर तुम ना कर दोगी तो वो जिद नहीं करेंगे।

पर अब करीब चार महीने बाद पिछले रविवार को सुबह ही अनवर मेरे घर आया। मैं अखबार पढ़ रहा था और निशु टीवी देख रही थी। हम दोनों में से चाय कौन बनाए, यह अभी तय नहीं हुआ था। अनवर मेरे पास बैठ गया और इधर-उधर की बात करने लगा। फ़िर सुमित की बात आई कि वो कल रात भी अपनी गर्लफ़्रेंड के साथ था।

और तभी अनवर बोला- साले तुम दोनों की चाँदी है, रोज चूत से लण्ड की मालिश करते हो। अब मैं शादी ही कर लेता हूँ, मेरे साथ भी एक हमेशा रहेगी। आज एक महीना हो गया किसी को चोदे। ब्लू फ़िल्म देख कर मुठ मारता हूँ।

असल में पहले ऐसा नहीं था, तब हम तीनों के साथ कोई रेगुलर न थी। वो अब निशु को देख रहा था, पर कह नहीं पा रहा था।

मैंने निशु को कहा- सुन रही हो ना ! कैसा बेचैन है ! अब जरा बेचारे को चाय तो पिलाओ !

निशु मुस्कुराते हुए चाय बनाने चली गई।

वो अब मुझसे पूछने लगा- क्या निशु मुझे एक बार चाँस देगी?

मैंने भी कह दिया- खुद ही पूछ कर देख ले !

तभी निशु चाय ले कर आई।वो तब एक ढीली टी-शर्ट और बरमुडा पहने थी। नीचे कोई अन्तर्वस्त्र न था, इसलिए उसकी चुचियाँ चलने से फ़ुदक रही थी। हम सब जब चाय पीने लगे तब वो बोला- निशु, प्लीज न मत कहना !

बहुत मन हो रहा है, एक बार मेरे साथ कर लो ना !

वो एक दम से बोल गया था, सो निशु तुरंत जवाब न दे सकी।

अनवर ने फ़िर से निशु से कहा और तब निशु ने मुझे देखा।




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