FUN-MAZA-MASTI
फागुन के दिन चार--93
गतांक से आगे ...........
देश वापसी
करन ने नयी दिल्ली स्टेशन के एक पी सी ओ से जैसमिन से बात की और उसे पहाड़गंज के एक रेस्टोरेंट में मिलने को कहा।
करन खुद थोड़ी देर में उस रेस्टोरेंट के सामने वाले होटल में बैठ गया ...और वहीँ से निगाह रखे हुआ था .
थोड़ी देर में उसने जेसमीन को सामने की दूकान में घुसते देखा। बाहर निकल कर उसने चारो ओर देखा की कोई जेसमीन का पीछा तो नहीं कर रहा और निश्चिंत होने के बाद ही वो रेस्टोरेंट में घुसा।
बाहर निकल कर दोनों एक आटो से चले , तय ये हुआ था की सारे एविडेंस रास्ते में उतर कर जैसमिन एक बैंक के लाकर में डाल देगी, जिससे कर्नल अहलुवालिया निकाल लेंगे। करन सीधा कर्नल अहलुवालिया के घर जाकर रुकेगा और जैसमीन भी वहीँ मिलेगी।
लेकिन गड़बड़ हो गया .
पहाडगंज से निकलते ही जैसे ही उनका ऑटो बाहर आया ...करन ने नोटिस किया की दो लोग ऑटो से ही उसका पीछा कर रहे हैं . करन ने रिजर्वेशन आफिस के पास , अपने आटो वाले से रुकने की कहा ...
और पीछे वाला ऑटो भी धीमे हो गया।
उसका शक विश्वास में बदल गया।
वो रिजर्वेशन आफिस की ओर उतर कर बढ़ा ...तो पीछे वाले ऑटो के लोग भी उतर पड़े ...बस यही तो वो चाहता था ...उसने अपने ऑटो के रियर व्यू मिरर में अच्छी तरह उनकी शकल देख ली
और फिर उसने अपने ऑटो वाले को चलने के लिए बोला ...कनाट प्लेस में एक बैंक के सामने उसने ऑटो को रोका।
जैसमिन ने बैंक सही चुना था ...वो एकदम में रोड पर था और उतरते ही वो बैंक में होती ...और वहां भीड़ भी थी और सिक्योरिटी भी , बस उसे यही देखना की थी ...वो लोग उसका पीछा कर रहे थे या जैस्मिन का ...
अगर वो जैसमिन का पीछा कर रहे होंगे तो ज्यादा मुश्किल होगा ...क्योंकि एविडेंस अब उसने जैसमिन को दे दी थीं ...और उसे फिर कोई डाईवर्जन क्रियेट कर जैसमीन को प्रोटेक्ट करना पड़ता .
लेकिन पीछे वाला ऑटो रुक जरुर पर वो दोनों जमूरे उतरे नहीं ..
अब ये साफ था की वो करन के ही पीछे हैं .
उनसे पीछा छुडाना करन के लिए बाएं हाथ का खेल था ...लेकिन एक तो वो चाहता था की जैसमिन को पूरा टाइम मिल जाय ...और दूसरे वो चेक करना चाहता था की ये कितने प्रोफेशनल हैं ...
उसने अपने ऑटो वाले से बोला की वो उसे राजीव चौक मेट्रो स्टेशन छोड़ दे ...
वहां से वो मेट्रो में बैठा और सेन्ट्रल सेक्रेटेरियेट उतर गया ...वो सबसे बड़ा भीड़ भाड़ वाला स्टेशन है ..वो भी शाम को .
वहां से उतर कर उसने टैक्सी की ...दोनों जमूरे अभी भी उसके पीछे थे ...
लेकिन उसी समय जैसमीन का कोडेड मेसेज आ गया ...सामान उसने बैंक के लाकर में रख दिया है ...और वो वहां से पांच मिनट पहले निकल पड़ी है , दस मिनट में कर्नल के घर पहुँच जायेगी . उसकी एक चिंता तो दूर हुयी .
लेकिन उसे अब दूसरी चिंता लग गयी थी . उसका पीछा करने वाली टैक्सी में अब कोई दूसरे लोग थे ...इसका मतलब की ये प्रोफेशनल थे ...और थोड़ी देर में उसने जो सोचा था वही हुआ ...उसके आगे भी एक टैक्सी थी ...और उसमें दोनों जमूरे थे ...यानी वो उसे सैंड विच कर रहे थे ..
.उसने कई बार रास्ता बदला लेकिन वो दोनों टैक्सिया उसके आगे पीछे ही थीं ...लेकिन अब वो घर के पास पहुँच रहा था और उसे इनसे पीछा छुड़ाना था ...
उसने टैक्सी वाले को पहले तो पेमेंट कर दिया ...फिर उससे बोला की वो एक संकरी गली में मोड़ ले ...
उससे आगे वाली कार से तो उसका पीछा छुट गया ....लेकिन पीछे वाली कार थी
कर्नल अहुवालिया का घर अब वहां से मुश्किल से पांच सौ मीटर था ...और यहाँ गली में रोड पर मिलती थी।
करन की हालत खराब हो गयी जब उसने सामने देखा ..एक कंटेनर लदा हुआ ट्रक गली के मुहाने पे खड़ा था
करन समझ गया अब ढिशुम ढिशुम टाइम आ गया है।
पीछे वाली कार से दो लोग उतरे दोनों के हाथ में लम्बे लम्बे चाक़ू ...और सामने कंटेनर वाली ट्रक से भी तीन उतर कर खड़े हो गए इक के हाथ में चेन और दो चाक़ू वाले ..
करन ने अपने टैक्सी वाले को बोला की वो शार्प ब्रेक मार के एक सेकेण्ड के लिए गाडी बस रोके और फिर तेजी से बैक करे ...पीछे की ओर ..
टैक्सी रुकते ही करन तेजी से आगे की ओर बढ़ा ...और उधर उसकी टैक्सी के बैक होने पर पीछे से आ रहे हमलावर ..अचकचा कर रुक गए ...इतना समय करन के लिए काफी था
ट्रक के सामने खड़े गुंडों में से उसने चेन वालों को अपना टार्गेट बनाया ...लेकिन तब तक दोनों चाक़ू वाले उसपर हमला कर चुके थे ..
.एक घाव उसे शोलडर ब्लेड के पास लगा और दूसरा कुल्हे के पास ...वो झुक गया था इसलिए घाव हलके थे।
लेकिन वो दुबारा हमला करते ...उसके पहले उसने एक की कलाई मोड़ दी और दूसरे को जबर्दस्त किक मारी ...मोसाद वालो ने उसे जबर्दस्त किक बाक्सिंग सिखाई थी ...तीस सेकेण्ड में तीनों नीचे थे और करन ट्रक के अन्दर
एक ने ट्रक के अन्दर घुसने की कोशिश की ...करन ने इत्ती जोर से दरवाजा खोला की उसे सौ झापड़ के बराबर चोट लगी और वो वहीँ धराशायी ...
करन तेजी से ट्रक लेकर आगे बढ़ा ....गुंडे पीछे रह गए ...
लेकिन थोड़ी देर बाद आगे लाल सिगनल था और उसके आगे जाम ...करन ट्रक छोड़ कर भीड़ में कूद गया
...यहाँ से कर्नल अहलुवालिया का घर सौ मीटर से भी कम दूर था। अब करन ने पहली बार नोटिस किया की उसकी शर्ट खून से लथपथ है ...कर्नल का घर अब दिख रहा था लेकिन बाहर एक पुलिस की वान और सिक्युओरिटी गार्ड्स खड़े थे और जैसे ही वो गेट के पास पहुंचा ...उसने देखा की जैसमिन उसका वेट कर रही है ..
अन्दर आओ जल्दी वो बोली ...फिर अचानक चिल्लाई ...बचो
और जैसमिन की चीख ने उसकी जान बचा ली , वो झुका मुडा और तब भी चाकू उसके कंधे के पास आकर धंस गया।
अगर जैस्मिन ने वार्न ना किया होता तो चाक़ू सीधे उसकी गरदन पे लगता ...
जैसमिन ने उसका हाथ खींच के गेट के अंदर किया और तुरंत सिक्योरिटी वालों ने बड़ा सा लोहे का गेट बंद कर दिया .
घर के दरवाजे पे पहुँच कर वो करन से बोली , तुम अन्दर चलो मैं आती हूँ ,
और जैसे ही करन अन्दर पहुंचा जेसमीन ने बाहर से एक बड़ा सा ताला लगा दिया।
करन जब अन्दर पहुंचा तो घुप अँधेरा ...और सन्नाटा ..
जैसमिन पीछे के रास्ते से अन्दर आई दरवाजा बंद करते ...
कोई है नहीं क्या और इतना अँधेरा ...उसने जैसमिन से पूछा ...
जैसमिन ने तेजी से उसे चुप रहने का इशारा किया और हाथ पकड के उसे कर्नल अहलुवालिया कमरे में ले गयी ...और वहां एक पेंटिंग को हटाया ..और वहां एक पैड था ...उसपे उसने कुछ नमबर दबाये ...और एक अंडर ग्राउंड बंकर के लिए रास्ता खुल गया।
अब नीचे पहुँच कर एक वैसा ही पेड ...
और जैसमिन ने उस पर भी बटन दबाए ...और मुड कर मुस्करा कर करन को बोली ...
" अब कोई ऊपर उस पैड से भी ये दरवाजा नहीं खोल सकता ...अब तुम तीन दिन तक यहाँ बंद हो ...हम तुम एक कमरे में ...और चाभी ...है ही नहीं ...'
मतलब ..करन को कुछ समझ में नहीं आया ..
भूल गए तुम ...तुम्ही ने तो मेसेज दिया था ...आज सात तारीख है ...जैसमिन उसके कंधे पे हाथ रख के बोली ..
ओह्ह वो बोला ..इत्ती लम्बी जर्नी में तारीख भी नहीं याद रही ...
करन ने मेसेज दिया था की अगला हमला कर्नल अहलुवालिया पर ही होगा और वो सात को होगा ...
जैस्मिन ने पूरी बात समझाई ..
.कर्नल अहलुवालिया ..डिफेंस कैण्टॊन्मेन्ट में एक सेफ हाउस में दो दिन पहले चले गए हैं ...लेकिन उन्हें मेरी और तुम्हारी चिंता थी ...ये पता नहीं था की तुम कब आओगे तो ये जिम्मेदारी उन्होंने मुझे सौंपी थी ..की तुम जैसे आओ मैं तुम्हे ले आऊं ...
ये एरिया इमपेण्ट्रेबल है ...उन्होंने बोला है की हम लोग तीन दिन तक कम से कम बाहर ना निकलें ..
और उसके बाद भी उन से पूछ कर बाहर आयें ...
तब तक करन की निगाह बंकर में चारो ओर घूम रही थी ...
बंकर क्या है अच्छा खासा ...दो कमरे के फ्लैट के बराबर जगह थी ...बस फर्नीचर नहीं था और हाईट सात सात फिट रही होगी लेकिन एयर कंडीशंड था ...फर्नीचर की जगह मैट्रेस और ढेर सारे कुशन पड़े थे ...
एक साइड में बाथ रूम था ..काफी बड़ा
और उस की साईंड में एक छोटा सा फार्मेसी लिखा कमरा ..दूसरी साइड में एक किचेनेट ...एक इलेक्ट्रिक किचेन रिंग ...और एक खूब बड़ा सा फ्रिज ...
और उसके बगल में एक कमुनिकेशन रूम ..उसमें एक वायरलेस , सेट फोन एक सीसी टीवी का कंट्रोल पैनेल और एक छोटी सी आर्मरी ...
ऊप्स मैं तो भूल ही गयी थी ...तुम्हे ईत्ती चोट लगी है ..चलो कपडे उतारो ...जैसमिन बोली ..
वो ना ना करता रहा लेकिन जैसमिन ने खून में लथपथ शर्ट उतार दी और चोट देखने लगी ..सब मसल्स पे ही थी ..
उसने करन को पेट के बल मैट्रेस पे लिटा दिया ..
चोट करन को कई लगी थीं ...लेकिन सबसे सीरियस ..दायें कंधे के पास थी ...वो चाक़ू जो फ़ेंक कर मारा गया था गेट के पास ...लेकिन कोई बड़ी आर्टरी नहीं अफेक्ट हुयी थी ...इसलिए ब्लड लास ज्यादा नहीं था और बोन या नर्व भी नहीं अफेक्ट हुयी थी ..लेकिन चोट थोड़ी गहरी थी ..
.उसके अलावा दूसरे कंधे के नीचे भी चाक़ू के दो घाव थे ...लेकिन वो सुपरफिसियल थे ..
जैसमिन ने सबको पहले साफ किया ...फिर ड्रेस किया ...तबतक उस का ध्यान पैंट में लगे खून पे पड़ा ..उसने अपना हाथ पैंट खोलने के लिए के लिए नीचे किया ...तो करन बड़ी जोर से उचका ...
" नहीं प्लीज ...वहां नहीं ..."
" क्यों कुछ ख़ास छुपा रखा है क्या वहां ...जरा मैं भी तो देखूं ..."
जैसमिन ने छेड़ा , गुदगुदी की और करन की हालत खराब ...
बस इतना मौका काफी था ..उसने पैंट्स हिप्स के नीचे तक खींच दी ...चेन की चोट थी ...पैंट के ऊपर से भी ..ढेर सारा छिल गया था ..और वहीँ से खून उज हो रहा था
जैसमीन ने जान बूझ कर थोडा ज्यादा ही स्पिरिट वहां लगा दिया ...और करन जोर से उछला ...
" यीईईईईई ...ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह "
" मुन्ने को दर्द हो रहा है ...आउच लेकिन अभी तो मोटी मोटी सुइयां लगेंगी ...वो भी दो दो ...कहाँ लगाऊं ..कहाँ लगाऊं ..इधर तो चोट है ...उसने नितम्ब के उस हिस्से को छुआ जहाँ अभी स्प्रिट लगी थी ...
वो फिर जोर से उचका ...उयीइ उयीईईईईइ
ओके ओके इधर नहीं ...तो फिर इधर ..अब जैसमिन की दो लम्बी गोरी उंगलिया करन के खुले गोरे नितम्ब को हलके हलके सहला रही थी ..छेड़ रही थी ...
यहाँ तो नहीं लग रहा है ..लगा दूँ बोलो ...
अब बजाय दर्द के उत्तेजना से करन सिहर रहा था ..और जैसे गलती से ..जैसमीन की शरारती ऊँगली दोनों नितम्बो बीच की दरार में चली गयी और बिना उंगली हटाए ..उसके कानो के पास होंठ लगा के पुछा ...
" और अगर यहाँ लगा दूँ तो ...मोटी सुई ..."
उंगली उसने हटाई जरुर लेकिन उसके लम्बे लाल नेल पालिश लगे नाखुनो ने करन के बाल को स्क्रैच कर दिया ...
और अबकी करन जोर से उछला लेकिन जैसमीन पे कोई फरक नहीं पड़ा ...उसने उसे दिखाई कित्ती मोटी सूई है ..और फिर उसके नितम्ब पे पहले तो स्प्रिट लगाई ...और फिर सूई ...और वो फिर चिल्लाया ...
" इत्ते प्यार से सूई लगाई और इतनी जोर से चिल्ला रहे हो ...इत्ता बड़ा चाक़ू लगा तो कुछ नहीं ..." मुंह फुलाकर जैसमीन बोली .
" प्यार से डर लगता है ...थप्पड़ से नहीं ..." करन ने एक फिल्मी डायलाग दुहराया।
" अच्छा जी बहुत डायलाग याद आ रहे हैं ..चलो इसी बात पे एक और इंजेक्शन ..."
और अबकी जब जैसमिन ने स्प्रिट लगाई तो जान बूझ कर दोनों नितम्बो के बीच की दरार तक लगायी ...
और एक उंगली सीधे दरार में रगड़ दी ...और यहीं नहीं जब सूई लगाकर हाथ हटाया तो अबकी उसकी उंगली ...करन के 'उससे ' टकरा गया .
अब करन ने भी सोचा की अगर उसे अपनी 'इज्जत ' बचानी है ...तो अटैक इस बेस्ट डिफेंस ...उसने सर उठाकर जैस्मिन को देखा और छेड़ते हुए पुछा ..
" याद है तुम्हारी जाब की ट्रीट का एक पार्ट बचा है ...जाने के पहले तुमने प्रामिस किया था ...की मैं जब लौट कर आऊंगा ...तो .."
उसकी बात काटते हुए उसके बालों को रफल करते हुए जैसमिन मुस्करा के बोली ...
"तुम भले भूल जाओ मैं नहीं भूली . मैंने बोला था ना की तीन दिन अब तुम मेरे कब्जे में हो ...मैं उधार रखने में विश्वास नहीं करती ...फालतू का सूद बढ़ता है ..."
और अचानक उसने कुछ देखा और चौंक पड़ी ...
" कित्ती गर्द है तुम्हारे बालों में ...और देह में भी ...कबसे नहीं नहाए हो ..."
" ज्यादा नहीं खाली दस दिन से ...और पिछले तीन दिन से भारतीय रेलवे के जनरल डिब्बे में सफर कर रहा हूँ ..." वो हंस के बोला।
" तो चलो पहले नहाओ ..गंदे कही के ..एक तो इत्ती ढेर सारी चोट लगा के आये हो ..फिर इस मैल से पक्का इन्फेक्शन फैलेगा ..." वो उसे उठाती बोली .
ओह वो जोर से चिल्लाया ...मेरा दायाँ हाथ नहीं उठ रहा है बहोत दर्द हो रहा है ...
" चीखो मत ...मेरा हाथ है न ...और सुई लगा दी है ..आधे घंटे में दर्द कम हो जाएगा ...
और अगले एक घन्टे तक बिना अपने हाथ के काम चलाओ .., न दायाँ न बायाँ .अगर कही जो पड़ गया तो मुश्किल हो जाएगी .' जैसमिन ने पूरी उसपर चढाई कर दी।
करन ने पैंट सम्हालने की कोशिश की ...तो फिर डांट पड गयी ...ये कोई नया फैशन चला है क्या पेंट पहन के नहाने का ...
और उसे एक छोटी सी तौलिया पकड़ा दी ...जबतक करन उसे लपेटता ...जैसमिन ने पेंट खींच के सीधे वाशिंग मशीन में डाल दी .
टावेल इतनी छोटी थी की मुश्किल से गाँठ लग पाई ..और तब भी साइड से खुला ही था .
करन ने काउंटर अटैक किया ...
" अच्छा जी और ये फैशन कब से चला शलवार सूट पहन कर नहाने का "
वो मुस्कराकर , जिधर फार्मेसी थी ...उधर गयी ...और जब निकली तो बाथिंग सूट पहने थी ...जिसमें कुछ नहीं दिखता था ...और करन का हाथ पकड़ कर बाथरूम में ले गयी ...
बाथ रूम देख कर करन दन्ग रह गया ..
" तुम्हारे सारे चोट पर मैंने पेपर टेप लगा दिए हैं ..वाटर प्रूफ ...इसलिए तुम आराम से नहा सकते है
लेकिन करन की निगाह तो सामने शावर्स पर पड़ी थी ...शावर टाइल्स ...पूरे बाडी के लिए डिफरेंट अंग्ल्स पे , हैण्ड शावर वो भी मल्टी फंक्शन ...शावर का एरिया थोडा धंसा हुआ ..
और सामने की दीवाल के सहारे एक खूब बड़ा सा मार्बल टब ...बगल में बेसिन ...और वहां तरह तरह के शैम्पू , साबुन , क्रीम ...रखे ..
डरो मत ...पानी ही है और जैसमिन ने उसे शावर के सामने खड़े कर के शावर पूरा खोल दिया ...हल्का गुनगुना पानी ...मैल के साथ
इतने दिनों की थकान भी गायब हो गयी ...
करन जैसमीन को देख रहा था ...उसने बाथ टब में पानी भरा फिर बबल बाथ के लिए सोप डाला ..और वहां से एक शैम्पू की शीशी ले के आई
और शावर बंद कर दिया . एक स्टूल की ओर इशारा करके वो बोली ...तुम इसपर बैठ जाओ ...और आँख बंद कर लो ...
फिर जैसमिन ने जो शैम्पू क्या किया ..एकदम चम्पी ..बड़े बड़े स्पा वाले मात खा जायं ...
लेकिन करन के आँख में थोडा साबुन चला गया ...वो चीखा लेकिन डांट पड गयी ...मैंने मना किया था ना ..क्यों खोली आंख ...
और एक मोटा सा ब्लाइंड फोल्ड उसकी आँख पे बाँध दिया ...चलो अब साबुन नहीं जाएगा ...और फिर शैम्पू के बाद साबुन ...
जैसमिन ने शावर फिर खोल दिया ..लेकिन साबुन लगाने के साथ ही उसकी शरारतें फिर शुरू ....और हाथ में दर्द की वजह से वो ब्लाइंड फोल्ड खोल नहीं सकता था ...
जब जैसमिन ने तौलिये के अंदर हाथ डालने की कोशिश की तो करन बहुत जोर से चिल्लाया ...वहां नहीं ...
क्यों ..वहां साफ करने के लिए कोई और आएगी क्या ...और इस धींगा मुस्ती में टावेल खुल गयी और जैसमिन ने उसे उठा के दूर फ़ेंक दिया ..
और फिर आगे पीछे हर जगह ढेर सारा साबुन ...यही नहीं हैण्ड शावर से 'उसे ' ख़ास तौर से साफ किया और उसका मुंह खोल के ...नतीजा वही हुआ जो होना था ..शेर जग गया।
लेकिन जैसमीन को तो बस मजे आ गए ..अपने हाथ में साबुन लगा के वो 'उसे' आगे पीछे करती रही ...और शेर बौखलाता रहा ...
एक बार फिर उसने शावर में खड़ा कर उसका पूरा साबुन साफ कर दिया और उसको पकड़ के बाथ टब की ओर लेगयी और उसे बाथ टब में ढकेल दिया ..
क्यों यहाँ नहीं नहलाने आओगी ..करन ने चिढाया ...
और जवाब जैसमीन की देह ने दिया ...जो बाथटब में उसके साथ थी ...और बाथ टब में तो कोई बाथरोब पहन के जाता नहीं ...
जैसमिन की देह अब उसकी देह से रगड रही थी ...करन ने उसे पकड़ने की कॊशिश की तो ...जैसमिन ने खुद उसे बाँहों में भर लिया लेकिन एक ऊँगली उसके होंठो पे रख दी ...
बोलना मना ...
आधे घन्टे वो लोग टब में बस सोक करते रहे ...
और बीच बीच में जैसमीन की मीठी छेड़खानी ...कभी वो अपने उभारो से उसके सीने पे रगड़ देती ..कभी होंठो से इयर लोबस पे बाईट ले लेती
और सबसे ज्यादा मुसीबत थी ...उसके शेर की ...उसे एक पल का आराम नहीं था ...जेसमीन के हाथ ...तो कभी रेशमी जांघे ..और एकाध बार तो सीधे ...उसकी उड़ने को बेताब गुलाबी परी ...खुद ...
और उसके बाद उसने व्हिर्ल पूल आन कर दिया ...और अब जो शावर सीधे पीछे पीठ और कमर पे पड़ रहे थे उनसे थकान के साथ दर्द भी गायब हो रहा था ...पर जैसमीन ...कभी शावर ठीक उसके कमर के नीचे शेर पे कर देती ...तो कभी पिछवाड़े ..
और उसके बाद उसका हाथ पकड़ कर जैसमिन टब से बाहर लायी ..और वार्मर से निकाल कर एक गरम तौलिये से उसे रगड़ रगड़ के पोंछा ...
और फिर एक फ्रेश टावेल पहना के उसे वो बाहर लायी।
ब्लाइंड फोल्ड अभी भी आन था ...
उसे एक मैट्रेस पे बैठा के उसने एक बार फिर उसकी सारी चोटें चेक की और बोली ...तुम्हारे कंधे के घाव पे मुझे स्टिच लगानी होगी ...तुम थोड़ी देर वेट करो ...
पंद्रह मिनट तक उसे तरह तरह की आवाजें सुनाई देती रही ...सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट स्टरलाइज करने की ...तरह तरह की ड्रेसिंग ...और ..फिर उसे पेट के बल लिटा के ..
उसने पहले तो लोकल ऐनेश्थेसिया दिया ...फिर टांके लगाये ..फिर दो तीन इंजेक्शन ...
ये टांके अपने आप डिजाल्व हो जायेंगे दो दिन बाद पता भी नहीं चलेगा ..
और उस का ब्लाइंड फोल्ड खोल दिया ...बस वो बेहोश नहीं हुआ ...
जैसमीन नर्स की यूनिफार्म में थी और वो भी ...बहोत ही हाट और सेक्सी ...
करन की निगाह जेसमीन की ड्रेस ...और ड्रेस से बाहर झांकते उसके गोराइयो गोलाइयों पर चिपकी थी ...
सर पर नर्स की एक छोटी सी कैप ...
लेकिन उसके नीचे उसके , नितम्बो से भी नीचे तक लहराते काले रेशमी बाल ,
बड़ी बड़ी आँखों में गहरा काजल, मस्कारा , गालो पे हल्का सा रूज ... साथ में डार्क रेड लिपस्टिक ...
और जब वो और नीचे आया तो सांस रुकी रह गयी ...
नर्स की ड्रेस का टाप इतना टाईट की पूरे उभार , कटाव सब कुछ दिख रहा था ...और बहुत लो कट क्लीवेज के साथ गोरी सख्त गोलाईयां भी ..एक चौड़ी लाल बेल्ट उसके कमर पे कस के बंधी ...
जिससे उभार और छलक रहे थे ...एक बहुत छोटी सी स्कर्ट , हिप्स के जस्ट नीचे तक ...और फिश नेट की स्टाकिंग
टावल में आठ इंच का टेंट बन गया ..
क्यों पसंद आई ट्रीट ...उसके पास बैठ के , झुक के जैसमीन ने बोला ...
बहोत ...लेकिन ..मिलेगी कब ...ललचा तो बहुत दिन से रहा हूँ ...
अच्छा जी ..मैं तो जनाब को बहोत सीधा समझी थी ...कब से इरादे खराब है तुम्हारे ...
उसका नाक पकड़ के जैसमीन ने बोला ...
जब से तुम्हे अलाहाबाद में देखा था , पहली बार ...करन ने मुस्कराकर जुर्म का इकबाल किया।
बड़ी अदा से जैसमिन ने अपना नर्स का कैप उतारा ...और उसे करन के सीने पे रख दिया ...
उसने एक सर को हलकी सी जुम्बिश दी ..और काली रेशमी घटा ...करन के चेहरे पे फैल गयी
और बालों के उस झुरमुट में जैसमिन के लाल गुलाब से दहकते होंठ करन के होंठो से मुश्किल से आधे इंच दूर होंगे ...
तो क्या इरादे थे तुम्हारे ...सहलाती सरसराती आवाज में जैस्मिन ने पुछा ...
तुम्हे बाहों में भींच लूं , दबोच लूँ ,मसल दूँ ...उतेजना से भरी आवाज में करन ने राज खोला।
तो भीच लेते ना मैं कौन सा बुरा मानती ...जेसमीन ने उसे और चढाया ..
लेकिन फिर वो झटके से दूर हट के बैठ गयी ...और करन की ओर देख के मुस्करा के बोली ,
" लेकिन आज नहीं ...मेरा मतलब अभी नहीं ..सामने घडी देख लो ध्यान से ...बस बीस मिनट ...अपने हाथो पे कंट्रोल रखो वरना मैं उन्हें बाँध दूंगी ...उसके बाद बाजी तुम्हारे हाथ ...
हाँ तब तक मेरे हाथ हैं ना ...तुम्हे भीचने,दबोचने , मसलने के लिए
और अपनी बात अच्छी तरह समझाने के लिए ..जैसमीन ने अपने नेलपालिश लगे लम्बे नाखुनो से पहले उसके गाल पे स्क्राच किया ...फिर होंठ पे और बोली ...
" ओके बोलो ...तुम्हे ट्रीट की क्या चीज चाहिए ..पहले उसने अपने रसीले होंठो को पाउट कर पूछा ...ये ...
फिर अपने कसे टाप को फाड़ते ...गदराये जोबन को उभार कर पूछा ...ये ..
और करन ने जोर जोर से हाँ में सर हिलाया
तो ले लो ना ...और अपने छलकते उरोज ..जैसमिन ने पहले करन के दहकते गालों पे रखे ..फिर उसके होंठो के पास ...
और अब करन ने देखा ..इत्ता लो कट की पूरे क्लीवेज के साथ उसके निप्स भी आलमोस्ट दिख रहे थे ...सिर्फ एक बटन लगा था ...और उसे ललचाते लुभाते ..उसके सीने पे अपना टाप रगड़ने लगी ...
और फिर दूर हट के खुद अपने हाथों से टाप के ऊपर से अपने उभारो को सहलाते ...आँख नचा के बोली चाहिए ये ...
हाँ आलमोस्ट मस्ती से पागल होता करन बोला
और एक झटके से आखिरी बटन खोल के जैसमीन ने टाप दूर फ़ेंक दिया ..
...
और अब करन पूरी तरह से पागल हो गया .
3 4 सी पिंक लेसी ब्रा ,हाफ कप में , उसके गोरे गदराये ...जोबन समाये नहीं पड़ रहे थे दोनों कबूतर उड़ने को बेताब ..
और वो जरा सा झुकती तो दोनों कबूतरों की लाल लाल चोंच ...खुल के सामने आ जाती ..
और एक बार फिर वो करन के चेहरे के सामने झुकी ...और जब करन अपना चेहरा उठाता ...
तो वो उसे और दूर कर लेती ..लेकिन एक बार करन के होंठो ने झपट्टा मारा और ...ब्रा के अंदर से झांकते ललचाते खड़े निपल उसके होंठो के बीच में ..
वो जोर जोर से चूसने चुभलाने लगा
अब सिहरने सिसकने की बारी जेसमीन की थी .
उसके उरोज एकदम पत्थर के हो गए थे ...पूरी देह काँप रही थी ...
नदीदे ...मिलेगा ..वो बोली और करन के होंठो से मुश्किल से छुड़ाती हुयी ..अब एक बार फिर बड़ी सिड्क्टिव अदा ...से लेसी ब्रा से झांकते उभारों को करन के चौड़े सीने पे सहलाने , रगड़ने लगी ...उसके खड़े उत्तेजित , ब्रा से
बाहर निकलते निपल ..सीधे करन के सीने के टिट्स से रगड़ते ...
और जोश में पागल करन भी अपने हिप्स उछाल रहा था।
जैसमीन अपने उभारों से सहलाते हुए ..सीधे कमर तक आगई ..
करन का जोश में सर उठाया हुआ शेर सिर्फ एक छोटी सी टावेल से ढंका था ...और अब उसे दोनों ट्रांसपरेंट लेसी गुलाबी ब्रा से छलकते दोनों उभारों के बीच 'उसे ' पकड़ के ...जैसमीन ने दबा दिया और ऊपर नींचे करने लगी ..
करन सिसक रहा था ...अपने नितम्ब रगड़ रहा था ...
एक बार फिर जैसमीन उसके चेहरे के पास पहुँच के बोली ..." खोल दूँ ..."
हाँ ...जोर से करन बोला ..
लेकिन ये काम तो तुम्हारा है ...जैस्मिन ने चिढाया ..
पर कैसे ...तुमने बोला है हाथ ...बीस मिनट ...
जैस्मिन उलट गयी ..और अब उसकी पीठ धनुष की तरह ...ब्रा स्ट्रिंग ब्रा थी ...
जैस्मिन गुनगुना रही थी ..चोलिया के बंद सैयां ...होंठवा से खोले ला ..
इतना आइडिया बहोत था ब्रा ..खुल गयी ...लेकिन अपने दोनों ब्रा के कप पकडे पकडे जैसमिन उठ गयी
....और दूर से स्ट्रिप डांसर की तरह डांस करती ललचाती रही ...फिर एक झटके में उसे खोल कर 'शेर' के ऊपर ...लेकिन उरोज अभी भी उसके हाथों के पीछे छिपे झाँक रहे थे
स्कर्ट ..स्कर्ट भी ...करन लेटे लेटे चिल्ला रहा था ...
ऐनी थिंग फॉर यु ...जैसमिन बोली और मुडकर , कुल्हे मटकाते ..डांस करते उसने स्कर्ट खोल दी ...और दूर उतार कर फ़ेंक दी ...
उसकी पीठ अब करन की और थी ..इसलिए करन अभी भी उसके उरोज नहीं देख पा रहा था ...
लेकिन करन की आँखे फटी रह गयीं ...
उसके पूरे गोरे रसीले मस्त नितम्ब खुल के दिख रहे थे ...पीछे से थांग ..उसकी पिछवाड़े की दरार में खो गया था ...कमर उसकी इतनी पतली की मुट्ठी में ले ले ...और उसके नीचे खूब भारी भारी चूतड ..लम्बी लम्बी टाँगे ...
और अब जैसमिन चक्कर ले के उसके सामने हुयी ...तो करन की नजर उसकी गोरी चिकनी रेशमी जांघो से नहीं हट रही थी ..और उस के बीच में लेसी आलमोस्ट ट्रांसपैरेंट थांग ...मुश्किल से दो अंगुल चौड़ी ...
बस उसकी प्यारी गुलाबी चुनमुनिया को दबोचे ...और जब उसकी निगाह ऊपर गयी तो ..अब दोनों उरोज हाथो के पीछे तो थे लेकिन पूरी तरह छिपे नहीं ...
जैसमीन ने उँगलियाँ फैला दी थीं ...और उनके बीच से कबूतरों की लाल लाल चोंचे ...अब खुल के दावत दे रही थीं ..
जैसमिन खुद ही कमर हिलाते , भारी नितम्ब मटकाते उस के पास आ गयी
ब्रा की तरह ये भी स्ट्रिंग थी ...
और करन ने मुड कर अपने होंठो से उसे भी खोल दिया ..
और अब दोनों पागल हो गए ...
जैसमीन सीधे करन के कमर के पास गयी ...
और दहाड़ते शेर को टावेल के पिजड़े से आजाद कर दिया ...और उसे अपनी ब्रा और थांग के पिंजड़े में बंद कर दिया ...
जैसे कोई मथानी के चारो ओर रस्सी लपेटे ...उसने अपनी लेसी पिंक ब्रा और थांग को उत्थित लिंग में लपेट के ...मथानी की तरह घुमाने लगी ...
जैसमीन ने पहली बार उसे देखा तभी से उसका मन ललचा रहा था और आज अब मौका मिल गया था ...
और कुछ पलों में ब्रा थांग की जगह उसकी कोमल हथेलियों ने ले ली ...कठोर , तने हुए उत्थित लिंग के स्पर्श का उसका ये पहला मौक़ा था ...और उसकी पूरी देह सिहर उठी ...
लेकिन बिना रुके उसकी हथेलियाँ करन का लिंग मंथन करती रहीं ...
उसकी निगाह घडी पर पड़ी और वो मुस्करा उठी ...बीस मिनट होने में अभी भी पांच मिनट बाकी थे ...
और उसने करन को बोला था ...बीस मिनट बाद ..बाजी करन के हाथ में होगी ..तब तक वो चुपचाप लेटा रहे ...
उसने उसे एक स्ट्रांग पेन किलर का इंजेक्शन लगाया था ...जिसके असर से करन के कंधे और हाथ का दर्द बहोत जल्दी ख़तम हो जाना था .
लेकिन उसके साथ ही उसने उसकी हिप पर स्टिचिंग के बाद एक काकटेल इंजेक्शन लगाया था ,
...एम्फीटेममाइन की फूल डोज ...और इञ्जेक्टिबिल सियालिस , जो वियाग्रा की तरह होती है लेकिन उसका असर वियाग्रा से ज्यादा देर तक रहता है ...बीस मिनट में दोनों ड्रग का असर अपने पीक पर पहुँच जाएगा ..
बस पांच मिनट बाकी था ...और अब ...जैसमीन के हाथों की जगह उसके रसीले गुलाबी होंठों और जीभ ने ले ली लिंग के बाल्स से जुड़े बेस से लेकर सीधे उपर तक बड़े बड़े लिक्स ...और साथ में होंठो से सैकड़ों चुम्बन
...और यही नही अचानक जैसमिन ने अपने गुलाबी होंठो के बीच करन की एक बाल्स को भी ले के चूसना शुरू कर दिया ...
आज वो उसको अच्छी तरह तंग करने के मूड में थी ...
पास में से दो कुशन उठा के उसने करन के नितम्बो के नीचे लगा कर उन्हें उठा दिया ..और ..
उसकी लम्बी जुबान ..सीधे बाल्स और पिछवाड़े के छेद के बीच की जगह चाटने लगे ...
करन मस्ती से पागल हो रहा था ...वो बार बार अपने चूतड उठाता ...और यही तो जैसमीन आज चाहती थी ...
बस तीन मिनट बचे थे ...
और झप्पट्टा मार कर उसके होंठो ने करन के सुपाडे को गप्प कर लिया ...और फिर धीरे धीरे होंठो से दबा के ..उसका चमड़ा नीचे कर दिया और चुभलाने लगी ...बड़ी मोटी ..खूब रसीली लीची ऐसा ..
साथ में जैस्मिन का एक हाथ करन के बाल्स सहला रहा था और दूसरा लिंग को पकड़ के ऊपर नीचे ...उसने फिर दबाव दिया और अबकी आधा लिंग ...करीब चार इंच उसके मुंह में ...और वो जोर जोर से पूरी ताकत से चूस रही थी ...
इत्ती जोर से तो उसने बचपन में लालीपाप भी नहीं चूसा होगा ...
तिरछी निगाह से उसने घडी की और देखा ..
एक मिनट ...
और वो चूसना छोड़ कर करन के उपर खड़ी सी हो गयी और जब बैठी तो इस तरह की जैसमिन की मस्ती से गीली रस से भरी पुत्तियाँ ...उसकी चुन्मुनिया ..सीधे करन के सुपाडे .पे ...
थोड़ी देर तक वो ऐसी ही रगडती रही ...करन को तडपाती रही ...फिर ..
बीस सेकेण्ड बचे थे ...
उसने अपनी दोनों उँगलियों से अपने स्नेह द्वार के कपाट मुश्किल से थोड़े चौड़े किया ...और करन के सुपाडे पे दबाना शुरू किया ...
लेकिन पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाडा ...उसकी कच्ची चूत में इतनी आसानी से नहीं जानेवाला था ...जैसमिन ने अपनी देह का पूरा जोर लगाया तो जरा सा सरका ..
वो सोच रही थी की अब करन उसकी कमर को पकड़ कर ..एक बार पकड़ के खीचे तो शायद अंदर घुस जाय ...अब वो करन से भी ज्यादा बेताब थी.
करन ने उसकी पतली कमर पकड़ी जरूर ...लेकिन बीस मिनट हो चुके थे ...
और अब गाडी नाव पर थी ...
जैसमिन नीचे और करन ऊपर ...जैसमिन को गोरी लम्बी टाँगे ..करन के कंधे पे थीं, पूरी तरह फैली ...
उसका दहाड़ता शेर गुफा के मुहाने पे ..रास्ता तलाश रहा था ...और करन के दोनों हाथ सीधे जैसमीन के गोरे गदराये उभारों पे ...जिन्हें देख के वो पहले दिन से ललचा रहा था ..उसके हाथो ने बस दुलराया , सहलाया
लेकिन थोड़ी देर में ही गियर बदल कर जम कर उन उरोजों की उसने रगडायी मसलाई शुरू कर दी ...उसके होंठ जैसमीन के रसीले गुलाबी होंठो का रस चूस रहे थे ...
और अब जैसमिन की हालत ख़राब थी ...
आग तो उसने लगा दी थी लेकिन उसे कंट्रोल करना ...वो खुद अपने चूतड रगड़ रही थी , उचका रही थी
..अपनी दोनों बाहें उसने करन के गले में डाल दी थीं ...और अपनी ओर खींच रही थी ...
" करो ना प्लीज ..करन अन्दर डालो ना ...प्लीज अब और नहीं ..." वो सिसक रही थी .
और करन अब उसे और तडपाने पे उतर आया था ...
उसके होंठ जैस्मिन के एक निपल को चूस रहे थे , दूसरा निपल उस के अंगूठे और तरजनी के बीच था ...और एक हाथ से वो कस के क्लिट को रगड रहा था . उसका तन्नाया शेर उसकी गुफा के दरवाजे पे तो रगड़ घिस्स कर ही रहा था ...
" डाल दो ना प्लीज अब ...और नहीं ..." जैसमिन बोली।
कचकचा के जैसमिन के मीठे गाल को काटते हुए करन ने छेड़ा ..." क्या डाल दूँ नाम तो बोलो।"
" ओह ओह ..वही तंग ना करो ना ...प्लीज करन .." मस्ती से जेसमीन की हालत ख़राब थी .
" बस एक बार नाम बोल दो ना ...अब क्या शरमाना ...मैं तुम ही तो है ..."
करन ने जोर से उसके निपल फ्लिक करते हुए कहा .
' ओह्ह तुम ना ...दुष्ट ..बदमाश ...ओ के ...अपना ....लिंग ..." जैसमिन झिझक के बोली
और करन ने बहोत कस के उसकी क्लिट को रगड़ के अपना जवाब दिया ...
" ये नहीं साफ साफ बोलो ना ..."
समझ जैसमिन भी रही थी की करन उससे क्या बुलवाना चाहता है और हिम्मत कर के धीरे से वो बोली ..." अपना ..अपना लंड "
"मैंने नहीं सूना ..." करन मुस्करा के बोला
ओह्ह ओह्ह दुष्ट ...प्लीज ..अपना लंड डाल दो ना ...अब और मत ...जैसमीन ने आखिर बोल ही दिया ...जोर से
फिर कौन रोकने वाला था करन को ..उसने एक हाथ से जैसमीन की नाजुक पतली कमर पकड़ी ..और दूसरा हाथ उसके भारी भारी चूतड पे ...टांगो को एडजस्ट किया ...
और पूरी ताकत से धक्का मार दिया ...फिर दुबारा ...फिर तिबारा ...
और अबकी जैसमिन बहोत तेजी से चीखी ...
उयीईईईईईईईईईईईईईईईईई ...ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ...उसने दोनों हाथो से कुशन को भींच रखा था उसके हाथ सफेद पड गए थे ...चेहरा एकदम पीला और मारे दर्द के आखे जैसे निकल गयी थीं .
और जब करन ने आँखे नीचे की तो अब उस की हालत खराब हो गयी ..
जैसमिन की जांघो के बीच में खून के थक्के
' ओह्ह ...जैसमीन ..तुम्हारे ..खून .." करन रुक के बोला ..
जैसमिन समझ गयी की अगर अभी करन घबडा गया ना तो ...उसने अपनी बाहों में करन को भींच लिया ...और नाख़ून उसके पीठ में धन्साती बोली ...
" पागल ...ये खून खच्चर तो कभी ना कभी होना था ..."
और फिर कस कस के करन को चूमती बोली ...
" रुक क्यों गए बुद्धू ...थक गए क्या इतनी जल्दी ...मुझे पूरा चाहिए ..आधा तीहा नहीं ..."
करन ने भी प्यार से जैसमिन की पलकों को गालों को चूमा ...और फिर उसके होंठ ..और फिर गदराये जोबन पे वो आके रुके ...
धक्के धीरे सावन के झूले की पेंग की तरह चालू हो गए ..एक बार करन धक्के लगाता तो नीचे से जैसमीन अपने चूतड उछाल के जवाब देती
और अब जैसमिन की बारी थी करन को छेड़ने की ..
" हे क्या डाल रहे हो ...इतना धीरे धीरे ..सम्हाल के जैसे सुई में तागा ..."
करन समझ गया लेकिन मुस्कराकर उसने भी उसी तरह जवाब दिया ...
" लंड पेल रहा हूँ तुम्हारी चूत में ...अभी हचक के चोदता हूँ ..."
तो चोदो ना ...मुस्कराकर जैसमिन ने भी उसी भाषा में जवाब दिया ...
और फिर तूफान आ गया ..
.जैसे कोई धुनिया रुइ धुनें ...बस उसी तरह ..करन जैसमीन को चोद रहा था ...कभी दोनों हाथो से कमर पकड़ के ..कभी टांगो को दुहरा कर के ...और उसके हाथ ...जैसे कुम्हार के हाथ चाक पर चलते हैं ..कभी जैसमीन की मस्त चून्चियो पे ..तो कभी क्लिट पे
जैसमिन कभी दर्द से दुहरी हो जाती ...तो कभी मजे से पागल
कभी चीखती ...तो कभी सिसकती ...लेकिन वो करन का पूरा साथ दे रही थी ...उसे बाहों में भींच कर गालों पे चूम कर ..टाँगे उसकी कमर में बाँध कर ...और यहाँ तक की गालियों में भी ..
वो समझ गयी थी की करन को ऐसे मौके पे कैसी जुबान पसंद है ...
आधे घंटे , चालीस मिनट तक ये तूफान चला ...फिर सबसे पहले बहोत देर तक तेजी से कांपती हुयी जेसमीन शिथिल पड गयी ...
और उसके थोड़े ही देर बाद ..करन उसके अन्दर ...झड़ता रहा झड़ता रहा ..और उसके बाद भी उसके अंदर ही दोनों एक दूसरे की बांहों में शिथिल पड गए ...
और जैसमीन का फोन बजा बहोत जोर से ...तब उन दोनों की तन्द्रा टूटी ...
जेसमीन ने फोन उठाया ..कर्नल अहलुवालिया का फोन था ...वो करन से भी बात करना चाहते थे . जेसमीन ने मुस्कराते हुए , करन की ओर इशारा किया ...और स्पीकर फोन आन कर दिया।
करन अभी भी 'उसके अन्दर 'धंसा हुआ था।
"कांग्रेट्स टू बोथ आफ यू ...जो एविडेंस तुमने कलेक्ट की थी ...और जैसमिन तुमने हैण्ड ओवर की थी ...मैंने पहले तो खुद चेक की ...और अभी कैबिनेट सेक्रेटरी को भी दिखाई ....हमारे पास जो इंटरनल रिपोर्ट्स थीं ..ये उनसे पूरी तरह मैच कर रही है।
अभी पन्दरह मिनट में ...नेशनल सिक्योरिटी ऐडवाइजर , डायरेक्टर जनरल आई बी भी आ रहे हैं ...
उनके सामने हम फिर कैबनेट सेक्रेटरी के कमरे में मीटिंग करंगे और ऐक्शन प्लान करेंगे ...
हमें उम्मीद है की आज से ऐक्शन स्टार्ट हो जाएगा ...और उस के साथ फारेन सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी से एक मीटिंग होगी ...फिर वो लोग पी एम् को भी ब्रीफ करेंगे ...
लेकिन मैंने तुम दोनों को इस लिए फोन किया था ...की मुझे शक है की जैसे हम लोगों का ऐक्शन स्टार्ट होगा ...उनका काउंटर एक्शन भी शुरू होगा ...मैंने घर के बाहर एक कमांडो यूनिट को भी रात में लगा दिया है ...बस तुम एक काम करना ...करन को एक पल के लिए भी बाहर मत निकलने देना ..."
जैसमीन ने शरारत से एक कस के आँख करन को मारी ..बाहों में उसे बाँध लिया ...और अपनी प्रेम गुफा में धंसे , उसके शेर को कस के भींच लिया ...और बोली ...
"एकदम नहीं निकलने दूंगी बाहर ..."
और फिर एक बार कस के अपनी योनि को सिकोड़ के ...करन को अपना इरादा साफ कर दिया ...की वह 'कहाँ ' से 'क्या' बाहर नहीं निकलने के लिए बोल रही है .
और अब कर्नल करन से मुखातिब थे और करन की तारीफ कर रहे थे ...
" हार्ड वर्क इज द की ...एंड यू नो इट ."
करन का शेर जैसमिन की शरारतों से फिर हार्ड हो गया था ...और वो गुफा में तो था ही ...करन उसे धीरे धीरे ...आगे पीछे कर रहा था ...
कर्नल साहेब जारी थे ...तीन दिन तक तुम बाहर मत निकलना ...जैसमीन नोस क्या कैसे ...और तुम बस अभी रिलेक्स करो ...
आई विल बी इन टच ...कांग्रेट्स अगेन ...और दोनों ने एक साथ थैंक्स सर ...बोला ...फोन काटा और चालु हो गए ...
दोनों बैठे थे ...
जैसमीन ..करन की गोद में ...जैसमीन की जांघे पूरी खुली फैली ...और लम्बी टाँगे करन को लता की तरह लपेटे ..और करन जैसमिन के अंदर ...आगे पीछे ..आगे पीछे ...और उसका एक हाथ ...जैसमीन की पीठ पर और दूसरा मस्त उरोजों पे ..जैसमिन भी इस झूले का मजा ले रही थी ...
अचानक उसे कुछ याद आया ...
" हे जबसे तुम आये हो ...खाना नहीं खाया ...मैं कुछ लाती हूँ ..."
नहीं प्लीज मैं सिर्फ ..इसका भूखा हूँ ..." जैसमीन के निपल्स को चूसते हुए वो बोला .
हँसते हुए जैसमीन बोली ...
"ये तो तुम्हे मिलेगा ही ...बस तीन मिनट और फिर हम लोग इसी पोज में होंगे .'
करन जिद्दी बच्चे की तरह फिर बोला ..
"ना ना मेरे हाथ खाने में बीजी रहेंगे ...तो फिर मैं इस का मजा कैसे लूंगा ..."उसके निपल पिन्च करते वो बोला .
" अरे यार तेरे दोनों हाथ भी खाली रहेंगे ..."
हंस के वो उठी और सैंडविच का एक पैकेट लेके आ गयी .
फिर वो दोनों उसी पोज में थे ..करन को जैसमीन कभी अपने हाथ से खिलाती ..तो कभी अपने होंठो से ...और करन का एक हाथ ...उसके उभारो पे था और दूसरा उसके हिप्स पे ...जहाँ आगे पीछे पुश करके ...और कुछ देर बाद चुदाई की रफ्तार बढ़ गयी ...
और अबकी वो झडे तो जैस्मिन ऊपर थी ...
और वैसे हो वो सो गए ...जब उनकी नींद खुली तो देर शाम हो चुकी थी करन तो फिर चालु होने के मूड में था ...लेकिन जैसमीन ने उसे धक्के दे कर अलग किया ...और किचेन में कुछ बनाने लगी ,
करन सीसी टीवी के कंट्रोल पैनेल से सब चेक कर रहा था ..हर जगह लेजर रेज से सिक्योरिटी थी ...और सारे कैमरे नाईट विजन वाले थे ...
खाने के बाद जैसमीन ने उसे दवाइयाँ खिलाई ...चोट चेक की और बोला की अब सो जाओ ...लेकिन करन ...
थोड़ी देर में वो दोनों सिक्सटी नाइन की पोज में थे ....रात के ग्यारह बज रहे थे ...जैसमिन को भी बहुत मजा रहा था लालीपॉप चूसने में ...
तभी जोर की धमाके की आवाज हुयी ..
दोनों दौड़े दौड़े ..कंट्रोल पैनेल पे .
दिख रहा था ..एक कोई एक्सप्लोसिव्स से लदी ट्रक बाहरी गेट से टकराई ...और वो हवा में उड़ गया ...गेट, गेट के पास का गार्ड रूम बाउंड्री ..
करन ने बोला ...असली हमला अब होगा ...और ...एक कार उसके पीछे अन्दर घुसी ...और दनदनाती हुयी सीधे बिल्डिंग के पास ..
जैसमीन ने ढेर सारे बटन दबाने शुरू कर दिए ..
उस कार से कई लोग उतरे और घर के अन्दर घुसने की कोशिश करने लगे ..एक दो हैण्ड ग्रेनेड भी फेंके ..
जैसिमिन ने करन के कंधे पर हाथ रखा की वो चिंता ना करे ..और वही हुआ ...
तीन मिनट के अन्दर ..चार गाड़ियों में कमांडो अन्दर घुसे ...हमला करने वालों में दो मारे गए और चार जिन्दा पकडे गए ...
लोग कहते हैं एक्साईटमेंट में सेक्सुअल ऐराउजल बढ़ जाता है ...और वही हुआ रात भर ...
कोई चीज नहीं छोड़ी दोनों ने ...डागी पोज .. और सुबह बल्कि दोपहर तक सोते रहे ...फिर साथ साथ नहाया ...खाना बनाया ..खाया ...
और तब करनल साहेब का फोन आया ...तीन मोल में दो पकड लिए गए हैं तीसरे का भी है वो शाम को फोन करेंगे ...
और हाँ नहाते समय ...करन इ जैसमीन का पिछवाडा भी बजा दिया ...
खैर उसके लिए जिम्मेदार भी जैसमिन थी ...
सुबह से जब वो उसको देखती ...बस उसे ललचाते हुए अपने मोटे मोटे चूतड मटका देती ...और २ ८ की पतली कमर पे ३५ के नितम्ब एकदम जानमारू लगते थे ...
और नहाते समय ...जब जैसमीन उसे साबुन लगा रही थी ...तो पहले उसने आपने हाथों में खूब साबुन लगाया ...और फिर तर्जनी पे और ज्यादा ..फिर करन के नितम्बो पे साबुन लगाते लगाते उसके पिछवाड़े की दर्रार में ऊँगली से साबुन लगाने लगी ...और जब तक करन कुछ समझे समझे ...पूरी की पूरी तर्जनी अन्दर ...
करन कहता रहा निकालो निकालो लेकिन जैसमीन उसे छेड़ती रही , हंसती रही ...
'अब तुम्हे पता लगा ना की अंदर जाने पे कैसा लगता है ...मजा आ रहा है ना डलवाने में ..डालने का मजा तो बहुत ले लिया ..अब जरा डलवाने का मजा भी तो ले लो ..."
और उंगली कभी अन्दर बाहर खच खचा खच , सट सटा सट होती ...पूरी की पूरी तो कभी गोल गोल ...
और जब उसने उंगली बाहर निकाली तो करन ने उसे दौड़ा लिया ..वो भागी ...लेकिन कितना भागती ..
वहीँ बाथ टब पे निहुरा के दोनों टांगे फैलाई ...और अपना मोटा मुसल उसके पिछवाड़े ...वो लाख चिच्याती रही ...चूतड पटकती रही ... पर उसने सुपाडा ही दिया ...और एक बार जब उतनी इंट्री हो जाये तो बाकी भी ...
करन का बस चलता तो एक के साथ एक फ्री ...दुबारा भी उसी समय उसकी ...
लेकिन जैसमीन ने प्रामिस किया की आज रात ...वो जरुर ..बिना ना नुकुर के ...तो वो माना ...फिर उसके बाद साथ साथ शावर ..साथ साथ बाथ टब ...और बाथ टब में भी ...पिछवाड़ा नहीं तो अगवाडा ...साइड से
...पहली बार पानी के अंदर दोनों मजा ले रहे थे ...दोनों साथ साथ धीरे पुश कर रहे थे ...और फिर टब के अंदर व्हिर्ल पूल ...जगह जगह से जेट उनकी बाड़ी पे .....बहुत मजा आया ...
लेकिन बाहर निकलने के बाद ..जैसमिन ने अगले छ घंटे तक कुछ नहीं डिक्लेयर कर दिया ...
और वैसे ही उन्होंने खाना बनाया , खाया और एक दूसरे को कस के पकड के कडल कर के सो गए ...जैस्मिन ने एक हाथ से उसकी पीठ को कस के भींच रखा था ...और दूसरा हाथ ...और कहाँ होगा उसके शेर पे ...
और करन का हाथ ...जैसमीन के भरे उरोजों पे और उसकी चुन्मुनिया पे
देर शाम उनकी नींद खुली और फिर कर्नल अहलुवालिया के फोन के साथ ...और अबकी करन ने फ़ोन उठाया ..और स्पीकर फोन आन कर दिया ,
" टीवी न्यूज लगाओ '
और जेसमीन ने अपने बाएं हाथ से रिमोट से टीवी आन कर दिया . वो लेफ्ट हैण्डर नहीं थी ...लेकिन उसका दायाँ हाथ ...एक जरुरी काम में बिजी था ...करन के शेर को दुलराने,सहलाने और जगाने में ...
न्यूज चालु हो गयी ...एक आदमी को पुलिस वाले पकड कर जीप में बैठा रहे थे ....
" ये तो मिस्टर मेहरा हैं ..." उचक कर वो सीधे करन की गोद में बैठ गयी लें उसके दायें हाथ ने अपना काम नहीं छोड़ा ..शेर अब जग गया था .
जवाब में जेसमीन का जोबन मर्दन करते ...वो धीमे से .बोला ...
"यही तो था असली खिलाड़ी ..."
लेकिन कर्नल अहलुवालिया ने सुन लिया और बोले ..सही कहा तुमने
और ...जैसमीन के पहले जो मेरी सेक्रेटरी थी दुदानिया ...वो टू थी।
( जैसमीन मुस्कराये बिना नहीं रह सकी ...और उसने करन को कान में बताया ...दुदानिया को लोग आफिस में दुधानिया कहते थे ...3 8 डी डी स्तनों के कारण , ग्रेविटी डिफायिंग , क्योंकी कई बार वो बिना ब्रा के भी आती थी ..और जब उसके बाद जैसमीन को उन्होंने रखा ...तो वो भी अपनी उम्र के हिसाब से कुछ ज्यादा ही 'वेल इन्डाउड ' थी ..तो लोगों ने कहना कर दिया की बॉस ' बिग बी ' के फैन हैं )
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फागुन के दिन चार--93
गतांक से आगे ...........
देश वापसी
करन ने नयी दिल्ली स्टेशन के एक पी सी ओ से जैसमिन से बात की और उसे पहाड़गंज के एक रेस्टोरेंट में मिलने को कहा।
करन खुद थोड़ी देर में उस रेस्टोरेंट के सामने वाले होटल में बैठ गया ...और वहीँ से निगाह रखे हुआ था .
थोड़ी देर में उसने जेसमीन को सामने की दूकान में घुसते देखा। बाहर निकल कर उसने चारो ओर देखा की कोई जेसमीन का पीछा तो नहीं कर रहा और निश्चिंत होने के बाद ही वो रेस्टोरेंट में घुसा।
बाहर निकल कर दोनों एक आटो से चले , तय ये हुआ था की सारे एविडेंस रास्ते में उतर कर जैसमिन एक बैंक के लाकर में डाल देगी, जिससे कर्नल अहलुवालिया निकाल लेंगे। करन सीधा कर्नल अहलुवालिया के घर जाकर रुकेगा और जैसमीन भी वहीँ मिलेगी।
लेकिन गड़बड़ हो गया .
पहाडगंज से निकलते ही जैसे ही उनका ऑटो बाहर आया ...करन ने नोटिस किया की दो लोग ऑटो से ही उसका पीछा कर रहे हैं . करन ने रिजर्वेशन आफिस के पास , अपने आटो वाले से रुकने की कहा ...
और पीछे वाला ऑटो भी धीमे हो गया।
उसका शक विश्वास में बदल गया।
वो रिजर्वेशन आफिस की ओर उतर कर बढ़ा ...तो पीछे वाले ऑटो के लोग भी उतर पड़े ...बस यही तो वो चाहता था ...उसने अपने ऑटो के रियर व्यू मिरर में अच्छी तरह उनकी शकल देख ली
और फिर उसने अपने ऑटो वाले को चलने के लिए बोला ...कनाट प्लेस में एक बैंक के सामने उसने ऑटो को रोका।
जैसमिन ने बैंक सही चुना था ...वो एकदम में रोड पर था और उतरते ही वो बैंक में होती ...और वहां भीड़ भी थी और सिक्योरिटी भी , बस उसे यही देखना की थी ...वो लोग उसका पीछा कर रहे थे या जैस्मिन का ...
अगर वो जैसमिन का पीछा कर रहे होंगे तो ज्यादा मुश्किल होगा ...क्योंकि एविडेंस अब उसने जैसमिन को दे दी थीं ...और उसे फिर कोई डाईवर्जन क्रियेट कर जैसमीन को प्रोटेक्ट करना पड़ता .
लेकिन पीछे वाला ऑटो रुक जरुर पर वो दोनों जमूरे उतरे नहीं ..
अब ये साफ था की वो करन के ही पीछे हैं .
उनसे पीछा छुडाना करन के लिए बाएं हाथ का खेल था ...लेकिन एक तो वो चाहता था की जैसमिन को पूरा टाइम मिल जाय ...और दूसरे वो चेक करना चाहता था की ये कितने प्रोफेशनल हैं ...
उसने अपने ऑटो वाले से बोला की वो उसे राजीव चौक मेट्रो स्टेशन छोड़ दे ...
वहां से वो मेट्रो में बैठा और सेन्ट्रल सेक्रेटेरियेट उतर गया ...वो सबसे बड़ा भीड़ भाड़ वाला स्टेशन है ..वो भी शाम को .
वहां से उतर कर उसने टैक्सी की ...दोनों जमूरे अभी भी उसके पीछे थे ...
लेकिन उसी समय जैसमीन का कोडेड मेसेज आ गया ...सामान उसने बैंक के लाकर में रख दिया है ...और वो वहां से पांच मिनट पहले निकल पड़ी है , दस मिनट में कर्नल के घर पहुँच जायेगी . उसकी एक चिंता तो दूर हुयी .
लेकिन उसे अब दूसरी चिंता लग गयी थी . उसका पीछा करने वाली टैक्सी में अब कोई दूसरे लोग थे ...इसका मतलब की ये प्रोफेशनल थे ...और थोड़ी देर में उसने जो सोचा था वही हुआ ...उसके आगे भी एक टैक्सी थी ...और उसमें दोनों जमूरे थे ...यानी वो उसे सैंड विच कर रहे थे ..
.उसने कई बार रास्ता बदला लेकिन वो दोनों टैक्सिया उसके आगे पीछे ही थीं ...लेकिन अब वो घर के पास पहुँच रहा था और उसे इनसे पीछा छुड़ाना था ...
उसने टैक्सी वाले को पहले तो पेमेंट कर दिया ...फिर उससे बोला की वो एक संकरी गली में मोड़ ले ...
उससे आगे वाली कार से तो उसका पीछा छुट गया ....लेकिन पीछे वाली कार थी
कर्नल अहुवालिया का घर अब वहां से मुश्किल से पांच सौ मीटर था ...और यहाँ गली में रोड पर मिलती थी।
करन की हालत खराब हो गयी जब उसने सामने देखा ..एक कंटेनर लदा हुआ ट्रक गली के मुहाने पे खड़ा था
करन समझ गया अब ढिशुम ढिशुम टाइम आ गया है।
पीछे वाली कार से दो लोग उतरे दोनों के हाथ में लम्बे लम्बे चाक़ू ...और सामने कंटेनर वाली ट्रक से भी तीन उतर कर खड़े हो गए इक के हाथ में चेन और दो चाक़ू वाले ..
करन ने अपने टैक्सी वाले को बोला की वो शार्प ब्रेक मार के एक सेकेण्ड के लिए गाडी बस रोके और फिर तेजी से बैक करे ...पीछे की ओर ..
टैक्सी रुकते ही करन तेजी से आगे की ओर बढ़ा ...और उधर उसकी टैक्सी के बैक होने पर पीछे से आ रहे हमलावर ..अचकचा कर रुक गए ...इतना समय करन के लिए काफी था
ट्रक के सामने खड़े गुंडों में से उसने चेन वालों को अपना टार्गेट बनाया ...लेकिन तब तक दोनों चाक़ू वाले उसपर हमला कर चुके थे ..
.एक घाव उसे शोलडर ब्लेड के पास लगा और दूसरा कुल्हे के पास ...वो झुक गया था इसलिए घाव हलके थे।
लेकिन वो दुबारा हमला करते ...उसके पहले उसने एक की कलाई मोड़ दी और दूसरे को जबर्दस्त किक मारी ...मोसाद वालो ने उसे जबर्दस्त किक बाक्सिंग सिखाई थी ...तीस सेकेण्ड में तीनों नीचे थे और करन ट्रक के अन्दर
एक ने ट्रक के अन्दर घुसने की कोशिश की ...करन ने इत्ती जोर से दरवाजा खोला की उसे सौ झापड़ के बराबर चोट लगी और वो वहीँ धराशायी ...
करन तेजी से ट्रक लेकर आगे बढ़ा ....गुंडे पीछे रह गए ...
लेकिन थोड़ी देर बाद आगे लाल सिगनल था और उसके आगे जाम ...करन ट्रक छोड़ कर भीड़ में कूद गया
...यहाँ से कर्नल अहलुवालिया का घर सौ मीटर से भी कम दूर था। अब करन ने पहली बार नोटिस किया की उसकी शर्ट खून से लथपथ है ...कर्नल का घर अब दिख रहा था लेकिन बाहर एक पुलिस की वान और सिक्युओरिटी गार्ड्स खड़े थे और जैसे ही वो गेट के पास पहुंचा ...उसने देखा की जैसमिन उसका वेट कर रही है ..
अन्दर आओ जल्दी वो बोली ...फिर अचानक चिल्लाई ...बचो
और जैसमिन की चीख ने उसकी जान बचा ली , वो झुका मुडा और तब भी चाकू उसके कंधे के पास आकर धंस गया।
अगर जैस्मिन ने वार्न ना किया होता तो चाक़ू सीधे उसकी गरदन पे लगता ...
जैसमिन ने उसका हाथ खींच के गेट के अंदर किया और तुरंत सिक्योरिटी वालों ने बड़ा सा लोहे का गेट बंद कर दिया .
घर के दरवाजे पे पहुँच कर वो करन से बोली , तुम अन्दर चलो मैं आती हूँ ,
और जैसे ही करन अन्दर पहुंचा जेसमीन ने बाहर से एक बड़ा सा ताला लगा दिया।
करन जब अन्दर पहुंचा तो घुप अँधेरा ...और सन्नाटा ..
जैसमिन पीछे के रास्ते से अन्दर आई दरवाजा बंद करते ...
कोई है नहीं क्या और इतना अँधेरा ...उसने जैसमिन से पूछा ...
जैसमिन ने तेजी से उसे चुप रहने का इशारा किया और हाथ पकड के उसे कर्नल अहलुवालिया कमरे में ले गयी ...और वहां एक पेंटिंग को हटाया ..और वहां एक पैड था ...उसपे उसने कुछ नमबर दबाये ...और एक अंडर ग्राउंड बंकर के लिए रास्ता खुल गया।
अब नीचे पहुँच कर एक वैसा ही पेड ...
और जैसमिन ने उस पर भी बटन दबाए ...और मुड कर मुस्करा कर करन को बोली ...
" अब कोई ऊपर उस पैड से भी ये दरवाजा नहीं खोल सकता ...अब तुम तीन दिन तक यहाँ बंद हो ...हम तुम एक कमरे में ...और चाभी ...है ही नहीं ...'
मतलब ..करन को कुछ समझ में नहीं आया ..
भूल गए तुम ...तुम्ही ने तो मेसेज दिया था ...आज सात तारीख है ...जैसमिन उसके कंधे पे हाथ रख के बोली ..
ओह्ह वो बोला ..इत्ती लम्बी जर्नी में तारीख भी नहीं याद रही ...
करन ने मेसेज दिया था की अगला हमला कर्नल अहलुवालिया पर ही होगा और वो सात को होगा ...
जैस्मिन ने पूरी बात समझाई ..
.कर्नल अहलुवालिया ..डिफेंस कैण्टॊन्मेन्ट में एक सेफ हाउस में दो दिन पहले चले गए हैं ...लेकिन उन्हें मेरी और तुम्हारी चिंता थी ...ये पता नहीं था की तुम कब आओगे तो ये जिम्मेदारी उन्होंने मुझे सौंपी थी ..की तुम जैसे आओ मैं तुम्हे ले आऊं ...
ये एरिया इमपेण्ट्रेबल है ...उन्होंने बोला है की हम लोग तीन दिन तक कम से कम बाहर ना निकलें ..
और उसके बाद भी उन से पूछ कर बाहर आयें ...
तब तक करन की निगाह बंकर में चारो ओर घूम रही थी ...
बंकर क्या है अच्छा खासा ...दो कमरे के फ्लैट के बराबर जगह थी ...बस फर्नीचर नहीं था और हाईट सात सात फिट रही होगी लेकिन एयर कंडीशंड था ...फर्नीचर की जगह मैट्रेस और ढेर सारे कुशन पड़े थे ...
एक साइड में बाथ रूम था ..काफी बड़ा
और उस की साईंड में एक छोटा सा फार्मेसी लिखा कमरा ..दूसरी साइड में एक किचेनेट ...एक इलेक्ट्रिक किचेन रिंग ...और एक खूब बड़ा सा फ्रिज ...
और उसके बगल में एक कमुनिकेशन रूम ..उसमें एक वायरलेस , सेट फोन एक सीसी टीवी का कंट्रोल पैनेल और एक छोटी सी आर्मरी ...
ऊप्स मैं तो भूल ही गयी थी ...तुम्हे ईत्ती चोट लगी है ..चलो कपडे उतारो ...जैसमिन बोली ..
वो ना ना करता रहा लेकिन जैसमिन ने खून में लथपथ शर्ट उतार दी और चोट देखने लगी ..सब मसल्स पे ही थी ..
उसने करन को पेट के बल मैट्रेस पे लिटा दिया ..
चोट करन को कई लगी थीं ...लेकिन सबसे सीरियस ..दायें कंधे के पास थी ...वो चाक़ू जो फ़ेंक कर मारा गया था गेट के पास ...लेकिन कोई बड़ी आर्टरी नहीं अफेक्ट हुयी थी ...इसलिए ब्लड लास ज्यादा नहीं था और बोन या नर्व भी नहीं अफेक्ट हुयी थी ..लेकिन चोट थोड़ी गहरी थी ..
.उसके अलावा दूसरे कंधे के नीचे भी चाक़ू के दो घाव थे ...लेकिन वो सुपरफिसियल थे ..
जैसमिन ने सबको पहले साफ किया ...फिर ड्रेस किया ...तबतक उस का ध्यान पैंट में लगे खून पे पड़ा ..उसने अपना हाथ पैंट खोलने के लिए के लिए नीचे किया ...तो करन बड़ी जोर से उचका ...
" नहीं प्लीज ...वहां नहीं ..."
" क्यों कुछ ख़ास छुपा रखा है क्या वहां ...जरा मैं भी तो देखूं ..."
जैसमिन ने छेड़ा , गुदगुदी की और करन की हालत खराब ...
बस इतना मौका काफी था ..उसने पैंट्स हिप्स के नीचे तक खींच दी ...चेन की चोट थी ...पैंट के ऊपर से भी ..ढेर सारा छिल गया था ..और वहीँ से खून उज हो रहा था
जैसमीन ने जान बूझ कर थोडा ज्यादा ही स्पिरिट वहां लगा दिया ...और करन जोर से उछला ...
" यीईईईईई ...ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह "
" मुन्ने को दर्द हो रहा है ...आउच लेकिन अभी तो मोटी मोटी सुइयां लगेंगी ...वो भी दो दो ...कहाँ लगाऊं ..कहाँ लगाऊं ..इधर तो चोट है ...उसने नितम्ब के उस हिस्से को छुआ जहाँ अभी स्प्रिट लगी थी ...
वो फिर जोर से उचका ...उयीइ उयीईईईईइ
ओके ओके इधर नहीं ...तो फिर इधर ..अब जैसमिन की दो लम्बी गोरी उंगलिया करन के खुले गोरे नितम्ब को हलके हलके सहला रही थी ..छेड़ रही थी ...
यहाँ तो नहीं लग रहा है ..लगा दूँ बोलो ...
अब बजाय दर्द के उत्तेजना से करन सिहर रहा था ..और जैसे गलती से ..जैसमीन की शरारती ऊँगली दोनों नितम्बो बीच की दरार में चली गयी और बिना उंगली हटाए ..उसके कानो के पास होंठ लगा के पुछा ...
" और अगर यहाँ लगा दूँ तो ...मोटी सुई ..."
उंगली उसने हटाई जरुर लेकिन उसके लम्बे लाल नेल पालिश लगे नाखुनो ने करन के बाल को स्क्रैच कर दिया ...
और अबकी करन जोर से उछला लेकिन जैसमीन पे कोई फरक नहीं पड़ा ...उसने उसे दिखाई कित्ती मोटी सूई है ..और फिर उसके नितम्ब पे पहले तो स्प्रिट लगाई ...और फिर सूई ...और वो फिर चिल्लाया ...
" इत्ते प्यार से सूई लगाई और इतनी जोर से चिल्ला रहे हो ...इत्ता बड़ा चाक़ू लगा तो कुछ नहीं ..." मुंह फुलाकर जैसमीन बोली .
" प्यार से डर लगता है ...थप्पड़ से नहीं ..." करन ने एक फिल्मी डायलाग दुहराया।
" अच्छा जी बहुत डायलाग याद आ रहे हैं ..चलो इसी बात पे एक और इंजेक्शन ..."
और अबकी जब जैसमिन ने स्प्रिट लगाई तो जान बूझ कर दोनों नितम्बो के बीच की दरार तक लगायी ...
और एक उंगली सीधे दरार में रगड़ दी ...और यहीं नहीं जब सूई लगाकर हाथ हटाया तो अबकी उसकी उंगली ...करन के 'उससे ' टकरा गया .
अब करन ने भी सोचा की अगर उसे अपनी 'इज्जत ' बचानी है ...तो अटैक इस बेस्ट डिफेंस ...उसने सर उठाकर जैस्मिन को देखा और छेड़ते हुए पुछा ..
" याद है तुम्हारी जाब की ट्रीट का एक पार्ट बचा है ...जाने के पहले तुमने प्रामिस किया था ...की मैं जब लौट कर आऊंगा ...तो .."
उसकी बात काटते हुए उसके बालों को रफल करते हुए जैसमिन मुस्करा के बोली ...
"तुम भले भूल जाओ मैं नहीं भूली . मैंने बोला था ना की तीन दिन अब तुम मेरे कब्जे में हो ...मैं उधार रखने में विश्वास नहीं करती ...फालतू का सूद बढ़ता है ..."
और अचानक उसने कुछ देखा और चौंक पड़ी ...
" कित्ती गर्द है तुम्हारे बालों में ...और देह में भी ...कबसे नहीं नहाए हो ..."
" ज्यादा नहीं खाली दस दिन से ...और पिछले तीन दिन से भारतीय रेलवे के जनरल डिब्बे में सफर कर रहा हूँ ..." वो हंस के बोला।
" तो चलो पहले नहाओ ..गंदे कही के ..एक तो इत्ती ढेर सारी चोट लगा के आये हो ..फिर इस मैल से पक्का इन्फेक्शन फैलेगा ..." वो उसे उठाती बोली .
ओह वो जोर से चिल्लाया ...मेरा दायाँ हाथ नहीं उठ रहा है बहोत दर्द हो रहा है ...
" चीखो मत ...मेरा हाथ है न ...और सुई लगा दी है ..आधे घंटे में दर्द कम हो जाएगा ...
और अगले एक घन्टे तक बिना अपने हाथ के काम चलाओ .., न दायाँ न बायाँ .अगर कही जो पड़ गया तो मुश्किल हो जाएगी .' जैसमिन ने पूरी उसपर चढाई कर दी।
करन ने पैंट सम्हालने की कोशिश की ...तो फिर डांट पड गयी ...ये कोई नया फैशन चला है क्या पेंट पहन के नहाने का ...
और उसे एक छोटी सी तौलिया पकड़ा दी ...जबतक करन उसे लपेटता ...जैसमिन ने पेंट खींच के सीधे वाशिंग मशीन में डाल दी .
टावेल इतनी छोटी थी की मुश्किल से गाँठ लग पाई ..और तब भी साइड से खुला ही था .
करन ने काउंटर अटैक किया ...
" अच्छा जी और ये फैशन कब से चला शलवार सूट पहन कर नहाने का "
वो मुस्कराकर , जिधर फार्मेसी थी ...उधर गयी ...और जब निकली तो बाथिंग सूट पहने थी ...जिसमें कुछ नहीं दिखता था ...और करन का हाथ पकड़ कर बाथरूम में ले गयी ...
बाथ रूम देख कर करन दन्ग रह गया ..
" तुम्हारे सारे चोट पर मैंने पेपर टेप लगा दिए हैं ..वाटर प्रूफ ...इसलिए तुम आराम से नहा सकते है
लेकिन करन की निगाह तो सामने शावर्स पर पड़ी थी ...शावर टाइल्स ...पूरे बाडी के लिए डिफरेंट अंग्ल्स पे , हैण्ड शावर वो भी मल्टी फंक्शन ...शावर का एरिया थोडा धंसा हुआ ..
और सामने की दीवाल के सहारे एक खूब बड़ा सा मार्बल टब ...बगल में बेसिन ...और वहां तरह तरह के शैम्पू , साबुन , क्रीम ...रखे ..
डरो मत ...पानी ही है और जैसमिन ने उसे शावर के सामने खड़े कर के शावर पूरा खोल दिया ...हल्का गुनगुना पानी ...मैल के साथ
इतने दिनों की थकान भी गायब हो गयी ...
करन जैसमीन को देख रहा था ...उसने बाथ टब में पानी भरा फिर बबल बाथ के लिए सोप डाला ..और वहां से एक शैम्पू की शीशी ले के आई
और शावर बंद कर दिया . एक स्टूल की ओर इशारा करके वो बोली ...तुम इसपर बैठ जाओ ...और आँख बंद कर लो ...
फिर जैसमिन ने जो शैम्पू क्या किया ..एकदम चम्पी ..बड़े बड़े स्पा वाले मात खा जायं ...
लेकिन करन के आँख में थोडा साबुन चला गया ...वो चीखा लेकिन डांट पड गयी ...मैंने मना किया था ना ..क्यों खोली आंख ...
और एक मोटा सा ब्लाइंड फोल्ड उसकी आँख पे बाँध दिया ...चलो अब साबुन नहीं जाएगा ...और फिर शैम्पू के बाद साबुन ...
जैसमिन ने शावर फिर खोल दिया ..लेकिन साबुन लगाने के साथ ही उसकी शरारतें फिर शुरू ....और हाथ में दर्द की वजह से वो ब्लाइंड फोल्ड खोल नहीं सकता था ...
जब जैसमिन ने तौलिये के अंदर हाथ डालने की कोशिश की तो करन बहुत जोर से चिल्लाया ...वहां नहीं ...
क्यों ..वहां साफ करने के लिए कोई और आएगी क्या ...और इस धींगा मुस्ती में टावेल खुल गयी और जैसमिन ने उसे उठा के दूर फ़ेंक दिया ..
और फिर आगे पीछे हर जगह ढेर सारा साबुन ...यही नहीं हैण्ड शावर से 'उसे ' ख़ास तौर से साफ किया और उसका मुंह खोल के ...नतीजा वही हुआ जो होना था ..शेर जग गया।
लेकिन जैसमीन को तो बस मजे आ गए ..अपने हाथ में साबुन लगा के वो 'उसे' आगे पीछे करती रही ...और शेर बौखलाता रहा ...
एक बार फिर उसने शावर में खड़ा कर उसका पूरा साबुन साफ कर दिया और उसको पकड़ के बाथ टब की ओर लेगयी और उसे बाथ टब में ढकेल दिया ..
क्यों यहाँ नहीं नहलाने आओगी ..करन ने चिढाया ...
और जवाब जैसमीन की देह ने दिया ...जो बाथटब में उसके साथ थी ...और बाथ टब में तो कोई बाथरोब पहन के जाता नहीं ...
जैसमिन की देह अब उसकी देह से रगड रही थी ...करन ने उसे पकड़ने की कॊशिश की तो ...जैसमिन ने खुद उसे बाँहों में भर लिया लेकिन एक ऊँगली उसके होंठो पे रख दी ...
बोलना मना ...
आधे घन्टे वो लोग टब में बस सोक करते रहे ...
और बीच बीच में जैसमीन की मीठी छेड़खानी ...कभी वो अपने उभारो से उसके सीने पे रगड़ देती ..कभी होंठो से इयर लोबस पे बाईट ले लेती
और सबसे ज्यादा मुसीबत थी ...उसके शेर की ...उसे एक पल का आराम नहीं था ...जेसमीन के हाथ ...तो कभी रेशमी जांघे ..और एकाध बार तो सीधे ...उसकी उड़ने को बेताब गुलाबी परी ...खुद ...
और उसके बाद उसने व्हिर्ल पूल आन कर दिया ...और अब जो शावर सीधे पीछे पीठ और कमर पे पड़ रहे थे उनसे थकान के साथ दर्द भी गायब हो रहा था ...पर जैसमीन ...कभी शावर ठीक उसके कमर के नीचे शेर पे कर देती ...तो कभी पिछवाड़े ..
और उसके बाद उसका हाथ पकड़ कर जैसमिन टब से बाहर लायी ..और वार्मर से निकाल कर एक गरम तौलिये से उसे रगड़ रगड़ के पोंछा ...
और फिर एक फ्रेश टावेल पहना के उसे वो बाहर लायी।
ब्लाइंड फोल्ड अभी भी आन था ...
उसे एक मैट्रेस पे बैठा के उसने एक बार फिर उसकी सारी चोटें चेक की और बोली ...तुम्हारे कंधे के घाव पे मुझे स्टिच लगानी होगी ...तुम थोड़ी देर वेट करो ...
पंद्रह मिनट तक उसे तरह तरह की आवाजें सुनाई देती रही ...सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट स्टरलाइज करने की ...तरह तरह की ड्रेसिंग ...और ..फिर उसे पेट के बल लिटा के ..
उसने पहले तो लोकल ऐनेश्थेसिया दिया ...फिर टांके लगाये ..फिर दो तीन इंजेक्शन ...
ये टांके अपने आप डिजाल्व हो जायेंगे दो दिन बाद पता भी नहीं चलेगा ..
और उस का ब्लाइंड फोल्ड खोल दिया ...बस वो बेहोश नहीं हुआ ...
जैसमीन नर्स की यूनिफार्म में थी और वो भी ...बहोत ही हाट और सेक्सी ...
करन की निगाह जेसमीन की ड्रेस ...और ड्रेस से बाहर झांकते उसके गोराइयो गोलाइयों पर चिपकी थी ...
सर पर नर्स की एक छोटी सी कैप ...
लेकिन उसके नीचे उसके , नितम्बो से भी नीचे तक लहराते काले रेशमी बाल ,
बड़ी बड़ी आँखों में गहरा काजल, मस्कारा , गालो पे हल्का सा रूज ... साथ में डार्क रेड लिपस्टिक ...
और जब वो और नीचे आया तो सांस रुकी रह गयी ...
नर्स की ड्रेस का टाप इतना टाईट की पूरे उभार , कटाव सब कुछ दिख रहा था ...और बहुत लो कट क्लीवेज के साथ गोरी सख्त गोलाईयां भी ..एक चौड़ी लाल बेल्ट उसके कमर पे कस के बंधी ...
जिससे उभार और छलक रहे थे ...एक बहुत छोटी सी स्कर्ट , हिप्स के जस्ट नीचे तक ...और फिश नेट की स्टाकिंग
टावल में आठ इंच का टेंट बन गया ..
क्यों पसंद आई ट्रीट ...उसके पास बैठ के , झुक के जैसमीन ने बोला ...
बहोत ...लेकिन ..मिलेगी कब ...ललचा तो बहुत दिन से रहा हूँ ...
अच्छा जी ..मैं तो जनाब को बहोत सीधा समझी थी ...कब से इरादे खराब है तुम्हारे ...
उसका नाक पकड़ के जैसमीन ने बोला ...
जब से तुम्हे अलाहाबाद में देखा था , पहली बार ...करन ने मुस्कराकर जुर्म का इकबाल किया।
बड़ी अदा से जैसमिन ने अपना नर्स का कैप उतारा ...और उसे करन के सीने पे रख दिया ...
उसने एक सर को हलकी सी जुम्बिश दी ..और काली रेशमी घटा ...करन के चेहरे पे फैल गयी
और बालों के उस झुरमुट में जैसमिन के लाल गुलाब से दहकते होंठ करन के होंठो से मुश्किल से आधे इंच दूर होंगे ...
तो क्या इरादे थे तुम्हारे ...सहलाती सरसराती आवाज में जैस्मिन ने पुछा ...
तुम्हे बाहों में भींच लूं , दबोच लूँ ,मसल दूँ ...उतेजना से भरी आवाज में करन ने राज खोला।
तो भीच लेते ना मैं कौन सा बुरा मानती ...जेसमीन ने उसे और चढाया ..
लेकिन फिर वो झटके से दूर हट के बैठ गयी ...और करन की ओर देख के मुस्करा के बोली ,
" लेकिन आज नहीं ...मेरा मतलब अभी नहीं ..सामने घडी देख लो ध्यान से ...बस बीस मिनट ...अपने हाथो पे कंट्रोल रखो वरना मैं उन्हें बाँध दूंगी ...उसके बाद बाजी तुम्हारे हाथ ...
हाँ तब तक मेरे हाथ हैं ना ...तुम्हे भीचने,दबोचने , मसलने के लिए
और अपनी बात अच्छी तरह समझाने के लिए ..जैसमीन ने अपने नेलपालिश लगे लम्बे नाखुनो से पहले उसके गाल पे स्क्राच किया ...फिर होंठ पे और बोली ...
" ओके बोलो ...तुम्हे ट्रीट की क्या चीज चाहिए ..पहले उसने अपने रसीले होंठो को पाउट कर पूछा ...ये ...
फिर अपने कसे टाप को फाड़ते ...गदराये जोबन को उभार कर पूछा ...ये ..
और करन ने जोर जोर से हाँ में सर हिलाया
तो ले लो ना ...और अपने छलकते उरोज ..जैसमिन ने पहले करन के दहकते गालों पे रखे ..फिर उसके होंठो के पास ...
और अब करन ने देखा ..इत्ता लो कट की पूरे क्लीवेज के साथ उसके निप्स भी आलमोस्ट दिख रहे थे ...सिर्फ एक बटन लगा था ...और उसे ललचाते लुभाते ..उसके सीने पे अपना टाप रगड़ने लगी ...
और फिर दूर हट के खुद अपने हाथों से टाप के ऊपर से अपने उभारो को सहलाते ...आँख नचा के बोली चाहिए ये ...
हाँ आलमोस्ट मस्ती से पागल होता करन बोला
और एक झटके से आखिरी बटन खोल के जैसमीन ने टाप दूर फ़ेंक दिया ..
...
और अब करन पूरी तरह से पागल हो गया .
3 4 सी पिंक लेसी ब्रा ,हाफ कप में , उसके गोरे गदराये ...जोबन समाये नहीं पड़ रहे थे दोनों कबूतर उड़ने को बेताब ..
और वो जरा सा झुकती तो दोनों कबूतरों की लाल लाल चोंच ...खुल के सामने आ जाती ..
और एक बार फिर वो करन के चेहरे के सामने झुकी ...और जब करन अपना चेहरा उठाता ...
तो वो उसे और दूर कर लेती ..लेकिन एक बार करन के होंठो ने झपट्टा मारा और ...ब्रा के अंदर से झांकते ललचाते खड़े निपल उसके होंठो के बीच में ..
वो जोर जोर से चूसने चुभलाने लगा
अब सिहरने सिसकने की बारी जेसमीन की थी .
उसके उरोज एकदम पत्थर के हो गए थे ...पूरी देह काँप रही थी ...
नदीदे ...मिलेगा ..वो बोली और करन के होंठो से मुश्किल से छुड़ाती हुयी ..अब एक बार फिर बड़ी सिड्क्टिव अदा ...से लेसी ब्रा से झांकते उभारों को करन के चौड़े सीने पे सहलाने , रगड़ने लगी ...उसके खड़े उत्तेजित , ब्रा से
बाहर निकलते निपल ..सीधे करन के सीने के टिट्स से रगड़ते ...
और जोश में पागल करन भी अपने हिप्स उछाल रहा था।
जैसमीन अपने उभारों से सहलाते हुए ..सीधे कमर तक आगई ..
करन का जोश में सर उठाया हुआ शेर सिर्फ एक छोटी सी टावेल से ढंका था ...और अब उसे दोनों ट्रांसपरेंट लेसी गुलाबी ब्रा से छलकते दोनों उभारों के बीच 'उसे ' पकड़ के ...जैसमीन ने दबा दिया और ऊपर नींचे करने लगी ..
करन सिसक रहा था ...अपने नितम्ब रगड़ रहा था ...
एक बार फिर जैसमीन उसके चेहरे के पास पहुँच के बोली ..." खोल दूँ ..."
हाँ ...जोर से करन बोला ..
लेकिन ये काम तो तुम्हारा है ...जैस्मिन ने चिढाया ..
पर कैसे ...तुमने बोला है हाथ ...बीस मिनट ...
जैस्मिन उलट गयी ..और अब उसकी पीठ धनुष की तरह ...ब्रा स्ट्रिंग ब्रा थी ...
जैस्मिन गुनगुना रही थी ..चोलिया के बंद सैयां ...होंठवा से खोले ला ..
इतना आइडिया बहोत था ब्रा ..खुल गयी ...लेकिन अपने दोनों ब्रा के कप पकडे पकडे जैसमिन उठ गयी
....और दूर से स्ट्रिप डांसर की तरह डांस करती ललचाती रही ...फिर एक झटके में उसे खोल कर 'शेर' के ऊपर ...लेकिन उरोज अभी भी उसके हाथों के पीछे छिपे झाँक रहे थे
स्कर्ट ..स्कर्ट भी ...करन लेटे लेटे चिल्ला रहा था ...
ऐनी थिंग फॉर यु ...जैसमिन बोली और मुडकर , कुल्हे मटकाते ..डांस करते उसने स्कर्ट खोल दी ...और दूर उतार कर फ़ेंक दी ...
उसकी पीठ अब करन की और थी ..इसलिए करन अभी भी उसके उरोज नहीं देख पा रहा था ...
लेकिन करन की आँखे फटी रह गयीं ...
उसके पूरे गोरे रसीले मस्त नितम्ब खुल के दिख रहे थे ...पीछे से थांग ..उसकी पिछवाड़े की दरार में खो गया था ...कमर उसकी इतनी पतली की मुट्ठी में ले ले ...और उसके नीचे खूब भारी भारी चूतड ..लम्बी लम्बी टाँगे ...
और अब जैसमिन चक्कर ले के उसके सामने हुयी ...तो करन की नजर उसकी गोरी चिकनी रेशमी जांघो से नहीं हट रही थी ..और उस के बीच में लेसी आलमोस्ट ट्रांसपैरेंट थांग ...मुश्किल से दो अंगुल चौड़ी ...
बस उसकी प्यारी गुलाबी चुनमुनिया को दबोचे ...और जब उसकी निगाह ऊपर गयी तो ..अब दोनों उरोज हाथो के पीछे तो थे लेकिन पूरी तरह छिपे नहीं ...
जैसमीन ने उँगलियाँ फैला दी थीं ...और उनके बीच से कबूतरों की लाल लाल चोंचे ...अब खुल के दावत दे रही थीं ..
जैसमिन खुद ही कमर हिलाते , भारी नितम्ब मटकाते उस के पास आ गयी
ब्रा की तरह ये भी स्ट्रिंग थी ...
और करन ने मुड कर अपने होंठो से उसे भी खोल दिया ..
और अब दोनों पागल हो गए ...
जैसमीन सीधे करन के कमर के पास गयी ...
और दहाड़ते शेर को टावेल के पिजड़े से आजाद कर दिया ...और उसे अपनी ब्रा और थांग के पिंजड़े में बंद कर दिया ...
जैसे कोई मथानी के चारो ओर रस्सी लपेटे ...उसने अपनी लेसी पिंक ब्रा और थांग को उत्थित लिंग में लपेट के ...मथानी की तरह घुमाने लगी ...
जैसमीन ने पहली बार उसे देखा तभी से उसका मन ललचा रहा था और आज अब मौका मिल गया था ...
और कुछ पलों में ब्रा थांग की जगह उसकी कोमल हथेलियों ने ले ली ...कठोर , तने हुए उत्थित लिंग के स्पर्श का उसका ये पहला मौक़ा था ...और उसकी पूरी देह सिहर उठी ...
लेकिन बिना रुके उसकी हथेलियाँ करन का लिंग मंथन करती रहीं ...
उसकी निगाह घडी पर पड़ी और वो मुस्करा उठी ...बीस मिनट होने में अभी भी पांच मिनट बाकी थे ...
और उसने करन को बोला था ...बीस मिनट बाद ..बाजी करन के हाथ में होगी ..तब तक वो चुपचाप लेटा रहे ...
उसने उसे एक स्ट्रांग पेन किलर का इंजेक्शन लगाया था ...जिसके असर से करन के कंधे और हाथ का दर्द बहोत जल्दी ख़तम हो जाना था .
लेकिन उसके साथ ही उसने उसकी हिप पर स्टिचिंग के बाद एक काकटेल इंजेक्शन लगाया था ,
...एम्फीटेममाइन की फूल डोज ...और इञ्जेक्टिबिल सियालिस , जो वियाग्रा की तरह होती है लेकिन उसका असर वियाग्रा से ज्यादा देर तक रहता है ...बीस मिनट में दोनों ड्रग का असर अपने पीक पर पहुँच जाएगा ..
बस पांच मिनट बाकी था ...और अब ...जैसमीन के हाथों की जगह उसके रसीले गुलाबी होंठों और जीभ ने ले ली लिंग के बाल्स से जुड़े बेस से लेकर सीधे उपर तक बड़े बड़े लिक्स ...और साथ में होंठो से सैकड़ों चुम्बन
...और यही नही अचानक जैसमिन ने अपने गुलाबी होंठो के बीच करन की एक बाल्स को भी ले के चूसना शुरू कर दिया ...
आज वो उसको अच्छी तरह तंग करने के मूड में थी ...
पास में से दो कुशन उठा के उसने करन के नितम्बो के नीचे लगा कर उन्हें उठा दिया ..और ..
उसकी लम्बी जुबान ..सीधे बाल्स और पिछवाड़े के छेद के बीच की जगह चाटने लगे ...
करन मस्ती से पागल हो रहा था ...वो बार बार अपने चूतड उठाता ...और यही तो जैसमीन आज चाहती थी ...
बस तीन मिनट बचे थे ...
और झप्पट्टा मार कर उसके होंठो ने करन के सुपाडे को गप्प कर लिया ...और फिर धीरे धीरे होंठो से दबा के ..उसका चमड़ा नीचे कर दिया और चुभलाने लगी ...बड़ी मोटी ..खूब रसीली लीची ऐसा ..
साथ में जैस्मिन का एक हाथ करन के बाल्स सहला रहा था और दूसरा लिंग को पकड़ के ऊपर नीचे ...उसने फिर दबाव दिया और अबकी आधा लिंग ...करीब चार इंच उसके मुंह में ...और वो जोर जोर से पूरी ताकत से चूस रही थी ...
इत्ती जोर से तो उसने बचपन में लालीपाप भी नहीं चूसा होगा ...
तिरछी निगाह से उसने घडी की और देखा ..
एक मिनट ...
और वो चूसना छोड़ कर करन के उपर खड़ी सी हो गयी और जब बैठी तो इस तरह की जैसमिन की मस्ती से गीली रस से भरी पुत्तियाँ ...उसकी चुन्मुनिया ..सीधे करन के सुपाडे .पे ...
थोड़ी देर तक वो ऐसी ही रगडती रही ...करन को तडपाती रही ...फिर ..
बीस सेकेण्ड बचे थे ...
उसने अपनी दोनों उँगलियों से अपने स्नेह द्वार के कपाट मुश्किल से थोड़े चौड़े किया ...और करन के सुपाडे पे दबाना शुरू किया ...
लेकिन पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाडा ...उसकी कच्ची चूत में इतनी आसानी से नहीं जानेवाला था ...जैसमिन ने अपनी देह का पूरा जोर लगाया तो जरा सा सरका ..
वो सोच रही थी की अब करन उसकी कमर को पकड़ कर ..एक बार पकड़ के खीचे तो शायद अंदर घुस जाय ...अब वो करन से भी ज्यादा बेताब थी.
करन ने उसकी पतली कमर पकड़ी जरूर ...लेकिन बीस मिनट हो चुके थे ...
और अब गाडी नाव पर थी ...
जैसमिन नीचे और करन ऊपर ...जैसमिन को गोरी लम्बी टाँगे ..करन के कंधे पे थीं, पूरी तरह फैली ...
उसका दहाड़ता शेर गुफा के मुहाने पे ..रास्ता तलाश रहा था ...और करन के दोनों हाथ सीधे जैसमीन के गोरे गदराये उभारों पे ...जिन्हें देख के वो पहले दिन से ललचा रहा था ..उसके हाथो ने बस दुलराया , सहलाया
लेकिन थोड़ी देर में ही गियर बदल कर जम कर उन उरोजों की उसने रगडायी मसलाई शुरू कर दी ...उसके होंठ जैसमीन के रसीले गुलाबी होंठो का रस चूस रहे थे ...
और अब जैसमिन की हालत ख़राब थी ...
आग तो उसने लगा दी थी लेकिन उसे कंट्रोल करना ...वो खुद अपने चूतड रगड़ रही थी , उचका रही थी
..अपनी दोनों बाहें उसने करन के गले में डाल दी थीं ...और अपनी ओर खींच रही थी ...
" करो ना प्लीज ..करन अन्दर डालो ना ...प्लीज अब और नहीं ..." वो सिसक रही थी .
और करन अब उसे और तडपाने पे उतर आया था ...
उसके होंठ जैस्मिन के एक निपल को चूस रहे थे , दूसरा निपल उस के अंगूठे और तरजनी के बीच था ...और एक हाथ से वो कस के क्लिट को रगड रहा था . उसका तन्नाया शेर उसकी गुफा के दरवाजे पे तो रगड़ घिस्स कर ही रहा था ...
" डाल दो ना प्लीज अब ...और नहीं ..." जैसमिन बोली।
कचकचा के जैसमिन के मीठे गाल को काटते हुए करन ने छेड़ा ..." क्या डाल दूँ नाम तो बोलो।"
" ओह ओह ..वही तंग ना करो ना ...प्लीज करन .." मस्ती से जेसमीन की हालत ख़राब थी .
" बस एक बार नाम बोल दो ना ...अब क्या शरमाना ...मैं तुम ही तो है ..."
करन ने जोर से उसके निपल फ्लिक करते हुए कहा .
' ओह्ह तुम ना ...दुष्ट ..बदमाश ...ओ के ...अपना ....लिंग ..." जैसमिन झिझक के बोली
और करन ने बहोत कस के उसकी क्लिट को रगड़ के अपना जवाब दिया ...
" ये नहीं साफ साफ बोलो ना ..."
समझ जैसमिन भी रही थी की करन उससे क्या बुलवाना चाहता है और हिम्मत कर के धीरे से वो बोली ..." अपना ..अपना लंड "
"मैंने नहीं सूना ..." करन मुस्करा के बोला
ओह्ह ओह्ह दुष्ट ...प्लीज ..अपना लंड डाल दो ना ...अब और मत ...जैसमीन ने आखिर बोल ही दिया ...जोर से
फिर कौन रोकने वाला था करन को ..उसने एक हाथ से जैसमीन की नाजुक पतली कमर पकड़ी ..और दूसरा हाथ उसके भारी भारी चूतड पे ...टांगो को एडजस्ट किया ...
और पूरी ताकत से धक्का मार दिया ...फिर दुबारा ...फिर तिबारा ...
और अबकी जैसमिन बहोत तेजी से चीखी ...
उयीईईईईईईईईईईईईईईईईई ...ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ...उसने दोनों हाथो से कुशन को भींच रखा था उसके हाथ सफेद पड गए थे ...चेहरा एकदम पीला और मारे दर्द के आखे जैसे निकल गयी थीं .
और जब करन ने आँखे नीचे की तो अब उस की हालत खराब हो गयी ..
जैसमिन की जांघो के बीच में खून के थक्के
' ओह्ह ...जैसमीन ..तुम्हारे ..खून .." करन रुक के बोला ..
जैसमिन समझ गयी की अगर अभी करन घबडा गया ना तो ...उसने अपनी बाहों में करन को भींच लिया ...और नाख़ून उसके पीठ में धन्साती बोली ...
" पागल ...ये खून खच्चर तो कभी ना कभी होना था ..."
और फिर कस कस के करन को चूमती बोली ...
" रुक क्यों गए बुद्धू ...थक गए क्या इतनी जल्दी ...मुझे पूरा चाहिए ..आधा तीहा नहीं ..."
करन ने भी प्यार से जैसमिन की पलकों को गालों को चूमा ...और फिर उसके होंठ ..और फिर गदराये जोबन पे वो आके रुके ...
धक्के धीरे सावन के झूले की पेंग की तरह चालू हो गए ..एक बार करन धक्के लगाता तो नीचे से जैसमीन अपने चूतड उछाल के जवाब देती
और अब जैसमिन की बारी थी करन को छेड़ने की ..
" हे क्या डाल रहे हो ...इतना धीरे धीरे ..सम्हाल के जैसे सुई में तागा ..."
करन समझ गया लेकिन मुस्कराकर उसने भी उसी तरह जवाब दिया ...
" लंड पेल रहा हूँ तुम्हारी चूत में ...अभी हचक के चोदता हूँ ..."
तो चोदो ना ...मुस्कराकर जैसमिन ने भी उसी भाषा में जवाब दिया ...
और फिर तूफान आ गया ..
.जैसे कोई धुनिया रुइ धुनें ...बस उसी तरह ..करन जैसमीन को चोद रहा था ...कभी दोनों हाथो से कमर पकड़ के ..कभी टांगो को दुहरा कर के ...और उसके हाथ ...जैसे कुम्हार के हाथ चाक पर चलते हैं ..कभी जैसमीन की मस्त चून्चियो पे ..तो कभी क्लिट पे
जैसमिन कभी दर्द से दुहरी हो जाती ...तो कभी मजे से पागल
कभी चीखती ...तो कभी सिसकती ...लेकिन वो करन का पूरा साथ दे रही थी ...उसे बाहों में भींच कर गालों पे चूम कर ..टाँगे उसकी कमर में बाँध कर ...और यहाँ तक की गालियों में भी ..
वो समझ गयी थी की करन को ऐसे मौके पे कैसी जुबान पसंद है ...
आधे घंटे , चालीस मिनट तक ये तूफान चला ...फिर सबसे पहले बहोत देर तक तेजी से कांपती हुयी जेसमीन शिथिल पड गयी ...
और उसके थोड़े ही देर बाद ..करन उसके अन्दर ...झड़ता रहा झड़ता रहा ..और उसके बाद भी उसके अंदर ही दोनों एक दूसरे की बांहों में शिथिल पड गए ...
और जैसमीन का फोन बजा बहोत जोर से ...तब उन दोनों की तन्द्रा टूटी ...
जेसमीन ने फोन उठाया ..कर्नल अहलुवालिया का फोन था ...वो करन से भी बात करना चाहते थे . जेसमीन ने मुस्कराते हुए , करन की ओर इशारा किया ...और स्पीकर फोन आन कर दिया।
करन अभी भी 'उसके अन्दर 'धंसा हुआ था।
"कांग्रेट्स टू बोथ आफ यू ...जो एविडेंस तुमने कलेक्ट की थी ...और जैसमिन तुमने हैण्ड ओवर की थी ...मैंने पहले तो खुद चेक की ...और अभी कैबिनेट सेक्रेटरी को भी दिखाई ....हमारे पास जो इंटरनल रिपोर्ट्स थीं ..ये उनसे पूरी तरह मैच कर रही है।
अभी पन्दरह मिनट में ...नेशनल सिक्योरिटी ऐडवाइजर , डायरेक्टर जनरल आई बी भी आ रहे हैं ...
उनके सामने हम फिर कैबनेट सेक्रेटरी के कमरे में मीटिंग करंगे और ऐक्शन प्लान करेंगे ...
हमें उम्मीद है की आज से ऐक्शन स्टार्ट हो जाएगा ...और उस के साथ फारेन सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी से एक मीटिंग होगी ...फिर वो लोग पी एम् को भी ब्रीफ करेंगे ...
लेकिन मैंने तुम दोनों को इस लिए फोन किया था ...की मुझे शक है की जैसे हम लोगों का ऐक्शन स्टार्ट होगा ...उनका काउंटर एक्शन भी शुरू होगा ...मैंने घर के बाहर एक कमांडो यूनिट को भी रात में लगा दिया है ...बस तुम एक काम करना ...करन को एक पल के लिए भी बाहर मत निकलने देना ..."
जैसमीन ने शरारत से एक कस के आँख करन को मारी ..बाहों में उसे बाँध लिया ...और अपनी प्रेम गुफा में धंसे , उसके शेर को कस के भींच लिया ...और बोली ...
"एकदम नहीं निकलने दूंगी बाहर ..."
और फिर एक बार कस के अपनी योनि को सिकोड़ के ...करन को अपना इरादा साफ कर दिया ...की वह 'कहाँ ' से 'क्या' बाहर नहीं निकलने के लिए बोल रही है .
और अब कर्नल करन से मुखातिब थे और करन की तारीफ कर रहे थे ...
" हार्ड वर्क इज द की ...एंड यू नो इट ."
करन का शेर जैसमिन की शरारतों से फिर हार्ड हो गया था ...और वो गुफा में तो था ही ...करन उसे धीरे धीरे ...आगे पीछे कर रहा था ...
कर्नल साहेब जारी थे ...तीन दिन तक तुम बाहर मत निकलना ...जैसमीन नोस क्या कैसे ...और तुम बस अभी रिलेक्स करो ...
आई विल बी इन टच ...कांग्रेट्स अगेन ...और दोनों ने एक साथ थैंक्स सर ...बोला ...फोन काटा और चालु हो गए ...
दोनों बैठे थे ...
जैसमीन ..करन की गोद में ...जैसमीन की जांघे पूरी खुली फैली ...और लम्बी टाँगे करन को लता की तरह लपेटे ..और करन जैसमिन के अंदर ...आगे पीछे ..आगे पीछे ...और उसका एक हाथ ...जैसमीन की पीठ पर और दूसरा मस्त उरोजों पे ..जैसमिन भी इस झूले का मजा ले रही थी ...
अचानक उसे कुछ याद आया ...
" हे जबसे तुम आये हो ...खाना नहीं खाया ...मैं कुछ लाती हूँ ..."
नहीं प्लीज मैं सिर्फ ..इसका भूखा हूँ ..." जैसमीन के निपल्स को चूसते हुए वो बोला .
हँसते हुए जैसमीन बोली ...
"ये तो तुम्हे मिलेगा ही ...बस तीन मिनट और फिर हम लोग इसी पोज में होंगे .'
करन जिद्दी बच्चे की तरह फिर बोला ..
"ना ना मेरे हाथ खाने में बीजी रहेंगे ...तो फिर मैं इस का मजा कैसे लूंगा ..."उसके निपल पिन्च करते वो बोला .
" अरे यार तेरे दोनों हाथ भी खाली रहेंगे ..."
हंस के वो उठी और सैंडविच का एक पैकेट लेके आ गयी .
फिर वो दोनों उसी पोज में थे ..करन को जैसमीन कभी अपने हाथ से खिलाती ..तो कभी अपने होंठो से ...और करन का एक हाथ ...उसके उभारो पे था और दूसरा उसके हिप्स पे ...जहाँ आगे पीछे पुश करके ...और कुछ देर बाद चुदाई की रफ्तार बढ़ गयी ...
और अबकी वो झडे तो जैस्मिन ऊपर थी ...
और वैसे हो वो सो गए ...जब उनकी नींद खुली तो देर शाम हो चुकी थी करन तो फिर चालु होने के मूड में था ...लेकिन जैसमीन ने उसे धक्के दे कर अलग किया ...और किचेन में कुछ बनाने लगी ,
करन सीसी टीवी के कंट्रोल पैनेल से सब चेक कर रहा था ..हर जगह लेजर रेज से सिक्योरिटी थी ...और सारे कैमरे नाईट विजन वाले थे ...
खाने के बाद जैसमीन ने उसे दवाइयाँ खिलाई ...चोट चेक की और बोला की अब सो जाओ ...लेकिन करन ...
थोड़ी देर में वो दोनों सिक्सटी नाइन की पोज में थे ....रात के ग्यारह बज रहे थे ...जैसमिन को भी बहुत मजा रहा था लालीपॉप चूसने में ...
तभी जोर की धमाके की आवाज हुयी ..
दोनों दौड़े दौड़े ..कंट्रोल पैनेल पे .
दिख रहा था ..एक कोई एक्सप्लोसिव्स से लदी ट्रक बाहरी गेट से टकराई ...और वो हवा में उड़ गया ...गेट, गेट के पास का गार्ड रूम बाउंड्री ..
करन ने बोला ...असली हमला अब होगा ...और ...एक कार उसके पीछे अन्दर घुसी ...और दनदनाती हुयी सीधे बिल्डिंग के पास ..
जैसमीन ने ढेर सारे बटन दबाने शुरू कर दिए ..
उस कार से कई लोग उतरे और घर के अन्दर घुसने की कोशिश करने लगे ..एक दो हैण्ड ग्रेनेड भी फेंके ..
जैसिमिन ने करन के कंधे पर हाथ रखा की वो चिंता ना करे ..और वही हुआ ...
तीन मिनट के अन्दर ..चार गाड़ियों में कमांडो अन्दर घुसे ...हमला करने वालों में दो मारे गए और चार जिन्दा पकडे गए ...
लोग कहते हैं एक्साईटमेंट में सेक्सुअल ऐराउजल बढ़ जाता है ...और वही हुआ रात भर ...
कोई चीज नहीं छोड़ी दोनों ने ...डागी पोज .. और सुबह बल्कि दोपहर तक सोते रहे ...फिर साथ साथ नहाया ...खाना बनाया ..खाया ...
और तब करनल साहेब का फोन आया ...तीन मोल में दो पकड लिए गए हैं तीसरे का भी है वो शाम को फोन करेंगे ...
और हाँ नहाते समय ...करन इ जैसमीन का पिछवाडा भी बजा दिया ...
खैर उसके लिए जिम्मेदार भी जैसमिन थी ...
सुबह से जब वो उसको देखती ...बस उसे ललचाते हुए अपने मोटे मोटे चूतड मटका देती ...और २ ८ की पतली कमर पे ३५ के नितम्ब एकदम जानमारू लगते थे ...
और नहाते समय ...जब जैसमीन उसे साबुन लगा रही थी ...तो पहले उसने आपने हाथों में खूब साबुन लगाया ...और फिर तर्जनी पे और ज्यादा ..फिर करन के नितम्बो पे साबुन लगाते लगाते उसके पिछवाड़े की दर्रार में ऊँगली से साबुन लगाने लगी ...और जब तक करन कुछ समझे समझे ...पूरी की पूरी तर्जनी अन्दर ...
करन कहता रहा निकालो निकालो लेकिन जैसमीन उसे छेड़ती रही , हंसती रही ...
'अब तुम्हे पता लगा ना की अंदर जाने पे कैसा लगता है ...मजा आ रहा है ना डलवाने में ..डालने का मजा तो बहुत ले लिया ..अब जरा डलवाने का मजा भी तो ले लो ..."
और उंगली कभी अन्दर बाहर खच खचा खच , सट सटा सट होती ...पूरी की पूरी तो कभी गोल गोल ...
और जब उसने उंगली बाहर निकाली तो करन ने उसे दौड़ा लिया ..वो भागी ...लेकिन कितना भागती ..
वहीँ बाथ टब पे निहुरा के दोनों टांगे फैलाई ...और अपना मोटा मुसल उसके पिछवाड़े ...वो लाख चिच्याती रही ...चूतड पटकती रही ... पर उसने सुपाडा ही दिया ...और एक बार जब उतनी इंट्री हो जाये तो बाकी भी ...
करन का बस चलता तो एक के साथ एक फ्री ...दुबारा भी उसी समय उसकी ...
लेकिन जैसमीन ने प्रामिस किया की आज रात ...वो जरुर ..बिना ना नुकुर के ...तो वो माना ...फिर उसके बाद साथ साथ शावर ..साथ साथ बाथ टब ...और बाथ टब में भी ...पिछवाड़ा नहीं तो अगवाडा ...साइड से
...पहली बार पानी के अंदर दोनों मजा ले रहे थे ...दोनों साथ साथ धीरे पुश कर रहे थे ...और फिर टब के अंदर व्हिर्ल पूल ...जगह जगह से जेट उनकी बाड़ी पे .....बहुत मजा आया ...
लेकिन बाहर निकलने के बाद ..जैसमिन ने अगले छ घंटे तक कुछ नहीं डिक्लेयर कर दिया ...
और वैसे ही उन्होंने खाना बनाया , खाया और एक दूसरे को कस के पकड के कडल कर के सो गए ...जैस्मिन ने एक हाथ से उसकी पीठ को कस के भींच रखा था ...और दूसरा हाथ ...और कहाँ होगा उसके शेर पे ...
और करन का हाथ ...जैसमीन के भरे उरोजों पे और उसकी चुन्मुनिया पे
देर शाम उनकी नींद खुली और फिर कर्नल अहलुवालिया के फोन के साथ ...और अबकी करन ने फ़ोन उठाया ..और स्पीकर फोन आन कर दिया ,
" टीवी न्यूज लगाओ '
और जेसमीन ने अपने बाएं हाथ से रिमोट से टीवी आन कर दिया . वो लेफ्ट हैण्डर नहीं थी ...लेकिन उसका दायाँ हाथ ...एक जरुरी काम में बिजी था ...करन के शेर को दुलराने,सहलाने और जगाने में ...
न्यूज चालु हो गयी ...एक आदमी को पुलिस वाले पकड कर जीप में बैठा रहे थे ....
" ये तो मिस्टर मेहरा हैं ..." उचक कर वो सीधे करन की गोद में बैठ गयी लें उसके दायें हाथ ने अपना काम नहीं छोड़ा ..शेर अब जग गया था .
जवाब में जेसमीन का जोबन मर्दन करते ...वो धीमे से .बोला ...
"यही तो था असली खिलाड़ी ..."
लेकिन कर्नल अहलुवालिया ने सुन लिया और बोले ..सही कहा तुमने
और ...जैसमीन के पहले जो मेरी सेक्रेटरी थी दुदानिया ...वो टू थी।
( जैसमीन मुस्कराये बिना नहीं रह सकी ...और उसने करन को कान में बताया ...दुदानिया को लोग आफिस में दुधानिया कहते थे ...3 8 डी डी स्तनों के कारण , ग्रेविटी डिफायिंग , क्योंकी कई बार वो बिना ब्रा के भी आती थी ..और जब उसके बाद जैसमीन को उन्होंने रखा ...तो वो भी अपनी उम्र के हिसाब से कुछ ज्यादा ही 'वेल इन्डाउड ' थी ..तो लोगों ने कहना कर दिया की बॉस ' बिग बी ' के फैन हैं )
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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