Sunday, March 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--92

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--92
गतांक से आगे ...........


 रीत - करन .भाग ३

मिसिंग

Karan REET III

आँख खुलने पर पहली चीज जो उसने देखी ..सफेद कपड़ों में , एक नर्स गोरी सी , चारो और सफेद परदे और उसकी देह से निकली ढेर सारी सफेद ट्यूबे ..

श्श्श्श ...नर्स ने अपनी ऊँगली होंठ पर रख कर उसे चुप रहने का इशारा किया ...और झुक कर उसके कान के पास अपने होंठ ला के बोली ..

" प्लीज ये मत बोलना की मैं कौन हूँ , मैं कहाँ हूँ ...तुम जनरल हास्पिटल में हो आई सी यू में हो और अलहाबाद में हो . तुम कौन हो मुझे नही मालुम ..लेकिन सबसे पहले तुम मुझे देखो ..."

वो तो एकटक उसी की ओर देख रहा था।

नर्स ने वी का साइन उंगली से बनाया और पुछा ...कितनी उंगलिया ..
दो ...वो बोला ...
उसने दो उंगलिया और खोली ...फिर वही सवाल ...कितनी उंगलियाँ
चार ...कुछ रुक कर वो बोला .

गुड ...बाय ...वेरी गुड ...इट मीन्स , तुम सुन सकते हो, देख सकते हो , समझ सकते हो और बोल सकते हो ..अब अपनी उंगलियाँ हिलाओ ..गुड गुड ...अब बाएं हाथ की .नाइस ...अभी के लिए इतना काफी है ..बस एक चीज और ..

नर्स उसके ऊपर झुकी ..उसके बाए सीने के ऊपर उसका नेम टैग था ..एक दम पास ...फिर मुस्करा के बोली ...कैन यु रीड माई नेम ..

थोडा ध्यान से उसने देखा ...और बोल ...जैसमिन ..

यस ख़ुशी से वो बोली ....गुड बट यंग मैन यु कैन काल मी जेसी ...और ये बटन है उसे आप पुल करोगे तो मैं आ जाउंगी ...वो किसी बाटल में कुछ इन्जेकशन लगा रही थी ..

अब आप सो जाओ दो घंटे के बाद ...मैं ...और डाक्टर ...

वो फिर सो गया
दो घंटे बाद उसी नर्स ...जेसमीन के साथ दो डाक्टर आये .

उस की नींद अभी खुली थी ...उन लोगो ने उस की देह पे कुछ ठक ठक की ...आँख में टार्च डाल के देखा ...फिर एक ने बोल लेट अस डू इ इ जी एंड वी कैन डू एम् आर आई लेटर ..

जेसमीन ने उसके सर में कुछ मशीन लगाई ...दस मिनट बाद रिपोर्ट निकली और दोनों डाक्टरों ने सहमती में सर हिलाया और बोले एवरी थिंग लुक्स फाइन ..शाम को वी कैन टेक डिसीजन ..

वो लोग चले गए .. जेसमीन रह गयी .

उसने बुलाया ..सिस्टर ...
मुस्कराकर उसने सर हिलाया ..डोंट काल मी सिस्टर ..काल मी जेसमीन या जेसी

वो मुस्कराया और बोला ...जेसी ..फिर उसने मुंह की ओर इशारा किया ...
हंगरी जेसमीन बोली ...और एक प्याले में कुछ सूप ऐसा उसके मुंह में दो चमच डाल दिया

शाम को दोनों डाक्टरों के साथ एक और कोई था ...जो डाकटर नहीं था

यू वांटेड हिम टू बी मूव्ड ना ...अब कोई प्राब्लम नहीं है ...एम् आर आई की रिपोर्ट भी अब ठीक है ..हास्पिटल केयर में पन्दरह बीस दिन तो रखना होगा ...

' वो कोई प्राब्लम नहीं है ..लेकिन इसकी ..." उस नान डाकटर ने बोला .

डाकटर ने तुरन्त उस की बात काटी और बोला .." थोडा इन्तजार करना होगा ...बट वी आर होपफुल ...हाँ डोंट प्रेसराइज ..वरना फिर रिलैप्स हो सकता है .

" नहीं नहीं हमें कोई जल्दी नहीं है ..." वो बोले फिर उस के पास आके पुछा ...यू आर फीलिंग बेटर ऐनी थिंग ...यु वांट ..."

उसने जेसमीन की और ऊँगली से इशारा किया ...और उन सज्जन ने मुस्करा के बोला श्योर
और डाक्टर से पुछा ..
" आप इन से ही पूछ लें ...वैसे भी यू विल रिक्वायर सम सम पैरा मेडिक ड्यूरिंग ट्रांजिट ..." डाकटर ने जवाब दिया।

जेसमीन ने अपने आप हामी भर
दी।
और वो लोग चले गए .
उसने बुलाया जेसी ...और वो मुस्कराते हुए उसके पास बैठ गयी और उसका हाथ पकड़ कर सहलाने लगी .

उसने फिर बोला जेसी ..तो जेसमीन ने आँखों से उसे चुप रहने का इशारा किया और फिर बोलना शुरू किया


तुम्हे १० दिन होगये हास्पिटल में आये ...दो दिनतक पूरी तरह बेहोश थे ...

दो बार ब्रेन का आपरेशन हुआ ..दो जगह ब्रेन में ब्लड जमा था ...उसे निकाला गया ..

दो जगह सुजन थी ..और कंधे पे भी चोट और ब्लड लास भी बहुत था ...तुम्हारा ब्लड ग्रुप भी बहुत रेयर है ...और तुमको लाये भी थे रात में .."

" तो ..." परेशान होकर उसने पुछा " फिर क्या हुआ "

" ब्लड बैंक में तो था नहीं , उस रात मेरी ही ड्यूटी थी ... वो बोली ...फिर मुस्कराते हुए कहा

" हो गया इंतजाम "

" कैसे ..." उसने फिर पुछा।

" क्या करोगे जानकर ...मेरा भी ब्लड ग्रुप वही रेयर वाला है ...इसलिए दे दिया मैंने ."

जैसमिन मुस्कराते हुए बोली

" तुमने ..क्यों ..." उठने की कोशिश करते हुए वो चौंक कर बोला .

" हे ठीक से लेटो ...तुम सेंट परसेंट मेरी जिम्मेदारी हो ...अभी इतनी ताकत नहीं आई तुम्हारे अन्दर ... फिर अपनी बड़ी बड़ी आँखे नचाते मुस्करा के बोली ..

" मेरा खून मैं चाहे जिसको दूँ ...तुम्हे उससे क्या ."

उसने जेसी का हाथ हलके से दबा दिया और उसकी आँखे जेसी को कृतज्ञता से देख रही थी ..

जेसमीन ने जवाब में उसका हाथ हलके से दबा दिया और मुस्करा के बोली ...इसलिए तो तुमको मैंने बोला था सिस्टर नहीं जेसी ..जो मेरी फ्रेंड्स मुझे बुलाती हैं
उसने हलके से बोला ...जेसी ..

और जेसमीन ने भी हलके से बोला ...यस और उसका हाथ दबा दिया ...और फिर उसे और बताया

" तुम्हारे लिए ये स्पेशल प्राइवेट वार्ड है लेकिन आ सी यू की फैसिलिटी वाला ...और अन लाइक अदर वार्ड ...जहाँ ड्यूटी शिफ्ट होती है ...यहाँ सिर्फ मैं रहती हूँ ..चौबीस घंटे ...मेरे जिम्मे सिर्फ तुम हो और तुम्हारे लिए सिर्फ मैं ..."

मुस्कराते हुए उसने जेसमीन को देखा और हलके से सर हिला दिया ...ख़ुशी में।

लेकिन फिर पूछा ...चौबीस घंटे ..तो तुम रहती कहाँ हो ..

जैसमिन बोली ...बस तुम्हारे बगल में और पास में लगे अटेंडेंट के बेड की ओर इशारा किया।

तुम्हे आराम करना चाहिए ...और अब प्लीज कुछ भी सोचो मत दिमाग पे जोर मत लगाओ ...वो बोली और लाईट डिम कर दी ...फिर उसके पास आके झुक के कहा गुड नाईट।

आंखे बंद किये वो बोला गुड नाईट ...जैस्मिन बोली ...होसकता है रात को तुम्हे एक बड़े हास्पिटल में कही शिफ्ट करें ...

आँखे खोल के उसने पूछा और तुम ..

अपनी उँगलियों से उसकी पलकें बंद कराती वो बोली .." गुड मार्निंग भी मैं ही करुँगी।
....

गुड मार्निंग ...जैस्मिन ने ही किया। जबर्दस्त मुस्कान के साथ ..और खिड़की के परदे खोल दिये .

बाहर लान दिख रहा था , हलकी सी फागुनी गुनगुनी धुप ..
.
कमरा बदला हुआ था ...एक डीलक्स वार्ड की तरह ..काफी बड़ा ...एक कोने में फ्रेश फ्लावर्स ...उसकी ज्यादतर ट्यूब्स निकाल दी गयी थीं सिर्फ एक आई वी लगी थी ..

उसने भी मुस्कराकर गुड मार्निंग का जवाब दिया ...

जैस्मिन उसके बगल में आके खड़ी हो गयी और उसके सारे अनकहे सवालों का जवाब दे दिया .
रात में जब तुम सो रहे थे ...प्लेन से हम शिफ्ट कर के ले आये, दिल्ली, ये बड़ा हास्पिटल है

और किसका हास्पिटल है उसका जवाब अगले पल मिल गया ...जब नाश्ते की ट्रे ले के जो आई वो आर्म्ड फोर्सेज की यूनिफार्म में थी .

" मैं सर्व कर दूंगी ..." जैस्मिन बोली और उससे कहा ...आज से तुम खा सकते हो लिक्विड एंड सेमी लिक्विड ...पाइप से खाना बंद . उसने अपने हाथो की और इशारा किया एक में पट्टी बंधी थी और एक में ड्रिप लगी थी ..

तुम्हे हाथों की क्या कमी है ...बस तुम मुंह खोलो ..वो मुस्करा के बोली और फिर फ्रूट जूस , कार्न फ्लेक्स , फ्रूट पीसेज ..

लेकिन फिर

कुछ देर बाद उसने उठने की कोशिश की लेकिन फिर जैसमिन ने टोक दिया ..." अभी आ खाया ...अभी ताकत आ गयी ...किधर जाने का इरादा है "

उसने बाथ रुम की ओर जाने का इशारा किया ..

" अरे तो मैं किस मर्ज की दवा हु .." वो मुस्करा के बोली ...और बाथरूम से पाट ले के उसका चद्दर उठाया ..
वो बोला ..." कोई मेल नर्स ..."

जैस्मिन ने उसे डपट दिया और बोली ,

" मुंह बंद रखो ...और ज्यादा शरम आ रही हो ...तो आँखे भी बंद कर लो . अब तुम पूरी तरह मेरे हवाले हो।


बाथ रूम से लौट के वो बोली ..आगे शरम लगे तो बच्चो की तरह उंगली से इशारा कर देना। वो उसको और छेड़ती ...

लेकिन तबतक डाक्टरों के आने का तांता लग गया ...एक के बाद एक ...न्यूरो लाजिस्ट, न्यूरो सर्जन , यूरो लाजिस्ट , फिजिशयन ...और बाहर के के किसी हास्पिटल के एक्सपर्ट भी बुलाये गए,

जैसमिन ने उन्हें पुरानी सारी रिपोर्ट दिखायीं ...उस दिन दुबारा सी टी स्कैन हुआ ..और अगले दिन फिर एक छोटा सा आपरेशन ...

उसके चौथे दिन से उसने बेबी स्टेप्स लेना शुरू किया ..जैसमिन का हाथ पकड़ के ..

और शाम को बाथ रूम के लिए फिर खिच खीच शुरू हुयी वो उसे हाथ पकड़ के बात रूम ले गयी ...उसने बहोत जिद्द की तो जेसमीन बोली चलो मैं आँख बंद कर लेती हूँ ...

और अच्छा हुआ जो वो हाथ पकडे रही ...क्योंकि उसे उसी समय तेज चक्कर आया ....और जैसमिन ने सम्हाल लिया ..

बिस्तर पर लिटाते हुए वो बोली ..

.हे तुम्हारी जो गर्ल फ्रेंड होगी लकी होगी ...उसकी शरारती आँखे उसे चिढ़ा रही थी ...

मैंने बोला था ना आँख बंद करने के लिए वो मुंह फुला कर बोला ..

मैं क्या करूँ कित्ता भी आँखे बंद करूँ मुझे दिखता है थोडा थोडा ...बड़ा भोला चेहरा बना के जैसमिन बोली,

तब तक वो सज्जन आ गए ...जो उसके कमरे में डाक्टर के साथ मिले थे ...

और आज उन्होंने अपने को इंट्रोड्यूस किया ...करनल अहलुवालिया ...उन्होंने बताया की वो मिलेट्री में थे लेकिन अभी गर्वनमेंट के एक दूसरे डिपार्टमेंट में काम करते हैं ...और उन्होंने उसे ट्रेन में बेहोश पाया था ..इसलिए उसे उतार कर वो अलहाबाद के यहाँ हास्पिटल में ले गए ...

और बेहतर इलाज के लिए यहाँ ले आये ..उन्होंने डाक्टरों से बात कर ली है उसकी फिजिकल कंडिशन अब काफी ठीक है लेकिन अभी भी दस बारह दिन उसे यहाँ रहना पड़ सकता है ...कुछ एक्सरसाइज होगी और कुछ साइकोलोजिकल इवैल्यूएशन के साथ एक साइकोथिरेपिस्ट उसे मेमोरी के मामले में हेल्प करेगी ...

ये एक रित्रोग्रेड अम्नेसिया है ...और कुछ दिनों में ठीक हो जायेगी ...उसके कुछ न्यूरान इंजरी में डैमेज हो गए थे ...वो अब हील हो रहे हैं ...

बस वो सिर्फ ये कोशिश करे की ज्यादा दिमाग पर जोर ना दे और परेशान ना हो ..


 तब तक किसी ने आके बताया की बाहर के कमरे में साइकोलाजिस्ट वेट कर रही हैं ..
कर्नल अहलुवालिया ने बोला की वो कल शाम को फिर आयेंगे।

जैसमिन उसे सहारा देकर बाहर के कमरे में ले गयी।

साइकोलाजिस्ट ने पहले उसे कई क्वेश्चनेयर दिए ...जो उसने भरे फिर साइकोलाजिस्ट बोली आपसे कुछ पर्सनल सवाल पूछने हैं ...और जैसमिन की ओर देखा।

जैसमिन उठने लगी ...तो उसने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया और साइकोलाजिस्ट से बोला ,

" डाक्टर ...क्या ये रुक सकती हैं .."
" अगर आप को कोई परेशानी नहीं तो मुझे कोई आब्जेक्शन क्यों होगा ...लेकिन सवाल थोड़े पर्सनल होंगे " वो बोली .

" इट इज आल राईट " वो बोला ."

" अगर आप को कोई ऐतराज नहीं तो मुझे क्यों होगा "साइकोलाजिस्ट बोली।
फिर उसने पुछा ...अच्छा हादसे के बाद आपको सबसे पहली क्या चीज याद है ...

उसने जैसमिन की ओर उंगली से इशारा किया और बोला ये ..
" मतलब " साइकोलाजिस्ट ने पुछा ..

" जब मेरी हास्पिटल में आँख खुली ...तो ये मेरे सामने थी ." वो बोला।
" वेरी गुड ...और उसके बाद " फिर साइकोलाजिस्ट ने पुछा।
" फिर मुझे यहाँ शिफ्ट किया गया ...और फिर मैंने इन्हें देखा ..और मेरा ट्रीटमेंट हुआ ...अब मैं चल फिर सकता हं इनका सहारा लेकर ..." उसने जैसमीन की ओर इशारा किया .बता दी

" आप तारीख बता सकते हैं जब से आप चल फिर रहे हैं ..." साइकोलाजिस्ट ने फिर पुछा।
" हाँ और उसने सही सही तारीख बता दी .
" अच्छा इसके पहले आपका किस शहर में इलाज चल रहा था ?
" अलाहाबाद ."

" वहां के कमरे की दीवालें किस रंग की थी "
" लाईट ग्रीन ."
" और वहां आप से पहली बात क्या ...हुयी "

इन्होने जैसमिन की ओर इशारा कर के वो बोला ...मुझे उंगली दिखाई और मेरी मैथ्स टेस्ट की .

जैस्मिन ने कुछ बोलने की कोशिश की तो साइकोलाजिस्ट ने इशारे से मना कर दिया।।।

" पहले दो उंगली ...फिर चार " उसने बोला .
वेरी गुड ...साइकोलाजिस्ट संतुष्ट थी .

.इसका मतलब तुम्हारी पोस्ट ट्रामा मेमोरी एकदम ठीक है असली परेशानी उसी की होती है ...तुम्हे आगे किसी में कोई परेशानी नहीं होगी और प्री ट्रामा मेमोरी अपने आप आएगी लेकिन मैं उसको थोडा फैसिलिटेट कर दूंगी

फिर उसने पुछा ...उस समय की कोई बात ...आवाज , रंग ..बिना दिमाग पे ज्यादा जोर डाले।

वो सोचता रहा ...फिर बोला ...हाँ ...एक बहोत तेज आवाज ...विस्फोट ...तेज विस्फोट ..
साइकोलाजिस्ट कुछ नोट कर रही थी ...फिर बोली ..रंग कोई रंग ..

वो कुछ देर सोच कर बोला ...याद नहीं आ रहा है ...
साइकोलाजिस्ट बोली ...किसी चीज से मिलता जुलता रंग ...

कुछ सोच के वो बोला ...हाँ ट्रेन के डिब्बे का रंग ...यस याद आ गया मुझे ...ट्रेन ..एक ट्रेन खड़ी थी ...एक प्लेटफार्म .

अब उस आवाज के बारे में सोच के बोलो ...साइकोलाजिस्ट ने पुछा .

कुछ उसने सोचा ...फिर बोला .दर्द हो रहा है ...सर में ...उसके चेहरे पर तेज दर्द छलक रहा था ...उसने अपना सर जैसमिन के कंधे पे रख दिया ...जैसमिन उसके सर को हलके हलके सहला रही थी ..

फिर सर बिना सीधे किये वो बोला ...बहोत भयानक ...मैं प्लेटफार्म में चारों ओर देख रहा हूँ ..डेड बाडीज ..ढेर सारी ..
फिर बहोत देर तक वो साइकोलाजिस्ट कुछ कुछ बोल के उकसाती रही ...

दो घंटे तक सेशन चला ..बहोत चीजें उसे याद आयीं ...स्टेशन वो दो लोगो के साथ आया था ..ट्रेनिंग ..यूनिफार्म में वो परेड कर रहा है ..

साइकोलाजिस्ट ने सब कुछ नोट कर लिया और बोली ..ये बहुत अच्छा सेशन था ..और मैं कल फिर इसी समय आउंगी

वो पसीने में डूब गया था .

जैसमिन ने उसके लिए फ्रूट जूस निकाला और उस के पीठ को सहलाती हुयी पहले पिलाया ...फिर उसे लिटा के उसका हाथ सहलाती रही . थोड़ी देर में वो सो गया

शाम को खाते समय जैसमिन ने उससे पूछा ...हे तुम्हे वो सवाल जवाब वाली कैसी लगती है।
हंस के उसने बोला ...छिपकली।

और दोनों बहुत जोर से हँसे और हाई फाइव किया।
फिर आरेंज जूस पिलाते हुए जैसमिन ने उससे पूछा ..हे तुम्हे छिपकिली टाइप जीरो फिगर वाली अच्छी लगती हैं या ..भरी पूरी ..

मुस्कराते हुए उसे छू कर वो बोला ...बिलकुल ऐसी ..

आज जैसमिन ने जो नर्स की यूनिफार्म पहन रखी थी ...वो दो नंबर छोटी थी , इसलिए ऊपर से तो बहुत टाईट थी ही ...( और जैसमिन के उभार , कटाव कुछ ज्यादा ही तीखे थे ..),

उसकी पतली कमर, हावर ग्लास की तरह फिगर साफ दिख रही थी ...और छोटी होने से स्कर्ट भी छोटी थी।

नेपकिन से उसका मुंह पोछते वो मुस्कराकर बोली ..हे कहीं तुम्हारे इरादे गड़बड़ तो नहीं है
हंस के वो बोला ...'क्या पता ...हो सकता है मेरी कोई फैंटेसी हो ..."

अपने बिस्तर पे लेटते हुए जैसमिन बोली ...अच्छा जी ये मुर्गा अब बोलने लगा ...पहले अपनी तबियत ठीक करो ...नींद पूरी नहीं हुयी तो कल वो छिपकली मुझे डांटेगी ..

अगले दिन वो साइकोलाजिस्ट टाइम पे आ गयी ...

और आज वो सेशन तीन घन्टे चला। वो कई बार पसीने पसीने हुआ लेकिन वो छिपकली पुश करती रही ...बार बार अपना सर वो जैसमिन के कंधे पे रख देता ...जैस्मिन उसका सर सहलाती कभी पानी पिलाती ..

और जब वो चली गयी तो जैसमिन ने हंसते हुए कहा की आज छिपकली ने मुझे अन्दर जाने के लिए नहीं बोला की कुछ 'परसनल बातें ' करनी है ...

वो बड़ी जोर से मुस्कराया ...

जैसमिन फिर आँखे नचा के मुस्करा के बोली

" उस छिपकली को नहीं मालूम की जो तुम्हारी सबसे 'पर्सनल ' चीज है वो मैं दिन में चार बार देखती हूँ .."

पांच दिन के सेशन में उसे काफी पुरानी बातें याद आ गयी। सिवाय नाम , किस शहर का है वो क्या करता है ..और घर कहाँ है।

साइकोलाजिस्ट ने उसे बोला की अब कल लास्ट सेशन होगा ...फिर वो हास्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा .

लेकिन एक नयी परेशानी थी जाएँ तो जाएँ कहाँ ...और फिर नौकरी उसके पास कोई डाकुमेंट्स नहीं थे खाए पीएगा क्या

लेकिन उसका हल शाम को निकल आया ...

कर्नल अहलुवालिया आये ...और उन्होंने बोला की उन्होंने उसके लिए एक नौकरी का इंतजाम कर दिया है और जब तक उसके घर का पता नहीं चलता ...वो उसके साथ रह सकता है

और उन्होंने जैसमिन को सब समझा दिया . उन्होंने ये भी बोला की कार आएगी उन्हें पिक अप करने ...और डिस्चार्ज के पेपर उसके आज ही बन जायेंगे। साइकोलाज्सिट से वो फोन पे बात कर लेंगे ...
.....
अगले दिन वो कर्नल अहलुवालिया के घर पहुँच गए।

वो लोग कर्नल अहलुवालिया के ड्राइंग रूम में वेट कर रहे थे ...की वो आये और उन्होंने जैसमिन से कहा की वो शाम को आये।

उसने सवालिया निगाहों से जैसमिन की ओर देखा और ..मुस्करा के जैसमिन बोली ...पास में ही एक वर्किंग विमेन हास्टेल है ...मैं वही रहूंगी ...और बस मिलते हैं शाम को ..

थोड़ी देर की बातचीत के बाद ...कर्नल अहलुवालिया ने पत्ते खोले।

उन्होंने बोला की वो रा में काम करते हैं ...एडिशनल डायरेक्टर , आपरेशन।

उन्ही के साथ उसे काम करना था और सीधे उन्ही को रिपोर्ट करना था ...उन्होंने उससे पुछा ..की तुम एग्री करो तो हम लोग आगे बात करें

उसने सोचा की उसके पास आप्शन ही क्या है ...और वो इनके प्रति कितना ओब्लाइज्ड है ..
उसने सर हिला कर सहमती दे दी .

कर्नल अहलुवालिया ने पहले तो उसे अपने बारे में बताया ..की वो रा में तीसरे नम्बर पर है ...वो एडिशनल डायरेक्टर जनरल को रिपोर्ट करते है जो डायरेक्टर जनरल को ... .फिर उन्होंने अपनी परेशानी बतायी

वो बोले की वो एक्सटर्नल इंटेलिजेंस में काम करते है ...


 और बाहर उनके कुछ आपरेटर होते हैं ...जिनके जरिये उन्हें हिन्दुस्तान में होने वाले टेरर अटैक की इन्फो मिलती थी ...और प्रिवेंशन आसान था

लेकिन पिछले आठ -दस महीनो से उन लोगो को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ...पडोसी देश में उनके तीन बहूत ही वैलुएबल एजेंट ..आठ महीने पहले पकड़ लिए ...

किसी तरह चौथे को वो नेपाल के रास्ते से निकाल कर भारत ला रहे थे ..तो नेपाल बार्डर पर ही उसका मर्डर हो गया .

और इसी दौरान हमारे यहाँ अटैक तेज हो गए।

बड़ी मुश्किल से उन्होंने चार एजेंट और ट्रेंड कर के भेजे ...पांच महीने पहले ...लेकिन एक महीने पहले उसमें से दो कैप्चर हो गए हैं ...और दो डीप अंडर ग्राउंड चले गए हैं ...

और उन्हें अब फिर इनफार्मेशन मिलनी बंद हो गयी है

फिर उन्होंने उसका जाब डिस्क्रिप्शन बताया ...वो बोले की मैं तुम्हे अंडर कवर एजेंट बना के नहीं भेज रहा हूँ ...तुम्हे एक बहुत स्पेशल मिशन पर जाना है ...

तुम्हारा कोई डिस्क्रिप्शन किसी डिपार्टमेंट में नहीं होगा रा में भी नहीं ...तुम्हारा सारा पेमेंट एक स्पेशल सीक्रेट फंड से होगा जो मैं कंट्रोल करता हूँ ...और तुम मेरे साथ रहोगे ..घर में सबको मालूम है की तुम मेरे नेफ्यू हो।


फिर उन्होंने सांस ली और अपना शक बताया की उन्हें लगता है की उनके डिपार्टमेंट में ही कोई मोल है और वो टाप मैनेजमेंट या टाप मिडल मैनेजमेंट में है ..और अंडर कवर के नाम यही से लीक हो रहे हैं ..

खाने के समय भी उनकी बातचीत चालू रही ...कर्नल ने बताया की उन्होंने उसे क्यों चुना।

वो बोले की वो बहोत दिनों से सोच रहे थे इस हालत में उन्हें ऐसा आदमी चाहिए जिसकी नयी आइडेंटीटी बनानी आसान हो। और जब साइकोलाजिस्ट ने बताया की तुम्हारी याददास्त आने में तीन से चार महीने लगेंगे तो मुझे लगा की अगर तुम एग्री करो तो मेरी हेल्प हो जायेगी।

क्योंकि उस मोल का पता लगने में दो महीने से जयादा समय नहीं लगेगा।

लेकिन मेरी ट्रेनिंग ...मुझे तो कुछ आता नहीं है ...वो कुछ सोच कर बोला।

वो तुम मेरे ऊपर छोड़ दो ...तुम्हे एक फोल्डर मैं दूंगा उस में जिसकी आइडेंटीटी तुम्हे अज्युम करनी है उसके सारे डिटेल हैं शाम तक तुम अब्जार्ब कर लो ...रात में हम लोग डिस्कस करेंगे ..

खाने के बाद काफी पीते हुए उसने वो सवाल किया जो उसे बहुत देर से साल रहा था मैं आपको कहाँ मिला ..

बिना रुके उन्होंने बताया ...शिवगंगा एक्सप्रेस में ...बनारस से गाडी चलने के बाद एक डिब्बे में उन्होंने उसे बेहोश देखा। पहले तो उन्होंने सोचा की दिल्ली पहुँच के उसे वो एडमिट कराएँगे ...

लेकिन उसकी पल्स सिंक हो रही थी ...इसलिए वो उसे लेके अलहाबाद में उतर गए और हास्पिटल में एडमिट करा दिया ...

डाक्टर ने बताया की उसके सर में काफी सीरियस इंजरी है ...जैस्मिन ने उसे ब्लड दिया ...उन्हें दिल्ली वापस जाना जरुरी था तो जेसमीन बोली की वो तुम्हारा पूरा ख्याल रखेगी . और उसके बाद दिल्ली .

तब तक उनके फोन पे कोई मेसेज आया और वो बोले की मुझे साउथ ब्लाक में एक मीटिंग के लिए जाना है मैं चलता हूँ ..

उनके जाने के बाद जो सर्वेंट था ...उसने उसका कमरा दिखाया ...तब तक ड्राइंग रूम में लगी एक फोटो पर उसका ध्यान गया।

कर्नल अहलुवालिया के साथ ..एक बड़ी खूबसूरत सी महिला और एक लड़का आलमोस्ट उसी की उम्र का ...

साथ में जो सर्वेंट था उसी ने बोला ...अगर आज भैया होते तो आप ही की उम्र के होते ...

उस की समझ में कुछ नहीं आया ...तो वही बोला ..साहेब, मेम साहेब और भैया शापिंग के लिए खान मार्केट में गए थे ..साहेबे गाडी चला रहे थे ...शापिंग के बाद जब सब लोग गाडी में आके बैठ गए ..तो साहेब अपना मोबाइल दूकान में भूल गए थे ...

और जैसे उतर के वो दूकान में घुस्बे किये थे की ..धडाम ...मेम साहब , भैया और एक दूय जाने और ...साफ ...तब से साहेब अकलेवें रहते हैं ...और एकदमें चुप्प ...अब आप आय गए हैं ..तौ उनअहू का कुछ मन लगा रहे ..

वो अन्दर तक हिल गया ..इतनी बड़ी ट्रेजेडी और कर्नल अहलुवालिया ने जिक्र तक नहीं किया

शाम को जैसमिन आई ...लेकिन उसके थोड़ी ही देर पहले कर्नल अहलुवालिया ...

आज कर्नल बढ़िया मूड में थे ...उन्होने जेसमीन को बोला ...आज इसे सैलरी का एडवांस मिलेगा ...लूट लेना इसको ...और तुम दोनों खाना बाहर खा लेना ...मुझे एक पार्टी में जाना है .

उसके कुछ भी समझ में नहीं आया। कौन सी सैलरी ...अभी चवन्नी तक के तो दर्शन नहीं हुए ...

लेकिन कर्नल अहलुवालिया ने जेब से तीस हजार निकाले और जैसमिन के हवाले कर दिया ..और बोला तुम्हारी सैलरी का फर्स्ट पार्ट ...और जैस्मिन इसे कुछ शापिंग करा देना .

तब उसे याद आया मेरे पास कपडे तो थे नहीं ..सुबह कहीं से जैस्मिन पेंट और शर्ट लायी थी वरना हास्पिटल के कपड़ों में आना पड़ता।

उसके ना ना करने पे भी उसने मेरे लिए जींस , ट्राउजर्स , शर्ट शूज सब कुछ खरीदवाया ...और दोनों ने सी पी में आइसक्रीम खायी ...और वहीँ डिनर भी ...

घर आने के पहले उसने जैस्मिन को वर्किंग वीघर मेन हास्पिटल में छोड़ा ...एकदम पास में था ...और जब वो घर वापस आया तो कर्नल अहलुवालिया जस्ट घर पहुंचे थे

उनके हाथ में वही फोल्डर था जो सुबह वो दे गए थे .
उन्होंने उससे उसी फोल्डर से ढेर सारे सवाल किये ...और उसने सबका सही जवाब दिया।

मुस्कराकर कर्नल अहलुवालिया बोले ..ओ के तो बस अभी से तुम्हारा नाम है करन , करन कपूर। तुम लुधियाना के पास के एक गाँव में पैदा हुए थे ...तुम्हारी पढाई चंडीगढ़ में हुयी है और तुम अभी दिल्ली में हायर एजुकेशन के लिए आये हो।

जी वो बोला।

उन्होंने एक फोल्डर और निकाला। और उसमें चंडीगढ़ के स्कूल , उस गाँव और उसके अलावा भी तमाम फोटुयें थी।

वो फिर बोले , तुम ये सब भी अच्छी तरह देख लो ...और सबसे बड़ी बात ...अब आगे से तुम्हे करन के नाम से ही बुलाया जाएगा।कल सुबह दस बजे से तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू है ...

वो मतलब करन बोला ...और असली करन है की नहीं .

सही सवाल किया तुमने ...वो है ...हमारी कस्टडी में ...वो दस दिन पहले एक रेव पार्टी में पकड़ा गया था ...और उसने अपना कोई गलत नाम बताया था ..लेकिन हमने ट्रेस किया तो उसका असली नाम करन था ..अब वो रा के एक सेफ हाउस में कस्टडी में है

हमने उसका भी एक वीडियो बनाया है ...तुम उसे देख लेना ...उसके मैनरिज्म के लिए ..जब ये आपरेशन ख़तम होगा तो हम उसे रिलीज कर देंगे ...

और तुम करन की तरह एक्ट करना नहीं बल्कि सोचना रहना शुरू कर दो ..सपने में भी कोई तुम्हे करन कह के बुलाये तो तुम जवाब दो ...कर्नल अहलुवालिया बोले।

फिर उठ कर के वो गए और उन्होंने अपने लिए एक ड्रिंक बनाया और फिर उससे पुछा और खुद ही बोले ...ऊप्स करन ड्रिंक करता है तो तुम्हे भी करना होगा ...भले ही खाली सिप करो ...या लाईट ड्रिंक करो

चियर्स करने के बाद करन बोला ...और आप पर जो अटैक हुआ था ...
एक सूखी हंसी हंस के कर्नल बोले ...तुम्हे मालूम पड़ गया है ..चलो ...और एक कागज पर उन्होंने एक पासवर्ड लिखकर दिया ...और डेस्कटाप की ओर इशारा किया

उन्होंने फिर एक और पासवर्ड और लिख कर बढाया ...और बोला ..ये उन लोगो की ...जो हमारे स्लीपर पकडे गए थे उनकी फाइल है ...
करन ने कर्नल के पहले ड्रिंक ख़तम किया .

कर्नल अहलुवालिया सोने चले गए और 'करन' देर रात तक कंप्यूटर पे काम करता रहा ..सारी फाइलें उसने दो तीन बार पढ़ीं


 सुबह नाश्ते पे उसने कर्नल साहेब से जो चीजें नहीं समझ में आई थीं ...वो पूछीं .

और कर्नल अहलुवालिया ने विस्तार से जवाब दिया और उसे एक फोन दिया ..स्मार्ट फोन ...और बोले ..

ये करन का ही फोन है ...लेकिन एक सिम हमने चेंज कर दी है जो तुम्हारी है ...और वो सिक्योर है ...उस से की गयी बात को ट्रेस करना मुश्किल है मेरे जाने के बाद ...एक इंस्ट्रक्टर घर पे आयेंगे ...और उसके बाद के लिए जहाँ जाना होगा मैं ड्राइवर को समझा दूंगा ..

शाम को जैसमिन आएगी ..उसका फोन आया था ...मैंने उसे तुम्हारा नाम बता दिया है ...

कर्नल अहलुवालिया के जाने के बाद ..करन फिर कंप्यूटर पे काम करता रहा ...तभी उस सर्वेंट ने करन को बोला की कोई उससे मिलने आया है

करन ने उस सर्वेंट से पुछा ..तुम्हारा नाम क्या है ...

सेवक ..वो बोला .
तो सेवक जी आप आधे घंटे में वहां चाय लेके आइयेगा
जी ठीक है .

करन अपने पहले ट्रेनिंग सेशन की ओर बढ़ा ..वो एक लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर थे ...जो उसे पंजाबी सिखाने आये थे

लेकिन मजेदार बात ये निकली की उसे काफी कुछ पंजाबी आती थी ...तो वो नेक्स्ट स्टेज पर गए ...लुधियाना के आस पास के गाँव का एक्सेंट ...ये सीखने में उसे थोडा वक्त लगा ..तब तक चाय आ गयी। उ

न्होंने उसे कुछ सीडी दी जिसमें पंजाबी गाने थे और गाँव के लोगों की बातचीत ...यहाँ तक की गालियाँ भीं ..डेढ़ घंटे का सेशन आधे घंटे में ख़तम हो गया ..

उस के बाद 'करन ' ने टीवी में पंजाबी चैनेल आन किया ...कुछ देर में हो वो प्रोग्राम अच्छी तरह फालो कर रहा था ...

डेढ़ घंटे बाद ड्राइवर उसे नेक्स्ट ट्रेनिंग राउंड पे ले गया ...वो एक फायरिंग रेंज थी ...वहां उसे स्माल आर्म्स की ट्रेनिंग दी गयी ...

फिर जिम ...

फिर कमुनिकेशन ..

और अंत में अन आर्म्ड काम्बैट ...सात बजे तक वो घर लौटा।

लेकिन हर जगह उसे ये लगता की उसने ये सब सीख रखा है ...

और शाम को जब वो लौटा तो कर्नल अहलुवालिया और जैसमिन प्याज के पकोड़े खा रहे थे . उसे देख जैसमिन चहकी
" हाय करन "

वो भी पकौड़ी खाने में जुट गया ...और फिर कर्नल अहलुवालिया ने जैसमिन से बोला

" आज तुम इसको अनलिमिटेड लूट सकती हो ..." और एक क्रेडिट कार्ड निकाल कर दे दिया जो करन कपूर के नाम से था ...फिर बोला की तुम आज इसे करोलबाग में शापिंग के लिए ले जाना ...और करन से कहा की तुम शाप वालों से पंजाबी अंग्रेजी और हिंदी मिला के बात करना।"

करोलबाग में आज करन ने जिद कर के जैसमिन के लिए शलवार सूट भी अजमल खान रोड पे खरीद्वाये ..और जैस्मिन ने उसके लिए शापिंग की .

वो उसे एक हिप्नोटिस्ट के पास भी ले गयी ...जिसने करन की मेमोरी रिवाइव करने की कोशिश की ...लेकिन बात बहुत नहीं बनी।

उसने बोला की तीन महीने के बाद वो फिर कोशिश करेगा ..और उसे उमीद है की तब पूरी मेमोरी आ जायेगी .

अगले पांच दिनों तक उसकी जबर्दस्त ट्रेनिंग हुयी ...बस शाम को जैसमिन आ

जाती और वो बाहर जाते . पांचवें दिन शाम को खाना उन्होंने घर पे खाया ...कर्नल अहलुवालिया के साथ।

वो बोले की कल ग्यारह बजे तुम मेरे आफिस आना तुम्हे अपनी नयी सेक्रेटरी से मिलवाता हूँ ...जैसमिन मीठी मीठी मुस्करा रही थी ...वो करन से फिर बोले


और कल से तुम्हारी ट्रेनिंग ख़तम ..परसों तुम्हे जाना होगा .

करन इत्ते दिनों में 'नीड टू नो ' का मतलब समझ गया था .

और अगले दिन जब वो कर्नल अहलुवालिया के आफिस में पहुंचा तो बस बेहोश नहीं हुआ ..

सेक्रेटरी की कुर्सी पर जैसमिन विराजमान थी ...और वो भी एक हाट ड्रेस में ..कोट,शर्ट और स्कर्ट ..उसको देख के जैसमिन ने अपना कोट उठा के पेग पे टांग दिया और खड़ी होकर मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया ...

करन बस पत्थर का नहीं हुआ ...उसके वो उभार जो नर्स की टाईट ड्रेस में छलकते , ललचाते रहते थे थे आज शर्ट की खुली बटन से झलक रहे थे ...व्हाईट सिल्केन शर्ट ...से

जो दिख नहीं रहा था वो झलक रहा था ..
करन ने हाथ मिलाया ...हाथ पकडे पकडे जेसमीन ने उसे छेड़ा ..देख चुके ..

और जब दोनों बैठ गए ..तो जैसमिन ने अपनी लिपस्टिक को फ्रेशेन किया ...और मुस्करा कर बोली ..
" कैसा लगा मेरा नया जाब .."

" बहोत अच्छा ..." करन मुस्करा के बोला।

" कान्ग्रैट्स नहीं करोगे ..." जैसमिन ने फिर छेड़ा।

और करन ने फिर हाथ मिलाया और बोला ट्रीट ...
" एकदम शाम को मिलते है ना की सी पी में ...फिर वहां से जहाँ कहो वहां ...मेरा एक दोस्त है बहोत सीधा सा ...बस वो स्पान्सर कर देगा

जैसमिन ने उल्टा पत्ता फेंका।

करन ने जब कर्नल अहलुवालिया के केबिन में जाने की इजाजत मांगी तो उसने रेड लाईट की ओर इशारा किया।

थोड़ी देर में जब लाईट ग्रीन हुयी तो जैसमिन ने इंटरकाम पे बोला .. सर आपके नेफ्यू आपसे मिलना चाहते हैं
उनकी आवाज आई भेज दो ...


 थोड़ी देर में जब लाईट ग्रीन हुयी तो जैसमिन ने इंटरकाम पे बोला .. सर आपके नेफ्यू आपसे मिलना चाहते हैं

उनकी आवाज आई भेज दो ...

उनके कमरे में कोई बैठा था ...कर्नल अहलुवालिया ने उससे करन को बिना नाम बताये अपना नेफ्यू कह के इंट्रोड्यूस कराया ...

और जब वो चलने लगे ..तो करन ने नोटिस किया की उनका लाइटर गिर गया है ..वो दरवाजे तक पहुंच गए थे ..की करन लाइटर उठा के उनके पास पहुच गया ...और उनको देते बोला ..
अंकल आपका लाइटर ..

उन्होंने लाइटर ले लिया और बिना बोले बाहर चले गए

कर्नल ने उसकी ओर तारीफ से देखा और बोले
"तुमने मेरी नयी सेक्रेटरी देखी कैसी लगी ...मेरी सेक्रटरी बहुत दिनों से छुट्टी छुट्टी कर रही थी ...और इसको भी दिल्ली भा गया था ...तो मैंने तीन महीने के लिए इसे टेम्प के तौर पे रख लिया ..."

तब तक जैसमिन कमरे में आ गई ...सेक्रेटरी की तरह नोट पेड और पेन ले के

करन को देख के मुस्कराई ...और उसके बगल में बैठ गयी ..
जैस्मिन का परफ्यूम भी आज जबर्दस्त था ...

कर्नल ने पहले तो टी वी फुल वाल्यूम पर आन किया ...फिर दोनों से बोले ...

"शाम को सी पी में ये तुम्हारे पेपर दे देगी ...तुम्हारी फ्लाईट कल सुबह चार बजे की है ...इजरायल के लिए"

शाम को वो उससे कनाट प्लेस में मिली ...उसी शलवार सूट में जो करन ने उसके लिए ख़रीदा था। जबर्दस्त लग रही थी ...

मेरी ट्रीट ...करन ने छेड़ा ...

एकदम ...ऐनी टाइम ...मेरा फ्रेंड है ना पे करने के लिए ...वो अदा से बोली।

ऐनी टाइम ऐसी शोख फ्रेंड के लिए ...लेकिन सिर्फ ट्रीट मिलेगी या ..अब उसकी छेडने की बारी थी .
जो चाहो ...मुस्करा के वो बोली

लेकिन कल सुबह जाना है ...करन ने मुंह लटका लिया ...
तो क्या हुआ ...जब लौट के आओगे ...वो मुस्करा के आँखे नचा के बोली ...

पक्का मिलेगी ना ...अब खुश हो के करन बोला ..

"एकदम ...जिस दिन आओगे उसी दिन ...और मैं रोज दुआ करुँगी की जल्दी आओ ...और अबकी तुम पीछे हट गए तो भी मैं छोड़ने वाली नहीं .."

हंस के जैसमिन बोली .उस के गोरे गुलाबी गालों में गड्ढे पड गए ..

जैसमिन ने एक पैकेते दिया ..जिसमें उसका पासपोर्ट, फारेन एक्सचेंज आई दी , इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड्स आदि थे.

अगले दिन तीन बजे सुबह ही वो आ गयी ...करन को एयर पोर्ट ड्राप करने

करन जैसमिन के बारे में ही सोचता रहा फ्लाईट में ...

कर्नल अहलुवालिया ने उसे जाब क्यों दिया ....अचानक उसे समझ में आ गया

अलहाबाद में जब वो बेहोश था ...तो उसे जेसमीन ने ही एडमिट किया ...यानी उसके और कर्नल के बारे में सिर्फ उसे ही पता था ..

.इसलिए उन्होंने उसे चौबीस घंटे की नर्स बना दिया ..जिससे और कोई नर्स उसके कान्टेक्ट में ना आये

..इसीलिए उसको वो दिल्ली ले आये ...और वहां भी चौबीस घंटे उसके साथ रही ...फिर कर्नल के साथ जो हादसा हुआ था वो किसी पे ट्रस्ट नहीं कर सकते थे ..इसलिए अपनी सेक्रेटरी की जगह उन्होंने जेसमीन को लगाया ...

और उसको भी यही इंस्ट्रक्शन था की सोशल नेट्वर्किंग साइट्स के जरिये जैस्मिन से कान्टेक्ट करे ..

एक बात और जिस तरह जेसमीन ने उसके लिए ब्लड दिया , उसकी सहायता की ...

कर्नल अहलुवालिया को उसकी सिंसियरिटी पे यकीन हो गया होगा .

फिर उसे नीद आ गयी . जब उसकी नीद खुली तो बेन गुरियन एयरपोर्ट आने वाला था ...वहां मोसाद की एक एजेंट आनेवाली थी .

फिर मोसाद के साथ उसकी पंद्रह दिन की ट्रेनिंग और फिर आपरेशन की शुरुआत


 कर्नल अहलुवालिया भी यही सोच रहे थे।
उन्हें उसका असली नाम , बैकग्राउंड और भी बहुत सी बातें पता चल गयी थीं।

जिस दिन वो उन्हें शिव गंगा एक्सप्रेस में मिला था ...उसका मोबाइल भी मिल गया था ...

हालांकि ...वो बहुत बुरी तरह डैमेज था . उसे रिट्राइव कर के ...उसका नंबर उन्होंने पता कर लिया था
फिर नो योर कस्टमर वाले फार्म से उसका नाम और कुछ डिटेल्स मिले ...


फिर उन्होंने अलग अलग टावर से उसकी लोकेशन पता कर घटना वाले दिन चौबीस घंटे की उसकी लोकेशन पता की।

नाम उसका करन था ...इसलिए उन्होंने उसकी दूसरी आई डी भी करन के नाम से बनायी।

उसके माता पिता बाम्ब ब्लास्ट में मारे गए थे ...लेकिन करन को बाम्ब ब्लास्ट से चोट नहीं लगी थी। उनका विशवास था की वो ट्रेन से के पास गिरा होगा और उसका सर डब्बे से लड़ा होगा ...

लेकिन चोट बहुत ही सीरियस थी और अगर उस रात जैसमिन ने खून नहीं दिया होता ...तो आपरेशन होना मुश्किल था और वो निश्चित कोमा में चला जाता

उन्होंने ये भी पता कर लिया था की उस आपाधापी में लोकल पुलिस के रिकार्ड में करन भी डेड डिक्लेयर्ड है

...और वह उनके आपरेशन के प्लान को और सेफ बनाता है .

कुछ दिन पहले उन्हें ये भी पता चल गया था की वो आइ एम् ए में ट्रेनिंग कर रहा है ...उन्होंने उसकी फोटो वहां मेंल भी की थी ...तो उन लोगो ने कन्फरम किया था ...की उसकी ट्रेनिंग पूरी होगयी है ...लेकिन वो पासिंग आउट परेड में नहीं आया ...

आता कैसे ..उसी समय तो वो हादसा हो गया था ...

उन्होंने ये भी बताया की उसे सेकंड बेस्ट जेंटलमैन कैडेट का अवार्ड भी मिला था और उस ने दो महीने की कमांडो ट्रेनिंग भी की है .... .

एक बात और उन्होंने बतायी थी की उसका मेन्सा स्कोर , आई क्यू बहुत हाई है .9 9 .9 8 पर्सेंटाइल और वो अमेरिकन मेन्सा का मेंबर भी है ...

और उस लीये उन्हें और लगा की ये उनके आपरेशन के लिए आइडियल है ...और जैसमिन ने बहुत हेल्प की ...उसकी रिकवरी में ..तन के साथ मन की रिकवरी में ...

उस साइको लाजिस्ट ने ये बताया था की ये जितना रिलैक्स्ड महसूस करेगा ...जितना नारमल रहेगा ...उतनी ही जल्दी उसकी याददास्त वापस आयेगी ...

कर्नल अहलुवालिया ने साइकोलाजिस्ट से पुछा था ...की क्या वो जो इन्फोर्मेशन उन्हें मिल गयी है उसे , करन के साथ शेयर कर सकते हैं ....तो उसने सख्त मना कर दिया ...उसने उनको समझाया की जरुरी है की उसकी कनटिन्युअस मेमोरी वापस आये ...हम लोगों को भी मुश्किल से 5 % बातें याद रहती है ...लेकिन उसका एक क्रम होता है ...उसके लिए जल्दीबाजी करना ठीक नहीं होगा ...

और दो -तीन महीने बाद जब उसके मन की गांठे एकदम खुलेंगी ...तभी उसकी कन्तिन्युअस मेमरी वापस आएगी

करन के पिता का नाम जब उन्हें पता चला और उनका बैकग्राउंड उन्होंने पता किया तो वो दहल के रह गए .

वह दुनिया के अकेले आदमी थे ...और आर्मी के अकेले आफिसर जिनके लिए उनके मन में असीम आदर था ...

वह सालों कर्नल अहलुवालिया के कमांडिंग आफिसर थे ...और इतने सीनियर पोस्ट पर होने पर भी वो जवानो को लीड करते थे ..सबसे डेंजरस प्वाइंट पर खुद आगे बढ़ते थे ...

और आफिसर कौन कहे अगर किसी जवान की भी तबियत खराब हो तो हाल पूछने सबसे पहले वही पहुंचते थे

...और केयर करने में अगर कोई उन्हें बीट कर सकता था ...तो वो उनकी वाइफ थीं ...उनके घर जाने पर बिना खाना खाए लौटने की इजाजत नहीं थी ...और सारे जूनियर आफिसर्स की वाइफ के साथ ..भी

लेकिन आर्मी में सप्लाई कोर वालों से उनकी खिचखिच हो गयी ...ख़राब सप्लाई को लेके ...और आर्मी हेड क्वार्टर ने भी उनका साथ नहीं दिया ...उन्होंने चुपचाप प्रीमेच्योर रिटायर्मेंट ले लिया ...

और किसी को पता नहीं था की वो बनारस में सेटिल हो गए हैं

और वो भी बम ब्लास्ट में ...

इन सब का एक इलाज है ...जड़ तक पहुंचना ...प्लान बनने के साथ ही पता चलना ...

और सीमा पार जो उन्होंने सोर्स बनाये थे ...ये काम कर रहे थे ...लेकिन जब से इस मोल ने ...गड़बड़ शुरू की

...अगर करन एक बार इस का पता लगा लेता है ...तो एक बार फिर ..उसे काउंटर करना आसान होगा ...

और उस मोल को पकड़ना ही सबसे बड़ा बदला होगा

 ( मोल को पता करने का आपरेशन टाप सीक्रेट था ...इसलिए सिक्योरिटी के कारणों से मैं उसका डिटेल नहीं दे पा रही हूँ )


करन को एअरपोर्ट पर एक मोसाद की एक एजेंट रिसीव करने आई। और पहले दिन से ही ट्रेनिंग शुरू होगयी

...बहोत ही इंटेंसिव ...अनेलिसिस करने के तरीके ...बहोत से डिटेक्शन के सिस्टम , सीक्रेट कैमरे ..

किसी का पीछा कैसे करेंगे और

फिर टफ फिजिकल ...अन आर्म्ड कम्बैट ..कठिन से कठिन टार्चर को बर्दास्त करने का तरीका ...

सोलह घंटे की ट्रेनिंग ...और उसके बाद होमवर्क में तमाम केस जो रात में पढ़ के तैयार करने होते थे

लेकिन पहले दिन ही एक चीज करन को खटकी ...

रात में जब उसकी जैसमिन से बात हुयी फेसबुक पे तो उसने पूछ लिया ( दोनों रोज अलग आई डी और अलग आई पी ऐड्ड्रेस यूज करते थे )..

" उस दिन जब मैं कर्नल अहलुवालिया से मिलने गया था तो उनके पास कौन बैठा था “

" मिस्टर मेहरा , ज्वाइंट डायरेक्टर आपरेशन ...वो अहलुवालिया साहब के सीधे सब आर्डिनेट हैं ...और सारी फाइलें वहीं से इन्शियेट होती हैं ..." जैसमिन ने बताया।

' क्या वो चेन स्मोकर हैं ..." उसने पूछा।

कल पूछ के बताउंगी ...वो बोली।

अगले दिन उसने बताया की वो चेन स्मोकर तो नहीं है लेकिन स्मोक करते थे ...

लेकिन पिछ्ले तीन महीने से , जब से उनका अस्थमा बढ़ा है ...वो तो क्या उनके कमरे में कोई स्मोक नहीं कर सकता ..

अब करन का माथा चकराया

उसने जो उनके पास लाइटर देखा था यहाँ दिखाए सीक्रेट रिकार्डिंग डिवाइस की तरह था और वो सौ मीटर तक कम्युनिकेट भी कर सकता था ...एक बहुत छोटा सा लेंस उसे अब तक याद था ...

और जब उसने मिस्टर मेहरा को वो लाइटर दिया ...तो उन्होंने उसे मुड कर थैंक्स भी नहीं बोला।

जैसमिन को उसने बोल की वो थोडा मिस्टर मेहरा पे वाच रखे ...

वहां के काउंटर इंटेलिजेंस एक्सपर्ट ने खुद उसकी एक हफ्ते क्लास ली ...और उससे वो प्राब्लम भी डिस्कस की ..की मोल का कैसे पता लगाएं ..

शाम को उस की प्रैक्टिकल होती ...

उसे किसी होटल में छोड़ दिया जाता ...और बोला जाता की वो अपने पीछा करने वालों को पहचाने या उनसे पीछा छुडाये ..इसी तरह जो बेस्ट एक्सपर्ट होते ...उसे उनका पीछा करना होता ...फिर कार चेज ...किसी सामन को छिपाना ..मेकअप

पन्द्रह दिन में उसकी ट्रेनिंग पूरी हो गयी।

कर्नल अहलुवालिया ने आपरेशन इस तरह प्लान किया था की वो मोसाद का ही आपरेशन लगे ...

प्लानिंग , फाइनेन्स , अम्युनिशन सपोर्ट ..सब कुछ ..पूरी लाजिस्टिक्स ...वही से प्लान हुयी ...

यहाँ तक की उस कंट्री में उसे जो सपोर्ट मिलता वो मोसाद से या या मोसाद की फ्रेंडली इंटेलिजेंस एजेंसी से ..

यह एक सुपर सीक्रेट आपरेशन था इसलिए इसके बारे में बस मोटी मोटी बातें यहाँ बताना उचित होगा ...

मोसाद ने उसे उसकी टार्गेट कंट्री की बगल वाली कंट्री तक पहुंचा दिया ...और वहां से वो सीमा पार कर के ...

जो इन्डियन एजेंट मारे गए थे ...या न्युट्रलाइज कर दिए गए थे ..उसने पहले तो उनका पता लगाया ...फिर उनके जरिये ..ये इन्फोर्मेशन कैसे लीक हुयी ...बीस दिनों में उसे अंदाज लग गया था ..की मोल कौन हो सकता है ...

उसने शाम को जैसमिन को बताया ...

लेकिन अगले दिन जैसमिन बोली ...बॉस ने कहा है की उन्हें एविडेंस चहिये ...वो भी वायस सैम्पल और पिक्चर ...

ये बहुत टेढ़ा काम था ..उसने सीमा पार फोन टैपिंग की और एक दिन उसे सबूत मिल गए ...

लेकिन उसके पहले वो पकड़ा गया ...उसे सोडियम पेंटा थाल का इंजेक्शन भी लगाया गया

सच उगलवाने केलिए की वो कौन है ...लेकिन उसकी याददास्त गायब होने ने बहुत मदद की ...और दुसरे मोसाद के साथी देश के एजेंट्स ने ...

तीन दिन बाद वो छूट गया .

और वो फिर बंगलादेश , नेपाल होते हुए भारत आया और दिल्ली में पहाडगंज के एक होटल में रुका .

करन ने नयी दिल्ली स्टेशन के एक पी सी ओ से जैसमिन से बात की और उसे पहाड़गंज के एक रेस्टोरेंट में मिलने को कहा।



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