Sunday, March 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--100

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--100
गतांक से आगे ...........

 र जब मेरी निगाह एक बार फिर नीचे आँगन की ओर मुड़ी ...

तो मिश्रायिन भाभी की मुट्ठी पूरी कलाई तक दी की बुर में घुसी हुयी थी ...वो कभी गोल गोल उनकी चूत में उसे घुमाती तो कभी नक़ल तक बाहर निकाल के धीमे धीमे फिर अन्दर पैलती ...

उधर मेरी भाभी ने भी पैंतरा बदल लिया था

उन्होंने दी के चूतड जरा सा उठाये फिर पहले एक फिर दूसरी अंगुली भी दी के गांड पे पेल दी ..लेकिन दी की गांड बहुत ही कसी थी मुश्किल से दो नकल तक अंगुली जा पाई ...

" काहो ननद रानी , नंदोई जी तुम्हारा पीछे का बाजा नहीं बजाये ...कहीं उ साल्ला ,खुदे तो गांडू नहीं है ...." मेरी भाभी ने छेड़ा

और जो हंसी का फव्वारा टूटा तो ..उसमें सिर्फ भाभियाँ ही नहीं बल्कि सारी ननदें , लड़कियां भी शामिल थीं .

तभी मंजू ने फिर एक बार कमर ऊपर उठायी , अपनी जांघो से दी के चेहरे को थोडा सा अलग किया ...और मिश्रायिन भाभी की और देखा ...

मेरी भाभी और मिश्रायिन भाभी दोनों मंजू को देख के एकसाथ मुस्करायीं ...

और मेरी भाभी ने हलके से आंख भी मारी ...मंजू प्यार से दी के गाल सहला रही थी , फिर उसने अचानक एक हाथ से दी के मुलायम कोमल गुलाबी गाल कस के दबा दिए और दूसरे हाथ से दी की नाक भी पिंच कर दी ...नतीजा वही हुआ ...

दी का मुंह पूरी तरह खुल गया ...

मंजू की काले घने झांटो से बहरी बुर चार पांच इंच उपर रही होगी ....

और एक बार फिर मंजू की बुर से वही नशीली .. . सुनहरी शराब छ रर छर्र घल घल ...पहले एक दो चार बूंदे फिर अनवरत तेज धार ..सीधे दी के ...होंठो के बीच ...

और असर मेरे उपर हुआ मैंने और जोश में गुड्डी को चोदना शुरू कर दिया ..

.लेकिन ध्यान में मेरे कल शाम का दिन था मैं बाहर दरवाजे से सुन रहा था और जब मेरी भाभी रंजी के सामने चन्दा भाभी से बनारस बात कर रही थीं , स्पीकर फोन आन था , भाभी , चन्दा भाभी को बता रही थी की गुड्डी के साथरंजी हफ्ते दस दिन के लिए बनारस जायेगी

की रंजी की क्या बनारस में ' खातिर " की जाय.तो चंदा भाभी बोलीं ...

" अरे आवे दा उह साल्ल्ली , छिनार रंडी के रोज भिनसारे निहारे मुंह , झांटो से छना , बुर का सुनहला नमकीन शरबत पिलाउगी ना उस को पेट भर ...पानी की जगह खाली नमकीन शरबत ..सुबह शाम ..लौटेगी टी मस्त नमकीन हो जायेगी ..."
" और तनी चटनी भी ..." मेरी भाभी बोलीं ...
" तनी भर क्यों ...चन्दा भाभी बोलीं आखिर हमारी भी तो ननद है दोनों टाइम बढ़िया सीधे चूतड से निकला गरम गरम बेसन का हलवा ...हमारे पेट से उसके पेट में ..."


रंजी खिलखिला रही थी

जब यहाँ खुले आँगन में , जहाँ मोहल्ले वाले हैं पड़ोस की लडकियां है ,

वहां भाभी और मंजू ने मिल के दी को 'सुनहरी शराब 'पिला ही दी ...

तो वहां बनारस में ( जो अब मेरी भी ससुराल होगी ) तो इस से सौ गुना ज्यादा ...रंजी के साथ ...और गुड्डी वैसे भी छोड़ने वाली नहीं ...फिर तो वहां रीत भी होगी , गूंजा भी होगी ...चंदा भाभी ने जो कुछ कहा था
...उससे ज्यादा ही होना था।

और उस जोश में जो मैंने धक्का मारा गुड्डी ...जोर से झड़ने लगी ...

उस की पूरी देह काँप रही थी ..चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी ...लेकिन बिना रुके मैं धक्के मारता रहा चोदता रहा ..और मेरी निगाह फिर नीचे गयी ...

दी का मुंह , गाल पूरे फूले हुए थे ..इसका मतलब की 'वो ' अभी गले से नीचे नहीं उतरी थी .

लेकिन मिश्रायिन भाभी भी ...उन्होंने जोर से दी का एक निपल पिंच किया और बोली ...

" हे ननद रानी ज्यादा छिनार पना मत करा ...इ होली का परसाद हौ ...घोंट ल प्यार से नहीं ता ...जितना भौजाई हईं ना इहाँ कुल नमबर लगाहिये बारी बारी से ...और फिर तोहरे चूत में हम अबहीये कमल खिलाय देब ...हफ्ता भर टांग छितराय के चलबू .."

( कमल खिलाने का मतलब बाद में मुझे मंजू ने समझाया ....मिश्रायिन भाभी ने अभी दी की बुर में जो मुट्ठी डाली थी , तो उंगलिया सटी हुयी थी , लेकिकमल खिलाने का मतलब हुआ की चूत के एकदम अन्दर डाल के वो मुट्ठी खोल देंगी बल्कि उँगलियों को धीरे धीरे कमल के पत्तों की तरह फैला देंगी ...यानी अन्दर चूत बुरी तरह फैल जायेगी ...)

दी के गाल धीमे धीमे पिचकने लगे ...

और अब उनके चारों ओर मेरी निगाह पड़ी तो सभी , लड़कियां भौजाइयां , और शायद जान के भौजाइयों ने जो कच्ची कलिया थी कम उम्र की ननदे थी उन को सब से आगे कर रखा था रिंग साइड सीट पे ...

और शीला भाभी ने 'समोसे वाली' को अपने आगे दबोच कर खड़ी कर के रखा था
.
उस को देख के मेरा और तन्ना गया ...

दी के घर के बगल वाले घर में रहती थी ...


छोटी थी ..लेकिन ...गुड्डी की मझली बहन के बराबर या दो चार महीने छोटी ही रही होगी ...टिकोरे उस के लेकिन गुड्डी की बह्नसे थोड़े बड़े ही थे ...

बगल में एक समोसे वाले की दूकान थी वहां वो भी आती थी शाम को समोसे लेने ...और उस की अदा से उस समय भीड़ थोड़ी बढ़ जाती थी ...लोग बोलते भी ..ये समोसे लेने आती है या देने ...

एक दो बहादुर पीछे से हिप सहला भी देते या पिंच भी कर देते तो वो बुरा नहीं मानती ..

.वो हलवाई भी उसे एक समोसा एक्स्ट्रा ही दे देता एक दिन बारिश थी ...वो ''समोसे वाली"' एक दम भीग गयी थी दूकान भी खाली थी पहुंची तो उसके 'समोसे ' झलक रहे थे ...

हलवाई ने हिम्मत कर के बोल दिया हे सुन एक दिन तो तू अपने समोसे मुझे दे दे रोज ले जाती है मेरे

...उसने न ना बोली ना हाँ ...लेकिन और उसके पास सरक के खड़ी हो गयी और हलवाई ने हिम्मत कर के देते हुए ना सिर्फ छू दिया ...बल्कि उसके उभरते उभार कस के मींज भी दिया और निपल हलके से पिंच कर दिया .

.वो कुछ नहीं बोली लेकिन चलते चलते उस की ओर मुड़ के मुस्करा के बोली ...हे मेरे समोसे अच्छे है की तेरे ...

हलवाई हंस के बोला तेरे ..तब से उस को कालोनी वाले समोसे वाली ही कहते ...

और शीला भाभी के हाथ उस की फ्राक के अन्दर थे .समोसे पे .....फ्राक भी रंग की रगड़ाई में आधी फट गयी थी ..

दी की बुर में अब मिश्रायिन भाभी रगड कर के खूब तेजी से फिस्टिंग कर रही थी ..
मंजू उन के मुंह पे अब अपनी गांड रगड़ रही थी ...और मस्त गालियाँ दे रही थी ...

अरे छिनार गांड चट्टो ...तेरे सारे खान दान को कुत्ते चोदे गदहे चोदे ...

ये देख के अब मैंने फिर जोर जोर से चोदना गुड्डी को शुरू किया ...गुड्डी दुबारा झड़ने लगी और उसकी चूत अब कस के मेरे लंड को निचोड़ रही थी ..

अब साथ साथ मैंने भी झड़ना शुरू कर दिया ...

मेरा लंड पूरी तरह अन्दर धंसा था सारीमलाई बुर के अन्दर ....

एक बार गिरना बंद हुआ की गुड्डी की बुर ने दुबारा निचोडना , भींचना शुरू किया ....और मैं दुबारा झड़ने लगा ...मैंने अपनी बाँहों में गुड्डी को दबोच रखा था ...

कुछ देर के लिए तो हम आँगन से दुनिया से ही दूर हो गए थे ...

बस मैं था गुड्डी थी ...

और जब मैंने नीचे देखा तो मंजू और मेरी भाभी दी से दूर खड़ी थीं ...मिश्रायिन भाभी भी दी की बुर से अपनी मुट्ठी निकाल रही थीं ...

दी जब खड़ी हुयीं तो उन्होंने ...( मुझे लगा की वो खूब नाराज होंगी ) लेकिन सबसे पहले उन्होंने मंजू को गले लगाया और बोली ...आज भौजी के साथ होली का मजा आया ...

और फिर वो मेरी भाभी और मिश्राईन भाभी के भी गले लगीं ...

उनकी ब्रा और ब्लाउज तो ऊपर छत पे फ़ेंक दिए गए थे ...मंजू ने उनकी साडी आँगन से उठा के दी ...जो उन्होंने लपेट दी ..


 लग रहा था जैसे इंटरवल हो गया हो ...तभी मिश्रायिन भाभी को कुछ याद आया और उन्होंने पहले मंजू फिर शीला भाभी से पुछा ...लेकिन किसी ने शायद छत की ओर इशारा किया ...

मैं समझ गया की भाभी को अब देवर की याद आ रही है ..अब मेरी तलाश हो रही होगी ...

मैंने देखा की नीचे से दो दो लड़कियां और दो नयी भाभियाँ ...ऊपर आ रही थी।

हम और गुड्डी झट से खड़े हो गए ...

गनीमत थी की हम कपडे पहने पहने चुदाई कर रहे थे ...

गुड्डी ने बस अपनी थांग सीधी की , स्कर्ट नीचे की , ब्रा ठीक किया और टाप सेट किया ...और तैयार हो गयी।

मैंने भी बस जंग बहादुर को किसी तरह से ब्रीफ में समेटा , पेंट बंद की और रेडी ....

छत के एक कोने में मैं छिपा ...एक कमरे की दीवाल के पीछे ....और दूसरी ओर गुड्डी छिपी ..अलग अलग ....

लेकिन हम दोनों पकडे गए ...भाभियों ने मुझे दबोचा और लड़कियों ने गुड्डी को ...

कुछ देर में हम दोनों नीचे थे ...मिश्रायिन भाभी के दरबार में ...

लड़कियां भाभियाँ ..एक बार फिर ड्रिंक्स और खाने की टेबल पे थे ...जो कपडे बचे थे वही लपेट के ...ज्यादातर साड़ी वालियां सिर्फ साड़ी में थी ...फटे हुए ब्लाउज , ब्रा , पेटीकोट आंगन में बिखरे पड़े थे ...

और लड़कियों की भी ब्रा पैंटी सब सुरक्षा कवच नुचे फटे पड़े थे सब के टाप्स आधे से ज्यादा नुचे थे बटन हुक्स किसी में नहीं थे बस ...देह पे टांग लिया था ...और रंग से गीली होक देह से चिपके ..सब के उभार दरार नजर आ रहे थे

" क्यों लाला कहाँ छुप रहे थे ..अरे छत क्या ...अपनी बहन के भोसड़े में भी छुपते ना तो हम हाथ डाल के निकाल लेते ...आज बिना तोहार रगड़े थोड़े छोड़ने वाले थे ..."

मेरी दोनों भाभियों ने मुझे छेड़ा। दोनों की शादी हुए साल भर भी नहीं हुए होंगे और उम्र में मेरे बराबर या साल दो साल ही बड़ी रही होंगी ...

गुड्डी की भी यही हालत थी ...लेकिन अचानक मुझे पीछे से देख के वो 'समोसे वाली ' जोर से हंसी और फिर उसने बाकी लड़कियों को दिखाया ...उनपर भी हंसी का वही दौरा पड़ा ...और फिर भाभियाँ लोटपोट हो गयीं ...जो मुझे पकड़ने गयी थी वही बोलीं ...

" देवर जी ... नाम लोग आगे लिखते हैं आपने पीछे ...और फिर हंसी का फुहारा ..दूसरी मेरे पिछवाड़े हाथ फेरते बोली ...अरे इनका पिछवाड़ा ही तो असली माल है ..इसलिए पिछवाडे ...

तब तक मेरी रगड़ाई चालु हो गयी एक ने दोनों हाथ पीछे कर के पकड़ लिए और फिर दूसरी ने चेहरे पे कालिख , पेंट ना जाने क्या ..टी शर्ट में मेरी बान्हे खुली थी इसलिए उन पे भी पेंट रंग कालिख लगनी शुरू हो गयी ....

मेरी भाभी ने अपनी ,सहेलियों देवरानियों को ललकारा , अरे देवर से रंग खेलना है या इसके कपड़ों से


मैं डरा ...की कहीं मेरी टी शर्ट फाड़ने का प्लान ना बना लें ये और मैंने उन्ही भाभी से गुहार लगाई , जो मुझे पकड के लायीं थीं ....

रीतू भाभी ...गद्दर जोबन ..साल डेढ़ साल पहले ही शादी हुयी थी ...भाभी की पक्की देवरानी ...

" नहीं नहीं तुम्हारी शर्ट क्यों फाड़ेगे ..फाड़ने के लिए तो बहुत मस्त चीजे है तुम्हारे पास ..." मेरे पिछवाड़े हाथ फिराते हुए वो मेरी भाभी की ओर मुस्करा के देखते बोलीं।

" एकदम ..." मेरी भाभी हंस के बोलीं . आज वो मेरा साथ कत्तई नहीं देने वाली थीं , फिर उन्होंने और आग लगायी .."ऱीतू इसकी भी फाड़ना , और इसके बहनों की भी ..."


 एकदम रीतू भाभी बोलीं तब तक एक दो और भाभियाँ मैदान में आगई थी ,

कुंवारा देवर मिला था , और उन्होंने मिल के मेरी टी शर्ट खींच के उतार दी , मैं अभी भी टाप लेस नहीं हुआ था लेकिन अगले पल हो गया ...

मेरी बन्याइन के चिथड़े चीथड़े उड़ गए रीतू और उनकी सहेली भाभियों के सौजन्य से ...और वो चिथड़े उन्होंने मेरे हाथ में दे दिए . रीतू भाभी मेरे निपल पिंच करती बोलीं .

.पहले तेरी बहनों की ब्रा फाड़ी थी अब तेरी ब्रा का नम्बर ...

तभी मेरी टी शर्ट पर जो अब उतर के भाभियों के हाथ में थी ...

पर मिश्रायिन भाभी की निगाह पड़ी , और वो भी ठठा के हंस पड़ी और बोलीं ..जरा लाला को भी तो देखाओ

अब मैं समझा क्यों सब हंस रही थी

मेरी शर्ट पर खूब बड़े बड़े अक्षरों में लाल रंग से लिखा था

बहनचोद

और उस के नीचे , थोड़े छोटे अक्षरों में ...

बहन का भंडुआ

और सबसे नीचे फिर बड़े अक्षरों में ...

गांडू

मैं शर्मा रहा था , झिझक रहा था ...

बनारस की बात और थी लेकिन यहाँ अपने घर में ...और ये सब भाभियाँ , लडकियां , रोज कहीं न कहीं मुलाक़ात हो जाती थी , उन सब के सामने ...

और वो सब मुझे चिढा रहीं थी , मोहल्ले के रिश्ते से , बहने लगने वाली , मेरी भाभी की ननदें, लडकियां भी और भाभियों का तो पूछना ही नहीं

तभी मेरी निगाह गुड्डी पे पड़ी ...उसकी हालत भी अब मेरी जैसे ही हो गयी थी ...टाप लेस तो नहीं हुयी थी , हाँ टाप अच्छी तरह से फट और खुल चूका था

और दी और वो 'समोसे वाली ' उसे दबोचे थीं . यही नहीं , दोनों के एक एक हाथ गुड्डी के जोबन पे थे , खुल कर मसलते रगड़ते .

कोई भाभी बोलीं अपने पिछवाड़े ..इ गारी लिख कर घुमने का कौनो नया फैशन चला है का ...कौन लिखले हौ ..

मेरी निगाह सीधे गुड्डी पे पड़ी उसेक अलावा ये शरारत और किस की हो सकती थी ...

गुड्डी टुकुर टुकुर देख रही थी , फिस्स से हंस और झट से बोल पड़ी ,

" अरे नहीं ...गाली और शर्म किस बात की ...जैसा काम वैसा नाम ...तो जो जो करते हैं वही लिख लिए होंगे "
रीतू भाभी अपने दोनों हाथो से मेरे पीठ पे रंग और कालिख रगड़ते गुड्डी से बोलीं ...

' त तोहार का मतलब है की हमारे देवर नम्बरी ..."

' बहनचोद हैं ..." बात शीला भाभी ने पूरी की और जवाब भी दिया ...
" अरे हैं तो है ..ऐह्मे कौन बुरी बात है ..अरे ससुरी हमार सब नंदिए , एंकर बहनी सब ऐसन छिनार हैं साल्ली ,झांट बाद में आती है लंड के चक्कर में पहैलवे पड़ जाती हैं ...पूरे मोहल्ले में बांटती है तो तनी एनाहू के चखाय देंगी तो कौन घिस जाएगा ..."

और मेरी निगाह दी पे उसी समय पड़ी ...

एकदम तन्वंगी , सिर्फ एक साडी में लिपटीं , जो रंगों के असर से पारदर्शी नहीं तो पारभासी जरुर हो गयी थी ...गद्दर जोबन एकदम कड़े कड़े ..लाल, काही रंगों में रंगे , लिपटे साफ साफ दिख रहे यहाँ तक की निपल भी , आलमोस्ट कंचो के साइज के ...

हम दोनों की निगाहे मुस्करायीं , एक दूसरे को देख के हाई फाइव किया

दी ने गुड्डी को दबोच रखा था ...जैसे कोई शेरनी , हिरनी के बच्चे को दबोचे ...

और अभी कुछ देर पहले जैसे भाभिया , इन की रगड़ाई कर रही थी ...वो गुड्डी की रंग कम लगा रही थी , रगड़ाई ज्यादा कर रही थीं , अगवाड़े भी पिछवाड़े भी

तभी उस 'समोसे वाली ' कच्ची कली की आवाज सु नाई पड़ी ..सिसकी भी चीत्कार भी ..

.शीला भाभी की वो पकड में आ गयी थी ...और शीला भाभी तो गावं की एक्सपर्ट कन्या प्रेमी ...वो बिचारी ओवर साइज पिंक शार्ट पहन के आई थी की बच जायेगी लेकिन ..शीला भाभी ने उसे उतार फेंका और अब बस वो टॉप और पैंटी में ..भाभी का एक हाथ पैंटी में था और दूसरा टाप में और थोड़ी देर में चर्रर्र चर्र की आवाज सुनाई पड़ी ...

टाप फट गया ..उसके छोटे छोटे समोसे साफ दिख रहे थे ...टीन ब्रा तो भाभियों ने पहले राउंड में फाड़ के फ़ेंक दी थीं ...

लेकिन जैसे मेरी निगाह उस से मिली वो जोर से और मुस्करायी ,हलके से आँख मार दी ...

लेकिन उसके बाद मैं कुछ देखने की हालत में नहीं रहा ...


 रीतु भाभी का हाथ मेरे चेहरे पे था बार्निश की नयीकोट पेंट करता हुआ ...

लेकिन सिर्फ एक हाथ , दूसरी भाभी आधे चेहरे पे कालिख रगड़ रगड कर लगा रही थीं ...

रीतू भाभी अकेले एक साथ कई हमलें कर सकती थीं अब मुझे मालुम हुआ ...

उनका एक हाथ मेरे मुंह पे तो था ही अब , शर्ट ब्न्याइन विहीन नग्न पीठ पे उनके जोबन , जो फटे ब्लाउज में मुश्किल से छुपे थे , रंग लगा रहे थे ....और यही नहीं दूसरा हाथ अब पेंट के अंदर मेरे पिछवाड़े नितम्बो पे फिर नितम्बो के बीच सीधे 'वहां' रंग लगा रहा था


अचानक मेरी जोर की चीख निकल गयी , रीतु भाभी की पिछवाड़े वाली ऊँगली अब अन्दर घुस गयी थी , पूरी ...

" काहो लाला , इत्ते चिकने हो , बचपन से मरवाते हो ..एक ऊँगली पे इ हाल है ता ससुराली में ता मोट मोट ..." रीतू भाभी ने छेड़ा

जवाब उनकी सहेली और आगे से रंग लगाते भौजी ने दिया . बोलीं ...

" कौनो बात नहीं लगता है प्रैक्टिस छूट गयी है अरे हम लोग करवा देंगे"


और साथ ही उन भाभी का हाथ मेरे पेंट के अन्दर , और तन्नाते चर्म दंड पे उन कोमल कोमल हाथों से लाल पेंट की रगड़ाई ...

अब एक साथ आगे पीछे दोनों ओर से हमला ...चेहरे , सीने और पीठ पे कई कोट रंग तो पहले ही पुत चुके थे अब लेकिन होली ...बिलों द बेल्ट चालु हो गयी थी ...रंगों के साथ गालियाँ भी ...वो भी होली मार्का ...

लेकिन मेरे भी दिन बहुरे ,


, आगे से रंग लगा रही भाभी अपना स्टाक रिप्लेनिश करने बरामदे की ओर गयीं ..और झुक कर मैं रीतू भाभी के चंगुल से निकल गया ...

" हहे देवर जी इ बेईमानी है ..डर गये क्या ...जो भाग रहे हो ..."

तब तक पीछे से मैंने अंकवार में उन्हें धर दबोचा और एक हाथ ब्लाउज के ऊपर से ..और दसरा अन्दर ...
भला हो मेरी कालोनी की बहनों, उनकी ननदों का जिन्होंने रीतू भाभी की ब्रा पहले ही लूट ली थी ...

इसलिए इस देवर को अब जोबन लूटने में कोई दिक्कत नही थी ...

दोनों चून्चियों को कचकचा के मसलते मैंने उन्हें छेड़ा ..

 अरे रीतू भाभी , इ होली के मौके पे कौनो बेवकूफे देवर होगा जो तोहरे अस गद्दर जोबन वाली भौजाई को बिना रगड़े छोड़ेगा
 और जवाब में रीतू भाभी , ने अपने मस्त भरे भरे चूतड मेरे पैंट फाड़ते लंड पे रगड़ दिया।

मेरे जंग बहादुर बौरा गए।

मेरे हाथ ने रीतू भाभी का साया विहीन साडी पीछे से उठा दिया ..

.क्या मस्त गांड फाडू चूतड थे रीतू भाभी के ..सच ...जैसे गद्दर जोबन , वैसे गद्दर चूतड ...खूब भारी ,कड़े

..जब वो चलती थी तो शादी के बाद से ही , उनका जान मारू पिछवाड़ा देख के मेरी क्या , सब की हालत ख़राब हो जाती थी ...और हम से ज्यादा रीतू भाभी हमारी हालत जानती थीं इसलिए थोडा और ही चूतड मटका देती थीं ..

और आज वही चित्तौड़ गढ़ मेरे हाथ में था ...

मैंने रंग पेंट सब लगाया ...मसला और मेरी ऊँगली सीधे पिछवाड़े ...आखिर उन्होंने भी तो मेरी ऊँगली की थी

...लेकिन मेरी ऊँगली ..रीतू भाभी की बुर में घुसी ..और भाभी ली ने अपनी बुर सिकोड़ ली , जैसे कोई प्रेमिका के घर में घुस जाय और और ...सजनी उसे अन्दर ले कर सांकल बंद कर दे ...

लेकिन रीतू भाभी इत्ती सीधी भी नहीं थी ..वो मेरे सामने खड़ी थीं मेरी ओर पीठ कर के ..और उन्होंने हाथ पीछे कर के मेरे खूंटे को , पेंट के अन्दर हाथ कर के पकड़ लिया ...

तब तक दो तीन और भाभिया आके शामिल हो गयी ,

एक ने एक बाल्टी रंग सीधे मेरी पीठ पे फेंकी ..पूरी तेजी से ..दूसरी ने मुझे दिखाते हुए रंगों , पेंट और सीधे कडाही से निकाली कालिख का काकटेल बना के सीधे मेरे पेंट में , पिछवाड़े और द्दोनो नितम्बो की जम कर रगड़ाई शुरू हो गयी ..

और कुछ देर तरजनी फिर पिछवाड़े ..

और साथ में उनकी गालियाँ भी ..

साले तेरी बहनों की बुर का भोंसडा और तुझे गांडू बना के छोडूंगी , डलवा चुपचाप ..

और तीसरी भाभी के हाथ के रंग मेरे सीने पेट पे लग रहे थे ..जिनके जरा सा छुअन से पूरे देह में सिहरन उठ जाती थी , उन्चौसो काम इ पवन एक साथ चलते थे ..

वही जोबन के मद में माती , मदमाती रस की गागर भाभियाँ ...खुद मेरी देह में ..

लेकिन मेरा और रीतू भाभी का होली का प्रोग्राम बदस्तूर जारी था ..

उनका ब्लाउज अब तार तार हो चूका था ...

मेरे हाथ उसी तरह से जोबन की रगड़ाई कर रहे थे तो कभी निपल पिंच कर लेते ..मेरा दूसरा हाथ उनकी रस मलाई का नीचे रस ले रहा था और एक ऊँगली अंदर ..भरतपुर के रीतू भाभी का मंथन कर रही थी ...

और रीतू भाभी तो मुजह्से भी दस गुना जोश में ..मेरा लंड ऊपर नीचे ..आगे पीछे कर रही थीं ..कभी खुले सुपाडे को रगड भी देतीं अंगूठे से ..

तब तक मिश्रायिन भाभी की आवाज गूंजी ...अरे अभी ये साल्ला ...छिनार का ..पेंट उसका ..पहले चीर हरण तो करो इसका फिर नंगे नचाओ ..

अगले ही पल दोनों भाभियों ने मेरा हाथ पीछे से पकड के किसी किशोर ननद की खिंच के जबरन उतारी गयी तीस नम्बर की ब्रा से मेरा हाथ बाँध दिया और ..

पेंट उतारने की रस्म रीतु भाभी ने पूरी की ...बड़े आराम से ..सबको दिखाते हुए..


 अगले ही पल दोनों भाभियों ने मेरा हाथ पीछे से पकड के किसी किशोर ननद की खिंच के जबरन उतारी गयी तीस नम्बर की ब्रा से मेरा हाथ बाँध दिया और ..

पेंट उतारने की रस्म रीतु भाभी ने पूरी की ...बड़े आराम से ..सबको दिखाते हुए..

पहले रीतु भाभी ने बहोत प्यार से सबको दिखाते हुए मेरे तम्बू के बम्बू को पेंट के ऊपर से सहलाया ,..

फिर धीमे धीमे बटन , फिर जिपर खोला ..और फिर तीनो भाभियों ने मिल के एक साथ सर्र रर पैन्ट , नीचे ...खिंचा

और जब तक मैं समझू ...रितू भाभी ने उसका बाल बनाया ...और पूरी तेजी से ...वो छत के ऊपर पहुँच गया ...और

मैं मात्र चड्ढी में ...वो चड्ढी भी वी टाइप ..बस किसी तरह खूंटे को छुपाये ....

मेरी सारी भाभियाँ , लडकियां , आँगन बरामदे में बैठी ..रिंग साइड सीट पे देख रही थीं ...फूल मांटी ...

अब आगे का काम कौन संभालेगा ..रीतू भाभी ने सभा को चुनौती दी ...

दी ने गुड्डी को खींच के आगे कर दिया ...' ये हक़ सिर्फ इसका है ..."

गुड्डी ने रीतू भाभी के कान में कुछ कहा ..गुड्डी और रीतू भाभी की पक्की दोस्ती हो गयी थी ..और रीतू भाभी ने जाके , 'समोसे वाली ' को भी पकड के लाके खड़ा कर दिया और बोली

ये हक़ तो आज एक कच्ची कलि वाली बहन का ही है ..

गुड्डी अब काम पे लग गयी ...और मेरी भाभियों ने मुझे जबरन निहुरा दिया ...

गुड्डी ने पहले सब लड़कियों , भाभियों को दिखाते हुए मेरे नितम्बो को सहलाया , मसला ...

ब्रीफ इतनी छोटी थी की बस ..नितम्ब के दर्रे में फँसी हुयी थी ....और उसे ज़रा सा सरका कर अंदर का भी दृश्य दिखाया ...

कालिख , लाल काही नीला तरह तरह के रंग, पेंट ....

और आँख मटका कर पहले आडियेंस से फिर मुझसे पूछा ...

""क्यों ...मार लिया जाय की छोड़ दिया जाय ...बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाय ""

चारों और से आवाज उठी ... मार लिया जाय ...मार लिया जाय ...

और सबसे तेज रीतु भाभी की ...

""अरे इत्ते मस्त चिकने की इत्ती मस्त गांड ...वो भी होली के दिन ..न मारना सख्त नाइंसाफी है ..""

गुड्डी मेरी पिछवाड़े की दरार में उंगली फिर रही थी ...फिर उसने एक झटके में चड्ढी थोड़ी नीचे सरका दी ...अब नितम्ब तो खुल ही गए थे ...बीच का छेद भी दिख रहा था ...

गुड्डी ने उसे पहले लोगों को भर नजर देख लेने दिया ...और फिर नीलाम वाले की तरह बोली लगाने लगी ...


इत्तनी मस्त मक्खन मलाई गांड ...होली का स्पेशल डिस्काउंट ...जिसको देख के बनारस के सारे लौंडे बाजों का मन डोल उठा बचा के मैं यहाँ ले आई किसी तरह से ...बोली बोली लगाओ ...

सबसे पहली बोली लगायी ..रीतू भाभी ने ..चार आने ....हंसते हँसते सब की हालत खराब थी ...

गुड्डी ने बुरा सा मुंह बनाया ...

""अरे इत्ता कम दाम ...इत्ते गोरे गालो वाले चिकने लौंडे की कुछ तो कीमत बढाओ ..."

हँसते हुए अब मेरी भाभी मैदान में आगयीं और बोली ...पांच आने .

पांच आने में क्या होगा ...गुड्डी दुखी होके बोली फिर ...उसने कुछ जैसे सोच के जोड़ा

""चलिए ...आप भी क्या याद करेंगी ...किसी बनारस वाली से पड़ा था ...होली क स्पेशल डिस्काउंट ...एक के साथ एक फ्री ..

.इनकी कुँवारी सो काल्ड बहन कम मस्त माल ..सारे शहर का धमाल .....बड़ी कैपिसिटी है उसकी ..एक के साथ एक फ्री इनके साथ ..इनकी बहन रंजी गदहे की गली वाली ...


रीतू भाभी फिर मैदान में आयीं ...चल तू बोलती है तो आठ आने ...

आठ आने आठ आने ..आठ आने में तो ..चाय दस रुपये ...खाना बारह रुपये ...नहीं दाम बढ़ाइए ...

फिर गुड्डी मेरे पास आ गयी और मेरे दोनों नितम्बो को जैसे उनसे बहूत जोर लगा के फैलाया, और मुश्किल से तरजनी का एक पोर घुसेड़ा ...और ..फिर सबको दिखा के बोली ..

"एक दम कोरी है ..अप के ननदो की तरह नहीं की ..झांटे आई नही और बैगन , खीरा सब अन्दर


एक बार फिर सारी भाभियों की हंसी का फुहारा ..फूट पड़ा ...और मेरी भाभी और रीतू भाभी की आवाज एक साथ सुनाई पड़ी ...

ये बात तूने एकदम सही कही ..बैगन और मोमबत्ती का दाम कभी कम ही नहीं होता ....

उसने फिर बोली शुरू की आठ आने आठ आने ...तब तक मेरी भाभी ने फिर आवाज लगायी ...

मेरी सारी ननदे शामिल कर दे तो एक रुपये में ...

चलिए गुड्डी ने आवाज लगाई ...आप भी क्या याद करेंगी ...ये और उनकी सारी ममेरी चचेरी फुफेरी मौसेरी बहने ..एक रुपये ..एक रुपये ..

तब तक जैसे कोई मोबाइल बजा हो ...उसने फोन उठाया ..फिर मेरे कान में बात करने का नाटक किया ...और बोली ..कम है थोडा और ..ओके ..फाइनल ...

और फोन रख के बोलीं ...आप मौका चूक गयीं ....माल बिक गया ...

कितने में ..सब ने एक साथ पूछा ..

" बीस आने में ...ये और साथ में इनकी साऱी माय्केवालियाँ ..." बनारस से फोन आया था ...हंस के वो बोली ...

किसी लड़की ने पूछा कौन है वो तो गुड्डी घूम के आंख मटका के बोली ...इनकी होने वाली सास ...अब नथ वहीँ उतरेगी ...

मिश्रायीं भाभी गुड्डी से बोली ...

चल अब औजार तो दिखा ...और गुड्डी ने 'समोसे वाली ' कीओर मुंह कर के कहा चल अब तेरा काम शुरू…

पकड़ो , पकड़ो काटेगा नहीं ...चड्ढी के ऊपर से ही उस 'समोसेवाली' कच्ची कली के हाथ में जबरन पकडाते हुए गुड्डी बोली .

मैं देख रहा था रीतू भाभी गुड्डी को कैसे उकसा रही थीं ..दोनों ने ही मुझे उस 'समोसे वाली ' से नैन मटक्का कारते देख लिया था ...

ना ना करते उसने चड्ढी के ऊपर से पकड लिया ..और हलके से दबा दिया

सोच , जब तेरे हाथ में ये इत्ता मजा दे रहा है तो तेरी फुद्दी में घुस के कितना मजा देगा ...ले ले ..गुड्डी ने उसे फूसफुसा के समझाया .

खोलो खोलो खोलो सब भाभिया चिल्ला रही थीं ..फिर कालोनी की लडकियों ने भी ज्वाइन कर लिया ...खोलो खोलो ...

गुड्डी और उस ने मिल के चड्ढी को थोडा नीचे किया ....अब 'वो ' थोडा थोडा दिख रहा था ...

खोलो खोलो ...शोर आसमान छू रहा था ...के हवाले

और अब गुड्डी ने मैदान उस 'समोसे वाली ' के हवाले कर दिया ...और उस ने एक झटके में ...जैसे कोई स्प्रिंग वाला चाक़ू निकल आये ...आठ इंच का ...बस उसी तरह से वो उछल के बाहर आ गया ...


खूब मोटा कडियल ...लाल पीले नील रंगों से पूता ..

एक पल के इये सन्नाटा सा छा गया ...फिर खूब जोर जोर से हो हो शुरू हुआ पहले लड़कियों ने फिर रीतू भाभी ..और फिर मेरी भाभी भी .....

मिश्रायिन भाभी तारीफ वाली नजर से देख रही थी ...तो भाभी ने उनके कान में कुछ कहा जैसे कह रही हों आखिर देवर किसका है

गुड्डी ने उस 'समोसेवाली ' का हाथ पकड़ के जबरन मेरे खूंटे पे पकडवा दिया और बोला ..चल अब ले मजा खुल के ...

उसने थोड़ा मुंह बनाया , थोड़ी ना नुकुर की , लेकिन गुड्डी के आगे किसी की चली है , जो उस की चलती

...और मन तो उस का भी कर रहा था ....फिर तो दोनों हाथों से पकड के उस कच्ची कली ने जिसके " छोटे छोटे समोसे ' के सब दीवाने थे , हलके हलके आगे पीछे करना शुरू कर दिया ....

लंड एकदम टन्न ...

लड़कियों ने भाभियों ने जोर जोर से शोर मचाना शुरू किया ...

वो सब भी ठंडाई , वोडका , रम और जिन के नशे में टुन्न थीं ...

खोलो खोलो ...
और उस छुटकी ने सबको ललचाते , दिखाते ...आखिर एक झटके में खोल ...दिया

सुपाड़ा बाहर ...

मस्त गुस्सैल पहाड़ी आलू ऐसा मोटा , लाल ...

एक बार फिर सन्नाटा छा गया ...सबकी आँखे वहीँ गड़ी ...

और फिर ...हो हो हो हो हो ....जोर का शोर ...

और गुड्डी ने 'समोसे वाली ' को पकड के घोषणा कर दी की अब ये इसे पूरा मुंह में ले के दिखायेगी ...

वो लाख ना नुकुर करती रही ...पर गुड्डी कहाँ ...और साथ साथ में आंगन में बैठी भाभियों का शोर गूंजा ....हाँ हाँ हाँ हाँ

 वो लाख ना नुकुर करती रही ...पर गुड्डी कहाँ ...और साथ साथ में आंगन में बैठी भाभियों का शोर गूंजा ....हाँ हाँ हाँ हाँ

और गुड्डी का साथ देने रीतू भाभी मैदान में आगई ...

उस को समझा के बोली ..ज्यादा छिनारपन मत कर ..अभी तो ये खाली मुंह की बात कर रही है ...मैं होती तो नीचे वाले मुंह में घुसवाती ...ले ले मजा आयेगा ..

वो रीतु भाभी की ओर मुड के बोली ...नहीं भाभी नहीं जाएगा ...बहोटी मोटा है ...

गुड्डी ने हड़काया ...तो फिर मुट्ठ मार के खड़ा क्यों किया ..लेना तो पड़ेगा ही ....

रीतू भाभी ने समझाया ...

अरे यार लालीपॉप चूसती है की नहीं ...कार्नेटो का कोन लेती है की नहीं ..बस अच्छा चल थोडा सा ले ..बहुत थोडा सा ले ले ..फिर मैं गुड्डी को मना लुंगी जल्दी कर ....

'समोसे वाली ' बिचारी ...मन तो उसका भी कर रहा था ..उसने थोडा सा मुंह खोला ...और गुड्डी ने मेरा लंड सीधे उसके होंठों के बीच ...

फिर तो वो लाख गों गों करती रही ..सर हिलाती रही लेकिन रीतू भाभी के चंगुल में आ गई थी ...

वो जबरन उसका सर पकड़ पीछे से ठेल रही थीं ...और इधर गुड्डी भी जबरन मेरा लंड के बेस पे हाथ से पकड के उसे पूरी ताकत से पुश कर रही थी ...

करीब चार इंच ..आधा घुस गया तो दोनों रुकी और रीतू भाभी ने उसे ..'समोसे वाली ' को छेड़ा ..आखिर उनकी ननद लगती थी ....

क्यों कैसा लग रहा है भैया का लंड चूसने में ..आज होली में तूने अच्छी शुरुआत कर दी है अब चल ...अगली होली तक तेरे मुहल्ले के जीतते भैया लगते हैं ...सबके चुसवा दूंगी ....

और फिर मोबाइल के कैमरे सीधे क्लोज अप ...

और फिर रीतू भाभी मेरे पीछे ..साथ में साऱी भाभियाँ ...भी ..बहनचोद बहन चोद ...

जब थोड़ी देर वो चूस चुकी तो रीतू भाभी ने फिर उस का सर पीछे से पुश किया और अब तो मैं भी मेरे हाथ उसके 'समोसे' पे ..गुड्डी ने कब का उसका 'टाप उतार फेंका था ...

मैंने जोश में थोडा और पेला ...

करीब छ इंच तक उसने घोंट लिया और ..पांच छ मिनट तक रीतू भाभी ने उस कच्ची कली को चुसवाया ...


तब तक गुड्डी अपने हाथ में मेरे चड्ढी लिए आनाउन्स कर रही थी


वो जोर जोर से बोल रही थी ....ये जिसके ऊपर गिरेगा ...बस उसकी किस्मत ...उसकी लाटरी खुल गयी ...आज होली के दिन होलिका माई का परसाद ...ये मस्त खड़ा ..झंडा ...आगे से पीछे से ...

" अरे साफ साफ काहें नहीं बोलती ...चूत में गांड में ..." मंजू ने उसे हडकाया।

गुड्डी लेकिन बिना रुके बोलती रही ...फिर कोई ना नानुकुर नहीं चलेगी ....बोलो फेंकू ...

तब तक कोई लड़की बोली ये बेईमानी है ...आप आँख बंद कर के फेंकिये ...

चलो तेरी ही बात मान ली ...और गुड्डी ने आँख बंद कर के एक चक्कर लगाया ...और मेरी ब्रीफ फ़ेंक दी ...

वह सीधे ....मंजू और शीला भाभी के बीच दी ...बैठीं थीं ..उनके ऊपर और इतनी तेजी से की उनकी साडी नीचे और दोनों रसीले जोबन बाहर ...

मेरी आँखे वहीँ चिपकी रह गयी ...एकदम कड़े , खूब भरे भरे ...


मंजू और शीला भाभी ने उन्हें पकड के खड़ा कर दिया और वो युद्ध स्थल पर आगन के बीच में ...

जहाँ कुछ देर पहले वो कच्ची कली मेरा लंड चूस रही थी और अब थक के उसने मुंह हटा लिया था ...

चल अब छोटी बहन के बाद बड़ी बहन का नंबर ...रीतू भाभी बोलीं ...और दी के गुलाबी रसीले होंठ मेरे तन्नाये सुपाडे पे लगा दिए ..

दी ने भी बिना देर किये पूरा सुपाडा गप्प कर लिया ...

गुड्डी ने भी मौके का फायदा उठाया और झुकी हुयी दी की साडी कमर के नीचे तक सरका दी ..और अब उनके मस्त ...बड़े बड़े गदराये उभार मेरी आँखों के सामने .....बचपन में कितनी बार उनके बारे में सोच सोच कर मेरा खूंटा खड़ा हुआ था और आज एकदम ...






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