FUN-MAZA-MASTI
फागुन के दिन चार--99
गतांक से आगे ...........
असली मुकाबला आगन में चल रहा था
एक कोई ससुराल से लौटी ननद ...और बुरी तरह घिरी ...
मेरी भाभी , मिश्रायिन भाभी और मंजू ...इन में से कोई एक ही काफी था ...लेकिन तीन तीन ...
बिचारी ...
मंजू ने पीछे से दोनों हाथ पकड़ लिए थे ..इसलिए वो चीखने चिल्लाने के अलावा कुछ वो कर ही नहीं सकती थी
...और भाभी मेरी बहुत प्यार से उनकी साडी उतार रही थीं आराम से ..चिढाते हुए ..
"अरे लल्ली ( ननदों का नाम नहीं लेते थे ...बिन्नो या लल्ली या ऐसे ही बुलाते थे ...हाँ गालियाँ जरुर खुल के दी जाती थीं ) , नंदोई क्या चोदते समय साडी पहने रहने देते थे ...
शादी के दो साल बाद आई हो जरा हाल तो देख ले ...और कही साडी फटा फटा गयी ....और उन्होंने एक झटके में साडी उतार दी और ...आँगन में एक कोने में फ़ेंक दी .
और उन की आवाज और चेहरे की एक झलक ने मेरी यादों का घूंघट उतार फेंका ...वही आवाज जिन्हें कुछ देर पहले भाभी और मिश्रायिन भाभी चिढा रही थी ...
दीदी मेरे मुंह से निकल गया ...और गुड्डी ने मुड़कर मुझे चिढाते हुए कहा ..अच्छा तेरी दीदी है ...तब तो आज इन की कस के ली जायेगी ...
पहले तू अपनी बचा मेरे मुंह से निकला और गुड्डी के दोनों मस्त उभार पकड़ के मैंने फिर पूरी तेजी से हचक के चोदना शुरू कर दिया
क्यों क्या दीदी की याद आ रही है जो इत्ते जोर से ...दीदी समझ के चोद रहे हो क्या ...गुड्डी ने मुझे फिर छेड़ा ...
और जवाब में मैंने सुपाडे तक लंड निकाल के एक धक्के में जोरदार शाट मारा और ...पूरा आठ इंच अन्दर ...
मुझे मल्टी टास्किंग की आदत है ..इसलिए इधर गुड्डी के साथ मैं देह की होली खेल रहा था ...नीचे होली खेल रही भाभियों ननदों का चक्षु चोदन भी ...
और वो और जोश बढ़ा रहा था ...गुड्डी की निगाह भी नीचे आँगन में लगी थी ...
और फिर ...अचानक मेरी निगाह फिर आँगन में पड़ी ...एक ब्लाउज नीचे से आके हमारे ऊपर गिरा ..
और नीचे देखते ही मुझे पता चल गया ...भाभी ने दीदी का ब्लाउज उतार के छत पे फ़ेंक दिया था और अब वो सिर्फ ब्रा ...पेटीकोट में रह गयी थीं
हाफ कप लेसी ब्रा में झांकते गोरे गोरे गुदाज उरोज ..लेकिन एक मंजू की पकड़ में आ गए ...
ब्रा में हाथ डाल के मेरी भाभी ने दूसरा दबोच लिया और दोनों साथ साथ जोर जोर से रगड़ने लगी ...और साथ में छेड़ छाड़ भी ..
" क्यों लाली ...ननदोई जी ऐसे ही दबाते है या और जोर से ..." भाभी ने पुछा
" अरे सिर्फ नंदोई क्यों देवर भी तो हैं ...क्यों ऐसी चुद्वासी भाभी को वो कहाँ छोड़ने वाले ..." निपल जोर से पिंच करते हुए मंजू ने बोला ...
तब तक मिश्रायिन भाभी भी मैदान में आ गयीं ...हाथ में पेंट ले के ...पेटीकोट में उन्होने पीछे से हाथ डाल के दी के भारी भारी चूतडों पे रंग लगाना शुरू कर दिया और पूछा ...
" क्यों लाली ...कितनो ने इस जोबन का रस लूटा था ...ससुराल में होली में ..पांच छ ..."
" अरे ...पांच छ ...से इसका क्या होगा ...इत्ते यार तो मेरी लल्ली के मायके में थे ...कम से कम सात आठ तो होंगे ही ...तभी तो इतन गद्दर जोबन होगया है मिजवा मिजवा के ..."
मेरी भाभी ने जोर से उनके बूब्स प्रेस करते हुए बोला ...लेकिन दी ने फिर न न में गर्द दन हिलाई ...तो मंजू चालु हो गयी ..
" अरे हमर छिनार ननद रानी अबही तोहरे मुंह में कौन मोट लंड घुसल बा ...खोल के बोल काहें ना देती ..ससुराल क पहली होली में ता नयी दुल्हिन से सब मजा लूटबे करे लें ..."
और दी ने मुंह खोल दिया ...पूरे एक दर्जन ने जोबन रस पान किया था उनका ...यहाँ तक की उनके ससुर ने भी ...
"अरे चलो देवर ना सही तो तोहार भौजाई है न इहाँ कौन कमी ना होई चूंची रगड़ाई में ..."
मेरी भाभी और मंजू एक साथ बोली ...और उस रगड़ाई में ...ब्रा फट के अलग ...और वो भी अगले पल हमारे पास छत पे आके गिरी
"अब तो खूब जम के रगड़ाई होगी तुम्हारी दी की ...तुमने तो कभी नहीं मसला था उनका "
गुड्डी की निगाहें भी मेरी साथ नीचे लगी थीं ...और अब उसकी मुझे छेड़ने की बारी थी ...
मैंने जवाब अपनी स्टाइल में दिया ...खूब कस के उसके किशोर उभरते , उभार रगड़ के , निपल पिंच कर के ...
" पहले तू अपनी बचा ले ...आज पता लगेगा ...और हर धक्का सीधे सुपाडा बाहर निकाल कर लंड एकदम बच्चे दानी तक ...
लेकिन साथ में याद भी आ रही थी दी की ...अपने किशोर दिनों की ...
मैं शायद आठवें या नौवें में था ...मेरी कोई सगी बहन तो थी नहीं ..इसलिए राखी के दिन मैं अक्सर गुस्सा हो जाता था ...
दी के मम्मी डैडी ट्रांसफर हो के उसी साल कालोनी में आये थे ...और हम लोगों से अच्छी फेमली फ्रेंडशिप हो गयी थी ..दी भी अपने मम्मी डैडी की अकेली थीं ...और वो भी उसी तरह राखी के दिन ...सारी लड़कियां कालोनी की तैयार होके सुबह सुबह ...
तो सारांश ये की ...दी हमारे घर आयीं और मेरे राखी बाँध दी गयी मैंने कई दिन तक वो राखी नहीं उतारी
...लेकिन अगले साल गड़बड़ हो गयी ...हम दोनों में झगडा हो गया ...
मेरा कहना था पहले राखी ...उनका कहना था पहले पैसा ...तय हुआ की वो राखी तो बाँध देंगी लेकिन बिना पैसे के मिठाई नहीं मिलेगी मुझे ...
खैर मैं बड़ा हुआ और वो ...और बड़ी हो गयीं ..(और उनका और बड़ा हो गया ) तब तक भाभी घर आ गयीं थी और अब वो दी का नाम लेके भी छेड़तीं ...आखिर उनकी ननद लगती थीं ...
लेकिन सबसे ज्यादा कालेज के लड़के ...मैं ग्यारहवें में आ गया था ...तब लड़कियों को देख के सिटी बजाना ...उन्हें घर तक पहुँचाना मेरे ढेर सारे दोस्तों ने शुरू कर दिया था ...और कई के तो एक्सपीरिएंस भी हो गए थे
.मोस्टली कजिन्स से ...
एक लड़के ने एक दिन मुझे उन्हें देखाते हुए कहा ...जानते हो ये कालेज की बेस्ट माल है है ...
दूसरा बोला एकदम गलत ...पूरे शहर की बेस्ट आइटम है लेकिन घास नहीं डालती ...एकदम जिल्ल्ला टाप ...
मुझे बुरा भी लगा और अच्छा भी ...
उन्हें मैंने अपना रिश्ता नहीं बताया ...
और दी थी भी ऐसी ...5 -7 की हाईट, फिगर भी भरपूर, उपर भी नीचे भी ...बड़ी बड़ी आँखे , हाई चीक बोन्स , खूब लम्बे हिप्स तक बाल ..लेकिन इन सबसे ज्यादा दो चीजें उनमें थीं ...
एक तो जो कहते हैं नमक ...वो ...कुछ ज्यादा ही था ...और दूसरा एट्टीट्युद ...छोटे शहर में लडकिया छिपती छिपाती निकलती , दुपट्टे में ढक के ...लेकिन दी ..टाप और जींस में उस समय भी ...
एक दिन मेरे साथ कुछ सीनियर लड़के थे उनमें कुछ दादा टाइप भी दी अपनी सहेलियों के साथ जा रही थीं और वो चालू हो गये
लड़की चले जब सड़कों पे आये कयामत लड़कों पे ...
मेरी तो हालत ख़राब ...कहीं दी ने घर पे बोल दिया ...खैर किसी तरह मैंने उन्हें चुप कराया ..
उसी साल ..राखी के दिन ...मैं ऊपर अपने कमरे में बैठ के पढ़ रहा था ...स्वेट शर्ट और शार्ट में ...उस समय वो बी ए वन में थी और मैं एलीव्न्थ में ..
और दी ...एकदम हाट लग रही थीं ...उन्होंने लेमन येलो टाईट टाप पहन पहन रखा था ...और जींस ...टाप
...जींस के अन्दर टक किये किये हुए थीं ... इसलिए उभार ..( बत्तीस सी से तो ज्यादा ही रहे होंगे ) एकदम और उछल के दिख रहे थे ..
पहले तो मुझे डांट पड़ी की राखी के दिन मैं तैयार हो के क्यों नहीं बैठा ...
फिर मेरी चोरी पकड़ी गयी ...
मेरी निगाह बार बार उनके उभार पे जा चिपकती थी ...और दी ने मेरा गाल पिंच कर दिया ...और राखी बाँध दी ...लेकिन अब की वो मिठाई नहीं लायी थी ...और हर बार की तरह पैसा पहले मुझे देना था ...
मैंने उन्हें चिढाया ...जब नौकरी करूँगा तो उनका सारा उधार चुकता कर दूंगा ...
लेकिन दी भी आज वो भी मूड में थी ...बोलीं चोर हो तुम मैं तलाशी लुंगी ...और उन्होने शार्ट में मेरी पाकेट में हाथ डाल दिया ...अब तो मेरी लग गयी ...
पाकेट पूरी तरह फटी थी ...और दूसरे नहाने के बाद मैंने शार्ट के नीचे ब्रीफ भी नही पहनी थी ...
दी के उभार को देख के तम्बू पूरा तना था ..
और वही हुआ जो मैं डर रहा था ...उन का हाथ जेब के अंदर होता हुआ सीधे वहां मेरे 'बम्बू ' से लग गया ...
अब तो मैं डरा की ...हुयी शिकायत ...
लेकिन शैतानी से वो हलके से मुस्कारायीं ...
और उनके हाथ ने मेरे 'उसे' पकड़ लिया ..एकदम कड़ा था ...और कड़ा हो गया ..
एक दो पल और ऐसे रखने के बाद उन्होंने उसे हलके से आगे पीछे किया और फिर एक झटके में ऐसा खींचा की सुपाडे का चमडा उतर गया ...पहली बार किसी लड़की का हाथ पड़ा था वहां वो जोर से खींचे रही ...फिर अंगूठे से उन्होंने सुपाडे को हल्के से सहला दिया ...मेरी हालत खराब हो रही थी ....उ
नकी आँख मेरे चेहरे पे टिकी थी ...और जब उन्होंने हाथ बाहर निकाला तो शरारत से बोलीं ...
" बोल मिठाई चाहिये ."
मैं भी ढीठ हो गया था मुस्करा के बोला नेकी और पूछ पूछ ...मैं अब बेशर्मी से उनके उभारों को देख रहा था ...
दी झुकीं ...दोनों हाथ से मेरे सर को पकड़ा और जोर से मेरे होंठो पे किस ले ली . लेकिन उनके होंठ अलग नहीं हुए ..उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठ ले के थोड़ी देर चूसा ...फिर छोड़ दिया ..और आँख नचा के बोला अच्छी लगी मिठाई ...
मेरी आँखे अभी भी उनके उभारों की सहला रही थी मैं बोला ..बहोत मीठी ...लेकिन दो और चाहिए
लालची वो गुस्से का नाटक करती बोलीं ...फिर मेरे हाथ खींच के अपने उभारों पे रख दिया ...
एकदम रूई के फाहे ...जैसे आसमान से किसी ने बादल नोच कर उनकी टाप में डाल दिए हों ...
लेकिन तब तक भाभी के कदमों की आहात सुनाई पड़ी और हम अलग हो गए .
भाभी ने आके पूछा क्या हुआ तो दी एकदम मेरी शिकायत ले के चालु ...
बिना पैसे दिए मिठाई मांग रहा है ...भाभी ने मेरे कान पकडे और बोली ...इसे बेईमानी की आदत है नीचे चलो पहले अपनी दी को पैसा दो फिर मिठाई मिलेगी
वही हुआ ...लेकिन आपने हाथ से गुलाब जामुन खिलाते हुए वो बोलीं ...मिठाई कैसी है ...
भाभी आस पास नहीं थी ...मैं मुस्करा के बोला ..ऊपर आप ने जो खिलाई थी वो ज्यादा मीठी थी ..
नदीदे ..वो शरारत से मुझे देखते बोलीं और बाकी चाशनी मेरे गाल पे लपेट दी और कहा ज्यादा लालच अच्छी बात नहीं ..
अगली राखी में तो दी ने ...मजे कर दिए ...
उस दिन वो साडी पहन केआई थीं ...और बहुत ही लो कट ब्लाउज ...होंठों की मिठाई तो मिली ही ...चोली के अन्दर की हवा मिठाई भी मिल गयी ...ज्यादा नहीं सिर्फ किस्सी ...वो भी चोली के ऊपर से ...लेकिन बारहवे के स्टूडेंट के लिए वही बहुत था ...
शायद आगे कुछ होता लेकिन मैं इन्जीनरिन्ग की पढाई के लिए बाहर चला गया ...
हाँ उनकी शादी में मैं सिर्फ आया ही नहीं बल्कि भाई की सब रस्में भी मैंने पूरी की ...
दी के हसबेंड ...जीजू ने मुझे छेड़ा ...हे मेरे माल पे लाइन मत मारना ...
शादी में दी की होने वाली ननदे भी काफी आयीं थी ...
उनकी ओर इशारा कर के मैंने कहा ...
जीजू अगर आप इन सब माल की बात कर रहे हैं और इसे अपना माल कह रहे हैं ...जो आप साथ लाये हैं ...उनकी तो लाइन क्या बहुत कुछ मारने का प्लान है ...
दी जोर से मुस्कारायी और जीजू से बोलीं ...
मेरा भाई है ...मजाक नहीं ... बहनों को सम्हाल के रखियेगा ...
उस के बाद अब देखा था मैंने उन्हें शादी के करीब पौने दो साल हो गए थे ...पहली होली तो ससुराल में होती है ...तो उस बार वो वहीँ थीं और इस बार मायके आई है ...
कुछ ज्यादा ही गदरा गयीं हैं ...और उभार भी पहले से ज्यादा ...
तभी कुछ हुआ और गुड्डी ने मुझे इशारे से नीचे देखने को कहा ...
दी गिरी पड़ी थी ...और उनके साथ मेरी भाभी ...
हुआ ये था की मंजू और मेरी भाभी दी की चूंची पे रंग लगाने और उस की रगड़ाई में लगी थी ...
ब्रा तो कब की फाड़ के छत पे फ़ेंक दी गयी थी ...और मिश्रायिन भाभी रंग की बाल्टी ले सीधे दी के 'सेंटर ' पे रंग फ़ेंक रही थी ...
दी ने मौके का फायदा उठा के भागने की कोशिश की ...और आँगन में पड़े रंग पे फिसल के ...
और साथ में मेरी भाभी भी ...लेकिन मंजू और मिशार्यिन भाभी ने दोनों को पकड लिया ...
और चोट किसी को नहीं लगी ...हाँ मौके का फायदा उठा के ...मंजू ने दी का पेटीकोट भी खिंच के उतार दिया और अब वो सिर्फ ...पैंटी में थीं ...
लेकिन अब हालत भाभियों की भी वही थी ...ननदों के हमले में ...अब किसी की भी ब्लाउज या साडी नहीं बची थी सब आँगन में छितरी पड़ी थीं ...सब ब्रा और साए में ....धुआं धार रंगों की और ...गालियों की बारिश हो रही थी ..
.टाप और स्कर्ट वाली सब टाप लेस हो गयीं थीं और जिस की ब्रा बची भी थीं उस के अन्दर हाथ डाल के भाभिया जम के रगड़ रही थी ..
.
मैं और गुड्डी दोनों आँगन में देख रहे थे ...
मंजू ने फिर गिरी हुयी दी की चून्चिया ...जिन पे न जाने कितने रंग लगे थे ...जोर जोर से रगडनी शुरु कर दी थीं ...
मिश्रायिन भाभी ने दोनों हाथ गीली हुयी पैंटी में लगाया ...और पैंटी फट के दो टुकडे में हो गयी ..
और मेरी भाभी ...एक पूरी बाल्टी लाल रंग की भर के ले आयीं ...मिश्रायिन भाभी ने पूरे जोर से दी की चिकनी जांघे फैला रखी थी ...भाभी ने पूरी बाल्टी का रंग धीरे धीरे हुए दी की खुली चूत पे उंड़ेलना शुरू कर दिया ...और साथ साथ में वो बोल रही थीं ...
हे चूत रानी तुम्हारी गर्मी शांत हो , प्यास बुझाय ..एही बुर में में हमारे सारे देवर समाय, देवर और सैयां के सब साले समाय ..अपने मायके सब पुराने यारों के लंड की नए यारों के लंड की प्यास बुझाओ ...
बिचारी दी नीचे पड़ी छटपटा रही थी , चूतड पटक रही थीं ...लेकिन मंजू और मिश्रायिन भाभी की पकड़ से कहाँ छूटने वाली ...
पूरी बाल्टी का रंग सीधे सेंटर पे ...
गनीमत है तब तक ननदों की टोली की चार पांच लड़कियां आयीं एक साथ ...और भाभी अब पकड़ी गयीं और उनकी भी दुरगत शुरू हो गयी ...
लेकिन दी के लिए मंजू या मिश्रायिन भौजी अकेले बहुत थीं और यहाँ तो ये दोनों ...
उन्होंने मंजू को कुछ इशारा किया और मंजू ने अपना पेटीकोट कमर तक लपेट लिया ( वो तो पैंटी वाली थी नहीं ...) और अब सीधे दी के मुंह के ऊपर ...वो छटपटाती रहीं लेकिन अपनी झांटो भरी बुर मंजू उनके होंठो पे रगड़ रही थी और बोल रही थी ...
" अरे होली में जबतक , भौजाई ननद को बुर ना चटावे ...तबतक होली पूरी नहीं होती ...."
दी लाख सर पटक रही थी , मुंह नहीं खोल रही थी ...लेकिन मंजू के पास सब का जवाब था ..उसने अपनी मोटी ताकतवर जांघो से दी के सर को कस के दबोच लिया और फिर एक हाथ से उनकी नाक पकड के बंद कर दी ...
" करा अब छिनारपना ...साल्ल्ली भाई चोदी ...सांस लेवे के अब मुंह खोलोगी की नहीं ..."
मंजू ने अपने चूतड थोड़े उठा रखे थे ..और जैसे ही दी ने सांस लेने के लिए मुंह खोला ...मंजू ने अपनी बुर सीधे वहीँ लगा के ...दी की नाक छोड़ दी और बोला
" चलो . ससुरारी में होली में केकर केकर बुर चाटे चूसे होगी और इहाँ मायके में आयके ..अगर एक मिनट भी बुर की चुसाई चटाई हलकी हुयी टी फिर नाक बंद ..."
बिचारी दी ...उन्होंने मंजू की बुर जोर जोर से चाटनी शुरू कर दी .
मिश्राइन भाभी ने खुश हो के मंजू की ओर देखा ...और उन्होंने दी की अब खुली चूत का मोर्चा सम्हाला ...
" अरे छिनारो ई मत कहना की खाली तुन्ही भौजाई के चूत को मजा दे रही और तोहरी बुरिया के आग को कोई पूछ नहीं रहा ...मैं हूँ न ...भूल जाओगी ससुराल की होली ...आज तोहरे चूत की ऐसन आग बुझाउंगी , जितना तो ना तो तोहरे बचपन के छैला बुझाये होंगे ना ससुरारी में तोहार मर्द , देवर और ननदोई ..."
मिश्रायिन भाभी बोलीं और दी की चिकनी रेशमी गदराई जांघो को पहले खूब प्यार से सहलाया और फिर जोर से फैला दिया।
थोड़ी देर तक तो वो हलके हलके दी की मखमली चूत सहलाती रहीं , फिर अंगूठे और तर्जनी के बीच उनके चूत की पुत्तियों को पकड के रगड़ना शुरू कर दिया , एक उंगली चूत के अन्दर घुस गयी ..सटा सट सटा सट ....और दी जोर से गिनगिनाने लगीं ...लेकिन ये तो अभी शुरुआत थीं .
मिश्रायिन भाभी ने अब पूरी हथेली का जोर दी की फैली खुली चूत पे लगा दिया। दी की चूत एक दम मक्खन मलाई थी , एक भी झांट नहीं जैसे वैक्सिंग करा के आयीं हों .मिश्रायिन भाभी की हथेली का निचला , कलाई की ओंर का हिस्सा दी के क्लिट और आस पास रगड़ रहा था और उंगलिया दोनों पुत्तियों को ...
यही नहीं दूसरे हाथ से भी अब वो जोर से कभी दी की क्लिट रगड़ती , तो कभी एक चूंची मसलती , निपल पिंच करती। दी बार बार झड़ने के कगार पे पहुँच जातीं ...
तो मिश्रायिन भाभी अपना टेम्पो थोडा कम कर देतीं ...दी अपने मोटे मोटे चूतड उचका रही थीं , मचल रही थीं ...लेकिन मिश्रायिन भाभी उन्हें झड़ने नहीं दे रही थीं .
दी की दूसरी गद्दर चूंची , मंजू के कब्जे में थी।
कोई मर्द क्या मसलेगा ...उस बेरहमी से वो रगड़ रही थी . उस की कमर भी फिरकी की तरह गोल गोल घूम रही थी और वो जोर जोर से अपनी झांटो भरी बुर दी के खुले होंठो के बीच रगड़ रही थी और साथ में अनवरत गालियाँ ...
" बुर चोद्दो ...तेरी सारे खानदान की गांड मारू ...तोहार छिनार ...इतना मस्त माल कहाँ से पैदा की ...तोहरे मामा से चोद्वाये के का ...बोल भाई चोदी ....तोहरी बुर में हमारी ससुराल के सब लंड जायं ...बुर चुस्सायी कहाँ से सीखी ..मस्त चूसती हो
अगर रुकी ना तो ऐसा गांड मारूंगी तेरी , तेरे सारे खानदान की , गदहा चोदी , तोहरे चूत में इतना लंड घुसेंगे की ...कालीन गंज के रंडियों को मात कर दोगी , रंडी की जनी , हरामन की ...चूस और जोर से चूस ...अभी गांड भी चटवाउंगी।"
मिश्रायिन भाभी और मंजू बीच में एक दूसरे को देख के मुस्करा रही थीं .
मिश्रायिन भाभी ने गियर बदला और दी की चूत पे हमला तेज किया .
अब उनकी दो उंगलिया दी की चूत में तेजी से गोल गोल घूम रही थीं ..और अंगूठा क्लिट पे ..हथेली का निचला हिस्सा भी चूत रगड़ रहा था ...और दूसरा हाथ , दी की चूंची पे ...एक चूंची मंजू मसल रही थी तो दूसरी वो
..और दोनों काम प्रवीण महिलाओं के बीच मुकाबला चल रहा था की ..दोनों मैं कौन ज्यादा एक्सपर्ट है चूंची मर्दन में
दी अब खूब जोर से चूतड उचका रही थीं सिसक रही थी ...और अबकी वो जब झड़ने के कगार पे पहुंची तो मिश्रायिन भाभी रुकी नहीं बल्कि झुक के उनकी क्लिट अपने होंठो के बीच दबा लिया और और से चूसने लगीं ...दी ..झड रही थीं ...जोर से झड रही थीं लेकिन मिश्रायिन भाभी रुकी नहीं ..
हाँ एकाध पल के लिए कुछ देर के बाद उनकी रफ्तार धीमी हुयी ...लेकिन फिर वही ...तीन चार मिनट के अन्दर दी दुबारा किनारे पे थीं और अबकी मिश्रायिन भाभी ने अंगूठे और तरजनी के बीच क्लिट मसलना शुरू कर दिया और मंजू को इशारा किया जिसने खूब जोर से दी का निपल पिंच कर दिया ..
दी के दोनों निपल एकदम खड़े थे जि ससे लग रहा था की उन्हें कितनी मस्ती छाई है ...
कुछ ही देर में दी तीन चार बार झड गयी ..और अब उनकी चूत से ख्होब पानी बाहर आ रहा था ..उसका फायदा उठा के मिश्रायिन भाभी ने अपनी तीन उंगली पेल दी ..एकदम जड़ तक ...
दी के चेहरे पे दर्द उभर आया ..लेकिन खूब तेजी से मिश्रायिन भाभी ने उसे अन्दर बाहर करना शुरू किया और दूसरे हाथ से जोर जोर से क्लिट मसलना शुरू किया ..दर्द सिसकियों में बदल गया और दी एक बार फिर से झडना शुरू कर दिया ...
थोड़ी देर में वो थेथर हो गयीं बुर पूरी तरह रस से लिपटी ..
एक बार झड़ना बंद नहीं होता की दूसरी बार शुरू हो जाता ..लेकिन मिश्रायिन भाभी और मंजू की जुगलबंदी रुकी नहीं ...मंजू अपनी बुर से दी के मुंह को सील किये हुए थी इसलिए बिचारी चीख चिल्ला भी नहीं सकती
तब तक मेरी भाभी , ननदों के झुरमुट से किसी तरह से छूट के आ गयी लेकिन उनकी ब्रा आलमोस्ट खेत रही
..किसी तरह उनके उभार को बस कवर कर रही थी ..और उनके आँगन में पहुंचते ही मिश्रायिन भाभी के चेहरे पे मुस्कान नाच उठी ..उनोने कुछ हाथ से इशारा किया और मेरी भाभी किचेन की और मुड पड़ी ..
और वो जब बाहर आयीं तो उनके हाथ में नारियल के तेल की बोतल थी ...जो उन्होंने मिश्रायिन भाभी को दे दी ...और दी के जांघो के बीच जो मोर्चा अब तक मिश्रायिन भाभी ने सम्हाल रखा था , खुद सम्हाल लिया . मंजु से भी उन्होंने कुछ इशारा किया ...
फर्क सिर्फ इतना था की पहले दी की चूत में उंगली थी और अब भाभी के होंठ ...जोर जोर से किस कर रहे, चाट रहे , कस के चूस रहे ...
लेकिन मैं मिश्रायिन भाभी को देख के चकित था ...पहले उन्होंने अपनी सब चूडिया दाए हाथ से निकालीं , फिर एक मोटा भारी कंगन था , वो उतारा ...और फिर दो अंगूठियाँ उन्होंने पहन रखी थी वो भी निकाल दी ..
मेरी मेरी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था .
अब भाभी जो नारियल का तेल लायीं थी वो उन्होंने अपने बाएं हाथ में लिया और फिर उस से दायें हाथ में तेल की मालिश शुरू कर दी . लेकिन इतना भी जैसे काफी नहीं हो ...
दायें हाथ की सारी उँगलियाँ उन्होंने जोड़ी ...और उपर से सीधे बोतल से तेल गिराना शुरू कर दिया ..अब दायाँ हाथ कलाई तक ...बल्कि आलमोस्ट कुहनी तक नारियल के तेल में डूब गया था ..बारी बारी से भाभी और मंजू , उन्हें देखतीं और दोनों शरारत से मुस्करातीं ...
दी के देखने का सवाल ही नहीं था की क्योंकि मंजू उनके ऊपर चढ़ी हुयी थीं और कभी अपनी बुर ...और कभी गांड मुंह पे रगड़ रही थी , उनके दोनों हाथ भी उसने पकड़ रखे थे ..
मेरी भाभी भी ...उनका सर दी की दोनी खूब चिकनी गोरी, रेशमी जवान जांघो के बीच झुक हुआ था और अपने तगड़े हाथों से उन्होंने दी की जांघो को बुरी तरह फैला रखा था ..
और भाभी की जीभ जीभ दी के निचले होंठो पे लप लप हो रही थी। उन्होंने थोड़ी देर जोर जोर से चाटने के बाद दी की चूत को अपने दोनों होंठो के बीच भींच लिया और जोर जोर से रस लेने लगीं भाभी भी कम कन्या प्रेम में प्रवीण नहीं लग रही थीं
..जैसे कोई बनारसी लंगड़े आम की फांक मुंह लगा लगा के चाटे चूसे
वो उसे उसी तरह चाट रही थीं , जोर जोर से चूस रही थीं ...
उनके गोर सलोने होली के रंग गुलाल से लिपटे गालों पे अब दी का चूत रस चमक रहा था ...फिर उन्होंने आराम से अपनी दोनों उँगलियों से दी की चूत के दोनों फांक फैलाए और उसके बीच अपनी चूत , जैसे कोई मर्द लंड ठेलता है ठेल दिया ...
भाभी की ठुड्डी अब दी की चूत के बेस पे और लम्बी सुतवां नाक , दी की जोश में आई उभरी बौराई क्लिट पे बार बार रगड़ खा रही थी .
भाभी की इस चुसाई और चटाई का नतीजा वही हुआ जो होना था।
दी थोड़ी देर में बार बार आँगन में , रंगों से लथपथ अपने भारी भारी चूतड पटक रही थीं , मचल रही थीं , उछाल रही थी . लेकिन मेरी भाभी भी मिश्राइयिन भाभी से कम नहीं थी की अगर जिस ननद पे उन्होंने घुड़सवारी कर ली उसे , मंजिल तक पहुंचा के ही छोड़ती थीं , वो लाख अपने सवार को हटाने की, पटकने की कोशिश करे ..
और हुआ वही ..
दी थोड़ी देर में ही जोर जोर से झड़ने लगीं . लेकिन भाभी रुकी नहीं चूत चूसती रहीं जुबान से उसे चोदती रहीं, कोई मर्द क्या चोदेगा जिस जोश से भाभी चोद रही थीं उर थोड़ी देर में दी फिर झड़ने लगीं ...
इस तरह तीन चार बार दी को झाड़ने के बाद भाभी ने अब सीधे उनकी क्लिट चूसनी शुरू की ..दी चूत रस में लथपथ थी ..वो बार बार चूतड पटक रही थीं लेकीन भाभी रुकने का नाम नहीं ले रही थीं ...
उधर मिश्रायिन भाभी ने अपने तेल में डूबी कलाई में एक बार फिर नारियल का तेल लगाया और भाभी को हटा के दी की जांघो के बीच आगयीं . दी की जांघे भाभी ने जोर से फैला रखी थीं
अब दी की चूत , मिश्रायिन भाभी के कब्जे में थी और नारियल के तेल की बोतल मेरी भाभी के कब्जे में .
पहले मिश्रायिन भाभी ने अपनी तेल में डूबी हथेली से दी की चूत रस में डूबी , बुरी तरह , पनियाई चूत को जोर जोर से रगडा ...और सीधा असर दी पे पड़ा .
अब वो अपने काबू में नहीं थीं , उनके चूतड फिर आँगन में रगड़ने लगे ...थोड़ी देर की रगडा रगड़ी के बाद अब मिश्रायिन भाभी ने अपने दोनों हाथों के अंगूठों को दी की चूत में घुसेड कर पूरी ताकत से फैला दिया
और अब मेरी भाभी मैदान में आ गयी . उन्होंने तेल की बोतल सीधे दी की चूत में घुसेड दी और मिश्रायिन भाभी की ओर देख के मुस्कराया ...
और भाभी का ग्रीन सिग्नल मिलते ही एक हाथ लगा दी के चूतड के नीचे लगा के उन्होंने उचका दिया ..और तेल की बोतल उलट दी ..अब तेल सीधे ..दी की बुर में ...आधा बोतल तेल तो वो पी ही गयी होगी ...और इतने पे भी उन्होंने बस नहीं किया ...
फिर बोतल बाहर निकाल कर उनकी चूत की पुत्तियों पे क्लिट पे हर जगह तेल गिराया ..और अब दी की चूत भी उसी तरह तेल में चुपड गयी थी , जिस तरह मिश्रायिन भाभी का दायाँ हाथ ...
मेरी समझ में अभी भी कुछ नही आ रहा था ...
गुड्डी की आंखे भी मेरी तरह नीचे चिपकी थीं ...लेकिन वो लगता है की कुछ कुछ समझ रही थी , उसने मुझे छेड़ा
देखा ...पहले तेरी दी की गीली हुयी , खूब पनियाई ...और अब तेलियाई गयीं ...फिर रगड़ी जाएँगी ..उसके बाद देखना ...तेरी सारी बहनों की ऐसी ही हालत होगी …
गुड्डी की छेड़खानी से मैं वैसे तो निबट नहीं सकता था ...
बस , एक रास्ता था मेरे पास और वही किया मैंने . उसकी दोनों क्सिहोर उभार पकड के सुपाडे तक लंड निकाल के , एक झटके में पूरा आठ इंच अन्दर ठेल दिया ..और वो जोर से चीखी ...
लेकिन नीचे आँगन में जो हंगामा चल रहा था होली का उसमें नक्कार खाने में इस तूती की आवाज किसे सुनाई देती ...
और उधर एक बार में ही मिश्रायिन भाभी ने तीन उंगलिया हचाक से , एक झटके में दी की बुर में पेल दीं , पूरे जड़ तक। मेरी भाभी अब पूरी ताकत से दी की दोनों जांघे फैलाएं हुयें थीं ...
मेरी समझ में अभी भी कुछ नहीं आया ...
दी की चूत में तो मिश्रायिन भाभी ने तीन उंगलिया पहले भी डाली थीं ..जब वह अच्छी तरह पनिया गयी थी
...लेकिन पिक्चर अगले पल साफ हो गयी ...जब मिश्रायिन भाभी ने तीन के साथ चौथी ऊँगली भी लेकिन उन्ही तीन उँगलियों के ऊपर रख के डाल के , घुसेड दी और अब कुछ देर तक कभीउसे क्लाक वाइज घुमातीं तो कभी एंटी क्लाक वाइज ...और धीरे धीरे चारों उँगलियाँ दी की बुर के अन्दर समाती जा रही थीं ...
लेकिन दो चार मिनट के बाद मिश्रायिन भाभी ने , अपना हाथ थोडा सा पीछे खींचा , और अब अंगूठा भी
...जैसे चूड़ी पहनाने वालियां , हाथ को मोड़ के सारी अंगुलियाँ समेट के , अंगूठे के साथ , ख़ास तौर से कुँवारी लड़कियों की , मजाक करते चिढाते , पहना देती है , बस मिश्रायिन भाभी का हाथ एक दम वैसा ही हो गया था ...लेकिन उंगलिया तो घुस गयी थी , आगे नहीं सरक पा रहा था ...
मेरी भाभी अब बहोत ध्यान से कभी दी की बहुत फैली चूत पे धीरे धीरे तेल चुआ रहीं थीं तो कभी मिश्रायिन भाभी की अन्दर घुसती मुट्ठी पे ...
मैं सांस रोके बस वही देख रहा था ...
और गुड्डी भी ..
मंजू जो दी के मुंह को अपने मोटे मोटे चूतडों से सील किये हुए थी वो भी ..
यहाँ तक की आँगन और बरामदे में चल रही होली भी थोड़ी धीमी हो गयीं थी . कुँवारी कच्ची कली ऐसी ननदों को दबोचे भाभियों की आँखे भी आँगन की ओर बार बार मुड रही थी ...
मिश्रायिन भाभी इन सबसे बेखबर , अपनी मुट्ठी ..धीमे धीमे ...हलके हलके गोल गोल घुमा रही थी जैसे कोई चूड़ी वाला ढक्कन हो और मेरी भाभी भी ...तेल की बूँद बूँद चुआ रही थीं ...
सूत सूत मुठ्ठी अन्दर घुस रही थी ...लेकिन थोड़ी देर बाद वो अटक गयी ..मुट्ठी के नकल्स ...मुड़ी हुयी अँगुलियों की हड्डियों वाला जो हिस्सा होता है ..बस वो ..
मिश्रायिन भाभी लाख कोशिश कर रही थी लेकिन वो अन्दर नहीं जा रहा था ...थोड़ी देर तक मिश्रायिन भा भी जूझती रहें फिर वो रुक गयीं और उन्होंने मंजू और मेरी भाभी की और देखा दोनों ने मुस्करा के सर हिलाया ....
मंजू ने थोड़ी सी अपनी कमर ऊपर उठायीमुस्करा के मिश्रायिन भाभी को देखा ...
उधर इत्ती देर से दबे दी के गोरे गुलाबी गालों को थोडा आराम मिला ...और उन्होंने हलके से अपने होंठ खोले
...मंजू की बुर अब दी के होंठो से कम से कम चार पांच इंच ऊपर तो रही ही होगी ...गहरी सांस ली ..और तभी मंजू ने अपनी कमर ऊँचे किये हुए ही ..अपने हाथ से दी के गाल कस के दबा दिए ..
दी कुछ समझें उसके पहले ही दी का मुंह एकदम चिड़िया की चोंच की तरह खुल गया था ...पूरी तरह से ...
और मंजू की ...छर्र छरर ..ररर ..रर ..सुनहरी पीली ..सुबह की धूप की तरह ..तेज धार ..
दो चार बूँद पहले ...फिर धार ..फिर और छर्र छरर ..ररर ..रर ..सुनहरी पीली शराब ...
अब तक मैंने गोल्डन शावर के बारे में पढ़ा था कुछ कहानियों में , एकाध वीडयो में भी ज़रा ज़रा सा लेकिन सामने देखने का मौका पहली बार मिला ....
दी ना सर हिला पा रहीं थी क्योंकि मंजू की जांघो ने उन्हें फिर दबोच लिया था ना मुंह बंद कर पा रही थी
...क्यंकि अब मंजू ने उनकी नाक भी बंद कर दी थी और सांस वो मुंह से ही ले पा रही थीं ...और बस एकाध पल के बाद फिर दुबारा मंजू ने ..दी का मुंह अपनी झांटो भरी बुर से सील कर दिया ...
और उसी के साथ ठीक उसी समय मेरी भाभी ने दी की क्लिट पे जोर से पिंच किया ...
लेकिन दी बिचारी चीख भी नहीं सकती थी उनका मुंह तो मंजू की बुर ने सील कर रखा था ...
और ठीक उसी समय ..
.मिश्रायिन भाभी ने अपनी मुट्ठी थोड़ी सी आगे खींची , और फिर पूरी ताकत से उसे अन्दर पेल दिया ....
दर्द से दी बिलबिला रही थी लेकिन वो रुकी नहीं ठेलती रहीं धकेलती रही ...गोल गोल घुमाती रहीं और एक दो मिनट के बाद जो वो तो नक़ल के साथ साथ आधी से ज्यादा मुट्ठी घुस गयी थी ..चौड़ा वाला हिस्सा तो पूरा घुस गया था ...
मिश्रायिन भाभी ने खुश हो के मंजू और मेरी भाभी को देखा ...बस उन तीनो ने हाई फाइव नहीं किया बस
जैसे कोई लड़का खुश हो की बस किसी तरह पटी कच्ची कली की चूत में उसने सुपाडा घुसा दिया हो और अब सोच रहा हो की अब ये साल्ली लाख चूतड पटके लंड बाहर नहीं आने वाला बिना चोदे ...बस उसी तरह ...
और उधर मंजू ...बार बार मुस्करा रही थी , दी के होंठे पे अपनी बुर रगड़ रही थी ...
भाभी दी की गोल गोल ठोस चून्चिया धीमे धीमे बहूत प्यार से सहला रही थीं ..
जैसे सुहागरात में एक बार कुँवारी दुल्हन की सील जबरन तोड़ देने के बाद मर्द , उसे प्यार से पुचकारता है मनाता है बस उसी तरह ...
और मिश्रायिन भाभी इन सबसे बेखबर ...गोल गोल हलके हलके अपनी मुट्ठी घुमा के अन्दर बाहर कर रही थी और जब एक बार फिर उन्होंने प्रेस किया तो आलमोस्ट पूरी मुट्ठी अन्दर ...
और उसका असर मेरे और गुड्डी के उपर भी पड़ा ..मैं इतने जोश में आगया की ...
मैंने कस के गुड्डी की किशोर चून्चिया दबोच ली और पूरे जोर जोर से हचक हचक के चोदने लगाइतना जोश उसे चोदने में मुझे कभी नहीं आया था ..एकदम बेरहमी से ..कभी निपल नीच लेता तो कभी गुड्डी के गाल काट लेता ...
डागी पोजीशन का फायदा उठा के लंड आलमोस्ट बाहर निकाल के ...हचक के पूरा अन्दर पेल रहा था , चूतडों पे हलके से चपत भी लगा रहा था , गांड के छेद में भी उंगली कर रहा था ...
और गुड्डी तो ये फिस्टिंग देख के मुझ से भी ज्यादा जोश में आ गयी थी ...मेरे धक्के के जवाब में मुझसे भी ज्यादा जोश से वो अपने चूतड मेरी ओर पुश करती ...और कस के मेरा मोटा लंड भींच लेती अपनी कसी चूत से निचोड़ लेती ..
और उन के साथ गालियों की बौछार बिना रुके ..
मेरे सारे मायके वालियों को ...
""तेरे सारे बहनों की बुर का भोंसडा बनवाउंगी ...इसी तरह तेरी दी की बुर की जो हालत हो रही है ना ...वो तो कुछ भी नहीं है जो तेरे माल कम बहन रंजी की होने वाली है ...पहले तुझसे चुदवाउंगी ...फिर तेरी बाकी सारी चचेरी, मौसेरी , फुफेरी बहनों को भी ..
बहनचोद तो तू है ही देख मेरी मम्मी तुझे और क्या क्या बनवाती है ..
तेरी सारी बहनों की फुद्दी उनकी गांड , तेरे साल्लो से मरवाऊं ... ""
और जिस तरह से गुड्डी गालियाँ दे रही थी ख़ास तौर से रंजी औ मेरी बहनों का नाम ले ले के गालियाँ दे रही थी ..बस मुझे लग रहा था की मैं रंजी को ही चोद रहा हूँ ..
उसके मोटे मोटे चूतड से मेरा लंड रगड़ रहा है ...और मेरी चुदाई की रफ्तार दुनी हो गयी जिस तरहसे गुड्डी रंजी और मेरी कुँवारी कजिन्स का नाम ले ले के गालियाँ दे रही थी , मुझे लग रहा था की जैसे मैं रंजी की ही कसी गांड मार रहा हूँ या अपनी किसी कजिन की कुँवारी कच्ची चूत चोद रहा हूँ
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फागुन के दिन चार--99
गतांक से आगे ...........
असली मुकाबला आगन में चल रहा था
एक कोई ससुराल से लौटी ननद ...और बुरी तरह घिरी ...
मेरी भाभी , मिश्रायिन भाभी और मंजू ...इन में से कोई एक ही काफी था ...लेकिन तीन तीन ...
बिचारी ...
मंजू ने पीछे से दोनों हाथ पकड़ लिए थे ..इसलिए वो चीखने चिल्लाने के अलावा कुछ वो कर ही नहीं सकती थी
...और भाभी मेरी बहुत प्यार से उनकी साडी उतार रही थीं आराम से ..चिढाते हुए ..
"अरे लल्ली ( ननदों का नाम नहीं लेते थे ...बिन्नो या लल्ली या ऐसे ही बुलाते थे ...हाँ गालियाँ जरुर खुल के दी जाती थीं ) , नंदोई क्या चोदते समय साडी पहने रहने देते थे ...
शादी के दो साल बाद आई हो जरा हाल तो देख ले ...और कही साडी फटा फटा गयी ....और उन्होंने एक झटके में साडी उतार दी और ...आँगन में एक कोने में फ़ेंक दी .
और उन की आवाज और चेहरे की एक झलक ने मेरी यादों का घूंघट उतार फेंका ...वही आवाज जिन्हें कुछ देर पहले भाभी और मिश्रायिन भाभी चिढा रही थी ...
दीदी मेरे मुंह से निकल गया ...और गुड्डी ने मुड़कर मुझे चिढाते हुए कहा ..अच्छा तेरी दीदी है ...तब तो आज इन की कस के ली जायेगी ...
पहले तू अपनी बचा मेरे मुंह से निकला और गुड्डी के दोनों मस्त उभार पकड़ के मैंने फिर पूरी तेजी से हचक के चोदना शुरू कर दिया
क्यों क्या दीदी की याद आ रही है जो इत्ते जोर से ...दीदी समझ के चोद रहे हो क्या ...गुड्डी ने मुझे फिर छेड़ा ...
और जवाब में मैंने सुपाडे तक लंड निकाल के एक धक्के में जोरदार शाट मारा और ...पूरा आठ इंच अन्दर ...
मुझे मल्टी टास्किंग की आदत है ..इसलिए इधर गुड्डी के साथ मैं देह की होली खेल रहा था ...नीचे होली खेल रही भाभियों ननदों का चक्षु चोदन भी ...
और वो और जोश बढ़ा रहा था ...गुड्डी की निगाह भी नीचे आँगन में लगी थी ...
और फिर ...अचानक मेरी निगाह फिर आँगन में पड़ी ...एक ब्लाउज नीचे से आके हमारे ऊपर गिरा ..
और नीचे देखते ही मुझे पता चल गया ...भाभी ने दीदी का ब्लाउज उतार के छत पे फ़ेंक दिया था और अब वो सिर्फ ब्रा ...पेटीकोट में रह गयी थीं
हाफ कप लेसी ब्रा में झांकते गोरे गोरे गुदाज उरोज ..लेकिन एक मंजू की पकड़ में आ गए ...
ब्रा में हाथ डाल के मेरी भाभी ने दूसरा दबोच लिया और दोनों साथ साथ जोर जोर से रगड़ने लगी ...और साथ में छेड़ छाड़ भी ..
" क्यों लाली ...ननदोई जी ऐसे ही दबाते है या और जोर से ..." भाभी ने पुछा
" अरे सिर्फ नंदोई क्यों देवर भी तो हैं ...क्यों ऐसी चुद्वासी भाभी को वो कहाँ छोड़ने वाले ..." निपल जोर से पिंच करते हुए मंजू ने बोला ...
तब तक मिश्रायिन भाभी भी मैदान में आ गयीं ...हाथ में पेंट ले के ...पेटीकोट में उन्होने पीछे से हाथ डाल के दी के भारी भारी चूतडों पे रंग लगाना शुरू कर दिया और पूछा ...
" क्यों लाली ...कितनो ने इस जोबन का रस लूटा था ...ससुराल में होली में ..पांच छ ..."
" अरे ...पांच छ ...से इसका क्या होगा ...इत्ते यार तो मेरी लल्ली के मायके में थे ...कम से कम सात आठ तो होंगे ही ...तभी तो इतन गद्दर जोबन होगया है मिजवा मिजवा के ..."
मेरी भाभी ने जोर से उनके बूब्स प्रेस करते हुए बोला ...लेकिन दी ने फिर न न में गर्द दन हिलाई ...तो मंजू चालु हो गयी ..
" अरे हमर छिनार ननद रानी अबही तोहरे मुंह में कौन मोट लंड घुसल बा ...खोल के बोल काहें ना देती ..ससुराल क पहली होली में ता नयी दुल्हिन से सब मजा लूटबे करे लें ..."
और दी ने मुंह खोल दिया ...पूरे एक दर्जन ने जोबन रस पान किया था उनका ...यहाँ तक की उनके ससुर ने भी ...
"अरे चलो देवर ना सही तो तोहार भौजाई है न इहाँ कौन कमी ना होई चूंची रगड़ाई में ..."
मेरी भाभी और मंजू एक साथ बोली ...और उस रगड़ाई में ...ब्रा फट के अलग ...और वो भी अगले पल हमारे पास छत पे आके गिरी
"अब तो खूब जम के रगड़ाई होगी तुम्हारी दी की ...तुमने तो कभी नहीं मसला था उनका "
गुड्डी की निगाहें भी मेरी साथ नीचे लगी थीं ...और अब उसकी मुझे छेड़ने की बारी थी ...
मैंने जवाब अपनी स्टाइल में दिया ...खूब कस के उसके किशोर उभरते , उभार रगड़ के , निपल पिंच कर के ...
" पहले तू अपनी बचा ले ...आज पता लगेगा ...और हर धक्का सीधे सुपाडा बाहर निकाल कर लंड एकदम बच्चे दानी तक ...
लेकिन साथ में याद भी आ रही थी दी की ...अपने किशोर दिनों की ...
मैं शायद आठवें या नौवें में था ...मेरी कोई सगी बहन तो थी नहीं ..इसलिए राखी के दिन मैं अक्सर गुस्सा हो जाता था ...
दी के मम्मी डैडी ट्रांसफर हो के उसी साल कालोनी में आये थे ...और हम लोगों से अच्छी फेमली फ्रेंडशिप हो गयी थी ..दी भी अपने मम्मी डैडी की अकेली थीं ...और वो भी उसी तरह राखी के दिन ...सारी लड़कियां कालोनी की तैयार होके सुबह सुबह ...
तो सारांश ये की ...दी हमारे घर आयीं और मेरे राखी बाँध दी गयी मैंने कई दिन तक वो राखी नहीं उतारी
...लेकिन अगले साल गड़बड़ हो गयी ...हम दोनों में झगडा हो गया ...
मेरा कहना था पहले राखी ...उनका कहना था पहले पैसा ...तय हुआ की वो राखी तो बाँध देंगी लेकिन बिना पैसे के मिठाई नहीं मिलेगी मुझे ...
खैर मैं बड़ा हुआ और वो ...और बड़ी हो गयीं ..(और उनका और बड़ा हो गया ) तब तक भाभी घर आ गयीं थी और अब वो दी का नाम लेके भी छेड़तीं ...आखिर उनकी ननद लगती थीं ...
लेकिन सबसे ज्यादा कालेज के लड़के ...मैं ग्यारहवें में आ गया था ...तब लड़कियों को देख के सिटी बजाना ...उन्हें घर तक पहुँचाना मेरे ढेर सारे दोस्तों ने शुरू कर दिया था ...और कई के तो एक्सपीरिएंस भी हो गए थे
.मोस्टली कजिन्स से ...
एक लड़के ने एक दिन मुझे उन्हें देखाते हुए कहा ...जानते हो ये कालेज की बेस्ट माल है है ...
दूसरा बोला एकदम गलत ...पूरे शहर की बेस्ट आइटम है लेकिन घास नहीं डालती ...एकदम जिल्ल्ला टाप ...
मुझे बुरा भी लगा और अच्छा भी ...
उन्हें मैंने अपना रिश्ता नहीं बताया ...
और दी थी भी ऐसी ...5 -7 की हाईट, फिगर भी भरपूर, उपर भी नीचे भी ...बड़ी बड़ी आँखे , हाई चीक बोन्स , खूब लम्बे हिप्स तक बाल ..लेकिन इन सबसे ज्यादा दो चीजें उनमें थीं ...
एक तो जो कहते हैं नमक ...वो ...कुछ ज्यादा ही था ...और दूसरा एट्टीट्युद ...छोटे शहर में लडकिया छिपती छिपाती निकलती , दुपट्टे में ढक के ...लेकिन दी ..टाप और जींस में उस समय भी ...
एक दिन मेरे साथ कुछ सीनियर लड़के थे उनमें कुछ दादा टाइप भी दी अपनी सहेलियों के साथ जा रही थीं और वो चालू हो गये
लड़की चले जब सड़कों पे आये कयामत लड़कों पे ...
मेरी तो हालत ख़राब ...कहीं दी ने घर पे बोल दिया ...खैर किसी तरह मैंने उन्हें चुप कराया ..
उसी साल ..राखी के दिन ...मैं ऊपर अपने कमरे में बैठ के पढ़ रहा था ...स्वेट शर्ट और शार्ट में ...उस समय वो बी ए वन में थी और मैं एलीव्न्थ में ..
और दी ...एकदम हाट लग रही थीं ...उन्होंने लेमन येलो टाईट टाप पहन पहन रखा था ...और जींस ...टाप
...जींस के अन्दर टक किये किये हुए थीं ... इसलिए उभार ..( बत्तीस सी से तो ज्यादा ही रहे होंगे ) एकदम और उछल के दिख रहे थे ..
पहले तो मुझे डांट पड़ी की राखी के दिन मैं तैयार हो के क्यों नहीं बैठा ...
फिर मेरी चोरी पकड़ी गयी ...
मेरी निगाह बार बार उनके उभार पे जा चिपकती थी ...और दी ने मेरा गाल पिंच कर दिया ...और राखी बाँध दी ...लेकिन अब की वो मिठाई नहीं लायी थी ...और हर बार की तरह पैसा पहले मुझे देना था ...
मैंने उन्हें चिढाया ...जब नौकरी करूँगा तो उनका सारा उधार चुकता कर दूंगा ...
लेकिन दी भी आज वो भी मूड में थी ...बोलीं चोर हो तुम मैं तलाशी लुंगी ...और उन्होने शार्ट में मेरी पाकेट में हाथ डाल दिया ...अब तो मेरी लग गयी ...
पाकेट पूरी तरह फटी थी ...और दूसरे नहाने के बाद मैंने शार्ट के नीचे ब्रीफ भी नही पहनी थी ...
दी के उभार को देख के तम्बू पूरा तना था ..
और वही हुआ जो मैं डर रहा था ...उन का हाथ जेब के अंदर होता हुआ सीधे वहां मेरे 'बम्बू ' से लग गया ...
अब तो मैं डरा की ...हुयी शिकायत ...
लेकिन शैतानी से वो हलके से मुस्कारायीं ...
और उनके हाथ ने मेरे 'उसे' पकड़ लिया ..एकदम कड़ा था ...और कड़ा हो गया ..
एक दो पल और ऐसे रखने के बाद उन्होंने उसे हलके से आगे पीछे किया और फिर एक झटके में ऐसा खींचा की सुपाडे का चमडा उतर गया ...पहली बार किसी लड़की का हाथ पड़ा था वहां वो जोर से खींचे रही ...फिर अंगूठे से उन्होंने सुपाडे को हल्के से सहला दिया ...मेरी हालत खराब हो रही थी ....उ
नकी आँख मेरे चेहरे पे टिकी थी ...और जब उन्होंने हाथ बाहर निकाला तो शरारत से बोलीं ...
" बोल मिठाई चाहिये ."
मैं भी ढीठ हो गया था मुस्करा के बोला नेकी और पूछ पूछ ...मैं अब बेशर्मी से उनके उभारों को देख रहा था ...
दी झुकीं ...दोनों हाथ से मेरे सर को पकड़ा और जोर से मेरे होंठो पे किस ले ली . लेकिन उनके होंठ अलग नहीं हुए ..उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठ ले के थोड़ी देर चूसा ...फिर छोड़ दिया ..और आँख नचा के बोला अच्छी लगी मिठाई ...
मेरी आँखे अभी भी उनके उभारों की सहला रही थी मैं बोला ..बहोत मीठी ...लेकिन दो और चाहिए
लालची वो गुस्से का नाटक करती बोलीं ...फिर मेरे हाथ खींच के अपने उभारों पे रख दिया ...
एकदम रूई के फाहे ...जैसे आसमान से किसी ने बादल नोच कर उनकी टाप में डाल दिए हों ...
लेकिन तब तक भाभी के कदमों की आहात सुनाई पड़ी और हम अलग हो गए .
भाभी ने आके पूछा क्या हुआ तो दी एकदम मेरी शिकायत ले के चालु ...
बिना पैसे दिए मिठाई मांग रहा है ...भाभी ने मेरे कान पकडे और बोली ...इसे बेईमानी की आदत है नीचे चलो पहले अपनी दी को पैसा दो फिर मिठाई मिलेगी
वही हुआ ...लेकिन आपने हाथ से गुलाब जामुन खिलाते हुए वो बोलीं ...मिठाई कैसी है ...
भाभी आस पास नहीं थी ...मैं मुस्करा के बोला ..ऊपर आप ने जो खिलाई थी वो ज्यादा मीठी थी ..
नदीदे ..वो शरारत से मुझे देखते बोलीं और बाकी चाशनी मेरे गाल पे लपेट दी और कहा ज्यादा लालच अच्छी बात नहीं ..
अगली राखी में तो दी ने ...मजे कर दिए ...
उस दिन वो साडी पहन केआई थीं ...और बहुत ही लो कट ब्लाउज ...होंठों की मिठाई तो मिली ही ...चोली के अन्दर की हवा मिठाई भी मिल गयी ...ज्यादा नहीं सिर्फ किस्सी ...वो भी चोली के ऊपर से ...लेकिन बारहवे के स्टूडेंट के लिए वही बहुत था ...
शायद आगे कुछ होता लेकिन मैं इन्जीनरिन्ग की पढाई के लिए बाहर चला गया ...
हाँ उनकी शादी में मैं सिर्फ आया ही नहीं बल्कि भाई की सब रस्में भी मैंने पूरी की ...
दी के हसबेंड ...जीजू ने मुझे छेड़ा ...हे मेरे माल पे लाइन मत मारना ...
शादी में दी की होने वाली ननदे भी काफी आयीं थी ...
उनकी ओर इशारा कर के मैंने कहा ...
जीजू अगर आप इन सब माल की बात कर रहे हैं और इसे अपना माल कह रहे हैं ...जो आप साथ लाये हैं ...उनकी तो लाइन क्या बहुत कुछ मारने का प्लान है ...
दी जोर से मुस्कारायी और जीजू से बोलीं ...
मेरा भाई है ...मजाक नहीं ... बहनों को सम्हाल के रखियेगा ...
उस के बाद अब देखा था मैंने उन्हें शादी के करीब पौने दो साल हो गए थे ...पहली होली तो ससुराल में होती है ...तो उस बार वो वहीँ थीं और इस बार मायके आई है ...
कुछ ज्यादा ही गदरा गयीं हैं ...और उभार भी पहले से ज्यादा ...
तभी कुछ हुआ और गुड्डी ने मुझे इशारे से नीचे देखने को कहा ...
दी गिरी पड़ी थी ...और उनके साथ मेरी भाभी ...
हुआ ये था की मंजू और मेरी भाभी दी की चूंची पे रंग लगाने और उस की रगड़ाई में लगी थी ...
ब्रा तो कब की फाड़ के छत पे फ़ेंक दी गयी थी ...और मिश्रायिन भाभी रंग की बाल्टी ले सीधे दी के 'सेंटर ' पे रंग फ़ेंक रही थी ...
दी ने मौके का फायदा उठा के भागने की कोशिश की ...और आँगन में पड़े रंग पे फिसल के ...
और साथ में मेरी भाभी भी ...लेकिन मंजू और मिशार्यिन भाभी ने दोनों को पकड लिया ...
और चोट किसी को नहीं लगी ...हाँ मौके का फायदा उठा के ...मंजू ने दी का पेटीकोट भी खिंच के उतार दिया और अब वो सिर्फ ...पैंटी में थीं ...
लेकिन अब हालत भाभियों की भी वही थी ...ननदों के हमले में ...अब किसी की भी ब्लाउज या साडी नहीं बची थी सब आँगन में छितरी पड़ी थीं ...सब ब्रा और साए में ....धुआं धार रंगों की और ...गालियों की बारिश हो रही थी ..
.टाप और स्कर्ट वाली सब टाप लेस हो गयीं थीं और जिस की ब्रा बची भी थीं उस के अन्दर हाथ डाल के भाभिया जम के रगड़ रही थी ..
.
मैं और गुड्डी दोनों आँगन में देख रहे थे ...
मंजू ने फिर गिरी हुयी दी की चून्चिया ...जिन पे न जाने कितने रंग लगे थे ...जोर जोर से रगडनी शुरु कर दी थीं ...
मिश्रायिन भाभी ने दोनों हाथ गीली हुयी पैंटी में लगाया ...और पैंटी फट के दो टुकडे में हो गयी ..
और मेरी भाभी ...एक पूरी बाल्टी लाल रंग की भर के ले आयीं ...मिश्रायिन भाभी ने पूरे जोर से दी की चिकनी जांघे फैला रखी थी ...भाभी ने पूरी बाल्टी का रंग धीरे धीरे हुए दी की खुली चूत पे उंड़ेलना शुरू कर दिया ...और साथ साथ में वो बोल रही थीं ...
हे चूत रानी तुम्हारी गर्मी शांत हो , प्यास बुझाय ..एही बुर में में हमारे सारे देवर समाय, देवर और सैयां के सब साले समाय ..अपने मायके सब पुराने यारों के लंड की नए यारों के लंड की प्यास बुझाओ ...
बिचारी दी नीचे पड़ी छटपटा रही थी , चूतड पटक रही थीं ...लेकिन मंजू और मिश्रायिन भाभी की पकड़ से कहाँ छूटने वाली ...
पूरी बाल्टी का रंग सीधे सेंटर पे ...
गनीमत है तब तक ननदों की टोली की चार पांच लड़कियां आयीं एक साथ ...और भाभी अब पकड़ी गयीं और उनकी भी दुरगत शुरू हो गयी ...
लेकिन दी के लिए मंजू या मिश्रायिन भौजी अकेले बहुत थीं और यहाँ तो ये दोनों ...
उन्होंने मंजू को कुछ इशारा किया और मंजू ने अपना पेटीकोट कमर तक लपेट लिया ( वो तो पैंटी वाली थी नहीं ...) और अब सीधे दी के मुंह के ऊपर ...वो छटपटाती रहीं लेकिन अपनी झांटो भरी बुर मंजू उनके होंठो पे रगड़ रही थी और बोल रही थी ...
" अरे होली में जबतक , भौजाई ननद को बुर ना चटावे ...तबतक होली पूरी नहीं होती ...."
दी लाख सर पटक रही थी , मुंह नहीं खोल रही थी ...लेकिन मंजू के पास सब का जवाब था ..उसने अपनी मोटी ताकतवर जांघो से दी के सर को कस के दबोच लिया और फिर एक हाथ से उनकी नाक पकड के बंद कर दी ...
" करा अब छिनारपना ...साल्ल्ली भाई चोदी ...सांस लेवे के अब मुंह खोलोगी की नहीं ..."
मंजू ने अपने चूतड थोड़े उठा रखे थे ..और जैसे ही दी ने सांस लेने के लिए मुंह खोला ...मंजू ने अपनी बुर सीधे वहीँ लगा के ...दी की नाक छोड़ दी और बोला
" चलो . ससुरारी में होली में केकर केकर बुर चाटे चूसे होगी और इहाँ मायके में आयके ..अगर एक मिनट भी बुर की चुसाई चटाई हलकी हुयी टी फिर नाक बंद ..."
बिचारी दी ...उन्होंने मंजू की बुर जोर जोर से चाटनी शुरू कर दी .
मिश्राइन भाभी ने खुश हो के मंजू की ओर देखा ...और उन्होंने दी की अब खुली चूत का मोर्चा सम्हाला ...
" अरे छिनारो ई मत कहना की खाली तुन्ही भौजाई के चूत को मजा दे रही और तोहरी बुरिया के आग को कोई पूछ नहीं रहा ...मैं हूँ न ...भूल जाओगी ससुराल की होली ...आज तोहरे चूत की ऐसन आग बुझाउंगी , जितना तो ना तो तोहरे बचपन के छैला बुझाये होंगे ना ससुरारी में तोहार मर्द , देवर और ननदोई ..."
मिश्रायिन भाभी बोलीं और दी की चिकनी रेशमी गदराई जांघो को पहले खूब प्यार से सहलाया और फिर जोर से फैला दिया।
थोड़ी देर तक तो वो हलके हलके दी की मखमली चूत सहलाती रहीं , फिर अंगूठे और तर्जनी के बीच उनके चूत की पुत्तियों को पकड के रगड़ना शुरू कर दिया , एक उंगली चूत के अन्दर घुस गयी ..सटा सट सटा सट ....और दी जोर से गिनगिनाने लगीं ...लेकिन ये तो अभी शुरुआत थीं .
मिश्रायिन भाभी ने अब पूरी हथेली का जोर दी की फैली खुली चूत पे लगा दिया। दी की चूत एक दम मक्खन मलाई थी , एक भी झांट नहीं जैसे वैक्सिंग करा के आयीं हों .मिश्रायिन भाभी की हथेली का निचला , कलाई की ओंर का हिस्सा दी के क्लिट और आस पास रगड़ रहा था और उंगलिया दोनों पुत्तियों को ...
यही नहीं दूसरे हाथ से भी अब वो जोर से कभी दी की क्लिट रगड़ती , तो कभी एक चूंची मसलती , निपल पिंच करती। दी बार बार झड़ने के कगार पे पहुँच जातीं ...
तो मिश्रायिन भाभी अपना टेम्पो थोडा कम कर देतीं ...दी अपने मोटे मोटे चूतड उचका रही थीं , मचल रही थीं ...लेकिन मिश्रायिन भाभी उन्हें झड़ने नहीं दे रही थीं .
दी की दूसरी गद्दर चूंची , मंजू के कब्जे में थी।
कोई मर्द क्या मसलेगा ...उस बेरहमी से वो रगड़ रही थी . उस की कमर भी फिरकी की तरह गोल गोल घूम रही थी और वो जोर जोर से अपनी झांटो भरी बुर दी के खुले होंठो के बीच रगड़ रही थी और साथ में अनवरत गालियाँ ...
" बुर चोद्दो ...तेरी सारे खानदान की गांड मारू ...तोहार छिनार ...इतना मस्त माल कहाँ से पैदा की ...तोहरे मामा से चोद्वाये के का ...बोल भाई चोदी ....तोहरी बुर में हमारी ससुराल के सब लंड जायं ...बुर चुस्सायी कहाँ से सीखी ..मस्त चूसती हो
अगर रुकी ना तो ऐसा गांड मारूंगी तेरी , तेरे सारे खानदान की , गदहा चोदी , तोहरे चूत में इतना लंड घुसेंगे की ...कालीन गंज के रंडियों को मात कर दोगी , रंडी की जनी , हरामन की ...चूस और जोर से चूस ...अभी गांड भी चटवाउंगी।"
मिश्रायिन भाभी और मंजू बीच में एक दूसरे को देख के मुस्करा रही थीं .
मिश्रायिन भाभी ने गियर बदला और दी की चूत पे हमला तेज किया .
अब उनकी दो उंगलिया दी की चूत में तेजी से गोल गोल घूम रही थीं ..और अंगूठा क्लिट पे ..हथेली का निचला हिस्सा भी चूत रगड़ रहा था ...और दूसरा हाथ , दी की चूंची पे ...एक चूंची मंजू मसल रही थी तो दूसरी वो
..और दोनों काम प्रवीण महिलाओं के बीच मुकाबला चल रहा था की ..दोनों मैं कौन ज्यादा एक्सपर्ट है चूंची मर्दन में
दी अब खूब जोर से चूतड उचका रही थीं सिसक रही थी ...और अबकी वो जब झड़ने के कगार पे पहुंची तो मिश्रायिन भाभी रुकी नहीं बल्कि झुक के उनकी क्लिट अपने होंठो के बीच दबा लिया और और से चूसने लगीं ...दी ..झड रही थीं ...जोर से झड रही थीं लेकिन मिश्रायिन भाभी रुकी नहीं ..
हाँ एकाध पल के लिए कुछ देर के बाद उनकी रफ्तार धीमी हुयी ...लेकिन फिर वही ...तीन चार मिनट के अन्दर दी दुबारा किनारे पे थीं और अबकी मिश्रायिन भाभी ने अंगूठे और तरजनी के बीच क्लिट मसलना शुरू कर दिया और मंजू को इशारा किया जिसने खूब जोर से दी का निपल पिंच कर दिया ..
दी के दोनों निपल एकदम खड़े थे जि ससे लग रहा था की उन्हें कितनी मस्ती छाई है ...
कुछ ही देर में दी तीन चार बार झड गयी ..और अब उनकी चूत से ख्होब पानी बाहर आ रहा था ..उसका फायदा उठा के मिश्रायिन भाभी ने अपनी तीन उंगली पेल दी ..एकदम जड़ तक ...
दी के चेहरे पे दर्द उभर आया ..लेकिन खूब तेजी से मिश्रायिन भाभी ने उसे अन्दर बाहर करना शुरू किया और दूसरे हाथ से जोर जोर से क्लिट मसलना शुरू किया ..दर्द सिसकियों में बदल गया और दी एक बार फिर से झडना शुरू कर दिया ...
थोड़ी देर में वो थेथर हो गयीं बुर पूरी तरह रस से लिपटी ..
एक बार झड़ना बंद नहीं होता की दूसरी बार शुरू हो जाता ..लेकिन मिश्रायिन भाभी और मंजू की जुगलबंदी रुकी नहीं ...मंजू अपनी बुर से दी के मुंह को सील किये हुए थी इसलिए बिचारी चीख चिल्ला भी नहीं सकती
तब तक मेरी भाभी , ननदों के झुरमुट से किसी तरह से छूट के आ गयी लेकिन उनकी ब्रा आलमोस्ट खेत रही
..किसी तरह उनके उभार को बस कवर कर रही थी ..और उनके आँगन में पहुंचते ही मिश्रायिन भाभी के चेहरे पे मुस्कान नाच उठी ..उनोने कुछ हाथ से इशारा किया और मेरी भाभी किचेन की और मुड पड़ी ..
और वो जब बाहर आयीं तो उनके हाथ में नारियल के तेल की बोतल थी ...जो उन्होंने मिश्रायिन भाभी को दे दी ...और दी के जांघो के बीच जो मोर्चा अब तक मिश्रायिन भाभी ने सम्हाल रखा था , खुद सम्हाल लिया . मंजु से भी उन्होंने कुछ इशारा किया ...
फर्क सिर्फ इतना था की पहले दी की चूत में उंगली थी और अब भाभी के होंठ ...जोर जोर से किस कर रहे, चाट रहे , कस के चूस रहे ...
लेकिन मैं मिश्रायिन भाभी को देख के चकित था ...पहले उन्होंने अपनी सब चूडिया दाए हाथ से निकालीं , फिर एक मोटा भारी कंगन था , वो उतारा ...और फिर दो अंगूठियाँ उन्होंने पहन रखी थी वो भी निकाल दी ..
मेरी मेरी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था .
अब भाभी जो नारियल का तेल लायीं थी वो उन्होंने अपने बाएं हाथ में लिया और फिर उस से दायें हाथ में तेल की मालिश शुरू कर दी . लेकिन इतना भी जैसे काफी नहीं हो ...
दायें हाथ की सारी उँगलियाँ उन्होंने जोड़ी ...और उपर से सीधे बोतल से तेल गिराना शुरू कर दिया ..अब दायाँ हाथ कलाई तक ...बल्कि आलमोस्ट कुहनी तक नारियल के तेल में डूब गया था ..बारी बारी से भाभी और मंजू , उन्हें देखतीं और दोनों शरारत से मुस्करातीं ...
दी के देखने का सवाल ही नहीं था की क्योंकि मंजू उनके ऊपर चढ़ी हुयी थीं और कभी अपनी बुर ...और कभी गांड मुंह पे रगड़ रही थी , उनके दोनों हाथ भी उसने पकड़ रखे थे ..
मेरी भाभी भी ...उनका सर दी की दोनी खूब चिकनी गोरी, रेशमी जवान जांघो के बीच झुक हुआ था और अपने तगड़े हाथों से उन्होंने दी की जांघो को बुरी तरह फैला रखा था ..
और भाभी की जीभ जीभ दी के निचले होंठो पे लप लप हो रही थी। उन्होंने थोड़ी देर जोर जोर से चाटने के बाद दी की चूत को अपने दोनों होंठो के बीच भींच लिया और जोर जोर से रस लेने लगीं भाभी भी कम कन्या प्रेम में प्रवीण नहीं लग रही थीं
..जैसे कोई बनारसी लंगड़े आम की फांक मुंह लगा लगा के चाटे चूसे
वो उसे उसी तरह चाट रही थीं , जोर जोर से चूस रही थीं ...
उनके गोर सलोने होली के रंग गुलाल से लिपटे गालों पे अब दी का चूत रस चमक रहा था ...फिर उन्होंने आराम से अपनी दोनों उँगलियों से दी की चूत के दोनों फांक फैलाए और उसके बीच अपनी चूत , जैसे कोई मर्द लंड ठेलता है ठेल दिया ...
भाभी की ठुड्डी अब दी की चूत के बेस पे और लम्बी सुतवां नाक , दी की जोश में आई उभरी बौराई क्लिट पे बार बार रगड़ खा रही थी .
भाभी की इस चुसाई और चटाई का नतीजा वही हुआ जो होना था।
दी थोड़ी देर में बार बार आँगन में , रंगों से लथपथ अपने भारी भारी चूतड पटक रही थीं , मचल रही थीं , उछाल रही थी . लेकिन मेरी भाभी भी मिश्राइयिन भाभी से कम नहीं थी की अगर जिस ननद पे उन्होंने घुड़सवारी कर ली उसे , मंजिल तक पहुंचा के ही छोड़ती थीं , वो लाख अपने सवार को हटाने की, पटकने की कोशिश करे ..
और हुआ वही ..
दी थोड़ी देर में ही जोर जोर से झड़ने लगीं . लेकिन भाभी रुकी नहीं चूत चूसती रहीं जुबान से उसे चोदती रहीं, कोई मर्द क्या चोदेगा जिस जोश से भाभी चोद रही थीं उर थोड़ी देर में दी फिर झड़ने लगीं ...
इस तरह तीन चार बार दी को झाड़ने के बाद भाभी ने अब सीधे उनकी क्लिट चूसनी शुरू की ..दी चूत रस में लथपथ थी ..वो बार बार चूतड पटक रही थीं लेकीन भाभी रुकने का नाम नहीं ले रही थीं ...
उधर मिश्रायिन भाभी ने अपने तेल में डूबी कलाई में एक बार फिर नारियल का तेल लगाया और भाभी को हटा के दी की जांघो के बीच आगयीं . दी की जांघे भाभी ने जोर से फैला रखी थीं
अब दी की चूत , मिश्रायिन भाभी के कब्जे में थी और नारियल के तेल की बोतल मेरी भाभी के कब्जे में .
पहले मिश्रायिन भाभी ने अपनी तेल में डूबी हथेली से दी की चूत रस में डूबी , बुरी तरह , पनियाई चूत को जोर जोर से रगडा ...और सीधा असर दी पे पड़ा .
अब वो अपने काबू में नहीं थीं , उनके चूतड फिर आँगन में रगड़ने लगे ...थोड़ी देर की रगडा रगड़ी के बाद अब मिश्रायिन भाभी ने अपने दोनों हाथों के अंगूठों को दी की चूत में घुसेड कर पूरी ताकत से फैला दिया
और अब मेरी भाभी मैदान में आ गयी . उन्होंने तेल की बोतल सीधे दी की चूत में घुसेड दी और मिश्रायिन भाभी की ओर देख के मुस्कराया ...
और भाभी का ग्रीन सिग्नल मिलते ही एक हाथ लगा दी के चूतड के नीचे लगा के उन्होंने उचका दिया ..और तेल की बोतल उलट दी ..अब तेल सीधे ..दी की बुर में ...आधा बोतल तेल तो वो पी ही गयी होगी ...और इतने पे भी उन्होंने बस नहीं किया ...
फिर बोतल बाहर निकाल कर उनकी चूत की पुत्तियों पे क्लिट पे हर जगह तेल गिराया ..और अब दी की चूत भी उसी तरह तेल में चुपड गयी थी , जिस तरह मिश्रायिन भाभी का दायाँ हाथ ...
मेरी समझ में अभी भी कुछ नही आ रहा था ...
गुड्डी की आंखे भी मेरी तरह नीचे चिपकी थीं ...लेकिन वो लगता है की कुछ कुछ समझ रही थी , उसने मुझे छेड़ा
देखा ...पहले तेरी दी की गीली हुयी , खूब पनियाई ...और अब तेलियाई गयीं ...फिर रगड़ी जाएँगी ..उसके बाद देखना ...तेरी सारी बहनों की ऐसी ही हालत होगी …
गुड्डी की छेड़खानी से मैं वैसे तो निबट नहीं सकता था ...
बस , एक रास्ता था मेरे पास और वही किया मैंने . उसकी दोनों क्सिहोर उभार पकड के सुपाडे तक लंड निकाल के , एक झटके में पूरा आठ इंच अन्दर ठेल दिया ..और वो जोर से चीखी ...
लेकिन नीचे आँगन में जो हंगामा चल रहा था होली का उसमें नक्कार खाने में इस तूती की आवाज किसे सुनाई देती ...
और उधर एक बार में ही मिश्रायिन भाभी ने तीन उंगलिया हचाक से , एक झटके में दी की बुर में पेल दीं , पूरे जड़ तक। मेरी भाभी अब पूरी ताकत से दी की दोनों जांघे फैलाएं हुयें थीं ...
मेरी समझ में अभी भी कुछ नहीं आया ...
दी की चूत में तो मिश्रायिन भाभी ने तीन उंगलिया पहले भी डाली थीं ..जब वह अच्छी तरह पनिया गयी थी
...लेकिन पिक्चर अगले पल साफ हो गयी ...जब मिश्रायिन भाभी ने तीन के साथ चौथी ऊँगली भी लेकिन उन्ही तीन उँगलियों के ऊपर रख के डाल के , घुसेड दी और अब कुछ देर तक कभीउसे क्लाक वाइज घुमातीं तो कभी एंटी क्लाक वाइज ...और धीरे धीरे चारों उँगलियाँ दी की बुर के अन्दर समाती जा रही थीं ...
लेकिन दो चार मिनट के बाद मिश्रायिन भाभी ने , अपना हाथ थोडा सा पीछे खींचा , और अब अंगूठा भी
...जैसे चूड़ी पहनाने वालियां , हाथ को मोड़ के सारी अंगुलियाँ समेट के , अंगूठे के साथ , ख़ास तौर से कुँवारी लड़कियों की , मजाक करते चिढाते , पहना देती है , बस मिश्रायिन भाभी का हाथ एक दम वैसा ही हो गया था ...लेकिन उंगलिया तो घुस गयी थी , आगे नहीं सरक पा रहा था ...
मेरी भाभी अब बहोत ध्यान से कभी दी की बहुत फैली चूत पे धीरे धीरे तेल चुआ रहीं थीं तो कभी मिश्रायिन भाभी की अन्दर घुसती मुट्ठी पे ...
मैं सांस रोके बस वही देख रहा था ...
और गुड्डी भी ..
मंजू जो दी के मुंह को अपने मोटे मोटे चूतडों से सील किये हुए थी वो भी ..
यहाँ तक की आँगन और बरामदे में चल रही होली भी थोड़ी धीमी हो गयीं थी . कुँवारी कच्ची कली ऐसी ननदों को दबोचे भाभियों की आँखे भी आँगन की ओर बार बार मुड रही थी ...
मिश्रायिन भाभी इन सबसे बेखबर , अपनी मुट्ठी ..धीमे धीमे ...हलके हलके गोल गोल घुमा रही थी जैसे कोई चूड़ी वाला ढक्कन हो और मेरी भाभी भी ...तेल की बूँद बूँद चुआ रही थीं ...
सूत सूत मुठ्ठी अन्दर घुस रही थी ...लेकिन थोड़ी देर बाद वो अटक गयी ..मुट्ठी के नकल्स ...मुड़ी हुयी अँगुलियों की हड्डियों वाला जो हिस्सा होता है ..बस वो ..
मिश्रायिन भाभी लाख कोशिश कर रही थी लेकिन वो अन्दर नहीं जा रहा था ...थोड़ी देर तक मिश्रायिन भा भी जूझती रहें फिर वो रुक गयीं और उन्होंने मंजू और मेरी भाभी की और देखा दोनों ने मुस्करा के सर हिलाया ....
मंजू ने थोड़ी सी अपनी कमर ऊपर उठायीमुस्करा के मिश्रायिन भाभी को देखा ...
उधर इत्ती देर से दबे दी के गोरे गुलाबी गालों को थोडा आराम मिला ...और उन्होंने हलके से अपने होंठ खोले
...मंजू की बुर अब दी के होंठो से कम से कम चार पांच इंच ऊपर तो रही ही होगी ...गहरी सांस ली ..और तभी मंजू ने अपनी कमर ऊँचे किये हुए ही ..अपने हाथ से दी के गाल कस के दबा दिए ..
दी कुछ समझें उसके पहले ही दी का मुंह एकदम चिड़िया की चोंच की तरह खुल गया था ...पूरी तरह से ...
और मंजू की ...छर्र छरर ..ररर ..रर ..सुनहरी पीली ..सुबह की धूप की तरह ..तेज धार ..
दो चार बूँद पहले ...फिर धार ..फिर और छर्र छरर ..ररर ..रर ..सुनहरी पीली शराब ...
अब तक मैंने गोल्डन शावर के बारे में पढ़ा था कुछ कहानियों में , एकाध वीडयो में भी ज़रा ज़रा सा लेकिन सामने देखने का मौका पहली बार मिला ....
दी ना सर हिला पा रहीं थी क्योंकि मंजू की जांघो ने उन्हें फिर दबोच लिया था ना मुंह बंद कर पा रही थी
...क्यंकि अब मंजू ने उनकी नाक भी बंद कर दी थी और सांस वो मुंह से ही ले पा रही थीं ...और बस एकाध पल के बाद फिर दुबारा मंजू ने ..दी का मुंह अपनी झांटो भरी बुर से सील कर दिया ...
और उसी के साथ ठीक उसी समय मेरी भाभी ने दी की क्लिट पे जोर से पिंच किया ...
लेकिन दी बिचारी चीख भी नहीं सकती थी उनका मुंह तो मंजू की बुर ने सील कर रखा था ...
और ठीक उसी समय ..
.मिश्रायिन भाभी ने अपनी मुट्ठी थोड़ी सी आगे खींची , और फिर पूरी ताकत से उसे अन्दर पेल दिया ....
दर्द से दी बिलबिला रही थी लेकिन वो रुकी नहीं ठेलती रहीं धकेलती रही ...गोल गोल घुमाती रहीं और एक दो मिनट के बाद जो वो तो नक़ल के साथ साथ आधी से ज्यादा मुट्ठी घुस गयी थी ..चौड़ा वाला हिस्सा तो पूरा घुस गया था ...
मिश्रायिन भाभी ने खुश हो के मंजू और मेरी भाभी को देखा ...बस उन तीनो ने हाई फाइव नहीं किया बस
जैसे कोई लड़का खुश हो की बस किसी तरह पटी कच्ची कली की चूत में उसने सुपाडा घुसा दिया हो और अब सोच रहा हो की अब ये साल्ली लाख चूतड पटके लंड बाहर नहीं आने वाला बिना चोदे ...बस उसी तरह ...
और उधर मंजू ...बार बार मुस्करा रही थी , दी के होंठे पे अपनी बुर रगड़ रही थी ...
भाभी दी की गोल गोल ठोस चून्चिया धीमे धीमे बहूत प्यार से सहला रही थीं ..
जैसे सुहागरात में एक बार कुँवारी दुल्हन की सील जबरन तोड़ देने के बाद मर्द , उसे प्यार से पुचकारता है मनाता है बस उसी तरह ...
और मिश्रायिन भाभी इन सबसे बेखबर ...गोल गोल हलके हलके अपनी मुट्ठी घुमा के अन्दर बाहर कर रही थी और जब एक बार फिर उन्होंने प्रेस किया तो आलमोस्ट पूरी मुट्ठी अन्दर ...
और उसका असर मेरे और गुड्डी के उपर भी पड़ा ..मैं इतने जोश में आगया की ...
मैंने कस के गुड्डी की किशोर चून्चिया दबोच ली और पूरे जोर जोर से हचक हचक के चोदने लगाइतना जोश उसे चोदने में मुझे कभी नहीं आया था ..एकदम बेरहमी से ..कभी निपल नीच लेता तो कभी गुड्डी के गाल काट लेता ...
डागी पोजीशन का फायदा उठा के लंड आलमोस्ट बाहर निकाल के ...हचक के पूरा अन्दर पेल रहा था , चूतडों पे हलके से चपत भी लगा रहा था , गांड के छेद में भी उंगली कर रहा था ...
और गुड्डी तो ये फिस्टिंग देख के मुझ से भी ज्यादा जोश में आ गयी थी ...मेरे धक्के के जवाब में मुझसे भी ज्यादा जोश से वो अपने चूतड मेरी ओर पुश करती ...और कस के मेरा मोटा लंड भींच लेती अपनी कसी चूत से निचोड़ लेती ..
और उन के साथ गालियों की बौछार बिना रुके ..
मेरे सारे मायके वालियों को ...
""तेरे सारे बहनों की बुर का भोंसडा बनवाउंगी ...इसी तरह तेरी दी की बुर की जो हालत हो रही है ना ...वो तो कुछ भी नहीं है जो तेरे माल कम बहन रंजी की होने वाली है ...पहले तुझसे चुदवाउंगी ...फिर तेरी बाकी सारी चचेरी, मौसेरी , फुफेरी बहनों को भी ..
बहनचोद तो तू है ही देख मेरी मम्मी तुझे और क्या क्या बनवाती है ..
तेरी सारी बहनों की फुद्दी उनकी गांड , तेरे साल्लो से मरवाऊं ... ""
और जिस तरह से गुड्डी गालियाँ दे रही थी ख़ास तौर से रंजी औ मेरी बहनों का नाम ले ले के गालियाँ दे रही थी ..बस मुझे लग रहा था की मैं रंजी को ही चोद रहा हूँ ..
उसके मोटे मोटे चूतड से मेरा लंड रगड़ रहा है ...और मेरी चुदाई की रफ्तार दुनी हो गयी जिस तरहसे गुड्डी रंजी और मेरी कुँवारी कजिन्स का नाम ले ले के गालियाँ दे रही थी , मुझे लग रहा था की जैसे मैं रंजी की ही कसी गांड मार रहा हूँ या अपनी किसी कजिन की कुँवारी कच्ची चूत चोद रहा हूँ
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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