Monday, April 28, 2014

बदनाम रिश्ते--राजन के कारनामे--17

FUN-MAZA-MASTI

  बदनाम रिश्ते--राजन के कारनामे--17


 ओह हो .....इलाज के लिए तो आप इंजेक्शन लगायेंगे.......मै भी कितनी बुद्धू हूँ ......इंजेक्शन तो पीछे लगाया जाता है ....ठहरिये पापा........मै पलट जाती हूँ ....ये कहते हुए मै पलट गयी .....मैंने अपना चेहरा बिस्तर के गद्दे में धंसा दिया ........मेरी नंगी गांड इंजेक्शन के प्रत्याशा में कड़ी हो गयी ........



पापा के चौकी से उठने की आवाज आयी ........


मै समझ गयी की पापा अब मेरे पीछे कहीं खड़े होकर मेरी नंगी गांड और चुलबुलाती चूत को गौर से देख रहे हैं ............


मेरे अन्दर कुछ कुछ हो रहा था ............ ..........मैंने अपनी गांड ऊपर उठा दी ताकि पापा को मेरी मुनिया की भी अच्छी झलक मिले ........


फिर मैंने अपने कमर को आगे पीछे हिलाते हुए बोली ..........पापा , लगाइये न इंजेक्शन .....मै इन्तजार कर रही हूँ .......



सोनी बेटा.....पापा मेरी कमर के पास बैठते हुए काफी देर बाद आखिरकार बोले .......आपको काफी दर्द होगा


......ये कहते हुए उन्होंने अपने हाथ से मेरी जांघ को पकड़ा ...........मेरे सारे बदन में एक करंट दौड़ा ......मेरे अन्दर चीटियाँ रेंगने लगी



पापा अब जांघो के अंदरूनी मांसल हिस्से को सहला रहे थे ....साथ में अपनी उँगलियाँ ऊपर ले जाते हुए मेरी मुनिया से टच कर रहे थे ......फिर एकाएक उन्होंने अपनी पूरी हथेली से मेरी मुनिया को सहलाने लगे ..........



आह्ह्ह्ह्ह्ह.......पापा ................ये क्या कर रहे है ..........मेरी सु -सु वाली को क्यों सहला रहे है ......



सोनी बेटा ...........उसी में तो इंजेक्शन देंगे ..........इसलिए उसे इंजेक्शन के लिए तैयार कर रहे है


..........ये कहते हुए पापा ने अपनी एक ऊँगली मेरी मुनिया में पेल दिया ........


आउच............मेरे मुंह से दर्द भरी सिसकी निकली ........हांलाकि मै कोरी नहीं थी फिर भी काफी दिनों बाद किसी मर्द की उँगलियों ने मेरी मुनिया को दुलारा था ....



पापा धीरे धीरे अपनी एक अंगुली पूरा मेरी चूत में डालकर चोद रहे थे ........फिर उन्होंने रफ़्तार पकड ली .....घपाघप ....घपाघप



इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स.............मेरी सिसकी की रफ़्तार उनके ऊँगली से मैच कर रही थी .........पा....पा ...........आप तो कह रहे थे की दर्द होगा ......मुझे ब...बहुत ...मजा ..आ ..रहा है .........ऐसे ही करते रहिए........मेरे अच्छे.......पापा.........



मै मदहोश हो गयी .....बिलकुल भूल चुकी थी मै कहाँ हूँ .......



जब होश आया ...तो मेरी चूत में तेज जलन और पीड़ा हो रही थी ..........पापा अपना लम्बा लंड पीछे से मेरी मुनिया में पेल चुके थे और तेज गति से अन्दर बाहर कर रहे थे ............



मै चिल्लाने लगी ........लेकिन पापा मेरी चींखो की परवाह किये बिना दनादन पेले जा रहे थे



वस्तुतः मुझे ऐसा ही चुदाई चाहिए था ............थोड़ी देर में मुझे आनंद आने लगा .........मै कमर आगे पीछे हिलाकर पापा का साथ देने लगी .......


आपका ....इंजेक्शन....तो ...बहुत ....मजेदार है ....पापा .......ऐसे ही ...करते ...रहिए ......आह............


पापा फल्फलाकर झड़ने लगे .......साथ में मै भी झड रही थी ........


पापा के साथ पहली बार चुदकर जबरदस्त आनंद आया था ............


पापा मेरे कमर से उतर गए थे ......पर मै वैसे ही पड़ी रही ...

मिसेज मेहरा का चेहरा अपनी चुदाई का वर्णन करते करते वासना से भर गया था ....उनकी आँखों में रंगीन डोरे तैर रहे थे ....

खुद मेरा लंड तनकर उनकी जांघो में ठोकर मारने लगा ........मैंने झट से अपनी दो उंगलियाँ एक साथ उनकी फैली बुर में पेल दिया ........


आह्ह्ह्ह................कुत्ते ......दो ऊँगली डालने से पहले बताना था न ......तेरी उंगलियाँ भी तो अच्छे खासे लंड जैसा ही मोटा है .......सोनिया चिल्लाई


आप ऐसे ही चिल्लाती रहती हो .........मै उनकी चुचियों को मसलते हुए बोला ........जबकि दिल से चाहती हो कोई आपको पेल पेल के आपकी बुर फाड़ दे ....क्यों ठीक कहा न ?


हाँ , मेरे लाल .............बोलो ...आज फाडोगे न मेरी बुर .........जैसे तुमने आज मेरी गांड का सत्यानाश किया है .....


जरुर ..........मेरी सोनी रानी .........आज तेरी बुर का बैंड बजाकर ही रहूँगा ........


तुम क्या मेरी बैंड बजाओगे .............( अब सोनिया खड़ी हो गयी और अपनी साडी -पेटीकोट खोलकर फेंक दी )......लो आज मै ही तुझे रगड़ देती हूँ ........


ये कहते हुए सोनिया मेरे ऊपर चढ़ गयी ... और .अपनी जांघो को मेरी जांघ पर रखकर मेरे मूसल के आलू सरीखे सुपाडे को अपनी बुर के मुहाने पर रखकर उसपर खचाक से बैठ गयी ........


ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..............सोनिया और मेरे मुख से एक साथ मदभरी सिसकी निकली ........


सोनिया ने झुककर अपनी चुन्चियाँ मेरे मुँह में डाली और जोर जोर से अपनी बुर अपनी भारी चुतर समेत मेरे मूसल पर पटकने लगी ........मैंने अपने हाथों से उनके मांसल चुतर को सहला रहा था .....साथ में अपनी ऊँगली से उबकी गांड भी मार रहा था ......


अप्रतिम आनंद ........


मुझे अनोखा मजा मिल रहा था .......बहुत दिनों बाद किसी औरत ने मुझे अपने बदन के नीचे दबाकर चुदवाया था ..........


मिसेज मेहरा झड़ने लगी ......मै भी रूककर व्यर्थ ऊर्जा बर्बाद नहीं करना चाहता था .........मैंने अपने शारीर को कडा करके दस बारह स्ट्रोक नीचे से लगाए .....फिर मै भी झड़ने लगा.......


सोनिया हाँफते हुए निढाल होकर मेरे ऊपर से उतर गयी ......
 


खुद मेरा लंड तनकर उनकी जांघो में ठोकर मारने लगा ........मैंने झट से अपनी दो उंगलियाँ एक साथ उनकी फैली बुर में पेल दिया ........


आह्ह्ह्ह................कुत्ते ......दो ऊँगली डालने से पहले बताना था न ......तेरी उंगलियाँ भी तो अच्छे खासे लंड जैसा ही मोटा है .......सोनिया चिल्लाई


आप ऐसे ही चिल्लाती रहती हो .........मै उनकी चुचियों को मसलते हुए बोला ........जबकि दिल से चाहती हो कोई आपको पेल पेल के आपकी बुर फाड़ दे ....क्यों ठीक कहा न ?


हाँ , मेरे लाल .............बोलो ...आज फाडोगे न मेरी बुर .........जैसे तुमने आज मेरी गांड का सत्यानाश किया है .....


जरुर ..........मेरी सोनी रानी .........आज तेरी बुर का बैंड बजाकर ही रहूँगा ........


तुम क्या मेरी बैंड बजाओगे .............( अब सोनिया खड़ी हो गयी और अपनी साडी -पेटीकोट खोलकर फेंक दी )......लो आज मै ही तुझे रगड़ देती हूँ ........


ये कहते हुए सोनिया मेरे ऊपर चढ़ गयी ... और .अपनी जांघो को मेरी जांघ पर रखकर मेरे मूसल के आलू सरीखे सुपाडे को अपनी बुर के मुहाने पर रखकर उसपर खचाक से बैठ गयी ........


ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..............सोनिया और मेरे मुख से एक साथ मदभरी सिसकी निकली ........


सोनिया ने झुककर अपनी चुन्चियाँ मेरे मुँह में डाली और जोर जोर से अपनी बुर अपनी भारी चुतर समेत मेरे मूसल पर पटकने लगी ........मैंने अपने हाथों से उनके मांसल चुतर को सहला रहा था .....साथ में अपनी ऊँगली से उबकी गांड भी मार रहा था ......


अप्रतिम आनंद ........


मुझे अनोखा मजा मिल रहा था .......बहुत दिनों बाद किसी औरत ने मुझे अपने बदन के नीचे दबाकर चुदवाया था ..........


मिसेज मेहरा झड़ने लगी ......मै भी रूककर व्यर्थ ऊर्जा बर्बाद नहीं करना चाहता था .........मैंने अपने शारीर को कडा करके दस बारह स्ट्रोक नीचे से लगाए .....फिर मै भी झड़ने लगा.......


सोनिया हाँफते हुए निढाल होकर मेरे ऊपर से उतर गयी .....

रात को लगभग एक बजे मेरी नींद खुली तो देखा ......मिसेज मेहरा नंगी मेरी तरफ पीठ किये लेटी थी

.....उनकी नंगी गांड को देखकर मेरा लंड फिर फड़कने लगा ....मै उनसे चिपककर अपना लंड उनकी गांड की दरारों में रगड़ने लगा .....

शायद उनकी नींद खुल गयी थी इसलिए उन्होंने अपने पैरों को मोड़कर अपनी गांड और उभार दी ....मै अपना हाथ आगे ले जाकर चुचियों से खेलते हुए उनकी गांड पर अपने लौड़े का दबाब बढाने लगा .....


आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह................सोनिया की हलकी कराहट निकली

सोनियाजी.......... एक बात बताइये

क्या ? .....

उस दिन के बाद आपके पापा ने आपको फिर नहीं चोदा ?


क्या बात करते हो ?...........मेरी तरफ घुमती हुई मिसेज मेहरा बोली .......उसके बाद तो पापा ने मुझे छोडा ही नहीं ....हमेशा मुझे चोदने की ही फिराक में लगे रहते .....उसी दिन रात को खाना खाने के बाद पापा ने मम्मी को बोल दिया की आज वो मेहमानखाने के बजाय घर में ही सोयेंगे क्योंकि दालान के पास आज उन्होंने एक सांप देखा था ...


अच्छा .....अब समझा ....मै सोनिया की चुचियों का मर्दन करते हुए हँसा ......मुझे अपने यहाँ सुलाने के लिए सांप वाला आइडिया कोई नया नहीं, बल्कि आपके पापा का पुराना आजमाया तरिका था ......


हाँ, .......मिसेज मेहरा लम्बी सांस लेकर बोली ..............पापा जानते थे की मेरे और मम्मी के साथ सोने पर मम्मी कभी बीच में नहीं सोएगी क्योंकि दम्मे की बिमारी की वजह से बीच में सोने से ही उनको घबराहट होने लगती है ......


फिर क्या हुआ ?....मैंने उत्सुकता से पूछा


आह्ह...वो भी क्या रात थी .........

पापा बीच में सोये थे , मम्मी बेड के किनारे की तरफ सोयी थी और मै दीवाल से सटी हुई सबसे अन्दर ...... पापा मम्मी की चुचियों को सहला रहे थे .....

अँधेरे में अभ्यस्त मै उनलोगों की तरफ करवट लेकर देख रही थी ....मम्मी बार बार उनका हाथ झटक रही थी ...

फिर फुसफुसाई ....शर्म करो जवान बेटी बगल में सोयी है ......और पापा की तरफ पीठ करके सो गयी .....

पापा एकबार घूमकर मेरी तरफ देखा फिर चित लेट गए ......अब वो एक हाथ से मम्मी की चुतरों को सहला रहे थे .......उनका दुसरा हाथ मेरे घुटनों से सटा था ....वो धीरे धीरे अपना हाथ मेरे घाघरे को ऊपर करते हुए मेरी जांघो पर फिराने लगे ....

मेरे बदन में सिहरन दौड़ गयी .......सहलाते सहलाते वो अपना हाथ ऊपर सरकाकर मेरी मुनिया को चड्डी के ऊपर से दुलारने लगे ......मेरा बदन कांपने लगा .......

फिर वो मेरी तरफ घूम गए और मेरी मुनिया और कबूतरी को एक एक हाथ से भींचकर मेरे होंटों को अपने होंटो से दबाकर चूसने लगे .....फिर मेरी जीभ को चूसने लगे ..........

मै जन्नत में थी ........

और जैसे ही पापा ने मेरा हाथ पकड़कर अपना गरम मूसल थमाया और मेरी चड्डी को साइड कर अपनी खुरदुरी ऊँगली मेरी मुनिया में सरकाया .....मेरी मुनिया आनंद में भलभलाकर बह गयी ......


इधर कमरे में मम्मी के ख्रर्राटे गूंज रही थी ......


मै शर्म से अपना चेहरा छिपाते हुए दीवार की तरफ घूम गयी ......

पर पापा अब कहाँ मानने वाले थे .......उन्होंने मेरे घाघरे को को कमर तक उठाकर मेरी चड्डी को खींचकर निकाल दिया ....फिर एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे से और दुसरे हाथ को मेरी उपरी बांह के बीच से लाकर मेरी टॉप ऊपर सरकाकर मेरी दोनों कबूतरी को मसलने लगे .....नीचे से उनका मूसल मेरी गांड और चूत दोनों को रगड़ते हुए डरा रहा था ........


धीरे धीरे उनका गरम मूसल मेरी मुनिया को ठोकता हुआ मेरे अन्दर सरकने लगा ....मै दीवार से चिपकी हुई थी और पापा मुझे बुरी तरह से जकड़े हुए मम्मी की डर से आहिस्ते आहिस्ते पेल रहे थे .....

लगभग एक घंटे तक वो मुझे चोदते रहे .....इस दौरान मै पता नहीं कितनी बार झड़ी .....

लेकिन जब पापा झड्नेवाले थे तब वो सार डर भूलकर मेरी पीठपर सवार होकर घचाघच चोदने लगे .....मै अपनी चींखे दबाये मस्ती में चुद रही थी और मम्मी बगल में लेटी थी ......डर और आनंद का ऐसा मिश्रित मजा मुझे आजतक नहीं आया था ..............और न ही उसके बाद ....पिछले साल तक ....


बहुत गरम स्टोरी है आपकी ......मै एकसाथ अपनी तीन तीन ऊँगली जोड़कर सोनिया की फैली बुर में पलते हुए कहा .......लेकिन , पिछले साल ......क्या आपको पिछले साल फिर ऐसा मौक़ा मिला ?


आह्ह....हाँ .........


किसके साथ ? और कैसे ??


नीरज के साथ .............सोनिया बोली


नीरज कौन ?.................फिर अचानक मै झटके से उठकर बैठते हुए बोला...........नीरज .....आपका बेटा......ओह माय गॉड.........


मिसेज मेहरा मुस्कुरा रही थी .........

कैसे .....आपके बेटे नीरज ने आपको कैसे चोदा ?....मै हतप्रद था


पिछले साल जब हमने यह घर लिया था , तब गर्मियों की छुट्टियों में नीरज यहाँ आया था .....

तबतक इस मकान के सारे कमरे तैयार नहीं थे , केवल मेरा बेडरूम तैयार था ....बाकी कमरे की पेंटिंग चल रही थी , इसलिए नीरज हमारे साथ ही सोता था...उसके पापा देर रात तक ऑफिस का काम करके सोते थे ,इसलिए वो साइड में ही सोते थे ....मै बीच में रहती थी


पहली ही रात को मुझे गड़बड़ लगा .....

मुझे वैसे ही नींद नहीं आ रही थी कारण की एक हफ्ते से ज्यादा हो गए थे मुझे चुदे हुए.....मै करबट के बल पति की तरफ सोयी थी और अपनी नाइटी के अन्दर हाथ डालकर आहिस्ते आहिस्ते निःशब्द अपने बुर में ऊँगली कर रही थी की मैंने अपने नितम्बो पर नीरज का खडा लंड महसूस किया ....

मै जडवत हो गयी ......

उसका खडा लंड नितम्बो पर जगह जगह टकराते हुए मेरी गांड की दरार में स्थिर हो गया .....मैंने अपनी सांस रोक ली .......


लेकिन उस रात इससे ज्यादा कुछ नही किया ......और वैसे ही सो गया .....


मै भी ये सोंचकर सो गयी की वो नींद में होगा और कोई सेक्सी सपना देख रहा होगा .....वैसे भी अब वह जवान हो चुका है


अगली रात भी ऐसा ही हुआ .....नीरज ने अपना खडा लंड मेरी गांड की दरार में फंसा कर सो गया
 
 
 










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