Monday, April 28, 2014

बदनाम रिश्ते--राजन के कारनामे--18

FUN-MAZA-MASTI

  बदनाम रिश्ते--राजन के कारनामे--18

 अगले दिन सुबह वह अपने दोस्तों से मिलने चला गया .....

मै खाना बनाकर नहा धोकर अपने बेडरूम में लेट गयी .....आज पेंटिंग करने वाले मजदूर आये नहीं थे , इसलिए मै थोड़ा फ्री थी वर्ना सुबह से शाम तक तो उनके पीछे ही लगना पड़ता था .......

मै नीरज के बारे में सोंचने लगी ....कही वो ये सब जानबूझकर तो नहीं कर रहा ...... फिर मैंने दिमाग को समझाया ...नहीं ...वो मेरा बेटा है ....वो ऐसा नहीं कर सकता .......लेकिन जब वह अपना लंड मेरी गांड से रगडा था तो मुझे भी मजा आया था ....ये सच था ......ये सोंचते ही मेरी बुर गीली होने लगी ....मेरे हाथ खुद ब खुद मेरी साडी के अन्दर चली गयी


मैंने अपने पति के आलमारी से एक ब्लू फिल्म की सी डी निकाला और सी डी प्लेयर में डालकर चला दिया , भागकर किचेन से एक मोटा खीरा लेकर आयी और दरवाजा बंद करके बिस्तर पर लेटकर फिल्म देखने लगी


...फिल्म में एक हैण्डसम युवक एक प्रौढ़ औरत को चोद रहा था .....मेरी बुर में खुजली होने लगी .....मैंने अपना पेटीकोट पेट तक उठाया और मोटे खीरे को अपनी बुर में घुसाने लगी ....मुझे बहुत मजा आ रहा था ...मेरी आँखे मजे में मुदने लगी ...मै जोर जोर से खीरे को अपनी बुर में अन्दर बाहर कर रही थी ....


तभी मेरी नजर खिड़की पर चली गयी .....मैंने देखा वहां नीरज खडा था……

हाय अल्लाह ! ये कब आया .....वह मेरी हर हरकत को ध्यान से देख रहा था .......उसे देखते ही मेरे शारीर में ठंडी लहर दौड़ गयी ...मै फ्रीज़ हो गयी ....


मैंने फटाक से अपनी बूर से खीरा निकालकर फेंका और अपनी साडी घुटनों से नीची कर अपनी नग्नता को ढककर खड़ी हो गयी और सी डी प्लेयर को ऑफ कर दिया ....आज मेरे बेटे ने मुझे पूरी नंगी हस्तमैथुन करते देख लिया था .....मै शर्म से पानी पानी हो चुकी थी ...


मैंने कांपते हाथो से दरवाजा खोला क्योकि वही एक कमरा था जिसमे हम सभी आराम करते थे ...नीरज शायद आराम करना चाहता था ...लेकिन


लेकिन जैसे ही मैंने दरवाजा खोला ....उसने मुझे बाहों में भर लिया ...मैंने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन वह मेरी नितम्बों को अपने हाथो से जकड़े अपने लंड पर मेरी योनि प्रदेश को रगड़ने लगा


....मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की इसे मै कैसे समझाऊं ?


तभी नीरज ने मेरी चुचियों को ब्लोउज के ऊपर से दबोचकर उसे मसलने लगा ......


छोड़.....नीरज छोड़ .....ये गलत है ....मै तेरी माँ हूँ .......मै अब पूरी शक्ति से उससे अलग होने की कोशिश करने लगी और जब लगा की मै अपने आप को छुड़ा नहीं सकती तो मैंने खींचकर एक तमाचा नीरज के गाल पर जड़ दिया ....


वो अपने गाल को सहलाते हुए मुझे आग्नेय नेत्रों से घूरने लगा .......फिर बाहर चला गया .....मै वहीँ धम्म से बिस्तर पर बैठ गयी |


जो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ ......नीरज अब जवान हो गया है , मुझे उसे मारना नहीं चाहिए था ......

परन्तु मै क्या करती ?....उसे भी तो समझना चाहिए था ...हाँ , ठीक है की मै हस्तमैथुन कर रही थी क्योंकि मै भी एक औरत हूँ ..मुझे भी शारीरिक भूख लगती है ...., उसका उतेजित होना स्वाभाविक था .....लेकिन मै उसकी माँ हूँ .....उसका जबरदस्ती करना ठीक नहीं था .....कोई बात नहीं वो आता है तो मै उससे बात करुँगी ...उसे समझाउंगी


मै पुरे दिन इन्तजार करती रही , लेकिन वो नहीं आया ....मैंने खाना भी नहीं खाया ....उसके पापा भी आ चुके थे और उसके बारे में दो बार पुछ चुके थे ...मै क्या बताती ?


रात के दस बज गए थे ....उसके पापा खाना खाकर गुस्से में बिफर रहे थे .....मेरा दिल अनहोनी की आशंका से धड़क रहा था ....


तभी वह चुपके से अन्दर आया .....मैंने चैन की सांस ली और उसके लिए खाना निकालने किचेन में चली गयी .....


उधर उसके पापा उसे डांट कर समझाने लगे की इस प्रकार बिना बताये रात को घर से बाहर रहना अच्छा नहीं है , आजकल समय ठीक नहीं है .......


वो चुपचाप सुनकर खाना खाकर अपनी जगह पर जाकर सो गया ....


उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी .....मुझे नीरज से बात करने का मौक़ा नहीं मिला था ....अगर बात हो जाती तो मै अपनी स्थिति साफ़ कर सकती थी ....


मै करबट के बल पति की तरफ मुंह करके लेटी थी ...पति चित सोये थे ....तभी मुझे अपने घुटनों पर नीरज का हाथ महसूस हुआ .....वो धीरे धीरे मेरी नाइटी को पीछे से ऊपर सरका रहा था ...साथ ही मेरी नंगी होती जा रही जाँघों को सहला भी रहा था .....मेरा रोम रोम सिहर उठा ....


अब मै समझ गयी कि वह जानबूझकर ये सब कर रहा है ......फिर उसने पीछे से मेरी नाइटी कमर तक खींचकर मेरी नंगी चुतरों पर हाथ फेरने लगा ....


मै पति कि उपस्थिति में कोई सीन उत्पन्न नहीं करना चाहती थी ...लेकिन उसे रोकना भी जरुरी था ....मैंने उसका हाथ झटक दिया .......


उसका हाथ तो हट गया लेकिन ये क्या ?.....मुझे अपने नितम्बों पर नीरज का नंगा खडा लंड महसूस हुआ जो धीरे धीरे मेरी गांड की दरारों में जाकर स्थिर हुआ .....मेरा दिल धार धार कर बजने लगा ....


मुझे उसकी लंड कि गर्माहट महसूस हो रही थी .......तभी उसने मेरी नाइटी में हाथ घुसाकर मेरी चुचियों को पकड़ लिया और उसे दबाने लगा ....मै रात को ब्रा निकालकर सोती हूँ .....नीरज को तो मानो कारुं का खजाना मिल गया .....


उसने बड़ी बेरहमी से मेरी चुचियों को मसलना शुरू कर दिया , मानो दिन वाले थप्पड़ का बदला ले रहा हो .....मै बड़ी मुश्किल से अपनी चीखे दबा रही थी ...


उधर पीछे से नीरज ने अपना लंड मेरी गांड के छेद में ठेलना प्राम्भ कर दिया था ....मुझे लगा जिस तरह से वो मेरी चूचियां दबा रहा है , अगर वो मेरी गांड मारने लगेगा तो मै अपनी चीखे नहीं दबा पाउंगी .....इससे अच्छा है वो मेरी चूत ही मार ले ....वैसे भी उसके लंड कि गर्माहट ने मुझे पूरी तरह से गरम कर चुदास से भर दिया था .....


मैंने अपनी गांड को हिलाकर अपनी बूर को उसके खड़े लंड पर एडजस्ट किया और उसके हमले का इन्तजार करने लगी ......


गचाक .......


एक ही झटके में उसका पूरा लंड मेरी बूर में समा गया .....फिर तूफानी गति से मुझे चोदने लगा .....पंद्रह बीस जबरदस्त धक्के लगाकर वो झड गया .....

मै भी झड चुकी थी .....

मेरी नाइटी में ही उसने अपना लंड पोछा और फिर दीवार कि तरफ मुंह करके सो गया ....


 आह ....आपने अपने बेटे का लंड आखिर खा ही लिया ......वैसे आपकी जगह कोई भी होता तो वो भी चुदे बिना नहीं रह सकती थी और आप तो ......


मै क्या ? .....मिसेज मेहरा तेज स्वर में पुछी


आप तो महा - चुदक्कड़ हो .....आप से बड़ा चुदक्कड इस जहां में विरले ही मिलेगा जिसने अपने बाप और बेटे दोनों के लंडो का प्रहार अपनी इस चूत में झेला हो .....मै तेजी से अपनी उंगलियाँ उनकी बुर में चलाते हुए बोला....एक बात पूंछु


क्या ?.....


मेरी दिली तमन्ना है की मै और नीरज एक साथ .......


क्या एक साथ ?...........मेरी उँगलियों पर अपनी बुर पटकती हुई सोनिया बोली


हम दोनों एक साथ आपको चोदे तो कैसा रहेगा ?.....नीरज आगे से आपकी बुर चोदे और मै आपकी पीछे से गांड मारूँ.....


नेक ख्याल है .....बस पोजीशन बदल दो ....एक लंड चूत में रहते हुए तुम्हारे गधे जैसा लंड अपनी गांड में कैसे झेलूंगी ?


क्या बात करती है ?.....आपके इरादे इतने बुलंद है कि हाथी भी आपकी गांड मार ले तो वो भी आप हंसकर झेल लेंगी , हम गधों की तो बात ही क्या है ??.......वैसे एक बात बताइये ?....आपके इस दलदली मक्खन में अबतक कितने लंडो ने गोता लगाया है ???


 सिर्फ पापा और नीरज का ही नहीं और भी कई मस्ताने लंड इस कुटिया में समा चुके है .......गिनती मैंने कभी की नहीं ......उसमे कई अविस्मर्णीय है.....


बताइये ...बताइए ........मै उताबला होकर बोला


तुम सुनकर मस्त चोदते हो , इसलिए तुम्हे बता रही हूँ ...........


मिसेज मेहरा यादों में खोती हुई बोली...........


लगभग एक हफ्ते तक हर रात को उसी तरह पापा ने मुझे गाँव में चोदा .....फिर अपने साथ आगरा ले गए ये कहकर की यहाँ मेरी पढ़ाई ठीक ढंग से नहीं चल रही है .....


पीछे रीना को हजार रूपये महीने की तनख्याह पर मम्मी और दादाजी के देखभाल के लिए छोड़ा....


आगरा में दो कमरों का फ़्लैट पापा ने खरीद लिया था ....मै दुसरे कमरे में शिफ्ट हो गयी ....लेकिन ये तो अन्य लोगो को दिखाने के लिए था ....मै सोती तो पापा के कमरे में उनके साथ ही थी .....


हर रात वो मुझे अलग अलग तरीकों से चोदते थे ....


कुछ ही दिनों में उन्होंने मुझे पूरी औरत बना दिया .....आगे से मेरी चूचियां फूलकर बड़ी हो गयी थी , पापा हर रोज तेल लगाकर मालिश जो करते थे ......पीछे से मेरी चुतरों में भी काफी उभार आ गया था क्योंकि पापा को मेरी गांड मारे बिना नींद ही नहीं आती थी ......कुल मिलाकर मेरे दिन मस्ती में कट रहे थे ...


अब तो मुझे पढने में भी खूब मन लगता था क्योंकि सेक्स के पीछे मन का भटकाव बंद हो गया था ....


दूधवाला सुबह सुबह साढ़े पांच बजे ही दूध लेकर आ जाता .....


पापा गहरी नींद में होते थे इसलिए मै ही दूध ले लेती थी ...


वो हमेशा बैठकर बर्तन में दूध डालता था .....उसका बड़ा सा आंड धोती में लटकते हुए बाहर झांकता रहता था .....


जब तक वो दूध डालता , मेरी नजरे वहीँ टिकी रहती ....उसे देखते ही मुझे कुछ कुछ होने लगता ....जिसके इतने बड़े टट्टे है , उसका मारक अस्त्र कितना बड़ा होगा .....मेरी मुनिया सोंचते ही चुन्चुनाने लगती .....


मै गैस पर दूध रखते ही भागकर पापा पर चढ़ जाती ....पापा को सुबह सुबह मेरा ये उताबलापन बहुत पसंद था ......पहले प्यार से मेरी लेते ......फिर अपनी दिन की शुरुआत करते ......


एक दिन पापा अपने क्लाइंट से मिलने सुबह चार बजे झांसी चले गए ....


वो इतनी हडबडाहट में गए की मेरे साथ गुड मोर्निंग योगासन भी नहीं किया .....


उनके जाते ही मेरी चूत में ऐसी चुनचुनाहट शुरू हुई की ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी ......मै अपनी चूत को अपनी मुठ्ठी में भींचकर उसे शांत करने का प्रयास कर रही थी परन्तु अंतराग्नि भड़कती जा रही थी .....


मै टेबल पर पडा केले का गुच्छा उठाया और एक मोटा केला चुनकर उसे अपनी भट्ठी में झोंक दिया ......अब थोड़ा करार मिल रहा था कि दरवाजे की घंटी बजी ......


साढ़े पांच बज गए थे और दूधवाला आ गया था ......

दूधवाले अंकल का ध्यान आते ही मेरी ठंडी पड़ती भठ्ठी एक बार फिर दहकने लगी .......


मैंने केले को निकालने के बजाय उसे वैसे ही आधा अन्दर तक ठुंसा रहने दिया , अपनी नाइटी डाली ..... और दूध का बर्तन लेकर अंकल के सामने खड़ी हो गयी .....


बड़ा सा टट्टा धोती से बाहर झांकते हुए मेरी खाज बढ़ा रहा था ...ऊपर से चूत में केला लेकर चलने में इतना अद्भुत आनंद आया था कि मेरी अंतराग्नि पिघलने लगी ......


मेरा खडा रहना मुश्किल हो गया .....मै तुरंत झुककर दूध का बर्तन उठाई .......


मै हड़बड़ी में नाइटी का उपरी बटन लगान भूल गयी थी , मेरे झुकते ही मेरी पूरी जवानी तनकर दूधवाले अंकल के आँखों के आगे नाच गयी .....

उनका मुंह खुला का खुला ही रह गया .....

एक अधेड़ को अपनी जवानी दिखाने का रोमांच मेरे शारीर में दौड़ने लगा और नीचे मै झड रही थी .........दूध का बर्तन संभालते हुए मेरे हाथ कांपने लगे .......


अंकल ने दूध के बर्तन के साथ मेरा हाथ पकड़ लिया ...


बिटिया ......लगता है तुम्हारी तबियत खराब है ....जाओ बाबूजी को भेज दो ?


पापा घर पर नहीं है ....शहर से बाहर गए है .......


मै दूधवाले अंकल की आँखों में चमक देखी......


मै दूध लेकर आगे बढ़ी लेकिन वो तुरंत मेरे पीछे आ गया और पीछे से ही दूध का बर्तन पकड़ते हुए बोला.....


लाओ बिटिया.... मै सहारा दे देता हूँ ..तुम्हारे हाथ कांप रहे है ...तुम्हारी तबियत खराब है , मेरा भी कुछ फर्ज़ बनता है .....कहते हुए अपने मूसल को मेरी गरम नितम्बो पर घिसते हुए और बर्तन पकड़ने के बहाने मुझे अपनी बांहों के घेरे में लिए हुए किचेन तक आ गया ....


और जैसे ही मै स्टोव पर दूध का बर्तन रखी ....वो भी मेरे साथ झुक गया लेकिन अब अंकल का मूसल मेरे झुकने से थोड़ी फैली गांड के दरार में चिपक गया और जैसे मै दूध रखकर उठी उसे अपने दोनों हथेलियों से मेरे भरे भरे सुडौल चुचियों को पकड़ लिया .......



अंकल ये क्या कर रहे हो .....छोड़ो ......मै उसका हाथ पकड़कर छुड़ाती हुई मचलने लगी ...लेकिन उसकी पकड़ काफी सख्त थी ....


रोज तो मेरे लौड़े को धोती में निहारती रहती हो .....मेरा लंड देखना चाहती हो न ......लो देख लो बिटिया ......


वो मुझे छोड़कर अपनी धोती खोलकर खडा हो गया .....उसका मोटा काल नाग फन फैलाए खडा था ......


मै दरवाजे की ओर भागी ........वो मेरे सामने खड़े हो गए .....


आज दिल खोल के दिखा रहा हूँ तो नखरे क्यों कर रही है बिटिया ....सच में तुम सब शहर वालियां एक सी हो ......अरे इतना मैंने अपनी बीबी को पकड़ा होता तो अबतक वो अपनी साडी उठाकर मेरे नीचे लेट गयी होती ....



धत...........मैंने दूसरी ओर मुंह घुमा लिया


शर्माती काहे हो बिटिया .....तनिक अपनी बुरिया दिखाव न ...


मै चुप चाप जमीन पर देखती रही .....वो झट से आगे बढ़कर मेरी नाइटी पकड़कर कमर तक उठा दिया



हे महादेव ! ...............तू तो बड़ी गरम निकली बिटिया .......ई देखो ससुरी के ...केला लिए घूम रही है .....नाइटी को पकडे पकडे वो बोले


( आह.....मै तो केला के बारे में भूल ही गयी थी )


उसने मेरी नाइटी को वहीँ सर से बाहर निकाल दिया और मुझे गोद में उठाकर मेरे कमरे में लाकर बिस्तर पर मुझे रखते ही मेरे पैरो को अपने जांघो में दबोच लिया ....


उसका लंड मेरे केले से टकरा रहा था और फिर मेरी चुचियों को मसलते हुए मेरे कान में कहा .......बिटिया ....अपना केला मुझे खिलाओगी या मेरा केला तुम खाओगी ? ..


मै वासना से भर गयी थी ....थोड़ा खुलते हुए मै बोली ........अंकल ! जबतक आप मेरा केला नहीं खाओगे , तबतक मै आपका केला कैसे खा सकती हूँ ...हाँ, एक उपाय है ...हम दोनों साथ खा सकते है ......आप मेरा खाओ और मै आपका

ये हुई न बात ........और मेरे ऊपर से उतरकर मेरे पैरो की तरफ मुंह करके फिर मेरे उपर लेट गए ..........


बिटिया तू तो जबरदस्त समझदार निकली ...खामख्वाह मैने इतनी देरी की .......


अब अंकल का लंड मेरे आँखों के आगे लहरा रहा था .....मैंने लपककर गपाक से अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी


आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...........................एक मीठी सीत्कार अंकल के मुख से निकला और उन्होंने मेरे बुर पर मुंह लगा दिया और केले के चारो तरफ फैली बुर को अपनी खुरदुरी जीभ से चाटने लगे ......


इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स....................अब सिसकने की बारी मेरी थी


अंकल ने केले को हाथो से पकड़कर तेजी से मेरी बुर में अन्दर बाहर करने लगे और साथ ही अपने लंड को मेरे मुंह में ......और जब उन्हें लगा की वो झड सकते है तो मेरे मुंह से निकाल लिया ...और मेरे पैरो के बीच अपने घुटने टिकाते हुए बोले .....


अब चो.....चोदूं बिटिया .......उसकी आवाज लडखडा रही थी.....


हाँ......अंकल ...अब चोदिये मुझे .....


उन्होंने मेरे पैरों को फैलाया ......मेरी फूली चूत के मुहाने पर अपना दहकता सुपाड़ा रखा और मेरे मुख पर हाथ रखते हुए जोरदार धक्का दिया ......


पहले ही धक्के ने उसे बता दिया कि मै अनचुदी नहीं हूँ.....उसका मोटा लंड आराम से मेरी बुर में फिसल रहा था ....वो उत्साह मंद पड जाने से मंथर गति से चोद रहे थे ........


अंकल क्या कर रहे हो ........जोर - जोर से पेलो न ......आज फाड़ दो अपनी बिटिया की बुर



मेरे ललकारते ही उसमे जोश भर गया और हुमच हुमच कर पेलने लगा .....गजब का स्टेमिना था ....आज भी सोंचकर रोमांच हो जाता है .....पुरे आधे घंटे तक पुरे रफ़्तार में उसने मुझे चोदा .........मै तो आनंद से बेहोश हो गयी थी ....


अगले तीन दिनों तक अपनी सूजी हुई चूत की सिकाई करनी पड़ी
 
 
 
 





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