Sunday, April 27, 2014

बदनाम रिश्ते--राजन के कारनामे--3

FUN-MAZA-MASTI

बदनाम रिश्ते--राजन के कारनामे--3
 अगली रात भी दीदी मेरे साथ ही सोयी और मैंने उस रात उनको चार बार चोदा |तीसरे दिन से मेहमान सारे जाने लगे और मैं दुखी होने लगा की आज शायद मुझे मौक़ा न मिले | दीदी सचमुच उस रात मेरे साथ नहीं सोयी लेकिन मैंने दरवाजा अन्दर से बंद नहीं किया था , वो देर रात को आयी और बोली - राजन ! जल्दी से चोद ले भाई !! मेरा पेट दुःख रहा है , मेरा मासिक कभी भी आ सकता है | उसके बाद मैंने तूफानी गति से दीदी को पेलना शुरू किया फिर भी मेरे पलते -पलते ही उनका मासिक शुरू हो गया ,जब झड़कर मैंने अपना लंड निकाला तो उसपर खून की बुँदे चमक रही थी |
अगले दिन सारे मेहमानों के चले जाने के बाद मैंने भी जाना चाहा तो मामी ने दो चार दिन और रोक लिया | दीदी भी मेरे जाने के बारे में सुनकर उदास हो गयी | तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया की जीजाजी तो है नहीं , इसलिए दीदी को ससुराल जाने की कोई जल्दी तो नहीं है ,महीने दो महीने बाद जायेगी ,तो क्यों नहीं दीदी को भी साथ अपने घर माँ से मिलाने के बहाने ले चलूँ , वहाँ माँ के कालेज जाने के बाद हम दोनों घर में अकेले रहेंगे और जैसे चाहे मस्ती करेंगे | ये बात मैंने दीदी को बताया तो उनका उदास चेहरा खिल उठा | फिर वो मामी से मेरे साथ जाने की जिद करने लगी कि पता नहीं बुआ ( मेरी माँ ) से फिर कब मुलाक़ात होगी | मामी के राजी होने के बाद तीसरे दिन दीदी चलने की तैयारी करने लगी | जाने से पहले वो कमरे में मेरे पास आयी और मेरे से फुसफुसाते हुए बोली- आज मेरा मासिक भी ख़त्म हो गया , मैंने फट से उनका गाल चुमते हुए साडी उठाकर अपना लंड उनके हलकी झांटो भरी बुर में पेलते हुए उनके कान में कहा - दीदी ! चूत चिकनी कर लो , चोदने में मजा आयेगा | वो मेरे लंड पर अपनी बुर ५-७ बार रगड़कर हटा लिया और फिर मेरा लंड उमेठते हुए बोली - हट बदमाश ! यहाँ नहीं वहीँ चिकना करुँगी | बस में मैंने उनसे पूछा -दीदी निरोध ले लूँ तो वो बोली - नहीं रे ! निरोध में मजा नहीं आता है , पुरे तीस दिन की गोलियां आती है , तू गोलियां ही खरीद लाना और एक हेयर रिमूवर भी ले आना |जब हम घर शाम को पहुंचे तो माँ दीदी को देखकर बहुत खुश हो गयी , फिर वो दोनों बात करने लगे और मै बाजार दीदी की चीजे खरीदने चल पड़ा | 



बाजार से लौटते वक्त मेरा दोस्त समीर मिला ,हाल चाल जानने के बाद जब मै उससे पूछा कि वो आजकल क्या कर रहा है तो वो बोला - बस रिजल्ट का इन्तजार है , उसके बाद कालेज में एडमिशन लूंगा , आजकल सभी कि छुट्टियां है इसलिए वहां लौज (जहां ढेर सारे स्टुडेंट किराए पर रहते है ) में खूब धमाचौकारी होती है , हफ्ते में एक रात बी एफ आता है , आज भी आया है , इसी सब में मन लग जाता है | मैंने पूछा - यार ये बी फ क्या होता है ? वो मेरी ओर आश्चर्य से देखता हुआ बोला - यार बी एफ यानी ब्लू फिल्म .. तुम्हे नहीं पता ? उसमे बिलकुल नंगे होकर लड़का लड़की को चोदते हुए दिखाया जाता है | मुझे उसके कहे पर विश्वास नहीं हुआ कि बिलकुल नंगा कैसे दिखा सकता है , इसलिए पूछा- सच में ? उसने कहा - और नहीं तो क्या ? तुम्हे देखना है तो चल मेरे साथ मेरे लौज | मै आश्चर्य ओर कौतुहल के कारण उसके साथ चल पडा | वहां सचमुच वी सी आर आया हुआ था ओर सब लोग खाना खा रहे थे , उसके बाद बी एफ का प्रोग्राम होने वाला था , मै तब तक समीर के रूम में बैठ गया ओर वो खाना खाने चला गया , तभी मेरी नजर तकिये के नीचे एक पतली सी मैगजीन पर पडी , तकिया हटा कर देखा तो मैगजीन के साथ दो मटमैले रंग कि किताब भी पडा था जिसका शीर्षक था -' मचलती जवानी ' और ' भींगा बदन ' , उसके लेखक के नाम पर मस्तराम लिखा था | पहले मैंने मैगजीन देखा जिसमे नंगे अंग्रेज लड़के लड़कियों कि तस्वीर थी , जैसे ही मैंने पन्ने पल्टे तो मै दंग रह गया ... एक लड़की दो लड़कों के साथ मजे ले रही थी , एक उसे चोद रहा था दूसरा उसे अपना लंड चूसा रहा था , मुझे रोमांच हो रहा था साथ ही घिन भी आ रहा था कि पेशाब करने वाला लंड क्या चूसने कि चीज है ..छि.. छि! फिर मैंने कहानी की किताब को पलटा , उसमे पहली कहानी एक रिक्शावाला का एक मेमसाब के साथ चुदाई का था और उसमे निरंतरता नहीं था क्योंकि अगले कुछ पन्नो में एक पठान एक गाँव कि छोरी को पेल रहा था लेकिन अगली कहानी एक भाई बहन कि चुदाई कि थी जिसे पढते पढते मेरा लौड़ा तनकर खडा हो गया फिर दुसरी किताब देखा जिसमे एक माँ बेटे का और दूसरी कहानी एक बहु का अपने ससुर के साथ चुदाई का था | मै सनसनाहट से भरता जा रहा था कि तभी समीर खाना खा कर कमरे में आया ओर मेरे हांथो में किताबे देखकर हँसने लगा | मैंने सकुचाते हुए किताबों को बिस्तर पर रख दिया ओर बोला- यार इसमें तो खुल्लम -खुल्ला लिखा है , मेरा तो खडा हो गया , तुम्हारा खडा होता है तो तुम क्या करते हो ? मुठ मारता हूँ और क्या ? फिर उसने मुझे मुठ मारना बताया और फिर मुझे बी एफ दिखाने ले गया | फिल्म में जैसा उसने बताया था वैसे ही बिलकुल नंगे लड़के लडकियां खुलेआम चुदाई कर रहे थे अंग्रेज लड़की लड़के का लंड चूसती तो लड़का भी अपनी जीभ निकालकर लड़की का बुर चूसता बल्कि एक सीन में तो तीन लड़के एक ही लड़की को पेल रहे थे - एक चूत चोद रहा था , दुसरा गांड मार रहा था और तीसरा अपना लंड चूसा रहा था | मुझे पहली बार एहसास हुआ कि औरतों की गांड भी मारी जा सकती है ..मेरे मन ने कल्पना में उड़ान भरी कि मै तो इस सुख से अभी तक वंचित हूँ ..आज ही रात को दीदी की गांड जरुर मारूंगा , मेरा मोटा है तो क्या हुआ मेरे जैसे ही मोटे मोटे लंडो को फिल्म में लड़की बड़ी आसानी से अपने कमसिन गांड में लील रही थी और दीदी कि गांड तो फिर भी चौड़ी है | अगले सीन में एक टीचर एक स्टुडेंट लड़की को दंड देते हुए पहले चुतरों पर हंटर बरसाता है और फिर उसके चुतरों को सहलाते हुए जबरदस्त चुदाई करता है | फिल्म देखते देखते एक घंटे में ही मेरी हालत खराब होने लगी ..मुझे चूत कि तुरंत आवश्यकता महसूस हो रही थी इसलिए मैंने समीर को बुलाकर कहा - यार मै चलता हूँ , घर पर बोलकर नहीं आया हूँ और हाँ मुझे पढ़ने के लिए वो मस्तराम वाली किताबे और पिक्चर वाली बुक दे दो | उससे किताबे लेकर अपने कसमसाते -फुफकारते लंड को प्यार से पुचकारते हुए घर वापस चल पडा |

रात को खाना खाने के बाद माँ जब किचेन में बरतन रखने गयी तभी मैंने हेयर रिमूवर और गोलियां देते हुए दीदी के कान में फुसफुसाया कि तुम रात को मेरे पास आना मै दरवाजा अन्दर से बंद नहीं करूंगा (उनको भैया भाभी वाला कमरा मिला था जो माँ के कमरे के बाईं ओर था ओर मेरा कमरा माँ के कमरे के दाईं तरफ था )| फिर मै बेड पर लेटकर दीदी का इन्तजार करने लगा , इन्तजार करते करते मैंने मस्तराम कि बुक निकालकर फिर से एकबार भाई बहन कि चुदाई कि कहानी पढ़ा और पढ़कर अपने कसमसाते लौड़े को सहलाते हुए शान्त्वना देने लगा कि तू ज्यादा तड़प मत अभी तुझे दीदी कि रसीली चूत और मखमली गांड मारने को मिलेगा | अपने लंड को सहलाते सहलाते पता नहीं मुझे कब नींद आ गयी और जब नींद खुली तो देखा सबेरा हो गया है और माँ आँगन में झाडू लगा रही है और दीदी वही बरामदे में खड़ी है | मुझे उनपर बहुत गुस्सा आया कि वो रात को मेरे पास क्यों नहीं आयी फिर बाथरूम जाकर फ्रेश होकर 'मोती ' (हमारा कुत्ता ) को बाहर सैर कराने ले गया | लौटकर मै दीदी से बात करने का मौक़ा ढूंढने लगा पर दीदी थी कि माँ के साथ ही चिपकी चिपकी घूम रही थी , आखिर में नाश्ता करने के बाद दीदी को लंच बनाने को कहने के बाद जब माँ कालेज जाने लगी तो मेरा अंतर्मन खुशी से झूम उठा लेकिन जैसे ही मै बाहर का गेट बंद करके लौटा वैसे ही दीदी झट से बाथरूम में नहाने के लिए घुस गयी | मेरी उत्तेजना बढती जा रही थी साथ ही गुस्सा भी कि आखिर क्यों वो शरारत से मुझे खिंझा रही है | अगर छोटी होती तो शायद डांटता भी पर ये तो बड़ी थी , मुझे रह रहकर कल देखे फिल्म का सीन याद आ रहा था जिसमे एक प्रौढ़ शिक्षक अपने गर्ल स्टुडेंट कि गलती पर उसे बेंत से चूतरों को नंगा करके मारता है फिर प्यार से चूतरों को चुमते चाटते हुए पीछे से ही चूत को चूसना शुरू कर देता है फिर जबरदस्त ढंग से उस लड़की को पेलता है ,सीन याद करके ही मेरा लौड़ा निकर में तम्बू बना हुआ था |आखिर में लगभग एक घंटे बाद जब दीदी बाथरूम से निकली तो उसने अपने शरीर पर केवल टावेल लपेटे हुए थी जिसका उपरी शिरा बूब्स के बीच में कसा था जिसके कारण आधी से अधिक मदमस्त चूंचियाँ बाहर को छलक रही थी और निचला शिरा चूत को बस ढके था | मै लपककर उनके पास पहुंचा और उन्हें अपनी बाहों में भरना चाहा तो उन्होंने हाथ के इशारे से रोक दिया , वो कुछ बडबडा रही थी शायद शिवजी की आरती गा रही थी फिर वो टावेल में ही पूजा घर में चली गयी | 

मै बाहर खडा कुंठित हो रहा था , जब वो बाहर मुस्कुराते हुए आयी तो मै उनके पीछे पीछे उनके कमरे की और चल पडा | पीछे से टावेल गांड को पूरी तरह से ढक भी नहीं पा रहा था , चूतरों का मांसल उभार नीचे से झलक रहा था | मै खींजकर रूखे शब्दों में बोला- दीदी ये क्या है ? तुम रातको मेरे पास क्यों नहीं आयी ?( तबतक दीदी झुककर अटैची से अपने कपडे निकालने लगी ..आ ..ह .. क्या नजारा था ..पीछे से दीदी की नशीली चूत बाहर को झांक रही थी जिसके साथ मिलकर उनकी मखमली गांड चार चाँद लगा रही थी ,चूत की फांके खुली हुई थी और अपने मर्दन का आमंत्रण दे रही थी | मै आगे बढते बढते रूक गया और वहीँ कुर्सी पर बैठकर नज़ारे लेने लगा )तब दीदी पहली बार खुलकर बोली - सॉरी भाई ,गलती हो गयी .. बुआजी के सोने का इन्तजार करते करते मुझे खुद ही नींद आ गयी | मै खींजकर बोला - तुम्हे पता है मै सारी रात लौड़ा हाथ में थामे किस तरह से तड़पता रहा हूँ और तुम बोलती है की गलती हो गयी ..गलती हुई है तो सजा भी भुगतनी पड़ेगी !!
वो मेरी तरफ घूमकर पलटी और अपने कमर पे हाथ रखकर बोली - मुझे हर सजा मंजूर है , मेरे राजा भैया !! बोलो क्या कहते हो ? मेरे मन में एक शैतानी चमक उभरी ..मै बोला -रूको मै अभी आता हूँ और कमरे से निकलकर सीधा बाथरूम गया और पेशाब करके अपने कमरे में आकर वेसलीन का डब्बा जेब में डाला और खिड़की के परदे का लकड़ी का डंडा निकाला साथ ही मस्तराम एवं पिक्चर वाली बुक लेकर दीदी के कमरे में लौटा और फिर कुर्सी पर बैठ गया तथा डंडा हिलाने लगा | मेरे हाथ में लकड़ी का डंडा देखकर दीदी सहम गयी और बोली - भैया !! तुम मुझे मरोगे क्या ? (अपने सामने बड़ी उम्र की रिश्तेदार लगभग नंगी औरत तो डरते देख मेरा लंड फिर से तनतना उठा) मै थोडा कठोर और आदेशात्मक स्वर में बोला - दीदी तुम चुप रहो ! जैसा मै कहता हूँ वैसा करती जाओ ..थोड़ा आगे आओ ..वो थोड़ा आगे आयी तो मैंने आदेश दिया- अपना कान पकड़ो ! उसने कान पकड़ लिया , फिर मैंने डंडे को उसके बूब्स से सटाया और फिर टावेल के फोल्ड में फंसाकर खिंच दिया ..टावेल खुलकर नीचे जमीन पर गिर पडा | अब दीदी का संगमरमरी तराशा नंगा बदन मेरे सामने था , उनके हाथ कान पर थे और आँखे शर्म के कारण जमीन पे लगी थी ..जो बुर, रात के अँधेरे में मेरे विकराल लंड से द्वन्द युध्ध करने का दुह्साहस कर सफलता पाई थी , वही दिन के उजाले में अपने नंगेपन का एहसास कर जांघो के जोड़ में संकुचित होती जा रही थी | चूत को चिकना करके दीदी ने तो कमाल ही कर दिया था , वह अपने साइज से काफी छोटी लग रही थी ..बिलकुल १६ साल की लौंडिया की चूत की तरह...लगता ही नहीं था की इस चूत ने एक बच्चा पैदा किया है और तीन तीन लंडो का वार झेला है | मैंने डंडे के अगला शिरा को चूत के होंटों को छुलाया ..वो चिहुंकी और मेरी तरफ होटों को काटते हुए देखने लगी | मै शुष्क स्वर में बोला - दीदी अपनी टाँगे फैलाओ ! जैसे ही उसने खड़े खड़े अपनी टाँगे फैलाई वैसे ही बुर के पपोटे खुल गए तब मैंने अपने डंडे को बुर के फांको के बीच फिराने लगा ..दीदी सिहर उठी ..हांलाकि लकड़ी का डंडा आवेश का कुचालक होता है फिर भी उस समय दीदी के रोम रोम का सिहरन डंडे पर महसूस किया जा सकता था ..मैंने आहिस्ते आहिस्ते डंडे को चूत की दरारों में फिराने लगा ..दीदी पूरी गरम हो चुकी थी , इस बात का अंदाजा ऐसे लग रहा था की जब मै डंडे के मूवमेंट को रोक देता तो वो खुद ही हौले हौले कमर हिला कर अपनी चूत को डंडे पर घिसने लगती और जब मैंने डंडा हटाया तो वो चूतरस से भींगा हुआ था |


मैंने दीदी को एक कदम और आगे बुलाया फिर मुर्गा बनने को कहा ..वो कान पर हाथ रखे रखे ही टट्टी करने के अंदाज में बैठ गयी और वो नीचे देख रही थी ..बुर की फांके इस अवस्था में और भी खुलकर चौड़ी हो गयी थी | मैंने अपने फनफनाते लंड को निकर से बाहर निकाला और मुठियाते हुए बोला -दीदी ! मेरी तरफ देखो ! दीदी ने अपना चेहरा उठा कर मेरी तरफ देखा ..उनकी आँखे नशीली थी और उसमे वासना के लाल डोरे तैर रहे थे ..पर मेरी नजर उनकी फ़ैली बुर पर ही टिकी थी फिर मैंने अपने दांये पैर के पंजे से बुर के आसपास एक दो बार सहलाया ..दीदी की आँखे बंद होने लगी थी ..फिर मै अपने पैर के अंगूठे को उनकी बुर की दरारों में फिराने लगा ..दीदी की साँसे गहरी होती जा रही थी जैसे मीलो दौड़ कर आयी हो | मै अपने पंजो पर बुर से निकलती गरम भाप को महसूस कर रहा था ..तभी मैंने अपना अंगूठा दीदी की बुर में पेल दिया ..लगा जैसे किसी गरम भट्टी में अंगूठा घुस गया ..इधर दीदी जोर से सिसकी ..इ .इ ..श ..श ...श ...और उसने अपना हाथ बढ़ाकर मेरा लौड़ा पकड़ लिया | मैंने कहा - अब तुमने जब इसे पकड़ ही लिया है तो इसे अब चुसना पडेगा...उसने प्रश्नवाचक दृष्टी से मेरी और देखा ..मैंने पिक्चर वाली बुक खोलकर दिखाते हुए बोला - ये देखो ..ये देखो सभी पृष्ठों में कैसे लड़की मजे लेकर मोटे मोटे लंडो को चूस रही है ..उसने मेरा लंड छोड़कर बुक हाथ में लेकर हर तस्वीर को गौर से देखने लगी ..इस दरम्यान मेरा अंगूठा मंथर गति से अपना कार्य कर रहा था | फिर मैंने बुक दीदी के हाथ से लेकर दोनों हाथो से उनका सर पकरकर अपना लंड उनके होटों से सटा दिया ..शायद लंड का प्रथम सुगंध उन्हें पसंद नहीं आया ..इसलिए उसने सर पीछे किया ..लेकिन मैंने उसके सर को पकड़ कर फिर से लंड से सटा दिया और शुष्क शब्दों में बोला - चुसना शुरू कर दो दीदी ! नहीं तो इस से भी बड़ी सजा मिलेगी ..ये कहते हुए मैंने अपने पैर के अंगूठे को बुर से निकालकर नीचे से गांड के छेद पर दबाने लगा और गीला होने के कारण थोडा घुस भी गया ..दीदी के चेहरे पर दर्द की लहरे दौड़ी ..उन्होंने फट से गांड को थोड़ा उठकर अंगूठे को अपने चूत के छेद पे भिडाकर बैठ गयी और गप्प से मेरे लंड का सुपाड़ा अपने मुंह में भरने का प्रयास करने लगी ..उनकी जीभ जब सुपाडे के छेद को रगडती तो मै उत्तेजना में हलके से कराह उठता ..आ ..ह ..ह ..इस नवीन आनंद ने मेरे पैर के अंगूठे की गति भी बढ़ा दी थी ...अचानक से दीदी की गति काफी तेज हो गयी ..उन्होंने चुतरों को उठा उठाकर अपनी बुर को मेरे अंगूठे पर पटकना शुरू कर दिया और पुरे जोश के साथ मेरा लंड चूसने लगी ..अब वो मेरा आधा लंड तक मुंह में लेकर पूरी जंगली बिल्ली की तरह चुसे जा रही थी...मेरा बदन उत्तेजना में थरथराने लगा ..दीदी का बदन भी थरथराने लगा और तभी मैंने अपने अंगूठे पर चरमोत्कर्ष का प्रस्फुटन महसूस किया ..कमोवेश मेरा भी यही हाल था ..मेरा शरीर भी अकड़ रहा था और तभी मैंने अपने अन्दर ज्वालामुखी विस्फोट को महसूस किया ..दीदी को भी शायद मेरी अवस्था का एहसास हो गया था ..इसलिए वो अपना मुह हटाने का प्रयास कर रही थी लेकिन मैंने उनके सर को जकड रखा था ..लाख प्रयास के वावजूद वो छुट नहीं पाई और विस्फोट का लावा सीधा उनके हलक में जाकर गिरा ..और जब मैंने छोड़ा तो वो नंगी ही सीधा बाथरूम में भागी |

दीदी जब बाथरूम से वापस आयी तो आते ही शिकायत करने लगी- ये क्या किया राजन ! सारा मुँह गंदा कर दिया , मुझे तो उलटी आ गयी | मै बोला कुछ नहीं , मेरी नजरें उनके पैरों के बीच सजी चिकनी बुर पर टिकी थी | अपनी लगातार निहारी जा रही बुर को देखकर शायद उन्हें कुछ शर्म महसूस होने लगी , तभी वो अपने पैरो को जोड़कर टेबल के किनारे दीवाल से सटकर खडी हो गयी | मै उनके पास जाकर उनके सामने घुटनों के बल बैठ गया , अब मेरी आँखों के ठीक सामने उनकी बुर थी और उसपर पानी की बुँदे चमक रही थी , शायद मेरे पैर के अंगूठे से झड़ने के कारण वो अपनी बुर को भी धो कर आयी थी | मैंने अपनी एक अंगुली से उनके बुर की दरारों को छेड़ा, उनके सारे शरीर में सिहरन दौड़ गयी फिर मैंने बोला - दीदी अपने पैरों को खोलो | उन्हें लगा की मै उनका बुर ठीक से देखना चाहता हूँ , उन्होंने टाँगे फैलाई , मैंने अपनी जीभ निकालकर उनकी बुर को चाटना शुरू कर दिया | दीदी मचल गयी , शायद उनकी बुर को पहली बार किसी खुरदुरी जीभ ने स्पर्श किया था , वो गनगना रही थी और मै पूरी तन्मयता से उनकी बुर चाटते जा रहा था साथ ही अपने दोनों हाथों से उनके चूतरों को मसल रहा था , अचानक मेरे बाएं हाथ की बीच की उंगली उनके गांड के छेद से टकराया , वो उछल पडी और मेरे सर को पकड़ लिया और मस्ती में आकर अपनी बुर को मेरे मुंह से रगड़ने लगी | मैंने ऊँगली का दबाब गांड के छेद पर बनाया परन्तु वो अन्दर घुस ही नहीं पा रहा था | तभी मैंने अपनी जीभ को बुर के अन्दर घुसेड दिया , अब दीदी मस्ती में आँखे बंदकर सिसियाने लगी और मेरे सर को अपने बुर पर दबाने लगी | मैंने दायें हाथ को उनके चुतरों से मुक्त कर जेब से वेसलीन का ट्यूब निकालकर ढेर सारा वेसलीन अपनी उँगलियों में चुपड़ लिया और फिर हाथ को पीछे ले जाकर बाए हाथ की अँगुलियों में भी चुपड़ लिया और ढेर सारा वेसलीन उँगलियों से उनके गांड के छेद पर लगा दिया और फिर बीच की उंगली का दबाब छेद पर बढाया , इसबार बड़ी सरलता से मेरी उंगली बेआवाज छेद में घुस गयी | अबकी वो अपनी चीख रोक न सकी और चिल्लाई -आ ..आ ..ह ..ह .हह .......सा ..ला ..............मार ...डा ..ला ... रे ....पर मै रुका नहीं और ऊँगली के अन्दर बाहर करने की रफ़्तार बढाता रहा बल्कि अब तो मै अपने दोनों हाथ की बीच की ऊँगली को एक साथ उनके गांड में अन्दर बाहर कर रहा था |वो लगातार बड़बड़ाये जा रही थी , अचानक उसने मेरे सर को अपनी पूरी ताकत से बुर पर दबाना शुरू कर दिया और कांपते हुए झड़ने लगी ..आ..ह.ह......मै ... ग...ई...ई...., उनके बुर से निकलता नमकीन पानी मेरी जीभ को तर कर रहा था | ये स्वाद मेरे लिए बिलकुल नया था , मै बुर से निकलते पानी की एक एक बूंद को चाट गया | फिर दीदी निढाल होकर बेड पर वैसे नंगी ही पसर गयी |    






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