Friday, April 25, 2014

FUN-MAZA-MASTI कामदेव ने मेरी सुन ली

FUN-MAZA-MASTI



कामदेव ने मेरी सुन ली


मैं आप सबको अपनी पहली प्रेम गाथा बताना चाहता हूँ।  बात उन दिनों की है जब मैं 12वीं पास करके नए स्कूल में अपनी आगे की पढ़ाई के लिए गया था। मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ कि मैं एक शर्मीला लड़का था, जो हमेशा लड़कियों से बात करने से डरता था। उन दिनों मेरी मुलाकात चारू से हुई।
क्या गजब की काया की स्वामिनी थी वो..! मस्त गोरा बदन, उस पर वो लेज़र स्टाइल के बाल, स्तन तो जैसे उसके एकदम गोल और छोटे थे। कूल्हे थोड़े बाहर की ओर उठे हुए, जो किसी का भी मन मोह लें। मुझे जैसे एक बार देख कर ही प्यार हो गया।
मैंने अपने दोस्त से पूछा- इसका नाम क्या है?
जवाब में वो बोला- इस पर तो पूरा स्कूल फिदा है तू क्या कर लेगा? भूल जा उसे..!
पर मैंने उसकी बात नहीं मानी और बस उससे मन ही मन प्यार करने लगा। धीरे-धीरे मैंने उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया और उससे दोस्ती कर ली। अब हम अच्छे दोस्त बन गए और दिन भर एक-दूसरे से बातें किया करते थे। मैं सारा दिन उससे बातें करता था, मुझसे बात करना उसे बहुत पसंद था। दिन में पचास बार मैं उसके घर के सामने से निकलता था। स्कूल में ढेर सारी बातें करते।
धीरे-धीरे हम आगे बढ़ने लगे थे। मुझे भी अपने लिंग में कुछ महसूस होने लगा था। कोई कड़कपन सा लगता था, जैसा मुठ्ठ मारते समय होता था।
चारू बहुत तेज लड़की थी, वो कभी आगे रह कर भी मुझसे ऐसी बातें नहीं करती थी, पर मेरा मन बहुत होता था, तो मैं कभी-कभी उससे होंठों पर चुम्बन और गले पर चुम्बन करने की बात कहता था और वो ये सब सुनकर मदमस्त हो जाया करती थी। मेरा भी लिंग कड़क हो जाता था तो मुझे सड़का लगा कर काम चलाना पड़ता था।
एक दिन हम स्कूल में बात कर रहे थे, वो गणेश चतुर्थी का समय था। सब लोग नीचे ग्राउंड में आरती के लिए चले जाते थे। रोज तो हम दोनों ने मिलने की प्लानिंग की, ताकि हम अच्छे से बात कर सकें जब क्लास में कोई ना रहे।
उस दिन मैंने अपने दोस्तों को बोल दिया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है, तुम लोग नीचे चलो मैं थोड़ी देर में आता हूँ। चारू ने भी यही किया। अब सब नीचे जा चुके थे। तीसरी मंज़िल पर हमारे सिवा कोई नहीं था। बस वो और मैं ही थे। हम दोनों हाथों में हाथ पकड़ कर एक-दूसरे से बातें कर ही रहे थे कि उसने मुझसे कहा- मुझे चुम्बन करो ना..!
मैंने धीरे से उसके गाल पर एक चुम्बन किया। तो वो बोली- मेरे होंठों पर भी..!
फिर क्या था, हम एक-दूसरे के होंठों पर धीरे-धीरे चुम्बन करने लगे। देखते ही देखते कब हम एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे, पता ही नहीं चला। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। साथ में लिंग भी कड़क होने लगा था। फिर मैं धीरे-धीरे उसके गले पर, फेस पर, होंठों पर उसे चुम्बन करने लगा।
वो पागलों की तरह मुझसे लिपटे जा रही थी और बार-बार हम एक-दूसरे को ‘आई लव यू’ बोल रहे थे।
बहुत ही मस्त अहसास हो रहा था, जो मुझे कभी मुठ्ठ मारने में नहीं हुआ। अब मेरे लिंग से कुछ कुछ तरल निकलने लगा था। चुम्बन करते करते मैं धीरे-धीरे उसकी कमर पर हाथ फेर रहा था और वो भी मस्त हुए जा रही थी।
फिर मैं उसे मेज पर बैठा कर उसके पास जाकर उसे प्यार करने लगा। धीरे-धीरे मैं उसके घुटनों पर से होकर उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा, तो वो कंपकंपाने लगी। फिर हम पागलों के जैसे एक-दूसरे के होंठों को चूमने लगे, पर उस दिन और कुछ संभव नहीं था क्यूंकि हम स्कूल में थे और सब लोग आने वाले ही थे।
तभी चौकीदार आ गया और हम अलग-अलग हो गए, पर हमारा मन नहीं भरा था। हम और प्यार करना चाहते थे जो उस वक्त संभव नहीं हो पाया।
स्कूल के बाद हम घर आ गए और फोन पर बात करने लगे। उसने मुझे बताया कि उसकी पैन्टी पर कुछ गीला-गीला हो रहा था। जब मैं उसे चूम रहा था। उसने बताया कि जब मैंने उसकी जाँघों पर हाथ लगाया था, तो उसे बहुत अच्छा लगा और उसके स्तन भी फूलने लगे थे। फोन पर उससे बात करने के बाद मुझसे रहा नहीं जा रहा था।
मैं उसके साथ चुदाई करने के बारे में सोचने लगा। फिर कभी-कभी हम स्कूल में ही जल्दी पहुँच कर होंठों पर चुम्बन किया करते थे। मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए उसे एक मम्मे पर हाथ फेर देता था, कभी उसके कूल्हों को धीरे-धीरे सहलाता था। पर मैं इससे भी आगे उसकी पैन्टी में हाथ डालना चाहता था। उसकी ब्रा उतार कर उसके मम्मों को चूसना चाहता था। उसकी कोमल योनि पर अपनी जीभ से प्यार करना चाहता और डरता भी था। पता नहीं उसकी योनि कैसी होगी? वहाँ गन्ध तो नहीं आती होगी। ये सब मैंने ब्लू-फिल्मों में ही देखा था और कोई इस बारे में बात भी नहीं करता था।
अब बस मैं उसके प्यार में खो गया था और उससे बहुत प्यार करना चाहता था। उसके सारे कपड़े उतार कर चूमना चाहता था। अपने लिंग से उसकी योनि को सहलाना चाहता था।
कामदेव ने मेरी सुन ली और बहुत जल्दी मेरी यह इच्छा भी पूरी हो गई, जब मैंने उसे बहुत प्यार किया, उसकी योनि को छुआ उस पर अपने होंठों से प्यार किया।
 दोस्तो, मैं और चारू दोनों ही प्यार के रंग में सराबोर होने के लिए तड़प रहे थे। अब सिर्फ़ चुम्बन करने और गले लगने से हमारा मन नहीं भरता था। हम दोनों सेक्स की आग में झुलस रहे थे और रास्ता खोज रहे थे कि हम एक-दूसरे से जी भर के प्यार कर सकें।
एक दिन की बात है जब हम रात को 12 बजे फोन पर बात कर रहे थे और वॉयस-सेक्स कर रहे थे।
तभी बातों-बातों में चारू ने कहा- आज पापा बाहर गए हैं, तुम मेरे घर आ जाओ, मैं गेट खुला रखूँगी, तुम जल्दी से अन्दर आ जाना। पापा रात को 4 बजे तक आयेंगे और मम्मी सो गई हैं।
पहले तो मैं घबरा रहा था, फिर मैंने अपने आप को धीरज दिया और जाने को राज़ी हो गया।
मैं 12.30 बजे घर से निकल कर उसके घर की तरफ चल दिया। उसका घर मेरे घर के पास में ही था सो मैं 5 मिनट में ही उसके घर पहुँच गया।
दोस्तों मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। साथ में वासना की आग भी लगी हुई थी, जो मुझे एक जुनून दे रही थी। मैं जैसे-तैसे उसके घर जाकर गेट तक गया, वो गेट की आड़ में खड़ी थी। मैं झट से अन्दर चला गया और उसके कमरे में चला गया। उसका कमरा पहली मंज़िल पर था और दूसरी मंज़िल पर उसकी मम्मी सो रही थीं।
हमने कमरे में जाकर अन्दर से कुण्डी लगा ली और मैं झट से उसके गले लग गया।
वो भी मुझे ‘जगेश मुझे प्यार करो ना.. आई लव यू !’ बोल रही थी और मैं उसे चूमे जा रहा था। कहीं गले पर तो कहीं गालों पर उसने आसमानी रंग का पजामा और लाल टी-शर्ट पहनी थी, उसके बाल खुले हुए थे। वो मस्त लग रही थी। मैंने उसे गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटाया और उसके बालों में हाथ डाल कर उसे चूमने लगा। हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे। हमारे गुप्तांग एक-दूसरे को छू रहे थे जिसका अहसास हमें अच्छे से हो रहा था।
अब मैंने उसे चूमते हुए उसके टी-शर्ट से होते हुए उसकी कमर में हाथ डाला और धीरे-धीरे सहलाने लगा। वो लम्बी-लम्बी ‘आहें’ भर रही थी। पहली बार मैंने इस तरह से उसे छुआ था। वो मस्त हो कर प्यार के इस रंग में सराबोर हो रही थी।
अब मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी और उसके गले पर और पेट पर चुम्बन करने लगा। उसने हल्के नीले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैं ऊपर से ही उसके मम्मे दबा रहा था। उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था।
वासना की लहरों पर सवार मैंने उसका पजामा उतार दिया। हल्के नीले रंग की पैन्टी और ब्रा में वो मस्त लग रही थी। उसकी मस्त-मस्त टाँगों और बदन पर, उसकी नाभि पर हाथ फेर रहा था और अपनी ज़ुबान से उसे छेड़ रहा था। उसे बहुत मज़ा आ रहा था, जो उसकी मादक सीत्कारों से समझ आ रहा था। मैंने भी अपनी टी-शर्ट और पजामा उतार दिया। अब मैं अंडरवियर में और वो ब्रा-पैन्टी में थी।
मैं उसके पूरे बदन पर चुम्बन कर रहा था और उसके मम्मे को हल्के हल्के दबा रहा था। वो भी मेरी बांहों में सिमट कर मुझे चूम रही थी। मेरी छाती पर अपने हाथों से अठखेलियाँ कर रही थी।
अब बारी थी चारू की ब्रा उतरने की, जो मुझे उसके स्तनों से दूर कर रही थी। मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसके मम्मों को ब्रा से आज़ाद कर दिया।
क्या मस्त मम्मे थे उसके !
मैंने पहली बार किसी लड़की को नंगा देखा था। उसकी लाल-गुलाबी चूचुक और नरम नरम संतरों पर मैं अपने होंठों से चुम्बन करने लगा। उसके चूचुकों को मुँह में लेकर चूसने लगा।
वो ‘आ… आहह…’ की आवाज़ करने लगी। ये सब बहुत मस्त लग रहा था और मेरा लण्ड तो जैसे कड़क होकर एकदम लम्बा हो गया था।
अब मुझसे रहा नहीं जाता था, मैंने उसकी और अपनी दोनों की पैन्टी और अंडरवियर उतार दी। अब हम दोनों नंगे थे। वो मेरे लण्ड को अचम्भे से देख रही थी और उसे अपने हाथ से छू कर देख रही थी और मैं उसके योनि-द्वार को हाथों से छू रहा था और अपनी उंगली धीरे-धीरे उस पर फेर रहा था। हम दोनों प्यार में मस्त हो रहे थे और एक-दूसरे को जी भर कर चूम रहे थे।
अब वो घड़ी आ गई थी दोस्तों, जिसका हम दोनों ही इंतजार कर रहे थे और जो हमने सिर्फ ब्लू-फिल्मों में ही देखा था। आज हम वो सब करना चाहते थे, जो हमने दोस्तों से सुना था कि सुहागरात में ही ये सब होता है। हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में थे और मैं इस पल को इतनी जल्दी नहीं समाप्त होने देना चाहता था।
फिर मैं उसे अपनी शरारतों से और तड़पाने पर मजबूर करने लगा और कैसे मैंने उसे तड़पाया और फिर हम वो सब करने में कामयाब रहे।

 मैं और चारू दोनों पलंग पर नग्न थे और एक दूसरे को होंठों पर चुम्बन कर रहे थे। उसकी योनि काम-रस से गीली होने लगी थी और मेरा लिंग भी कड़क हो चुका था जो थोड़ा प्री-कम निकालने लगा था।
अब मैंने चारू को उल्टा लिटा दिया और उसके कूल्हों की दरारों को अपने हाथों से खोल कर अपने लिंग को उसकी दरारों में सैट कर दिया। मेरा लिंग उसकी योनि के निचले हिस्से को पूरी तरह से चूम रहा था और मेरे लिंग की गर्मी उसे अपनी योनि-द्वार पर महसूस हो रही थी। जैसे ही मेरा लिंग उसकी योनि पर थोड़ा दबाव डालता, चारू की प्यारी सी ‘आहह’ निकल जाती।
इसी अवस्था में, मैं उसके ऊपर लेटा हुआ उसके गले पर, पीठ पर चुम्बन कर रहा था। जब मैं उसके कंधे पर चुम्बन करता तो उसकी सिसकारी निकल जाती और उसे बहुत अच्छा लगता था। वो बार-बार मुझे अपने कंधे पर चुम्बन करने को कह रही थी। मैं भी उसकी सिसकारी से उत्तेजित हो रहा था।
अब मैं चारू को चुम्बन करते हुए अपने लिंग को उसके कूल्हों की दरार में थोड़ा ऊपर-नीचे कर रहा था, जिसके घर्षण से उसकी योनि और तर होने लगी थी। मेरे लिंग का उसकी योनि को रगड़ना उसे मदमस्त कर रहा था।
फिर मैंने चारू को सीधा किया और उसके गले से होता हुआ उसके एक मम्मे को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। कभी मैं स्तन के आसपास चूसता तो कभी उसकी चूचुक को मुँह लेकर अपने दाँतों के बीच दबा लेता और उसकी सिसकारी निकल जाती। पूरे कमरे में चारू की मादकता भरी सिसकारियों की आवाजें निकल रही थीं और माहौल मदमस्त हो गया था।
अब वक़्त था यारों मेरी चिरलम्बित इच्छा पूरी करने का, जो उसके साथ चुदाई करने से पहले करना चाहता था, वो था उसकी योनि को अपनी जीभ से चूसना। उसकी योनि के क्लिट को अपनी जीभ से तंग करना, जिससे वो तड़प उठे और खुद ही मुझे लिंग को अन्दर डालने को कहे।
मैं उसके मम्मों को चूसता हुआ नीचे की तरफ जैसे-जैसे बढ़ रहा था, वैसे-वैसे उसकी साँसें और तेज चलने लगी थीं और उसका पेट जैसे थरथराने लगा था। मैं उसके पेट पर नाभि के इर्द-गिर्द अपनी जीभ फेर रहा था। उसकी कमर पर चुम्बन कर रहा था। फिर मैंने उसकी नाभि पर अपनी जीभ फिराना शुरू किया तो वो तो जैसे तड़फ ही गई, पर मेरा लक्ष्य तो उसकी योनि-द्वार पर था। सो मैं नीचे सरकता हुआ उसकी योनि तक जा पहुँचा।
उसकी योनि बहुत ही मस्त थी, जिस पर बाल नहीं थे। उसने मुझे फोन पर बताया था कि वो हेयर रिमूवर से अपने हेयर साफ करती थी। मैंने जैसे ही उसकी योनि पर अपनी जीभ को छुआ तो जैसे चारू हवा में उछल पड़ी। मैं अपनी जीभ से उसकी योनि को चूस रहा था और वो मस्त ‘आहें’ भरते हुए सिसकारी ले रही थी और मैं अपनी जीभ उसकी योनि के अन्दर-बाहर कर रहा था, जिससे वो मदमस्त हो रही थी।
अब मैं उठ कर उसके ऊपर आया। वो अब मेरे लिंग को अपनी मुट्ठी में लेकर सहला रही थी और धीरे-धीरे दबा रही थी, पर मैं चाहता था कि वो भी मेरे लिंग को अपने होंठों में लेकर चूसे। जब मैंने अपनी इच्छा जाहिर कि तो उसने सीधे मना कर दिया, पर मेरे ज़ोर डालने पर वो थोड़ी देर के लिए चूसने लगी। फिर उसने लिंग मुँह से निकाल दिया और अपनी योनि में डालने को कहने लगी।
अब उसके योनि में लिंग को डालने का यही सही समय था। मैं उसके पैरों के बीच बैठ गया और अपना लिंग उसकी योनि की दरार पर रख दिया। वो मेरा लिंग अन्दर लेने के लिए तड़प रही थी। मैं भी अब और देर नहीं करना चाहता था। मैंने भी एक जोरदार धक्का मारा और लिंग उसकी योनि में डाल दिया।
उसकी ज़ोर से चीख निकल गई जिसे मैंने किसी तरह अपने हाथ से उसके मुँह पर दबा कर कंट्रोल किया।
उसकी योनि से रक्त निकलने लगा था और दर्द के मारे वो अब और अन्दर लेने से डर रही थी, पर मेरे सम्भालने पर वो तैयार हो गई और मैं धीरे-धीरे उसके होंठो को चूसते हुए अपना लिंग उसकी योनि में अन्दर करता गया।
उसे भी अब मज़ा आने लगा था, वो भी उछल-उछल कर मेरा साथ देने लगी। मैं उसके कूल्हे पकड़ कर लिंग को और अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर में ही वो झड़ गई। फिर उसके बाद मैं भी झड़ गया। मैंने अपने वीर्य उसके पेट पर गिरा दिया ताकि कोई परेशानी ना हो।
फिर हम थोड़ी देर ऐसे ही नग्न लेटे हुए एक-दूसरे को चूमते रहे। मैं उसकी योनि को अपनी उंगली से सहलाता रहा। फिर करीब साढ़े बजे मैं उसके होंठों पर चुम्बन करता हुआ नीचे आकर अपने घर की ओर चल दिया।
तो दोस्तो, यह थी मेरे पहके सम्भोग की दास्तान..! जब मैंने पहली बार किसी लड़की को नग्न देखा और उसके अंगों के साथ खेला। इसके बाद मैंने कई बार उसके साथ सम्भोग किया। कभी मेरे घर पर छुप कर, कभी उसके घर पर जाकर के, चुपके-चुपके चुदाई में जो मज़ा आता है, वो सारी ज़िंदगी याद रहता है।
हम दोनों ने फिर कई बार अपनी इच्छा पूरी की और तरह तरह के सम्भोग के आसानों का इस्तेमाल किया।



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