Monday, October 13, 2014

FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -10

FUN-MAZA-MASTI

 घर का बिजनिस -10

 बाकी का सारा दिन इसी तरह गुजर गया कुछ टाइम घर पे और बाकी दोस्तों के साथ आवारागार्दी और मूवी देखने में और रात के दो बजे मैं घर आया तो अम्मी ने दरवाजा खोला और मुझे देखते ही पूछा- बेटा कहाँ गया था?

तो मैंने अम्मी को देखा और कहा- “कहीं नहीं अम्मी, बस जरा दोस्तों के साथ टाइम पास करने गया था…” और सीधा रूम में आकर सो गया

सुबह जब उठा तो 10:00 बज रहे थे। मैं उठा और बाहर बने बाथरूम में नहाने के लिए घुस गया और फिर कपड़े बदलकर बाहर आया और नाश्ता माँगा जो कि दीदी ने तैयार करके दिया और मेरे पास ही बैठ गई। मैं नाश्ता करने लगा तो दीदी ने कहा- “भाई पता है, आज से पायल भी हमारे साथ ही जाया करेगी…”

मैं- अच्छा, किसने बताया तुम्हें? हाँ।

दीदी- भाई, वो बुआ बता रही थी मुझे रात को जब आप बाहर गये हुये थे।

मैं- और क्या बता रही थी बुआ तुम्हें, मुझे भी तो बताओ। क्या पायल के लिए भी कोई मिल गया है?

दीदी- नहीं भाई, मिला तो नहीं लेकिन पायल को वहाँ इसलिए भेज रहे हैं कि वो सब कुछ देखे और इसके लिए तैयार रहे। किसी भी वक़्त कोई मिल सकता है तो पायल वहाँ मौजूद हो।

मैं- चलो अच्छा है और तुम सुनाओ मजे से हो ना कोई परेशानी तो नहीं है?

दीदी- “नहीं भाई, कोई परेशानी नहीं अगर हुई तो आप किसलिए हो…” और फिर मेरे नाश्ता करने के बाद बर्तन उठाकर ले गई और मैं अम्मी के रूम की तरफ चल पड़ा जहाँ कोई भी नहीं था।

मैं अभी बाहर निकला ही था कि दीदी ने कहा- भाई किसे ढूँढ़ रहे हो आप?

मैंने कहा- दीदी, अम्मी का पता है वो कहाँ होंगी इस वक़्त?

दीदी ने कहा- भाई, वो अम्मी… इस वक़्त ना बैठक में हैं और सर झुका लिया।

तो मैं दीदी के पास गया और दीदी को अपने साथ लिपटा लिया और बोला- दीदी, आप इतना शरमाती क्यों हो?

दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप खड़ी रही तो मैंने दीदी का चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया और दीदी की आँखों में देखते हुये दीदी के गालों पे हल्की सी किस कर दी, जिससे दीदी का सारा जिश्म कांप उठा और दीदी अपने आपको मुझसे छुड़वाकर अपने रूम में भाग गई।

दीदी के जाने के बाद मैं बाहर हाल में ही बैठ गया और टीवी देखने लगा। कुछ देर के बाद अम्मी रूम में आ गई और नहाने चली गईं। उनकी वापसी तक मैं ऐसे ही बैठा रहा और अम्मी का इंतेजार करता रहा। अम्मी नहाकर आई और मेरे पास ही बैठ गई।

तो मैंने कहा- अम्मी, बुआ और पायल कहाँ हैं? घर में नजर नहीं आ रही।

अम्मी ने कहा- बेटा, वो पार्लर गई हैं तैयार होने के लिए।

मैंने कहा- लेकिन अम्मी, पायल वहाँ क्या करेगी?

तो अम्मी ने कहा- देखो बेटा, वहाँ जब लोग आयेंगे काम के लिए तो उन्हें जिस चीज की भी जरूरत हो पायल को ही भेजना इस तरह इसका डर भी खतम हो जायेगा।

मैंने अम्मी को कोई जवाब नहीं दिया और चुप हो गया और फिर बाकी दिन भी गुजर गया तो शाम 4:00 बजे मैं अपनी दो बहनों और बुआ को लेकर फ्लैट पे आ गया और उन्हें ड्रेस चेंज करने को बोला। जब तीनों ने ड्रेस चेंज कर ली तो कोई भी किसी से कम नहीं लग रही थी और पायल की गाण्ड तो मेरे लण्ड पे कयामत ढा रही थी। फिर हम वहाँ हाल में ही बैठ गये और इधर-उधर की बातें करके टाइम पास करने लगे।

कुछ ही देर के बाद बापू की काल आ गई उन्होंने कहा- “यार, दो आदमी भेजे हैं तुम्हारी तरफ और पैसे मैं ले चुका हूँ ठीक है…”

मैंने कहा- जी बापू और कोई बात?

तो बापू ने कहा- नहीं, बस ये ही बताना था और हाँ… उनमें से जो पहले भी आया था ना अंजली के लिए अरविंद उसे अंजली ही पसंद है। और दूसरे के पास अपनी बुआ को भेज देना।

मैंने बापू की बात सुनकर काल काट की और दीदी की तरफ देखा और कहा- “लो दीदी, लगता है आपका तो अरविंद आशिक हो गया…”

दीदी मेरी बात सुनकर हल्का सा हँस पड़ी।

तो मैंने कहा- “बुआ, आप भी तैयारी करो आपका भी काम है…”

बुआ ने कहा- “आने दे यार, जो भी है देख लूँगी साले हरामी को…” और हेहेहेहेहे करके हँसने लगी।

इस सबसे पायल थोड़ा घबराई हुई थी, लेकिन जाहिर नहीं होने दे रही थी। तभी दरवाजे की घंटी बजी तो मैं उठकर गया तो देखा कि अरविंद और उसके साथ एक और आदमी भी था जिन्हें मैं अंदर लाया और बिठा दिया।

अरविंद के साथ आने वाले ने बैठते ही पायल को अपनी तरफ खींच लिया क्योंकि अरविंद साहब दीदी को पकड़कर बैठ गये थे।

मैंने फौरन पायल का हाथ पकड़कर वहाँ से उठा दिया और बुआ को उसकी तरफ कर दिया और बोला- ये नहीं, भाई साहब आपने इसके पैसे दिए हैं।

उस आदमी का नाम जो मुझे बाद में पता चला कि बिनोद है। हँस पड़ा और बोला- “क्यों भाई, इसमें और उसमें क्या फरक है?

मैंने कहा- “ये अभी खुली नहीं है, नयी है। और तुमने इसके पैसे नहीं दिए हैं…”

मेरी बात सुनकर उसने दाँत निकाल दिए और बुआ को अपनी तरफ खींच लिया। लेकिन अरविंद साहब ने मेरी तरफ देखा और बोले- क्या सच में अभी सील पैक है ये लड़की?

मैंने कहा- जी सर, अभी तक किसी ने हाथ भी नहीं लगाया इसे।

अरविंद साहब ने अपनी पाकेट से मोबाइल निकाला और बापू को काल करके कहा- “यार, ये जो दूसरी लड़की है ना इसकी सील किसी और से नहीं खुलवाना। मैं कल तुम्हें पैसे दे दूँगा और कल इसकी खोलूंगा। ठीक है? और फिर काल कट करके दीदी के साथ लग गया।



पायल मेरे पास बैठकर बड़ी दिलचस्पी से ये सब देख रही थी।

तभी अरविंद साहब ने कहा- जाओ यार, बोतल ही ले आओ थोड़ा मजा ही कर लूँ। ऐसे मजा ही नहीं आ रहा है।
मैंने पायल को कहा- “जाओ और रूम की अलमारी से शराब की बोतल और गिलास ले आओ…”

पायल गई और 4 गिलास और शराब की बोतल ले आई जो कि उसने अरविंद साहब के सामने रख दी।

अरविंद साहब ने दीदी को कहा- “वो खुद बनाकर उसे पिलाए…”

दीदी उठी और शराब को दो गिलासों में डाल लिया और उस देने लगी।

तो अरविंद ने दीदी को एक हाथ से पकड़कर अपनी झोली में बिठा लिया और बोला- यहाँ बैठकर खुद भी पियो और मैं भी पियूंगा, मुझे इसी तरह मजा आएगा।

अब दीदी अरविंद की गोदी में बैठी शराब की चुस्कियां भर रही थी और अरविंद शराब की चुस्कियों के साथ दीदी की चूचियां को भी मसल रहा था जिससे दीदी का चेहरा लाल होता जा रहा था। अरविंद ने वहाँ बैठकर खुद भी 3 पेग लगाए और दीदी को भी 3 पेग लगवा दिए जिससे दीदी हल्के नशे में हो गई थी और तब अरविंद ने दीदी को अपने साथ लिया और रूम की तरफ चल पड़ा।

बिनोद और बुआ जो कि पहले ही एक रूम में जा चुके थे।

उसके बाद पायल ने मेरी तरफ देखा तो उसका चेहरा लाल तमाटर हो रहा था और उसकी आँखों में इस वक़्त सिर्फ़ एक ही चीज नजर आ रही थी और वो थी सेक्स… सिर्फ़ सेक्स की भूख। अब रूम में से दीदी की आवाजें सुनाई देने लगी थीं- “आअह्ह… सस्स्सीए… उन्नमह… हाँ… खा जाओ… प्लीज़्ज़… ऊओ… इसी तरह… हाँ जोर से चाटो…”

क्योंकि बुआ वाला रूम जरा आगे था और दरवाजा भी लाक था जिसकी वजह से वहाँ से कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही थी।

पायल भी दीदी और अरविंद के रूम से आने वाली आवाज़ों को सुनकर काफी गरम हो रही थी और बैठी अपनी रानों को भींच रही थी।

मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया और टीवी लगाकर बैठ गया क्योंकि सच तो ये था कि इन आवाज़ों की वजह से मेरा अपना हाल भी पतला हो रहा था और दिल कर रहा था कि पायल को यहाँ ही गिरा लूँ और चोद डालूं। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि पायल की सील अभी खुली नहीं थी।

कोई 30 मिनट के बाद अरविंद साहब ने आवाज दी।

तो मैंने पायल की तरफ देखा और कहा- जाओ सुनो, क्या बोल रहे हैं?

पायल उठकर रूम में गई और कुछ देर के बाद घबराई हुई वापिस आ गई और बोली- “भाई, उन्होंने ये पैसे दिए हैं कि कुछ खाने के लिए मंगवा दो। उन्हें भूख लगी है…”

मैंने कुछ देर तक सोचा और पायल को कहा- “तुम ऐसा करो कि ये सामने के बाथरूम में घुस जाओ और जब तक मैं ना बोलूं बाहर नहीं आना, वरना आज ही काम खराब हो जायेगा…”

पायल के बाथरूम में जाकर लाक करने के बाद मैं फ्लैट से निकला और करीब की ही मार्केट से खाना पैक करवा के ले आया। जैसे ही मैं फ्लैट में आया तो देखा कि दीदी और अरविंद बाहर हाल ही में नंगे बैठे हुये थे और दीदी नशे में अरविंद के साथ चिपटी हुई थी।

मैंने पायल को आवाज दी तो वो भी बाथरूम से बाहर आ गई और दीदी को इस तरह नशे में अरविंद के साथ चिपका देखकर शर्मा गई।

मैंने पायल को खाने का सामान दिया जिसे वो किचेन में ले गई और खाना बर्तनों में लगाकर उनके सामने रख दिया।

अरविंद भी उस वक़्त अच्छे खासे नशे में था खाना देखकर बोला- “आ जाओ यार, तुम लोग भी आ जाओ हमारे साथ ही खाना खाओ…” और दीदी को भी खाने के लिए बोलकर खाने पे टूट पड़ा।

खाना खाने के बाद अरविंद ने एक बार फिर से दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और किस करने लगा और दीदी की चूचियां दबाने लगा जिससे दीदी शराब और सेक्स के नशे में गरम हो गई और अरविंद के लण्ड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी। कुछ देर बाद अरविंद ने दीदी को पकड़कर सोफे पे ही सीधा कर दिया और दीदी की चूत को लाल्लप्प सर्ल्लप्प की आवाज के साथ चाटने लगा।

जिसे देखकर पायल भी काफी गरम हो गई और अपनी जीन्स के ऊपर से ही अपनी फुद्दी को रगड़ने लगी।
कुछ देर तक अरविंद दीदी की साफ और प्यारी फुद्दी को चाटता रहा और फिर दीदी की टाँगों को उठाकर अपने लण्ड को दीदी की फुद्दी में घुसा दिया जिससे दीदी के मुँह से सस्सीए… आहिस्ता करो… प्लीज़्ज़… उन्म्मह… की आवाज करने लगी।
.

कहानी जारी है.


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