Tuesday, October 14, 2014

FUN-MAZA-MASTI शीला की जवानी

FUN-MAZA-MASTI


शीला की जवानी

शादियों का सीज़न है, ओर एक शादी में हम भी गये हुए थे। तो बात यूँ शुरू हुई कि हम जो हैं लड़की वालों की तरफ से गये थे, उसी शादी में लड़की का मेकअप करने के लिए लड़की की सहेली आई हुई थी।

थी वो उस तरफ की जहाँ हमारा उस शहर में ऑफ़िस भी था, मेकअप गर्ल थी ब्यूटीशियन शीला !
शीला मेकअप करके दुल्हन को स्टेज पर लेकर आई तो हमारी नज़र दुल्हन की जगह उसकी सहेलियों पर गोते खाने लगी और एकाएक शीला से जा मिली।
नज़र क्या मिली जनाब दुल्हन से ज्यादा खूबसूरत थी शीला ! थोड़ी भीड़भाड़ थी या शीला कुछ ज्यादा व्यस्त थी कि शीला का ध्यान मुझ पर ज्यादा नहीं गया। 


कुछ देर तक सभी लोग पार्टी का लुत्फ़ ले रहे थे और मैं था कि सोच रहा था कि किस तरह इस नाज़ुक हसीना से बात हो !
खैर थोड़ी देर में सब लोग पार्टी का मज़ा लेने लगे, शीला ज्यादातर दुल्हन के नज़दीक ही थी, कुछ लोग खाना कर रहे थे तो कुछ लोग बातें कर रहे थे।
पार्टी में डी.जे भी बज रहा था कि तभी अचानक गाना आया- शीला की जवानी !
गाना शुरू होते ही दुल्हन ने शीला की ओर और शीला ने दुल्हन की तरफ देखा, तो दुल्हन मुस्कुरा उठी और पास खड़ी लड़की शरमा गई।
इस गाने पर उस लड़की के हाव-भाव बदलते लग रहे थे, आँखो में शरम ओर चेहरे पे लाली बढ़ती जा रही थी ! मैंने आइडिया लगाया कि गाने से उसका कोई लिंक है तो सही !
मैंने भी मौका पकड़ा, लड़की वालो की तरफ़ से होने का फ़ायदा उठाया, मैंने एक थोड़ी जान पहचान वाली लड़की से कहा- क्या बात है, लड़की से ज्यादा तो मुझे लगता है शीला जी शरमा रही हैं?
डी जे की आवाज़ में शीला को कुछ समझ नहीं आया, तो वो लड़की बोली- क्या तुम क्या शीला दीदी को जानते हो?
मैंने कहा- हाँ ! मैं उसे जानता हूँ।
तो वो लड़की बोली- आओ मैं तुम्हें उनसे मिलवा दूँ।
दिल में छुपी बात पूरी हो रही थी, शीला से रूबरू जो होने वाले थे हम !
खैर इंतज़ार पूरा हुआ, उस लड़की ने मुझे शीला से मिलवाया, तो वो बोली- मैं तो आपको जानती ही नहीं हूँ?
तो मैंने भी पल भर देर किए बिना कह दिया- हम एक दूसरे को जानते नहीं हैं इसलिए तो जान पहचान करनी है।
साथ खड़ी लड़की बोली- आपने तो कहा था कि मैं इन्हें जानता हूँ, इनका नाम शीला है? 


तो मैंने भी कह दिया कि इतनी सारी लड़कियों में शीला की जवानी गाने पर सिर्फ़ एक लड़की शरमा गई और बाकी गाने का मज़ा ले रही थी तो मैंने सोचा कि हो ना हो, शीला नाम से इस हसीन सी लड़की का कोई तो ताल्लुक है, बस मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा और बिल्कुल निशाने पर लगा।
हम सभी हंसने लगे, एक-दो लड़कियाँ बोली- मान गये बॉस !
मैंने कहा- आप लोगों को बुरा ना लगे तो कुछ डांस- वांस हो जाए?
वो लड़कियाँ फ्लोर पर आ गई लेकिन शीला कुछ झिझक रही थी, मैंने उससे बात करनी शुरू की, वो थोड़ी थोड़ी खुलने लगी, बातों-बातों में एक दूसरे के शहर के बारे में जान लिया तो मैं बोला- फिर तो आप हमारे पड़ोसी ही हैं, इस लिहाज़ से आपका ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ बनता है।
मैंने कहा- बुरा ना मानो तो आप मेरे साथ डांस कीजिए !
हल्की सी ना नुकुर के बाद और लड़कियों के कहने से वो तैयार हो गई।
मैंने जानबूझ कर गाना लगवाया- शीला की जवानी !
वो एक बार तो थोड़ा शरमाई लेकिन थोड़ी देर बाद तो वो ऐसी खुली कि ज़म कर नाची। उसने मेरे साथ काफ़ी देर डांस किया।
डांस के बीच में कई बार मैंने उसे छुआ, एक बार मैंने उसे कमर से पकड़ के घुमाया तो कसम से इतनी प्यारी कमर थी कि छोड़ने का दिल ही नहीं किया। उसके हाथों को जो हाथों में लिया तो छूते ही एक अज़ीब सा गर्माहट सी मिली। 


फिर वो दुल्हन के पास चली गई। शादी के दौरान, खाना खाते वक़्त, या जहाँ भी मौका मिलता, मैं उसे किसी ना किसी बहाने छूता रहा।
उसके बाद मैं उन लोगों के पास गया और मैंने घर जाने की इजाज़त ली तो शीला अपनी सहेली से कहने लगी- मैं भी घर जाना चाहती हूँ, मेरे लिए कोई इंतज़ाम करवा दो।
मैंने बिना देरी किए बोल दिया- अगर आपको घर जाना है तो मैं छोड़ दूँगा, मैं भी तो उसी तरफ से जाऊँगा।
दुल्हन की मम्मी ने कहा- बेटा, कोई बात नहीं, तुम सावन के साथ चली जाओ। सावन हमारे घर का ही लड़का है।
हमने उनसे विदा ली और मैंने शीला को गाड़ी में अपने साथ वाली सीट पर बिठाया, मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे, थोड़ा आगे चल कर मैंने गाड़ी थोड़ी साइड में ली और हल्का सा शीला की तरफ झुक गया, मेरे होंठ उसके होंठों के पास और मेरा सीना उसके कंधे के पास था।
वो सहम सी गई, बोली- सावन, क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं, सीट बेल्ट लगा रहा हूँ तुम्हारे लिए !
वो बोली- मैं तो डर ही गई कि पता नहीं तुम क्या कर रहे हो?
मुझे मौका मिल गया, मैंने कहा- जब कोई अपना साथ होता है तो डरना नहीं चाहिए।
वो बोली- हम एक दूसरे को जानते ही कहाँ हैं?
मैंने कहा- अब तक इतना जान लिया, अभी तो रास्ता काफ़ी लंबा है, इस रास्ते में तो जान-पहचान पता नहीं कितनी गहरी हो जाएगी कि शायद तुम हमें कभी भूल ही ना पाओ?
उसे शायद कुछ अज़ीब सा लगा लेकिन इस बात से वो ज़रा सी मुस्कुरा गई।
मैंने गाड़ी थोड़ी तेज़ चलाई, वो बोली- रात का वक़्त है, थोड़ा धीरे चलो !
बस फिर क्या था, मैं गाड़ी धीरे चलाने लगा, मैंने छेड़-छाड़ करनी शुरू कर दी। मैंने दरवाजे का लॉक चेक करने के लिए हाथ शीला की तरफ आगे किया तो मेरा हाथ उसके वक्ष को छू गया, वो शरमा सी गई। 


मुझे अपने हाथ पर उसके वक्ष की गोलाई महसूस हो रही थी। बस फिर क्या था, मैं गाड़ी धीरे चलाने लगा, मैंने छेड़-छाड़ करनी शुरू कर दी। मैंने दरवाजे का लॉक चेक करने के लिए हाथ शीला की तरफ आगे किया तो मेरा हाथ उसके वक्ष को छू गया, वो शरमा सी गई।
मुझे अपने हाथ पर उसके वक्ष की गोलाई महसूस हो रही थी, उसने कुछ नहीं कहा, यह उसकी तरफ से मेरा पहला स्वागत था।
मैंने समय ज़यादा लगाना सही नहीं समझा क्योंकि मौसम भी थोड़ा बादलों वाला हो चला था, मैंने गियर लीवर के बहाने से उसके हाथ पर हाथ रख दिया, उसने हाथ हटाना चाहा लेकिन मैंने हाथ से दबा के रखा तो उसने खुद को हल्का सा नॉर्मल कर लिया।
उसको सामान्य देख कर मेरी शरारतें बढ़ने लगी, अब मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया तो उसने कुछ नहीं कहा।
बस अगले ही पल मैंने अपना हाथ हटा कर सीधे उसकी जाँघ पर रख दिया, तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपना सर सीट के ऊपर झुका कर लंबी साँस ली।
इतने में मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा- क्या हो गया?
उसने कुछ नहीं कहा, मैंने बहाने से उसके गालों को छू लिया, तो उसके गाल बहुत गर्म हो रहे थे।
अगले ही पल वो बोली- सावन, प्लीज़ ! ऐसा मत करो ! जब भी तुम मुझे छूते हो, मुझे कुछ होने लगता है।
मैंने पूछा- तुम्हें क्या होता है?
वो बोली- करेंट सा लग जाता है मुझे ! 


तभी बरसात शुरू हो गई, मैंने गाड़ी सड़क के किनारे में लगा ली।
वो बोली- सावन, बारिश तेज़ हो रही है ज़ल्दी घर पहुँचा दो।
मैं बोला- तेज़ बारिश में कार चलाना खतरनाक है। वो बोली- घर पर मम्मी मेरा इंतज़ार कर रही होंगी।
मैंने कहा- तुम घर फोन कर दो कि मम्मी, यहाँ बरसात शुरू हो गई है, मैं देर से वापस आ पाऊँगी।
मैंने गाड़ी में संगीत चला दिया तो उसकी मम्मी को लगा कि शायद डी जे की आवाज़ है, उसने बात की तो मम्मी ने कहा- अगर मौसम साफ ना हुआ तो सुबह आराम से आ जाना। फोन रखते ही मैंने शीला को अपनी बाहों में ले लिया, वो थोड़ा शरमा कर मुस्कुरा दी।
वहाँ से 30–35 मिनट की दूरी पर मेरा ऑफ़िस भी था, मैं उसे अपने ऑफ़िस ले आया, मैंने कहा- जब तक बारिश बंद ना हो, तब तक हम यहीं रुक सकते हैं।
मैंने ऑफ़िस की बत्ती जलाई, उसे गौर से देखा, वो बहुत सेक्सी लग रही थी, सर से पाँव तक एक हसीन सा लम्हा मेरे सामने था।
मैंने पीछे से जाकर उसकी कमर पर हाथ रख दिया तो उसने एक अजीब सी आह भरी। मैंने पीछे से ही उसे अपनी बाहों में भर लिया, उसने अपनी गर्दन मेरे कंधे पर झुका दी, मैंने उसकी गर्दन पर चुम्बन जड़ दिया, वो ठहर सी गई, उसकी साँसें तेज़ चलने लगी, मैंने उसके कान पर चूमा तो जैसे टूट कर वो मेरी बाहों में बिखर सी गई, पलट कर उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। 


मैंने कस कर उसे पकड़ लिया, मैं उसके मस्त वक्ष की गर्मी को महसूस कर रहा था वो सच में बहुत गर्म थी, मैंने उसके स्तन दबाने शुरू कर दिए, वो आआहह ऊऊओ उउउफ़फ्फ़ करने लगी और उसके हाथों की पकड़ मेरी कमर पर और भी सख़्त हो गई।
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लिया और चूसने लगा, वो अपना खुद पर काबू खोने लगी। मैंने उसका दुपट्टा हटा दिया तो उसके चूचे बाहर झलकने लगे।
फिर मैंने उसके बालों से उसका क्लिप हटा दिया, उसके बाल उसके गोरे गालों पर लहराने लगे तो वो और भी सेक्सी लगने लगी। उसे देख कर कोई भी अपना होश खो दे।
मैंने उसक कमीज का गला थोड़ा नीचे सरका कर उसके उभार पर चूमा तो लगा मानो कोई मखमली खिलौना हो।
मैंने बिना देर किए उसका कमीज उसके गोरे बदन से अलग कर दिया तो देखा कि लाल रंग की रेशमी ब्रा बड़ी ही मुश्किल से उसकी मोटी मोटी चूचियों को संभाल पा रही थी, दोनों चूचियाँ आज़ाद होने के लिए बेकरार हो रही थी। मालूम होता था जैसे किसी ने दो आमों को बड़े सहेज के रखा हो। अगर ब्रा के हुक खुल जाए तो ये मस्त चूचियाँ सेक्स की तबाही मचा दें किसी के भी दिल में ! 


चाहता तो मैं ब्रा को हटा देता लेकिन मैं उसे ब्रा-पैंटी पहने हुए देखना चाहता था, मैंने उसकी लेगी में दो उंगलियाँ फ़ंसाई और उसे नीचे सरका कर उतार दिया।
उसकी लाल पैंटी जो थोड़ी सी शॉर्ट स्टाइल में थी, इस स्टाइल में तो सच में शीला की जवानी नज़र आ गई, मैंने गौर से देखा, शीला की पैंटी के बीचोंबीच एक लाइन खिंच रही थी, वहाँ से उसकी पैंटी उसकी चूत में अंदर की तरफ जा रही थी, उसकी चूत पैंटी के भीतर से ही अपनी हसीन सेक्सी अदाओं का सबूत दे रही थी, मानो लग रहा हो चूत खुद ही पेंटी को पकड़े हुए हो।
शीला भी अब तक थोड़ी सी खुल चुकी थी, वो बोली- मैं तुम्हारे सामने बिना कपड़ो के खड़ी हूँ और तुम मेरे सामने कपड़े पहन कर? क्या यह ठीक है?
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, मेरे बदन पर कुछ नहीं था।
शीला मेरे करीब आई और उसने मेरे सीने पर चूमा, मैंने वहीं उसे पकड़ लिया मैंने उसे चूमना शुरू किया बिंदास ! जहाँ दिल किया वहाँ !
वो अपना आपा खो चुकी थी। उसने अपनी ब्रा खुद ही उतार दी और अपने स्तन मेरे होंठो पर रख दिए। मैं उसके नर्म गुलाबी चुचूक चूसता रहा और वो आआहह आआहह ऊऊओह सस्स करती रही। 


मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी तो देखा कि उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और सहलाने लगा। वो अब पूरी तरह से अपने काबू से बाहर थी।
मैंने उसे उठाया ओर बाथरूम में ले गया, वहाँ मैंने पहले उसकी चूत को साफ किया फिर उसे अपना लण्ड धुलवाया।
हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए वापस आ गये।
मैंने उसे बाँहो में उठाया और सोफे पर लिटा दिया। सोफे पर लेटी हुई वो मस्त लग रही थी, उसके वक्ष का आकार 34, कमर 26 और कूल्हे 34 होंगे।
मैंने उसके बदन पर हर जगह चूमा सर से लेकर पाँव तक ! 


वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी, मैंने उसे 69 की अवस्था में किया और हम दोनों मुखमैथुन करने लगे। 2 मिनट में ही वो आवाज़ें निकालने लगी- आअहह एया ऊऊऊ उफ ऊऊ ओ आहह !
और पूरा माहौल उसकी सेक्सी आवाज़ों से अरर भी सेक्सी हो गया। 


अब लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था, मेरा लण्ड भी बार बार उसके मुँह से फिसल रहा था, उसकी चूत बिल्कुल चिकनी और गर्म हो चुकी थी, उसने मुझसे कहा- स सावन बस ! अब और मत तड़पाओ ! मैं और नहीं रुक सकती सावन ! प्लीज़्ज़्ज़ फ़क मी ! ओह सावन मेरी चूत को अपना लण्ड से भर दो ! चोद दो मुझे !
और मैंने अपना लण्ड उसकी नर्म-गर्म चूत पर रखा और थोड़ा दबाया तो लण्ड थोड़ा सा कस कर मगर उसके हल्के से करहाने के साथ सीधा अंदर चला गया। उसकी चूत कसी थी, लण्ड पर उसकी चूत का कसाव महसूस हो रहा था, हर एक झटके में वो आआआहह ऊऊउककचह ऊ ओह सावन ऊओउउउच आआहह ऊऊउउ आहह आअहह आहह उउउफफ्फ़ आआहह की सुरीली आवाज़ें निकाल रही थी, उसकी मस्त आवाज मेरे लण्ड को और भी ज्यादा जोशीला बना रही थी। 


उसने मेरे ऊपर अपनी पकड़ बढ़ानी शुरू कर दी, मैं समझ गया था कि शीला चरमसीमा पर पहुँचने वाली थी, मैंने भी अपने लण्ड को टॉप गियर में डाला और जोर-जोर से शीला की प्यासी चूत में अपने सावन के बादलों को बरसाने लगा। 


शीला अब अपना सेक्स पूरा करके ठंडी हो चुकी थी, उसकी चूत दो पल के लिए और ज्यादा कस गई थी, उसकी चूत से चुदाई रस टपक कर बाहर आने लगा था और चूत ढीली होने लगी थी। मुझे अभी समय चाहिए था, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाले रखा, उसके हाथ मेरी कमर को थामे हुए थे।
5-7 मिनट बाद मेरा भी रस शीला की जवानी पर बरस गया।
सच मानो दोस्तो, शीला के साथ यह चुदाई भूलने वाली नहीं थी।
मैं थोड़ी देर उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसने भी मुझे खुद के ऊपर थामे रखा, उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि एक तो वो थक गई थी और दूसरे मैं उसके ऊपर था।
मैं उसके ऊपर से हट कर उसके साथ सोफे पर लेट गया, मेरे हाथ उसके स्तनों को सहला रहे थे।
तभी मैं बोला- बारिश बंद हो गई ! घर चलें?
तो शीला ने कहा- मम्मी ने कहा था कि अगर बरसात ज्यादा हो तो सुबह आराम से आ जाना !
बस फिर क्या था, हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा दिए, उसने अपने हाथ से मेरे लण्ड को छुआ तो थोड़ी देर में ही वो 4 इंच से बढ़ कर 7 इंच का हो गया।
शीला को धीरे से मैंने अपने ऊपर कर लिया और उसे खुद के ऊपर बिठा कर उसके ही हाथों से मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डलवा दिया। बैठने की वजह से लण्ड चूत में ज्यादा गहराई गया, उसे ठोड़ा दर्द हुआ लेकिन वो मुस्कुरा कर लण्ड चूत में लील गई। 

उसने थोड़ी देर तक मेरे ऊपर लण्ड की सवारी की फिर थोड़ी ही देर में वो थक गई।
मैंने कहा- कीप इट अप यार ! मुझे अच्छा लग रहा है !
वो बोली- सावन प्लीज़ ! मेरे पैर दर्द कर रहे हैं ! पहले ही तुमने आज मुझे चलने लायक नहीं छोड़ा ! और अभी तो पता नहीं मेरी क्या हालत होगी/
मैंने उसे अपने ऊपर से हटा कर अपने लण्ड के नीचे ले लिया, उसकी चूत से मस्त मस्त आवाज़ें आ रही थी, मैं उसकी आँखो में देख रहा था, एक अजीब सी कशिश थी उसकी आँखों में !
जिससे मुझे लगा कि शीला सेक्स का पूरा मज़ा ले रही है और उसे मेरा साथ अच्छा लग रहा है।
मुझे शीला की चूत में अपना लण्ड डाले हुए 10 मिनट हो चुके थे, शीला की चूत अब थोड़ी सी हरकत में आने लगी थी, मैं समझ गया कि वो फिर से अपना सेक्स पूरा करने वाली है।
तभी उसकी आवाज़ें निकलनी शुरू हो गई- आ आ अहह आ आआ अहहः ऊऊहह ऊ ऊओफ फफ्फ़ साअववअन आआ अहह ऊऊहह ऊऊययईएहह आआः उउफ्फ़ उफफफ्फ़ उफफफफ्फ़ आअहह अहह आह आहा हहा हहआ आ आ..!
और शीला एक बार फिर टपक गई। 



मेरा वीर्यपात होने में अभी देर थी, शीला थक चुकी थी लेकिन उसके चेहरे पर चमक थी, वो अभी थक कर भी मेरा साथ देना चाहती थी, मेरे लण्ड ने जैसे कसम खा ली हो कि वो शीला की चूत में टपकेगा ही नहीं क्यूंकि मुझे कम से कम 15 मिनट हो गये थे और इस बीच शीला एक बार फ़िर से झड़ चुकी थी। मुझे दूसरी बार कुछ ज्यादा ही समय लग गया, शीला की चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी उसके नीचे से सोफा गीला हो गया था।
मैंने शीला को एक नैपकिन दिया, उसने अपनी चूत साफ की, मैंने देखा कि उसकी गुलाबी चूत लाल हो चुकी थी और थोड़ी सूज भी आ गई थी।
मैंने उसे कहा- तुम्हें दर्द हो रहा होगा, चलो अब बस करते हैं, और चुदाई नहीं करते।
लेकिन उसने कहा- जब तक तुम्हारा पूरा ना हो जाए तब तक में नहीं थकूंगी, तुम अपना लण्ड मेरी चूत में डालो, तुम्हारे लण्ड के लिए मेरी चूत की खुशी दिखा रहा है यह लाल रंग।
मैंने 25 मिनट शीला के साथ चुदाई की तब जाकर दूसरी बार मैं झड़ा और इस बीच शीला दो बार हो चुकी थी। मेरा भी पेट दर्द करने लग गया था, मैं शीला के साथ ही लेट गया। मैंने समय देखा तो रात के 3 बज चुके थे, हम, दोनों एक दूसरे को बाँहो में लिए हुए वहीं सो गये।
सुबह आँख खुली, 6 बजने वाले थे, शीला बिना कपड़ों के मेरे साथ लेटी हुई थी। वो इतनी प्यारी लग रही थी कि सुबह सुबह चाह कर भी खुद को रोक नहीं पा रहा था, मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों को चूसने लगा। 



पता नहीं कब में शीला की नींद टूट गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। मेरा लण्ड पहले ही सख्त था, ऊपर से मानो शीला ने होंठ चूस कर जैसे करेंट लगा दिया हो, मेरा हाथ शीला की चूत पर जा पहुँचा और शरारती उंगलियाँ चूत को इस तरह छेदने लगी जैसे मानो वो चूत को लण्ड के लिए सजाने संवारने लगी हों।
शीला ने मेरा लण्ड अपने हाथ में ले लिया, हम दोनों एक चुदाई के लिए फिर से तैयार हो चुके थे, मैंने अपना लण्ड हाथ से पकड़ा और शीला ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों से चूत के दरवाजे खोल के लण्ड का एक बार फिर से स्वागत किया।
मैंने लण्ड चूत में डाला हुआ था और कभी शीला के कानों पर चूमता तो कभी उसके होंठों को चूसता, सच वो लम्हे किसी जन्नत से कम नहीं थे, शीला की चूत कसी और सूजी हुई थी इस लिए उसे दर्द भी हो रहा था लेकिन दर्द की कराहट से ज्यादा कमरे में उसकी सेक्सी आवाज़ें आ रही थी- ऊ ऊऊ ओह आआ आह सावन ऊ ओफ फफ्फ़ आआ आहह बस करो सावन ! अब और नहीं सहा जाएगा। 


और अन्ततः साथ साथ ही मेरा ओर शीला का सेक्स भी पूरा हुआ, आसमान की बरसात तो पता नहीं किस वक़्त थम गई लेकिन शीला का सावन अभी भी उसकी जवानी की प्यास बुझा रहा था।
शीला की जवानी के कितने भी चर्चे रहे हो लेकिन सच्चाई यह है शीला की जवानी क्या है यह अब आपको भी पता है।
दोस्तो यह थी आपके सावन की नहीं, आपके सावन और शीला की ए









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