Monday, August 17, 2015

FUN-MAZA-MASTI बहकती बहू--17

FUN-MAZA-MASTI


बहकती बहू--17


कामया :: ठीक है बाबूजी ! हम अपने आपको आपके भरोसे छोड़ रहे हैं .प्लीज़ धीरे धीरे करना आपका बहुत मोटा है और वो फिर से घोड़ी बनने के लिए आने लगी .तो मदनलाल तुरंत बोल पड़ा .
मदनलाल ::"" ना ना डार्लिंग वहीं लेटी रहो अब हम लिटा कर उपर चढ़ कर करेंगे !"" कामया वहीं पर लेट गई और उसने बाबूजी के लिए अपनी टाँग उठा दी और मुस्कराते हुए बोली !
कामया :: जानू ""करेंगे नही चोदेन्गे बोलिए ""
अब आगे - - - - - - -
कामया की उठी टाँग के बीच दिख रहे जन्नत के नज़ारे को देख देख कर मदनलाल के मुँह मे पानी आ रहा था पर वो इस बार कोई जोखिम नही लेना चाहता था उसने वही प्रक्रिया अपनाने का फ़ैसला किया जो वो इस तरह के मौके पर हमेशा से करता आया था .वो उठा बहू के ड्रेसिंग टेबल पर गया और एक एक कर दराज चेक करने लगा ! इधर टाँग उठाए लेटी कामया को एक एक पल एक एक बरस समान लग रहे थे वो बेसबरी से बोली
कामया :: ओह हो !! अब वहाँ क्या ढूंड रहे हो जो चाहिए वो यहाँ बेड मे पड़ा है उसने अपनी कातिल जवानी को देखते हुए कहा !
मदनलाल :: क्या बात है कुछ ज़्यादा ही जल्दी है ?
कामया :; हाँ है हमे अपनी सुहाग रात मनानी है बस ! लड़कियाँ इसी रात का इंज़ार सारी उमर करती हैं !
तब तक मदनलाल को भी कोल्ड क्रीम मिल चुकी थी उसने उसे बहू को दिखाते हुए कहा
मदनलाल :: "" जानू ये ढूंड रहे थे अब तुम्हे तकलीफ़ कम होगी !आख़िर तुम्हारी तकलीफ़ का ख्याल भी तो रखना है हमे "" कामया बाबूजी को अपना इतना ख्याल रखते देख खुश हो गई उसे अपने इस नये प्रेमी पर बड़ा प्यार आने लगा ,वो बोली
कामया :; प्लीज़ आप हमारी ज़्यादा चिंता मत करो ! जो होगा देखा जाएगा ! सभी लड़कियों के साथ ये होता है हम कोई न्यारे थोड़ी हैं ! अब हम कुछ नही बोलेंगे ! अगर हम चीखे चिल्लाएँ तो भी आप रुकना मत और अपना काम कर के ही रहना ! हमे आज के आज ही प्रेग्नेंट होना है हाँ !




मदनलाल क्रीम लेकर फिर से कामया की टाँगों के बीच आ गया! उसने ढेर सारी क्रीम निकाली और बहू की बुर मे उंगली डाल दी!वो उंगली को घुमा घुमा कर क्रीम पूरे टनल मे रगड़ने लगा ! बाबूजी की इस हरकत से बहू बिस्तर पर मछली की तरह मचलने लगी ! आख़िर मचले भी क्यों ना बाबूजी की उंगली भी सुनील के हथियार के बराबर मोटी जो थी !मदनलाल ने दो तीन बार क्रीम निकली और बहू की प्रेम गुफा को अच्छी तरह भर दिया उसे आज इस गुफा मे प्रवेश जो करना था !फिर उसने अपने मूसल मे भी कोल्ड क्रीम चिपोड दिया ! कामया कनखियों से बाबूजी के लिंग महाराज का क्रीम अभिषेक देख रही थी मन तो उसका कर रहा था क़ि अपने हाथ से बाबूजी के लिंग का अभिषेक करे लेकिन पहला दिन होने के कारण वो शर्मा रही थी !लिंग और योनि को अच्छी तरह लूब्रिकेट करने के बाद मदनलाल एक बार फिर बहू की टाँगों के बीच आ गया !उसने अपना सूपड़ा बहू की चुत के मुहाने मे फिट कर दिया द्वार पर मेहमांन के कदम पढ़ते ही कामया ने दहशत से आँख मूंद ली !

इस मेहमान का वो पिछले कई महीनो से इंतज़ार कर रही थी !मदनलाल भी जानता था क़ि मिसाइल लॉंचिंग की तरह ही चुदाई का भी सबसे क्रिटिकल समय शुरू के पल ही होते हैं जब लॅंड चुत को फैलाता हुआ आगे बढ़ता है ! उसने सोचा किसी तरह बहू सूपड़ा अंदर करने दे दे बस !एक बार सूपड़ा अंदर हो गया तो उसके हर धक्के मे लॅंड सेल्फ़ गाइडेड मिसाइल की तरह अपने पूर्व निर्धारित मार्ग मे बढ़ता चला जाएगा !सारी समस्या सूपड़ा अंदर करने मे आने वाली थी क्योंकि इसी वक्त बहू हिल डुल कर बार बार निशाने को भटका सकती थी एक बार एंट्री हो जाने पर बहू का इतनी आसानी से हिलना डुलना भी संभव नही हो पाएगा !उसने बहू को समझाने की कोशिश करते हुए कहा
मदनलाल ::: जानू बस सामने वाला हिस्सा अंदर जाते समय ही तुमको थोड़ा दर्द होगा उस समय थोड़ा कोओपरेट करना बस एक डेढ़ इंच अंदर चला जाए तो फिर उसके बाद दर्द नही होता है ! समझ रही हो ना ?
कामया : जी बाबूजी आप करिए हम अब सब कुछ सहने को तैयार हैं ! बस आज हमे पूरी औरत बना दीजिए !
मदनलाल ने पोज़िशन ली और मूसल पर दबाव डाल दिया ! लॅंड धीरे धीरे कामया की बुर के छोटे से छेद को फैलाते हुए अंदर घुसने की कोशिश करने लगा ! इसी के साथ कामया के चेहरे मे दर्द के भाव आने लगे .!मदनलाल ने एक हल्का झटका मारा और टोपा आधा अंदर चला गया ! बहू के मुख से हल्की सी चीख निकल गयी उसकी आँखों मे आँसू आ गये ! 


बाबूजी के टोपे ने उसकी नन्ही सी परी को बुरी तरह से फैला दिया था उसे भयंकर दर्द हो रहा था लेकिन वो दर्द को पीती जा रही थी ! आधा सुपाड़ा सही पोज़िशन मे फँसा देख मदनलाल ने एक और शॉट मार दिया ! भला हो कोल्ड क्रीम का जिसके कारण फ्रीकसन बिल्कुल नही था और इस धक्के के कारण पूरा टोपा बहू के अंदर गुम हो गया ! कामया के मुख से एक बार फिर घुटि घुटि सी चीख निकल गई ! उसके माथे पर ढेर सारा पसीना निकल आया !उसे ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने उसके नाज़ुक हिस्से मे गरम खंजर घुसेड दिया हो और वो बीच से दो हिस्से मे चिर गई हो ! उसकी दशा देख कर तो मदनलाल को भी तरश आने लगा पर वो कर भी क्या सकता था आख़िर बहू को मां भी बनाना था और एक पूर्ण स्त्री भी जो अपने यौवन का असल अनुभव पा सके ! कामया बिस्तर मे तड़प रही थी लेकिन उसने एक बार भी बाबूजी को मना नही किया मानो आज वो संकल्पित होकर ही आई थी क़ि आज इस सुख को पाकर रहेगी ! मदनलाल बहू की पीड़ा को लंबा नही खींचना चाहता था जो होना है उसे एक बार मे करने का विचार कर उसने एक लंबी साँस ली अपना एक हाथ बहू के मुख पर रख कर उसे हल्का से बंद कर दिया और एक जबरदस्त देसी शॉट मार दिया ! इस शॉट के साथ ही बहू ज़ोर सी चीखी पर उसकी आवाज़ अंदर ही रह गई और इधर क्रीम से लिपटा हुआ मदनलाल का मूसल पूरा का पूरा जड़ तक बहू की कोख मे समा गया !



कामया को ऐसा लग रहा था जैसे उसका अंत समय आ गया है! जांघों के जोड़ पर महा भयंकर दर्द हो रहा था वो सिर कटे बकरे के तरह तड़प रही थी !बीच बीच मे उसे अर्ध बेहोशी सी आ जाती ! एक बारगी तो उसे लगा क़ि बाबूजी के इस ख़ूँख़ार क़ोबरे को बेवजह ही उसने प्यार कर लिया मगर असल मर्द से चुदने की आकांक्षा से वो फिर चुपचाप तड़पति रही ! इधर किला फ़तह करने के अहसास से ही मदनलाल बावरा हुआ जा रहा था ! जिस बहू को चोदने के लिए वो पिछले छः महीने से तड़प रहा था आज वो उसके नीचे बिछी पड़ी थी और वो उसपर आसमान बन के छाया हुआ था !आज उसकी जिंदगी की सबसे बढ़ी अभिलाषा पूरी हो गई थी कामया के मादक ,उत्तेजक महा सेक्सी बदन को भोगने की ! इस बेइंतहा खुशी के बाद भी वो कामया के दर्द के प्रति पूरी तरह सजग था इसलिए आगे कुछ करने के पहले वो चाहता था क़ि बहू को कुछ आराम लग जाए ताकि वो भी सेक्स को एंजाय कर सके और मदनलाल के साथ उसकी सुहागरात एक यादगार रात बन जाए !मदनलाल ने बहू की जाँघो को और उपर की ओर करके अपने को उसके बीच अच्छी तरह अड्जस्ट कर लिया ताकि बहू निकल ना पाए हालाकी वो ये नही जानता था क़ि आज कामया किसी भी हालत मे निकलना नही चाहती थी ! अच्छे से सेट होने के बाद उसने अपना हाथ बहू के मुँह से हटाया और अपने प्यासे होंठ बहू के तपते होंठो से लगा दिए ! वो कामया को फिर से गरम करने की कोशिश कर रहा था जिससे उसका ध्यान दर्द से हट जाए! मदनलाल ने अपना हाथ बढ़ा कर बहू के संतरों पर रख दिया और लगे हाथ उनका भी रस निचोड़ने लगा ! ससुर की मेहनत रंग लाने लगी ,बहू को अब थोड़ा आराम सा लग रहा था ! इतनी देर मे उसकी बुर भी बाबूजी के मूसल के हिसाब से अड्जस्ट हो गई थी लेकिन दर्द अभी भी काफ़ी हो रहा था ! समय की नज़ाकत को देखते हुए मदनलाल बिना कुछ किए कामया के रसीले होंठो का रस पीने लगा ,बीच बीच मे वो उसकी मांसल जांघों को भी सहला देता ताकि बहू को तेज़ी से आराम लग जाए वैसे भी आज कोल्ड क्रीम ने काफ़ी काम आसान कर दिया था इसके पहले वो क्रीम का इस्तेमाल ज़्यादातर केवल गांद मारने के वक्त ही करता था ! चूत चोदने मे उसे क्रीम अच्छी नही लगती थी क्योंकि इससे लॅंड पर चुत की रगड़ का मज़ा ख़त्म हो जाता है लेकिन बहू के लिए सब माफ़ था !
मदनलाल बहू को यूँ ही कुछ देर प्यार करता रहा ताकि बहू धीरे -२ आराम महसूस कर सके !
अचानक मदनलाल ने देखा क़ि बहू का हाथ उसकी पीठ पर आ गया है और वो उसे सहला रही है ! इसका मतलब ??? मतलब बहू आगे के सफ़र के लिए तैयार हो रही है ! औरत अपने मुँह से बोलती नही क़ि सैंया पेलो हमे बस इसी तरह के इशारों से अपने ""मन की बात "" कह देती है ! कामया बाबूजी को सहला रही थी लेकिन उसका दर्द अभी भी बना हुआ था अलबत्ता काफ़ी कम हो गया था ! नीचे लेटी वो बाबूजी के हथियार को अपने अंदर महसूस कर कर के रोमांचित हो रही थी ! उसे ऐसा लग रहा था क़ि लॅंड उसके नाभि से भी आगे चला गया है ! बाबूजी का इतना मोटा था क़ि उसकी पूरी चुत ने लॅंड को जकड़ रखा था ! कामया को अपनी चुत ठसाठस भरी हुई लग रही थी ! आज उसने अपने अनछुई गहराई को नये सिरे से जाना था !वो खुद चकित थी की कैसे इतनी बड़ी और मोटी चीज़ उसके अंदर समा गई है ! जितने देर से बाबूजी उसके अंदर अपना डाल के पड़े थे उतने देर मे तो सुनील सो जाता था !बाबूजी ने जब कामया के हाथों मे तेज़ी देखी तो धीरे से बोले
मदनलाल :: बहू दर्द दे रहा है क्या ?
कामया :; हाँ बाबूजी अभी भी दर्द हो रहा है !
मदनलाल :; तो निकाल लें क्या ?
कामया :: नही नही !! कामया तपाक से बोल पड़ी ? थोड़ा दर्द तो होगा ही ! आप हमारी फ़िक्र नही करें !
मदनलाल :: जानू तुम्हारी फ़िक्र नही करे तो किसकी करें ? तुम तो अब हमारी साँस मे बस गई हो ! अगर तुम्हे माँ बनाने का चक्कर नही होता तो हम ये करते भी नही !
कामया :: अच्छा बिना किए रह लेते क्या ?कामया ने इठलाते हुए कहा !
मदनलाल :: रह तो नही पाते लेकिन तुम्हे तकलीफ़ देने से तो हम शांत ही रहना पसंद करते !
कामया :: आप से किसने कहा क़ि हमे आप तकलीफ़ दे रहे हैं ? हमने कोई शिकायत की क्या ?
मदनलाल :: नहीं लेकिन आप हमे बहुत दर्द मे दिख रही हैं
कामया :: वो तो सब औरत के साथ होता है there is no gain without pain .जब हम शिकयात करें तब बोलिएगा !
मदनलाल :: तो फिर बोलो अब करें क्या ? कामया ने इस बात पर कुछ कहा नही बस बाबूजी के चूतडो को कस कर पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया !
मदनलाल बहू के इस तरह खींचने का इशारा समझ गया था किंतु उसने मज़े लेने के लिए फिर पूछा
मदनलाल :; बोलिए ना जान करें क़ि नही
कामया :: करें क्या होता है? आपने हमे करें बोलने के लिए मना किया है फिर खुद क्यों कह रहे हैं ?
मदनलाल :: ओह सॉरी सॉरी हमारा मतलब चुदाई करें क्या ?
कामया :: बाबूजी एक बात बताइए आपका वो पूरा हमारे अंदर धंसा पड़ा है अब चुदाई क्या किसी और चीज़ को बोलते है जो परमिसन माँग रहे हो ? मदनलाल बहू की बात का अर्थ समझ गया क़ि बहू की चुदाई तो शुरू ही गई है अब तो केवल धकापेल बचा है सो उसने अपने लॅंड को सूपाड़े तक बाहर खींच लिया ! लॅंड के बाहर की ओर रगड़ खाते ही कामया के अंदर एक बार फिर दर्द की लकीर खींचती चली गई और मुँह से दर्द और आनद की मिली जुली सिसकारी निकल गई
कामया :: आ आ बाबूजी !! धीरे करिए दर्द हो रहा है ओ मम्मी किस जालिम के हत्थे पड़ गई मैं ?ये तो जान लेने पर तुले हैं ? जब तक वो आगे कुछ बोलती मदनलाल ने एक करारा शॉट मारा और मूसल फिर जाकर बहू की बच्चेदानी से टकरा गया
कामया :: ओह जालिम धीरो करो ना ! हमको मारना है ? थोड़ा सबर नही कर सकते ?
मदनलाल :: तुम ही तो बोल रही थी हमारी चिंता मत करो ! फिर अब क्या हुआ ? जान बस थोड़ा सा दो चार धक्के सह लो फिर देखना तुम्हे कितना मज़ा आएगा ! आज तुम जवानी का असली मज़ा लूटोगी! ऐसा लगेगा जैसे तुम आकाश मे उड़ रही हो !
कामया :: तो आकाश मे उड़ाइए ना जल्दी से !! बस आप भी हमारे साथ साथ ही उड़ना हाँ !
मदनलाल :: हम तो साथ मे ही रहेंगे ! आख़िर पाइलट तो हम ही हैं !
कामया :: तो पाइलट साहब अब उड़ने चले ? और कहते हुए कामया ने नीचे से अपनी गदराई gaand उछाल दी !


मदनलाल कच्ची कलियों को फूल बनाने मे माहिर था ! बहू भी अभी फूल बनने की शुरआत मे थी सो मदनलाल ने अपने पेंतीस साल के अनुभव का उपयोग करना शुरू कर दिया ! वो शुरू मे हल्के और स्थिर गति से स्ट्रोक लगाने लगा ! हर धक्के के साथ बहू की चुत ससुरजी के मूसल को आत्मसात करती जा रही थी ! हर गुज़रते धक्के के साथ कामया का दर्द कम होता जा रहा था और मज़ा बढता जा रहा था !बीस पच्चीस धक्के के बाद बहू की चुत ने बाबूजी के विशाल लॅंड के हिसाब से अपने आप को ढाल लिया और उसी के रंग मे रंग गई ! अब हर धक्के कामया को आनंद के एक नये संसार का अनुभव करा रहे थे ! मदनलाल ने जब बहू को लॅंड का लुत्फ़ उठाते देखा तो उसने शॉट मे तेज़ी लाना शुरू कर दिया अब वो बहू को असली मर्द का मज़ा देना चाहता था !उसके स्ट्रोक अब लंबे और गहरे होने लगे ! मोटा लॅंड जब बहू की बुर् की नाज़ुक मगर आती संवेदनशील त्वचा को रगड़ता तो कामया सिहर उठती वो अब वास्तव मे अपने को आसमान मे उड़ता महसूस करने लगी थी !
मदनलाल का लॅंड ख़ासा लंबा था जो बहू के सेरविक पर टच होता तो कामया को ऐसा लगता जैसे उसके शरीर के अंदर छोटे मोटे परमाणु बॉम्ब फट रहे हों ! बॉम्ब के धमाकों से निकलने वाली गर्मी उसे पागल करने लगी थी आज उसे ये समझ आ गया क़ि मिलन के समय हेरोइन क्यों ये गाना गाती है ""जागी बदन मे ज्वाला सैंया तूने क्या कर डाला "! दरअसल मर्द लोग इस ग़लतफहमी मे रहते हैं क़ि वो सेक्स का मज़ा ले रहे हैं जबकि सेक्स का असली मज़ा स्त्रियों के नसीब मे ही होता है !काम शास्त्र के अनुसार स्त्री के शरीर मे पुरुष से आठ गुना ज़्यादा काम होता है ! छः फुट के एक पुरुष मे सिर्फ़ छः इंच का लिंग होता है उसमे भी आगे का एक इंच का हिस्सा ही कामानंद को ग्रहण करता है जबकि स्त्री उपर से नीचे तक हर अंग से काम के आनंद को भोगती है !उसके होंठ ,गर्दन कंधे गाल ,चुचे ,पेट आर्मपिट ,जाँघ नितंब सभी अंग कामानंद को ग्रहण करते हैं ! वास्तव मे तो काम के खेल मे पुरुष केवल स्त्री का काम सेवक होता है! जिस प्रकार अखाड़े मे पहलवान अपने चेलों से अपनी मालिश करवाते हैं वैसे ही स्त्री काम क्रीड़ा के खेल मे पुरुष से अपनी सेवा करवाती रहती है और दिखावा ऐसा करती है जैसे वो बहुत कुछ बलिदान कर रही है !इस विषय मे प्रक्रति भी पूरी तरह स्त्री के ही साथ है ! सेक्स के एक दौर मे पुरुष सिर्फ़ एक बार स्खलन के समय ओर्गस्म का अनुभव करता है जबकि स्त्री मॅल्टीपल ओर्गस्म का आनंद उठाती है !
काम के विषय मे प्रकृति भी पूरी तरह स्त्रियों के साथ है ! प्रकृति ने स्त्री को चरमोत्कर्ष प्राप्त करने के लिए तीन -२ अंग दिए हैं! पहला है क्लिट जो योनि के बाहर रहता है और अक्सर स्त्रियाँ इससे छेड़छाड़ करके मज़ा लेती रहती है ! दूसरा है योनि मार्ग मे लगभग दो इंच अंदर जिसे जी स्पॉट कहते है ! गठान जैसी ये आकृति स्पर्श से आनंद की तरंगे देने लगती हैं !जी स्पॉट से मिलने वाला चरम सुख क्लिट से तीव्र होता है ! और आख़िरी मे सबसे परमानंद को प्राप्त करने वाला सुख मिलता है सेरविक ओर्गस्म से ! स्त्री गर्भाशय के मुख पर सेन्सिटिव नर्व एंडिंग होती है जिस पर लिंग मुण्ड का दबाव अति आनंद को उत्पन्न करता है ! दुर्भाग्य से केवल १० प्रतिशत स्त्री ही इस अनुभव को जान पाती है क्योंकि सेरविक तक चोट पहुँचने के लिए कम से कम सात इंच का अंग होना चाहिए ! कामया उन कुछ भाग्यशाली स्त्रियों मे थी जिसकी किस्मत मे अश्व लिंग आ चुका था ! बाबूजी का मूसल अब उसे सातवें आसमान की सैर पर ले जा रहा था ! उसके तीनो पॉइंट पर बाबूजी चोट कर रहे थे !धीरे धीरे बहू अपनी सुधबुध खोती जा रही थी ! अब वो बाहर की दुनिया भूल चुकी थी उसका सारी एकाग्रता अब अपनी योनि मे ही स्थिर हो चुकी थी ! संभोग अब उसके लिए समाधि बनता जा रहा था !उसकी आँखें आनंद के अतिरेक मे गुलाबी हो गई थी ,पुतलियाँ फैल गई थी और वो अपने सिर को आजू बाजू पटक रही थी ! जब उसके लिए सहना मुश्किल हो गया तो उसने अपने हाथ मदनलाल की पीठ पर गाढ दिए और नाख़ून चुभो दिए ! मदनलाल को उसके नाख़ून की चुभन महसूस हो रही थी पर इस वक्त तो वो बहू के हाथ से तलवार की चोट भी हँसते हुए सह लेता ! जिसकी इतनी सुंदर और मादक अंगों वाली बहू हो और उपर से वो ससुर पर मेहरबान हो तो ससुर का बुढ़ापा तो जवानी से भी ज़्यादा मजेदार हो जाता है ! मदनलाल ने बहू को फुल्फ़ोर्म मे देखा तो उसकी दोनो टांगे उठा कर अपने कंधे मे रख ली ! इस आसन मे बहू की पूरी चुत उभर कर बाहर आ गई थी जिससे मूसल और अंदर तक चोट करने लगा ! अब मदनलाल ने फाइनल धमा चोकड़ी मचानी चालू कर दी ! उसके शक्तिशाली कुल्हों का प्रहार बहू के नाज़ुक नितंबों पर पढ़ता तो पूरा बेड हिल उठता ! हर चोट पर कूल्हे से ठप ठप की आवाज़ आने लगी ! ऐसा लग रहा था जैसे इस ठप ठप क़ि आवाज़ को ध्यान मे रखकर ही किसी संगीतकार ने तबले का अविष्कार किया होगा ! ठप ठप की उत्तेजक ध्वनि,कामया के मुँहसे निकालने वाली मादक सिसकारी और कोमल चुतडो पर पड़ने वाली बाबूजी की टक्कर ने बहूरानी को ओर्गस्म के शिखर पर पहुँचा दिया !उसने अब अपना हाथ बाबूजी के कुल्हों पर रख दिया और हर धक्के के साथ उसे अपनी ओर खींचने लगी ! हालत जब बेकाबू हो गये तो वो उट पटांग बकने लगी !
कामया :: ओह माइ गॉड ! वॉट आ प्लीज़र दिस इस !!! या या हनी फक मी हार्ड ! आइ वॉंट तो डाइ इन यौर आर्म्स ?

मदनलाल :: ओह बेबी डोंट से लाइक दिस ! मरे तुम्हारे दुश्मन! आज तो सिर्फ़ जीने की बात करो सोना ! जस्ट एंजाय एंड हॅव दा प्लेषर ऑफ युवर बॉडी !
कामया :: या या हनी !! फक मी फक मी एंड ओन्ली फक मी !! फक मी अस हार्ड अस यू कॅन ! डोंट बी मर्सी ऑन मी
जस्ट टियर मी !! ओह बाबूजी वॉट आ वंडरफुल फकर यू आर ? वॉट आ लोवेली बहुचोद यू आर ?
कामया की अश्लील बातों ने मदनलाल के ज्वालामुखी को और भड़का दिया वो अब शिवजी को छोड़े गये नंदीसांड़ की तरह गचगच पिलाई करने लगा ! खुद उसके लिए भी अब अपने लावा को ज़्यादा देर रोके रखना कठिन था ! उसे बहूरानी के कमरे मे आए पौन घंटा हो चुका था वो खुद ताज्जुब मे था क़ि ऐसी रसीली जवानी के सामने वो अपने को इतने देर कंट्रोल कैसे कर लिया ! ताबड़तोड़ हमले करते हुए उसने भी बहू को कहा
मदनलाल :: ले रानी ले असली मर्द के लॅंड का मज़ा ! तू भी बहुत दिनो से हमारे लॅंड के लिए तड़प रही थी !ले ले अब भरपूर मज़ा !! आज तुझे ऐसा चोदेन्गे क़ि तू भी जान जाएगी मर्द कहते किसे हैं ! आज के बाद तू सुबहा शाम हमारे लॅंड की पूजा करेगी !! और फिर मदनलाल ने अंतिम और भीषण हमला चालू कर दिया !! पूरे कमरे मे ज़लज़ला सा आ गया था ! कमरे मे तरह तरह क़ि आवाज़े आने लगी !कभी बहू की सिसकारी तेज़ होती तो कभी चूतड़ से उठने वाली थाप की आवाज़ तेज़ हो जाती तो कभी पलंग की चरमराहट तेज़ हो जाती ! सब एक दूसरे से आगे निकलना चाह रहे थे !
कामया अब तक कितनी बार झड़ चुकी थी उसे खुद होश नही था ! मदनलाल की बातों ने उसमे और आग भर दी वो ज़ोर ज़ोर से नीचे से अपनी गान्द उछालने लगी !
कामया :: हाँ जानू दीजिए ना मज़ा जितना दे सकते हो ! और सिर्फ़ सुबह शाम क्यों हम तो चोबीस घंटे आपके लौड़े की पूजा करेंगे ये है ही पूजने लायक ! औरत को तो ये पागल बना देता है ! इधर जब मदनलाल ने देखा क़ि वो छूटने वाला है तो उसने अपना मूसल पूरा अंदर तक पेल दिया ! स्खलन के समय उसने स्ट्रोक मारना भी बंद कर दिया और केवल अपनी माँस पेशियों के सहारे अपना बीज़ बहूरानी की कोख मे भरता रहा ! कुछ देर तक फुहार मारने के बाद वो भर भरा कर बहू के उपर ही पसर गया ! वो अपना मूसल अंदर ही डाला रहा ताकि वीर्य बाहर ना आ पाए वो आज के आज ही बाप/दादा बन जाना चाहता था !
इधर कामया के बदन मे शोले भड़क रहे थे ! कामया की आँखों मे मदन;लाल ने एक अजीब सा नशा देखा था ! ऐसा नशा जिस भी लड़की की चुदाई करते समय उसने उनकी आँखों मे देखा था वो सब उसकी दीवानी बन गई थी !यहाँ तक की शादी शुदा भी अपने घर वालों से छुप छुप कर उसका लॅंड खाने आती थी ! बाबूजी समझ गये क़ि बहू भी अब गयी काम से अब इसे दिन रात हमारा मूसल ही दिखाई देगा ! जैसे ही मदनलाल का लावा कामया की बच्चेदानी मे पड़ा वो उस खुशी को संभाल नही पाई और एक बार फिर झरझर कर बहने लगी ! उत्तेजना के चरम पर उसका पूरा बदन काँप रहा था सो उसने ज़ोर से मदनलाल को पकड़ लिया और छिपकली की तरह बाबूजी से चिपक गई !
 

1 comment:

Rakesh kumar said...

awesome story

please post next part

jaldi

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