Monday, March 15, 2010

कामुक-कहानियाँ होली ने मेरी खोली पार्ट--1

कामुक-कहानियाँ

होली ने मेरी खोली पार्ट--1


हेल्लो दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए होली के अवसर पर होली की एक मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ

इस होली पर मम्मी पापा बाहर जा रहे थे. रीलेशन मैं एक डेथ हो गयी थी. माँ ने पड़ोस की आंटी को मेरा ध्यान रखने को कह दिया था. आंटी ने कहा था कि आप लोग जाइए सुनीता का हम लोग ध्यान रखेंगे. माँ ने हमे समझाया और फिर चली गयी. पड़ोस की आंटी की एक लड़की थी मीना जो मेरी उमर की ही थी. वह मेरी बहुत फास्ट फ्रेंड थी. वह बोली कि जब तक तुम्हारे मम्मी पापा नही आते तुम खाना हमारे घर ही खाना.


मैं खाना और समय वही बिताती पर रात मैं सोती मीना के साथ अपने घर पर ही थी. दो दिन हो गये और होली आ गयी. सुबह होते ही मीना ने अपने घर चलने को कहा तू मैं रंग से बचने की लिए बहाने करने लगी. मीना बोली,


"मैं जानती हूँ तुम रंग से बचना चाहती हो. नही आई तू मैं खुद आ जाओंगी."

"कसम से आओंगी."


मैं जान गयी कि वह रंग लगाए बगैर नही मानेगी. मैने सोचा कि घर पर ही रहूंगी जब आएगी तू चली जाऊंगी. होली के लिए पुराने कपड़े निकल लिए थे. पुराने कपड़े छ्होटे थे. स्कर्ट और शर्ट पहन लिया. शर्ट छ्होटी थी इसलिए बहुत कसी थी जिससे दोनो चूचियों मुश्किल से सम्हल रही थी. बाहर होली का शोरगुल मच रहा था. चड्डी भी पुरानी थी और कसी थी. कसे कपड़े पहनने मैं जो मज़ा आ रहा था वह कभी शलवार समीज़ मैं नही आया. चलने मैं कसे कपड़े चूचियों और चूत से रगड़ कर मज़ा दे रहे थे इसलिए मैं इधर उधर चल फिर रही थी. मैं अभी मीना के घर जाने को सोच ही रही थी की मीना दरवाज़े को ज़ोर ज़ोर से खटखटते हुवे चिल्लाई,


"अरी सुनीता की बच्ची जल्दी से दरवाज़ा खोल." मैने जल्दी से दरवाज़ा खोला तू मीना के पीछे ही उसका बड़ा भाई रमेश भी अंदर घुस आया. उसकी हथेली मैं रंग था. अंदर आते ही रमेश ने कहा,


"आज होली है बचोगी नही, लगाउन्गा ज़रूर." मीना बचने के लिए मेरे पीछे आई और बोली,


"देखो भयया यह ठीक नही है." मेरी समझ मैं नही आया कि क्या करूँ. रमेश मेरे आगे आया तो ऐसा लगा कि मीना के बजाय मेरे ही ना लगा दे. मैं डरी तो वह हथेली रगड़ता बोला,


"बिना लगाए जाउन्गा नही मीना."


"हाए राम भयया तुमको लड़कियों से रंग खेलते शरम नही आती."


"होली है बुरा ना मानो. लड़कियों को लगाने मैं ही तो मज़ा है. तुम हटो आगे से सुनीता नही तू तुमको भी लगा दूँगा." मैं डर से किनारे थी. तभी रमेश ने मीना को बाँहों मैं भरा और हथेली को उसके गाल पर लगा रंग लगाने लगा. मीना पूरी तरह रमेश की पकड़ मैं थी. वह बोली,


"हाए भयया अब छ्चोड़ो ना."


"अभी कहाँ मेरी जान अभी तू असली जगह लगाना बाकी ही है." और वह पीछे से चिपक मीना की दोनो चूचियों को मसल उसकी गांद को अपने लंड पर दबाने लगा.


"हाए भयया." चूचियों दबाने पर मीना बोली तो रमेश मेरी ओर देख अपनी बहन की दोनो चूचियों को दबाता बोला,


"बुरा ना मानो होली है." मीना की मसली जा रही चूचियों को देख मैं अपने आप कसमसा उठी. चूचियों को अपने भाई के हाथ मैं दे मीना की उछाल कूद कम हो गयी थी. रमेश उसकी दोनो चूचियों को कसकर दबाते हुवे उसकी गांद को अपनी रानो पर उठाता जा रहा था.


"हाए भयया फ्रॉक फट जाएगी."


"फट जाने दो. नयी ला दूँगा." और अपनी बहन के दोनो अमरूद दबाने लगा. इस तरह की होली देख मुझे अजीब लगा. मैं समझ गयी कि रमेश रंग लगाने के बहाने मीना की चूचियों का मज़ा ले रहा है.


"हाए अब छोड़ो ना." मीना ने मेरी ओर देखते कहा तो मुझे मीना मैं एक बदलाव लगा. तभी रमेश उसकी गोल गोल चूचियों को दबाते हुवे बोला.


"हाए इस साल होली का मज़ा आ रहा है. हाए मीना अब तो पूरा रंग लगाकर ही छोड़ूँगा." और पूरी चूचियों को मुट्ही मैं दबा बेताबी से दबाने लगा. मैने देखा कि रमेश का चेहरा लाल हो गया था. अब मीना विरोध नही कर रही थी और वह मेरे सामने ही अपनी बहन को रंग लगाने के बहाने उसकी चूचियाँ दबा रहा था. इस सीन को देख मेरे मंन मैं अजीब सी उलझन हुई. मेरी और मीना की चूचियों मैं थोड़ा सा फ़र्क था. मेरी मीना से ज़रा छ्होटी थी. सहेली की दबाई जा रही चूचियों को देख मेरी चूचियाँ भी गुदगुदाने लगी और लगा कि रमेश मेरी भी रंग लगाने के बहाने दबाएगा. मीना को वह अपने बदन से कसकर चिपकाए था.


"हाए छ्होरो भाय्या सहेली क्या सोचेगी." मीना चूचियों को फ्रॉक के उपर से दबवाती मेरी ओर देख बोली तो रमेश उसी तरह करते हुवे मेरी ओर देखता बोला,


"सहेली क्या कहेगी. उसके पास भी तो हैं. कहेगी तो उसको भी रंग लगा दूँगा." मेरी हालत यह सब देख खराब हो गयी थी. मैने सोचा कि कही रमेश अपनी बहन को रंग लगाने के बहाने यही चोदने ना लगे. समझ मैं नही आ रहा था कि क्या करूँ. मुझे लगा कि वह अपनी बहन को चोदने को तैय्यार है. मीना के हाव भाव और खामोश रहने से ऐसा लग रहा था क़ी उसे भी मज़ा मिल रहा है. मैं जानती थी कि चूचियाँ दबवाने और चूत चुदवाने से लड़कियों को मज़ा आता है. मुझे दोनो भाई बहन का खेल देखने मैं अच्छा लगा. मेरे अंदर भी वासना जागी. तभी मीना ने नखरे दिखाते हुवे कहा,


"हाए भाय्या फाड़ दोगे क्या?"


"क़ायदे से लग्वओगि तो नही फाड़ेंगे. मेरी जान बस एक बार दिखा दो." और रमेश ने दोनो चूचियों को दबाते हुवे उसके चूतड़ को अपनी रान पर उभारा.


"अच्छा बाबा ठीक है. छ्होरो, लगवाउन्गि."


"इतना तडपा रही हो जैसे केवल मुझे ही आएगा होली का मज़ा. आज तो बिना देखे नही रहूँगा चाहे तुम मेरी शिकायत कर दो." फिर मीना मेरी ओर देख बोली,


"दरवाज़ा बंद कर दो सुनीता मानेगा नही." मीना की आवाज़ भारी हो रही थी. चेहरा भी तमतमा रहा था. रमेश ने देखने की बात कर मेरे बदन मैं सनसनी दौड़ा दी थी. मेरी चूत भी चुन्चुनाने लगी थी. तभी रमेश उसकी चूचियों को सहलाकर बोला,


"बंद कर दो आज अपनी सहेली के साथ मेरी होली मन जाने दो." रमेश की बात ने मेरे बदन के रोए गन्गना दिए. मैने धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया. जैसे ही दरवाज़ा बंद किया, रमेश उसको छोड़ आँगन मैं चला गया. उसके जाते ही अपनी सिकुड़ी हुई फ्रॉक ठीक करती मीना मेरे पास आ बोली,


"सुनीता किसी से बताना नही. भाय्या मानेगे नही. देखा मेरी चूचियों को कैसे ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे." उसका बदन गरम था. मैं गुदगुदते मैं से बोली,


"हाए मीना तुम चुदाओगि क्या?" मीना मेरी चूचियों को दबाती मेरे बदन मैं करेंट दौड़ा बोली,


"बिना चोदे मानेगा नही. कहना नही किसी से."


"पर वह तो तुम्हारा बड़ा भाई है.?"


"तू क्या हुवा. हम दोनो एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं."


"ठीक है नही कहूँगी."


"हाए सुनीता तुम कितनी अच्छी सहेली हो." और मीना मेरी दोनो चूचियों को छ्चोड़ मुस्करती हुई अंगड़ाई लेने लगी. हर सीन के साथ मेरी चूचियों और चूत का वोल्टेज इनक्रीस हो रहा था. रमेश अभी तक आँगन मैं ही था. मीना की दबाई गयी चूचियाँ मेरी चूचियों से ज़्यादा तेज़ी से हाँफ रही थी. उसकी फ्रॉक बहुत टाइट थी इसलिए दोनो निपल उभरे थे. अब मेरी कसी चड्डी और मज़ा दे रही थी. मैं होली की इस रंगीन बहार के बारे मैं सोच ही रही थी कि मीना मुस्करती हुई बोली,


"सुनीता तुम्हारी वजह से आज हमको बहुत मज़ा आएगा."


"बुला लो ना अपने भाय्या को."


"पेशाब करने गया होगा. देखा था मेरी चूचियों को दबाते ही भाय्या का फनफना गया था. हाए भाय्या का बहुत तगड़ा है. पूरे 8 इंच लंबा लंड है भाय्या का." मस्ती से भरी मीना ने हाथ से अपने भाई के लंड का साइज़ बनाया तो मुझे और भी मज़ा आया. अब खुला था कि सहेली अपने भाई से चुदवाने को बेचैन है.


"हाए मीना मुझे तो नाम से डर लगता है. कैसे चोद्ते हैं." अब मेरे बदन मैं भी चीटियाँ चल रही थी.


"बड़ा मज़ा आता है. डरने की कोई बात नही फिर अब तू हम लोग जवान हो गये हैं. तू कहे तो भाय्या से तेरे लिए बात करूँ. मौका अच्छा है. घर खाली ही है. तुम्हारे घर मैं ही भाय्या से मज़ा लिया जाएगा. जानती है लड़को से ज़्यादा मज़ा लड़कियों को आता है. हाए मैं तो दबवाते ही मस्त हो गयी थी." मीना ऐसी बाते करने मैं ज़रा भी नही शर्मा रही थी. उसके मुँह से चुदाई की बात सुन मेरी चूत तड़पने लगी. मेरा मंन भी मीना के साथ उसके भाई से मज़ा लेने को करने लगा. मीना की बात सही थी कि घर खाली है किसी को पता नही चलेगा. मैं मीना को दिल की बात बताने मैं शर्मा रही थी. तभी मीना ने अपनी दोनो चूचियों को अपने हाथ से दबाते हुवे कहा,


"अपने हाथ से दबाने मैं ज़रा भी मज़ा नही आता. तुम दब्ाओ तो देखें." मैने फ़ौरन उसकी दोनो चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ कर दबाया तो मुझे बहुत मज़ा आया पर सहेली बुरा सा मुँह बनाती बोली,


"छोड़ो सुनीता मज़ा लड़के से दबवाने मैं ही आता है. तुमने दबवाया है किसी से?"


"नही मीना." मैं उसकी चूचियों को छोड़ बोली तो मीना मेरे गाल मसल बोली,


"तो आज मेरे साथ मेरे भाय्या से मज़ा लेकर देखो ना. मेरी उमर की ही हो. तुम्हारी भी चुदवाने लायक होगी. हाए सुनीता तुम्हारी तू खूब गोरी गोरी मक्खन सी होगी. मेरी तू सावली है." मीना की इस बात से पूरे बदन मैं करेंट दौड़ा. मीना ने मेरे दिल की बात कही थी. मैं मीना से हर तरह से खूबसूरत थी. वह साधारण सी थी पर मैं गोरी और खूबसूरत. मैने सोचा जब रमेश अपनी इस बहन को चोदने को तैय्यार है तो मेरी जैसी गदराई कुँवारी खूबसूरत लौंडिया को तो वह बहुत प्यार से चोदेगा.


"हाए मीना मुझे डर लग रहा है."


"पगली मौका अच्छा हैं मेरे भाय्या एक नंबर का लौंडियबाज़ है. भाय्या के साथ हम लोगो को खूब मज़ा आएगा. भाय्या का लंड खूब तगड़ा है और सबसे बड़ी बात यह है कि आराम से तुम्हारे घर मैं मज़ा लेंगे." मीना की बात सुन फुदक्ति चूत को चिकनी रानो के बीच दबा रज़ामंद हुई तो मीना मेरी एक चूची पकड़ दबाती बोली,


कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त ...............



HOLI NE MEREE KHOLI paart--1

hello dosto main yaani apka dost raj sharma holi ke avasar par holi ki ek mast kahaani lekar

haajir hun

Is holi par mummy papa bahar ja rahe the. Relation main ek death ho gayi thi. Maan ne pados ki aunty ko mera dhyaan rakhne ko kah diya tha. Aunty ne kaha tha ki aap log jaiye Sunita ka ham log dhyan rakhenge. Maan ne hame samjhaya aur fir chali gayi. Pados ki aunty ki ek ladki thi Mina jo meri umar ki hi thi. Wah meri bahut fast friend thi. Wah boli ki jab tak tumhare mummy papa nahi aate tum khana hamare ghar hi khana.


Main khana aur samay wahi bitati par raat main soti Mina ke saath apne ghar par hi thi. Do din ho gaye aur holi aa gayi. Subah hote hi Mina ne apne ghar chalne ko kaha tu main rang se bachne ki liye bahan karne lagi. Mina boli,


"main janti hoon tum rang se bachna chahti ho. Nahi aayi tu main khud aa jaongi."

"kasam se aaongi."


Main jaan gayi ki wah rang lagaye bagair nahi manegi. Maine socha ki ghar par hi rahongi jab ayegi tu chali jaongi. Holi ke liye purane kapde nikal liye the. Purane kapde chhote the. Skirt aur shirt pahan liya. Shirt chhoti thi isliye bahut kasi thi jisse dono choochiyon mushkil se samhal rahi thi. Bahar holi ka shorgul mach raha tha. Chaddi bhi purani thi aur kasi thi. Kase kapde pahanne main jo maza aa raha tha wah kabhi shalwar sameez main nahi aaya. Chalne main kase kapde choochiyon aur choot se ragad kar maza de rahe the isliye main idhar udhar chal fir rahi thi. Main abhi Mina ke ghar jane ko soch hi rahi thi ki Mina darwaze ko zor zor se khatkhatate huwe chillayi,


"ari Sunita ki bachchi jaldi se darwaza khol." Maine jaldi se darwaza khola tu Mina ke peechhe hi uska bada bhai Ramesh bhi andar ghus aaya. Uski hatheli main rang tha. Andar aate hi Ramesh ne kaha,


"aaj holi hai bachogi nahi, lagaunga zaroor." Mina bachne ke liye mere peechhe aayi aur boli,


"dekho bhayya yah theek nahi hai." Meri samajh main nahi aaya ki kya karoon. Ramesh mere aage aaya tu aisa laga ki Mina ke bajay mere hi na laga de. Main dari tu wah hatheli ragadta bola,


"bina lagaye jaunga nahi Mina."


"haye ram bhayya tumko ladkiyon se rang khelte sharam nahi aati."


"holi hai bura na mano. Ladkiyon ko lagane main hi tu maza hai. Tum hato aage se Sunita nahi tu tumko bhi laga dunga." Main darr se kinare thi. Tabhi Ramesh ne Mina ko baanhon main bhara aur hatheli ko uske gaal par laga rang lagane laga. Mina poori tarah Ramesh ki pakad main thi. Wah boli,


"haye bhayya ab chhodo na."


"abhi kahan meri jaan abhi tu asli jagah lagaana baaki hi hai." Aur wah peechhe se chipak Mina ki dono choochiyon ko masal uski gaan ko apne lund par dabane laga.


"haye bhayya." Choochiyon dabane par Mina boli tu Ramesh meri oor dekh apni bahan ki dono choochiyon ko dabata bola,


"bura na mano holi hai." Mina ki masli ja rahi choochiyon ko dekh main apne aap kasmasa uthi. Choochiyon ko apne bhai ke haath main de Mina ki uchal kood kam ho gayi thi. Ramesh uski dono choochiyon ko kaskar dabate huwe uski gaand ko apni raano par uthata ja raha tha.


"haye bhayya frock fatt jayegi."


"fatt jane do. Nayi laa dunga." Aur apni bahen ke dono amrood dabane laga. Is tarah ki holi dekh mujhe ajib laga. Main samajh gayi ki Ramesh rang lagane ke bahane Mina ki choochiyon ka maza le raha hai.


"haye ab chhoro na." Mina ne meri oor dekhte kaha tu mujhe Mina main ek badlaaw laga. Tabhi Ramesh uski gol gol choochiyon ko dabate huwe bola.


"haye is saal holi ka maza aa raha hai. Haye Mina ab tu poora rang lagakar hi chhorunga." Aur poori choochiyon ko muthhi main daba betabi se dabane laga. Maine dekha ki Ramesh ka chehra laal ho gaya tha. Ab Mina virodh nahi kar rahi thi aur wah mere saamne hi apni bahan ko rang lagane ke bahane uski choochiyan daba raha tha. Is scene ko dekh mere mann main ajib si uljhan huyi. Meri aur Mina ki choochiyon main thoda sa fark tha. Meri Mina se zara chhoti thi. Saheli ki dabayi ja rahi choochiyon ko dekh meri choochiyan bhi gudgudane lagi aur laga ki Ramesh meri bhi rang lagane ke bahane dabayega. Mina ko wah apne badan se kaskar chipkaye tha.


"haye chhoro bhaiyya saheli kya sochegi." Mina choochiyon ko frock ke upar se dabwati meri oor dekh boli tu Ramesh usi tarah karte huwe meri oor dekhta bola,


"saheli kya kahegi. Uske paas bhi tu hain. Kahegi tu usko bhi rang laga dunga." Meri halat yah sab dekh kharab ho gayi thi. Maine socha ki kahi Ramesh apni bahan ko rang lagane ke bahane yahi chodne na lage. Samajh main nahi aa raha tha ki kya karoon. Mujhe laga ki wah apni bahan ko chodne ko taiyyar hai. Mina ke haaw bhaaw aur khamosh rahne se aisa lag raha tha ki use bhi maza mil raha hai. Main janti thi ki choochiyan dabwane aur choot chudwane se ladkiyon ko maza aata hai. Mujhe dono bhai bahan ke khel dekhne main achha laga. Mere andar bhi waasna jaagi. Tabhi Mina ne nakhre dikhate huwe kaha,


"haye bhaiyya faad doge kya?"


"kayde se lagwaogi tu nahi faadenge. Meri jaan bas ek baar dikha do." Aur Ramesh ne dono choochiyon ko dabate huwe uske chutad ko apni raan par ubhara.


"achha baba theek hai. Chhoro, lagwaungi."


"itna tadpa rahi ho jaise kewal mujhe hi ayega holi ka maza. Aaj tu bina dekhe nahi rahunga chahe tum meri shikayat kar do." Fir Mina meri oor dekh boli,


"darwaza band kar do Sunita manega nahi." Mina ki aawaz bhari ho rahi thi. Chehra bhi tamtama raha tha. Ramesh ne dekhne ki baat kar mere badan main sansani dauda di thi. Meri choot bhi chunchunane lagi thi. Tabhi Ramesh uski choochiyon ko sahlakar bola,


"band kar do aaj apni saheli ke saath meri holi man jane do." Ramesh ki baat ne mere badan ke roye gangana diye. Maine dheere se darwaza band kar diya. Jaise hi darwaza band kiya, Ramesh usko chhor aangan main chala gaya. Uske jaate hi apni sikudi huyi frock theek karti Mina mere paas aa boli,


"Sunita kisi se batana nahi. Bhaiyya manege nahi. Dekha meri choochiyon ko kaise zor zor se daba rahe the." Uska badan garam tha. Main gudgudate mann se boli,


"haye Mina tum chudwaogi kya?" Mina meri choochiyon ko dabati mere badan main current dauda boli,


"bina chode manega nahi. Kahna nahi kisi se."


"par wah tu tumhara bada bhai hai.?"


"tu kya huwa. Ham dono ek doosre se bahut pyar karte hain."


"theek hai nahi kahungi."


"haye Sunita tum kitni achhi saheli ho." Aur Mina meri dono choochiyon ko chhod muskarati huyi angdayi lene lagi. Har saan ke saath meri choochiyon aur choot ka voltage increase ho raha tha. Ramesh abhi tak aangan main hi tha. Mina ki dabayi gayi choochiyan meri choochiyon se zyada tezi se haanf rahi thi. Uski frock bahut tight thi isliye dono nipple ubhre the. Ab meri kasi chaddi aur maza de rahi thi. Main holi ki is rangeen bahar ke bare main soch hi rahi thi ki Mina muskarati huyi boli,


"Sunita tumhari wajah se aaj hamko bahut maza aayega."


"bula lo na apne bhaiyya ko."


"peshab karne gaya hoga. Dekha tha meri choochiyon ko meeste hi bhaiyya ka fanfana gaya tha. Haye bhaiyya ka bahut tagda hai. Poore 8 inch lamba lund hai bhaiyya ka." Masti se bhari Mina ne haath se apne bhai ke lund ka size banaya tu mujhe aur bhi maza aaya. Ab khula tha ki saheli apne bhai se chudwane ko bechain hai.


"haye Mina mujhe tu naam se darr lagta hai. Kaise chodte hain." Ab mere badan main bhi cheetiyan chal rahi thi.


"bada maza aata hai. Darne ki koi baat nahi fir ab tu ham log jawan ho gaye hain. Tu kahe tu bhaiyya se tere liye baat karoon. Mauka achha hai. Ghar khali hi hai. Tumhare ghar main hi bhaiyya se maza liya jayega. Janti hai ladko se zyada maza ladkiyon ko aata hai. Haye main tu dabwate hi mast ho gayi thi." Mina aisi baate karne main zara bhi nahi Sharma rahi thi. Uske munh se chudai ki baat sun meri choot dupdupane lagi. Mera mann bhi Mina ke saath uske bhai se maza lene ko karne laga. Mina ki baat sahi thi ki ghar khali hai kisi ko pata nahi chalega. Main Mina ko dil ki baat batane main Sharma rahi thi. Tabhi Mina ne apni dono choochiyon ko apne haath se dabate huwe kaha,


"apne haath se dabane main zara bhi maza nahi aata. Tum dabao tu dekhen." Maine fauran uski dono choochiyon ko frock ke oopar se pakad kar dabaya tu mujhe bahut maza aaya par saheli bura sa munh banati boli,


"chhoro Sunita maza ladke se dabwane main hi aata hai. Tumne dabwaya hai kisi se?"


"nahi Mina." Main uski choochiyon ko chhod boli tu Mina mere gaal masal boli,


"tu aaj mere saath mere bhaiyya se maza lekar dekho na. Meri umar ki hi ho. Tumhari bhi chudwane layak hogi. Haye Sunita tumhari tu khoob gori gori makhkhan si hogi. Meri tu saawli hai." Mina ki is baat se poore badan main current dauda. Mina ne mere dil ki baat kahi thi. Main Mina se har tarah se khoobsurat thi. Wah sadharan si thi par main gori aur khoobsurat. Maine socha jab Ramesh apni is bahan ko chodne ko taiyyar hai tu meri jaisi gadrayi kunwari khoobsurat laundiya ko tu wah bahut pyar se chodega.


"haye Mina mujhe darr lag raha hai."


"pagli mauka achha hain mere bhaiyya ek number ka laundiyabaz hai. Bhaiyya ke saath ham logo ko khoob maza aayega. Bhaiyya ka lund khoob tagda hai aur sabse badi baat yah hai ki aaram se tumhare ghar main maza lenge." Mina ki baat sun fudakti choot ko chikni raano ke beech daba razamand huyi tu Mina meri ek choochi pakad dabati boli,


Contd.






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