Saturday, March 27, 2010

हिंदी सेक्सी कहानिया कलयुग की द्रौपदी पार्ट -4

राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ
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कलयुग की द्रोपदी--4

दोस्तों मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा पार्ट -४ लेकर आपकी अदालत मैं हाजिर हूँ
रानी को इतनी गहरी नींद आई की वो शाम के 6 बजे तक सोती ही रही.
जग्गा इसी समय घर लौटा तो उसके बुलेट की आवाज़ से रानी की नींद उच्छा. गयी.
उसने आल्मिराह खोली तो देखा कई सारे ड्रेस उसके साइज़ के भरे पड़े थे. यह ड्रेस रंगा-जग्गा ने स्पेशली रानी और उस जैसी और लड़कियों के लिए ला कर रखे थे.
रानी ने एक नेवी ब्लू कलर का सलवार-सूट निकाल कर पहन लिया और बाहर आ गयी.
ड्रॉयिंग रूम में रंगा-जग्गा कुच्छ बातें कर रहे थे जो उन्होने रानी के आने पर बंद कर दी.
जग्गा ने शरारत से पूछा – का रे गुड़िया!! इतना देर सो रही थी? इतना कौन सा थकने वाला काम किया था?
रानी उसके इस सवाल पर झहेप. गयी और गाल शरम से लाल हो गये. उसका सारा बदन टूट रहा था और एक मीठा सा दर्द हो रहा था. . का छेद पर अभी भी दुख रहा था.
रंगा बोला – अरे कुच्छ नही भाई, हम. तो बस थोड़ी पूजा की और दूसरे मंदिर की घंटी बजाई!
यह सुन जग्गा हस्ने लगा और बोला – अकेले-अकेले पूजा कर लिए. हुमको भजन-कीर्तन में बैठने का मौका ही नही दिया? का रे रानी, ये दूसरा वाला पूजा का प्रसाद एक ही भवाँ. का क्यूँ खाया?

रानी उनकी इस ठिठोली से शरम से ज़मीन में गाड़े जा रही थी.
रंगा बोला – जाओ रानी, जाके रसोई में रात का खाना बना लो. पाँच आदमी का खाना बनाना. कुच्छ मेहमान आने वाले है.
रानी के चेहरे पर 5 लोगों का खाना बनाना सुनकर जिग्यासा जाग उठी तो रंगा बोला – आज हमारे एक पुराने मित्रा अपनी लुगाई को लेके आ रहा है. उसकी लुगाई आजकल उसकी पूजा नही करती है ना ही उसका प्रसाद ग्रहण करती है. गाओं के मंदिर के पुजारी ने कहा की उसे हुमारे पास ले जाने से हम उसका अच्छा से इलाज करेंगे और कट्टर पुजारीन बना देंगे.

रानी असमंजस से बोली – कैसी लुगाई है? अपने पति परमेश्वर का तन-मॅन से पूजा अर्चना करना ही तो उसका फ़र्ज़ है. ई भी नही करेगी तो उसका जीवन व्यर्थ है.

जग्गा ये सुन गड़.-गड़ हो गया और बोला – एक्दुम सही बोली मेरी गुड़िया. पर सब तुम्रे जैसी आस्तवान नही होती है ना!! इसलिए आज हम उसका इलाज करेंगे. तुम भी हमारे साथ शामिल होके हमारी मदद करना!

रानी खुश थी की दोनो उससे इतना प्यार और इज़्ज़त करते है की 1 ही दिन में उसे इतना मान दे रहे है. वाज़ शी राइट???


बिहार का ये इलाक़ा नॅडलाइट्स के लिए बहुत बदनाम था. इन्ही का सारगाना था राका. 7 फीट का वो दैत्या घानी. धाड़ी और बड़े बालों वाला एक दानव था. रंगा-जग्गा जैसा ही रंगीन और खूब पियाक्कड़. 2 लीटर रूम तो वो एक दिन में पीटा ही होगा. आँखें हमेशा लाल रहती थी.
उसका लंड 7-8“ ही होगा पर लॉड की चौड़ाई कम-से-कम 3“. ये जालिम रंगा-जग्गा जैसा किसी भी लड़कियों पर नरम नही था. जिसे भी उठाता उसकी मौत पक्की थी. इसका फौलादी लंड तो रंडियों के भी चूत से खून निकाल देता था.
गाओं के सबसे रईस साहूकार से उसने फिरौती माँगी थी करीब 15 लाख जो ना अदा करने की सूरत पे उसकी बेटी बिंदिया को उठा लेने की धमकी दी थी.
साहूकार अव्वल दर्जे का लालची था. वैसे भी उसकी दाल अब उस गाओं में नही ग़ालती थी इसलिए वो सहर जाने की सोच रहा था. राका की धमकी से उसकी और भी फॅट गयी और मियाद की तारीख के पहले वाली रात उसने बोरिया-बिस्तर समेत परिवार के साथ भागने की सोच ली.

बिंदिया 17-18 बरस की गोरी-चिटी गद्रायि जवानी थी. जावानी ने अपनी सारी बहार शायद उसपर ही लुटाई थी. कमसिन उमर में भी उसके चूची पाके पपीतों जैसा था. बॉल उसके भरे-भरे नितंबों तक आते थे और उसकी गोलाई की सुंदरता बढ़ाते थे. आँखें गोल-गोल और बड़ी-बड़ी, होठ मोटे और रसीले. गर्दन बिल्कुल सुरहीदार और छति और कमर एक समान.
5 फीट की हाइट और फिगर पूरी 36-26-36. जाँघ केले के ताने के समान चिकनी और मांसल थी. बानिए की बेटी को पढ़ाई से क्या करना इसलिए 4थ क्लास के बाद च्छुत गयी थी. वो बिल्कुल अनपढ़ और गवार थी पर हुस्न ऐसा पाया था की लॉंड भंवरों की तरह उसके इर्द-गिर्द घूमते रहते थे पर वो उनमे से किसी को घास नही डल्लती थी.
अपने बड़े भाई और भाभी को उसने 2-3 बार सेक्स करते हुए देखा था इसलिए कांगञान तो हो ही चुका था. कभी उंगली तो कभी पेन्सिल डालकर अपनी प्यास शांत कर लेती थी. एक दिन तो इसी क्रीड़ा में उसकी झिल्ली भी फॅट गयी ती. अब उसकी जवानी लूटने के लिए तैयार थी.

राका को साहूकार के रातों रात फरार होने की बात की भनक लग गयी थी. वो लाव-लश्कर लेकर उसके घर पहुँचा तो देखा की घर लॉक था और सब नदारद थे.
गुस्से से आग बाबूला राका बस-स्टॅंड और रेल स्ट्न पर अपने आदमी दौड़ा दिए.

½ घंटे में ही उसे पता लगा की शेठ अपने परिवार के साथ पटना कोलकाता जाने वाली बस में अपने परिवार के साथ 1 घंटे पहले रवाना हुआ है.
राका ने ट्रक भरकर नॅडलाइट्स के साथ रास्ते में उस बस पर हुम्ला कर दिया.
शेठ को तो उसने लूटा ही पर साथ में पूरे बस के लोगों को भी नही बक्शा. बिंदिया के हाथ पैर बाँधा और मूह में कपड़ा थूस कर अपने जीप में डाला और च्चल पड़ा.
रंगा-जग्गा से उसने वादा किया था की इस बार के शिकार को वो उनके साथ बाट कर खाएगा. उसने जीप जंगल के तरफ घुमा दी.

1 घंटे में उसकी जीप रंगा-जग्गा के दरवाज़े पर थी.
रात के करीब 10 बज रहे होंगे जब बाहर गाड़ी के एंजिन की आवाज़ सुन रंगा बाहर आ गया.
राका को देख वो आती प्रसन्न हो गया और गाले से लगा लिया. जीप की दूसरी सीट पर गठरी जैसी बँधी पड़ी बिंदिया को देख वो आनंदित हो गया और बोला – वाह दोस्त, खूब वादा निभाया तुमने.

इतने में जग्गा भी बाहर आ गया और राका के गाले लग गया. रंगा ने बिंदिया को उठाकर उपर वाले कमरे में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया. वो अभी भी बेहोश थी.

रानी बाहर कमरे में जग्गा-राका की आवाज़ें सुन बेडरूम से निकल आई. राका को देख वो एक बार जग्गा की तरफ देखी और दुपट्टा अपने सर पर डाल राक के पाव छूने के लिए झुक गयी. राका जग्गा को देख मुस्कुराया और रानी के कंधे पकड़ उठाता हुआ बोला – दूधो नहाओ, पूतों फलो. का नाम है तोहार?

रानी नज़रें नीचे किए बोली – रानी!

अरे वाह, एकद्ूम सही नाम है! हुमरे दोस्तों की लुगाई का इससे अच्छा नाम हो ही नही सकता है? – राका बोला.

जग्गा ने रानी से कहा – जाओ जाके बॉटल और चखना बाहर बरामदे में लगा दो. थोड़ा देर वहीं यार लोग जसन मनाएँगे फिर पूजा करेंगे इसकी लुगाई का!

रानी ने मूक हामी भारी और रसोई की तरफ बढ़ गयी.

रानी बहुत गर्व महसूस कर रही थी की उसके पति का इतना सम्मान है की लोग उनसे अपने बीवियों का इलाज करने आते हैं.
बाहर दारू-चखना लगान एके बाद रानी ने खाना बनाया और टीवी देखने लगी.
कोई 1 घंटे के बाद जब 10 बजे होंगे, तीनो अंदर आ गये और रंगा ने रानी से कहा- चलो गुड़िया रानी थोड़ा खाना खिला दो फिर पूजा करेंगे.
रानी ने खाना परोसते हुए राका से पूछा – आपकी लुगाई खाना नही खाएँगी क्या?

राका हस्ते हुए बोला – अरे वो? वो तो थोड़ी देर में हम सबका प्रसाद ग्रहण करेगी तो अपने आप ही पेट भर जाएगा.

उनके खाने के बाद रानी ने भी थोड़ा खा लिया और सॉफ-सफाई के लिए किचन में चली गयी.
तीनो उपर आ गये और बेड पे सोती हुई बिंदिया को देखने लगे. उस मदमस्त जवानी को देख उनके मूह से लार टपकने लगा.
राका बेड के करीब आया और झींझोर कर बिंदिया को उठाने लगा. रंगा ने इतने में 1 ग्लास पानी उठाकर बिंदिया के मूह पर दे मारा. बिंदिया हड़बड़ा कर उठ बैठी. तीन दानवों को अपने इर्द-गिर्द देख अनायास ही उसके मूह से चीख निकल पड़ी. राका की शकल पहचान उसे सारा वाक़या याद आया और व्हो बकरी की तरह मिन्मीनाते हुए राका को हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगी – प्लीज़ हुमको जाने दीजिए,…….उउउउ….मा-बाबूजी के पास जाना है…….उ लोग हमारा इंतेजार करते होंगे……….आपको हुम्से क्या मिलेगा……..हम बाबूजी को बोलेंगे, वो आपको खूब पैसा देंगे. हुमको जाने दो प्लीएzzzzzz!
उसके आँसू भारी आँखें और दर्द भारी गिड़गिडाहट का राका पर कोई असर ना हुआ और वो हस्ते हुए बोला – अरे तोहार बाप को पैसा ही देना होता तो उ गाओं छ्चोड़ के भागता थोड़े. और शाम को तो हम उसका सारा धन लूट ही लिए तो अब पैसा का कौनो चिंता नही. अब तो जसन मनाने की घड़ी है. और उ जसन में तुमको तो शामिल होना ही पड़ेगा!!!!

राका के इरादों को भाप बिंदिया सर-से-पाव तक सिहर गयी. उन दानव का आकर-विकार और बदनीयती का अंजाम उसे दिखाई देने लगा. शहम्ते और रोते हुए उसने पूछा – ह.ह..हुमरे साथ कककाअ करोगे आपलोग. ज्ज्ज्ज्ज्जने दीजीएना. हहूम तो आआअपके बेटी जैसे हैं???

तीनों एक साथ हस्ने लगे और जग्गा बोला – सच बोली तू, और हम सब हैं बेटीचोड़!!!!

ये कहके तीनों फिर से अट्टहास करने लगे.

बिंदिया इस वक़्त एक पीले कलर के सलवार कुर्ते में थी. बॉल बिखरे हुए और चेहरा सफेद फक़्क़ पड़ा हुआ था.
राका लपक कर बिंदिया के बाजू में बैठ गया और उसके इर्द-गिर्द अपनी बाहें डालने लगा. बिंदिया छटपटा उठी. दूसरे तरफ से रंगा ने हुम्ला किया और उसे बिस्तर पे लिटा दिया और अपने एक पैर से बिंदिया को जाट दिया.
बिंदिया उनके चंगुल में सिर्फ़ चीख और छॅट्पाटा ही पा रही थी.

जग्गा दूर खड़ा अपनी धोती ढीली कर रहा था. बिस्तर के करीब आते तक उसके बदन पर कपड़े का एक भी रेशा ना था. बिंदिया कसमसाते हुए जब कनखियों से जग्गा को देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गयी. भालू जैसे बॉल भरे विशालकाय नंगे बदन पे मोटे सोट जैसा लंड ने बिंदिया के होश उड़ा दिए.


अगर आपने पूरी स्टोरी नही पढ़ी है तो नीचे दिए हुए लिंक पर आप पढ़ सकते हैं

कलयुग की द्रोपदी--1
कलयुग की द्रोपदी--2
कलयुग की द्रोपदी--3
कलयुग की द्रोपदी--4
कलयुग की द्रोपदी--5








आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj
































































































































































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