FUN-MAZA-MASTI
अब
तक वह संभवतः अपने ऊपर नियन्त्रण कर चुकी थी। बोली, हाय राम तुम तो बड़े
हरामी हो! ऐसी बात कैसे पूछ रहे हो? क्या करवाऊ मै? " मैंने झट से कहा
चुदवाओगी? और उसका जवाब आने से पहले मैंने उसे झटके अपनी तरफ घुमाकर चप्प
से उसके मुँह को अपने मुँह में लेकर होठों को चूसने लगा और उसकी समीज में
हाथ डालकर चूचियों को सीधे स्पर्श करने लगा। धीरे-धीरे वह पस्त सी पड़ने
लगी। वह मस्ताने लगी। उसकी स्तन के चने खड़े होन लगे। जब उसके मुँह को चूसने
के बाद अपने मुँह को हटाया तो मादक स्वर में बोली कि, "उफ़ तुम तो मुझे
मार डालोगे...अब छोड़िये मुझे डर लग रहा है। देर भी हो रही है।"
वह
हाथों से मारने का संकेत करते हुए निगाहें तरेरते अन्दर चली गयीं। सर्दी
तो थी लेकिन धूप निकल आई थी। पता चला कि कमली कामों को निपटाकर अपने बाप के
साथ अपने खेतों पर चली गयी। मैं नित्य क्रिया से निपटकर चाय पीने के बाद
नाश्ता कर रहा था तो पास में ही आकर अमिता दीदी बैठ गयीं। दूसरी तरफ रसोई
में चूल्हे पर बैठी बुआ पूरी उतार रही थीं। वहीं से बोलीं, अमिता तूं नहा
धोकर तैयार हो जा। चलना बालेश्वर मन्दिर आज स्नान है। महीने का दूसरा
सोमवार है।
चुपकर
रे संजू! क्हाँ गाँव भागा जा रहा है! मैं बारह बजे तक तो आ ही जाऊँगी तेरे
फूफा तो निकल गये शहर। कमली का बाबू का आज गन्ना कट रहा है नहीं तो मैं
उसे ही रोक देती। मैं रात से ही देख रही हूँ इसकी तबियत ठीक नहीं देर तक
सोई नहीं। बुआ ने कहा। और अन्तिम पूरी कड़ाही से निकालकर आँच को चूल्हे के
अन्दर से खीच कर उठगयीं।
उनको
अनसुना करके मैंने अपनी लुंगी खोल दी नीचे कुछ नहीं था। चारपाई से उतर कर
उनके सामने आ गया। मेरे पेड़ू पर काली-काली झांटे थीं। पेल्हर नीचे लटक रहा
था। चमड़े से ढका लाल सुपाड़ा बाहर निकल आया। उसे उनकी नाक के पास हिलाते हुए
कहा, अमिता दीदी इसे पकड़ो।
थोडी
देर तक उन्हें चूमने और उनकी चून्चियों को मसलने के बाद मैं कमर उठाकर
हचर-हचर चोदने लगा। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे चेहरे पर
अपने मुंह को रगड़ने लगीं।उनका गोरा नरम शरीर मेरे सांवले थोड़ा भारी शरीर
से दबा पिस रहा था। थोड़ी देर बाद उनकी चूत से पुच्च-पुच्च का स्वर निकलने
लगा। वो मुझे जोर से चिपकने लगी.. अब वो भी कमर उठा रही थी.. हाँ संजू..
जोर से.. फाड़ दे.. आह्ह.. मेरा कुछ निकलेगा रे.. ओह्ह.ओह्ह..ओह्ह.. करते
हुए वो मेरी छाती से चिपक गई.. और आँखे बंद कर ली.. मेरे लंड पर गरम गरम
पानी लगा, मै समझ गया की वो झड़ गई है... मै और जोर से चोदने लगा. मै भी अब
रुक नही सकता था.. मैं झड़ने को हुआ तो झट से लन्ड को निकाल दिया ओर भल्ल
से वीर्य उनके पेट और जांघों पर फेंक दिया। सारा वीर्य उनके शरीर पर गिर
गया।
तूने
दे दिया कि वह देंगी ! बता न कब देगी और कहाँ, कहकर मैंने इधर उधर देखकर
उसे वहीं बिस्तर पर गिरा दिया चढ़ बैठा और लगा उसकी चूचियां कपड़े के ऊपर से
मीजने, वह भी मुझे नोच रही थी। तभी न जाने कैसे वहां अमिता दी आ गयीं।
चूंकि कमली नीचे थी इसलिए उसने उन्हें पहले देखा वह नीचे निकलकर भागने का
प्रयत्न करने लगी। मैं ओर तेजी से उसकी चूचियों को मसलते हुए उसे दबाने लगा
तो वह घबराये स्वर में बोली, अमिता दीदी! मैंने मुडकर देख तो न जाने क्यों
मुझे हंसी आ गयी। मन ही में सोचा चली अच्छा हुआ। लेकिन मैंने घबराने का
बहाना करके कहा, अमिता दी किसी से कहना नहीं।
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हिम्मते मर्द मदद ए खुदा-2
अमिता दी ने जल्दी से कपड़े सही किये। ब्रेसरी तो खुली ही रह गयी। उठ गयीं। मुझे भी मन मार कर उठना पड़ा। मेरा लंड अभी भी उसी तरह तना था। किसी तरह संभालकर उठा।
बाहर बैठक में ही मेरा बिस्तर बिछा था। वहां अभी भी तीन चार लोग बैठे थे। गप्प चल रही थी। बिस्तर पर रजाई नहीं थी तो मैं अन्दर लेने आया। बिस्तर का बक्सा ऊपर छत की कोठरी में था। बुआ ने बड़बड़ाते हुए कमली से कहा, जाकर निकाल दे। और मुझसे बोलीं, कि तू भी चला जा लालटेन दिखा दे।
आगे-आगे मैं और पीछे कमली, ऊपर पहुँचकर कोठरी का द्वार खोलकर बड़े वाले बक्से का ढक्कन खोलने के लिए वह जैसे ही झुकी मैंने लालटेन जमीन पर रखकर उसे पीछे अपनी बाहों में समेट लिया। अमिता दीदी के साथ इतनी हरकत के बाद तो मेरी धड़क खुल ही गयी थी। और मेरा लंड कड़क ही था. वह चौकी तब तक हाथ को आगे से उसकी लेकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसकी चूचियों को हथेलियों की अँजुरी बनाकर उसे कस लिया और उसके कानों को होंठों मे दबाकर चूसने लगा। उसने पकड़ से आजाद होने का प्रयत्न किया, लेकिन मैंने इतनी जोर से कसा कि वह हिल भी नहीं सकती थी वह घबराकर बोली, संजू भय्या छोड़िये अभी कोई आ जायेगा।
उसकी यह बात सुनकर मेरा मन गदगद हो गया। मैंने उसकी चूची के चने को दो अँगुलियों से छेड़ते हुए कहा, यहाँ कौन आने वाला है मैं तुम्हारी ले तो रहा नहीं हूँ। बस भींच ही रहा हूँ।मुझसे करवाओगी?
अब
तक वह संभवतः अपने ऊपर नियन्त्रण कर चुकी थी। बोली, हाय राम तुम तो बड़े
हरामी हो! ऐसी बात कैसे पूछ रहे हो? क्या करवाऊ मै? " मैंने झट से कहा
चुदवाओगी? और उसका जवाब आने से पहले मैंने उसे झटके अपनी तरफ घुमाकर चप्प
से उसके मुँह को अपने मुँह में लेकर होठों को चूसने लगा और उसकी समीज में
हाथ डालकर चूचियों को सीधे स्पर्श करने लगा। धीरे-धीरे वह पस्त सी पड़ने
लगी। वह मस्ताने लगी। उसकी स्तन के चने खड़े होन लगे। जब उसके मुँह को चूसने
के बाद अपने मुँह को हटाया तो मादक स्वर में बोली कि, "उफ़ तुम तो मुझे
मार डालोगे...अब छोड़िये मुझे डर लग रहा है। देर भी हो रही है।"
एक वादा करो।
क्या
देने का!
उसने चंचल स्वर में फिर सवाल किया, क्या
बुर और क्या
उसने अँगूठे के संकेत से कहा, ठेंगा।
मैंने हाथ को झटके से नीचे लेजाकर उसकी बुर को दबोचते हुए कहा, ठेंगा नहीं यह! तुम्हारी रानी को माँग रहा हं।
मेरे नीचे से हाथ हटाते ही उसने बक्सा खोलकर रजाई निकालकर कहा, उसका क्या करना है
चोदना है!
वह रजाई को कंधे पर रख लपक कर मेरे लंड को चड्डी के ऊपर से नोचते हुए बोली, अभी तो मुझे काम है !आज नही! और वह नीचे चली गयी। मैं भी जाकर बाहर बैठक मैं सोया। फूफा तो खर्राटे भरने लगे, लेकिन मुझे नीद ही नहीं आ रही थी। अन्दर से प्रसन्नता की लहर सी उठ रही थी। एक साथ दो-दो शिकार! . सोचने लगा ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ के देता है. मुझे एक नही दो दो चूत मिलेगी. मैंने दोनों की चूत कैसी होगी और कैसे चुदवायेगी इस बात को लेकर अपने लंड को जोर जोर से मसला. फिर दोनों को लेकर तरह-तरह की कल्पनाएं करते हुए न जाने कब नीद आयी। जब आँख खुली तो पता चला कि सुबह के नौ बज गये हैं। चड्डी गीली लगी। छूकर देखा तो पता चला कि मैं सपने में झड़ गया था। तभी अमिता दीदी आ गयीं। उन्होंने मेरे उठने के बाद लुगी को थोड़ा सा गीला देखा तो मुस्कुराने लगीं। और धीरे से कहा, यह क्या हो गया।
मैंने भी उन्ही के स्वर में उत्तर दिया, रात में आपको सपने में चोद रहा था। नाइटफाल हो गया।
वह
हाथों से मारने का संकेत करते हुए निगाहें तरेरते अन्दर चली गयीं। सर्दी
तो थी लेकिन धूप निकल आई थी। पता चला कि कमली कामों को निपटाकर अपने बाप के
साथ अपने खेतों पर चली गयी। मैं नित्य क्रिया से निपटकर चाय पीने के बाद
नाश्ता कर रहा था तो पास में ही आकर अमिता दीदी बैठ गयीं। दूसरी तरफ रसोई
में चूल्हे पर बैठी बुआ पूरी उतार रही थीं। वहीं से बोलीं, अमिता तूं नहा
धोकर तैयार हो जा। चलना बालेश्वर मन्दिर आज स्नान है। महीने का दूसरा
सोमवार है।
वह जवाब देतीं उससे पहले ही मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा, प्लीज अमिता दीदी न जाइए। कोई बहाना बना दीजिए।
"क्यों" धीरे से मुस्कुराकर कहा।
मेरा मन बहुत हो रहा है।
क्या
मैंने झुँझलाकर कहा, तुम्हारी लेने का!
मैं दे दूँगी!
हाँ!
आप को जाना नहीं है।
तब वह बोलीं, मामी मेरी तबियत ठीक नहीं।
अकेले कैसे रहेगी।
संजू तो है न!
वह रुकने वाला है घर में!
हाँ बुआ मैं तो चला घूमने। मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा।
मामी! फिर वह धीरे से बोलीं, तो मै जाऊँ!
प्लीज.प्लीज नहीं।
चुपकर
रे संजू! क्हाँ गाँव भागा जा रहा है! मैं बारह बजे तक तो आ ही जाऊँगी तेरे
फूफा तो निकल गये शहर। कमली का बाबू का आज गन्ना कट रहा है नहीं तो मैं
उसे ही रोक देती। मैं रात से ही देख रही हूँ इसकी तबियत ठीक नहीं देर तक
सोई नहीं। बुआ ने कहा। और अन्तिम पूरी कड़ाही से निकालकर आँच को चूल्हे के
अन्दर से खीच कर उठगयीं।
बुआ के जाते ही मैंने मुख्य द्वार की सांकल को
बन्द किया और और अमिता दीदी का हाथ पकड़कर कमरे में लेगया। बिजली थी। बल्ब
जलाकर उन्हें लिपटा लिया। उन्होंने अपना चश्मा उतार कर एक तरफ रख दिया। वह
भी सहयोग करने लगीं। मेरे मुंह से मुंह लगाकर मेरी जीभ चूसने लगीं। मैं
उनके चूतड़ों की फांक में अंगुली धंसा कर उन्हे दबाने लगा। मेंरा मुंह उनके
थूक से भर गया। मेरा शरीर तनने लगा। वह चारपाई पर बैठ गयीं। मैंने उनकी
समीज को उतरना चाहा तो बोलीं, नहीं ऊपर कर लो। मजा नहीं आयेगा। कहते हुए
मैंने हाथों को ऊपर करके समीज उतार दी। ब्रेसरी में कसी उनकी छोटे खरबूजे
के आकार की चूचियां सामने आ गयीं। फिर मैंने थोड़ी देर उन्हें ऊपर से सहलाने
के बाद ब्रेजरी खोलना चाहा तो उन्होंने खुद ही पीछे से हुक खोल दिया। बल्ल
से उनकी दोनों गोरी-गोरी चूचियां बाहर आ गयीं। चने गुलाबी थे। बड़ी होने के
कारण थोड़ी सी नीचे की तरफ ढलकी थीं। मैं झट से पीछे जाकर टांगे उनके कमर
के दोनों तरफकरके बैठ गया। और आगे से हाथ ले जाकर उनकी चूचियां मलने लगा।
चने खड़े हो गये। उन्हें दो अंगुलियों के बीच में लेकर छेड़ने बहुत मजा आ रहा
था। मेरा पूरी तरह खड़ा हो गया लंड उनकी कमर में धंस रहा था। वह बोलीं,
पीछे से क्या धंस रहा है अब इससे आगे नहीं!
उनको
अनसुना करके मैंने अपनी लुंगी खोल दी नीचे कुछ नहीं था। चारपाई से उतर कर
उनके सामने आ गया। मेरे पेड़ू पर काली-काली झांटे थीं। पेल्हर नीचे लटक रहा
था। चमड़े से ढका लाल सुपाड़ा बाहर निकल आया। उसे उनकी नाक के पास हिलाते हुए
कहा, अमिता दीदी इसे पकड़ो।
उन्होंने लजाते हुए उसे पकड़ा और सहलाने
लगीं। संजू कितना लंबा और मोटा है रे. मैंने इतना मोटा और लंबा कभी नही
देखा. मैंने पूंछा अब तक कितने देखे है. उन्होंने कहा जीजू का देखा है
(उनकी बड़ी बहिन की दो साल पहले शादी हुयी है) और मेरे सहेली के भाई का देखा
है." मैंने कहा दोनों का लिया? " उसने कहा नही रे.. सहेली के भाई का तो
इससे बहुत छोटा और पतला था और जल्दी झड़ गया था. और जीजू का हाथ में ले कर
सहलाया लेकिन अन्दर लेने का मौका नही मिला... लेकिन तेरा वाला तो लाजवाब
है.. कहते हुए वो मेरे लंड को शर्माते हुए पकड़ कर सहलाने लगी... मै भी कल
रात से कल्पना कर के ही उत्तेजित था. थोड़ी ही देर में लगा कि मैं झड़
जाऊँगा । मैंने तुरन्त उनकी पीठपर हाथ रखकर उन्हें चित कर दिया और हाथ को
सलवार के नाडे पर रख दिया। वह बोलीं, नहीं। संजू ये मत कर मुझे डर लग रहा
है. तेरा वाला बहुत मोटा है.. मैंने इतना मोटा और लंबा कभी नही लिया.
मैंने उनकी बात नहीं सुनी और और उसके छोर को ढूंढने लगा। वह बोलीं, आगे न बढ़ों मुझे डर लग रहा है। मैंने नाडे का छोर ढूंढ लिया।
वह
फिर बोलीं, संजू.. तेरे इससे मुझे बहुत दर्द होगा.. मैंने अन्दर तक कभी
नही लिया. सहेली का भाई तो ऊपर टिकते ही झड़ गया था. अगर कहीं बच्चा ठहर
गया तो। आज नहीं कल निरोध लाना। फ़िर निश्चिंत होकर करेंगे.
अनीता कल का क्या भरोसा.. आज मौका मिला है.. मै तुम्हारी चूत मे नहीं झड़ूंगा। कसम से । मैंने कहा।
संजू मुझे डर लग रहा सच! यह मैं पहली बार करवा रही हूं। और वो भी ऐसे मूसल से.
"तुम
डरो मत मै बहुत आहिस्ता करूँगा.." मुझे मालूम था की मेरे लंड से दो बच्चों
की माँ भी पहली बार डरती है.. फ़िर ये तो ऊपर ऊपर से खेली है आज तक... फ़िर
भी चोदना तो था ही. और इसी के साथ मैंने उनका नाडा ढीला कर दिया और दूसरे
हाथ से उनकी चूचियां मले जा रहा था। वह ढीली पड़ती जा रही थीं। कुछ नहीं
होगा। कहकर मैंने सर्र से उनकी शलवार खींच दी। नीचे वह चड्डी नहीं पहने
थीं। उनकी उभरी हुयी झांटों से उनकी
चूत मेरे सामने आ गयीं। उन्होंने लज्जा से आँख बंद कर लीं। उनका पेड़ू भी
काली झांटों से भरा था। मैंने ध्यान से देखा तो उनकी चूत का चना यानी
क्लीटोरिस रक्त से भरकर उभर गया दिखा। मैं सहलाने के लिए हाथ ले गया तो वह
हल्का से प्रतिरोध करने लगीं, लेकिन वह ऊपरी था। मुझसे अब बरदास्त नहीं हो
रहा था। मैंनें उनकी जांघे फैला दी और उनके बीच में आ गया। फिर अमिता दीदी
के ऊपर चढ़कर हाथों से लन्ड पकड़कर उनकी बुर के छेद पर रक्खा और दबाव दिया तो
मेरे लंड का सुपाड़ा चूत के गीलेपन के कारण फिसलकर अन्दर घुसा और अमिता जोर
से चीखने वाली थी. मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रखा.. फ़िर भी.. मर
गई..ई..ई..ई..ई.. संजू..ऊ..ऊ.. की आवाज़ निकल ही आई. मैंने देखा उनकी चूत
का मुंह फ़ैल गया था और लंड का लाल सुपाड़ा उसमे फंसा हुआ था.. कुछ देर बाद
मैंने दूसरा झटका दिया और इस बार लंड सरसराता हुआ जड़ तक अन्दर ठांस दिया..
चूत ने खून की उलटी कर दी.. मैंने देखा मेरा लन्ड पूरा अन्दर चला गया।
निशाना ठीक था। वो जोर से चिल्लाई..संजू.. निकाल.. मुझे दर्द हो रहा है..
मैंने कहा अब तो पूरा अन्दर घुस गया है.. उन्होंने अपना एक हाथ अपनी चूत के
पास ला कर देखा. हाथ में खून लगा हुआ देखा और उन्होंने सिसकारी भरी। और धीरे से कहा, झिल्ली फट गयी।
थोडी
देर तक उन्हें चूमने और उनकी चून्चियों को मसलने के बाद मैं कमर उठाकर
हचर-हचर चोदने लगा। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे चेहरे पर
अपने मुंह को रगड़ने लगीं।उनका गोरा नरम शरीर मेरे सांवले थोड़ा भारी शरीर
से दबा पिस रहा था। थोड़ी देर बाद उनकी चूत से पुच्च-पुच्च का स्वर निकलने
लगा। वो मुझे जोर से चिपकने लगी.. अब वो भी कमर उठा रही थी.. हाँ संजू..
जोर से.. फाड़ दे.. आह्ह.. मेरा कुछ निकलेगा रे.. ओह्ह.ओह्ह..ओह्ह.. करते
हुए वो मेरी छाती से चिपक गई.. और आँखे बंद कर ली.. मेरे लंड पर गरम गरम
पानी लगा, मै समझ गया की वो झड़ गई है... मै और जोर से चोदने लगा. मै भी अब
रुक नही सकता था.. मैं झड़ने को हुआ तो झट से लन्ड को निकाल दिया ओर भल्ल
से वीर्य उनके पेट और जांघों पर फेंक दिया। सारा वीर्य उनके शरीर पर गिर
गया।
थोड़ी देर बाद वह उठ गयीं ओर वैसे ही कपड़े पहनने लगीं। मैंने कहा, एक बार और।
नहीं!
अब कब
कभी नहीं।
यह पाप है!
पाप नहीं मेरा लन्ड है। मैंने इस तरह कहा कि, वह मुस्करा उठीं और कपड़े पहनने के बाद कहा, संजू सच बताओ इससे पहले किसी की लिए हो।
कभी नहीं। बस चूची दबाई है। वह भी यहीं।मैंने झूठ बोला
किसकी। उन्होंने आंखें खोलकर पूछा।
कमली की।
कब।
रात जब हम लोग ऊपर गये थे।
तुम पहुँचे हुए बदमाश हो! वह बोलीं और बाहर निकल गयीं।
दोपहर
तक बुआ के आने से पहले हम दोनों चूत बुर और लन्ड की बातें करते-करते इतने
खुल गये कि मैंने तो सोचा भी नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके चाचा के
लड़के ने कई बार जब वह सोलह की थीं तो चोदने की कोशिश की लेकिन अवसर नहीं
दिया। लेकिन मैंने रात में उनकी भावनाओं को जगा दिया और अच्छा ही किया।
क्यों की अभी तक वह इस स्वर्गीय आनंद
से वंचित थीं। चुदाई के बाद हम लोगों ने मुख्य द्वार तुरन्त ही खोल दिया,
तभी पड़ोस की एक औरत आ गयीं। वह थोड़ी देर बैठी रहीं। मैं धूप में नहाने बाहर
नल पर चला गया। वह भी जब नहाकर आयीं तो बारह बजने में आधे घंटे रह गये
थे। इसका अर्थ था बुआ बस आने वाली होंगीं। मैंनें एक बार ओर चोदने के लिए
कहा तो वह नहीं मानी, लेकिन मेरे जिद करने पर ठीक से वह अपनी चूत दिखाने
के लिए तैयार हो गयीं। चूत को खोल दिया। चुदाई के कारण अभी तक उनकी बुर
हल्की सी उठी थी। और लाल हो गई थी. मेरे लंड ने उनकी चूत का मुंह खोल दिया
था. गोरी गोरी चूत.. मैंने झांटें हटाकर चूत को सहलाया.. तो उसमे से फ़िर
से पानी निकलने लगा और अमिता सी..सी..सी... संजू.. नही.. करने लगी. मैंने
झांट साफ करने के लिए कहा तो हंसकर टाल गयीं। उन्होंने मेरा लन्ड भी खोलकर
देखा। वह सिकुड़कर छुहारा हो रहा था। लेकिन उनके स्पर्श से थोड़ी सी जान आने
लगी तो वह पीछे हट गयीं, और बोलीं कि, अब बाद में अभी यह फिर तैयार हो गया
तो मेंरा मन भी तो नहीं मानेगा!
दोपहर में बुआ के साथ ही कमली भी आयी।
वह हमे देखकर अकारण मुस्कुराये जा रही थी। मैं गाँव घूमकर तीन बजे आया तो
बाहरी बैठक में लेट गया। वह धीरे से आकर बोली, आज तो अकेले थे, संजू भैय्या
अमिता दीदी को लिया तो होगा।
तूने
दे दिया कि वह देंगी ! बता न कब देगी और कहाँ, कहकर मैंने इधर उधर देखकर
उसे वहीं बिस्तर पर गिरा दिया चढ़ बैठा और लगा उसकी चूचियां कपड़े के ऊपर से
मीजने, वह भी मुझे नोच रही थी। तभी न जाने कैसे वहां अमिता दी आ गयीं।
चूंकि कमली नीचे थी इसलिए उसने उन्हें पहले देखा वह नीचे निकलकर भागने का
प्रयत्न करने लगी। मैं ओर तेजी से उसकी चूचियों को मसलते हुए उसे दबाने लगा
तो वह घबराये स्वर में बोली, अमिता दीदी! मैंने मुडकर देख तो न जाने क्यों
मुझे हंसी आ गयी। मन ही में सोचा चली अच्छा हुआ। लेकिन मैंने घबराने का
बहाना करके कहा, अमिता दी किसी से कहना नहीं।
वह हक्की बक्की हो गयीं।
मैंने आंख मारी तो समझ गयीं। तब तक हम दोनो अलग हो गये थे। वह आंखे नीचे
झुकाकर खड़ी हो गयी और बोली, संजू भय्या जबरदस्ती कर रहे थे।
मैं एक शर्तपर किसी से नहीं कहूँगी। वह मुझसे भी उतावली के साथ बोली। हां!
जो मैं कहूंगी करना होगा। तुम मेरे सामने संजू से करवाओगी। और संजू तुम भी मेरे सामने कमली को नंगी कर के उसकी लोगे. बोलो मंज़ूर है?
मुझे तो इसकी आशा भी नहीं थी। मैंने सिर झुकाकर हामी भर दी, वह भी हल्का सा मुस्कुराई।
हम
लोग अन्दर आ गये। कमली काम में लग गयी। अमिता दी ने अवसर मिलते ही धीरे से
कहा, इसको भी मिला लेंगे तो मजा भी आयेगा और डर भी नहीं रहेगा।
इसके
बाद कमली की मैंने कैसे ली और फ़िर बाद में दो दो चूत को कैसे मजे से चोदा..
इसकी दास्तान अगली बार लिखूंगा.. लेकिन उसके पहले मुझे आप पाठकों के और
मेरे कुछ ख़ास पाठिकाओं के मेल मिलने के बाद. मै जिनकी बात कह रहा हूँ वो
समझ गई होंगी. मुझे मेरे पर्सनल मेल पर बताएं की आपको कहानी कैसी लगी.
मुझे इंतज़ार है..
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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