FUN-MAZA-MASTI
बाबु, अभी और नहीं--3
हमदोनो टेबल पर आमने-सामने बैठे थे. मैं सिर्फ बॉक्सर पहना था और मेरी सोमलता तो टॉवल छाती से लपेटे हुए थी. जब वह बैठ खाना खा रही थी तो टॉवल सिर्फ उसकी कमर को ढक रहा था, उसकी गोरी चिकनी जांघे नंगी थी. उसकी जांघों का मस्त नज़ारा मेरे लंड को बहुत अच्छा लग रहा था जो रह-रहकर बॉक्सर फाड़ने को बेताब हो रहा था. मैं मन में सोचा – “आज इसको चुसाई का मज़ा देना है. लेकिन इससे पहले इसको राज़ी करना पड़ेगा. कल परिवार आ जायेगा तो फिर हमारा यह कार्यक्रम नहीं हो पायेगा.” मेरे दिमाग में एक तरकीब आया. नास्ता ख़त्म करने के बाद, मै उसको अपने कमरे ले ले गया. सारे दरवाजे-खिड़कियाँ बंद करने के बाद उसको एक चेयर पे बैठाया और बोला – “रानी, फिल्म देखोगी?” वह फ़ौरन हामी भरते हुए बोली – “हाँ, कौन सी फिल्म बाबु?” मैंने कहा – “देखो मज़ा आएगा” मैं दौड़ कर दो बियर फ्रिज से निकल लाया और उसके बगल चेयर में बैठ गया. मैंने एक पोर्न विडियो लगाया था जिसमे एक सौतेली माँ बेटे को बताती है की उसकी गर्ल-फ्रेंड को कैसे चूमना है. बात चुम्मी से शुरू होकर चुदाई तक पहुँचती है. वह माँ उससे चूत चुसवाती है फिर उसका लंड चूसती है. दोनों डौगी स्टाइल में चुदाई करते है और आखिर में सौतेली माँ बेटे का मुठ मरती है, सारा बिर्य पि जाती है. यह विडियो धीमा होने के साथ-साथ काफी सेक्सी है. ना जाने मैंने कितनी बार इसको देख मुठ मारा है. विडियो की नायिका की फिगर उसकी उम्र के वावजूद लाजवाब था. जैसे ही फिल्म शुरू होती है, सोमलता की आँखें बड़ी होनी शुरू होती है. मैं उसकी कुर्सी को अपने पास खिंच लेता हूँ. जब फिल्म का नायक अपनी सौतेली माँ की स्तन को मसलता-चूसता है तो सोमलता अकड़ कर सीधी हो जाती है. उसकी आँखें अब लैपटॉप स्क्रीन पर गड जाती है और उसे अपना ख्याल तक नहीं रहता. फिल्म आगे बढती है. अब नायक अपनी माँ की चूत को चूमना-चाटना शुरू करता है और साथ-साथ उसे अपनी ऊँगली से चोदता भी है. माँ जोर-जोर से सिसकारी लेती है और अपने बदन को उछलती है. यह गर्म दृश्य देखकर सोमलता गर्माने लगती है. उसका हाथ खुद-ब-खुद योंनी पर चला जाता है और उसे रगड़ने लगती है. उसकी चूचियां इतनी कास जाती है की वो जो तोलिया लपेटे हुए थी वह खुल का गिर जाता है. उसकी चूचियां सख्त और निप्पल सीधे खड़े हो जाते है. मैं अपने दायें हाथ से उसकी नंगी मांसल जन्घो को सहलाना शुरू करता हूँ. अब उसके मुँह से सिसिकारी निकलना आरंभ होता है. वह आँखें बंद कर सिसिकारी मारे जा रही है और ऊँगली से अपनी चूत को मसले जा रही है. मैंने उसकी हाथ को रोक अपनी ऊँगली से उसकी चूत के भागनासे को छेड़ना शुरू करता हूँ. मेरी ऊँगली की हर हरकत पर उसकी आंह निकलती है. “आःह्ह्ह....... माई री......... हाय बाबु........... मै मर जाउंगी मेरे राजा........ सिसिसिसी.........................”
अब यह खेल कुर्सी पर खेलना असंभव था. मैंने उसकी कमर से उठाया और मेरे बिस्तर पर पटक दिया. वह मेरी और प्यासी नज़रो से देख रही थी. मानो वह कई दिनों की प्यासी है और मेरे पास शरबत का गिलास है. मै उसके पास गया और उसकी टांगो के निचे बैठ गया. उसकी दोनों हथेलियों को अपनी हथेलियों में लेकर पुरी बदन को अपने बदन के निचे लाया और उसकी होंठो का रस चूसने लगा. चूसने के दौरान मैं अपनी लिंग को उसकी चूत के ऊपर रगड़ भी रहा था. इसके बाद उसकी चुचियो की बारी थी. उसकी चूचियां इतनी सख्त हो गयी थी की मैं उसे मुँह से पकड़ नहीं पा रहा था. अब मैं उसकी नाभि के पास जीभ से चाटना शुरू करता हूँ. मेरी जीभ उसकी गहरी नाभि में जब-जब घुसती, तब-तब वह पेट तो सिकोड़ देती. अब मैं उसकी चूत के उपरी हिस्से को चाटते हुए उसकी क्लिट को छेड़ना शुरू करता हूँ. उसकी चूत के गुलाबी होंठ फूलकर पावरोटी जैसे हो गए. मैंने जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल दी. वह उछल कर बैठ गयी. मैंने उसको निचे गिराया उसकी चुचियों पर हाथ रखा और फिर से चूत में जीभ डाल दी. वह सर को उठाकर आंहे भरे जा रही थी और उसकी चूत जीभ के लिए और गहरी जगह बानी रही थी. जब मैंने देखा की जीभ आसानी से अन्दर-बाहर हो रही है तो मैंने अपनी बीचवाली ऊँगली चूत में डाल दी. उसकी चूत अन्दर से काफी गर्म था. उसकी सिसिकारी की आवाज बढती जा रही थी. मैंने ऊँगली को डालना चालू रखा और जीभ से चूत की क्लिट को चाटना भी. 10 मिनट के बाद सोमलता का बदन अकड़ने लगा. वह मेरे बालो को जोर से पकड़कर मेरे माथे को अपनी चूत में दबाने लगी. अब उसकी चूत गीली हो रही थी जो बता रही थी की वह चरम आनंद के पास पहुँच रही है. अब उसकी बदन के निचे का हिस्सा जोर जोर से कांपने लगा. मैंने चुसना और ऊँगली से छेड़ना जरी रखा. अचानक उसकी चूत ने जोर की पिचकारी मारी और मेरा मुँह उसकी योनिरस में भर गया. नमकीन गर्म पानी के स्वाद ने मुझे मदहोश कर दिया. सोमलता की मेरे बालो पर पकड़ ढीली हो गयी और वह ढीली होकर लेती रही. मैं ऊपर आकर उसकी बालो को सहलाने लगा. उसके चेहरे पर संतुष्टि का भाव था. कुछ देर के बाद उसकी बांहों में मुझे जकड़ा और मुझे अपने करीब खिंच लिया. उसकी चूचियां अब भी सख्त थी जो मेरे सीने में गड रही थी. वह मेरे कान के पास आकर धीरे से बोली – “बाबु, किसी ने पहली बार बिने चोदे मुझे इतना सुख दिया. तुम बहुत अच्छे हो.” अब वह मेरे लंड को टटोलने लगी. मुझे लगा की वह भी मुझे मुख-मैथुन का सुख देना चाहती है. लेकिन लगता है वह अभी भी इसके लिए तैयार नहीं थी.
मेरे लंड को पकड़ कर बोली – “बाबु, इसको प्यासा मत रखो. मेरी चूत में तो बारिश हो गयी. इसको भी डूबने का मौका दो.” “ठीक है. चलो अब घोड़ी बन जाओ” मैंने उसको कमर से पकड़ कर घोड़ी जैसा स्थिति बनाने की कोशिश की. वह थोड़ा असहज महसूस कर रही थी क्योंकि यह उसका पहला बार था. मैंने बड़ी मुस्किल से उसकी पोजीशन बनायीं और उसकी कमर को बाएं हाथ से कसकर लपेट लिया. उसकी गीली चूत को द्दो-चार बार ऊँगली से मसलने के बाद लंड में सूपड़ा योनी के द्वार पर रख दिया. मैं उसकी कान में बोला – “रानी तैयार हो मेरे लंड राजा के लिए?” वह थूक निगलते हुए बोली – “हाँ मेरे सैंया राजा, डाल दो अपना डंडा” मैंने धीरे से धक्का लगाया. लंड आधा जाकर फास गया. चूत की दिवार लंड को कसकर पकडे थी. उसकी गले से एक हल्की चीख निकली. मैंने फिर से ज़ोरदार धक्का लगाया. लंड चूत की दीवारों को फाड़ते हुए सीधे बच्चेदानी से जा टकराया. मेरे इस धक्के ने सोमलता की बदन को हिलाकर रख दिया और मेरा कमर जोर से उसकी गांड से टकराया. उसने बड़ी मुस्किल से अपनी चीख को बाहर आने से रोका. मैं कुछ सेकंड के लिए रुका, उसकी स्थिति को सही किया और धीरे से लंड को बाहर खिंचा. लंड के सुपाड़े को बिना बाहर निकाले फिर से धक्का दिया. अब कुछ कम तकलीफ हुई. अब मैं धीरे-धीरे धक्का लगता रहा. एक हाथ से उसकी चुचियों को बीच-बीच में मसलता भी था. अब मेरा लंड फूलने लगा. मैंने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई. मेरा कमर जोर-जोर से उसकी गांड में टकराता गया. वह भी धक्के के ताल पर अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी. 20 थापों के बाद मेरा लंड झड़ गया. मै बिना लंड को निकले उसके ऊपर निढाल हो गया. मेरी सांसे जोर-जोर से चल रही थी. मेरा लंड सिकुड़ने तक उसकी चूत में अटका रहा और बाद में फच्च की आवाज के साथ बाहर निकल गया. हमदोनो लगभग 15 मिनट तक लेते रहे. बाद में वह उठकर बाथरूम में चली गयी और मैं लेटा रहा. मैंने घडी में वक्त देखा, दोपहर के 12 बज रहे थे.
मैं काफी थका हुआ था लेकिन आज का दिन ही मैं सोमलता को अपने घर में रख सकता था. कल से फिर कोई और उपाय लगाना पड़ेगा. मेरे लिंग से तेज सनसनी के साथ हल्की जलन हो रही थी. मैंने लिंग को देखा तो वह रगड़ खाकर लाल हो गया था. मैं बाथरूम की और चला. बाथरूम के पास जाकर देखा की सोमलता नंगी आदमकद शीशे के सामने खड़ी होकर पुरी ध्यान के साथ अपने बदन को निहार रही है. मैं दरवाजे के पीछे छिपकर देखने लगा. वह हल्की मुस्कराहट के साथ बदन का मुयायना कर रही थी साथ में स्तन से लेकर जांघो को ऊपर से निचे सहला रही थी. आज पहली बार मैंने उसको इतना खुलकर मुस्कुराते देखा था. बदन से वह अपनी उम्र से 5-7 साल छोटी लग रही थी. मैं धीरे –धीरे उसके पीछे गया और कमर को पकड़ कर उसकी गर्दन चूमने लगा. मेरे अचानक आने से वह शरमा गयी और नज़रें झुका के बोली – “बाबु, तंग मत करो. मुझे अच्छा नहीं लगता.” मैंने उसको अपनी तरफ लाकर उसकी गालो को हथेलियों में भर चेहरे को उठाकर पूछा – “अच्छा, क्या-क्या हमने अच्छा नहीं लगता. मैं अच्छा लगता हूँ? मेरा प्यार अच्छा लगता है? और मेरा लंड?” वह थोड़ा उदास होकर बोली – “बाबु, मुझे तुम्हारा सब कुछ अच्छा लगता है लेकिन यह कब तक चलेगा? कल से फिर मैं मजदूरी करुँगी और तुम बाहर अपने दुनिया में रम जाओगे.” मैंने उसकी छाती को अपने से चिपकाकर कहा – “नहीं रानी, ऐसा नहीं होगा. हम भले दूर रहे, लेकिन हमेशा मिलते रहेंगे और इसी तरह मिलते रहेंगे.” उसकी बालो को सहलाते हुए मैंने बड़े प्यार से वादा किया था. वह आखों में उम्मीद लाकर कही – “सच?” मैं उसको चुमते हुए बोला – “बिल्कुल सच, अब चलो बाहर कमरे में चलते है.” वह अपना सर मेरे कंधे में रखकर मेरी कमर को पकड़ते हुए मेरे साथ बाहर आ गयी.
हम दोनों कमरे में अगल-बगल लेट गए. सोमलता मेरे सीने में सर रखकर मेरी छाती के बालो से खेलने लगी. बोली – “बाबु, तुम शादी कब करोगे?” मैं गहरी साँस लेकर कहा – “पता नहीं. कोई अच्छी लड़की भी तो मिलनी चाहिए.” वह भी गंभीर हो बोली – “”हाँ. बात तो सही है!” मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए पूछा – “अच्छा तुम मजदूरी छोड़ और कोई काम नहीं कर सकती हो?” वह उदास लहजे में बोली – “कोई काम आता भी नहीं है.” मैं बोला – “सुनो, मेरे एक दोस्त की बीवी का ब्यूटी पार्लर है. मैं तुम्हे वहां काम पर लगा सकता हूँ, अगर तुम चाहो तो?” वह सर घुमाकर मेरी और देखते हुए बोली – “वहां क्या काम करना होगा बाबु?” मैं शरारती होते हुए बोला – “वोही जो मैं तुम्हारे लिया किया. औरतों के चूत और बगलों के बाल साफ़ करने होंगे.” वह मेरी छाती पर हल्का चपत लगते हुए बोली – “धत बाबु, मुझे ऐसा गन्दा काम नहीं करना.” मैंने कहा – “इसमें कौन सी गन्दगी है. कितनी लडकिया यह काम करती है. सोच लो तुम्हारा भी काम हो जायेगा.” मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली – “सच बोलो ना बाबु?” मैंने हँसते हुए बालो को सहलाते हुए कहा – “आरे नहीं. वहां तुमको औरतों के बाल बनाने होंगे. नाख़ून बनाने होंगे. सजावट वगैरह का काम करना होगा. वैसे वो काम भी होता है.” वह थोड़ा मायूस हो गयी. नज़र झुककर बोली – “लेकिन मुझे यह सारा काम नहीं आता है.” उसको दोनों बांहों से कसकर पकड़ते हुए बोला – “तुम चिंता मत करों रानी. मेरी भाभी तुमको एक्सपर्ट बना देगी. कल मैं उससे बात करूँगा. अब बस तुम सिर्फ मेरे बारे में सोचो.” वह शरमाकर मेरे छाती में माथा गड़ाकर बोली – “बाबु तुम बड़े वह हो” उसकी बातों पर मैं जोर से हंस दिया. हम एक दुसरे की बांहों में खोये रहे अगले एक घन्टे तक.
मैं आखें बंद कर सोमलता को छाती से चिपकाकर लेता रहा. मेरा दिमाग उस वक़्त बिल्कुल शांत और किसी तरह के ख्यालों से खाली था. काफी दिनों के बाद मैं पूरी शांति का अनुभव कर रहा था. मेरा ध्यान तोड़ते हुए वह धीरे से बोली – “बाबू! ओं बाबु!” मैं आँख मूंदकर ही जवाव दिया – “हुंह....” उसने मेरी बालो को सहलाते हुए बोली – “कुछ खाओगे नहीं? भूख नहीं लगी तुम्हे?” मैं कहा – “हुंह, देखते है रसोई में क्या है.” मैं उठकर रसोई की तरफ बढ़ने लगा. वह भी मेरे पीछे आई और बोली – “बाबु, दूध है, मैं तुम्हारे लिए खीर बना देती हूँ. मैं अभी कपड़े पहन कर आई.” औए वह मुड़कर जाने लगी. मैंने उसकी हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा – “नहीं मेरी रानी. कपड़ो की कोई जरूरत नहीं है. यहाँ कोई आनेवाला नहीं है. ऐसे ही रहो ना.” “बेशरम!!!” वह अपना हाथ छुडाते हुए बोली और खीर पकाने की तैयारी करने लगी. चूल्हे पर खीर चड़ने के बाद वह खिड़की के पास खड़े हो बाहर देख रही थी और मैं उसके पीछे खड़ा था. पुरे घर में नंगे घूमना एक मजेदार रोमांच पैदा कर रहा था. मैं उसकी बाँहों को पीछे से सहला रहा था. उसकी बदन और बालो से एक मीठी खुसबू आ रही थी जो काफी सुहावना लग रहा था. हम दोनों ही अपने ख्यालों में खोये हुए थे. कुकर की सिटी में हमारा ख्याल थोड़ा. मैं चूल्हे को बंद किया. अचानक मेरे दिमाग में शरारत सूझी. मैंने जैम का डब्बा निकाला और ढेर सारा जैम उसकी छाती में मल दिया. वह चोंककर मेरी और सवालिया नज़रो से देखी. मैं सिर्फ मुस्कुराया. मैं उसको बाहों से पकड़कर दीवाल से सता दिया और झुककर उसकी चुचियों की गहरी घाटी पर लगे जैम को चाटने लगा. उसकी जुबान से हल्की सिसकी निकली. वह मस्ती में आँख मूंदकर सर दिवार से टिककर सिसकी लेती जा रही थी. उसकी सिसकी ने मुझे गरम कर दिया. मैं जोर-जोर से उसकी चुचियों की चाटने-चूसने लगा. खासकर उसकी चुह्चियों के निप्पल को तो पुरी गोलाई से मुँह में डालता और दांत से दबाकर चूसता. मैंने चूस-चूसकर पुरी बदन से जैम को ख़तम कर दिया. अब मेरा हाथ उसकी नंगी चूत पर चला गया. उसकी योनी पहले ही अपना रस छोड़ चूका था. गीली चूत में मैं ऊँगली से चोद रहा था. उसकी सिसकियों की आवाज अब ज्यादा हो गयी. वह निचे के होंठ को दांत से दबा सिसकी मर रही थी और मेरे सर को अपने छाती में दबा रही थी. मैंने बाये हाथ से उसकी कमर को लपेट कर किचेन के टेबल से टिककर खड़ा किया. अब मैंने दो ऊँगली एक साथ उसकी गीली में चूत में डाल दी. उसकी तेज सिसकी निकली और पेट को उत्तेजना से सिकोड़ दी. मैं एक हाथ से उसकी गांड को दबा रहा था और दूसरी हाथ से उसकी चूत को. मैंने बुरी तरह से उसकी चूत को उँगलियों से चोदना जरी रखा. उसकी सिसकियों की आवाज धीरे-धीरे तेज हो रही थी. उसकी चूत की दीवारे कसने लगी. उसका शरीर कसने लगा, सिसकी बंद और ऑंखें जोर से भीच गयी. वह झड़ने के करीब पहुँच चुकी थी. यह देख मैंने रफ़्तार बढ़ा दी. कुछ धक्को के बाद उसकी चूत में रस भरने लगा. फिर एक गर्म पानी का फव्वारा फूटा. उसकी चूत रह-रह कर पानी छोड़ रहा था जो मेरी उँगलियों से बहते हुए फर्श पर टपकने लगा. योनीरस के मादक महक में पुरे कमरे को भर दिया. सोमलता को इस जबरदस्त ओर्गास्म ने हिलाकर रख दिया. वह निढाल होकर मेरे कंधे के ऊपर गिर गयी. मैंने उसको बाँहों में उठाकर कमरे में ले गया. ले जाते वक़्त भी उसकी ऑंखें बंद थी और सांसे तेज. सांसो के साथ-साथ उसकी छाती तेजी से ऊपर निचे हो रही थी. उसको बिस्तर पर सुलाकर मैं किचेन में आया और उसकी बनायीं खीर दो प्लेट में लगाकर कमरे में गया. अब भी उसकी सांसे तेज थी. मैं उसकी चुचियों का ऊपर-नीचे जाना देख रहा था. उसकी बदन पर पसीने की बुँदे बड़ी सेक्सी लग रही थी. बंद आँखों के कोने से कुछ बुँदे आंसू की टपक पड़ी.मैं आंसू को पोछने गया तो उसकी आँखें खुल गयी. वह धीमे से मुस्कुराई. मैंने उसको खींचकर बैठते हुए कहा – “रानी, खीर ठंडी हो रही है. खा लो.” वह प्लेट हाथ में लेकर चुपचाप खा रही थी और बीच-बीच में मेरी ओर देख मुस्कुरा रही थी . हमने बिना किसी बातचीत के खाना ख़त्म किया. प्लेट लेकर वह रसोई में चली गयी. जाते वक़्त मैं उसकी डगमगाती चाल देख रहा था. एक जबरदस्त चुदाई ने इसकी चाल बदल दी थी.
मैं भी काफी थका हुआ महसूस कर रहा था और दोपहर को सोना मेरी आदत थी. मैं बिस्तर में आराम से लेट गया. मेरे दिमाग में येही बात चल रही थी कि कल से सोमलता को कैसे मिलूँगा. घर में तो मुमकिन नहीं हो सकता और बाहर में खतरा बहुत है.मेरे लिंग पर बीर्य और योनिरस का मिश्रण लगा हुआ था जो सुखकर अकड़ रहा था. ज्यादा चुदाई के कारण मेरा लंड थोड़ा छिल गया था जिसके कारण थोड़ा दर्द कर रहा था. मैंने लंड साफ़ करने के इरादे से बाथरूम गया. बाथरूम का दरवाजा अन्दर से बंद नहीं था, बस लगा था. अन्दर से हल्की शावर की आवाज आ रही थी. दरवाजा को धीरे से ठेलने पर देखा की सोमलता दरवाजे की तरफ पीठ कर निचे शावर के निचे बैठी है और हल्की शावर चल रहा है. मैं बिल्कुल उसके पीछे दोनों टांगो को फैलाकर बैठ गया ताकि उसकी कमर मेरी जन्घो में बीच में हो. उसकी पीठ को अपने छाती से चिपकाकर उसकी कमर को दोनों हाथो से लपेट लिया. ऐसा करने पर भी वह बिल्कुल नहीं चौंकी जैसे वह मेरा इन्तेजार कर रही हो. उसको अपने से और चिपकाते हुए मैंने उसकी गर्दन पर एक प्यारभरी चुम्बन दी और हलके शावर का इन्तेजार करने लगा. उसका शरीर बिल्कुल भी हरकत नहीं कर रहा था. हम दोनों लगभग आधे घन्टे तक शावर का मजा लेते रहे. पानी में ज्यादा देर रहने से ठण्ड लग रही थी. मैंने उसको झकझोरते हुए बोला – “चलो, ज्यादा देर रहे तो ठण्ड लग जाएगी. कमरे में चलते है.” हमदोनो उठकर शावर को बंद किया और तौलिये से एक-दुसरे के बदन को सुखाने लगे. आखिर में जब वह मेरा बदन सुखा रही थी तो पूरा शरीर को पोंछने के बाद झुककर मेरे लिंग की निचले हिस्से में होंठ रखकर एक चुम्बन जड़ दिया. इससे मेरा पूरा बदन सिहर उठा. फिर वह मेरी बाँहों को पकड़ कर कमरे में आ गयी. हमदोनो ही थके हुए थे इसलिए एक ही चादर में सो गए. वह मेरी पीठ से चिपककर एक टांग मेरे पैरो के ऊपर चढ़ाकर लेती थी. उसकी सख्त चूचियां मेरी पीठ पर एक अजीब सी झुनझुनी पैदा कर रही थी. मेरे मन में कई तरह के ख्याल आ रहे थे. क्या मैं सच में सोमलता से प्यार कर बैठा था या फिर वक़्त के साथ-साथ यह अनुभव ख़तम हो जाने वाला है? इस रिश्ते का अंत क्या होना है? एक रण्डी के साथ दिन गुजरने और एक शरीफ औरत के साथ दिन गुजरने में बहुत फर्क है. शायद वह मेरे दिल में कहीं ना कहीं जगह बना चुकी थी. हम दोनों शांत हो लेते हुए थे. पता नहीं सोमलता क्या सोच रही थी. मैं हमेशा से बड़ी उम्र की औरत में ज्यादा दिलचस्पी लेता था, लेकिन इस तरह के रिश्ते के बारे में कभी नहीं सोचा था.
Tags = Tags = Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | उत्तेजक | कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना मराठी जोक्स | कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी कहानियाँ | मराठी | .blogspot.com | जोक्स | चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी कहानी | पेलता | कहानियाँ | सच | स्टोरी | bhikaran ki | sexi haveli | haveli ka such | हवेली का सच | मराठी स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | की कहानियाँ | मराठी कथा | बकरी की | kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | kutiya | आँटी की | एक कहानी | मस्त राम | chehre ki dekhbhal | | pehli bar merane ke khaniya hindi mein | चुटकले | चुटकले व्यस्कों के लिए | pajami kese banate hain | मारो | मराठी रसभरी कथा | | ढीली पड़ गयी | चुची | स्टोरीज | गंदी कहानी | शायरी | lagwana hai | payal ne apni | haweli | ritu ki hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | www. भिगा बदन | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कामरस कहानी | मराठी | मादक | कथा | नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | bua | bahan | maa | bhabhi ki chachi ki | mami ki | bahan ki | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना, aunty,stories,bhabhi, nangi,stories,desi,aunty,bhabhi,erotic stories, hindi stories,urdu stories,bhabi,desi stories,desi aunty,bhabhi ki,bhabhi maa ,desi bhabhi,desi ,hindi bhabhi,aunty ki,aunty story, kahaniyan,aunty ,bahan ,behan ,bhabhi ko,hindi story sali ,urdu , ladki, हिंदी कहानिया,ज़िप खोल,यौनोत्तेजना,मा बेटा,नगी,यौवन की प्या,एक फूल दो कलियां,घुसेड,ज़ोर ज़ोर,घुसाने की कोशिश,मौसी उसकी माँ,मस्ती कोठे की,पूनम कि रात,सहलाने लगे,लंबा और मोटा,भाई और बहन,अंकल की प्यास,अदला बदली काम,फाड़ देगा,कुवारी,देवर दीवाना,कमसीन,बहनों की अदला बदली,कोठे की मस्ती,raj sharma stories ,पेलने लगा ,चाचियाँ ,असली मजा ,तेल लगाया ,सहलाते हुए कहा ,पेन्टी ,तेरी बहन ,गन्दी कहानी,छोटी सी भूल,राज शर्मा ,चचेरी बहन ,आण्टी , kahaniya ,सिसकने लगी ,कामासूत्र ,नहा रही थी , ,raj-sharma-stories कामवाली ,लोवे स्टोरी याद आ रही है ,फूलने लगी ,रात की बाँहों ,बहू की कहानियों ,छोटी बहू ,बहनों की अदला ,चिकनी करवा दूँगा ,बाली उमर की प्यास ,काम वाली ,चूमा फिर,पेलता ,प्यास बुझाई ,झड़ गयी ,सहला रही थी ,mastani bhabhi,कसमसा रही थी ,सहलाने लग ,गन्दी गालियाँ ,कुंवारा बदन ,एक रात अचानक ,ममेरी बहन ,मराठी जोक्स ,ज़ोर लगाया ,मेरी प्यारी दीदी निशा ,पी गयी ,फाड़ दे ,मोटी थी ,मुठ मारने ,टाँगों के बीच ,कस के पकड़ ,भीगा बदन , ,लड़कियां आपस ,raj sharma blog ,हूक खोल ,कहानियाँ हिन्दी , ,जीजू , ,स्कूल में मस्ती ,रसीले होठों ,लंड ,पेलो ,नंदोई ,पेटिकोट ,मालिश करवा ,रंडियों ,पापा को हरा दो ,लस्त हो गयी ,हचक कर ,ब्लाऊज ,होट होट प्यार हो गया ,पिशाब ,चूमा चाटी ,पेलने ,दबाना शुरु किया ,छातियाँ ,गदराई ,पति के तीन दोस्तों के नीचे लेटी,मैं और मेरी बुआ ,पुसी ,ननद ,बड़ा लंबा ,ब्लूफिल्म, सलहज ,बीवियों के शौहर ,लौडा ,मैं हूँ हसीना गजब की, कामासूत्र video ,ब्लाउज ,கூதி ,गरमा गयी ,बेड पर लेटे ,கசக்கிக் கொண்டு ,तड़प उठी ,फट गयी ,भोसडा ,मुठ मार ,sambhog ,फूली हुई थी ,ब्रा पहनी ,چوت , . bhatt_ank, xossip, exbii, कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ रेप कहानिया ,सेक्सी कहानिया , कलयुग की कहानियाँ , मराठी स्टोरीज , ,स्कूल में मस्ती ,रसीले होठों ,लंड ,पेलो ,नंदोई ,पेटिकोट ,मालिश करवा ,रंडियों ,पापा को हरा दो ,लस्त हो गयी ,हचक कर ,ब्लाऊज ,होट होट प्यार हो गया ,पिशाब ,चूमा चाटी ,पेलने ,दबाना शुरु किया ,छातियाँ ,गदराई ,पति के तीन दोस्तों के नीचे लेटी,मैं और मेरी बुआ ,पुसी ,ननद ,बड़ा लंबा ,ब्लूफिल्म, सलहज ,बीवियों के शौहर ,लौडा ,मैं हूँ हसीना गजब की, कामासूत्र video ,ब्लाउज ,கூதி ,गरमा गयी ,बेड पर लेटे ,கசக்கிக் கொண்டு ,तड़प उठी ,फट गयी ,फूली हुई थी ,ब्रा पहनी
बाबु, अभी और नहीं--3
हमदोनो टेबल पर आमने-सामने बैठे थे. मैं सिर्फ बॉक्सर पहना था और मेरी सोमलता तो टॉवल छाती से लपेटे हुए थी. जब वह बैठ खाना खा रही थी तो टॉवल सिर्फ उसकी कमर को ढक रहा था, उसकी गोरी चिकनी जांघे नंगी थी. उसकी जांघों का मस्त नज़ारा मेरे लंड को बहुत अच्छा लग रहा था जो रह-रहकर बॉक्सर फाड़ने को बेताब हो रहा था. मैं मन में सोचा – “आज इसको चुसाई का मज़ा देना है. लेकिन इससे पहले इसको राज़ी करना पड़ेगा. कल परिवार आ जायेगा तो फिर हमारा यह कार्यक्रम नहीं हो पायेगा.” मेरे दिमाग में एक तरकीब आया. नास्ता ख़त्म करने के बाद, मै उसको अपने कमरे ले ले गया. सारे दरवाजे-खिड़कियाँ बंद करने के बाद उसको एक चेयर पे बैठाया और बोला – “रानी, फिल्म देखोगी?” वह फ़ौरन हामी भरते हुए बोली – “हाँ, कौन सी फिल्म बाबु?” मैंने कहा – “देखो मज़ा आएगा” मैं दौड़ कर दो बियर फ्रिज से निकल लाया और उसके बगल चेयर में बैठ गया. मैंने एक पोर्न विडियो लगाया था जिसमे एक सौतेली माँ बेटे को बताती है की उसकी गर्ल-फ्रेंड को कैसे चूमना है. बात चुम्मी से शुरू होकर चुदाई तक पहुँचती है. वह माँ उससे चूत चुसवाती है फिर उसका लंड चूसती है. दोनों डौगी स्टाइल में चुदाई करते है और आखिर में सौतेली माँ बेटे का मुठ मरती है, सारा बिर्य पि जाती है. यह विडियो धीमा होने के साथ-साथ काफी सेक्सी है. ना जाने मैंने कितनी बार इसको देख मुठ मारा है. विडियो की नायिका की फिगर उसकी उम्र के वावजूद लाजवाब था. जैसे ही फिल्म शुरू होती है, सोमलता की आँखें बड़ी होनी शुरू होती है. मैं उसकी कुर्सी को अपने पास खिंच लेता हूँ. जब फिल्म का नायक अपनी सौतेली माँ की स्तन को मसलता-चूसता है तो सोमलता अकड़ कर सीधी हो जाती है. उसकी आँखें अब लैपटॉप स्क्रीन पर गड जाती है और उसे अपना ख्याल तक नहीं रहता. फिल्म आगे बढती है. अब नायक अपनी माँ की चूत को चूमना-चाटना शुरू करता है और साथ-साथ उसे अपनी ऊँगली से चोदता भी है. माँ जोर-जोर से सिसकारी लेती है और अपने बदन को उछलती है. यह गर्म दृश्य देखकर सोमलता गर्माने लगती है. उसका हाथ खुद-ब-खुद योंनी पर चला जाता है और उसे रगड़ने लगती है. उसकी चूचियां इतनी कास जाती है की वो जो तोलिया लपेटे हुए थी वह खुल का गिर जाता है. उसकी चूचियां सख्त और निप्पल सीधे खड़े हो जाते है. मैं अपने दायें हाथ से उसकी नंगी मांसल जन्घो को सहलाना शुरू करता हूँ. अब उसके मुँह से सिसिकारी निकलना आरंभ होता है. वह आँखें बंद कर सिसिकारी मारे जा रही है और ऊँगली से अपनी चूत को मसले जा रही है. मैंने उसकी हाथ को रोक अपनी ऊँगली से उसकी चूत के भागनासे को छेड़ना शुरू करता हूँ. मेरी ऊँगली की हर हरकत पर उसकी आंह निकलती है. “आःह्ह्ह....... माई री......... हाय बाबु........... मै मर जाउंगी मेरे राजा........ सिसिसिसी.........................”
अब यह खेल कुर्सी पर खेलना असंभव था. मैंने उसकी कमर से उठाया और मेरे बिस्तर पर पटक दिया. वह मेरी और प्यासी नज़रो से देख रही थी. मानो वह कई दिनों की प्यासी है और मेरे पास शरबत का गिलास है. मै उसके पास गया और उसकी टांगो के निचे बैठ गया. उसकी दोनों हथेलियों को अपनी हथेलियों में लेकर पुरी बदन को अपने बदन के निचे लाया और उसकी होंठो का रस चूसने लगा. चूसने के दौरान मैं अपनी लिंग को उसकी चूत के ऊपर रगड़ भी रहा था. इसके बाद उसकी चुचियो की बारी थी. उसकी चूचियां इतनी सख्त हो गयी थी की मैं उसे मुँह से पकड़ नहीं पा रहा था. अब मैं उसकी नाभि के पास जीभ से चाटना शुरू करता हूँ. मेरी जीभ उसकी गहरी नाभि में जब-जब घुसती, तब-तब वह पेट तो सिकोड़ देती. अब मैं उसकी चूत के उपरी हिस्से को चाटते हुए उसकी क्लिट को छेड़ना शुरू करता हूँ. उसकी चूत के गुलाबी होंठ फूलकर पावरोटी जैसे हो गए. मैंने जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल दी. वह उछल कर बैठ गयी. मैंने उसको निचे गिराया उसकी चुचियों पर हाथ रखा और फिर से चूत में जीभ डाल दी. वह सर को उठाकर आंहे भरे जा रही थी और उसकी चूत जीभ के लिए और गहरी जगह बानी रही थी. जब मैंने देखा की जीभ आसानी से अन्दर-बाहर हो रही है तो मैंने अपनी बीचवाली ऊँगली चूत में डाल दी. उसकी चूत अन्दर से काफी गर्म था. उसकी सिसिकारी की आवाज बढती जा रही थी. मैंने ऊँगली को डालना चालू रखा और जीभ से चूत की क्लिट को चाटना भी. 10 मिनट के बाद सोमलता का बदन अकड़ने लगा. वह मेरे बालो को जोर से पकड़कर मेरे माथे को अपनी चूत में दबाने लगी. अब उसकी चूत गीली हो रही थी जो बता रही थी की वह चरम आनंद के पास पहुँच रही है. अब उसकी बदन के निचे का हिस्सा जोर जोर से कांपने लगा. मैंने चुसना और ऊँगली से छेड़ना जरी रखा. अचानक उसकी चूत ने जोर की पिचकारी मारी और मेरा मुँह उसकी योनिरस में भर गया. नमकीन गर्म पानी के स्वाद ने मुझे मदहोश कर दिया. सोमलता की मेरे बालो पर पकड़ ढीली हो गयी और वह ढीली होकर लेती रही. मैं ऊपर आकर उसकी बालो को सहलाने लगा. उसके चेहरे पर संतुष्टि का भाव था. कुछ देर के बाद उसकी बांहों में मुझे जकड़ा और मुझे अपने करीब खिंच लिया. उसकी चूचियां अब भी सख्त थी जो मेरे सीने में गड रही थी. वह मेरे कान के पास आकर धीरे से बोली – “बाबु, किसी ने पहली बार बिने चोदे मुझे इतना सुख दिया. तुम बहुत अच्छे हो.” अब वह मेरे लंड को टटोलने लगी. मुझे लगा की वह भी मुझे मुख-मैथुन का सुख देना चाहती है. लेकिन लगता है वह अभी भी इसके लिए तैयार नहीं थी.
मेरे लंड को पकड़ कर बोली – “बाबु, इसको प्यासा मत रखो. मेरी चूत में तो बारिश हो गयी. इसको भी डूबने का मौका दो.” “ठीक है. चलो अब घोड़ी बन जाओ” मैंने उसको कमर से पकड़ कर घोड़ी जैसा स्थिति बनाने की कोशिश की. वह थोड़ा असहज महसूस कर रही थी क्योंकि यह उसका पहला बार था. मैंने बड़ी मुस्किल से उसकी पोजीशन बनायीं और उसकी कमर को बाएं हाथ से कसकर लपेट लिया. उसकी गीली चूत को द्दो-चार बार ऊँगली से मसलने के बाद लंड में सूपड़ा योनी के द्वार पर रख दिया. मैं उसकी कान में बोला – “रानी तैयार हो मेरे लंड राजा के लिए?” वह थूक निगलते हुए बोली – “हाँ मेरे सैंया राजा, डाल दो अपना डंडा” मैंने धीरे से धक्का लगाया. लंड आधा जाकर फास गया. चूत की दिवार लंड को कसकर पकडे थी. उसकी गले से एक हल्की चीख निकली. मैंने फिर से ज़ोरदार धक्का लगाया. लंड चूत की दीवारों को फाड़ते हुए सीधे बच्चेदानी से जा टकराया. मेरे इस धक्के ने सोमलता की बदन को हिलाकर रख दिया और मेरा कमर जोर से उसकी गांड से टकराया. उसने बड़ी मुस्किल से अपनी चीख को बाहर आने से रोका. मैं कुछ सेकंड के लिए रुका, उसकी स्थिति को सही किया और धीरे से लंड को बाहर खिंचा. लंड के सुपाड़े को बिना बाहर निकाले फिर से धक्का दिया. अब कुछ कम तकलीफ हुई. अब मैं धीरे-धीरे धक्का लगता रहा. एक हाथ से उसकी चुचियों को बीच-बीच में मसलता भी था. अब मेरा लंड फूलने लगा. मैंने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई. मेरा कमर जोर-जोर से उसकी गांड में टकराता गया. वह भी धक्के के ताल पर अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी. 20 थापों के बाद मेरा लंड झड़ गया. मै बिना लंड को निकले उसके ऊपर निढाल हो गया. मेरी सांसे जोर-जोर से चल रही थी. मेरा लंड सिकुड़ने तक उसकी चूत में अटका रहा और बाद में फच्च की आवाज के साथ बाहर निकल गया. हमदोनो लगभग 15 मिनट तक लेते रहे. बाद में वह उठकर बाथरूम में चली गयी और मैं लेटा रहा. मैंने घडी में वक्त देखा, दोपहर के 12 बज रहे थे.
मैं काफी थका हुआ था लेकिन आज का दिन ही मैं सोमलता को अपने घर में रख सकता था. कल से फिर कोई और उपाय लगाना पड़ेगा. मेरे लिंग से तेज सनसनी के साथ हल्की जलन हो रही थी. मैंने लिंग को देखा तो वह रगड़ खाकर लाल हो गया था. मैं बाथरूम की और चला. बाथरूम के पास जाकर देखा की सोमलता नंगी आदमकद शीशे के सामने खड़ी होकर पुरी ध्यान के साथ अपने बदन को निहार रही है. मैं दरवाजे के पीछे छिपकर देखने लगा. वह हल्की मुस्कराहट के साथ बदन का मुयायना कर रही थी साथ में स्तन से लेकर जांघो को ऊपर से निचे सहला रही थी. आज पहली बार मैंने उसको इतना खुलकर मुस्कुराते देखा था. बदन से वह अपनी उम्र से 5-7 साल छोटी लग रही थी. मैं धीरे –धीरे उसके पीछे गया और कमर को पकड़ कर उसकी गर्दन चूमने लगा. मेरे अचानक आने से वह शरमा गयी और नज़रें झुका के बोली – “बाबु, तंग मत करो. मुझे अच्छा नहीं लगता.” मैंने उसको अपनी तरफ लाकर उसकी गालो को हथेलियों में भर चेहरे को उठाकर पूछा – “अच्छा, क्या-क्या हमने अच्छा नहीं लगता. मैं अच्छा लगता हूँ? मेरा प्यार अच्छा लगता है? और मेरा लंड?” वह थोड़ा उदास होकर बोली – “बाबु, मुझे तुम्हारा सब कुछ अच्छा लगता है लेकिन यह कब तक चलेगा? कल से फिर मैं मजदूरी करुँगी और तुम बाहर अपने दुनिया में रम जाओगे.” मैंने उसकी छाती को अपने से चिपकाकर कहा – “नहीं रानी, ऐसा नहीं होगा. हम भले दूर रहे, लेकिन हमेशा मिलते रहेंगे और इसी तरह मिलते रहेंगे.” उसकी बालो को सहलाते हुए मैंने बड़े प्यार से वादा किया था. वह आखों में उम्मीद लाकर कही – “सच?” मैं उसको चुमते हुए बोला – “बिल्कुल सच, अब चलो बाहर कमरे में चलते है.” वह अपना सर मेरे कंधे में रखकर मेरी कमर को पकड़ते हुए मेरे साथ बाहर आ गयी.
हम दोनों कमरे में अगल-बगल लेट गए. सोमलता मेरे सीने में सर रखकर मेरी छाती के बालो से खेलने लगी. बोली – “बाबु, तुम शादी कब करोगे?” मैं गहरी साँस लेकर कहा – “पता नहीं. कोई अच्छी लड़की भी तो मिलनी चाहिए.” वह भी गंभीर हो बोली – “”हाँ. बात तो सही है!” मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए पूछा – “अच्छा तुम मजदूरी छोड़ और कोई काम नहीं कर सकती हो?” वह उदास लहजे में बोली – “कोई काम आता भी नहीं है.” मैं बोला – “सुनो, मेरे एक दोस्त की बीवी का ब्यूटी पार्लर है. मैं तुम्हे वहां काम पर लगा सकता हूँ, अगर तुम चाहो तो?” वह सर घुमाकर मेरी और देखते हुए बोली – “वहां क्या काम करना होगा बाबु?” मैं शरारती होते हुए बोला – “वोही जो मैं तुम्हारे लिया किया. औरतों के चूत और बगलों के बाल साफ़ करने होंगे.” वह मेरी छाती पर हल्का चपत लगते हुए बोली – “धत बाबु, मुझे ऐसा गन्दा काम नहीं करना.” मैंने कहा – “इसमें कौन सी गन्दगी है. कितनी लडकिया यह काम करती है. सोच लो तुम्हारा भी काम हो जायेगा.” मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली – “सच बोलो ना बाबु?” मैंने हँसते हुए बालो को सहलाते हुए कहा – “आरे नहीं. वहां तुमको औरतों के बाल बनाने होंगे. नाख़ून बनाने होंगे. सजावट वगैरह का काम करना होगा. वैसे वो काम भी होता है.” वह थोड़ा मायूस हो गयी. नज़र झुककर बोली – “लेकिन मुझे यह सारा काम नहीं आता है.” उसको दोनों बांहों से कसकर पकड़ते हुए बोला – “तुम चिंता मत करों रानी. मेरी भाभी तुमको एक्सपर्ट बना देगी. कल मैं उससे बात करूँगा. अब बस तुम सिर्फ मेरे बारे में सोचो.” वह शरमाकर मेरे छाती में माथा गड़ाकर बोली – “बाबु तुम बड़े वह हो” उसकी बातों पर मैं जोर से हंस दिया. हम एक दुसरे की बांहों में खोये रहे अगले एक घन्टे तक.
मैं आखें बंद कर सोमलता को छाती से चिपकाकर लेता रहा. मेरा दिमाग उस वक़्त बिल्कुल शांत और किसी तरह के ख्यालों से खाली था. काफी दिनों के बाद मैं पूरी शांति का अनुभव कर रहा था. मेरा ध्यान तोड़ते हुए वह धीरे से बोली – “बाबू! ओं बाबु!” मैं आँख मूंदकर ही जवाव दिया – “हुंह....” उसने मेरी बालो को सहलाते हुए बोली – “कुछ खाओगे नहीं? भूख नहीं लगी तुम्हे?” मैं कहा – “हुंह, देखते है रसोई में क्या है.” मैं उठकर रसोई की तरफ बढ़ने लगा. वह भी मेरे पीछे आई और बोली – “बाबु, दूध है, मैं तुम्हारे लिए खीर बना देती हूँ. मैं अभी कपड़े पहन कर आई.” औए वह मुड़कर जाने लगी. मैंने उसकी हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा – “नहीं मेरी रानी. कपड़ो की कोई जरूरत नहीं है. यहाँ कोई आनेवाला नहीं है. ऐसे ही रहो ना.” “बेशरम!!!” वह अपना हाथ छुडाते हुए बोली और खीर पकाने की तैयारी करने लगी. चूल्हे पर खीर चड़ने के बाद वह खिड़की के पास खड़े हो बाहर देख रही थी और मैं उसके पीछे खड़ा था. पुरे घर में नंगे घूमना एक मजेदार रोमांच पैदा कर रहा था. मैं उसकी बाँहों को पीछे से सहला रहा था. उसकी बदन और बालो से एक मीठी खुसबू आ रही थी जो काफी सुहावना लग रहा था. हम दोनों ही अपने ख्यालों में खोये हुए थे. कुकर की सिटी में हमारा ख्याल थोड़ा. मैं चूल्हे को बंद किया. अचानक मेरे दिमाग में शरारत सूझी. मैंने जैम का डब्बा निकाला और ढेर सारा जैम उसकी छाती में मल दिया. वह चोंककर मेरी और सवालिया नज़रो से देखी. मैं सिर्फ मुस्कुराया. मैं उसको बाहों से पकड़कर दीवाल से सता दिया और झुककर उसकी चुचियों की गहरी घाटी पर लगे जैम को चाटने लगा. उसकी जुबान से हल्की सिसकी निकली. वह मस्ती में आँख मूंदकर सर दिवार से टिककर सिसकी लेती जा रही थी. उसकी सिसकी ने मुझे गरम कर दिया. मैं जोर-जोर से उसकी चुचियों की चाटने-चूसने लगा. खासकर उसकी चुह्चियों के निप्पल को तो पुरी गोलाई से मुँह में डालता और दांत से दबाकर चूसता. मैंने चूस-चूसकर पुरी बदन से जैम को ख़तम कर दिया. अब मेरा हाथ उसकी नंगी चूत पर चला गया. उसकी योनी पहले ही अपना रस छोड़ चूका था. गीली चूत में मैं ऊँगली से चोद रहा था. उसकी सिसकियों की आवाज अब ज्यादा हो गयी. वह निचे के होंठ को दांत से दबा सिसकी मर रही थी और मेरे सर को अपने छाती में दबा रही थी. मैंने बाये हाथ से उसकी कमर को लपेट कर किचेन के टेबल से टिककर खड़ा किया. अब मैंने दो ऊँगली एक साथ उसकी गीली में चूत में डाल दी. उसकी तेज सिसकी निकली और पेट को उत्तेजना से सिकोड़ दी. मैं एक हाथ से उसकी गांड को दबा रहा था और दूसरी हाथ से उसकी चूत को. मैंने बुरी तरह से उसकी चूत को उँगलियों से चोदना जरी रखा. उसकी सिसकियों की आवाज धीरे-धीरे तेज हो रही थी. उसकी चूत की दीवारे कसने लगी. उसका शरीर कसने लगा, सिसकी बंद और ऑंखें जोर से भीच गयी. वह झड़ने के करीब पहुँच चुकी थी. यह देख मैंने रफ़्तार बढ़ा दी. कुछ धक्को के बाद उसकी चूत में रस भरने लगा. फिर एक गर्म पानी का फव्वारा फूटा. उसकी चूत रह-रह कर पानी छोड़ रहा था जो मेरी उँगलियों से बहते हुए फर्श पर टपकने लगा. योनीरस के मादक महक में पुरे कमरे को भर दिया. सोमलता को इस जबरदस्त ओर्गास्म ने हिलाकर रख दिया. वह निढाल होकर मेरे कंधे के ऊपर गिर गयी. मैंने उसको बाँहों में उठाकर कमरे में ले गया. ले जाते वक़्त भी उसकी ऑंखें बंद थी और सांसे तेज. सांसो के साथ-साथ उसकी छाती तेजी से ऊपर निचे हो रही थी. उसको बिस्तर पर सुलाकर मैं किचेन में आया और उसकी बनायीं खीर दो प्लेट में लगाकर कमरे में गया. अब भी उसकी सांसे तेज थी. मैं उसकी चुचियों का ऊपर-नीचे जाना देख रहा था. उसकी बदन पर पसीने की बुँदे बड़ी सेक्सी लग रही थी. बंद आँखों के कोने से कुछ बुँदे आंसू की टपक पड़ी.मैं आंसू को पोछने गया तो उसकी आँखें खुल गयी. वह धीमे से मुस्कुराई. मैंने उसको खींचकर बैठते हुए कहा – “रानी, खीर ठंडी हो रही है. खा लो.” वह प्लेट हाथ में लेकर चुपचाप खा रही थी और बीच-बीच में मेरी ओर देख मुस्कुरा रही थी . हमने बिना किसी बातचीत के खाना ख़त्म किया. प्लेट लेकर वह रसोई में चली गयी. जाते वक़्त मैं उसकी डगमगाती चाल देख रहा था. एक जबरदस्त चुदाई ने इसकी चाल बदल दी थी.
मैं भी काफी थका हुआ महसूस कर रहा था और दोपहर को सोना मेरी आदत थी. मैं बिस्तर में आराम से लेट गया. मेरे दिमाग में येही बात चल रही थी कि कल से सोमलता को कैसे मिलूँगा. घर में तो मुमकिन नहीं हो सकता और बाहर में खतरा बहुत है.मेरे लिंग पर बीर्य और योनिरस का मिश्रण लगा हुआ था जो सुखकर अकड़ रहा था. ज्यादा चुदाई के कारण मेरा लंड थोड़ा छिल गया था जिसके कारण थोड़ा दर्द कर रहा था. मैंने लंड साफ़ करने के इरादे से बाथरूम गया. बाथरूम का दरवाजा अन्दर से बंद नहीं था, बस लगा था. अन्दर से हल्की शावर की आवाज आ रही थी. दरवाजा को धीरे से ठेलने पर देखा की सोमलता दरवाजे की तरफ पीठ कर निचे शावर के निचे बैठी है और हल्की शावर चल रहा है. मैं बिल्कुल उसके पीछे दोनों टांगो को फैलाकर बैठ गया ताकि उसकी कमर मेरी जन्घो में बीच में हो. उसकी पीठ को अपने छाती से चिपकाकर उसकी कमर को दोनों हाथो से लपेट लिया. ऐसा करने पर भी वह बिल्कुल नहीं चौंकी जैसे वह मेरा इन्तेजार कर रही हो. उसको अपने से और चिपकाते हुए मैंने उसकी गर्दन पर एक प्यारभरी चुम्बन दी और हलके शावर का इन्तेजार करने लगा. उसका शरीर बिल्कुल भी हरकत नहीं कर रहा था. हम दोनों लगभग आधे घन्टे तक शावर का मजा लेते रहे. पानी में ज्यादा देर रहने से ठण्ड लग रही थी. मैंने उसको झकझोरते हुए बोला – “चलो, ज्यादा देर रहे तो ठण्ड लग जाएगी. कमरे में चलते है.” हमदोनो उठकर शावर को बंद किया और तौलिये से एक-दुसरे के बदन को सुखाने लगे. आखिर में जब वह मेरा बदन सुखा रही थी तो पूरा शरीर को पोंछने के बाद झुककर मेरे लिंग की निचले हिस्से में होंठ रखकर एक चुम्बन जड़ दिया. इससे मेरा पूरा बदन सिहर उठा. फिर वह मेरी बाँहों को पकड़ कर कमरे में आ गयी. हमदोनो ही थके हुए थे इसलिए एक ही चादर में सो गए. वह मेरी पीठ से चिपककर एक टांग मेरे पैरो के ऊपर चढ़ाकर लेती थी. उसकी सख्त चूचियां मेरी पीठ पर एक अजीब सी झुनझुनी पैदा कर रही थी. मेरे मन में कई तरह के ख्याल आ रहे थे. क्या मैं सच में सोमलता से प्यार कर बैठा था या फिर वक़्त के साथ-साथ यह अनुभव ख़तम हो जाने वाला है? इस रिश्ते का अंत क्या होना है? एक रण्डी के साथ दिन गुजरने और एक शरीफ औरत के साथ दिन गुजरने में बहुत फर्क है. शायद वह मेरे दिल में कहीं ना कहीं जगह बना चुकी थी. हम दोनों शांत हो लेते हुए थे. पता नहीं सोमलता क्या सोच रही थी. मैं हमेशा से बड़ी उम्र की औरत में ज्यादा दिलचस्पी लेता था, लेकिन इस तरह के रिश्ते के बारे में कभी नहीं सोचा था.
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


No comments:
Post a Comment