Thursday, May 8, 2014

FUN-MAZA-MASTI एकदम कुँवारी नौकरानी

FUN-MAZA-MASTI


 एकदम कुँवारी नौकरानी

मेरे प्यारे गरमा गरम लंड वाले और फुदक्ति चूतो वाली महिलाओ (लड़कियाँ भी). आज मैं जो दास्तान सुनाने जा रहा हूँ वो एक बहुत ही गरमा गरम वाकये की है. मुझे तो आप जानते ही है. मेरा नाम राज शर्मा खैर अब कहानी पर आता हूँ. तो मैं अपने बारे मे बता रहा था. मैं 40 साल का मस्त आदमी हूँ एकदम मज़बूत और मेरा लंड चोद्ने के लिए तड़प्ता रहता है. उसकी लंबाई 7.5 इंच से ज़्यादा है और मोटाई भी 2.5 से 3 इंच होगी. बीवी को चोद चोद कर मेरा लंड अब बोर हो गया है और वो भी इससे परेशान हो गयी है , क्यूकी ये उसकी हालत खराब कर देता है आज भी. इसलिए मेरा ये मस्ताना लंड कुछ ज़्यादा ही उतावला हो गया है और ये कुछ नया खोज रहा था. हमारे घर मे पार्ट-टाइम नौकरानियाँ काम करती हैं. लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी. बीवी बड़ी होशियार थी. सब काली कलूटी और भद्दी भद्दी चुन चुन कर रखती थी. जानती थी ना कि मेरे मियाँ को चूत का बड़ा शौक है. उसे अच्छी तरह मालूम है कि मेरे लंड को अच्छी गरम चूत की खुश्बू अगर मिली तो वो उसे चोदे बिना नही छ्चोड़ेगा. मैं भी मायूस हो गया था. जैसा कि मैने बताया की देल्ही, पूना या दूसरे शहर जा कर चुदाई करने मे क्या प्राब्लम है. मैं नौकरी करू या चुदाई करू? मैं किसी तरह मेरे आस पास की भाभी को कभी लाइन मे ले कर एकाध घंटे के लिए बाहर ले जाउ उसकी भी गुंजाइश नही थी, क्यूकी बीवी की नज़र मुझ पर लगी रहती थी. ऐसे मे अचानक एक बार मेरे घर कोई नौकरानी काम करने को तय्यार नही थी, क्यूकी सब को मेरी बीवी 1-2 महीने मे भगा देती थी. आख़िर मे जब कोई नहीं मिली तो एक को रखना ही पड़ा - जो कि 23-24 साल की मस्त जवान कुँवारी लड़की थी. उसकी शादी टूट गयी थी . सावला रंग था लेकिन ज़्यादा सांवला नही था. थी बहुत ही नमकीन और क्या जोवन. सुंदर ऐसी कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाए. चूंचिया ऐसे गोल गोल और निकलती हुए कि ब्लाउस मे समाई ही नहीं. मैने कयि बार उसका साइड से देखा था . उसकी चुचिया ब्लाउस फाड़ कर बाहर निकलती हुई लगती थी. बड़े गले का ब्लाउस पहनती तो दोनो चुचियों के बीच की घाटी ऐसे दिखती मानो अभी लंड उसका बीच रख कर रगड़ दू. सारी का पल्लू कभी खिसक जाता तो मुझे ऐसा लगता था कि ब्लाउस फाड़ कर चुचिया बाहर निकल आएँगी. बस मैं मौके की तलाश मे था क्यों कि वो चोद्ने के लिए एकदम मस्त चीज़ थी. सोच सोच कर मैने कई बार मूठ भी मारा. बहुत ज़ोर से तम्माना थी कब मौका मिले और कब मैं इसकी कुँवारी चूत मे अपना लंड दबा के घुसा दूं. इसकी टाइट चूत मे मेरा फौलादी लंड डालु और ये चीखे. केयी बार मैं जानबूझकर उसका सामने सिर्फ़ बर्मोडा पहन कर जाता और तब मेरा लंड उसमे से नज़र आता. वो भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी. और मैं उसके बदन को चोरी चोरी से नापता रहता था. मैं सोचता कि इसके छोटे से हाथ मे या छोटे से मुँह मे मेरे लंड का मोटा सूपड़ा कैसा लगेगा. मैने आँख बंद कर के अपने मन मे कई बार उसे नंगा कर दिया. उसकी गुलाबी चूत को कयि बार सोच सोच कर मेरा लंड पूरे उफान पर आता और गीला हो जाता था और खड़ा हो कर फड़फड़ाने लगता जिसे मैं बड़ी मुश्किल से काबू मे करता था. हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल गोल चुचियों को दबाऊं. होंठ तरसते उसका रस भरे होंटो को चूसने के लिए.. जीभ लप्लपाति उसका निपल और चूत को चाटने के लिए. एक बार चाय लेते समय जब मैने जानबूझकर उसे छुआ तो मानो करेंट सा लग गया और मेरा लंड लूँगी से बाहर निकल आया ये देखते ही वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गयी. मैने कहा मौका आने दे, रानी तुझे तो खूब चोदुन्गा. लंड तेरी चिकनी चूत मे डाल कर भूल जाउन्गा. और तू अपनी चूत मे लंड को कस लेगी कभी जुदा ना होने के लिए. चुचि को चूस चूस कर प्यास बुझाऊँगा और दबा दबा कर मज़े लूँगा. पूरी लाल कर दूँगा चूंचियाँ को. और निपल को कातूंगा और तू चिल्लाएगी. होठों को तो खा ही जाऊँगा. रानी उसका प्यारा सा नाम था.

कहते हैं उसके घर मे देर है पर अंधेर नहीं. एक दिन सनडे सुबह अचानक मेरे साले का फोन आया कि उसकी मा याने मेरी सास बहुत बीमार है और उसे हॉस्पिटल मे अड्मिट किया है. मेरी बीवी ने मुझसे चलने के लिए कहा लेकिन मैने कहा की मैं अचानक छुट्टी नही ले पाउन्गा. और मंडे को मेरी एक ज़रूरी मीटिंग भी है. तो बीवी ने कहा मैं तो मैके जा रही हूँ. मैने कहा ठीक है तुम वहाँ जा कर मुझे फोन करना मैं बाद मे आ जाउन्गा अगर ज़रूरत हुई तो. उसने अपना समान पॅक किया और मुझसे कहा.. रानी आएगी तो घर का काम करवा लेना. रविवार का दिन था. बच्चे भी बीवी के साथ चले गये. और मेरे लंड महाराज तो उछल गये. मैं ये मौका चूकने वाला नहीं था. लेकिन शुरू कैसे करे. कही चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गयी तो ? दोस्तों, तुम यह जान लो कि लड़कियाँ कितना ही शरमाये लेकिन दिल में उनकी इच्छा रहती है कि कोई उन्हे छेड़े और चोदे.
मैने दूसरे दिन ऑफीस मे फोन कििया और कहा आज मैं ऑफीस नही आउन्गा सीधे एक साइट की विज़िट पर जाउन्गा. मुझे कॉंटॅक्ट करना हो तो मेरे मोबाइल पर करे. फिर मैं रानी का इंतेज़ार करने लगा. मेरा लंड शायद समझ गया था कि आज उसका दिल की तमन्ना पूरी होने वाली है. इसलिए एकदम टाइट था. मैने उसे किसी तरह काबू मे रखा हुआ था. सुबह ठीक 9 बजे रानी आई. उसने पूछा "मेम्साब किधर है?" मैने कहा " वो अपने मयके गयी है". वो कुछ नही बोली, मेरी तरफ तिरछी नज़र से देखा और अपना काम करने जाने लगी. मैने रानी को बुलाया और उसे देखते हुए कहा - "रानी, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो ?" हू बोली "क्यूँ साहब, क्या कम है ?" मैने जवाब दिया, "देखो, ब्लाउस के नीचे कोई ब्रा नहीं है. सब दिखता है. लड़के छेड़ेंगे तुझे." वो बोली, "बाबूजी, इतने पैसे कहाँ कि चोली खरीद सकूँ. मैने कहा "तुझे चाहिए. तेरे ये कबूतर ब्रा मे और भी खूबसूरत लगेंगे" वो शर्मा गयी लेकिन उसने मुझसे पूंछ लिया "आप दिलवाओगे." मैने कहा, "दिलवा तो मैं दूँगा. लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी ने तुझे छेड़ा है. या किसी लड़के या मर्द के साथ तुमने कुछ किया है" उसने जवाब दिया, " छेड़ते तो बहुत है.. लेकिन मैं किसी मर्द के साथ कभी कुछ नही किया मुझे किसी मर्द ने छुआ भी नहीं साहब." मैने कहा, "इसका मतलब तू एकदम कुँवारी है."

"जी साहब."

"अगर मैं कहूँ कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज़ तो नहीं होगी." "नाराज़ क्यू होंगी साहब. आप तो बहुत अच्छे हो." बस यही उसका सिग्नल था मेरे लिए. मैने हिम्मत रख कर पूछा, " अगर मैं तुम्हे थोड़ा प्यार करूँ तो तुम्हे गुस्सा तो नहीं लगेगा." अपने पैर की उंगलियों को वो ज़मीन पर मसल्ति हुई बोली, "आप तो बड़े वो हो साहब. मैं तो नौकरानी हूँ. आप मुझसे क्यू प्यार करेंगे" मैने आगे बढ़ते हुए कहा, "तू ऐसा क्यू सोचती है. तू इतनी सुंदर है और तुझे देख कर मेरा क्या हाल होता है ये तो तूने देखा है ना. और मैं तुझे बहुत सारी ब्रा , पॅंटी और मेकप का समान भी खरीद कर दूँगा. तुझे कभी कोई ज़रूरत हो तो मुझसे कहना . " वो कुछ बोली नही शर्मा के नीचे देखने लगी. मैने कहा "तेरी उमर तो प्यार करने की हो गयी है, कितनी जवान और सुंदर है तू. तुझे नही लगता कि कोई मर्द तुझे अपने बाहों मे ले और बोहोत अच्छे से प्यार करे ? तेरे इस गदराए बदन को सहलाए और फिर तुझे बहुत रगडे?" उसने हां मे सिर हिलाया. मैं आगे बढ़ा और कहा "अच्छा अपनी आखें बंद कर ले और अभी खोलना नहीं." उसने आखें बंद की और हल्के से मूह उपर की तरफ कर दिया. मैने कहा-बेटा लोहा गरम है, मार दे हथोडा. आहिस्ता से पहले मैने उसके गालों को अपने हाथों मे लिया और फिर अपनी एक उंगली से उसके गुलाबी होंटो को हल्के से सहलाया वो सिहर उठी.. उसके होंठ खुलने बंद होने लगे मैं नीचे झुका और बहुत हल्के से जीभ निकाल के उसका होंटो को चटा और वो सम्हल पाती इसके पहले ही रख दिए अपने होठ उसके होठों पर. हाए क्या ग़ज़ब की लड़की थी. क्या रसीले और नरम होंठ थे..क्या टेस्ट था. दुनिया का कोई भी शराब उसका मुक़ाबला नहीं कर सकता था. ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बाँध टूट गये. मेरे होठों ने कस कर उसके होठों को चूसा और चूस्ते ही रहे. मेरे दोनो हाथो से मैने उसे अपने सीने से लगा लिया. वो भी कसमसाकर मुझसे चिपक गयी. उसकी चूंचियाँ मेरे सीने मे धँस गयी.. बहुत मांसल और सख़्त चूंचियाँ थी किसी रब्बर बॉल की तरह. मेरे दोनो हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया, और उसकी पीठ को सहलाने लगे. मेरी जीब उसकी जीब का टेस्ट लेने लगी. इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा. बस मज़ा लेती रही. अचानक उसने आखें खोली और बोली, "साहब, बस, कोई देख लेगा." मैने कहा, "रानी, अब तो मत रोको मुझे. सिर्फ़ एक बार."
"एक बार, क्या साहब ?" उसने बड़ी मासूमियत से पुंच्छा. अभी भी वो मेरी बाँहो मे थी.

मैने उसके कान पे पास जा कर कहा, "चुद्वायेगि ? एक बार अपनी मस्तानी कुँवारी चूत मे लंड घुस्वाएगी ? देख मना मत करना. कितनी सुंदर है तू. " यह कह कर मैने उसे और कस कर पकड़ लिया और दाहिने हाथ से उसकी बाई चुचि को दबाने लगा. मूह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होठों पर, और हर जगह पर चूमने लगा पागलो की तरह. क्या चूंची थी, मानो सख़्त संतरे. दबाओ तो चिटक चिटक जाए. उफ़फ्फ़.., मलाई थी पूरी की पूरी. मेरे हाथो मे समा गये थे.. और वो आहें भरने लगी..आहह…म्‍म्म्मम. . उफफफफ्फ़..धीरे… सहाआआब्ब… मुझे कुछ हो रहा..हाईईइ. . उसकी आवाज़ अब डूबने लगी थी.. एक मादकता सी छा गयी उसका चेहरे पर.
मैने कहा "रानी कैसा लग रहा है? मेरे प्यार से तुझे मज़ा आ रह है कि नही?"

रानी ने जवाब दिया, "साहब, मैने यह सब कभी नहीं किया. मुझे शर्म आ रही है. और मुझे डर भी लगता है"

उखरी साँसों से मैने कहा, "हाई मेरी जान रानी, बस इतना बता, अक्च्छा लगा या नहीं. मज़ा आ रहा है कि नहीं ? मेरा तो लंड बेताब है जाने मन. और मत तडपा."

"साहब, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जाएगा तो ?" और वो मुझसे और ज़्यादा लिपटने लगी.

बस मैने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया. कस कर चूमते हुए मैने उसके ब्लाउस के बटन खोले और सारी भी निकाल दी अब वो सिर्फ़ पेटिकोट मे थी. मैने उसका पूरे बदन को चूमते हुए उसका पेटिकोट के उपर से ही उसकी चूत को सहलाया.. ऊवू.. चूत बहुत ही मुलायम थी.. और उभरी हुई थी. शायद उसकी चूत पर बाल भी थे. मैने पेटिकोट का नाडा खींच दिया और उसने गांद उपर करते हुए उसे निकाल दिया.. इस तरह मैने उसके कपड़ों को उतारा. आअहह क्या नज़ारा था.. चूत पर बाल थे लेकिन चूत एकदम गुलाबी थी. मैने पूंच्छा "यहाँ के बाल क्यू नही सॉफ करती". उसने कहा.. " आपको अच्छे नही लगते तो आप सॉफ कर दो ना.". मैं तो खुश हो गया.. मैं बाथरूम जा कर अपना शेविंग किट ले आया और फिर उसकी चूत और बगल मे अच्छे से साबुन लगा कर उसका बाल पूरे सॉफ किए फिर उसे अच्छे से सॉफ किया.. वाउ.. उसकी चूत सिर्फ़ एक गुलाबी दरार थी.. और शेविंग ब्रश रगड़ने से उसकी चूत ने काफ़ी जूस निकाला था. मैने हल्के से उसकी चूत को सहलाया और चूमा.. उसके मुँह से आहह… ऊओ.. हाइी.. की आवाज़ निकली.. और वो मचल गयी.. फिरमैने अपने कपड़ों को जल्दी से निकाला. 7.5" लंबा मेरा लंड फड़फदते हुए बाहर निकला. देख कर उसकी आखें बड़ी हो गयी. बोली "बाप रे..है यह क्या है? यह तो बहुत बड़ा है… इतना लंबा और मोटा.. साहब.. इसे मेरी उसमे डालोगे.. मैं तो मर जाउन्गा.. मैने तो आज तक उंगली भी नही डाली ठीक से." उसका कहना सही था, उसकी चूत के होंठ एकदम चिपके हुए थे.. और इतनी गुलाबी चूत तो मेरी बीवी की भी नही थी सुहाग रात मे. मैं तो पागल हो गया.

मेरा लंड और ज़्यादा लंबा और मोटा होने लगा मैने उसे इशारा किया और कहा"पकड़ ले इसे मेरी जान." कहते हुए मैने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया. उसके बदन को पहली बार नंगा देख कर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा. चुचि ऐसी मस्त थी कि पूछो मत. चूत को मैने सहलाया.. बाल साफ करने के बाद चूत एकदम ऐश्वर्या राई की चूत जैसी लग रही थी (ये मेरा सोचना था). मेरे हाथ उसकी चूत तरफ बढ़ ही गये. और चूत के होंठो को थोड़ा खोला तो उसकी चूत का दाना दिखा जिसे मैने हल्के से अंगूठे से दबाया और फिर उसकी चूत से निकलते हुए जूस को दाने पर मलते हुए रगड़ने लगा.. आहह ..हाइी.. मा.. बहुत अच्छा लग रहा साहब…और करो..क्या गरम चूत थी. उंगली आहिस्ता से अंदर घुसाइ. रस बह रहा था और उसकी चूत गीली हो गयी थी. गुलाबी गुलाबी चूत को उंगलियों से अलग किया, मैने उसकी चूत को चूमा. फिर चूत के खुले होंठ से मैने अपनी जीभ अंदर डाल दी… आहह.. ये क्या कर रह हो साहब..ओह माआ. मेरा क्या निकल रहा है.. मैं बाथरूम जाउन्गि.. मैं समझ गया वो पहली बार झाड़ रही है. वो मचलती रही मैने उसकी चूत के लाल छेद को देखा और मुझे उसकी चूत का सील भी दिखा.. मैं उसके दाने और उसकी जाँघ से चूत पूरी मेरी जीभ से चाटने लगा.. मेरा एक हाथ उपर उसकी चूंचियाँ पर था.. 5-7 मीं मे वो चिल्लाने लगी..साहाआब्ब्ब. . मेरी चूऊओत..और उसने मेरे चेहरे से चूत को एकदम चिपकाया और..ओह.. उसकी चूत से उसकी जिंदगी मे पहली बार झड़ने वाला पानी बाहर निकल आया..क्या फोर्स था उसकी जूस का..और पहली झदाई का पानी… मज़ा आ गया.. नमकीन कुछ मीठा.. मैं तो जीभ से चाटने लग.. स्लूर्र्र्ररुउउप… स्लूर्र्र्रृूपप. . और उसकी चूत को बहुत चाता.. फिर मैं उठ कर उसकी चुचि और निपल पर आया.. और उन्हे पूरा मुँह मे भर कर चूसने लगा.. निपल को भी और फिर से हाथ उसकी चूत के दाने मे लगाया.. चूत गीली थी.. करीब 7 मीं बाद वो फिर से गरम हो गयी थी.. और कहने लगी.."साआबब… अब बर्दाश्त नही होता.. अपना अंदर डालो.. मैं अब नही रुक सकती… मेरी चूत मे चिंतियाँ चल रही है..आहह" मैने कहा "रानी.. अब मैं तेरी चूत की सील तोड़ूँगा.. थोड़ा दर्द होगा.. मेरे लिए बर्दाश्त करना "और मैने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया. "आहह सहाआब्ब..अब क्यू तरसा रह हो.. मेरे बदन मे आग लग गयी है.. मैं मर जाउन्गि…" मैने कुछ कहा नही और मेरी बीवी की ड्रेसिंग टेबल से वॅसलीन ले कर उसकी चूत के छेद मे अच्छे से लगाया और मेरे लंड के सूपदे पर भी लगाया और चूत के छेद पर टिका कर आहिस्ता से घुसाया. हाथ उसकी चुचियों को मसल रहे थे. मूह से उसके होठों को मैं चूस रहा था.

"ऊऊओ माआ… आअह, साहब, आहिस्ता, लग रहा है."

"रानी मज़ा आ रहा है ?"

"साहब, जल्दी करिए ना जो भी करना है."

"हाई मेरी जान, बोल क्या करूँ ?"

"डालिए ना. कुछ करिए ना."

"रानी, बोल क्या करूँ." कहते हुए मैने लंड को थोड़ा और घुसाया.

"अपना यह डाल दीजिए. " "बोल ना, कहाँ डालूं मेरी जान, क्या डालूं." "आप ही बोलिए ना साहब, आप अच्छा बोलते हैं." "अच्छा, यह मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी गुलाबी चूत मे घुसा दूँ". "हां" उसने कहा और मैने धक्का दिया.. आरीईई.मर गाइिईईईई… ये क्या कर दिया. सहाब… आअहह.. निकाआलो.. मैने उसकी एक ना सुनी और उसको कस के पकड़ा और दूसरा धक्का दिया..और आधा लंड चूत के अंदर और उसकी सील टूट गयी चूत ने खून उगल दिया.."आअहह मर गाइइ.. मेरी फट गाइिईई..साहब्ब्ब्बबब ब्ब.. छ्चोड़ दो मुझे… वो छूटने की कोशिश कर रही थी.. मैने उसे दबोच रखा था. उसकी आँखों से आँसू निकल आए थे.. मैं उसे चूमने लगा.. चुचि छाती.. बहुत प्यार किया… उसकी चूत से निकले खून से मैं समझ गया.. अब कोई दिक्कत नही है.. लेकिन उसकी टाइट नयी चूत थी इसलिए थोड़ा रुक गया. मैने उससे कहा और अब ये तुझे चोदेगा." "चोदिये ना, साहब." उसके मूह से सुन कर तो लंड और भी मस्त हो गया. "हाई रानी, क्या चूत है तेरी, क्या चुचि है तेरी. कहाँ छुपा कर रखा था इतने दिन. पहले क्यों नहीं चुद्वाया."

"साहब, आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है. कितना मज़बूत है.. एकदम कड़क.. कितना मोटा है.. मेरी चूत एकदम टाइट हो गयी.. आपका लंड फँस गया है.. अब देर मत कीजिए… बस चोद दीजिए जल्दी से." और उसने अपने चूतर उपर कर लिए.

अब मैने उसकी दाहिनी चुचि को मूह मे लिया और चूसने लगा. एक हाथ से दूसरी चुचि को दबाते हुए, मसल्ते हुए, मैं उछल उछल कर ज़ोर ज़ोर से चोद्ने लगा. जन्नत का मज़ा आ रहा था. ऐसा लग रहा था बस चोद्ता ही रहूं, चोद्ता ही रहूं इस प्यारी प्यारी चूत को. मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से उसके गुलाबी गीली गरम गरम चूत को चोद रहा था.

"हाई, रानी चुद रही है ना. बोल मेरी जान, बोल."

"हाँ साहब, चुद रही हूँ. बहुत मज़ा आ रहा है. साहब आप बहुत अच्छा चोद्ते हैं. साहब, यह मेरी चूत आपके लंड के लिए ही बनी है. है ना साहब. साहब, चुचि ज़ोर से दबाइए. साहब, ऊऊओ, मज़ा आ गया, ऊऊहह…और अब वो तीसरी बार झड़ने के करीब थी.. इसके पहले वो दर्द मे झड़ी थी इस बार उसे दर्द नही था…आआअहह साआआअब्ब.. और ज़ोर से चोदो…हाइईइ क्या लंड है आपका… मेम्साब के तो मज़े है" . मैने कहा रानी अब तेरे लिए ही है ये लंड"..और मेरी स्पीड बहुत तेज हो गयी.. मेरा लंड उसकी बच्चेदानि की गहराई तक जा रहा था.. मैने कुछ धक्के लगाए और कहा..राआआअनी. . मेरा निकलने वाला हाईईईई.." कहते हुए पूरा लंड जड़ तक घुसा दिया और फिर गरम गरम पिचकारी उसकी चूत मे छ्चोड़ दी.. पूरी चूत भर गयी.. पहली बार चूत मे किसी मर्दा की क्रीम भरी थी..इसलिए वो फिर से एक बार झाड़ गयी और मुझे कस के जाकड़ लिया. हम दोनो साथ साथ ही झाडे. मैने अपना सारा रस उसकी प्यारी प्यारी नरम गुदगुदी चूत मे भर दिया. है क्या चूत थी. क्या लड़की थी. गरम गरम हलवा. नहीं उससे भी ज़्यादा टेस्टी. मैने पूछा, "रानी , तेरा महीना कब हुआ था री ?" शरमाते हुए बोली, "परसों ही ख़तम हुआ. आप बड़े वो हैं. यह भी कोई पूछता है." बाहों मे भर कर होठों को चूमते, चुचियों को दबाते हुए मैने कहा, "मेरी जान, चुदवाते चुदवाते सब सीख जाएगी." एकदम सेफ था. प्रेग्नेंट होने का कोई चान्स नहीं था अभी. दोस्तों, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज़्यादा मज़ा आया. क्यों कि लंड भी देर से झाड़ा. चूत उसकी गीली थी. चूटर उछाल उछाल कर चुद्वा रही थी साली. उसकी चुचियों को तो मसल मसल कर और चूस चूस कर निचोड़ ही दिया मैने. जाने फिर कब मौका मिले. आज इसका चूत चूस ही लो. चूत का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि कोई भी शराब मे ऐसा नशा नहीं. चोदते समय तो मैने उसके होठों को खा ही लिया. "यह मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान. तेरी चूत मे मेरा लंड - इसी को चुदाई कहते है रानी. कहाँ छुपा रखी थी यह चूत जान." कहते हुए मैं बस चोद ही रहा था और मज़ा लूट रहा था. "चोद दीजिए साहब, चोद दीजिए. मेरी चूत को चोद दीजिए." कह कह कर चुद्वा रही थी मेरी रानी. दोस्तों. चुदाई तो ख़तम हुई लेकिन मन नहीं भरा. दबोचते हुए मैने कहा, "रानी , मौका निकाल कर चुद्वाती रहना. तेरी चूत का दीवाना है यह लंड. मालामाल कर दूँगा जाने मन." यह कह कर मैने उसे 500 रुपए दिए और चूमते हुए मसल्ते हुए रुखसत किया. उसे मैने फिर बहुत चोदा. घर मे नही उसे मैं होटेल मे ले जाता था. क्यूकी वो इतनी खूबसूरत थी कि कोई कह नही सकता था कि ये नौकरानी है.. बाद मे उसे ब्रा और पॅंटी भी खरीद कर दी और मेरी बीवी से ज़्यादा सेक्सी लगती है वो.. मैं आज भी उसे चोदता हूँ..  तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा


हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !
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