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मल्लिका संगीता की गुलामी
संगीता के अंदर की क्रूरता मर्दों के साथ औरतों को भी उसका तेजी के साथ गुलाम बनाती जा रही थी। पहले जहां संगीता मार और दर्द देकर किसी को भी जीवन भर के लिए अपना गुलाम बना लेती थी, वहीं ज्यों ही गालियों का शब्दकोश उसने बढ़ाना शुरू किया तो उसकी शोहरत गुलामों के बीच बहुत बढ़ गयी। चमड़े के हंटर से भी तेज उसकी जुबान से मिलने वाली गालियों को खाने के लिए दूर दूर से पति पत्नी गुलामी का जीवन जीने के लिए आने लगे। नेट पर संगीता की बात एक दिन अचानक एक ऐसे गुलाम से हुई जो फीमेल के नाम के एकाउंट से चैट कर रहा था। संगीता के तेजतर्रार तेवर ने उसकी हवा ढीली कर दी। उसे भी लगा कि शायद अब उसको रियल मालकिन मिलने जा रही है। चट से उसने अपनी जुबान खोली तो संगीता को सच सुनकर अच्छा। मोहित नाम का 32 वर्षीय यह युवक यूं तो आम था लेकिन कुछ चैटिंग के बाद संगीता को यह गुलाम कुछ खास ही भा गया। मगर यह गुलाम उससे दूर था। उसकी चाहत बहुत थी कि उसको कोई मालकिन अपने पैरों तले कुचले। उसको उल्टा लटकाकर हंटर से पीटे। कुत्ता बनाकर पिंजरे में कैद रखे। संगीता का नया गुलाम कलम का धनी था। कल्पनाशीलता भी गजब की थी। संगीता को उसके द्वारा लिखी गयी कल्पनाशीलता से पूर्ण कहानियां अच्छी लगी। एक दिन उसका मन हुआ कि इस गुलाम को भी वह अपने बूटों तले कुचले। उसने गुलाम को अपनी सल्तनत का कुत्ता बनने का हुकुम देकर एक सप्ताह के लिए मुम्बई आने को कहा। गुलाम को कैम पर वह कई दफा सजाएं दे चुकी थी। रियल में इस कल्पनाशील गुलाम मोहित के लिए यह आसान काम नहीं था। रियल हमेशा सपनों से भयंकर होता है। मुम्बई में उतरते ही मोहित का फोन बज उठा। अबे कुत्ते हरामी ते आ गया गांड मराने को। फोन पर दूसरी ओर उसकी प्रिय मल्लिका संगीता बोल रही थी। चल हरामी अपने जूतों और मौजों को उतार दे। नंगे पैर तू अपनी मल्लिका की सल्तनत की ओर रवाना होगा। तपती गर्म सड़क पर कुछ चलने के बाद उसे एहसास हो गया कि यहां कल्पना से भी ज्यादा उसको दर्द सहना होगा। कुछ दूर चलने के बाद वह रूक गया। वह तय नहीं कर पा रहा था कि अजनबी शहर में किस ओर चलकर अपनी मल्लिका के पास पहुंचेगा। फिर उसका फोन बजा। अबे गधे की गांड तुझे रूकने को बोला मैंने। हरामी की औलाद। सामने एक सफेद कार है। उसको फाॅलो करता चल। पैदल ही नंगे पांव गर्म सड़क पर चलते हुए मोहित को नियमित दूरी पर कार दिखती रही। उसे प्यास लगी थी। वह पीने का पानी पीने के रूका तो फिर से उसका फोन बजा। अबे सुअर तू मेरा गुलाम बनने तो आ गया लेकिन मादरचोद तू अभी सही से गुलाम नहीं बन पा रहा है। मालकिन प्यास लगी थी। अच्दा तुझे प्यास लगी है कुत्ते। चल सामने पब्लिक टाॅयलेट है। उसमें जा और पहले यूरिन पाॅट के छेद को बंद कर। फिर उसमें मूत। इसके बाद इसे ही पीकर अपनी प्यास बुझा। सामने पब्लिक टाॅयलेट था। उसे बहुत शर्म लग रही थी। लेकिन उसने ऐसा ही किया। फिर उसका फोन बजा। और ध्यान रख मुंह साफ नहीं करना है। यूरिन के झाग मोहित के होठों पर थे। बहुत शर्म के साथ नजरों को नीची किए हुए वह बाहर निकला। वह धीरे धीरे चल रहा था। पूरे तीन घंटे तक वह नंगे पांव मुम्बई की सड़कों पर बिना कुछ बोले चलता रहा। फिर फोन बजा अबे हरामी चल सामने देख डस्टबिन है। जी मालकिन। चल डस्टबिन में देख। कुद खाने लायक हो पेट भर ले। मेरे यहां कुछ नहीं मिलेगा। एक पल को मोहित सहम गया। फिर भी वह डस्टबिन के पास गया। डस्टबिन में दो बासी रोटिया दिख रही थी। उसने उठाकर खा लिया। फिर फोन बजा। पेट भर गया हरामी। मैंने ही रखी थी रोटियां हरामी, मैं इतनी क्रूर भी नहीं हूं। और हां डस्टबिन में देख रूई के पेड और काली रिबन नजर आयेगी। पेड को आंखों पर रखकर काली पट्टी को आंखों पर बांध। मोहित ने पल झपकते ही रूई के पेड को आंखों पर बांधकर पट्टी को आंखों से बांध लिया। अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़ा। उसे यह हाथ किसी मर्द का लगा लेकिन वह चुप रहा। साले बहनचोद यहां करने क्या आया है तू। मोहित एक बारगी तो कांपकर रह गया। किसी ने उसके गाल पर जोरदार चपत रसीद कर दिया। साले बोलेगा नहीं, कि संगीता मैडम की गुलामी करने आया है। इसके बाद उसे वह शख्स घसीटते हुए कार में ले गया। कार चलती रही। पता नहीं कितनी देर। एक घंटा बाद उसे किसी ने कार से खींचकर उतारा। इसके बाद लगभग खींचते हुए उसे लेजाकर उसके हाथों को ऊपर करके बांध दिया। करीब दो घंटों तक वह उसी हालात में बंधा रहा। उसे यह नहीं पता था कि वह कहां पर है। आगे उसके साथ क्या होने वाला। इसके बाद फिर कोई आया। उसे लोहे की जंजीरे बजती हुए प्रतीत हुई। किसी ने उसके दोनों पैरों में बेडियां पहना कर उसकी कमर में एक छल्लेनुमा जंजीर पहनाकर उससे अटैच कर दिया। अब किसी ने हवा में टंगे उसके हाथों को खोला। उसके कन्धों पर लकड़ी का बजनी फ्रेम था। उसके दोनों हाथों को निकालकर किसी ने फ्रेम को कस दिया। कमर के छल्ले से दो चेने निकल उसके हाथों मे कस गयीं। आंखों पर अब भी पट्टी बंधी थी। अचानक सांय की आवाज के साथ एक जोरदार बार उसकी कमर पर हुआ। यह चाबुक का प्रहार था। वह चिल्ला उठा। अचानक उसका फोन फिर बजा। इस दफा उसके कानों में चिर परिचित आवाज गूंजी। बहनचोद तू तो एक ही शाॅट में ऐसे चिल्ला रहा है जैसे तेरी गांड फट गयी हो। यह भी चाबुक मैं नहीं चला रही। छमिया चल इस गधे को मेरे सामने पेश कर। ओए सीध चलता चल। पीछे से एक ओर जोरदार स्ट्रोक अपने चूतड़ों पर पड़ते ही वह अपनी जगह से हिल चुका था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। पांच मिनट तक चाबुक और गालियां खाते हुए वह मैदान में घूमता रहा। आखिर में दमिया ने उसको सीधे रास्ते पर पहुंचा दिया। वह हरम में दाखिल हो चुका था। आ गया गधे की गांड। चल आ जा। संगीता मैडम की आवाज सुनकर उसने दिल ही दिल खुदा को शुक्रिया अदा किया। चलो इसकी आंख से पट्टी हटा दो। पट्टी खुलते ही कुछ देर तक मोहित कुछ भी नहीं देख लेकिन जैसे ही उसकी आंखे रोशनी की अभ्यसत हुई। हाथों पैरों के बंधे होने के बाद भी मोहित ने झुककर अपनी हसीन मालकिन का शुक्रिया अदा किया। चल कुत्ते तुझे मैं अपने हरम के जानवरों से मिला दूं। हाथ में पकड़े चाबुक का जोरदार बार पेट पर करने के साथ वह उसे लेकर चल दी। खुले आसमान में छह फीट लम्बाई वाली दो सेक्सी हसीना पूरी नंगी मुर्गा बनी हुई थी। उनकी कमर पर पांच पांच किलो के पत्थर रखे थे। जानता है ये कब तक मुर्गा बनेगी। पूरे तीन घंटे। दोनों के चूतड़ों पर जोरदार चाबुक के पांच पांच प्रहार करने के बाद उनकी निगरानी कर रही एक काली कलूटी से कहा कम्मो यह पत्थर गिरे तो पूरे पचास डंडे मारना। इसके बाद वह अपने गुलाम को घसीटते हुए आगे बढ़ी। सामने एक जोड़ा हवा में लटका हुआ था। मर्द को उलटा लटकाया गया था। उसका लंड औरत के माथे के सामने था। पंजों पर उचकने के बाद वह किसी तरह से लंड को मुंह में लेने का प्रयास कर रही थी। जैसे ही लंड मुंह से बाहर जाता। एक कलूटी मोटी औरत एक लम्बा हंटर बंधी हुई औरत की कमर दे मारती और गंदी सी गाली देती। चुदाखानी बहन की लंडी। लंड नहीं निकले, यही मालकिन ने कहा था। बीच बीच में वह मर्द को भी हंटर लगा रही थी ऐ कुत्ते तुझसे मालकिन ने कहा था कि किसी भी तरह यह कुतिया तेरे लंड को मुंह में न ले पाये। ये मेरा परमानेंट कुत्ता कुतिया हैं। आज मैंने इनको डिफरेंट सजा दी है। तेरे लिए तो सात दिन मैंने बहुत खास सोच रखे हैं रे हरामी। आज तो ट्रायल है। कल से तेरा नम्बर है। आज तू मेरी खास जेल का कैदी बनकर रहेगा। ऐ कम्मो संगीता ने किसी को आवाज दी। इसको नंगा करके चेस्टी वेल्ट पहना दो। कम्मों ने चाकू से उसके कपड़ों को काट दिया। फिर उसके लंड को चेस्टी में कैद कर दिया। संगीता अपने गुलाम को लेकर अपनी जेल की ओर बढ़ी। इस जेल में मेरे कई कैदी बंद हैं। पहली जेल में बिलकुल नंगी तीन 45 साल की औरते बंद थी। जेल के दरबाजे पर पर्चा टंगा था। तीनों के नाम शबनम जुर्म गुलामी से जी चुराना सजा 5 महीने की कैद, आयशा फर्श पर थूकना, सजा 3 हफ्ते की सजा, दीपिका जुर्म मालकिन के सामने बालों में कंघी करना, सजा सिर गंजा करके एक महीने की कैद। पहली कोठरी का नजारा देख वह डर गया। दूसरी कोठरी देखकर डर और भी बढ़ गया। एक औरत को सलीब पर टांगा गया था। वह पानी पानी चिल्ला रही थी। उसके दरबाजे पर टंगे पर्चे पर लिखा था। बिना आज्ञा के पानी पीना। सजा तीन दिन बिना पानी के कैद। जेल में मर्दों के हालात बहुत ही बदतर थे। पांच कोठरियों में तकरीबन 50 मर्द बंद थे। सभी भारी लोहे की हथकडियों और बेडि़यों में जकड़े हुए थे। आखिरी कोठरी खाली थी। लेकिन यह बहुत छोटी थी। संगीता ने बूट की ठोकर मोहित की गांड पर मारकर उसे गिरा दिया। साले गधे की गांड तू कुत्ता है मेरा कैदी नहीं कि तुझको पूरी सेल मिलेगी। चल इस पिंजरे में कुत्ते की तरह बढ़ जा। गर्दन पर कसे फ्रेम की वजह से उसे पिंजरे में घुसने में परेशानी हुई लेकिन संगीता ने साली हरामजादी गधे की गांड, बहनचोद तुझे यहां रोज अपनी गांड मरवानी है। अंदर जा। 20.25 चाबुक एवं 50 ठोकरे खाने के बाद वह पिंजरे में अपने घुटने और कोहनियों के बल कुत्ते की तरह घुसने में कामयाब हो गया। उसके पिंजरे को लाॅक करने के बाद कम्मो को जेल में तैनात कर संगीता चली गयी। पिंजरे में बंद मोहित बेहद दर्द के बीच आंखे बंद किये सोच रहा था कि आने वाले सात दिन उसके लिए और भी स्वपीडानन्द लेकर आयेंगे। यहां उसे वह सब कुछ मिलेगा। जिसकी उसे चाहत है।
पहला दिन
पूरी रात भूखे पेट एवं बिना पानी के बेहद टफ कंडीशन में छोटे से पिंजरे में कुत्ते की तरह चारो हाथ पैरों पर लगभग खड़े अंदाज में कैद रहने सरीखी यातना ने गुलाम मोहित की हालत खराब कर दी। वह दोनो घुटनों को टेके हुए पिंजरे में कुछ पल आराम के लिए जूझ रहा था। कन्धों पर कसे लकड़ी के फ्रेम में फिक्स हाथों को वह बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन तकरीबन पांच किलो वजनी इस क्रेम ने एक एक पल को सालों की सजा में तब्दील कर दिया था। किसी तरह से उसने अपने माथे को जमीन पर टिकाया। हालांकि उसकी जुबान सूख रही थी, आंते कुलबुला रही थी, लेकिन इसके बाद भी वह खुश था कि उसने अपने सपनों की मंजिल मिल गयी है। रात को दो बजे के करीब जेल का दरबाजा खुला। उसे बूटों की आवाज सुनाई दी। चार गार्डस खाना लेकर अंदर आये। पहले गुलाम औरतों को एवं फिर मर्दों को बाहर निकाला गया। ऐ रश्मि नये कुत्ते को भी निकाल ला, नहीं तो मादरचोद सुबह को मर जायेगा। बैसे भी कल इसको बहुत मेहनत करनी है। रश्मि नामक गार्ड ने उसकी छोटी सी सेल को खोलकर उसे बाहर आने को कहा। बेहद मुश्किल वह पीछे को सरक कर बाहर निकला। सारी गार्डस पूरी तरह से नंगी थी। उनके हाथों में लचकदार बेंत थी। खाने के नाम पर ब्रेड के 3 पैकेट थे। 51 मर्द, 15 औरतें खाने के लिए जानवरों की तरह फर्श पर चारों हाथ पैरों पर खड़े थे। सुलेखा जोकि इंचार्ज थी। ऐ कुतियों की औलादों जो है यही खाना है। जो छीनकर खा लेगा, उसी को खाना मिलेगा। और हां हाथों का कोई इस्तेमाल नहीं होगा। ऐ कमीनियों अगर मर्दाें को हरा सकोगी तभी तुम्हारा पेट भरेगा। इसके बाद उसने ब्रेड का एक टुकड़ा एक ओर फेंका। उस टुकड़े पर कब्जे को एक साथ सभी गुलाम लपके। पहला टुकड़ा मोहित के पास गिरा। तेजी से उसने ब्रेड के टुकड़े को मुंह में लेना चाहा। इतने में एक गुलाम औरत तेजी से कुतियां की मानिंद आयी और अपने दातों को ब्रेड के साथ मोहित के होठों पर गड़ा दिया। अचानक हुए दर्द से घबरा कर उसने ब्रेड को गिरा दिया। इस टुकड़े को पास में मौजूद एक मर्द गुलाम निगल गया। इस बीच गार्डस ने गुलामों की गांड पर लचकदार लम्बी बेंतों से मार लगानी शुरू कर दी। बहनचोदों मादरचोद गुलामों खाने की तमीज भी नहीं है सालों। सुलेखा ब्रेड के टुकड़े फेंकती रही, जिस गुलाम के हिस्से में जो आया, वह उसी में खुश हो गया। इसके बाद गार्डस ने सभी को कैद कर दिया। मोहित के हिस्से में दो टुकड़े आये थे। फिर से उसको पिंजरे में जाना था। शुक्र था इस दफा उसके कन्धों पर फ्रेम नहीं था लेकिन जल्द ही उसे एहसास हो गया कि यहां सभी के दिमाग में क्रूरता कूट कूट कर भरी है। सुलेखा मैडम छह फीट लम्बी 28 इंची कमर 32 छातियांे की मालकिन उसकी ओर बढ़ी तो उसकी शामत आ गयी। ऐ कुत्ते चल इधर आ। बह बहुत खुश हुआ कि शायद संगीता मालकिन ने उसके लिए चोदन का सामान भेजा है लेकिन सुलेखा तो आफत की परकाला निकली। उसके बूट में नुकीली कीलें लगी थी। जैसे ही मोहित पास गया। चल चोदेगा। हां। इधर उसके मुंह से हां निकली, उधर तड़ाक से उसके दांये घुटने के पास बूट की ठोकर पड़ी। बूट में नुकीली कीलें लगी थी। कीले टांग में जा धंसी। खून छलका। हरामन मां की गंडी औलद साले तू मालकिनों को चोदेगा। साले तेरा लंड काटकर हम तेरे मर्दाें को अपना पालतू कुत्ता बनाते हैं। हरामी साले तू गुलाम है। यहां सपने में भी चोदने की बात नहीं करना। यहां तेरी गांड मारी जायेगी। हर बात के साथ वह बूट की ठोकरे पूरी निर्दयिता के साथ मार रही थी। कूल्हें पर ठोकर मारते हुए तो सुलेखा ने कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया था। कीलें चूतड़ में धंस गयी थी। इसके बाद लहुलुहान अवस्था में उसको कोठरी में बंद कर अत्याचारी मालकिनों की फौज निकल गयी। रात भर दर्द झेलने के बाद सुबह निकली। सुबह को सभी कैदियों को बर्जिश के लिए निकाला गया। मर्दाें के लंड पर वजनी गोले बांधकर उनको 100 सिटअप एवं 100 पुशअप का आर्डर दिया गया। गुलाम औरतों की छातियों पर पांच पांच किलों का वजन लटका कर उनको एक किमी दौड़ पर भेजने के साथ बीच बीच में हंटर से उनकी खबर ली जा रही थी। मोहित के पसीने 20 सिटअप में ही छूट गये। अबे मोटे गैंडे यहां क्या मां चुदाने आया है तू साले। एक हफ्ते में मैं तेरी खाल उतारकर तुझको इंसान बना दूंगी। हरामी जल्दी कर। संगीता मैडम ने चाबुक को पिछबाड़े पर बजाते हुए कहा। एक्सरसाईज खत्म करने के बाद गुलामों को नाश्ते में एक सूखी ब्रेड दी गयी। ऐ कम्मो चल इस गैंडे को तैयार कर। पहले दिन संगीता मैडम ने तय किया कि मोहित को घोडा बनाकर यूज किया जायेगा। ऐ कम्मो इधर आ जा इस साले को आज मेरा घोडा बना दे। मोहित को घोडा बनने का हुकुम देकर सांवली लेकिन गठीले बदन की कम्मो उसकी पीठ पर बैठ गयी और उसे चलने का इशारा। चारों हाथ पैरों पर चलना उसके लिए पहला तर्जुबा था। जल्द ही कम्मों उसे एक ऐसी गाड़ी के पास ले गयी जो छोटी घोडागड़ी लग रही थी। छोटे टायरों के सहारे दौड़ने वाली इस गाड़ी में मोहित को जोतने के बाद उसने मुंह में लगाम पहनाकर रास को गाड़ी पर रख दिया। कुछ देर में सगीता मैडम आयी। ओये घोडा तैयार भी कर दिया। चल अब मैं अपनी सल्तनत पर नजर डाल लूं। हाथों में लगाम की रास को पकड़ने के बाद संगीता ने अपने जूतों की कीलों का दबाब मोहित के चूतड़ों पर किया। लगाम को पूरी ताकत से खींचने के बाद उसने गाड़ी को खींचने का इशारा दिया। बीच बीच में गालियों की बौछार करते हुए वह कीलों एवं चाबुक का इस्तेमाल करती जा रही थी। चाबुक भी यह खास था। इसके अगले सिरे पर धारदार ब्लेड लगे थे। चाबुक जहां पड़ता खून छलक आता। लम्बी धारियां बनाने के दौरान वह पूरी सावधानी बरत रही थी। कल जिन दो लडकियों को उसने धूप में देखा था। वो आज भी मुर्गा बनी हुई थी लेकिन आज उनके साथ कुछ ज्यादा ही जुल्म हो रहा था। दोनों की गांड में एक छल्लेनुमा आइरन राॅड को अटका कर वजन टांगा गया था। गांड पर वजन रखा ही था। गाड़ी से उतर कर संगीता ने दोनों लड़कियों के चूतड़ों पर वहां रखी पतली बेंत से मार लगायी। लड़कियां हर शाॅट पर थैंक्स मालकिन कहती रही। जानता हरामी मारेहित की ओर देखकर का ये मेरी गुलामी के लिए दिल्ली से आयीं है। पूरे तीन दिन इनको मुर्गा बनाना है। आगे बढ़ने के बाद गाडी रूकने का इशारा किया तो उसे कल का एक नजारा और ताजा हो गया। जहां कल मर्द उलटा लटका था। वहीं आज मर्द सीधा खड़ा था लेकिन उसके हाथ कमरे के पीछे से हवा में थे। जिन पर पांच किलो वजन का पत्थर रखा गया। उसकी टांगे आधी मुड़ी हुई थी। वहीें औरत पूरी नंगी उलटी लटकी हुई थी। उसके मुंह में एक पाइप लगा था। जिससे वह लगातार पानी पी रही थी। तू जानता है आज ये मेरे कुत्ते को शाम तक अपना मूत या तो पिलाती रहेगी या नहलाती रहेगी। लगातार पानी पीने से उसे बारबार मूत्र आ रहा था। वह उस पत्थर से होते हुए उसके मुंह पर गिर रहा था। अबे हरामी एक बूंद भी बेकार नहीं होना है। इन यातनाओं को देख उसकी गांड अब हवा लेने लगी थी। देर शाम को एक रेस का आयोजन किया गया। जिसमें सभी गुलाम औरतों एवं मर्दाें को मेढ़क की तरह दौड़ना था। रेस में सभी गार्डस हाथों में बेंत एवं चमड़े के पट्टे लिए तैयार थीं। स्टार्ट के आर्डर के साथ सभी नंगे गुलाम मेढ़क की तरह फुदकने लगे। बीच बीच में चूतड़ों पर पट्टों और बेंतों की मार खाते हुए गुलाम लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। संगीता मैडम की मार के आगे मोहित आधे रस्ते में गिर गया। रेस की विजेता मुर्गा बनने वाली लड़की शिखा बनी। ऐ मादरचोद गुलामों जो भी आज हारे हैं। उनको 100 चाबुक सीने पर 100 पिछबाड़े पर लगाये जायेंगे। रात होते होते सभी गुलाम दर्द से कराहते हुए भूखे प्यासे पिंजरे में बंद कर दिये गये। रात को दो बजे फिर चिडिया की चूत में चैथाई के हिस्से की तर्ज पर गुलामों को खाना मिला। पहले दिन की गुलामी पूरी होने के बाद जिस्म का पोर पोर दुखने के बाद भी मोहित की आंखों में एक अजीब थी चमक थी। वह मानसिक रूप से दूसरे दिन के लिए खुद को तैयार कर रहा था। शायद यही कारण है कि लोग सच्ची मालकिन की गुलामी में जाने के लिए मरे जाते हैं।
दूसरे दिन की शुरूआत भी उसके लिए बेहद खास रही। उसका वजन तेजी से गिर रहा था। कम्मो उसके फिर से ले जाने के लिए हाथ में तीन फीट लम्बा हंटर लेकर हाजिर थी। हरामी गैंडे लगता है तेरी चर्बी अभी मार से पिघलनी शुरू नहीं हुई है, हाथी के फलान आज तेरे बदन से चर्बी का पहाड़ आज बहुत कम करके ही मैं दम लूंगी। चल अपने घुटनों एवं कोहनियों पर खड़ा हो जा। दहाड़ते हुए कम्मो बोली। मोहित कोहनियों एवं घुटनों के बल खड़ा हो गया। उसके हाथों की हथकडि़यों को गले के कालर से अटैच कर दिया। अब वह समझ चुका था कि उसे इंच इंच कोहनियों एवं घुटनों पर खिसकना है। पिछले दो दिनों से चेस्टी में कैद उसके लंड को आजाद कर कम्मों ने कुछ राहत जरूर मोहित को दी, चेस्टी से आजाद होते ही लंड ने तनतना कर कम्मो को सलामी देते हुए तेजी से मूत की धार छोड़ दी। हरामी साले तूने फर्श गंदा कर दिया। चल साले इसे अपनी जुबान से चाटकर साफ कर। जब तक फर्श साफ नहीं होगा तेरी गांड पर हंटर पड़ते रहेंगे। कुछ दूरी बनाकर उसने बेहद सफाई से सड़ाक से हंटर चला दिया। मोहित धुल भरे फर्श पर बह रहे अपने ही मूत को पीने लगा। पांच मिनट के बाद अपने मिशन में कामयाब रहा। अब कम्मो ने उसके लंड को एक पतली चेन से बांध दिया। इस चेन के एक सिरे से पांच किलो को वजनी पत्थर बांधकर उसकी गांड पर अपने नुकीले बूट की ठोकर मारकर चलने का इशारा किया। दर्द से तिलमिलाये मोहित ने आगे खिसकने की हिम्मत की लेकिन अंडकोशो पर पड़ रहे दर्द से उसकी आंखों में आंसुओं को भर दिया लेकिन लगातार पड़ रही बूट की ठोकरों से कीलों की चुभन ने आगेे बढ़ने पर मजबूर कर दिया। मानों कम्मो को यह दर्द कम लग रहा हो, इसलिए वह खुद घुटनों एवं कोहनियों के बल खिसक रहे गुलाम पर चढ़कर बैठ गयी। संगीता मैडम के सामने हाजिर होने तक मोहित की हालत खराब हो चुकी थी। कम्मो तू भी गुलामों को दर्द देने के नये नये बेहतरीन तरीके ईजाद करने लगी हैं। संगीता ने कम्मो की तारीफ की तो वह फुलकर कुप्पा हो गयी। इससे आज क्या कराना है। ऐसा कर इसको ऐसे ही रात दस बजे तक के लिए कोल्हू में जोत दे। जी। इतना कहकर कम्मो हंटर मारते हुए मोहित को लेकर कोल्हू के पास पहुंची। वहां की हालत देखकर मोहित की गांड और भी हवा ले गयी। पांच कोल्हू लगे थे। जिनमें से तीन पर बारह मोटी ताजी औरते बंधी हुई थी। उसके भारी बदन से पसीना टपक रहा था लेकिन गार्डस किसी के भी सुस्त होते ही हंटर से उसकी खबर ले रही थी। चैथे कोल्हू पर एक सेक्सी हसीना बंधी थी। उसके हाथ पीठ के पीछे बंधे थे। उसकी छातियों को पतली रस्सी से कसकर बांधा गया था। उसके दोनों निप्पल के सिरे को कोल्हू के डंडे के साथ बांधा गया था। उसकी चूत में छेद करके एक छल्ला पहनाया गया था। जिसके साथ एक चेन जुड़ी थी। इससे एक पत्थर जुड़ा था जो जमीन से कुछ ऊपर लटक रहा था। साली खसमखानी हरामखोर तेजी से चल। एक काली गार्डस उसे लगातार पतली बेंत से पीटते हुए चलने को मजबूर कर रही थी। वह पत्थर के वजन से बचने को टांगे झुकाने की कोशिश करती लेकिन बेंत की मार उनको जल्द सीधा कर देती। इसके पति ने इसे यहां सजा के लिए भेजा है। किसी यार के साथ भाग गयी थी। यह साली चुदाखानी। चल तुझको भी टाइट कर दूं। मोहित को यूं ही छोटे कोल्हू पर गले के कालर से अटैच कर गार्डस के हवाले कर कम्मो चली गयी। रात दस बजे तक बिना ब्रेक के कोल्हू में बंधे गुलामों को गार्डस ने दौड़ाया। तीसरे, चैथे, पांचवे, छटे दिन एवं सातवीं रात यातनाएं झेलने के बाद फिर से जेल में मोहित की वापसी हुई। अगली सुबह उसकी आजादी की थी। रात को उसके लंड को आजाद कर उसको औरतों के पिंजरे में बंद करके गार्डस चली गयी। गुलाम औरतों चैपायों की तरह बंधी हुई थी। उनका नंगा चिकना बदन बार बार टच होने से मोहित के भीतर सेक्स जागने लगा। वह धीरे से कोशिश करके एक हसीन गुलाम औरत पर चढ़ गया। उसका लंड तनतना रहा था। गुलाम औरत की चूत भीग रही थी। उसे शायद मजा आ रहा था। अभी उसने एक घक्का लगाकर लंड को अंदर डाला ही था कि गुलाम औरत भी मजे लेने लगी। वह तेजी से एक्सप्रेस की तरह घोड़ी पर सवारी गांठ रहा था कि इतने में ही गार्डस आ धमकी। अबे साला देखो सेक्स कर रहा है। हाथों में चमड़े के पट्टे, हंटर लिये चार गार्डस दौड़ पड़ी। पिजरें से बाहर निकाल कर दोनों गुलामों की ओर कहर भरी नजर से देखते हुए अबे हरामियो यहां सेक्स एलाउ नहीं है। मादरचोदों। इतना कह कर दोनों को मार लगानी शुरू कर दी। क्या करें इन कुत्तों को साले। करना क्या है कल को दोनों को सेक्स के जुर्म में संगीता मैडम की कोर्ट में हाजिर करना होगा। वहीं इन कुत्तों की जिंदगी का फैसला करेंगी। अगले दिन कोर्ट में जंजीरों में बांधकर मोहित एवं शिखा नामक गुलामों को पेश किया गया। मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाये। जज की कुर्सी पर बैठी संगीता ने आदेश दिया। सभी गुलाम पूरी नंगी अवस्था में हाजिर थे। एक गार्डस ने चार्जशीट पेश की। दोनों आरोपियों से पूछा गया। दोनों ने रहम भी भीख मांगते हुए जुर्म कबूला। मेरी स्टेट में बिना परमीशन सेक्स एक बड़ा जुर्म है। इस जुर्म में मोहित को छह महीने कैद, डेली 10 गुलामों से गांड मराने, सभी टायलेट को साफ करने, डेली पचास बेंत, 2 घंटे कोल्हू, जोकि लंड से खींचना होगा की सजा होगी। शिखा बाकई कुतिया है। इसके पति ने इसको सेक्स से दूर रखने के लिए हमारे पास सजा के लिए भेजा था। इसको एक महीने कैदखाने में टायलेट बनाकर रखा जायेगा। इसके मुंह में सीधे गुलाम से लेकर गार्डस तक लैट्रीन से लेकर पेशाब कर सकेंगे। जब भी गार्डस का मन होगा। इसको पीटा जा सकेगा। दोनों गुलाम सजा सुनकर रिययिाने लगे। मालकिन रहम, प्लीज रहम करो। संगीता ने कोर्ट बर्खास्त करते हुए दोनों को ले जाने का इशारा किया। मार खाते हुए कैदखाने की ओर बढ़ते हुए मोहित समझ चुका था कि अगले छह महीने उसके लिए कितने भारी गुजरने वाले है। फिर भी वह आजादी न मिलने के बाद भी खुश था।
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मल्लिका संगीता की गुलामी
संगीता के अंदर की क्रूरता मर्दों के साथ औरतों को भी उसका तेजी के साथ गुलाम बनाती जा रही थी। पहले जहां संगीता मार और दर्द देकर किसी को भी जीवन भर के लिए अपना गुलाम बना लेती थी, वहीं ज्यों ही गालियों का शब्दकोश उसने बढ़ाना शुरू किया तो उसकी शोहरत गुलामों के बीच बहुत बढ़ गयी। चमड़े के हंटर से भी तेज उसकी जुबान से मिलने वाली गालियों को खाने के लिए दूर दूर से पति पत्नी गुलामी का जीवन जीने के लिए आने लगे। नेट पर संगीता की बात एक दिन अचानक एक ऐसे गुलाम से हुई जो फीमेल के नाम के एकाउंट से चैट कर रहा था। संगीता के तेजतर्रार तेवर ने उसकी हवा ढीली कर दी। उसे भी लगा कि शायद अब उसको रियल मालकिन मिलने जा रही है। चट से उसने अपनी जुबान खोली तो संगीता को सच सुनकर अच्छा। मोहित नाम का 32 वर्षीय यह युवक यूं तो आम था लेकिन कुछ चैटिंग के बाद संगीता को यह गुलाम कुछ खास ही भा गया। मगर यह गुलाम उससे दूर था। उसकी चाहत बहुत थी कि उसको कोई मालकिन अपने पैरों तले कुचले। उसको उल्टा लटकाकर हंटर से पीटे। कुत्ता बनाकर पिंजरे में कैद रखे। संगीता का नया गुलाम कलम का धनी था। कल्पनाशीलता भी गजब की थी। संगीता को उसके द्वारा लिखी गयी कल्पनाशीलता से पूर्ण कहानियां अच्छी लगी। एक दिन उसका मन हुआ कि इस गुलाम को भी वह अपने बूटों तले कुचले। उसने गुलाम को अपनी सल्तनत का कुत्ता बनने का हुकुम देकर एक सप्ताह के लिए मुम्बई आने को कहा। गुलाम को कैम पर वह कई दफा सजाएं दे चुकी थी। रियल में इस कल्पनाशील गुलाम मोहित के लिए यह आसान काम नहीं था। रियल हमेशा सपनों से भयंकर होता है। मुम्बई में उतरते ही मोहित का फोन बज उठा। अबे कुत्ते हरामी ते आ गया गांड मराने को। फोन पर दूसरी ओर उसकी प्रिय मल्लिका संगीता बोल रही थी। चल हरामी अपने जूतों और मौजों को उतार दे। नंगे पैर तू अपनी मल्लिका की सल्तनत की ओर रवाना होगा। तपती गर्म सड़क पर कुछ चलने के बाद उसे एहसास हो गया कि यहां कल्पना से भी ज्यादा उसको दर्द सहना होगा। कुछ दूर चलने के बाद वह रूक गया। वह तय नहीं कर पा रहा था कि अजनबी शहर में किस ओर चलकर अपनी मल्लिका के पास पहुंचेगा। फिर उसका फोन बजा। अबे गधे की गांड तुझे रूकने को बोला मैंने। हरामी की औलाद। सामने एक सफेद कार है। उसको फाॅलो करता चल। पैदल ही नंगे पांव गर्म सड़क पर चलते हुए मोहित को नियमित दूरी पर कार दिखती रही। उसे प्यास लगी थी। वह पीने का पानी पीने के रूका तो फिर से उसका फोन बजा। अबे सुअर तू मेरा गुलाम बनने तो आ गया लेकिन मादरचोद तू अभी सही से गुलाम नहीं बन पा रहा है। मालकिन प्यास लगी थी। अच्दा तुझे प्यास लगी है कुत्ते। चल सामने पब्लिक टाॅयलेट है। उसमें जा और पहले यूरिन पाॅट के छेद को बंद कर। फिर उसमें मूत। इसके बाद इसे ही पीकर अपनी प्यास बुझा। सामने पब्लिक टाॅयलेट था। उसे बहुत शर्म लग रही थी। लेकिन उसने ऐसा ही किया। फिर उसका फोन बजा। और ध्यान रख मुंह साफ नहीं करना है। यूरिन के झाग मोहित के होठों पर थे। बहुत शर्म के साथ नजरों को नीची किए हुए वह बाहर निकला। वह धीरे धीरे चल रहा था। पूरे तीन घंटे तक वह नंगे पांव मुम्बई की सड़कों पर बिना कुछ बोले चलता रहा। फिर फोन बजा अबे हरामी चल सामने देख डस्टबिन है। जी मालकिन। चल डस्टबिन में देख। कुद खाने लायक हो पेट भर ले। मेरे यहां कुछ नहीं मिलेगा। एक पल को मोहित सहम गया। फिर भी वह डस्टबिन के पास गया। डस्टबिन में दो बासी रोटिया दिख रही थी। उसने उठाकर खा लिया। फिर फोन बजा। पेट भर गया हरामी। मैंने ही रखी थी रोटियां हरामी, मैं इतनी क्रूर भी नहीं हूं। और हां डस्टबिन में देख रूई के पेड और काली रिबन नजर आयेगी। पेड को आंखों पर रखकर काली पट्टी को आंखों पर बांध। मोहित ने पल झपकते ही रूई के पेड को आंखों पर बांधकर पट्टी को आंखों से बांध लिया। अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़ा। उसे यह हाथ किसी मर्द का लगा लेकिन वह चुप रहा। साले बहनचोद यहां करने क्या आया है तू। मोहित एक बारगी तो कांपकर रह गया। किसी ने उसके गाल पर जोरदार चपत रसीद कर दिया। साले बोलेगा नहीं, कि संगीता मैडम की गुलामी करने आया है। इसके बाद उसे वह शख्स घसीटते हुए कार में ले गया। कार चलती रही। पता नहीं कितनी देर। एक घंटा बाद उसे किसी ने कार से खींचकर उतारा। इसके बाद लगभग खींचते हुए उसे लेजाकर उसके हाथों को ऊपर करके बांध दिया। करीब दो घंटों तक वह उसी हालात में बंधा रहा। उसे यह नहीं पता था कि वह कहां पर है। आगे उसके साथ क्या होने वाला। इसके बाद फिर कोई आया। उसे लोहे की जंजीरे बजती हुए प्रतीत हुई। किसी ने उसके दोनों पैरों में बेडियां पहना कर उसकी कमर में एक छल्लेनुमा जंजीर पहनाकर उससे अटैच कर दिया। अब किसी ने हवा में टंगे उसके हाथों को खोला। उसके कन्धों पर लकड़ी का बजनी फ्रेम था। उसके दोनों हाथों को निकालकर किसी ने फ्रेम को कस दिया। कमर के छल्ले से दो चेने निकल उसके हाथों मे कस गयीं। आंखों पर अब भी पट्टी बंधी थी। अचानक सांय की आवाज के साथ एक जोरदार बार उसकी कमर पर हुआ। यह चाबुक का प्रहार था। वह चिल्ला उठा। अचानक उसका फोन फिर बजा। इस दफा उसके कानों में चिर परिचित आवाज गूंजी। बहनचोद तू तो एक ही शाॅट में ऐसे चिल्ला रहा है जैसे तेरी गांड फट गयी हो। यह भी चाबुक मैं नहीं चला रही। छमिया चल इस गधे को मेरे सामने पेश कर। ओए सीध चलता चल। पीछे से एक ओर जोरदार स्ट्रोक अपने चूतड़ों पर पड़ते ही वह अपनी जगह से हिल चुका था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। पांच मिनट तक चाबुक और गालियां खाते हुए वह मैदान में घूमता रहा। आखिर में दमिया ने उसको सीधे रास्ते पर पहुंचा दिया। वह हरम में दाखिल हो चुका था। आ गया गधे की गांड। चल आ जा। संगीता मैडम की आवाज सुनकर उसने दिल ही दिल खुदा को शुक्रिया अदा किया। चलो इसकी आंख से पट्टी हटा दो। पट्टी खुलते ही कुछ देर तक मोहित कुछ भी नहीं देख लेकिन जैसे ही उसकी आंखे रोशनी की अभ्यसत हुई। हाथों पैरों के बंधे होने के बाद भी मोहित ने झुककर अपनी हसीन मालकिन का शुक्रिया अदा किया। चल कुत्ते तुझे मैं अपने हरम के जानवरों से मिला दूं। हाथ में पकड़े चाबुक का जोरदार बार पेट पर करने के साथ वह उसे लेकर चल दी। खुले आसमान में छह फीट लम्बाई वाली दो सेक्सी हसीना पूरी नंगी मुर्गा बनी हुई थी। उनकी कमर पर पांच पांच किलो के पत्थर रखे थे। जानता है ये कब तक मुर्गा बनेगी। पूरे तीन घंटे। दोनों के चूतड़ों पर जोरदार चाबुक के पांच पांच प्रहार करने के बाद उनकी निगरानी कर रही एक काली कलूटी से कहा कम्मो यह पत्थर गिरे तो पूरे पचास डंडे मारना। इसके बाद वह अपने गुलाम को घसीटते हुए आगे बढ़ी। सामने एक जोड़ा हवा में लटका हुआ था। मर्द को उलटा लटकाया गया था। उसका लंड औरत के माथे के सामने था। पंजों पर उचकने के बाद वह किसी तरह से लंड को मुंह में लेने का प्रयास कर रही थी। जैसे ही लंड मुंह से बाहर जाता। एक कलूटी मोटी औरत एक लम्बा हंटर बंधी हुई औरत की कमर दे मारती और गंदी सी गाली देती। चुदाखानी बहन की लंडी। लंड नहीं निकले, यही मालकिन ने कहा था। बीच बीच में वह मर्द को भी हंटर लगा रही थी ऐ कुत्ते तुझसे मालकिन ने कहा था कि किसी भी तरह यह कुतिया तेरे लंड को मुंह में न ले पाये। ये मेरा परमानेंट कुत्ता कुतिया हैं। आज मैंने इनको डिफरेंट सजा दी है। तेरे लिए तो सात दिन मैंने बहुत खास सोच रखे हैं रे हरामी। आज तो ट्रायल है। कल से तेरा नम्बर है। आज तू मेरी खास जेल का कैदी बनकर रहेगा। ऐ कम्मो संगीता ने किसी को आवाज दी। इसको नंगा करके चेस्टी वेल्ट पहना दो। कम्मों ने चाकू से उसके कपड़ों को काट दिया। फिर उसके लंड को चेस्टी में कैद कर दिया। संगीता अपने गुलाम को लेकर अपनी जेल की ओर बढ़ी। इस जेल में मेरे कई कैदी बंद हैं। पहली जेल में बिलकुल नंगी तीन 45 साल की औरते बंद थी। जेल के दरबाजे पर पर्चा टंगा था। तीनों के नाम शबनम जुर्म गुलामी से जी चुराना सजा 5 महीने की कैद, आयशा फर्श पर थूकना, सजा 3 हफ्ते की सजा, दीपिका जुर्म मालकिन के सामने बालों में कंघी करना, सजा सिर गंजा करके एक महीने की कैद। पहली कोठरी का नजारा देख वह डर गया। दूसरी कोठरी देखकर डर और भी बढ़ गया। एक औरत को सलीब पर टांगा गया था। वह पानी पानी चिल्ला रही थी। उसके दरबाजे पर टंगे पर्चे पर लिखा था। बिना आज्ञा के पानी पीना। सजा तीन दिन बिना पानी के कैद। जेल में मर्दों के हालात बहुत ही बदतर थे। पांच कोठरियों में तकरीबन 50 मर्द बंद थे। सभी भारी लोहे की हथकडियों और बेडि़यों में जकड़े हुए थे। आखिरी कोठरी खाली थी। लेकिन यह बहुत छोटी थी। संगीता ने बूट की ठोकर मोहित की गांड पर मारकर उसे गिरा दिया। साले गधे की गांड तू कुत्ता है मेरा कैदी नहीं कि तुझको पूरी सेल मिलेगी। चल इस पिंजरे में कुत्ते की तरह बढ़ जा। गर्दन पर कसे फ्रेम की वजह से उसे पिंजरे में घुसने में परेशानी हुई लेकिन संगीता ने साली हरामजादी गधे की गांड, बहनचोद तुझे यहां रोज अपनी गांड मरवानी है। अंदर जा। 20.25 चाबुक एवं 50 ठोकरे खाने के बाद वह पिंजरे में अपने घुटने और कोहनियों के बल कुत्ते की तरह घुसने में कामयाब हो गया। उसके पिंजरे को लाॅक करने के बाद कम्मो को जेल में तैनात कर संगीता चली गयी। पिंजरे में बंद मोहित बेहद दर्द के बीच आंखे बंद किये सोच रहा था कि आने वाले सात दिन उसके लिए और भी स्वपीडानन्द लेकर आयेंगे। यहां उसे वह सब कुछ मिलेगा। जिसकी उसे चाहत है।
पहला दिन
पूरी रात भूखे पेट एवं बिना पानी के बेहद टफ कंडीशन में छोटे से पिंजरे में कुत्ते की तरह चारो हाथ पैरों पर लगभग खड़े अंदाज में कैद रहने सरीखी यातना ने गुलाम मोहित की हालत खराब कर दी। वह दोनो घुटनों को टेके हुए पिंजरे में कुछ पल आराम के लिए जूझ रहा था। कन्धों पर कसे लकड़ी के फ्रेम में फिक्स हाथों को वह बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन तकरीबन पांच किलो वजनी इस क्रेम ने एक एक पल को सालों की सजा में तब्दील कर दिया था। किसी तरह से उसने अपने माथे को जमीन पर टिकाया। हालांकि उसकी जुबान सूख रही थी, आंते कुलबुला रही थी, लेकिन इसके बाद भी वह खुश था कि उसने अपने सपनों की मंजिल मिल गयी है। रात को दो बजे के करीब जेल का दरबाजा खुला। उसे बूटों की आवाज सुनाई दी। चार गार्डस खाना लेकर अंदर आये। पहले गुलाम औरतों को एवं फिर मर्दों को बाहर निकाला गया। ऐ रश्मि नये कुत्ते को भी निकाल ला, नहीं तो मादरचोद सुबह को मर जायेगा। बैसे भी कल इसको बहुत मेहनत करनी है। रश्मि नामक गार्ड ने उसकी छोटी सी सेल को खोलकर उसे बाहर आने को कहा। बेहद मुश्किल वह पीछे को सरक कर बाहर निकला। सारी गार्डस पूरी तरह से नंगी थी। उनके हाथों में लचकदार बेंत थी। खाने के नाम पर ब्रेड के 3 पैकेट थे। 51 मर्द, 15 औरतें खाने के लिए जानवरों की तरह फर्श पर चारों हाथ पैरों पर खड़े थे। सुलेखा जोकि इंचार्ज थी। ऐ कुतियों की औलादों जो है यही खाना है। जो छीनकर खा लेगा, उसी को खाना मिलेगा। और हां हाथों का कोई इस्तेमाल नहीं होगा। ऐ कमीनियों अगर मर्दाें को हरा सकोगी तभी तुम्हारा पेट भरेगा। इसके बाद उसने ब्रेड का एक टुकड़ा एक ओर फेंका। उस टुकड़े पर कब्जे को एक साथ सभी गुलाम लपके। पहला टुकड़ा मोहित के पास गिरा। तेजी से उसने ब्रेड के टुकड़े को मुंह में लेना चाहा। इतने में एक गुलाम औरत तेजी से कुतियां की मानिंद आयी और अपने दातों को ब्रेड के साथ मोहित के होठों पर गड़ा दिया। अचानक हुए दर्द से घबरा कर उसने ब्रेड को गिरा दिया। इस टुकड़े को पास में मौजूद एक मर्द गुलाम निगल गया। इस बीच गार्डस ने गुलामों की गांड पर लचकदार लम्बी बेंतों से मार लगानी शुरू कर दी। बहनचोदों मादरचोद गुलामों खाने की तमीज भी नहीं है सालों। सुलेखा ब्रेड के टुकड़े फेंकती रही, जिस गुलाम के हिस्से में जो आया, वह उसी में खुश हो गया। इसके बाद गार्डस ने सभी को कैद कर दिया। मोहित के हिस्से में दो टुकड़े आये थे। फिर से उसको पिंजरे में जाना था। शुक्र था इस दफा उसके कन्धों पर फ्रेम नहीं था लेकिन जल्द ही उसे एहसास हो गया कि यहां सभी के दिमाग में क्रूरता कूट कूट कर भरी है। सुलेखा मैडम छह फीट लम्बी 28 इंची कमर 32 छातियांे की मालकिन उसकी ओर बढ़ी तो उसकी शामत आ गयी। ऐ कुत्ते चल इधर आ। बह बहुत खुश हुआ कि शायद संगीता मालकिन ने उसके लिए चोदन का सामान भेजा है लेकिन सुलेखा तो आफत की परकाला निकली। उसके बूट में नुकीली कीलें लगी थी। जैसे ही मोहित पास गया। चल चोदेगा। हां। इधर उसके मुंह से हां निकली, उधर तड़ाक से उसके दांये घुटने के पास बूट की ठोकर पड़ी। बूट में नुकीली कीलें लगी थी। कीले टांग में जा धंसी। खून छलका। हरामन मां की गंडी औलद साले तू मालकिनों को चोदेगा। साले तेरा लंड काटकर हम तेरे मर्दाें को अपना पालतू कुत्ता बनाते हैं। हरामी साले तू गुलाम है। यहां सपने में भी चोदने की बात नहीं करना। यहां तेरी गांड मारी जायेगी। हर बात के साथ वह बूट की ठोकरे पूरी निर्दयिता के साथ मार रही थी। कूल्हें पर ठोकर मारते हुए तो सुलेखा ने कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया था। कीलें चूतड़ में धंस गयी थी। इसके बाद लहुलुहान अवस्था में उसको कोठरी में बंद कर अत्याचारी मालकिनों की फौज निकल गयी। रात भर दर्द झेलने के बाद सुबह निकली। सुबह को सभी कैदियों को बर्जिश के लिए निकाला गया। मर्दाें के लंड पर वजनी गोले बांधकर उनको 100 सिटअप एवं 100 पुशअप का आर्डर दिया गया। गुलाम औरतों की छातियों पर पांच पांच किलों का वजन लटका कर उनको एक किमी दौड़ पर भेजने के साथ बीच बीच में हंटर से उनकी खबर ली जा रही थी। मोहित के पसीने 20 सिटअप में ही छूट गये। अबे मोटे गैंडे यहां क्या मां चुदाने आया है तू साले। एक हफ्ते में मैं तेरी खाल उतारकर तुझको इंसान बना दूंगी। हरामी जल्दी कर। संगीता मैडम ने चाबुक को पिछबाड़े पर बजाते हुए कहा। एक्सरसाईज खत्म करने के बाद गुलामों को नाश्ते में एक सूखी ब्रेड दी गयी। ऐ कम्मो चल इस गैंडे को तैयार कर। पहले दिन संगीता मैडम ने तय किया कि मोहित को घोडा बनाकर यूज किया जायेगा। ऐ कम्मो इधर आ जा इस साले को आज मेरा घोडा बना दे। मोहित को घोडा बनने का हुकुम देकर सांवली लेकिन गठीले बदन की कम्मो उसकी पीठ पर बैठ गयी और उसे चलने का इशारा। चारों हाथ पैरों पर चलना उसके लिए पहला तर्जुबा था। जल्द ही कम्मों उसे एक ऐसी गाड़ी के पास ले गयी जो छोटी घोडागड़ी लग रही थी। छोटे टायरों के सहारे दौड़ने वाली इस गाड़ी में मोहित को जोतने के बाद उसने मुंह में लगाम पहनाकर रास को गाड़ी पर रख दिया। कुछ देर में सगीता मैडम आयी। ओये घोडा तैयार भी कर दिया। चल अब मैं अपनी सल्तनत पर नजर डाल लूं। हाथों में लगाम की रास को पकड़ने के बाद संगीता ने अपने जूतों की कीलों का दबाब मोहित के चूतड़ों पर किया। लगाम को पूरी ताकत से खींचने के बाद उसने गाड़ी को खींचने का इशारा दिया। बीच बीच में गालियों की बौछार करते हुए वह कीलों एवं चाबुक का इस्तेमाल करती जा रही थी। चाबुक भी यह खास था। इसके अगले सिरे पर धारदार ब्लेड लगे थे। चाबुक जहां पड़ता खून छलक आता। लम्बी धारियां बनाने के दौरान वह पूरी सावधानी बरत रही थी। कल जिन दो लडकियों को उसने धूप में देखा था। वो आज भी मुर्गा बनी हुई थी लेकिन आज उनके साथ कुछ ज्यादा ही जुल्म हो रहा था। दोनों की गांड में एक छल्लेनुमा आइरन राॅड को अटका कर वजन टांगा गया था। गांड पर वजन रखा ही था। गाड़ी से उतर कर संगीता ने दोनों लड़कियों के चूतड़ों पर वहां रखी पतली बेंत से मार लगायी। लड़कियां हर शाॅट पर थैंक्स मालकिन कहती रही। जानता हरामी मारेहित की ओर देखकर का ये मेरी गुलामी के लिए दिल्ली से आयीं है। पूरे तीन दिन इनको मुर्गा बनाना है। आगे बढ़ने के बाद गाडी रूकने का इशारा किया तो उसे कल का एक नजारा और ताजा हो गया। जहां कल मर्द उलटा लटका था। वहीं आज मर्द सीधा खड़ा था लेकिन उसके हाथ कमरे के पीछे से हवा में थे। जिन पर पांच किलो वजन का पत्थर रखा गया। उसकी टांगे आधी मुड़ी हुई थी। वहीें औरत पूरी नंगी उलटी लटकी हुई थी। उसके मुंह में एक पाइप लगा था। जिससे वह लगातार पानी पी रही थी। तू जानता है आज ये मेरे कुत्ते को शाम तक अपना मूत या तो पिलाती रहेगी या नहलाती रहेगी। लगातार पानी पीने से उसे बारबार मूत्र आ रहा था। वह उस पत्थर से होते हुए उसके मुंह पर गिर रहा था। अबे हरामी एक बूंद भी बेकार नहीं होना है। इन यातनाओं को देख उसकी गांड अब हवा लेने लगी थी। देर शाम को एक रेस का आयोजन किया गया। जिसमें सभी गुलाम औरतों एवं मर्दाें को मेढ़क की तरह दौड़ना था। रेस में सभी गार्डस हाथों में बेंत एवं चमड़े के पट्टे लिए तैयार थीं। स्टार्ट के आर्डर के साथ सभी नंगे गुलाम मेढ़क की तरह फुदकने लगे। बीच बीच में चूतड़ों पर पट्टों और बेंतों की मार खाते हुए गुलाम लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। संगीता मैडम की मार के आगे मोहित आधे रस्ते में गिर गया। रेस की विजेता मुर्गा बनने वाली लड़की शिखा बनी। ऐ मादरचोद गुलामों जो भी आज हारे हैं। उनको 100 चाबुक सीने पर 100 पिछबाड़े पर लगाये जायेंगे। रात होते होते सभी गुलाम दर्द से कराहते हुए भूखे प्यासे पिंजरे में बंद कर दिये गये। रात को दो बजे फिर चिडिया की चूत में चैथाई के हिस्से की तर्ज पर गुलामों को खाना मिला। पहले दिन की गुलामी पूरी होने के बाद जिस्म का पोर पोर दुखने के बाद भी मोहित की आंखों में एक अजीब थी चमक थी। वह मानसिक रूप से दूसरे दिन के लिए खुद को तैयार कर रहा था। शायद यही कारण है कि लोग सच्ची मालकिन की गुलामी में जाने के लिए मरे जाते हैं।
दूसरे दिन की शुरूआत भी उसके लिए बेहद खास रही। उसका वजन तेजी से गिर रहा था। कम्मो उसके फिर से ले जाने के लिए हाथ में तीन फीट लम्बा हंटर लेकर हाजिर थी। हरामी गैंडे लगता है तेरी चर्बी अभी मार से पिघलनी शुरू नहीं हुई है, हाथी के फलान आज तेरे बदन से चर्बी का पहाड़ आज बहुत कम करके ही मैं दम लूंगी। चल अपने घुटनों एवं कोहनियों पर खड़ा हो जा। दहाड़ते हुए कम्मो बोली। मोहित कोहनियों एवं घुटनों के बल खड़ा हो गया। उसके हाथों की हथकडि़यों को गले के कालर से अटैच कर दिया। अब वह समझ चुका था कि उसे इंच इंच कोहनियों एवं घुटनों पर खिसकना है। पिछले दो दिनों से चेस्टी में कैद उसके लंड को आजाद कर कम्मों ने कुछ राहत जरूर मोहित को दी, चेस्टी से आजाद होते ही लंड ने तनतना कर कम्मो को सलामी देते हुए तेजी से मूत की धार छोड़ दी। हरामी साले तूने फर्श गंदा कर दिया। चल साले इसे अपनी जुबान से चाटकर साफ कर। जब तक फर्श साफ नहीं होगा तेरी गांड पर हंटर पड़ते रहेंगे। कुछ दूरी बनाकर उसने बेहद सफाई से सड़ाक से हंटर चला दिया। मोहित धुल भरे फर्श पर बह रहे अपने ही मूत को पीने लगा। पांच मिनट के बाद अपने मिशन में कामयाब रहा। अब कम्मो ने उसके लंड को एक पतली चेन से बांध दिया। इस चेन के एक सिरे से पांच किलो को वजनी पत्थर बांधकर उसकी गांड पर अपने नुकीले बूट की ठोकर मारकर चलने का इशारा किया। दर्द से तिलमिलाये मोहित ने आगे खिसकने की हिम्मत की लेकिन अंडकोशो पर पड़ रहे दर्द से उसकी आंखों में आंसुओं को भर दिया लेकिन लगातार पड़ रही बूट की ठोकरों से कीलों की चुभन ने आगेे बढ़ने पर मजबूर कर दिया। मानों कम्मो को यह दर्द कम लग रहा हो, इसलिए वह खुद घुटनों एवं कोहनियों के बल खिसक रहे गुलाम पर चढ़कर बैठ गयी। संगीता मैडम के सामने हाजिर होने तक मोहित की हालत खराब हो चुकी थी। कम्मो तू भी गुलामों को दर्द देने के नये नये बेहतरीन तरीके ईजाद करने लगी हैं। संगीता ने कम्मो की तारीफ की तो वह फुलकर कुप्पा हो गयी। इससे आज क्या कराना है। ऐसा कर इसको ऐसे ही रात दस बजे तक के लिए कोल्हू में जोत दे। जी। इतना कहकर कम्मो हंटर मारते हुए मोहित को लेकर कोल्हू के पास पहुंची। वहां की हालत देखकर मोहित की गांड और भी हवा ले गयी। पांच कोल्हू लगे थे। जिनमें से तीन पर बारह मोटी ताजी औरते बंधी हुई थी। उसके भारी बदन से पसीना टपक रहा था लेकिन गार्डस किसी के भी सुस्त होते ही हंटर से उसकी खबर ले रही थी। चैथे कोल्हू पर एक सेक्सी हसीना बंधी थी। उसके हाथ पीठ के पीछे बंधे थे। उसकी छातियों को पतली रस्सी से कसकर बांधा गया था। उसके दोनों निप्पल के सिरे को कोल्हू के डंडे के साथ बांधा गया था। उसकी चूत में छेद करके एक छल्ला पहनाया गया था। जिसके साथ एक चेन जुड़ी थी। इससे एक पत्थर जुड़ा था जो जमीन से कुछ ऊपर लटक रहा था। साली खसमखानी हरामखोर तेजी से चल। एक काली गार्डस उसे लगातार पतली बेंत से पीटते हुए चलने को मजबूर कर रही थी। वह पत्थर के वजन से बचने को टांगे झुकाने की कोशिश करती लेकिन बेंत की मार उनको जल्द सीधा कर देती। इसके पति ने इसे यहां सजा के लिए भेजा है। किसी यार के साथ भाग गयी थी। यह साली चुदाखानी। चल तुझको भी टाइट कर दूं। मोहित को यूं ही छोटे कोल्हू पर गले के कालर से अटैच कर गार्डस के हवाले कर कम्मो चली गयी। रात दस बजे तक बिना ब्रेक के कोल्हू में बंधे गुलामों को गार्डस ने दौड़ाया। तीसरे, चैथे, पांचवे, छटे दिन एवं सातवीं रात यातनाएं झेलने के बाद फिर से जेल में मोहित की वापसी हुई। अगली सुबह उसकी आजादी की थी। रात को उसके लंड को आजाद कर उसको औरतों के पिंजरे में बंद करके गार्डस चली गयी। गुलाम औरतों चैपायों की तरह बंधी हुई थी। उनका नंगा चिकना बदन बार बार टच होने से मोहित के भीतर सेक्स जागने लगा। वह धीरे से कोशिश करके एक हसीन गुलाम औरत पर चढ़ गया। उसका लंड तनतना रहा था। गुलाम औरत की चूत भीग रही थी। उसे शायद मजा आ रहा था। अभी उसने एक घक्का लगाकर लंड को अंदर डाला ही था कि गुलाम औरत भी मजे लेने लगी। वह तेजी से एक्सप्रेस की तरह घोड़ी पर सवारी गांठ रहा था कि इतने में ही गार्डस आ धमकी। अबे साला देखो सेक्स कर रहा है। हाथों में चमड़े के पट्टे, हंटर लिये चार गार्डस दौड़ पड़ी। पिजरें से बाहर निकाल कर दोनों गुलामों की ओर कहर भरी नजर से देखते हुए अबे हरामियो यहां सेक्स एलाउ नहीं है। मादरचोदों। इतना कह कर दोनों को मार लगानी शुरू कर दी। क्या करें इन कुत्तों को साले। करना क्या है कल को दोनों को सेक्स के जुर्म में संगीता मैडम की कोर्ट में हाजिर करना होगा। वहीं इन कुत्तों की जिंदगी का फैसला करेंगी। अगले दिन कोर्ट में जंजीरों में बांधकर मोहित एवं शिखा नामक गुलामों को पेश किया गया। मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाये। जज की कुर्सी पर बैठी संगीता ने आदेश दिया। सभी गुलाम पूरी नंगी अवस्था में हाजिर थे। एक गार्डस ने चार्जशीट पेश की। दोनों आरोपियों से पूछा गया। दोनों ने रहम भी भीख मांगते हुए जुर्म कबूला। मेरी स्टेट में बिना परमीशन सेक्स एक बड़ा जुर्म है। इस जुर्म में मोहित को छह महीने कैद, डेली 10 गुलामों से गांड मराने, सभी टायलेट को साफ करने, डेली पचास बेंत, 2 घंटे कोल्हू, जोकि लंड से खींचना होगा की सजा होगी। शिखा बाकई कुतिया है। इसके पति ने इसको सेक्स से दूर रखने के लिए हमारे पास सजा के लिए भेजा था। इसको एक महीने कैदखाने में टायलेट बनाकर रखा जायेगा। इसके मुंह में सीधे गुलाम से लेकर गार्डस तक लैट्रीन से लेकर पेशाब कर सकेंगे। जब भी गार्डस का मन होगा। इसको पीटा जा सकेगा। दोनों गुलाम सजा सुनकर रिययिाने लगे। मालकिन रहम, प्लीज रहम करो। संगीता ने कोर्ट बर्खास्त करते हुए दोनों को ले जाने का इशारा किया। मार खाते हुए कैदखाने की ओर बढ़ते हुए मोहित समझ चुका था कि अगले छह महीने उसके लिए कितने भारी गुजरने वाले है। फिर भी वह आजादी न मिलने के बाद भी खुश था।
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