Sunday, May 11, 2014

FUN-MAZA-MASTI मुझे मेरी बीवी से बचाओ--1

FUN-MAZA-MASTI

मुझे मेरी बीवी से बचाओ--1

मैं इस सच्ची घटना को   में प्रकाशित कर रहा हूँ. मेरे बचपन के दोस्त के साथ घटी यह घटना है. जो उसने कहा मैंने उसे सच मानते हुए लिख दिया है. उसके दो चचेरे भाइयों ने भी इस घटना की सत्यता स्वीकारी है. आज मेरा दोस्त और उसकी बीवी किस हाल में है ये मैं सबसे आखिर में बताऊंगा. आप तो बस मजा लिजीये. आपने आज तक ऐसी कहानी नहीं पढ़ी होगी ये मेरा चेल्लेंज है. जैसे जैसे यह कहानी आगे बढ़ती जायेगी वैसे वैसे आपकी उत्तेजना भी बढ़ती जायेगी. तो पढना आरम्भ किजीये और जिदगी का मज़ा लिजीये.


आज से चार साल पहले मैंने यही बात कही थी अपने कुछ करीबी रिश्तेदारों को बताई थी जब मेरी शादी को दो महीने हुए थे. मेरी शादी सुमन से हुई थी. मैं बहुत खुश था. सुमन बहुत ही खुबसूरत थी. मेरे सारे दोस्त बहुत जले थे जब उन्होंने सुमन को देखा था. सुमन का रंग गुलाबी गोरा था. अच्छा कद और हुस्न की मल्लिका. हर अंग तराशा हुआ. कहीं कोई कमी नहीं निकल सके ऐसा हुस्न था उसका. मैं अहमदाबाद के नजदीक मणिनगर की एक फैक्ट्री में काम करता था. फैक्ट्री की अपनी कालोनी थी. मुझे वहीँ एक छोटा बंगला मिला हुआ था. बंगले में दो फ्लैट थे. एम् में मैं और दूसरे में एक पटेल परिवार रहता था. पटेल साहब हमारी फैक्ट्री में काम करते थे. उनके एक बेटा भी था जो दूसरी जगह काम करता था. वो भी मेरी ही उम्र का था. उसकी पत्नी का नाम था श्वेता. श्वेता भी सुमन की ही तरह गज़ब की खुबसूरत थी. वो मुझे सुनील भाई कहकर बुलाती थी और हमेशा अच्छे से बात करती थी. पटेल साहब की पत्नी का देहांत कुछ समय पहले हो चुका था.

मैं शादी के बाद सुमन को लेकर मणिनगर आ गया. अभी तक मैंने सुमन के साथ सुहागरात नहीं मन पाया था. सुमन शादी के समय से ही तेज बुखार के चलते बहुत कमजोर हो गई थी. मैं उसे पूरा आराम देना चाहता था. यहाँ आने के बाद दूसरे दिन ही श्वेता उससे मिलने आई और वो दोनों सहेलीयां बन गई. मैं बहुत खुश हो गया. एक दिन रात को मैंने सुमन को अपनी बाहों में भर लिया. वो भी कुछ ना बोली और खुद-बी-खुद सिमट गई. हम दोनों के एक दूसरे को काफी देर तक किस किया. जब मैंने सुमन के कपडे उतारे तो वो थोडा कसमसाई. मैंने उसे अपने साथ पूरी तरह नग्न कर दिया. मैंने उसे आज पहली बार इस तरह देखा था. उसके हर जिस्म का एक एक हिस्सा बहुत ही कारीगरी से बना हुआ था. मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब समझने लगा. हम दोनों आपस में लिपट गए. लेकिन इसके आगे सुमन एकदम से ठंडी हो गई और हमारा मिलन अधुरा रह गया. लेकिन मैंने इसे कोई गलत नहीं माना. लेकिन हर बार वो ऐसा ही करने लगी तो मुझे थोड़ी हैरानी हुई. मैंने उससे एक दो बार पूछा तो उसने कुछ ना कहा और बात को टाल गई.


एक दिन मैं दोपहर को घर आ गया क्यूंकि मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा था. मैंने देखा की सुमन और श्वेता बहुत ही घुलमिलकर बातें कर रही है और हंस भी रही है. मुझे बहुत अच्छा लगा. सुमन का चेहरा आज पहली बार इतना खिला हुआ लग रहा था. रात को मैंने फिर एक बार कोशिश की लेकिन बात वहीँ आकर रुक गई. लेकिन इतना जरुरु हुआ की सुमन ने आज ज्यादा गर्मजोशी से मुझे भू चूमा था और खुद के भी चुम्बन दिए थे.

दो दिन बाद मुझे कुछ काम से किसी मीटिंग में जाना था. कपडे बदलने के लिए मैं घर पर गया. दरवाजा खुला था. मैं अपने कमरे में जैसे ही दाखिल हुआ मैंने देखा की सुमन और श्वेता दोनों ने एक दूसरे को गले से लगा रखा है. दोनों पलंग पर बैठी हुई है. सुमन श्वेता को चूम रही थी औए श्वेता सुमन के बाल सहला रही थी. मैं हैरान हो गया. अब मैं समझा की सुमन पूरी तरह से खुलकर मेरे साथ सेक्स क्यूँ नहीं कर रही थी. तो इसका मतलब यह हुआ की वो लेस्बियन है. मैंने सुना था की लेस्बियन आपस में ही संतुष्ट होते हैं ऐसा नहीं की वे मर्दों के साथ संभोग नहीं करते लेकिन ज्यादातर वो आपस में ही सेक्स सम्बन्ध बनाते हैं. मैं परेशान हो गया. मैंने ये बात मेरे कुछ करीबी रिश्तेदारों को बताई लेकिन किसी ने भी कोई सुझाव नहीं दिया. मेरी परेशानी बढती जा रही थी. हमारा सम्बन्ध केवल चुम्बनों तक ही रह गया था, यहाँ तक कि सुमन ने आज तक मुझे अपने होंठ चूमने नहीं दिए थे.

इन्ही दिनों मेरी मुलाकात मेरे एक बहुत पुराने मित्र से हुई. मैं उसे सारी समस्या बताई. उसने सारी बात सुनने के बाद मुझे कुछ सुझाव दिए. मुझे उसके सुझाव कुछ पसंद आये. मैंने उस दोस्त के बताये एक आदमी से मुलाकात कि. उस आदमी ने मुझे कहा कि काम हुआ समझो. उसी शाम को मैं उस आदमी से मिलने गया. उसने मुझे एक जवान लडकी से मिलवाते हुए कहा " ये सोनी है. ये आपके यहाँ काम करने के लिए तैयार है. मैंने इसे सब कुछ समझा दिया है. ये कल ही अपना सामान लेकर आपके घर पहुँच जाएगी. आपकी हर समस्या हल हो जायेगी." सोनी एक लगभग पैंतीस साल कि उम्र कि औरत थी. उसका शरीर जबरदस्त गंठा हुआ था. उसके स्तन तो जैसे ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब थे. वो दिखने में ज्यादा खुबसूरत नहीं थी लेकिन उसके गठे हुए शरीर और साफ सुथरे कपडे से दिखने में काफी गरम लग रही थी. सोनी ने मुझसे कहा " आप बिलकुल चिंता मत करना. मैं सब समझ गई हूँ. आपकी समस्या हल हुई समझो. मैं और आप मिलकर इस समस्या को सुलझा लेंगे. बस आप अपना सहयोग पूरा पूरा देना. समय समय पर मैं आपको इशारे से सब कुछ सम्जहती रहूंगी और कब मदद चाहिये बताती भी रहूंगी. आजकल इस तरह की समस्या बहुत कॉमन हो गई है. मैं ऐसी समस्याएँ सुलझा चुकी हूँ." मैं खुश होता हुआ घर लौट आया.

मैंने सुमन से कहा " मैंने तुम्हारी मदद के लिए एक नौकरानी रख ली है. घर का सारा काम कर लेगी और तुम्हे भी आराम रहेगा. मुझे तुम्हारी बहुत चिंता रहती है." सुमन ने खुश होते हुए कहा " ये तो बहुत ही अच्छी बात है. अब मैं फुर्सत में रहूंगी और घर की देखभाल ज्यादा आसानी से कर सकुंगी."

अगले दिन सवेरे ही सोनी अपने साथ एक सूटकेस लेकर आ गई. मैंने सोनी को सुमन से मिलवाया. सोनी ने सारा काम संभाल लिया. सोनी ज्यादातर ट्यूब टॉप के ऊपर फुल ज़िप्पर पहनती थी और नीचे घुटनों तक की लम्बाई की कैप्री. कुल मिलाकर वो नौकरानी नहीं बल्कि बाहर के देशो की तरह हाउस मेनेजर लगती थी.

जब मैं तैयार होकर नाश्ते के लिए टेबल पर आया तो नाश्ता लगा हुआ था. सुमन बैठी थी और बहुत खुश नजर आ रही थी. तभी सोनी आ गई. उसने सुमन के सर में मालिस करनी शुरू कर दी. सोनी ने मेरी तरफ मुस्कुराकर देखा. मैंने देखा कि सोनी ने सुमन के सर की मालिश करते करते उसकी कंधे और बाहें भी दबानी शुरू कर दी थी. सुमन को यह बहुत अच्छा लगने लगा. मैं मुस्कुराते हुए फैक्ट्री चला गया.

शाम को लौटने पर सोनी ने कहा धीरे धीरे योजना शुरू कर दी जायेगी. रात को खाना खाने के बाद सोनी ने सुमन से अपनी मसाज करवाने के लिए कहा. सुमन तैयार हो गई. सोनी ने मेरे सामने ही उसकी पीठ पर मसाज शुरू कर दी. सोनी के हाथ धीरे धीरे सुमन की पीठ के निचले हिस्से तक पहुँच गए. सुमन के उभरे हुए बटक्स ( चुतड ) सोनी के मसाज से हिलने लगे. सोनी के हाथ अब उसकी जाँघों तक पहुँच गए. सोनी के इशारे से मैं उठकर बाहर आ गया और खिड़की से अन्दर देखने लगा. सुमन अपनी जंगों पर मसाज से अब उत्तेजित होने लगी थी. सोनी अब और ज्यादा नीचे झुक गई. उसकी उभरी हुई छाती सुमन की पीठ को छूने लगी. सुमन थोडा कसमसाई. सोनी ने उसे अब सीधा लिटा दिया और मसाज करने लगी. पहले सर; फिर कंधे और फिर सोनी ने उसके उभारों को धीरे धीरे मसलना शुरू किया. सुमन ने सोनी को अपनी तरफ खींचा. सोनी ने अब अपने स्तन सुमन के स्तनों पर टिका दिए और अपने स्तनों से सुमन के स्तनों को हिलाने और दबाने लगी. सुमन ने सोनी को कसकर पकड़ लिया और अपने ऊपर लिटा लिया. सुमन सोनी के गालों को चूमने लगी. सोनी ने मुझे अन्दर आने का इशारा किया., मैं तुरंत अन्दर गया. सोनी ने सुमन की कुर्ती के बटन खोलकर उसे उतारना शुरू किया. सुमन ने कोई प्रतिरोध नहीं किया और जवाब में सोनी के ज़िप्पर को खोल दिया और उसे खींच कर उतार दिया. अब सोनी केवल ट्यूब टॉप में ही रह गई. सोनी का गदराया जिस्म मुझे उत्तेजित कर गया. उसकी उभरी हुई छातियाँ ट्यूब टॉप में से ऐसे झाँक रही थी जैसे कोई भारी चीज को बहुत पतले कपडे में बाँध कर लटकाया जाए. सोनी ने अब अपनी आधी नंगी छाती को सुमन की छाती से स्पर्श कराया. सुमन अब केवल ब्रा में थी. अब सोनी ने सुमन की लेग्गिंग्स उतार दी. सुमन ने भी जवाब में सोनी की कैप्री को खींच दिया. सोनी और सुमन दोनों अब केवल दो बेहद छोटे कपड़ों में थी जो उनके दोनों जरुरी हिस्सों को ढंके हुए थे. मैंने भी सोनी के इशारे पर अपने कपडे उतार दिए. अब मैं केवल अपनी अंडर वेअर में था. सोनी और सुमन एक दूसरे से लिपटे जा रहे थे. सोनी भी एकाएक नशे में आ गई. दोनों ने एक दूजे को चूमना शुरू किया. मुझे अब अपने पर काबू नहीं रहा. मैं भी पलंग पर चढ़ गया और उन दोनों के एकदम करीब बैठ गया. सुमन ने अचानक मुझे देखा और मुस्कुराई. मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया. मैंने सुमन का एक हाथ पकड़ लिया. सुमन ने मुझे नीचे झुकने के लिए कहा. मैं नीचे झुका और सुमन के गालों को चूमने लगा. सुमन ने जवाब में मेरे गालों को चूम लिया.

मैं बहुत खुश हुआ क्यूंकि पहला राउंड सोनी ने मुझे जितवा दिया था. अब मैं भी लेट गया और उन दोनों के साथ लिपट गया. मुझे सोनी के उभरे हुए स्तन लगातार ललचा रहे थे. लेकिन सोनी सुमन से लिपटी हुई थी. मैंने सुमन को सोनी से अलग किया और सुमन मुझसे लिपट गई. सोनी ने मुझे देखकर आँख मारी। मैंने भी जवाब में आँख मारी. सुमन अब मुझे बेतहाशा चूमे जा रही थी. सोनी सुमन के नंगे जिस्म पर हाथ से मसाज कर कर के उसे लगातार उत्तेजित रख रही थी. तभी सुमन ने मुझे कसकर पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. इससे पहले की मैं जोर लगता सुमन ने तेजी से मेरे मुंह की सारी चाशनी अपने मुंह में खींच ली. फिर मैंने भी यही किया. सुमन के मुंह में गज़ब की मिठास थी. काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे को इसी तरह चूमते रहे और चूसते रहे. सुमन ने सोनी को एक बार फिर अपनी तरफ खींचा. सोनी अब मेरे और सुमन के बीच आ गई. सुमन मेरे दायीं तरफ और सोनी मेरे बायीं तरफ आ गई. मैंने उन दोनों को पानी तरफ खींचा और छपता लिया. सोनी की गरम गरम छाती ने मेरे जिस्म में एक बिजली दौड़ा दी. सुमन ने मेरे मुंह को सोनी की तरफ धकेलते हुए उसे चूमने का इशारा किया. सोनी ने खुद अपने गाल आगे की तरफ बढ़ा दिए. मैंने उसके गाल चूम लिए. सुमन ने फिर सोनी से मेरे गाल चुमवाये. अब हम तीनों आपस में इसी चूमा चाटी में मशगुल हो गए. लगातार दो घंटों से भी अधिक समय तक हम तीनो इसी तरह करते रहे. सोनी भी इतना उत्तेजित रहते इतना थक गई थी कि वो हमारे साथ ही सो गई. हम तीनों केवल अपने अंतर्वस्त्रों में एक दूसरे से लिपटे हुए सो गए. बीच बीच में हम में से कोई जागता तो अन्य दोनों दूसरों को चूम लेता. लेकिन रहे हम तीनों ही आपस में सारी रात लिपटे और एकदम सटे हुए. एक परफेक्ट थ्रीसम इन बेड का उदहारण बन गए थे आज हम तीनों.

सवेरे हब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि अभी तक सोनी और सुमन दोनों ही मुझसे लिपटकर सो रही है. सेवर को रिशनी में दोनों के जिस्म दमक रहे थे. मैं उन दोनों के अर्धनग्न जिस्मों को देखता रहा और निहारता रहा. मान ही मान मैं सोनी को धन्यवाद दे रहा था जिसके कारण सुमन एक कदम आगे बढ़ चुकी थी और मुझे उसके होंठों का रसपान करने का मौका मिला गया था.
मैं तैय्या होकर फैक्ट्री के लिए चला गया. सुमन मुस्कराते हुए मुझे बाहर तक छोड़ने आई. उसने मेरी तरफ एक फ्लाईंग किस भी उड़ाया. सोनी भी खिड़की में खड़ी मुझे देख मुस्कुरा रही थी. पुर दिन मैं फैक्ट्री में बहुत खुश था. शाम होते होते मैं एक बार फिर कल्पनाओं में खोने लग गया.
शाम को जब मैं घर पहुंचा तो पहले से ही माहौल बना हुआ था. सुमन और सोनी घर के पिछवाड़े कि बालकनी में बैठे चाय पी रहे थे. घर के पिछवाड़े की बालकनी से दूर दूर तक केवल हरा भरा जंगल नज़र आता है.दोनों चाय पीते पीते एक दूसरे के गाल और होंठ भी चूम रहे थे. सुमन ने भी आज सोनी की ही तरह ट्यूब टॉप के ऊपर बिना बाहों का ज़िप्पर पहन रखा था. उस दोनों के ज़िप्पर बहुत नीचे तक हले हुए थे और उनके स्तनों के ऊपर का खुला हुआ पूरा हिस्सा साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था. सुमन आज बहुत ही गरम और सेक्सी लग रही थी. मैं उन दोनों को इस तरह देखकर थोडा उतेजित हो गया. सुमन ने अचानक मुझे देख लिया और बोली " अरे तुम आ गए. आओ ना. तुम भी हमारे साथ चाय पी लो." मैं वहां जैसे ही बैठा सोनी मेरे लिए चाय लेने चली गई. सुमन ने मेरी तरफ देखा और बोली " सोनी बहुत अच्छी है. मेरा बहुत ख़याल रखती है. सारा दिन मेरे साथ ही रहती है. अब तुम इसे कभी मत जाने देना." मैं सब समझ गया और बोला " सोनी अब हमेशा यहीं रहेगी. खुश अब तो." मैंने इतना कहकर सुमन के होंठ चूम लिए. सुमन ने भी जवाब में मेरे होंठ चूम लिए. तभी सोनी चाय लेकर आ गई. सोनी मेरी बायीं तरफ बैठ गई. मैं अब सुमन और सोनी के बीच में था. सोनी ने मुझसे कहा " आज सवेरे से ही सुमन बहुत ही खुश है. मुझे उन्हें खुश देखकर बहुत अच्छा लग रहा है. सुमन ने कहा है कि अब वो मुझे यहाँ से कभी भी नहीं जाने देगी." सुमन ने सोनी का हाथ पकड़ा और फिर दोनों हाथ मेरे हाथ में रखते हुए मुझसे बोली " तुम्हे आज ये वडा करना होगा कि सोनी को कभी भी नहीं जाने दोगे." मैंने सोनी कि तरफ देखा और कहा " सोनी तुम कभी मत जाना." सुमन ने एक बार फिर मेरे होंठों को चूम लिया.
रात को हम तीनों ने एक साथ ही खाना खाया. फिर हम टी वी देखने लगे. सुमन ने कहा " सोनी ने आज बहुत ही अच्छी आइसक्रीम बनाई है." सोनी हम तीनों के लिए आइसक्रीम लेकर आ गई. सोनी ने मुझे इशारा कर दिया. मैंने आइसक्रीम खाते खाते अपनी ते शर्ट और हाफ मिनट उतार दी. सोनी ने अपने हाथ से सुमन को आइसक्रीम खिलाना शुरू किया. सुमन ने आइसक्रीम अपने मुंह में ली और फिर सोनी के गालों को चूम लिया. सोनी के गाल आइसक्रीम लगने से सफ़ेद लगने लगे. सुमन ने फिर अपनी जीभ से उस आइसक्रीम को खा लिया. अब सुमन ने मुझे आइसक्रीम खिलाई. उसने मेरे साथ भी ऐसा ही किया. फिर सोनी ने मेरे साथ और मैंने सोनी के साथ इस तरह से आइसक्रीम खाई. अब सुमन ने सोनी के और सोनी ने सुमन के कपडे उतार दिए. एक बार फिर हम तीनों अपने अंतरवस्त्रों में ही थे.. आज सोनी और सुमन ने एक ही गहरे हरे रंग की ट्यूब टॉप और पैंटीज पहन रखी थी.
सुमन सोनी को लेकर सोफे पर ही लेट गई. हमारा सोफा तीन गद्दीयों वाला था. इसलिए बहुत ही गुदगुदा था. दोनों उस पर गिरी और तुरंत ही सोफे की स्प्रिंगदार गद्दीयों पर आपस में लिपटी हुई उछल कूद करने लगी. यह देखकर मैं पागल हो गया और उन दोनों के साथ सोफे पर कूद गया. अब हम तीनों एक दूसरे को सोफे पर दबा रहे थे और जो शरीर का हिसा सामने आ रहा था उसे चूम रहे थे. सोनी ने सुमन के स्तनों को मसलना शुरू किया. सुमन अब धेरे धेरे तड़पने लगी. मैंने मौका देख उसे अपनी बाहों में ले लिया. सुमन का जोश ठंडा ना पड़ जाये इसलिए सोनी ने भी उसे उसकी पीठ ले पीछे से अपनी बाहों में जकड रखा था. अब सुमन के स्तनों को मेरी कड़क चाटी ने दबा रखा था तो वहीँ पेचे से सोनी के मजबूत लेकिन गुदगुदे स्तनों ने सुमन की पीठ को दबा रखा था. मैंने सुमन को बेतहाशा चूमकर पूरे नशे में ला दिया. सोनी ने तुरंत ही सुमन के ट्यूब टॉप और पैंटी को उअतारा और मेरी भी ब्रीफ खींच कर उतार दी. सुमन ने सोनी की तरफ देखा और उसे भी अपने कपडे खोलने को कहा. सोनी को मजबूरन करना पड़ा. अब हम दोनों ने सुमन के नंगे जिस्म को आगे पीछे से पूरी तह से हमारे नग्न जिस्मों से दबा दिया था.
सोनी ने अब सोफे की कुर्सी की तरफ चलने को कहा. सोनी सुमन को लेकर उस कुर्सी में धंस गई. सुमन सोनी की गोद में थी. सुमन के बटक्स सोनी के गुदगुदे गुप्तांग पर फिट हो गए थे. अब मैं सुमन के ऊपर आ गया. इस तरह से मैंने सुमन के साथ साथ सोनी को भी दबा दिया था. सुमन अब हर तरह से चार्ज हो गई थी. मैंने मौका देखकर अपना लिंग सुमन के जननांग की तरफ बढ़ा दिया. मेरा गुप्तांग उसके जननांग को छु गया. सुमन के मुंह से एक जोर की आह निकली. मैं अब पूरी तरह सुमन पर झुक गया था. सुमन और मेरे गले लेन से मेरा मुंह सोनी के मुंह के एक दम सामने आ गया था. मैं जब जब सुमन के जननांग की तरफ अपना लिंग धकेलते हुए सुमन को दबाता टब टब मेरा मुंह सोनी के बहुत करीब आ जाता और मेरे गाल उसके गालों को छु जाते. यह स्पर्श हम दोनों को ही अच्छा लगा. अब सोनी ने मुझे चूमना शुरू किया. मैं भी सोनी को चूमने लगा. सुमन मेरे गरदन के नीचे वाले हिस्से को अपने गीले गीले होंठों से चूम रही थी और पूरे आनंद में थी. अचानक से मेरा लिंग पहली बार सुमन के जननांग में प्रवेश कर गया. सुमन के मुंह से एक जोर की आह और चीख निकल गई. मैंने सुमन के होंठ अपने होठों से सी दिए. सोनी ने भी सुमन को अपने उभरे हुए स्तनों से दबाये रखा. सुमन के चेहरे पर अब एक संतोष भरी मुस्कान थी. मैं और सोनी भी बहुत खुश हो गए थे. यह सब सोनी की वजह से हुआ था. हम तीनों कुछ देर तक इसी अवस्था में लेटे रहे और फिर बाद में अलग हो गए. सुमन ने भी सोनी को कहा " अगर तुम ना होती तो शायद मेरी जिन्दगी में ये दिन बहुत ही मुश्किल से आ पाता. " सोनी ने एक विजयी मुस्कान अपने चेहरे पर लाई . सोनी ने मेरी तरफ देखा और बोली " आपका कितना बड़ा काम मैंने किया है मेरा इनाम!!" मैंने सोनी को अपनी तरफ लिया और उसके गालों पर एक किस कर दिया. सुमन ने मेरी तरफ देखा और बनावती गुस्से से बोली " इतने बड़े काम के लिए बस इतना सा इनाम. शर्म आनी चाहिये! चलो सोनी के होंठों पर पहले एक किस करो." मैंने सोनी के होंठों को अपने होंठों से चूमा. अनुभवी सोनी ने मेरा जबरदस्त और बहुत ही तगड़ा चुम्बन लिया. एक लंबा चुम्बन चला. सुमन ने भी फिर मेरे साथ ऐसा ही लंबा चुम्बन किया. अब सुमन ने मुझसे कहा " अब तुम सोनी को कभी भी इससे छोटा इनाम नहीं दोगो." इसके बाद हम सुमन के कहने पर हम तीनों नग्नावस्था में ही आपस में लिपटकर सो गए.
अगले दिन मैं बहुत ज्यादा खुश था और रात का फिर इंतज़ार कर रहा था. मेरे बदन में एक अलग तरह का रोमांच बार बार आ रहा था. मैंने सुमन और सोनी को सरप्राइज देने के हिसाब से उन्हें बिना बताये मैं बहुत जल्दी घर आ गया. उस समय केवल चार बजे थे. मैं चुपचाप घर में दाखिल हुआ. अपने कमरे में जाकर जल्दी नहाया और कपडे बदले. फिर मैं घर के पिछवाड़े आ गया. बादल हो रहे थे और बारिश होने की पूरी संभावना लग रही थी. थोड़ी थोड़ी बूंदा बंदी हो भी रही थी. मैं जैसे ही पिछवाड़े की बालकनी में आया. मैंने देखा की बालकनी के आड़े के छोटे से खुले आँगन में ; जहाँ पर बहुत हरी हरी घास उगी हुई है , सुमन और सोनी एक दूसरे से लिपटे हुए खड़े हैं और छोटी छोटी पानी की बूंदों में भीगने की कोशिश कर रहे हैं.अचानक बारिश तेज हो गई. दोनों बालकनी में लौट आई. मैंने अपने कपडे खोले और केवल अंडर वेअर में बारिश में नहाने चला गया. सुमन और सोनी ने मुझे भीगते हुए देखा तो उन्हों ने भी आपस में इशारा किया और केवल ट्यूब टॉप और पैंटी में मेरे साथ भीगने के लिए आ गई. हम तीनों आपस में लिप्त रहे थे ; एक दूसरे को चूम रहे थे. एक दूजे के बदन पर गिरने वाले पानी को भी हम चूम चूमकर पी रहे थे. धीरे धीरे नशा बढ़ता गया और हम तीनों आपस में लिपट कर नहाने लगे. अब बारिश और भी ज्यादा तेज हो गई थी और तेज हवा के कारण धुंआ धुंआ सा हो रहा था. सुमन ने सोनी को नीचे लेटने को कहा. सोनी के नीचे लेटते ही सुमन उस पर लेट गई. अब वे दोनों एक दूसरे को चूमने लगी थी. उन दोनों के जिस्म जब आपस में लिपटने से रगड़ खा रहे थे तो उन्हें देखकर मेरा सब्र जवाब दे रहा था. सुमन सोनी के ऊपर लेटकर अपने जसम को उससे एकदम सटकर उसे दबाते हुए उसे जगह जगह पर चूम रही थी. हरी हरी घास ; उस पर तेज बरसता हुआ पानी तथा इस बरसते पानी में घास पर आपस में लिपटे हुए दो बहुत ही खूबसरत हसीनाओं के भरे बदन . इन सबे ने मुझे ऐसा मदहोश किया की मैं भी उनके साथ शामिल हो गया.
सुमन और सोनी ने मेरे आते ही मुझे भी अपने साथ ले लिया. हम सभी एक दूजे को चूमने लगे. तेज पानी की बौछारें आग में घी का काम रही थी. बहुत ही काम समय में माहौल एक दम गरम हो गया. मैंने अब सुमन और सोनी के सभी कपडे उतार दिये और खुद भी नंगा हो गया. सोनी ने एक बार फिर सुमन को उत्तेजित करना शुरू किया. आज सुमन बहुत जल्दी उत्तेजित हो गई. मैंने भी तुरंत उसके जननांग में अपना लिंग घुसेड दिया. एक छोटी लेकिन मीठी सिसकी के साथ सुमन आनंदित हो गई. मैंने करीब पंद्रह मिनट तक सुमन को इसी तरह से रखा. सुमन ने अब मेरा लिंग बाहर निकालने को कहा. मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित था. पता नहीं कैसे ; सुंन के जननांग में से लिंग को निकलते ही मैंने सोनी को पकड़कर लिटा दिया और उस पर चढ़ गया. सुमन ये देख बहुत खुश हुई और उसने सोनी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. सोनी ने भी अब मुझे कसकर पकड़ लिया. मैंने धीरे से अपना लिंग सोनी के जननांग की तरफ बढाया. सोनी ने पाने हाथ की मदद से उसे उंदर का रास्ता दिखा दिया, बस अब क्या था मर लिंग सीधे उस गीले और अनुभवी जननांग में पहुँच चुका था. सुमन कभी मुझे तो कभी सोनी को चूम रही थी. मैंने सोनी को भी पंद्रह - बीस मिनट तक ऐसी ही रखा.
क्रमशः....








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