FUN-MAZA-MASTI
मुझे मेरी बीवी से बचाओ --2
गतान्क से आगे............. ......
हमारा वो बगीचा बहुत छोटा था. उसके चारों ओर दो फुट जितनी ऊंची दीवार थी. घर कि चाट का सारा पानी नाली से उसी में गिर रहा था. अब हमारे उस छोटे से बगीचे में इस तेज गिरते पानी और मुसलाधार बारिश की वजह से वो बगीचा तेजी से भरने लगा. बहुत जल्द वि लबालब भर गया. एक बहुत बड़ा बात टब जैसा लगने लगा. हम तीनो उसी में अब सेक्स करने लगे. पानी के अन्दर संभोग का यह अंदाज एक बहुत ही उत्तेजना पैदा करने वाला था. मैंने बारी बारी से सुमन और सोनी के साथ आधे आधे घंटे तक संभोग किया. फिर हम तीनों थक कर उस बरसात के पानी में ऐसी ही पड़े रहे जब तक कि हम में उठकर अपने अपने कपडे पहनने की ताकत नहीं लौट आई. हम तीनो पूरी तरह से संतुष्ट हो गए थे.
अब हम तीनों के दिन और रात बहुत रंगीन हो चुके थे. सुमन अब सोनी और मेरे साथ पूरे जोश के साथ संभोग करने लगी थी. लेकिन अब यह समस्या थी कि आखिर सोनी कब तक रुक सकेगी. हालाँकि मजा मुझे भी सुमन के साथ साथ सोनी के संग संभोग करने पर भी आ रहा था लेकिन गम्भ्र्ता से सोचें तो यह लम्बे समय तक संभव नहीं था.
इसी बीच एक दिन ऐसा मौका आ भी गया. सोनी को खबर मिली कि उसकी मां बहुत बीमार है और उसे देखने के लिए उसे जाना होगा. सुमन तो बहुत ही उदास हो गई. लेकिन सोनी भी मजबूर थी. वो कुछ दिनियो कि छुट्टी लेकर चली गई. पहली रात को तो मैंने कुछ नहीं किया लेकिन अगली रात को सुमन से जब संभोग करना चाह तो सुमन थोड़ी देर के बाद रुक गई.
इसी तरह से तीन दिन और गुज़र गए. एक दिन शाम को जब मैं पहुंचा तो श्व्टा मुझे मेरे घर से निकलती हुई मिली. उसने मुझे देखा और एक शरारत भरी मुस्कराहट के साथ अपने घर में चली गई. सुमन ने मुझे कहा कि उसने श्वेता को सोनी के बारे में सब कुछ बता दिया है. यहाँ तक कि हम तीनों के लगातार हमबिस्तर होने तक को भी बता दिया है. मैं सन्न रह गया. सुमन ने कहा कि श्वेता भी हमारे साथ आने को तैयार है अब तो मुझे आगे तक दूर दूर अँधेरा नजर आने लगा. मैंने सोचा अब इस चीज का अंत बिलकुल नामुमकिन है क्यूंकि सुमन एक बहुत ही हार्डकोंर लेस्बियन है. बिना किसी औरत के ये मेरे साथ संभोग कभी नहीं कर पाएगी. मैंने मजबूर होकर सुमन की बात मां ली. सुमन ने खुश होकर मेरे होंठ बहुत ही जोर से चूस लिए और मुझसे लिपट गई. मैंने भी उसके होंठ चूस लिए. और उसे लेकर बिस्तर पर गिर गया.
अगले दिन रविवार था. नाश्ते के बाद मैं अखबार पढ़ रहा था. मेंसे देखा की सुमन श्वेता के घर के बाहर खड़ी थी. श्वेता बाहर आई. उसने दरवाजा बंद किया और सुमन के साथ हमारे घर में घुस गई. मैं समझ गया कि सुमन श्वेता को लेकर क्यूँ आई है. दोनों आ गई. श्वेता को आज मैंने पहली बार बहुत करीब से देख रहा था. लेकिन करीब एक माह पहले मैंने मेरी ही फैक्ट्री के एक व्यक्ति से श्वेता के बारे में एक बात पाता चली को चिंताजनक भी थी और उसके लिए सहानुभूति भी पैदा करने वाली थी. उस व्यक्ति ने बताया कि श्वेता का पति यानि कि पटेल साहब का लड़का नामर्द है. ये बात श्वेता को शादी के बाद पता चली. श्वेता तभी से बहुत परेशान रहती है. मैं तुरंत समझ गया. तो सुमन से उसने दोस्ती इसीलिए की है जिससे वो अपने शारीरिक सुख को सुमन से प्राप्त कर सके.
मेरे लिए अब ये एक नयी मुसीबत थी. आखिर में मैंने ये मान लिया कि शायद मेरी किस्मत में यही सब लिखा है. इसलिए अब मुझे अच्छा बुरा समझना छोड़कर हर तरह से मजे लूटने चाहिये.
श्वेता और सुमन मेरे सामने थी. मैंने सुमन की तरफ देखा और मुस्कुअराया. सुमन खुश नजर आई. मैं श्वेता के पास गया और उसके पास बैठ गया. मैंने श्वेता के बालों में हाथ फिराया और बोला " मैं जानता हूँ तुम्हारी तकलीफ. श्वेता; मैं और सुमन तुम्हारी हर तकलीफ दूर कर देंगे. तुम्हे कोई कमी महसूस नहीं होने देंगे. तुम अब हमारे साथ हो तो हम सब मुरे मजे से रहेंगे." मैंने श्वेता के गालों को चूम लिया. श्वेता सिहर गई. सुमन उसके पास आई और उसने भी श्वेता के स्तनों पर हाथ रखा और उन्हें दबाना शुरू किया. श्वेता को अब इतने से ही आनंद आने लगा. मैंने श्वेता द्वारा पहनी गई साडी खोलनी शुरू की. वो अब ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी. गहरे भूरे रंग का ब्लाउज और उसी रंग का पेटीकोट में उसका गोरा अंग गज़ब ढा रहा था. वो दुबली पतली थी लेकिन बहुत ही सेक्सी लग रही थी. सुमन ने उसका ब्लाउज उतारा और मैंने उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया. अब वो ब्रा और पैंटी में रह गई थी. सुमन ने उसे अपनी बाहों में ले लिया और मैंने श्वेता को उसके पीछे से बाहों में लेकर उसके कमर के नीचे के हिस्से पर अपना दबाव बढ़ा दिया. श्वेता अब दोनों तरफ से दब गई थी लेकिन उसका चेहरा साफ बता रहा था की उसके अनादर कितनी ठंडक पहुँच चुकी है. हम दोनों उसे लेकर अपने बेडरूम में चले गए. मैंने और सुमन ने भी अपने सारे कपडे उतार दिए. श्वेता को अब हमने पूरा निर्वस्त्र कर दिया था.
सुमन ने श्वेता के पूरे जिस्म पर चुम्बनों की बरसात कर दी. इससे पहले कि श्वेता संभल पाती मैंने उसके पूरे जिस्म पर अपने चुम्बन बरसा दिए. श्वेता तड़पकर बिस्तर पर आ गई. मैंने सुमन को उसके ऊपर सुला दिया. सुमन ने अब अपने गुप्तांग वाले भाग को श्वेता के गुप्तांग के ठीक ऊपर से स्पर्श करवा दिया. जैसे ही सुमन ने अपने गुप्तांग को श्वेता के गुप्तांग के ऊपर थोडा दबाकर रगड़ना शुरू किया; दोनों एक साथ तड़पकर अपने मुंह से सिसकीयाँ निकालने लगी. मैंने अपने हाथ सुमन कि पीठ पर रखे और सुमन को श्वेता के ऊपर दबाते हुए हिलाना जारी रखा. दोनों के लिए यह स्थिति बहुत ही नरम और गरम थी. दोनों को बहुत ही जबरदस्त मजा आने लगा था. सुमन के कारण अब मुझे भी ऐसे खेल मान को भाने लग गए थे.
कुछ देर के बाद सुमन और श्वेता ने एक और नया तरीका अपनाया जो मेरी हालत बहुत ही खराब कर गया. मेरे सारे शरीर में एक साथ हजारों वाट कि बिजलीयाँ दौड़ गई. उन दोनों ने अपनी टांगें फैला दी. दोनों ने अपनी अपनी टाँगे कैंची कि तरह एक दूसरे कि टांगों के बीच में इस तरह डाली कि उन दोनों के जननांग एक दूसरे से बिलकुल सट गए. अब दोनों ही ने आगे पीछे होकर एक दूजे के जननांग को आपस में रगड़ना शुरू किया. उन दोनों के मुंह से कभी आह निकलती तो कभी एक हलकी सी सिसकी. जब थोडा दबाव बढ़ जाता तो एक हल्की चीख भी निकल जाती. मैंने ये पहली बार देखा था. लेकिन इस दृश्य ने मेरी ऐसी हालत बिगाड़ी कि मैं लिख नहीं सकता. मैं सब कुछ भूलकर उन दोनों को देखने लगा. कुछ देर बाद दोनों अलग हुई. मैंने पहले सुमन को सोफे कि कुर्सी पर अधलेटा किया और फिर श्वेता को सुमन के ऊपर उसी तरह अधलेटा कर बैठा दिया. दोनों के का आगे का हिस्सा मेरी तरफ था. अब मैं उन दोनों के ऊपर उलटा लेट गया. अब मेरा लिंग था और सामने पहले श्वेता का जननांग और फिर उसके नीचे सुमन का जननांग. मैंने पहले सुमन के जननांग में अपना लिंग घुसाया लेकिन दबाव श्वेता के बदन पर भी पडा. दोनों को यह बहुत अच्छा लगा. कुछ डेरा बाद मैंने गुप्तांग श्वेता के जननांग में घुसा दिया. श्वेता कि स्थति आज उसी तरह थी जैसी कुछ दिन पहले सुमन की थी. श्वेता भी आज पहली बार किसी के साथ अपने जीवन का संभोग कर रही थी. मैंने बारी बारी से उन दोनों के साथ कई बार संभोग किया. दोनों को एक साथ दबाकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी बहुत ही मखमली अहसास वाले गद्दे पर लेटा हुआ हूँ. दोपहर तक हम तीनों ने अपनी अपनी भूख मिटाई. श्वेता अब अपने घर चली गई क्यूंकि अब उसके घर में कोई भी लौट सकता था.
अगले चार पांच दिन में श्वेता समय निकालकर कई बार आई. जैसे जैसे समय मिलता तो वो कभी सुमन के साथ तो कभी हम दोनों के साथ संभोग करके अपनी प्यास बुझा जाती.
शनिवार के दिन शाम को जब श्वेता के घर कोई नहीं था तो वो हमारे साथ थी. हम तीनो अपने बेडरूम पूर्णतया नग्नावस्था में बिस्तर में एक दूसरे से लिपटे हुए अपने काम में व्यस्त थे कि अचानक से मुख्य दरवाजे के खुलने कि आवाज आई. हम तीनों चौंके और डर गए. फिर मुझे ध्यान आया कि बाहर के दरवाजे के ताले कि तीसरी चाबी तो सोनी के पास थी. मैं निश्चिंत हो गया कि सोनी ही आई होगी. सोनी ही आई थी. वो जैसे ही बेडरूम में आई उसने हमारे साथ साथ श्वेता को देखा तो हैरान हो गई. फिर वो सुमन के पास आई. उसने सुमन के होंठों पर अपने होंठ रखे और बोली " शैतान और भूखी औरत. मेरे बिना तुम इतने दिन भी नहीं रुक सकी. ओई बात नहीं अब मैं आ गई हूँ ना. मैं भी तुम्हारे साथ हो जाती हूँ." सोनी ने फटाफट अपने सारे कपडे उतार दिए और हमारे साथ पलंग पर आ गई. सोनी बोली " मैं आप दोनों के बिना एक सप्ताह पागल हो गई थी. पहले मैंने सोचा कि कभी ना कभी तो मुझे आप लोगों के बिना रहना ही होगा. लेकिन दो दिन बाद ही ऐसा लगने लगा कि जैसे मैं अब आप दोनों के बिना कभी रह नहीं पाऊँगी. हालांकि मेरे पास आप जैसा ही एक और केस आया था और पैसे भी ढेर सारे ऑफर हुए थे. लेकिन आप लोगों का साथ मुझे इतना अच्छा लगा कि मैंने वो ऑफर ठुकरा दिया. मैं जानती हूँ सुमन मेरे बिना एक दिन भी नहीं रह पाएगी. श्वेता का मुझे पता था. लेकिन जब हम यह जगह कभी भी छोड़ेंगे तो श्वेता तो साथ नहीं आ पाएगी. इसलिए मेरा साथ ही हमेशा रहे तो आप दोनों के लिए बहुत अच्छा होगा मेरे लिए तो इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता. इसलिए अब मैंने यह सोच लिया है कि मैं आपके साथ ही रहूंगी." सुमन और मैं यह सुनकर बहुत खुश हुए. मुझे बहुत बड़ी तस्सली पहुंची कि अब सुमन हमेशा सामान्य ही रहेगी. इसी ख़ुशी में मैंने सोनी को अपनी तरफ खींचा और उसे चूमते हुए कहा " अब तुम हम दोनों के लिए एक देवदूत से कम नहीं हो. दुनिया चाहे कुछ भी कह दे लेकिन मैं तुम्हे अब हम दोनों से अलग कभी नहीं होने दूंगा." इतना सुनते ही सोनी ने अपनी टांगें फैलाई और मुझे अपनी तरफ खींचते हुए कहा " आज मुझे मेरा इनाम चाहिये." मैंने तुरंत अपना गुप्तांग उसके गुदगुदे गोल दरवाजे में घुसा दिया.
मैंने बारी बारी से सुमन ; सोनी और श्वेता के साथ दो दो बार संभोग किया. यह खेल काफी देर तक चला. फिर रात होते ही श्वेता चली गई. लेकिन हम तीनो देर रात तक आपस में संभोग करते रहे.
हम तीनों के अलावा श्वेता के भी आने के बाद जिंदगी थोड़ी और मजेदार तथा शामें-रातें और भी रंगीन हो गई थी. सप्ताह में काम स काम दो मौके ऐसे आ जाते जब हम चारों एक साथ हो जाते. हम चारों का साथ लगभग दो माह तक रहा. पटेल साहब रिटायर हो गए और उनका परिवार सूरत चला गया. हम तीनों काफी दिन श्वेता को याद करके उदास रहे. लेकिन रंगीनीयाँ जारी थी.
मणिनगर में सुमन के एक बहुत दूर के रिश्ते का भाई रहने आया. उसका घर हमारे घर से लगभग दस मिनट के पैदल रस्ते पर था. हम तीनो उससे पहली बार मिलने गए. सुमन के भाई और भाभी ने सोनी के बारे में पूछा तो मैंने उसे कह दिया कि सुमन को घबराहट की बीमारी के चलते हमने डॉक्टरों के कहने पर एक चौबीसों घंटे की नर्स रखी हुई है. ये हमारे साथ ही रहती है और हमारे परिवार की एक अभिन्न सदस्या है. सुमन के भाई हरीश की पत्नी मंगला देखने में थोड़ी अजीब लगी. दिखने में अच्छी थी. सांवला रंग.मान को सुहावना लगता चेहरा. लेकिन वो कभी कभी अजीब तरह से हंसती औए बोलते बोलते छुप हो जाती. जब हम रवाना हुए तो हरीश से मैंने अकेले में मंगला के बारे में पुच ही लिया. हरीश ने कहा कि मंगला का दिमाग थोडा काम विकसित है. वो सब समझती है. लेकिन कभी कभार उसका व्यवहार ऐसा हो जाता है. उसने सोनी से कहा " अच्छा हुआ आप मिल गई. अब आप इसका अपने तरीके से इलाज कर दीजिये. मुझ पर बड़ा एहसान होगा आपका.कहिये कब से भेजूं इसे.?" सोनी हक्का बक्का हो गई. ये कैसी उलझन आ गई? अब इसे क्या जवाब दें? अगर सच बतादें तो सारा खेल बिगड़ सकता है. मैंने हरीश से कहा " ये दोपहर में अकेली रहती है. आप ऐसा करो. सवेरे जाते वक्त इन्हें हमारे यहाँ छोड़ते जाओ और शाम को लौटते वक्त अपने साथ ले जाया करो. अकेलेपन से छुटकारा भी मिलेगा और सोनी इनका इलाज भी कर देगी." हरीश बहुत खुश हो गया.
रात को सोनी और सुमन मुझ पर भड़क गए. उन्होंने कहा कि अब हम तीनों ज्यादा आजादी से नहीं रह पायेंगे. मैंने उन्हें समझाया कि एक बार उसे आने दो. हो सकता है दो दिन के बाद हम हरीश से यह कहा देंगे कि सोनी इसका इलाज नहीं कर सकती. बस. मामला वहीँ ख़त्म हो जाएगा. दोनों मेरे जवाब से खुश हो गई.
हरीश अगले दिन ही मंगला को छोड़ गया. मैं उस दिन थोडा जल्दी चला गया था. दोपहर को तीनो कोई फिल्म देख रहे थेतभी फिल्म में एक दृश्य में हीरो हिरोइन को चूमता है और दोनों आपस में लिपटकर पलंग पर इधर उधर लोटना शुरू कर देते हैं. सुमन इसे देख अत्यंत ही उत्तेजित हो गई. उसने सोनी को बाहों में लिया और उसे चूमते हुए पलंग पर ले गई. फिर दोनों उस फिल्म कि तरह इधर उधर लोटने लगी. मंगला ने यह देखा तो वो घबराकर खड़ी हो गई. वो पलंग के पास आकर उन दोनों को देखकर उन्हें अलग करने कि कोशिश करने लगी. सुमन इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उसने मंगला को ढका दे दिया. मंगला सोफे से जाकर टकराई और उस पर गिर गई. वो फिर लौट कर ई. सुमन ने उसे एक और धक्का दिया. अब मंगला रोने लगी. सोनी से रहा नहीं गया. वो मंगला के पास आई. उसने मंगला को अपने गले से लगाया. उसके गालों को थपथपाया और एक छोटा सा चुम्बन उसके गालों का ले लिया. मंगला अपने गालों के गीलेपन को पौंछते हुए मुस्कुराने लगी. सोनी ने उसे सोफे पर बिठा दिया. इसके बाद मंगला कुछ ना बोली.
शाम को उस घटना से मैं परेशां हो गया. अगले दिन हरीश उसे फिर छोड़ गया. मंगला ने आते ही सोनी से अपने गालों को चूमने और सहलाने को कहा. सोनी ने ओस कर दिया. मंगला खुश हो गई. इसके बाद नयी मुसीबत आ गई. उसने सोनी को कल के फ़िल्मी सीन को दोहराने कि जिद की. सुमन और सोनी ने बात बाहर तक ना जाए इसके डर से दोनो ने उसके साथ थोडा सा वैसा ही कर दिया. अब मंगला छुप हो गई. धीरे धीरे मंगला की यह रोज रोज की आदत सुमन और सोनी से सहन नहीं हुई. हमने अगले दिन हरीश से यह बहाना किया की हम तीनों कल कहीं जानेवाले हैं. उस दिन मैंने भी छुट्टी ले ली. दोपहर को हम तीनों काफी दिनों के बाद मिली इस आजादी का पूरा मजा ले रहे थे. हमारा संभोग चल रहा था. तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया. सोनी ने तुरंत कपडे पहने और जाकर दरवाजा खोला. मंगला खड़ी थी., उसने सोनी को भीतर धकेला और अन्दर आकर उससे लिप्त गई और बोली " मुझसे झूठ क्यूँ बोला. चलो अब मुझे चूमो. मुझे चूमो." सोनी ने उसे पीछे धकेलना चाह तो मंगला दौड़ते हुए बेडरूम में आ गई. मैं और सुमन आपस में लिपटे हुए थे और हम पूरी तरह से नग्न थे. वो हमें देख मुस्कुराई. उसने कहा " आप लोग परेशान ना हो. मैं आपको ज्यादा परेशान नहीं करुँगी. मैं पागल नहीं हूँ. एकदम ठीक हूँ और सामान्य हूँ. मैंने जानबूझकर ये नाटक कर रखा है. इसका कारण हरीश खुद है. वो बहुत कमजोर और ठंडा है. महीने भर में बड़ी मुश्किल से एक बार गरम होता है और उस पर भी मुझे अभी तक पूरी तरह से नहीं भेद पाया है. मैं परेशान हूँ. मैं कई बार खुद को नंगा कर बिस्तर पर लोटती हूँ. नंगी होकर खुद की ऊंगलीयाँ अपने जननांग में लेजाने की कोशिश करती हूँ. आप ही अब बताइये मैं क्या करूँ? मैं अगर ऐसे ही जीती रही तो सचमुच में पागल हो जाऊंगी. आपको देखकर मैंने सोचा कि आपसे शायद मुझे कोई मदद मिल जाये. " हम तीनों हैरान हो गए. फिर हम तीनों को मंगला पर दया आ गई. सोनी ने मंगला से कहा " तुम हरीश के सामने अपना नाटक जारी रखो. यहाँ लगातार आती रहो. हम तीनों तुम्हारी पूरी मदद करेंगे. तुम्हें प्यासी नहीं रहने देंगे. तुम्हारी प्यास बुझेगी. " सोनी ने मंगला के तुरत फुरत में सारे कपडे उतार दिए और हमारे साथ पलंग पर सुला लिया. सुमन और सोनी ने मंगला के बदन को सहलाया. खूब मसाज किया. उसके स्तनों को खूब मसल मसलकर उसे मदहोश कर दिया. अब उसे एक दम चरम पर लाने के लिए सुमन उसके ऊपर लेट गई. उसने मंगला के गुप्तांग और जननांग पर अपने गुप्तांग और जननांग से दबाव पैदा कर उसमे जबरदस्त प्यास पैदा कर दी. सोनी ने मुझे उस पर लेट जाने को कहा. मैं उस पर लेट गया. यह जानते हुए कि हरीश अभी तक मंगला के जननांग को पूरी तरह से नहीं भेद सका है. मैंने अपने गुप्तांग को उसके जननांग में पूरे जोर से धकेला. लगभग चार पांच मिनट के बाद मुझे सफलता मिल गई. मंगला कि प्यास आज पहली बार बुझी थी. मैंने मंगला के जननांग को अपने लिंग से करीब एक घंटे तक बंद किये रखा. जब मंगला का सारा जिस्म पसीने से भीग गया और उसके होंठ ठन्डे और गीले हो गए तो मैंने उसके होंठों का एक जोरदार खींच पैदा करनेवाला किस लिया और उसे छोड़ दिया. मंगला के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गई.अब सुमन और सोनी को भी थोड़ी थोड़ी देर के लिए मैंने अपने साथ लिया और संभोग किया.
अगले एक सप्ताह में मैंने मंगला को पांच बार संभोग से शांत और संतुष्ट किया. मंगला कितनी भूखी थी इस बात का अंदाजा एक दिन के संभोग से लगाया जा सकता है जब मंगला ने पूरे दो घंटों तक अपने जननांग में मेरे लिंग को फंसाए रखा और बिलकुल भी ना थकी. सुमन और सोनी उसकी इस शक्ति से हैरान हो गए. मैंने आज तक ऐसा नहीं सुना था. मुझे थकान तो हुई लेकिन बहुत ही ज्यादा मजा आया.
हरीश को अपने ऑफिस के काम से तीन दिनों के लिए इंदौर जाना था. उसने मंगला को हमारे यहाँ छोड़ दिया. शाम को हरीश मंगला को छोड़ते हुए स्टेशन चला गया. रात को मैं अपने फैक्ट्री में अधिक काम के कारण थकान महसूस कर रहा था. मुझे नींद आने लगी. मैं ड्राइंग रूम के सोफे पर ही झपकियाँ लेने लग गया. टी वी चल रहा था. मंगला मेरे करीब आकर उसी सोफे कि कुसरी में फंसकर बैठ गई और मुझे चूमने और बहलाने लगी. मारे थकन के मेरा बदन टूट रहा था इसलिए मैं उत्तेजित नहीं हो पा रहा था. सोनी मेरी हालत देख समझ गई. उसने मंगला को अपनी बाहों में लिया और लम्बे वाले सोफे पर लेट गई. उसने मंगला के कपडे उतार दिए. मैं बैठे बैठे ये सब देखने लगा. अब सोनी ने अपने सारे कपडे निकाले. सोनी और मंगला एक दूसरे से लिपट गई. दोनों का जोर जोर से आवाजों के साथ चूमना शुरू हो गया. मंगला अब सोनी के ऊपर लेट गई और उसने सोनी कि टांगों को फैलाकर अपने जननांग को उसके जननांग से भिड़ा दिया. फिर उन दोनों के जननांगों का आपस में रगड़ना शुरू हुआ जो करीब आधे घंटे तक जारी रहा. इसे देखते देखते मेरी नींद तो उडी ही मेरे लिंग से थोडा रस बाहर आगया.
सुमन नहाकर आ गई. वो बाथरूम से बिना कोई कपड़ा अपने जिस्म पर डाले बाहर आई. सोनी और मंगला को उस हालत में देख वो भी उन दोनों के साथ मिल गई. इन तीनों का यह लेस्बियन सेक्स खेल करीब करीब दो घंटों तक चलता रहा. मैं अब अपनी नींद भूल गया और उन्हें देख देखकर मजे लेता रहा, जब लगातार वे तीनों इस तरह आपस में चूमते ; जिस्मों को मिलाते और अपने जननांगो को आपस में रगड़ते रगड़ते थक गई तो तीनों नीचे बिछे गद्दे पर बिना कपडे पहने सीधी लेट गई. इतनी देर तक बैठे रहने के बाद मेरी थकान काम हो गई लेकिन उत्तेजना बढ़ गई. उन तीनों के बदन पसीने से तर हो चुके थे. उनकी साड़ी ताकत लगभग समाप्त हो चुकी थी. मैंने मौके को ताड़ा और नीचे झुककर उन तीनो के नंगे जिस्मों को निहारने लगा. उनके नन्गे बदन पर पसीने की बूंदें मोतीयों जैसी लग रही थी. सुमन को मैंने सबसे पहले लिया और उसके साथ आधा घन्टा संभोग करते बिताया. मारे थकान के मुझे कोई प्रतिरोध नहीं मिला. जैसा मैंने चाह वैसा करता रहा और सुमन वैसे ही करवाती रही. इसी तरह सोनी और मंगला को भी आधे आधे घंटे तक खूब मेरे लिंग के रस से उनके जननागों को तरबतर किया. फिर हम चारों वहीँ आपस में लिपटकर सो गए.
अगले दिन मैंने फैक्ट्री में बीमारी का बहाना कर तीन दिन की छुट्टी ले ली. फिर इसके बाद शुरू हुआ हम चारों का खेल जो तीनों दिन सवेरे ; दोपहर; शाम और रात भर रुक रूककर जारी रहा. हमने कोई भी तरीका नहीं छोड़ा. हर तरह से अलग अलग पोजीशनों से संभोग किया.
क्रमशः....
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गतान्क से आगे............. ......
हमारा वो बगीचा बहुत छोटा था. उसके चारों ओर दो फुट जितनी ऊंची दीवार थी. घर कि चाट का सारा पानी नाली से उसी में गिर रहा था. अब हमारे उस छोटे से बगीचे में इस तेज गिरते पानी और मुसलाधार बारिश की वजह से वो बगीचा तेजी से भरने लगा. बहुत जल्द वि लबालब भर गया. एक बहुत बड़ा बात टब जैसा लगने लगा. हम तीनो उसी में अब सेक्स करने लगे. पानी के अन्दर संभोग का यह अंदाज एक बहुत ही उत्तेजना पैदा करने वाला था. मैंने बारी बारी से सुमन और सोनी के साथ आधे आधे घंटे तक संभोग किया. फिर हम तीनों थक कर उस बरसात के पानी में ऐसी ही पड़े रहे जब तक कि हम में उठकर अपने अपने कपडे पहनने की ताकत नहीं लौट आई. हम तीनो पूरी तरह से संतुष्ट हो गए थे.
अब हम तीनों के दिन और रात बहुत रंगीन हो चुके थे. सुमन अब सोनी और मेरे साथ पूरे जोश के साथ संभोग करने लगी थी. लेकिन अब यह समस्या थी कि आखिर सोनी कब तक रुक सकेगी. हालाँकि मजा मुझे भी सुमन के साथ साथ सोनी के संग संभोग करने पर भी आ रहा था लेकिन गम्भ्र्ता से सोचें तो यह लम्बे समय तक संभव नहीं था.
इसी बीच एक दिन ऐसा मौका आ भी गया. सोनी को खबर मिली कि उसकी मां बहुत बीमार है और उसे देखने के लिए उसे जाना होगा. सुमन तो बहुत ही उदास हो गई. लेकिन सोनी भी मजबूर थी. वो कुछ दिनियो कि छुट्टी लेकर चली गई. पहली रात को तो मैंने कुछ नहीं किया लेकिन अगली रात को सुमन से जब संभोग करना चाह तो सुमन थोड़ी देर के बाद रुक गई.
इसी तरह से तीन दिन और गुज़र गए. एक दिन शाम को जब मैं पहुंचा तो श्व्टा मुझे मेरे घर से निकलती हुई मिली. उसने मुझे देखा और एक शरारत भरी मुस्कराहट के साथ अपने घर में चली गई. सुमन ने मुझे कहा कि उसने श्वेता को सोनी के बारे में सब कुछ बता दिया है. यहाँ तक कि हम तीनों के लगातार हमबिस्तर होने तक को भी बता दिया है. मैं सन्न रह गया. सुमन ने कहा कि श्वेता भी हमारे साथ आने को तैयार है अब तो मुझे आगे तक दूर दूर अँधेरा नजर आने लगा. मैंने सोचा अब इस चीज का अंत बिलकुल नामुमकिन है क्यूंकि सुमन एक बहुत ही हार्डकोंर लेस्बियन है. बिना किसी औरत के ये मेरे साथ संभोग कभी नहीं कर पाएगी. मैंने मजबूर होकर सुमन की बात मां ली. सुमन ने खुश होकर मेरे होंठ बहुत ही जोर से चूस लिए और मुझसे लिपट गई. मैंने भी उसके होंठ चूस लिए. और उसे लेकर बिस्तर पर गिर गया.
अगले दिन रविवार था. नाश्ते के बाद मैं अखबार पढ़ रहा था. मेंसे देखा की सुमन श्वेता के घर के बाहर खड़ी थी. श्वेता बाहर आई. उसने दरवाजा बंद किया और सुमन के साथ हमारे घर में घुस गई. मैं समझ गया कि सुमन श्वेता को लेकर क्यूँ आई है. दोनों आ गई. श्वेता को आज मैंने पहली बार बहुत करीब से देख रहा था. लेकिन करीब एक माह पहले मैंने मेरी ही फैक्ट्री के एक व्यक्ति से श्वेता के बारे में एक बात पाता चली को चिंताजनक भी थी और उसके लिए सहानुभूति भी पैदा करने वाली थी. उस व्यक्ति ने बताया कि श्वेता का पति यानि कि पटेल साहब का लड़का नामर्द है. ये बात श्वेता को शादी के बाद पता चली. श्वेता तभी से बहुत परेशान रहती है. मैं तुरंत समझ गया. तो सुमन से उसने दोस्ती इसीलिए की है जिससे वो अपने शारीरिक सुख को सुमन से प्राप्त कर सके.
मेरे लिए अब ये एक नयी मुसीबत थी. आखिर में मैंने ये मान लिया कि शायद मेरी किस्मत में यही सब लिखा है. इसलिए अब मुझे अच्छा बुरा समझना छोड़कर हर तरह से मजे लूटने चाहिये.
श्वेता और सुमन मेरे सामने थी. मैंने सुमन की तरफ देखा और मुस्कुअराया. सुमन खुश नजर आई. मैं श्वेता के पास गया और उसके पास बैठ गया. मैंने श्वेता के बालों में हाथ फिराया और बोला " मैं जानता हूँ तुम्हारी तकलीफ. श्वेता; मैं और सुमन तुम्हारी हर तकलीफ दूर कर देंगे. तुम्हे कोई कमी महसूस नहीं होने देंगे. तुम अब हमारे साथ हो तो हम सब मुरे मजे से रहेंगे." मैंने श्वेता के गालों को चूम लिया. श्वेता सिहर गई. सुमन उसके पास आई और उसने भी श्वेता के स्तनों पर हाथ रखा और उन्हें दबाना शुरू किया. श्वेता को अब इतने से ही आनंद आने लगा. मैंने श्वेता द्वारा पहनी गई साडी खोलनी शुरू की. वो अब ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी. गहरे भूरे रंग का ब्लाउज और उसी रंग का पेटीकोट में उसका गोरा अंग गज़ब ढा रहा था. वो दुबली पतली थी लेकिन बहुत ही सेक्सी लग रही थी. सुमन ने उसका ब्लाउज उतारा और मैंने उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया. अब वो ब्रा और पैंटी में रह गई थी. सुमन ने उसे अपनी बाहों में ले लिया और मैंने श्वेता को उसके पीछे से बाहों में लेकर उसके कमर के नीचे के हिस्से पर अपना दबाव बढ़ा दिया. श्वेता अब दोनों तरफ से दब गई थी लेकिन उसका चेहरा साफ बता रहा था की उसके अनादर कितनी ठंडक पहुँच चुकी है. हम दोनों उसे लेकर अपने बेडरूम में चले गए. मैंने और सुमन ने भी अपने सारे कपडे उतार दिए. श्वेता को अब हमने पूरा निर्वस्त्र कर दिया था.
सुमन ने श्वेता के पूरे जिस्म पर चुम्बनों की बरसात कर दी. इससे पहले कि श्वेता संभल पाती मैंने उसके पूरे जिस्म पर अपने चुम्बन बरसा दिए. श्वेता तड़पकर बिस्तर पर आ गई. मैंने सुमन को उसके ऊपर सुला दिया. सुमन ने अब अपने गुप्तांग वाले भाग को श्वेता के गुप्तांग के ठीक ऊपर से स्पर्श करवा दिया. जैसे ही सुमन ने अपने गुप्तांग को श्वेता के गुप्तांग के ऊपर थोडा दबाकर रगड़ना शुरू किया; दोनों एक साथ तड़पकर अपने मुंह से सिसकीयाँ निकालने लगी. मैंने अपने हाथ सुमन कि पीठ पर रखे और सुमन को श्वेता के ऊपर दबाते हुए हिलाना जारी रखा. दोनों के लिए यह स्थिति बहुत ही नरम और गरम थी. दोनों को बहुत ही जबरदस्त मजा आने लगा था. सुमन के कारण अब मुझे भी ऐसे खेल मान को भाने लग गए थे.
कुछ देर के बाद सुमन और श्वेता ने एक और नया तरीका अपनाया जो मेरी हालत बहुत ही खराब कर गया. मेरे सारे शरीर में एक साथ हजारों वाट कि बिजलीयाँ दौड़ गई. उन दोनों ने अपनी टांगें फैला दी. दोनों ने अपनी अपनी टाँगे कैंची कि तरह एक दूसरे कि टांगों के बीच में इस तरह डाली कि उन दोनों के जननांग एक दूसरे से बिलकुल सट गए. अब दोनों ही ने आगे पीछे होकर एक दूजे के जननांग को आपस में रगड़ना शुरू किया. उन दोनों के मुंह से कभी आह निकलती तो कभी एक हलकी सी सिसकी. जब थोडा दबाव बढ़ जाता तो एक हल्की चीख भी निकल जाती. मैंने ये पहली बार देखा था. लेकिन इस दृश्य ने मेरी ऐसी हालत बिगाड़ी कि मैं लिख नहीं सकता. मैं सब कुछ भूलकर उन दोनों को देखने लगा. कुछ देर बाद दोनों अलग हुई. मैंने पहले सुमन को सोफे कि कुर्सी पर अधलेटा किया और फिर श्वेता को सुमन के ऊपर उसी तरह अधलेटा कर बैठा दिया. दोनों के का आगे का हिस्सा मेरी तरफ था. अब मैं उन दोनों के ऊपर उलटा लेट गया. अब मेरा लिंग था और सामने पहले श्वेता का जननांग और फिर उसके नीचे सुमन का जननांग. मैंने पहले सुमन के जननांग में अपना लिंग घुसाया लेकिन दबाव श्वेता के बदन पर भी पडा. दोनों को यह बहुत अच्छा लगा. कुछ डेरा बाद मैंने गुप्तांग श्वेता के जननांग में घुसा दिया. श्वेता कि स्थति आज उसी तरह थी जैसी कुछ दिन पहले सुमन की थी. श्वेता भी आज पहली बार किसी के साथ अपने जीवन का संभोग कर रही थी. मैंने बारी बारी से उन दोनों के साथ कई बार संभोग किया. दोनों को एक साथ दबाकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी बहुत ही मखमली अहसास वाले गद्दे पर लेटा हुआ हूँ. दोपहर तक हम तीनों ने अपनी अपनी भूख मिटाई. श्वेता अब अपने घर चली गई क्यूंकि अब उसके घर में कोई भी लौट सकता था.
अगले चार पांच दिन में श्वेता समय निकालकर कई बार आई. जैसे जैसे समय मिलता तो वो कभी सुमन के साथ तो कभी हम दोनों के साथ संभोग करके अपनी प्यास बुझा जाती.
शनिवार के दिन शाम को जब श्वेता के घर कोई नहीं था तो वो हमारे साथ थी. हम तीनो अपने बेडरूम पूर्णतया नग्नावस्था में बिस्तर में एक दूसरे से लिपटे हुए अपने काम में व्यस्त थे कि अचानक से मुख्य दरवाजे के खुलने कि आवाज आई. हम तीनों चौंके और डर गए. फिर मुझे ध्यान आया कि बाहर के दरवाजे के ताले कि तीसरी चाबी तो सोनी के पास थी. मैं निश्चिंत हो गया कि सोनी ही आई होगी. सोनी ही आई थी. वो जैसे ही बेडरूम में आई उसने हमारे साथ साथ श्वेता को देखा तो हैरान हो गई. फिर वो सुमन के पास आई. उसने सुमन के होंठों पर अपने होंठ रखे और बोली " शैतान और भूखी औरत. मेरे बिना तुम इतने दिन भी नहीं रुक सकी. ओई बात नहीं अब मैं आ गई हूँ ना. मैं भी तुम्हारे साथ हो जाती हूँ." सोनी ने फटाफट अपने सारे कपडे उतार दिए और हमारे साथ पलंग पर आ गई. सोनी बोली " मैं आप दोनों के बिना एक सप्ताह पागल हो गई थी. पहले मैंने सोचा कि कभी ना कभी तो मुझे आप लोगों के बिना रहना ही होगा. लेकिन दो दिन बाद ही ऐसा लगने लगा कि जैसे मैं अब आप दोनों के बिना कभी रह नहीं पाऊँगी. हालांकि मेरे पास आप जैसा ही एक और केस आया था और पैसे भी ढेर सारे ऑफर हुए थे. लेकिन आप लोगों का साथ मुझे इतना अच्छा लगा कि मैंने वो ऑफर ठुकरा दिया. मैं जानती हूँ सुमन मेरे बिना एक दिन भी नहीं रह पाएगी. श्वेता का मुझे पता था. लेकिन जब हम यह जगह कभी भी छोड़ेंगे तो श्वेता तो साथ नहीं आ पाएगी. इसलिए मेरा साथ ही हमेशा रहे तो आप दोनों के लिए बहुत अच्छा होगा मेरे लिए तो इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता. इसलिए अब मैंने यह सोच लिया है कि मैं आपके साथ ही रहूंगी." सुमन और मैं यह सुनकर बहुत खुश हुए. मुझे बहुत बड़ी तस्सली पहुंची कि अब सुमन हमेशा सामान्य ही रहेगी. इसी ख़ुशी में मैंने सोनी को अपनी तरफ खींचा और उसे चूमते हुए कहा " अब तुम हम दोनों के लिए एक देवदूत से कम नहीं हो. दुनिया चाहे कुछ भी कह दे लेकिन मैं तुम्हे अब हम दोनों से अलग कभी नहीं होने दूंगा." इतना सुनते ही सोनी ने अपनी टांगें फैलाई और मुझे अपनी तरफ खींचते हुए कहा " आज मुझे मेरा इनाम चाहिये." मैंने तुरंत अपना गुप्तांग उसके गुदगुदे गोल दरवाजे में घुसा दिया.
मैंने बारी बारी से सुमन ; सोनी और श्वेता के साथ दो दो बार संभोग किया. यह खेल काफी देर तक चला. फिर रात होते ही श्वेता चली गई. लेकिन हम तीनो देर रात तक आपस में संभोग करते रहे.
हम तीनों के अलावा श्वेता के भी आने के बाद जिंदगी थोड़ी और मजेदार तथा शामें-रातें और भी रंगीन हो गई थी. सप्ताह में काम स काम दो मौके ऐसे आ जाते जब हम चारों एक साथ हो जाते. हम चारों का साथ लगभग दो माह तक रहा. पटेल साहब रिटायर हो गए और उनका परिवार सूरत चला गया. हम तीनों काफी दिन श्वेता को याद करके उदास रहे. लेकिन रंगीनीयाँ जारी थी.
मणिनगर में सुमन के एक बहुत दूर के रिश्ते का भाई रहने आया. उसका घर हमारे घर से लगभग दस मिनट के पैदल रस्ते पर था. हम तीनो उससे पहली बार मिलने गए. सुमन के भाई और भाभी ने सोनी के बारे में पूछा तो मैंने उसे कह दिया कि सुमन को घबराहट की बीमारी के चलते हमने डॉक्टरों के कहने पर एक चौबीसों घंटे की नर्स रखी हुई है. ये हमारे साथ ही रहती है और हमारे परिवार की एक अभिन्न सदस्या है. सुमन के भाई हरीश की पत्नी मंगला देखने में थोड़ी अजीब लगी. दिखने में अच्छी थी. सांवला रंग.मान को सुहावना लगता चेहरा. लेकिन वो कभी कभी अजीब तरह से हंसती औए बोलते बोलते छुप हो जाती. जब हम रवाना हुए तो हरीश से मैंने अकेले में मंगला के बारे में पुच ही लिया. हरीश ने कहा कि मंगला का दिमाग थोडा काम विकसित है. वो सब समझती है. लेकिन कभी कभार उसका व्यवहार ऐसा हो जाता है. उसने सोनी से कहा " अच्छा हुआ आप मिल गई. अब आप इसका अपने तरीके से इलाज कर दीजिये. मुझ पर बड़ा एहसान होगा आपका.कहिये कब से भेजूं इसे.?" सोनी हक्का बक्का हो गई. ये कैसी उलझन आ गई? अब इसे क्या जवाब दें? अगर सच बतादें तो सारा खेल बिगड़ सकता है. मैंने हरीश से कहा " ये दोपहर में अकेली रहती है. आप ऐसा करो. सवेरे जाते वक्त इन्हें हमारे यहाँ छोड़ते जाओ और शाम को लौटते वक्त अपने साथ ले जाया करो. अकेलेपन से छुटकारा भी मिलेगा और सोनी इनका इलाज भी कर देगी." हरीश बहुत खुश हो गया.
रात को सोनी और सुमन मुझ पर भड़क गए. उन्होंने कहा कि अब हम तीनों ज्यादा आजादी से नहीं रह पायेंगे. मैंने उन्हें समझाया कि एक बार उसे आने दो. हो सकता है दो दिन के बाद हम हरीश से यह कहा देंगे कि सोनी इसका इलाज नहीं कर सकती. बस. मामला वहीँ ख़त्म हो जाएगा. दोनों मेरे जवाब से खुश हो गई.
हरीश अगले दिन ही मंगला को छोड़ गया. मैं उस दिन थोडा जल्दी चला गया था. दोपहर को तीनो कोई फिल्म देख रहे थेतभी फिल्म में एक दृश्य में हीरो हिरोइन को चूमता है और दोनों आपस में लिपटकर पलंग पर इधर उधर लोटना शुरू कर देते हैं. सुमन इसे देख अत्यंत ही उत्तेजित हो गई. उसने सोनी को बाहों में लिया और उसे चूमते हुए पलंग पर ले गई. फिर दोनों उस फिल्म कि तरह इधर उधर लोटने लगी. मंगला ने यह देखा तो वो घबराकर खड़ी हो गई. वो पलंग के पास आकर उन दोनों को देखकर उन्हें अलग करने कि कोशिश करने लगी. सुमन इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उसने मंगला को ढका दे दिया. मंगला सोफे से जाकर टकराई और उस पर गिर गई. वो फिर लौट कर ई. सुमन ने उसे एक और धक्का दिया. अब मंगला रोने लगी. सोनी से रहा नहीं गया. वो मंगला के पास आई. उसने मंगला को अपने गले से लगाया. उसके गालों को थपथपाया और एक छोटा सा चुम्बन उसके गालों का ले लिया. मंगला अपने गालों के गीलेपन को पौंछते हुए मुस्कुराने लगी. सोनी ने उसे सोफे पर बिठा दिया. इसके बाद मंगला कुछ ना बोली.
शाम को उस घटना से मैं परेशां हो गया. अगले दिन हरीश उसे फिर छोड़ गया. मंगला ने आते ही सोनी से अपने गालों को चूमने और सहलाने को कहा. सोनी ने ओस कर दिया. मंगला खुश हो गई. इसके बाद नयी मुसीबत आ गई. उसने सोनी को कल के फ़िल्मी सीन को दोहराने कि जिद की. सुमन और सोनी ने बात बाहर तक ना जाए इसके डर से दोनो ने उसके साथ थोडा सा वैसा ही कर दिया. अब मंगला छुप हो गई. धीरे धीरे मंगला की यह रोज रोज की आदत सुमन और सोनी से सहन नहीं हुई. हमने अगले दिन हरीश से यह बहाना किया की हम तीनों कल कहीं जानेवाले हैं. उस दिन मैंने भी छुट्टी ले ली. दोपहर को हम तीनों काफी दिनों के बाद मिली इस आजादी का पूरा मजा ले रहे थे. हमारा संभोग चल रहा था. तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया. सोनी ने तुरंत कपडे पहने और जाकर दरवाजा खोला. मंगला खड़ी थी., उसने सोनी को भीतर धकेला और अन्दर आकर उससे लिप्त गई और बोली " मुझसे झूठ क्यूँ बोला. चलो अब मुझे चूमो. मुझे चूमो." सोनी ने उसे पीछे धकेलना चाह तो मंगला दौड़ते हुए बेडरूम में आ गई. मैं और सुमन आपस में लिपटे हुए थे और हम पूरी तरह से नग्न थे. वो हमें देख मुस्कुराई. उसने कहा " आप लोग परेशान ना हो. मैं आपको ज्यादा परेशान नहीं करुँगी. मैं पागल नहीं हूँ. एकदम ठीक हूँ और सामान्य हूँ. मैंने जानबूझकर ये नाटक कर रखा है. इसका कारण हरीश खुद है. वो बहुत कमजोर और ठंडा है. महीने भर में बड़ी मुश्किल से एक बार गरम होता है और उस पर भी मुझे अभी तक पूरी तरह से नहीं भेद पाया है. मैं परेशान हूँ. मैं कई बार खुद को नंगा कर बिस्तर पर लोटती हूँ. नंगी होकर खुद की ऊंगलीयाँ अपने जननांग में लेजाने की कोशिश करती हूँ. आप ही अब बताइये मैं क्या करूँ? मैं अगर ऐसे ही जीती रही तो सचमुच में पागल हो जाऊंगी. आपको देखकर मैंने सोचा कि आपसे शायद मुझे कोई मदद मिल जाये. " हम तीनों हैरान हो गए. फिर हम तीनों को मंगला पर दया आ गई. सोनी ने मंगला से कहा " तुम हरीश के सामने अपना नाटक जारी रखो. यहाँ लगातार आती रहो. हम तीनों तुम्हारी पूरी मदद करेंगे. तुम्हें प्यासी नहीं रहने देंगे. तुम्हारी प्यास बुझेगी. " सोनी ने मंगला के तुरत फुरत में सारे कपडे उतार दिए और हमारे साथ पलंग पर सुला लिया. सुमन और सोनी ने मंगला के बदन को सहलाया. खूब मसाज किया. उसके स्तनों को खूब मसल मसलकर उसे मदहोश कर दिया. अब उसे एक दम चरम पर लाने के लिए सुमन उसके ऊपर लेट गई. उसने मंगला के गुप्तांग और जननांग पर अपने गुप्तांग और जननांग से दबाव पैदा कर उसमे जबरदस्त प्यास पैदा कर दी. सोनी ने मुझे उस पर लेट जाने को कहा. मैं उस पर लेट गया. यह जानते हुए कि हरीश अभी तक मंगला के जननांग को पूरी तरह से नहीं भेद सका है. मैंने अपने गुप्तांग को उसके जननांग में पूरे जोर से धकेला. लगभग चार पांच मिनट के बाद मुझे सफलता मिल गई. मंगला कि प्यास आज पहली बार बुझी थी. मैंने मंगला के जननांग को अपने लिंग से करीब एक घंटे तक बंद किये रखा. जब मंगला का सारा जिस्म पसीने से भीग गया और उसके होंठ ठन्डे और गीले हो गए तो मैंने उसके होंठों का एक जोरदार खींच पैदा करनेवाला किस लिया और उसे छोड़ दिया. मंगला के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गई.अब सुमन और सोनी को भी थोड़ी थोड़ी देर के लिए मैंने अपने साथ लिया और संभोग किया.
अगले एक सप्ताह में मैंने मंगला को पांच बार संभोग से शांत और संतुष्ट किया. मंगला कितनी भूखी थी इस बात का अंदाजा एक दिन के संभोग से लगाया जा सकता है जब मंगला ने पूरे दो घंटों तक अपने जननांग में मेरे लिंग को फंसाए रखा और बिलकुल भी ना थकी. सुमन और सोनी उसकी इस शक्ति से हैरान हो गए. मैंने आज तक ऐसा नहीं सुना था. मुझे थकान तो हुई लेकिन बहुत ही ज्यादा मजा आया.
हरीश को अपने ऑफिस के काम से तीन दिनों के लिए इंदौर जाना था. उसने मंगला को हमारे यहाँ छोड़ दिया. शाम को हरीश मंगला को छोड़ते हुए स्टेशन चला गया. रात को मैं अपने फैक्ट्री में अधिक काम के कारण थकान महसूस कर रहा था. मुझे नींद आने लगी. मैं ड्राइंग रूम के सोफे पर ही झपकियाँ लेने लग गया. टी वी चल रहा था. मंगला मेरे करीब आकर उसी सोफे कि कुसरी में फंसकर बैठ गई और मुझे चूमने और बहलाने लगी. मारे थकन के मेरा बदन टूट रहा था इसलिए मैं उत्तेजित नहीं हो पा रहा था. सोनी मेरी हालत देख समझ गई. उसने मंगला को अपनी बाहों में लिया और लम्बे वाले सोफे पर लेट गई. उसने मंगला के कपडे उतार दिए. मैं बैठे बैठे ये सब देखने लगा. अब सोनी ने अपने सारे कपडे निकाले. सोनी और मंगला एक दूसरे से लिपट गई. दोनों का जोर जोर से आवाजों के साथ चूमना शुरू हो गया. मंगला अब सोनी के ऊपर लेट गई और उसने सोनी कि टांगों को फैलाकर अपने जननांग को उसके जननांग से भिड़ा दिया. फिर उन दोनों के जननांगों का आपस में रगड़ना शुरू हुआ जो करीब आधे घंटे तक जारी रहा. इसे देखते देखते मेरी नींद तो उडी ही मेरे लिंग से थोडा रस बाहर आगया.
सुमन नहाकर आ गई. वो बाथरूम से बिना कोई कपड़ा अपने जिस्म पर डाले बाहर आई. सोनी और मंगला को उस हालत में देख वो भी उन दोनों के साथ मिल गई. इन तीनों का यह लेस्बियन सेक्स खेल करीब करीब दो घंटों तक चलता रहा. मैं अब अपनी नींद भूल गया और उन्हें देख देखकर मजे लेता रहा, जब लगातार वे तीनों इस तरह आपस में चूमते ; जिस्मों को मिलाते और अपने जननांगो को आपस में रगड़ते रगड़ते थक गई तो तीनों नीचे बिछे गद्दे पर बिना कपडे पहने सीधी लेट गई. इतनी देर तक बैठे रहने के बाद मेरी थकान काम हो गई लेकिन उत्तेजना बढ़ गई. उन तीनों के बदन पसीने से तर हो चुके थे. उनकी साड़ी ताकत लगभग समाप्त हो चुकी थी. मैंने मौके को ताड़ा और नीचे झुककर उन तीनो के नंगे जिस्मों को निहारने लगा. उनके नन्गे बदन पर पसीने की बूंदें मोतीयों जैसी लग रही थी. सुमन को मैंने सबसे पहले लिया और उसके साथ आधा घन्टा संभोग करते बिताया. मारे थकान के मुझे कोई प्रतिरोध नहीं मिला. जैसा मैंने चाह वैसा करता रहा और सुमन वैसे ही करवाती रही. इसी तरह सोनी और मंगला को भी आधे आधे घंटे तक खूब मेरे लिंग के रस से उनके जननागों को तरबतर किया. फिर हम चारों वहीँ आपस में लिपटकर सो गए.
अगले दिन मैंने फैक्ट्री में बीमारी का बहाना कर तीन दिन की छुट्टी ले ली. फिर इसके बाद शुरू हुआ हम चारों का खेल जो तीनों दिन सवेरे ; दोपहर; शाम और रात भर रुक रूककर जारी रहा. हमने कोई भी तरीका नहीं छोड़ा. हर तरह से अलग अलग पोजीशनों से संभोग किया.
क्रमशः....
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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