Saturday, May 10, 2014

FUN-MAZA-MASTI चाचा और चाची की साजिश --3

FUN-MAZA-MASTI

 चाचा और चाची की साजिश --3

गतान्क से आगे...................... 
मेरी आँखें बंद थी जब चाचा ने अपना लंड मेरी चूत में घुसाया. पर कल रात जिस तरह धीरे से घुसाया था उसकी जगह आज इतने ज़ोर का धक्का मारा कि एक ही धक्के में उनका लंड मेरी चूत में जड़ तक समा गया. मुझे इतना अच्छा लगा की मेरे मुँह से सिसकारी निकल गयी. 

आज उनका लंड मेरी चूत की उन गहराइयों तक जा रहा था जो कर रात को ना जा सका था. पर आज उनकी चुदाई में एक मकसद था, वो चाची को बताना चाहते थे कि आज भी उनके लंड मे उतनी ही ताक़त है. 

"माला तुम्हे मज़ा आ रहा है ना?" चाचा जी ने अपनी उखड़ती सांसो में पूछा. "अपनी भतीजी की चुदाई तुम्हे अच्छी लग रही है ना?" 

चाची ने कोई जवाब नही दिया. यहाँ तक कि कोई आवाज़ भी नही हुई. मेने अपनी आँख खोली तो देख की चाची ने अपने उपर पड़ी कंबल को हटा दिया था, और उनकी टाँगे फैली हुई थी. उनके चेहरे पर अब गुस्से की जगह उत्तेजना की झलक दिखाई पड़ रही थी. 

चाचजी अब मुझे और ज़ोर से चोद रहे थे. उन्होने ने मुझे थोड़ा से आगे की तरफ धकेलते हुए कहा, "सोनिया अपने चेहरे को बिस्तर के साथ लगा दो." 

उन्होने जैसा कहा मेने किया. मेने अपने शरीर को थोड़ा सा बिस्तर पर टिका अपने चेहरे को पूरा झुका दिया. मेरे चुतताड हवा में उठ गये थे और चाचजी ने अचानक मेरे चुतताड पर एक थप्पड़ रसीद कर दिया. वो धक्के लगाते जा रहे थे साथ ही मेरे चुतताड पर थप्पड़ मार रहे थे. उनके मुँह से गुर्राने की आवाज़ आ रही थी जैसे एक जानवर के मुँह से आती है. 

मेने बेड को हिलते हुए महसूस किया. नज़र उठा देखा तो पाया कि चाची मेरी ओर खिसक रही थी. उनकी टाँगे अभी भी फैली हुई थी. मैं सोच मे पड़ गयी पता नही अब क्या होने वाला है. 

"हां माला आगे बढ़ो" चाचा जी बोले, "आज तुम साबित कर रही हो कि तुम मेरी बीवी हो." 

अचानक चाची ने पहले से भी ज़्यादा ज़ोर से मेरे बालों को पकड़ मेरे चेहरे को उठाया. मेरे चेहरा उनकी चूत से चंद ही दूरी के फ़ासले पर था. मैं समझ गयी कि वो क्या चाहती है. 

"माला जैसे इसकी मा तुम्हारी चूत चूसा करती थी वैसे ही इससे अपनी चूत चुस्वओ?' चाचा जी बोले. 

तब मुझे एहसास हुआ कि ये इन दोनो की मिली भगत है. अब मुझे पता चला कि जब चाची मुझपर इल्ज़ाम लगा रही थी तो अचानक चाचजी कैसे आ गये. ये दोनो ने मिलकर प्लान बनाया था. 

"चूस मेरी चूत को रंडी की औलाद," चाची ने मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबाते हुए कहा. 

इससे पहले कि मैं ना या कुछ और कहती मेरा मुँह उसकी चूत पे जम चुक्का था. उसकी पकड़ मेरे बालों पे इतनी मजबूत थी कि मेरे पास उसकी चूत चाटने के अलावा कोई चारा भी नही था. 

चाचा जी मुझे इतने कस के चोद रहे थे कि उनके थपो की आवाज़ पूरे कमरे मे गूँज रही थी. "हां चाट अपनी चाची की चूत को तब तक तेरे चाचा तेरी चूत का भोसड़ा बना देंगे." 

चाची अपने चुतताड उठा मेरे मुँह पे मार रही थी. मैं हैरान थी कि 45-50 साल की उमर में इन लोगो ने ये सब कब सीखा. इनकी हरकत ठीक ब्लू फिल्म के अदाकारों की तरह थी. 

"ओह सोनिया तुम ठीक अपनी मा की तरह मेरी चूत को चूस रही है. याद है देव इसकी मा इसी तरह मेरी चूत को चॅटा और चूसा करती थी." कहकर चाची ने और ज़ोर से मेरे सिर को अपनी चूत पे दबा दिया. 

"हां डार्लिंग मुझे अच्छी तरह याद है." चाचा ने ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा. 

मैं अब ज़ोर से चाची की चूत को चूस रही थी. में अपनी जीभ को नुकूली कर चाची की चूत मे अंदर तक डाल देती और फिर अंदर बाहर करने लगती. कभी उसकी चूत की पंखुड़ियों को अपने दन्तो में भींच हल्के से काट लेती. मेरी हर हरकत से उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ती. 

अचानक चाचा जी ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया. वो मेरी गांद सहलाते हुए बोले, "सोनिया अब में तुम्हारी गांद मारना चाहता हूँ." 

मेने ना कहना चाहा पर चाची की मेरे बालों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि मैं कुछ ना कर सकी. मेरे पाँव कांप रहे थे इसी ख़याल से कि मेरी गांद का क्या होगा. मुझमे हिम्मत नही थी कि मैं दोनो को रोक पाती. चाचा जी ने अपना लंड मेरी गांद पे थोड़ी देर घिसा और फिर एक ही धक्के मे पूरा पेल दिया. 

दर्द के मारे मेरे मुँह से चीख निकल पड़ी, "ओह मर गयी." चाचा के धक्कों की रफ़्तार बढ़ती गयी और चाची अपनी चूत को मेरे मुँह पे और रगड़ रही थी. 

"माला छोड़ दो अपना पानी इसके मुँह मे." कहकर चाचा और ज़ोर से धक्के लगाने लगे. 

थोड़ी ही देर में चाची ने अपना पानी मेरे मुँह पे छोड़ दिया. मेरी अपनी चाची अपना पानी मेरे मुँह पे छोड़ चुकी थी और मेरे चाचा का दबाव मेरे चुतताड पर बढ़ता जा रहा था. मैं समझ गयी कि उनका भी छूटने वाला है. दो तीन धक्को में चाचा ने अपना वीर्य मेरी गांद में उंड़ेल दिया. 

मैं थोड़ी देर बाद उठी और कमरे के बाहर चली गयी. मैं किचन में काम कर रही थी कि चाचा जी आए और मुझे पीछे से बाहों मे भर लिया. "सोनिया मुझे माफ़ कर दो. हम दोनो ने मिलकर तुम्हे इस जाल में फँसाया. तुम्हारी चाची अच्छी औरत है लेकिन शायद मैं उनकी ज़रूरत को पूरा नही कर सकता." 

"आपका मतलब है कि उन्हे सेक्स की इच्छा तो है लेकिन बिना लंड के?' मेने पूछा. 

"हां कुछ ऐसा ही, क्या तुम समझ सकती हो?" 

"सही बोलूं तो मुझे भी चूत चूसने में मज़ा आ रहा था." 

"तब तो ठीक है आगे और भी मौके आएँगे." कहकर चाचा ने मुझे बाहों में भर लिया. 

और फिर यही होता रहा. हम तीनो हफ्ते में तीन बार बेडरूम में मिलते और एक दूसरे की काम अग्नि को शांत करते. कहावत है कि जो होता है वो उपर वाले की मर्ज़ी से होता है. ना ही मेरे माता पिता की डेत कार आक्सिडेंट में होती और ना ही मैं यहाँ अपने चाचा चाची के पास आती. मैं यहाँ आई अपने चाचा को, अपनी चाची को सुख देने. किसी को अपनी चूत से और किसी को अपनी ज़ुबान से 
दोस्तो कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा 
समाप्त








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