Sunday, May 11, 2014

FUN-MAZA-MASTI मुझे मेरी बीवी से बचाओ --4

FUN-MAZA-MASTI

मुझे मेरी बीवी से बचाओ --4

गतान्क से आगे............. ......
मोनिशा के बाद हम तीनो ( मैं ; सुमन और सोनी ) संभोग में जुट गए. शाम को जब हम काफी मजा ले चुके तो अलग हो गए. करीब सात बजे स्मिता आई. उसने कहा कि आज कोई फैक्ट्री से उस इलाके में गैस लीक हुई इसलिए बाजार आठ बजे से ही खुलेगा. उसे अपनी इच्छा पूरी करवानी थी. दोपहर से शाम तक करीब चार घंटे मैं मोनिशा; सुमन और सोनी के साथ संभोग से पूरी तरह थक गया था. लेकिन स्मिता का गठीला जिस्म भी छोड़ना नहीं चाहता था. सुमन और सोनी रात के खाने की तैय्यारी में थी. मैं स्मिता के साथ सोफे पर ही शुरू हो गया. आधे घंटे तक मैंने स्मिता की प्यास बुझाई. स्मिता लौट गई.
खाने के बाद हम तीनों थोडा टहलने के लिए घर के बाहर निकल गए. जब हम टहलने के बाद घर लौट रहे थे तो मैंने देखा कि अरबिंदो एक बार फिर शायद फैक्ट्री जाने के लिए गाडी में बैठ रहा है. जैसे ही अरबिंदो की कार रवाना हुई मोनिशा हमारे साथ ही हमारे घर में आ गई. मोनिशा मेरे साथ हो गई. हम एक दूजे को केवल चूम रहे थे. इसका कारण दिन भर का संभोग का खेल था. सुमन और सोनी भी आपस में लिपटे इसी तरह चूम रहे थे. हम फिर चारों एक साथ हो गए और चूमने लगे. यह काफी देर तक धीरे धेरे चलता रहा. मोनिशा ने कहा कि अरबिंदो अब सवेरे ही लौटेगा.
जैसे जैसे रात जवान होने लगी वैसे वैसे एक बार फिर हम पर नशा चढ़ने लगा था. हवा बहुत ठंडी चल रही थी मैंने बेडरूम में अँधेरा कर सारी खिड़कियाँ खोल दी. करीब ग्यारह बजे हम बिस्तर में घुस गए. हम सभी ने सारे कपडे उतार दिए. ठंडी हवाओं ने माहौल बहुत सुहावना और मदमस्त कर दिया. सुमन; सोनी और मोनिशा आपस में लिपट लिपट कर इधर उधर एक दूसरे को गिराकर खेलने लगी. बरामदे की नाईट लेम्प की रौशनी में उनके इस खेल से मेरे जिस्म में भी सुरसुरी पैदा कर दी. मैं भी अब उनके साथ शामिल हो गया. मैं उनमें से किसी एक को अपने करीब लेकर नीचे बिस्तर पर धक्का देता. फिर कोई भी दूसरी उस पट गिरकर उसे चूमने लग जाती. जो गिरती वो उस दूसरी से अपने को बचाने का प्रयास करती. यह खेल हमारी दोपहर से शाम तक में हुई थकान को मिटाकर एक नै भूख और उर्जा भर रहा था. करीब साढे बारह बजे थे. बेडरूम कि सदक्वाली खिड़की में से स्मिता की आवाज आई " सुमनजी; दरवाजा खोलिए मैं हूँ स्मिता." हम सभी और भी खुश हो गए स्मिता के भी आने से. सोनी ने दरवाजा खोल स्मिता को भीतर ले लिया. स्मिता को जब मोनिशा के आने का पता चला तो वो बहुत खुश हुई. उसे अरबिंदो के बारे में सब पहले से ही पता था. स्मिता भी अब अपने सभी कपडे उतार हमारे इस खेल में शामिल हो गई. एक बजे के करीब सुमन ने मुझे कसकर पकड़ा और अपने ऊपर लेटने को कहा. मैंने सुमन के साथ संभोग करना शुरू किया. सोनी ने मोनिशा को लिटाकर उसकी टांगें फैलाकर उसके जननांग पर अपना जननांग ले जाकर दोनों को आपस में रगड़ना शुरू किया. मोनिशा के लिए यह पहला अनुभव था. उसे बहुत ही मजा आया. स्मिता ने अब सोनी को लेकर अपने जननांग को उसके जननांग से रगडा. मोनिशा को बहुत मजा आ रहा था. उसे उत्तेजना को काबू में नहीं लाना आया. उसने एक तकिये को अपनी टांगों के बीच में दबाया और इधर उधर लोटने लगी. मैंने सुमन को छोड़ा और मोनिशा को ले लिया और जल्दी ही उसके गुदगुदे गीले कुंवे में मेरा लिंग फंस गया. सुमन आराम कर रही थी जबकि सोनी और स्मिता का खेल जारी था. मोनिशा के बाद अब सोनी मेरी गिरफ्त में थी. सोनी ने अपने जननांग को तीनों के जननांग के साथ बहुत रगडा था इसलिए आज उसका गुदगुदा जननांग आज बहुत ही गीला और रस से लबालब भरा हुआ था. मैंने बहुत तेजी से अपना कड़क हुआ लिंग बहुत ही भीतर तक धकेल दिया. सोनी इस जोर के एक ही झटके में जैसे पस्त हो गई. उसे एक असीम संतोष मिला. स्मिता अब मोनिशा के साथ लिपट गई और दोनों के जननांग आपस में एकदम करीब से सट गए. दोनों के होंठ भी एक दूसरे से सट गए.
हर तरफ रंगीन और रस से भरा हुआ माहौल था. मैंने एक एक कर चारों के गाढे रस से लबालब भरे कुओं को अंतिम गहराई तक दो दो बार भेद चुका था. वे चारों पूरी तरह से पस्त पड़ी थी और मैं भी. देर रात के करीब दो बज गए थे. हम सब को नींद भी आ गई. हम सभी एक ही डबल बेड पर आपस में लिपट कर सोये हुए थे.
सवेरे करीब साढे छह बजे थे कि अचानक रात भर चलती ठंडी हवाएं तेज बारिश में बदल गई. हमारे घर के पिछले वाले बगीचे और कमरे के बीच एक खुला चौक था. मैंने सभी जगा दिया. हम सभी उसी नग्नावस्था में उस चौक में आ गए. बहुत जोरों से बारिश हो रही थी. इस वक्त तक अच्छी खासी रौशनी हो जाती है लेकिन गहरे काले बादलों कि वजह से रौशनी बहुत काम थी. हम उस बारिश में नहाने लगे. एक दूसरे के ऊपर गिरकर बहनेवाले पानी को सभी आपस में चाटने लगे. बहुत मजा आ रहा था. सुमन को ना जाने क्या सुझा कि उसने उस चौक में नाली को एक कपडे बंद कर दिया. घर के ऊपर कि छत का सारा पानी भी उसी चौक में गिर रहा था. बारिश मुसलाधार थी. चौक थोडा नीचा था इसलिए उसके चारों तरफ करीब डेढ़ फुट की दीवार थी. उस चौक में अब पानी भरने लग गया. थोड़ी ही देर में पूरा चौक लबालब भर गया. सोनी और स्मिता उसमे पानी उछालकर नहाने लगे. मैंने सुमन को पाने से लिपटाया और पानी के अन्दर ही सम्भोग करने लगा. अब थोड़ी रौशनी भी हो गई थी. हम सब के नंगे जिस्म साफ़ साफ़ दिख रहे थे. मुझे और सुमन को पानी से भरे तालाब में संभोग करता देख सभी को करने कि इच्छा हो गई. मैंने एक बार फिर सभी के साथ संभोग किया. पानी के अंदर हम सभी को बही गुदगुदी हो रही थी लेकिन मजा उससे कहीं ज्यादा आ रहा था.
सभी के संभोग के बाद हम पानी में घुटनों के बल एक दूसरे से सट कट बैठ गए और बारी बारी से फ्रेंच किस करने लगे. बरसता पानी और उस पर फ्रेंच किस. उत्तेजना हद से ज्यादा बढ़ गई. स्मिता ने सोनी के साथ जो फ्रेंच किस किया वो सबसे ज्यादा हॉट और सेक्सी था. सोनी ने स्मिता के मुंह को पूरा खुलवाया और उसमे अपनी पूरी जीभ अन्दर ले गई और उसे अन्दर फिरा फिरा कर स्मिता की जीभ के गीलेपन को चूसने लगी. स्मिता ने भी यही दोहराया. अब तो सभी ने आपस में यह किस किया. आखिर में हम पाँचों ने एक दूसरे को कास कर पकड़ा. फिर एक साथ हम सभी अपनी अपनी जीभें निकाली और सभी ने आपस में टाच करा दी.
मैंने अब सभी को अलग होकर अपने अपने घर जाने को कहा. एक यादगार रात और दिन बीत गया था.
हम पाँचों का यह खेल लगभग दो महीने तक और चला. एक दिन अरबिंदो ने मोनिशा को मेरे बेडरूम में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. उन दोनों का आपस में बहुत झगडा हुआ. अरबिंदो का मुझसे भी झगड़ा हुआ. धीरे धीरे यह बात उस पूरी कोलोनी में सब को पता चल गई. सभी हम तीनों को घृणा की नजर से देखने लगे. मैंने आनन् फानन में वो नौकरी छोड़ दी. मुझे दो दिन के अन्दर ही दमन में नौकरी मिल गई. मैं सुमन और सोनी के साथ वहां के लिए रवाना होने लगा. स्मिता भरी आँखों से हमसे मिलने आई. उसने कहा " मैं भी जानती हूँ कि जो भी हम करते रहे हैं वो गलत है और अवैध है. लेकिन हम अपनी ख़ुशी के लिए कर रहे हैं. हम आपस में मिलकर आपनी समस्या सुलझा लेते हैं तो इसमें लोगों को कोई आपत्ति क्यूँ. मैं भी आपके साथ ही रहूंगी. मेरी जरूरतें आप तीनों से ही पूरी होनी है. जिस तरह से आप रहोगे मैं भी वैसे ही आपके साथ रह लुंगी. " सुमन ने मुझसे कहा " सोनी जिस तरह मेरे लिए एक मनोवैज्ञानिक बन कर साथ रह रही है उसी तरह स्मिता मेरी आया बनाकर मेरे साथ रह लेगी. नै जगह किसी को कोई शक नहीं होगा." हमने स्मिता को भी अपने साथ ले लिया.
हम आज दमन में आज पिछले चार महीनो से रह रहे हैं. सुमन ; सोनी और स्मिता आपस में मिलजुलकर रहती हैं. कभी कोई झगडा नहीं होता. मैं तीनों को पूरी तरह से संतुष्ट रखता हूँ. उनकी सारी सेक्स कि इच्छाएं पूरी करता हूँ. हमारे घर के सामने समुन्द्र का किनारा है. वहां बड़ा बाज़ार है. उस बाज़ार और हमारे घर के बीच के मसाज पार्लर है. उस पार्लर में दो लडकीयाँ हैं. मिथिल्डा और श्रीशांति. स्मिता ने उन दोनों को फिलहाल तो सुमन ; सोनी के साथ लेस्बियन गँग में शामिल कर लिया है. मैंने उन सभी को कई बार इस लेस्बियन खेल खेलते देखा है. देखें कब उनके साथ संभोग के रिश्ते बनते हैं. आपको बताता रहूंगा.








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