Sunday, May 11, 2014

FUN-MAZA-MASTI मुझे मेरी बीवी से बचाओ --3

FUN-MAZA-MASTI

मुझे मेरी बीवी से बचाओ --3

गतान्क से आगे............. ......
तय कार्यक्रम के अनुसार देर शाम को हरीश लौटने वाला था. आखिर में मैंने एक बार पहले की तरह सेक्स करने का तय किया. सोफे की गद्देदार सीट पर सबसे पहले सोनी को बिठाया. फिर उसके ऊपर सुमन को और फिर आखिर में मंगला को बिहा दिया. सोनी के सेने पर सुमन की पीठ वाला हिसा था. सुमन के सामने वाले हिस्से पर मंगला की पीथ्वाला हिस्सा था. मुझे तीनों के जननांग एक के ऊपर एक ऐसे नजर आ रहे थे जैसे रस से भरे हुए तीन कुंवे मेरे सामने मुझे ललचा रहे हों. मैंने घडी देखी हरीश के आने में करीब दो घंटे बाकी थे. मैंने अपने जिस्म की सारी  ताकत इकठ्ठा की और उन तीनों पर पिल गया, लगातार मैं उन तीनों के जननांग को एक के बाद एक थोड़ी थोड़ी देर के लिए अपने जननांग से भेदता रहा. उन तीनो को जबरदस्त मजा आया. करीब डेढ़ घंटे के बाद मैंने उन्हें छोड़ दिया. ये तीन दिन ऐसे निकले मानो लगातार चौबीसों घन्टे हम चारों रस के समन्दर में  रहे हों.
करीब सात बजे हरीश आ गया. मंगला उसके साथ चली गई. अब धीरे धीरे मंगला का आना काम होता चला गया. हम तीनों इस बात से खुश थे. मंग्ला ने बताया भी कि अब वो हरीश को थोडा अधिक उत्तेजित करने में सफल हो रही है. अब मंगला सप्ताह में एक बार आती और उस दिन हम चारों एक साथ मजा लूटते. सुमन की इच्छा रहती कि मंगला ज्यादा आये. इसका कारण उसका लेस्बियन होना था. मंगला का हम तीनों से करीब चार महीनो का रहा. फिर एक दिन अचानक मेरे फैक्ट्री के मालिक ने वापी के पास एक छोटे कसबे अतुल में उनकी नै लगने वाली फैक्ट्री का काम काज देखने के लिए मुझे वहां जाने के लिए कह दिया. सोनी हमारे साथ आने  के लिए तैयार हो गई.
मंगला को पता चलते ही वो बहुत उदास हो गई. एक सात उसने हरीश के सामने जोर कि घबराहट का नाटक किया और हमारे घर आ गई. हम उसका आना समझ गये. सारे रात हम चारों ने आखिरी बार एक साथ सेक्स का खेल खेला. मंगला ने पूरी रात गज़ब कि हिम्मत दिखलाई और उसने मुझे अपने साथ कुल मिलाकर पांच बार संभोग करने पर मजबूर किया. सुमन और सोनी ने भी उसके जननांग पर अपने जननांग का सफ़ेद गाढ़ा रस इतनी ही बार बहाकर उसकी पूरी प्यास को भरपूर बुझाया. सवेरे सात बजे तक हम जागते रहे और सारा खले चलता रहा. अंत में मैंने मंगला को आखिरी बार अपने साथ लिया. मैंने मंगला को पाने ऊपर सुलाया और उसके जननांग में अपना लिंग घुसकर मंगला को हिलाकर उसके उस हिस्से को गहरा लाल कर दिया. करीब आठ बजे वो एकदम निढाल हो गई तो सुमन और सोनी उसके घर जा उसे छोड़कर आ गए.
हम लोग भरे दिल से बहुत ही मीठी मीठी यादों के साथ अतुल के लिए रवाना हो गए. मंगला सुमन और सोनी के गले लग बहुत रोई. उसकी जिन्दगी हम तीनो के चलते ही संवरी थी. मैं सुमन और सोनी के साथ पूरे रस्ते यही दुआ करते रहे कि वहां हमारा मान लग जाए क्यूंकि अतुल एक बहुत ही छोटा क़स्बा था और केवल केमिकल की फेक्टारीयाँ  थी.

हम अतुल रहने आ गए. हमारा नया घर इंडस्टरीअल क्षेत्र से लगभग दो किलोमीटर दूर बनी एक कोलोनी में था. छोटे छोटे बंगले बने थे. बहुत सुन्दर घर थे. हर घर के आगे और पीछे बगीचा बना था. करीब पचास के आसपास घर थे. इन पचास घरों में से करीब तीस ही भरे थे. बाकी खाली थे. हमारे पड़ोस वाले बंगले में एक बंगाली परिवार था. मियाँ बीवी थे. अरबिंदो और मोनिशा चटर्जी. अरबिंदो बहुत ही शक्की स्वभाव का था. मोनिशा बहुत ही चुलबुली और मिलनसार. अरबिंदो कला और अजीब दिखता था वहीँ मोनिशा किसी हिरोइन से काम नहीं लगती थी. हमारे स्समने वाले घर में रहने वाली एक महिला ने सुमन को बताया की अरबिंदो बहुत पैसे वाला है इसलिए मोनिशा की शादी उसके साथ कर दी. मोनिशा ने भी पैसा देखा था. लेकिन अब उसके शक्की स्वभाव के कारण बहुत परेशान रहती थी और दोनों में अक्सर झगडा होता रहता था. अरबिंदो एक बड़ी कम्पनी में डायरेक्टर था. वो चौबीस घंटे में से लगभग सोलह सत्रह घंटे फैक्ट्री में ही रहता था. कभी कभी आधी रात के बाद आता और सवेरे जल्दी चला जाता.
बहुत जल्दी सुमन और मोनिशा की दोस्ती हो गई. सोनी ने भी मोनिशा से दोस्ती गाँठ ली थी. सुमन ने मोनिशा को सोनी के बारे में बताते हुए कहा कि वो उसकी बचपन कि दोस्त है और एक मनोवैज्ञानिक है. हर समस्या वो सुलझाती है. बहुत जल्दी सुमन; सोनी और मोनिशा की आपस में गहरी दोस्ती हो गई. सुमन के सुझाव पर मैंने एक घर के काम-काज के लिए नौकर रखने की इजाजत दे दी. हम तीनों ज्यादा से ज्यादा वक्त साथ में गुजारना चाहते थे. इसलिए ये फैसला लिया गया. पता चला की उस पूरी कोलोनी में केवल दो कामवालीयां आती है. सुमन ने दोनों से बात की लेकिन बहुत काम लिया होने की वजह से कोई तैयार नहीं हुई.
सोनी ने इधर उधर घूमकर एक कोई और कामवाली का पता लगा लिया. उसे रख लिया. उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो कामवाली है. सोनी ने बताया कि उस औरत की लेडिज ड्रेस की दूकान है. वो यह दूकान शाम के बाद खोलती है. सोनी ने उसे ना जाने कैसे पटाया कि वो घर का काम करने के लिए तैयार हो गई. उस औरत का नाम स्मिता था. वो एक मछुआरन थी. उसकी उम्र चालीस के पार थी लेकिन मछुआरन होने के कारण उसका शरीर जबरदस्त गठा हुआ था. सोनी भी इतनी गठीली होने के बावजूद स्मिता के सामने कमजोर लगती थी. वो मछुआरन तरीकेवाली साड़ी पहनकर आती थी. लौंग वाली. यानी कि धोती कि तरह टांगों में कासी हुई.
पहली बार मैंने जब उसे देखा तो उसके घुटने के नीचे का हिस्सा यानि की उसकी पिंडलीयां ऐसे लगी कि उसे तुरंत अपने दांतों से काट खाऊं. उसका ब्लाउज का गला बहुत नीचे तक कटा हुआ था. उसके दोनों उरोज या स्तन सोनी से भी डेढ़ गुना बड़े थे. उन दोनों के बीच कि रेखा मुझे भीतर तक रोमांचित कर गई. स्मिता दोनों वक्त काम करने आती.
रविवार के दिन के लिए उसने कहा कि वो शाम को नहीं आएगी क्यूंकि उस दिन दुमान जल्दी खोलनी पड़ती है. शाम को चाय के बाद हम तीनों मूड में आ गए. हम तीनों बिस्तर में थे. हमारे बेडरूम कि एक खिड़की सड़क पर खुलती थी. जब हम तीनों आपस में मस्त थे तो उस खिड़की पर लगा पर्दा कभी कभी हवा में उड़ जाता हमें उसका पता ही नहीं था. स्मिता को शायद कुछ समय मिल गया था इसलिए वो काम के लिए करीब छह बजे आ गई. उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन हम ऐसे खोये थे कि आवाज सुनाई ही नहीं दी. उसने तीन चार बार दरवाजा खटखटाया. लेकिन हम आपस में ही मस्त थे. स्मिता को ध्यान में आते ही वो बेडरूम वाली खिड़की की तरफ आ गई. परदा हवा से हिल गया. उसने हम तीनों को हमबिस्तर देख लिया. वो हमें टकटकी लगाकर काफी देर तक देखती रही और मजा लेती रही. फिर शायद उसकी दूकान खुलने का वक्त हो गया तो वो चली गई.
अगले दिन उसने सोनी को सारी बात बता दी. सोनी ने उसे डांट दिया. स्मिता ने सोनी से कह दिया कि वो यह बात कोलोनी में सबको बता देगी. सुमन ने बीच बचाव किया. सुमन ने स्मिता को अगले दिन अपने कमरे में बुलाया. सुमन ने स्मिता को बहुत समझाया. स्मिता ने सुमन से कहा " आप तीनों जो भी कुछ करते हो मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है. मुझे को आपत्ति भी नहीं है. मैं इस दुनिया में अकेली ही हूँ. मेरी शादी नहीं हुई है. अपने काम में इतना व्यस्त रहती हूँ कि औरत के शरीर कुआ भूख होती है मुझे कभी याद ही नहीं आया. सारा दिन घर घर जाकर कपडे बेचना. शाम को दूकान पर बैठना. बस यही जीवन लगता था. मुझे कई मर्द गलत निगाहों से देखते भी थे लेकिन मैंने किसी को भी घास नहीं डाली. हाँ, मैंने इतना जरुर किया कि मैंने अपने कपडे पहनने का ढंग ऐसा कर लिया कि मर्द अधिक से अधिक देखें और केवल ललचाते रहें. लेकिन कल जब आप तीनों को आपस में बिस्तर में देखा तो मेरे लिए यह पहला मौका था जब मैंने किसी औरत और मर्द को ऐसी स्थति में देखा था. आप तीनों को एक साथ बिस्तर में देखकर अचानक मुझे अपने शरीर कि भूख याद आ गई. मैं सारी रात जागती रही और बिस्तर पर इधर उधर लेटती रही. तड़पती रही. बस एक काम कर दो आप. आप तीनों मुझे भी अपने साथ मिला लो. मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी. ये मेरी धमकी नहीं है.मेरी आपसे प्रार्थना है. मुझे भी वो सुख दे दो जो एक औरत को मिलने से उसका जीवन सुखी हो जाता है,." सुमन स्मिता कि बातें सुन भावुक हो गई. सोनी ने भी उसकी बात सुनी थी. दोनों ने आपस में देखा और स्मिता को हाँ कह दिया.
अगले दिन स्मिता ने जब दोपहर का काम ख़त्म किया और जाने लगी तो सोनी ने उसे रोका और बेडरूम में ले गई. सोनी ने उसके सीने से साड़ी का पल्लू हटा दिया. स्मिता का भरा हुआ सीना उसके ज्यादा खुले हुए गोलाकार गले से झाँकने लगा. दोनों स्तनों के बीच कि रेखा सोनी को अन्दर तक भेद गई. सोनी ने उसके दोनों स्तनों को अपने होंठों से चूम लिया. स्मिता का शरीर हिल गया. उसके शरीर को पहली बार इस तरह से छुआ गया था. स्मिता थोडा कसमसाने लगी. सोनी ने उसे पानी बाहों में लेते हुए कहा " आज तुम मेरे और सुमन के साथ आ जाओ. हम दोनों तुम्हें सब सिखा देंगे. कल तुम हम तीनों के साथ हो लेना." स्मिता तैयार हो गई. सोनी ने सुमन के साथ मिलकर स्मिता के साथ कई लेस्बियन क्रियाएं की. स्मिता को बहुत शान्ति और आराम पहुंचा. रात को सुमन और सोनी ने मुझे स्मिता का पूरा किस्सा बयान कर दिया. मेरे लिए अब ये सब कुछ सामान्य तो था ही साथ ही साथ मेरी आदतों में शुमार होता जा रहा था. मैं अब अगले दिन एक नए शिकार के आने कि बेसब्री से राह देखने लगा. कल शनिवार था. शनिवार के दिन मैं थोडा जल्दी आ जाता और हम तीनों थोडा साथ साथ घूम आते. मैं करीब तीन बजे घर पहुँच गया. सुमन ने मुझे बताया कि स्मिता आ चुकी है. इसलिए आज का बाहर जाने का कार्यक्रम रद्द . मैं भी हाँ कर गया.
मैंने जब बेडरूम में झाँका तो सोनी स्मिता के साथ बैठी थी. मैं भी वहीँ आ गया. स्मिता बहुत खुश नजर आ रही थी. उसका सांवला लेकिन अछुता चेहरा बहुत चमक रहा था. हम सभी ने एक दूसरे के कपडे खोल दिए. केवल अंतर्वस्त्र ही रह गए थे. मैंने स्मिता का सीना देखा. मैं अंदाज लगाने लगा कि डी साइज़ की ब्रा है या फिर ई साइज़ की. स्मिता के स्तन सच में बहुत ही ज्यादा बड़े थे. वे उसकी ब्रा में फिट नहीं हो रहे थे. मैं देखता ही रह गया. मैं उसके पास चला गया. अपने हाथों से जब उसके स्तनों को छुआ तो ऐसा लगा जैसे मैं कई इंच मोटे स्पंज के गद्दे पर अपना हाथ रखा हूँ. मैंने उसे अपनी तरफ लिया और अपने से लिपटा लिया. अब मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उसी गद्दे पर उलटा लेट गया हूँ. मैं उसके गालों को चूमने लगा. स्मिता ने भी मेरे गालों को चूमा. फिर मैंने एकदम से ही उसके होंठ जोरों से चूस लिए. उसके होंठ आज तक अछूते थे. मैंने करीब तीन मिनट तक उन होंठों से भरपूर रस खींचा. अब मैंने स्मिता की पैंटी उतार कर उसे बिस्तर पर लिटा दिया. मैं भी अब अपने इन्दर वेअर उतारकर उसके ऊपर लेट गया. मैंने अपना लिंग उसे और उसके स्तनों को चूम चूमकर एकदम कड़ा कर लिया और उसके जननांग की तरफ बढ़ा दिया. थोड़े से संघर्ष के बाद मेरा लिंग उस गीले और रस से भरे हुए कुंवे में था. स्मिता मचल उठी. उसे बहुत ही सुख पहुंचा था. सुमन और सोनी उसके करीब आ गई. वे दोनों रह रहकर उसके होंठ चूमती और उसे और अधिक उत्तेजित करती. जैसे जैसे वो उत्तेजित होती गई मैंने वैसे वैसे और अधिक जोर से अपने लिंग से उसके जननांग पर हमला जैसा बोल दिया. स्मिता गज़ब की मजबूत और हौसले वाली निकली. ये उसका पहला संभोग था लेकिन उसने मेरा पहली बार में ही लगातार एक घंटे तक डटकर मुकाबला किया. स्मिता के बाद मैंने सुमन और सोनी के साथ भी हमेशा की तरह संभोग किया. स्मिता ने इसका भी पूरा मजा उठाया. हमने इसके बाद एक और दौर किया. इसमें मैंने तीनों को लिटाकर एक के बाद एक बारी बारी से अपने लिंग से भेदा.
इस दौर के बाद हम फ्रेश होने के लिए नहाने लगे. स्मिता ने रात को रुकने की इच्छा जाहिर की. मैंने हामी भर दी. पहले हम खाना खाने बैठे. खाने के बाद सोनी का मनपसंद इट एंड किस किया. सभी आइसक्रीम खाते खाते एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ डालकर उसकी आइसक्रीम खाते और खिलाते. इस दौरान स्मिता एक बार बेकाबू हो गई.
रात को भी मैंने तीनों के साथ संभोग के लम्बे लम्बे दो दौर किये. रात को कोई डर नहीं था इसलिए मैं रुक रुक कर लिंग डालता , फिर निकालता और फिर डालता. इससे लम्बे समय तक आनंद मिलता रहा. स्मिता की तो एक तरह से सुहागरात ही मन गई थी. देर रात तीन बजे तक हम संभोग करते रहे. इसके बाद हम एक ही बिस्तर में आपस में पूरी तरह से लिपटकर सो गए. सवेरे स्मिता की आँख जल्दी खुल गई. उसने एक बार फिर मुझसे संभोग की फरमाइश की. मैंने स्मिता के साथ पिछले बारह घंटे के अन्दर चौथी बार संभोग किया था. सुमन और सोनी अभी भी सो रही थी. मैं उनसे लिपटकर सो गया. स्मिता ने कहा कि वो अब जा रही है. स्मिता दरवाजा खोलकर बाहर निकली. उस वक्त सवेरे के आठ बज रहे थे. अरबिंदो ऑफिस जा रहा था. मोनिशा उसे छोड़ने बाहर आई हुई थी. उसने स्मिता को हमारे घर से निकलते देखा तो वो चौंक गई. उसने फिर स्मिता के अस्तव्यस्त कपड़ों और बिखरे बालों तथा चेहरे के भावों से बहुत कुछ अंदाजा लगा लिया. उसने हमारे बेडरूम की खिड़की के पास आकर थोडा जोर लगाकर दरवाजे को अन्दर धकेला तो दरवाजा खुल गया. सवेरे कि रौशनी में मोनिशा ने हम तीनों को पूरी तरह से नग्नावस्था में एक दूसरे से लिपटे हुए देख लिया. उसका दिमाग तेजी से दौड़ने लगा. वो कुछ देर वहीँ पर खड़ी रही. इस बीच सुमन और सोनी भी जग गए थे. मैंने एक बार फिर उन दोनों को पास पास लिताकत उन पर लेटकर संभोग करने लगा. आज रविवार होने कि वजह से छुट्टी थी और मैं पूरी तरह से मजा ले रहा था. मोनिशा ने जब मुझे इस तरह सुमन और सोनी के साथ संभोग करते देखा तो उसका दिल ना जाने क्यूँ बहुत तेज धडकने लग गया. वो काफी देर तक हमें देखती रही फिर चली गई.
सवेरे नाश्ते के बाद मैं बाहर अखबार पढ़ रहा था. मोनिशा मेरे पास आई. हमने एक दूजे को नमस्ते किया. मोनिशा ने बड़ी ही बेशर्मी के साथ मुझसे पूछा " स्मिता रात को आपके सुमन और सोनी के साथ एक ही बिस्तर में सोई थी क्या? मैंने उसे बाहर निकलते देखा तो उसकी हालत से मुझे सब पता चल गया. फिर आपके बेडरूम की खिड़की से मैंने आपको सुमन और सोनी के साथ सब कुछ करते देख लिया. आप तो बहुत ही किस्मत वाले हो. कहाँ तो लोग एक अच्छी रात के लिए तरस जाते हैं और कहाँ एक मर्द तीन तीन औरतों के साथ लगातार बारबार संभोग करता है. मुझे आज ऐसा लग रहा है कि आपकी किस्मत में एक नहीं ; दो नहीं ; तीन नहीं बल्कि चार चार औरतों का एक साथ रात बिताने का सुख लिखा हुआ है. वो चौथी औरत मैं हूँ. मैं सबको बता दूंगी अगर आपने मुझे अपने साथ नहीं सुलाया तो. अरबिंदो बहुत ही ठंडा आदमी है. शादी के तीन साल के बाद भी मैं एक भी रात ऐसी नहीं गुजारी जैसी आप हर रोज गुजारते हो. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. हम सब खूब मौजमस्ती करेंगे. मेरे ख़याल से आपको कोई ऐतराज नहीं होगा.तो क्या हम आज दोपहर से ही यह खेल श्रुरू कर सकते हैं?" एक ही सांस में मोनिशा कि इस बात ने मुझे कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं रखा. सोनी और सुमन ने भी मोनिशा की सारी बात सुन ली थी. सुमन ने बाहर आकर मोनिशा से कहा " हमें कोई ऐतराज नहीं है मोनू. हम तो ऐसे सभी की ज़िन्दगी और सेक्स लाइफ को रंगीन बनाने का काम करते हैं. तुम्हारा दोपहर को जबरदस्त स्वागत किया जाएगा." मोनिशा मुस्कुराते हुए चली गई. मैं सोचने लगा कि अब क्या चार चार को कैसे संभालूँगा.
दोपहर में मोनिशा आ गई. उसने आते ही एक मुस्कान मेरी तरफ फेंकी. कुछ ही देर में मैं सुमन और सोनी को लेकर मोनिशा के साथ बेडरूम में था. मोनिशा की मैंने भरपूर प्यास बुझाई. लगातार दो घंटे तक मेरा लिंग मोनिशा के जननांग के अन्दर बाहर होता रहा. जब मोनिशा ने अपने थक जाने का संकते किया तब सुमन और सोनी की बारी आई. मोनिशा दुबारा मेरे साथ हुई लेकिन तभी उसे अपने घर के बाहर कार के रुकने कि आवाज आई. सोनी ने देखा और बताया कि अरबिंदो आ गया है. उस वक्त मेरा लिंग मोनिशा के जननांग के काफी अन्दर तक गया हुआ था और मोनिशा बहुत आनंद में थी. उसने मुझसे कहा " कुछ देर तक जारी रखो. उसके पास दूसरी चाबी है. मैं थोड़ी देर के बाद चली जाऊंगी." अरबिंदो दरवाजा खोल भीतर चला गया. मोनिशा इसके बाद करीव आधा घंटा और मेरे संग आनंद में रही. उसके बाद कपडे पहनकर अपने घर चली गई.
क्रमशः....








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