Monday, May 24, 2010

ससुर बहु की कहानी-- कंचन--11

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कंचन --11

" हुमें क्या पता रंडियन कैसे चुद्वाति हैं."
" बहू रंडियां चुड़वाते वक़्त कोई शरम नहीं करती और ना ही अपनी
ज़ुबान पे काबू रखती हैं. रंडी सिर्फ़ एक औरत की तरह चुड़वाती
है, मरद से पूरा मज़ा लेती है और मरद को पूरा मज़ा देती है.
बोलो बहू चोदे तुम्हें रंडी की तरह?"
" आआअ...ज़ी, चोदिये हुमें बिल्कुल रंडी बना के चोदिये. ईईीीइसस्सस्स.. .
आज ये चूत आपकी है." कंचन ने अब शरमाने का नाटक बंद कर
दिया और बेशर्मी के साथ चोदने की बातें करने लगी.
" शाबाश बहू ! ये हुई ना बात, आज हम तुम्हारी चूत की प्यास
बुझा के ही दम लेंगे. तब तक चोदेन्गे जब तक तुम्हारा दिल नहीं
भर जाता."
" जी हम कब माना कर रहे हैं. चोदिये ना." कंचन चूतेर
उचकाती हुई बोली
अब रामलाल बहू के नंगे बदन को और मांसल जांघों को सहलाने
लगा. धीरे धीरे कंचन का दर्द दूर होता जा रहा था और उसकी
चूत ने फिर से पानी छ्होरना शुरू कर दिया था. रामलाल बहू के
रसीले होंठों को चूसने लगा और धीरे धीरे अपना लंड बहू की
चूत के अंडर बाहर करने लगा. कंचन को अब बहुत मज़ा आ रहा
था. गधे जैसे लंड से चुड़वाने में औरत को कैसा आनंद मिलता है
आज उसे पता चला. रामलाल के मोटे लॉड ने कंचन की चूत बुरी
तरह चौरी कर रखी थी.
" दर्द हो रहा हो तो बाहर निलाल लें बहू?"
" नहीं नहीं पिता जी हमारी चिंता ना कीजिए बस हुमें इतना चोदिये
की आपके लंड की बरसों की प्यास शांत हो जाए. आपके लंड की प्यास
शांत हो जाए तो हुमें बहुत खुशी होगी." कंचन चूटर उचका के
रामलाल का लॉडा गुपप से अपनी चूत में लेती हुई बोली. रामलाल ने बहू
की टाँगों को और शॉरा किया और हल्के हल्के धक्के लगाने लगा. वो
नहीं चाहता था की उसका मूसल बहू की नाज़ुक चूत को फार दे. एक
बार बहू की चूत को उसके लूंबे मोटे लॉर को झेलने की आदत पर
जाए फिर तो वो खूब जम के छोड़ेगा. कंचन ने ससुरजी की कमर में
टाँगें लपेट ली और अपने पैर की एडिओं से उनके चूटर को धक्का
देने लगी. रामलाल समझ गया की बहू की चूत अब चुदाई के लिए पूरी
तरह तयार है. अब उसने बहू की चूचियाँ पकर के लंड को सुपारे तक
बाहर निकाल के जर तक अंडर पेलना शुरू कर दिया. बहू की चूत
इतनी ज़्यादा गीली थी की पूरे कमरे में बहू की चूत से फ़च
..फ़च... फच...फच. ...फ़च. .फ़च... फ़च.... फ़च.... .और मुँह से
आआआ....ईस्स्स्स. .....आऐईयइ
..आआहह.. .आआआआअ. ..ऊओिईईईई. ..आहह.. अह.ऽह.ऽह ..आह का मादक
संगीत निकल रहा था.
" बहू ये फच..फच. . की आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं?" रामलाल बहू
को चिढ़ाता हुआ बोला.
" इस्स...ऽआअ. .पिताजी ये तो अपने मूसल से पूच्हिए."
" उस बेचारे को क्या पता बहू?"
" उसे नहीं तो किसे पता होगा पिताजी. इसससी.. ज़ालिम कितनी बेरहमी से
हमारी चूत को मार रहा है."
" तुम्हारी चूत भी तो बहुत ज़ालिम है बहू. कितने दिनों से हमारी
नींद हराम कर रखी थी. ऐसी चूत को चोदने में रहम कैसा?
सच इसे तो आज हम फाड़ डालेंगे. " रामलाल ज़ोर ज़ोर से धक्के मारता
हुआ बोला.
" है ! पिताजी, हुमने कब कहा रहम कीजिए. औरत की चूत के साथ
ज़िंदगी में सिर्फ़ एक ही बार रहम किया जाता है और वो भी अगर
चूत कुँवारी हो. उसके बाद अगर रहम किया तो फिर चूत दूसरा लंड
ढूनडने लगती है. औरत की चूत तो बेरहमी से ही चोदी जाती है.
अगर हमारी चूत ने आपको इतना तंग किया है तो फाड़ डालिए ना
इसे. कौन रोक रहा है ?" कंचन तो अब बिल्कुल रॅंडियो की तरह
बातें कर रही थी और हेर धक्के का जबाब अपने चूटर ऊपेर उचका
के दे रही थी. अब तो ससुर और बहू के अंगों का मिलन हवा में हो
रहा था. ससुर जी के धक्के से आधा लंड बहू की चूत में जाता और
बहू के धक्के से बाकी बचा हुआ लंड जर तक बहू की प्यासी चूत
में घुस जाता. कंचन ने शरम हया बिल्कुल छ्होर दी थी और खुल
के चुदवा रही. थी. फ़च.. फच...फच. .. फ़च..
आअ...ऽआअ. ..ईीीइससस्स. ....ऊऊओिमाआ आ..फच. .फ़च... ... . बहू की चूत
से इतना रूस निकल रहा था की उसकी घनी झाँटेन भी चूत के रूस से
चिपचिपा गयी थी. ससुर जी का मूसल जब जर तक बहू रानी की चूत
में जाता और जब बहू और ससुर की झांतों का मिलन हो जाता तो
ससुर जी की झाँटेन भी बहू की चूत के रूस में गीली हो जाती. अब
रामलाल पूरा 11 इंच का लंड बाहर निकाल कर जर तक बहू की चूत
में पेल रहा था. कंचन ने तो सपने में भी नहीं सोचा था की इस
उम्र में भी ससुर जी का लंड अपने दोनो बेटों से ज़्यादा तगरा और सख़्त
होगा और उसकी जवान चूत की ये हालत कर देगा. उसकी चूत के
चारों तरफ चूत के रूस में सनी झांतों का जंगल तो मानो एक
दुलडूल बन गया था. कंचन समज़ गयी की ससुर जी चुदाई की कला
में बहुत माहिर थे. हों भी क्यों ना. ना जाने कितनी लड़कीों को चोद
चुके थे. अब कंचन से रहा नहीं गया और उसने ससुर जी से पूच ही
लिया,
" आआह्ह...इस्स्स. ..आ... पिता जी, सच सच बताइए, आज तक आपने कितनी
लरकिओं को चोदा है ?"
" क्यों बहू तुम ये क्यों पूच रही हो?" रामलाल बहू के विशाल
छूटरों को सहलाता हुआ बोला.
" आप जिस तरह हुमें चोद रहे हैं वैसे तो कोई काम कला में
माहिर आदमी ही चोद सकता है. और अगर आपने ज़िंदगी में सिर्फ़ सासू
मा को ही चोदा होता तो आप काम कला में इतने माहिर नहीं हो सकते
थे."
" क्यों बहुत मज़ा आ रहा है बहू?"
" जी बहुत ! आज तक किसी मरद ने हुमें ऐसे नहीं चोदा."
" कितने मर्दों से चुदवा चुकी हो बहू?"
" धात ! आप तो बारे वो हैं पिताजी. बताइए ना प्लीज़. कितनी औरतों
को चोद चुके हैं?" रामलाल बहू के र्सीले होंठों को चूमता हुआ बोला,
" देखो बहू, तुम्हारी सासू मा तो देती नहीं थी. हमारी जवानी
भी वैसे ही बर्बाद हो रही थी जैसे तुम्हारी जवानी बर्बाद हो
रही है. हुमें लाचार हो कर अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए
खेतों में काम करने वाली औरतों का सहारा लेना परा."
" ःआ.....तो आपने खेतों में काम करने वाली औरतों को चोदा ? कितनों
को चोदा ?" कंचन ज़ोर से चूटर उचका के ससुर जी का लंड अपनी
चूत में पेलते हुए बोली.
" ये ही कोई बीस औरतों को."
" है राम ! बीस को ! उनमे से कुँवारी कितनी थी ?"
" बहू लड़की कुँवारी हो तो इसका मतलब ये नहीं की उसकी चूत भी
कुँवारी है."
"जी हमारा मुतलब है उनमे से कितनों की चूत कुँवारी थी."
" तीन की."
" सच, फाड़ ही डाली होगी आपके इस मूसल ने."
" नहीं बहू ऐसा नहीं है. तुम्हारी सासू मा की जो हालत हुई थी
उसके बाद से हम बहुत संभाल गये थे. लेकिन फिर भी बहुत खून
ख़राबा हो गया था. बेचारी थी भी 17 या 18 साल की. इतना ध्यान
से चोदने के बाद भी तीनों ही बेहोश हो गयी थी."
" उसके बाद से तो उन्होने आपसे कभी नहीं चुदवायि होगी."
" नहीं बहू उनमें से एक ही ऐसी थी जिसे हुमने अगले चार साल तक
खूब चोदा."
" कौन थी वो पिताजी ?" कंचन जानते हुए भी अंजान बन रही थी.
" देखो बहू ये राज़ हम आज सिर्फ़ तुम ही को बता रहे हैं. वो
हमारी साली यानी तुम्हारी सासू मा की सग़ी बेहन थी."
" है राम ! पिताजी आपने अपनी साली तक को नहीं छ्होरा ? चार साल
में तो चौरी हो गयी होगी उसकी चूत." कंचन अपनी चूत से रामलाल
का लंड दबाते हुए बोली.
" उसे तो सिर्फ़ चार साल चोदा था बहू, लेकिन अगर तुम चाहोगी तो
हम तुम्हें ज़िंदगी भर चोद सकते हैं. अपनी जवानी बर्बाद ना करो"
" बर्बाद क्यों होगी हमारी जवानी. अब आपके हवाले जो कर दी है.
ज़िंदगी बेर चोद के तो आप का ये गधे जैसा मूसल हमारी चूत को
कुआँ बना देगा." कंचन बेशर्मी से चूटर उचकती हुई बोली.
ससुर जी को बहू को चोदते अब करीब एक घंटा हो चला था. कंचन
के पसीने छ्छूट गये थे लेकिन रामलाल झरने का नाम ही नहीं ले रहा
था. अचानक रामलाल बहू की चूत से लंड बाहर निकालता हुआ बोला,
" बहू अब हम तुम्हें एक दूसरी मुद्रा में चोदेन्गे."
" वो कैसे पिताजी ?" कंचन रामलाल के मोटे, काले, चूत के रूस में
चमकते हुए लंड का भयंकर रूप देख के काँप उठी.
" तुमने कुत्ते और कुतिया को तो चुदाई करते देखा है?"
"जी.."
" बस कुतिया बन जाओ. हम तुम्हारी चूत कुत्ते की तरह पीच्चे से
चोदेन्गे."
" है राम ! पिता जी...! अपनी बहू को पहले रंडी और अब कुतिया भी बना
डाला."
" कभी कुतिया बन के चुद्वाइ हो बहू?"
" इन्होने तो हुमें औरत की तरह भी नहीं चोदा, कुतिया बनाना तो दूर
की बात है. लेकिन आज हम आपकी कुतिया ज़रूर बनेंगे." ये कह कर
कंचन कुतिया बन गयी. उसने अपनी च्चती बिस्तेर पे टीका दी और घुटनों
के बाल हो कर टाँगें चौरी कर ली और बारे ही मादक धुंग से अपने
विशाल छूटरों को ऊपेर की ओर उचका दिया. इस मुद्रा में बहू के
विशाल छूटरों और मांसल जांघों के बीच में से घनी झांतों के
बीच बहू की फूली हुई चूत सॉफ नज़र आ रही थी. रामलाल के मोटे
लंड की चुदाई के कारण चूत का मुँह खुल गया था और बहुत ही
सूजी हुई सी लग रही थी. बहू के गोरे गोरे मोटे मोटे चूटर और
उनके बीच से झाँकता गुलाबी च्छेद देख कर तो रामलाल के मुँह में
पानी आ गया. रामलाल से ना रहा गया. उसने अपने मूसल का सुपरा बहू
की चूत के खुले हुए मुँह पे टीका दिया और एक ज़बरदस्त धक्का लगा
दिया. चूत इतनी गीली थी की एक ही धक्के में 11 इंच लंबा लंड जर
तक बहू की चूत में समा गया.
" आआआआहह. ...ऊऊओिईईईई म्माआआआआआआआअ ......... . है
राआम्म..पित जी.... मार डाला. इसस्स्स्सस्स.... .....कुत्ते भी इतने ही बेरहम
होते हैं क्या?"
" हां मेरी जान, तभी तो कुतिया को मज़ा आता है."
रामलाल ने अब बहू के चूटर पाकर के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारना शुरू
कर दिया था. बहू भी चूटर उचका उचका के ससुरजी के धक्कों का
जबाब दे रही थी. इस मुद्रा में बहू के मुँह और चूत दोनो ही और
भी ज़्यादा आवाज़ कर रहे थे. बहू अपने चूटर पीच्चे की ओर उचका
उचका के ससुर जी के लंड का स्वागत कर रही थी. बहू की चूत का रूस
अब रामलाल के सांड की तरह लटकते बॉल्स को पूरी तरह गीला कर
चक्का था. कंचन अब तक दो बार झार चुकी थी लेकिन रामलाल झरने
का नाम ही नहीं ले रहा था. कंचन ने अपने चूटर ज़ोर से पीच्चे
की ओर उचका के रामलाल का मूसल जर तक अपनी चूत में पेलते हुए पूचछा,
" पिताजी आप हुमें कुतिया बना के चोद रहे हैं, कहीं चुदाई के बाद
कुत्ते की तरह आपका लंड हमारी चूत में तो नहीं फँसा रह जाएगा.?"
" फँसा रह भी गया तो क्या हो जाएगा बहू ?"
" हुमें तो कुच्छ नहीं पिताजी, लेकिन जुब सासू मा शाम को वापस आ
के आपको हमार ऊपर कुत्ते की तरह चढ़ा हुआ देखेंगी और आपका
मूसल हमारी चूत में फँसा हुआ देखेंगी तो आपके पास क्या जबाब
होगा?"














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