Monday, May 31, 2010

ओओओओःह्ह्ह.. भाभी पार्ट--१

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ओओओओःह्ह्ह.. भाभी पार्ट--१




यह उस समय की बात है जब मैं 20 साल का था. बरे भाई की शादी सिर्फ़ एक साल ही हुआ था. हम दो भाई और एक बहन है जिसकी शादी पहले ही हो गयी है. मेरे माता पिता बहुत ही धार्मिक बिचार के है और हमेशा धर्म करम मे लगे रहते है. मेरे बारे भाई का रेडीमेड कपरो का कारोबार है और अक्सर वो अपने काम के सिलसिले मे दूसरे सहर मे टूर पर जाते रहते हैं. मैं तब लॉ पढ़ रहा था. मेरी भाभी मुझको बहुत चाहती थी, क्यूंकी एक मैं ही तो था जिससे कि भाभी बातचीत कर सकती थी खास कर जब भैया बिज़्नेस के काम से ऑफीस या टूर पर बाहर जाते थी. मेरी भाभी बहुत प्यार से हुमारा ख्याल रखती थे और कभी एह अहसास नही होने देती कि मैं घर पर अकेला हूँ. वो मुझे प्यार से लाला कह लार पुकरती थे और मई हुमेशा उनके पास पास रहना पसंद करता था. वो बहुत ही सुंदर थी, एकदम गोरी चित्ति लंब लुम्बे काले बाल करीब 5’3” और फिगर 36-24-38 था. मई उनकी चुची पर फिदा था और हुमेशा उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहता था.

जब-भी काम करते वक़्त उनका आँचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकती, मैं उनकी चूंची की एक झलक पाने के कोशिश करता था. भाभी को इस-बात का पता था और वो जानबूझ कर मुझे अपनी चूंची का जलवा दिखा देती थी. एह बात तब हुआ जब मेरे भैया काम के सिलसिले मे शादी के बाद पहली बार बाहर गये. मा और बाबूजी पहले से ही तीर्थ यात्रा पर हरिद्वार गये हुए थे और करीब एक महीने बाद लौटने वाले थे. भाभी पर ही घर सम्हालने की ज़िम्मेदारी थे. भाई मुझे घर पर रख कर पढ़ाई करने की सलाह दिए थे, क्यूंकी एग्ज़ॅमिनेशन नज़दीक था और साथ ही मे भाभी को भी अकेलापन महसूस ना हो. अगले दिन सुबह के 10 बजे की बस से भैया चले गये. हम दोनो भैया को बस स्टॅंड तक बीदा करने गये हुए थे.भाभी उस्दीन बहुत ही खुस थी.

जब हुमलोग घर पहुँचे तो उन्होने मुझे अपने कमरे मे बुलाया और कहा कि उन्हे अकेले सोने की आदत नही है और जबतक भैया वापस नही आती, मैं उनके कमरे मे ही सोया करूँ. उन्होने मुझसे अपनी किताब वगेरा वहीं ले कर पढ़ने को कहा. मैं तो ख़ुसी से झूम उठा और फ्टाफ़ट अपनी टेबल और कुछ किताबे उनके कमरे मे पहुँचा दिया. भाभी ने खाना पकाया और हम दोनो साथ साथ खाना खाया. आज वो मुझपर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थी और बार बार किसी ना किसी बहाने से अपनी चूंची का जलवा हमे दिखा रही थी. खाने के बाद भाभी ने हमे फल खाने को दिया. फल देते वक़्त उन्होने मेरा हाथ मसल दिया और बारे ही मादक अदा से मुस्कुरा दिया. मैं शर्मा गया क्यूंकी एह मुस्कान कुछ अलग किस्म की थी और उसमे शरारत झलक रही थी. खाने के बाद मैं तो पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपरे चेंज करने लगी. गर्मी के दिन थे और गर्मी कुछ ज़यादा ही था. मैं अपना शर्ट और बनियान उतार कर केबल पॅंट पहन कर पढ़ने बैठ गया. मेरी टेबल के उपर दीवार पर एक शीशा टंगा था और भाभी को मैं उस शीशे मे देख रहा था. वो मेरी तरफ देख रही थी और अपना कपड़ा उतार रही थे. वो सोच भी नही सकती थे कि मैं उनको शीशे के अंदर से देख रहा था. उन्होने अपना ब्लाउस खोल कर उतार दिया. है क्या मदमस्त चूंची थी. मैं पहली बार लेस वाली ब्रा मे बँधे उनके चुची को देख रहा था. उनकी चूंची काफ़ी बरी बरी थी और वो ब्रा मे समा नही रही थी. आधी चूंची ब्रा के उपर से झलक रही थी.कापरे उतार कर वो बिस्तेर पर चिट लेट गयी और अपने सिने को एक झीनी से चुननी ढक लिया. एक पल के लिए उनके पास जा कर उनकी चूंची को देखु, फिर सोचा एह ठीक नही होगा और मैं पढ़ने लग गया. लेटते ही वो सो गयी और कुछ ही देर मे उनका दुपपत्ता उनके छाती से सरक गया और साँसों से साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसीली चूंची साफ साफ दिख रहा था. रात के बारह बज चुके थे. मैं पढ़ाई बंद किया और बत्ती बुझाने ही वाला था कि भाभी की सुरीली आवाज़ मेरे कानो मे परी, “लाला इन्हा आओ ना.” मैं उनकी तरफ बढ़ा, अब उन्होने अपनी चूंची को फिरसे दुपपत्ते से ढँक लिया था. मैने पूछा, “क्या है भाभी?’ उन्होने कहा, “लाला ज़रा मेरे पास ही लेट जाओ ना, थोरी देर बात करेंगे फिर तुम अपने बिस्तेर पर जा कर सो जाना.”

पहले तो मैं हिचकिचाया लर्किन फिर मान गया. मैं लूँगी पहन कर सोता था और अब मुझको पॅंट पहन कर सोने मे दिक्कत हो रही थी. वो मेरी परेशानी ताड़ गयी और बोली, “कोई बात नही, तुम अपनी पॅंट उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ. शरमाओ मत. आओ ना.” मुझे अपने कान पर यकीन नही हो रहा था. लूँगी पहन कर मैं ने लाइट बंद कर दी और नाइट लॅंप जला कर मैं बिस्तेर पर उनके पास लेट गया. जिस बदन को महीनो से निहारता था आज मैं उसी के पास लेटा हुआ था. भाभी का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था कि उनकी चूंची बिल्कुल नंगी मालूम दे रहा था, क्योंकि थोरा सा हिस्सा ही ब्रा मे छुपा था. क्या हसीन नज़ारा था. तब भाभी बोली, “इतने महीने से अकेले नही सोई हूँ और अब आदत नही है अकेले सोने की.” मैं बोला, “मैं भी कभी किसी के साथ नही सोया.” वो ज़ोर से खिलखिलाई और बोले, “अनुभव ले लेना चाहिए जब भी मौका मिले, बाद मे काम आएगा.” उन्होने मेरा हाथ पकर कर धीरे से खींच कर अपने उभरे हुए चूंची पर रख दिया और मैं कुछ नही बोल पाया लेकिन अपना हाथ उनके चूंची पर रखा रहने दिया. मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, ज़रा सहलाओ ना.” मैने ब्रा के उपर से ही उनकी चूंची को सहलाना शुरू किया. भाभी ने मेरा ब्रा के कप मे घुसा कर सहलाने को कहा और मेरा हाथ ब्रा के अंदर कर दिया. मैने अपना पूरा हाथ अंदर घुसा कर ज़ोर ज़ोर से उनकी चूंची को रगरना शुरू कर दिया. मेरी हथेली की रगर पा कर भाभी के निपल कड़े हो गये. मुलायम माँस के स्पर्श से मुझे बहुत अक्च्छा लग रहा था लेकिन ब्रा के अंदर करके मसल्ने मे मुझे दिक्कत हो रही थी. अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा कर बोली, “लाला यह ब्रा का हूक्क खोल दो और ठीक से सहलाओ.” मैने काँपते हुए हाथों से भाभी की ब्रा की हूक्क खोल दिया और उन्होने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दिया. मेरे दोनो हाथो को अपने नंगी छाती पर ले जा कर वो बोली, “थोरा कस कर दबओ ना.” मैं भी काफ़ी उत्तेजित हो गया और जोश मे आकर उनकी रसीली चूंची से जम कर खेलने लगा.

बरी बरी चूंचिया थी. करी करी चूंची और लूंबे लूंबे निपल. पहली बार मैं किसी औरत की चूंची को च्छू रहा था. भाभी को भी मुझसे अपने चूंची की मालिश करवाने मे मज़ा आ रहा था. मेरा लंड अब करा होने लगा था और अंडरवेर से बाहर निकलने के लिए ज़ोर लगा रहा था. मेरा 7.5” का लंड पूरे जोश मे आ गया था. भाभी की चूंची मसल्ते नसल्ते हुए मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लंड उनकी जाँघो मे रगर मारने लगा था.अचानक वो बोली, “लाला एह मेरी टॅंगो मे क्या चुभ रहा है?” मैने हिम्मत करके जबाब दिया, “एह मेरा हतियार है. तुमने भैया का हतियार तो देखा होगा ना?” हाथ लगा कर देखूं? उन्होने पूछा और मेरे जबाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसको टटोलने लगी. अपनी मुट्ठी मेरे लंड पर कस के बंद कर ली और बोले, “बाप रे, बहुत करक है.” वो मेरी तरफ घूमी और अपना हाथ मेरे अंडरवेर मे घुसा कर मेरे फार-फादाते हुए लंड को एलास्टिक के उपर निकाल लिया. लंड को कस कर पकरे हुए वो अपना हाथ लंड के जर तक ले गयी जिससे सुपरा बाहर आ गया. सुपरे की साइज़ और आकर देख कर वो बहुत हैरान हो गयी. “लाला कहाँ छुपा रखा था इतने दिन” उन्होने पूछा. मैने कहा, “एहीं तो था तुम्हारे सामने लेकिन तुमने ध्यान नही दिया. भाभी बोली, “मुझे क्या पता था कि तुम्हारा इतना बरा होगा, छोटे भाई का लॉरा बरे भाई के लौरे से बरा भी हो सकता है, एह मैं सोच भी नही सकती थी.” मुझे उनकी बिंदास बोल पर अस्चर्य हुआ जब उन्होने “लॉरा” कहा और साथ ही मे बरा मज़ा आया. `

वो मेरे लंड को अपने हाथ मे लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी. फिर भाभी ने अपना पेटिकोट अपनी कमर के उपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जाँघो के बीच ले कर रगर्ने लगी. वो मेरी तरफ कारबट ले कर लेट गयी ताकी मेरे लंड को ठीक़ तरह से पकर सके. उनकी चूंची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हे कस कस कर दबा रहा था. अचानक उन्होने अपनी एक चूंची मेरे मुँह मे थेल्ते हुए कहा, “चूसो इनको मुँह मे लेकर.” मैने इनकी लेफ्ट चूंची अपने मुँह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. थोरे देर के लिए मैने उनकी चूंची को मुँह से निकाला और बोला, “मैं हुमेशा तुम्हारे ब्लाउस मे कसी चूंची को देखता था और हैरान होता था. इनको छूने की बहुत इक्च्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हे मुँह मे लेकर चुसू और इनका रस पीऊँ. पर डरता था पता नही तुम क्या सोचो और कन्ही मुझसे नाराज़ ना हो जाओ. तुम नही जानती भाभी कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है?” “अक्च्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दब्ाओ, चूसो और मज़े लो; मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ जैसा चाहे वैसा ही करो” भाभी ने कहा. फिर कया था, भाभी की हरी झंडी पाकर मैं टूट परा भाभी की चूंची पर. मेरी जीव उनके करे निपल को महसूस कर रही थी. मैने अपनी जीव भाभी के उठे हुए करे निपल पर घुमाया. मैने दोनो अनारो को कस के पकरे हुए था और बारी बारी से उन्हे चूस रहा था.

मैं ऐसे कस कर चूंची को दबा रहा था जैसे की उनका पूरा का पूरा रस निचोर लूँगा. भाभी भी पूरा साथ दे रही थी. उनके मुहह से “ओह! ओह! आह! स, स इसस्स्स्स्स्स्शह ! की आवाज़ निकल रही थी. मुझसे पूरी तरफ से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मारोर रही थी. उन्होने अपनी लेफ्ट टांग को मेरे काग के उपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को को अपनी जाँघो के बीच रख लिया. मुझे उनकी जाँघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ. एह उनकी चूत थी. भाभी ने पॅंटी नही पहन रखी थी और मेरा लंड का सुपरा उनकी झांतो मे घूम रहा था. मेरा सब्र का बाँध टूट रहा था. मैं भाभी से बोला, “भाभी मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे मे नही हूँ, प्लीज़ मुझे बताओ मैं क्या करू?” भाभी बोली, “तुमने कभी किसी लर्की को चोदा है आज तक?” मैने बोला, “नही.” कितने दुख की बात है. कोई भी लर्की इसे देख कर कैसे मना कर सकती है. शादी तक ऐसे ही रहने का इरादा है क्या? मैं क्या बोलता. मेरे मुँह मे कोई शब्द नही थे.

मैं चुपचाप उनके चेहरे को देखते हुए चूंची मसलता रहा. उन्होने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, “अपनी भाभी को चोदोगे?’“का.. का.. क...क्यों नही” मैं बरी मुस्किल से कहा पाया. मेरा गला सूख रहा था. वो बरे मादक अंदाज़ मे मुस्कुरा दी और मेरे लंड को आज़ाद करते हुए बोली, “ठीक है, लगता है अपने अनारी देवर राजा को मुझे ही सब कुछ सिखाना परेगा. पर गुरु दक्षिणा पूरे मन से देना. चलो अपनी चढ़ी उतार कर पूरे नंगे हो जाओ.” मैं पलंग पर से उतेर गया और अपना अंडरवेर उतार दिया. मैं अपने तने हुए लंड को लेकर नंग धरन्ग अपनी भाभी के सामने खरा था. भाभी अपने रसेली होटो को अपने दन्तो मे दबा कर देखती रही और अपने पेटीकोआट का नारा खींच कर ढीला कर दिया. “तुम भी इससे उतार कर नंगी हो जाओ” कहते हुए मैने उनका पेटिकोट को खींचा. भाभी अपने चूतर उपर कर दिया जिससे की पेटिकोट उनकी टांगो उतेर कर अलग हो गया. भाभी अब पूरी तरह नंगी हो कर मेरे सामने चित परी हुई थी. भाभी ने अपनी टाँगो को फैला दिया और मुझे रेशमी झांतो के जंगल के बीच छुपी हुई उनकी रसीले गुलाबी चूत का नज़ारा देखने को मिला. नाइट लॅंप की हल्की रोशनी मे चमकते हुए नगे जिस्म को को देखकर मैं उत्तेजित हो गया और मेरा लंड मारे खुशी के झूमने लगा. भाभी ने अब मुझसे अपने उपर चढ़ने को कहा. मैं तुरंत उनके उपर लेट गया और उनकी चूंची को दबाते हुए उनके रसीले होन्ट चूसने लगा. भाभी ने भी मुझे कस कर अपने आलिंगन मे कस कर जकर लिया और चुम्मा का जवाब देते हुए मेरे मुँह मे अपनी जीव ठेल दिया. हाई क्या स्वाड्िस्ट और रसीली जीव थी. मैं भी उनकी जीव को ज़ोर शोर से चूसने लगा. हुमारा चुम्मा पहले प्यार के साथ हल्के मे था और फिर पूरे जोश के साथ.कुछ देर तक तो हम ऐसे ही चिपके रहे, फिर मैं अपने होन्ट भाभी की नाज़ुक गाल्लों पर रगर रगर कर चूमने लगा.

फिर भाभी ने मेरी पीठ पर से हाथ उपर ला कर मेरा सर पकर लिया और उसे नीचे की तरफ ठेला. मैं अपने होंठ उनके होंटो से उनकी थोड़ी पर लाया और कंधो को चूमता हुआ चूंची पर पहुँचा. मैं एक बार फिर उनकी चूंची को मसलता हुआ और खेलता हुआ काटने और चूसने लगा. उन्होने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकाल लिया और हुमारी टाँगे एक-दूसरे से दूर हो गये. अपने दाएँ हाथ से वो मेरा लंड पकर कर उसे मुट्ठी मे बाँध कर सहलाने लगी और अपने बाएँ हाथ से मेरा दाहिना हाथ पकर कर अपनी टाँगो के बीच ले गयी. जैसे ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँचा उन्होने अपनी चूत के दाने को उपर से रगर दिया. समझदार को इशारा काफ़ी था. मैं उनके चूंची को चूस्ता हुआ उनकी चूत को रगड़ने लगा. “लाला अपनी उंगली अंदर डालो ना?” कहती हुए भाभी ने मेरा उंगली अपनी चूत के मुँह पर दबा दिया. मैने अपनी उंगली उनकी चूत के दरार मे घुसा दिया और वो पूरी तरह अंदर चली गयी. जैसे जैसे मैने उनकी चूत के अंदर म्यूवाना करता मेरा मज़ा बढ़ता गया. जैसे ही मेरा उंगली उनके चूत के दाने से टकराया उन्होने ज़ोर से सिसकारी ले कर अपनी जाँघो को कस कर बंद कर लिया और चूतर उठा उठा कर मेरे हाथ को चोदने लगी. उनकी चूत से पानी बह रहा था. थोरी देर बाद तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैने अपनी उंगली उनकी चूत से बाहर निकाल लिया और सीधा हो कर उनके उपर लेट गया. भाभी ने अपनी टाँगे फैला दी और मेरे फरफ़रते हुए लंड को पाकर कर सुपरा चूत के मुहाने पर रख लिया. उनकी झांतो का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था, फिर भाभी ने मुझसे बोली, “अब अपना लॉरा मेरी बुर मे घुसाओ, प्यार से घुसेरना नहीतो मुझे दर्द होगा, अहह!” मैं नौसीखिया था इसीलिए शुरू शुरू मे मुझे अपना लंड उनकी टाइट चूत मे घुसाने मे काफ़ी परेशानी हुए. मैं जब ज़ोर लगा कर लंड अंदर ठेलना चाहा तो उन्हे दर्द भी हुआ. लेकिन पहले से उंगली से छुड़वा कर उनकी चूत काफ़ी गीली हो गयी थी. भाभी भी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा एक ही धक्के मे सुपरा अंदर चला गया. इससे पहले की भाभी संभले या आसान बदले, मैने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड माखन जैसी चूत की जन्नत मे दाखिल हो गया. भाभी चिल्लइ, “उईईइ ईईईईईई ईईईई माआआ उहुहुहह ओह संजूऊ, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नही, हाई! बरा जलीम है तुम्हारा लंड. मार ही डाला मुझे तुमने देवर राजा.” भाभी को काफ़ी दर्द हो रहा लगता है.

पहेली बार जो इतना मोटा और लूंबा लंड उनके बर मे घुसा था. मैं अपना लंड उनकी चूत मे घुसा कर चुप चाप परा था. भाभी की चूत फरक रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौरे को मसल रही थी. उनकी उठी उठी चूंचिया काफ़ी तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मैने हाथ बढ़ा कर दोनो चूंची को पकर लिया और मुँह मे लेकर चूसने लगा. भाभी को कुछ राहत मिली और उन्होने कमर हिलानी शुरू कर दी.भाभी मुझसे बोली, “लाला शुरू करो, चोदो मुझे. लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्ज्ज्जा,” और अपनी गंद हिलाने लगी. मैं ठहरा अनारी. समझ नही पाया कि कैसे शुरू करूँ. पहले अपनी कमर उपर किया तो लंड चूत से बाहर आ गया. फिर जब नीचे किया तो ठीक निशाने पर नही बैठा और भाभी की चूत को रगारता हुआ नीचे फिसल कर गंद मे जाकर फँस गया. मैने दो तीन धक्के लगाया पर लंड चूत मे वापस जाने बजाई फिसल कर गंद मे चला जाता. भाभी से रहा नही गया और तिलमिला कर कर ताना देती हुई बोली, “ अनारी का चोदना और चूत का सत्यानाश, अरे मेरे भोले राजा ज़रा ठीक से निशाना लगा कर ठेलो नही तो चूत के उपर लॉरा रगर रगर कर झार जाऊगे.” मैं बोला, “भाभी अपने इस अनारी देवर को कुछ सिख़ाओ, जिंदगी भर तुम्हे गुरु मनुगा और लंड की दक्षिणा दूँगा.”``

भाभी लूंबी सांस लेती हुए बोली, “हाँ लाला, मुझे ही कुछ करना होगा नही तो देवरानी आकर कोसेगी कि तुम्हे कुछ नही सिखाया.” मेरा हाथ अपनी चूंची पर से हटाया और मेरे लंड पर रखती हुई बोले, “इससे पकर कर मेरी चूत के मुँह पर रखहो और लगाओ धक्का ज़ोर से.” मैने वैसे ही किया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया. फिर भाभी बोली, “अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन पूरा नही. सुपरा अंदर ही रहने देना और फिर दोबारा पूरा लंड अंदर पेल देना, बस इसी तरह से करते रहो.” मैने वैसे ही करना शुरू किया और मेरा लंड धीरे धीरे उनकी चूत मे अंदर-बाहर होने लगा. फिर भाभी ने स्पीड बढ़ा कर करने को कहा. मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा. भाभी को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी. लेकिन ज़यादा स्पीड होने से बार बार मेरा लंड बाहर निकल जाता. इससे चुदाई का सिलसिला टूट जाता. आख़िर भाभी से रहा नही गया और करवट ले कर मुझे अपने उपर से उतार दिया और मुझको चित लेटा कर मेरे उपर चढ़ गयी. अपनी जाँघो को फैला कर बगल कर के अपने गद्देदार चूतर रखकर बैठ गयी. उनकी चूत मेरे लंड पर थी और हाथ मेरी कमर को पकरे हुए थी और बोली, “मैं दिखाती हूँ की कैसे चोद्ते है,” और मेरे उपर लेट कर धक्का लगाया. मेरा लंड घाप से चूत के अंदर दाखिल हो गया. भाभी ने अपनी रसीली चूंची मेरी छाती पर रगर्ते हुए अपने गुलाबी होन्ट मेरे होन्ट पर रख दिया और मेरे मुँह मे जीव थेल दिया. फिर भाभी ने मज़े से कमर हिला हिला कर शॉट लगाना शुरू किया. बारे कस कस कर शॉट लगा रही थी मेरी प्यारी भाभी. चूत मेरे लंड को अपने मे समाए हुए तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुँच गया हूँ. अब पोज़िशन उल्टी हो गयी थी. भाभी मानो मर्द थी जो की अपनी माशुका को कस कस कर चोद रहा था. जैसे जैसे भाभी की मस्ती बढ़ रही थी उनके शॉट भी तेज़ होते जा रहे थे. अब भाभी मेरे उपर मेरे कंधो को पकर कर घुटने के बल बैठ गयी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिला कर लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर लेने लगी. उनका सारा बदन हिल रहा था और साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी. भाभी की चूंचिया तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मुझसे रहा नही गया और हाथ बढ़ा कर दोनो चूंची को पकर लिया और ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा. भाभी एक साधे हुए खिलाड़ी की तरह कमान अपने हाथो मे लिए हुए थी और कस कस कर शॉट लगा रही थी.
क्रमशः....................


OOOOHhhh.. Bhabhi

Yeh us samay ki bat hai jab mai 20 sal ka tha. Bare bhai ki shadi sirf ek sal hi hua tha. Hum do bhai aur ek bahan hai jiski shadi pahake hi ho gayee hai. Mere mata pita bahut hi dharmik bichar ke hai aur hamesha dharma karam me lage rahate hai. Mere bare bhai ka readymade kapro ka karobar hai aur aksar wo apne kam ke silsile me dusre sahar me tour par jate rahate hain. Mai tab law parh raha tha. Meri bhabhi mujhko bahut chahatee thee, kaunki ek mai hi to tha jise ki bhabhi se batcheet kar saktee thee khas kar jab bhaia business ke kam se office ya tour par bahar jate thee. Meri bhabhi bahut pyar se humara khyal rakhtee the aur khabhi eh ahsas nahee hone deti ki mai ghar par akela hun. Wo mujhe pyar se lala kah lar pukartee the aur mai humesha unke pas pas rahana pasand karta tha. Wo bahut hi sundar thee, ekdam gori chitti lumbe lumbe kale bal kareeb 5’3” aur figure 36-24-38 tha. Mai unkee chuchee par phida tha aur humesha unkee ek jhalak pane ke liye betab rahata tha.

Jab-bhi kam karte waqt unka anchal unki chati par se phisal kar neeche girta tha ya wo neeche jhuktee, mai unkee chunchee ki ek jhalak pane ke koshish karta tha. Bhabhi ko is-bat ka pata tha aur wo janbujh kar mujhe apnee chunchee ka jalava dikha detee thee. Eh bat tab hua jab mere bhaiya kam ke silsile me shadi ke bad pahalee bar bahar gaye. Ma aur babuji pahale se hi tirth yatra par haridwar gaye hue the aur kareeb ek mahine bad lautne wale the. Bhabhi par hi ghar samhalnee ki jimmedaree the. Bahia mujhe ghar par rakh kar parahi karne ki salah di, kyunki examination najdeek tha aur sath hi me bhabhi ko bhi akelapan mahasus na ho. Agle din subah ke 10 baje ki bus se bhaia chale gaye. Hum dono bhaia ko bus stand tak bida karne gaye hue the.Bhabhi usdin bahut hi khus thee.

Jab humlog ghar pahunche to unhone mujhe apne kamare me bulaya aur kaha ki unhe akele sone ki adat nahee hai aur jabtak bhaiya wapas nahee atee, mai unke kamare me hi soya karun. Unhone mujhse apni kitab vagera waheen le kar parhne ko kaha. Mai to khusi se jhum utha aur phtaphat apni table aur kuch kitabe unke kamare me pahuncha diya. Bhabhi ne khana pakaya aur hum dono sath sath khana khaya. Aaj wo mujhpar kuch jyada hi meharban thee aur bar bar kisi na kisi bahane se apni chunchee ka jawa hume dikha rahee thee. Khane ke bad bhabhi ne hume phal khane ko diya. Phal dete waqt unhone mera hath masal diya aur bare hi madak ada se muskura diya. Mai sharma gaya kyunki eh muskan kuch alag kism ki thee aur usme shararat jhalak rahee thee. Khane ke bad mai to parhne baith gaya aur wo apne kapare change karne lagee. Garmi ke din the aur garmi kuch jayada hi tha. Mai apna shirt aur baniyan utar kar kebal pant pahan kar parhne baith gaya. Meri table ke upar diwar par ek shisha tanga tha aur bhabhi ko mai us shishe me dekh raha tha. Wo meri taraf dekh rahee thee aur apna kapra utar rahee the. Wo soch bhi nahe saktee the ki mai unko shishe ke andar se dekh raha tha. Unhone apna blouse khol kar utar diya. Hai kya madmast chunchee thee. Mai pahalee bar lace wali bra me bandhe unke chuchee ko dekh raha tha. Unki chunchee kahi bari bari thee aur wo bra me sama nahe rahee thee. Adhi chunchee bra ke upar se jhalak rahee thee.Kapre utar kar wo bister par chit let gayee aur apne sine me ek jhinee se chunnee dhak liya. Ek pal ke liye unke pas ja kar unki chunchee ko dekhu, phir socha eh theek nahee hoga aur mai parhne lag gaya. Lette hi wo so gayee aur kuch hi der me unka duppatta unke chatee se sarak gaya aur sanson se sath uthtee baithtee unki mast raselee chunchee saf saf dikh raha tha. Rat ke barah baj chuke the. Mai parahi band kiya aur batti bujhane hi wala tha ki bhabhi ki surilee awaj mere kano me pari, “lala inha aaoo na.” Mai unki taraf barha, ab unhone apni chunchee ko phirse duppatte se dhank liya tha. Maine pucha, “kya hai bhabhi?’ Unhone kaha, “lala jara mere pas hi let gaoo na, thori der bat karenge phir tum apne bister par ja kar so jana.”

Pahale to mai hichkichaya lrkin phir man gaya. Mai lungee pahan kar sota tha aur ab mujhko pant pahan kar sone me dikkat ho rahee thee. Wo meri pareshani tar gayee aur bole, “koi bat nahee, tum apni pant utar do aur roj jaise sote ho waise hi mere pas so jaoo. Sharmao mat. Aaoo na.” Mujhe apne kan par yakeen nahee ho raha tha. Lungee pahan kar mai ne light band kar dee aur night lamp jala kar mai bister par unke pas let gaya. Jis badan ko maheeno se niharta tha aaj mai usi ke pas leta hua tha. Bhabhi ka adhnanga shareer mere bilkul pas tha. Mai aise leta tha ki unki chunchee bilkul nangee malum de raha tha, kaunki thora sa hissa hi bra me chupa tha. Kya haseen najara tha. Tab bhabhi bole, “itne mahine se akele nahee soee hun aur ab adat nahee hai akele sone ki.” Mai bola, “mai bhi kabhi kisi ke sath nahee soya.” Wo jor se khilkhilaee aur bole, “anubhav le lena chahie jab bhi mauka mile, bad me lam aaegaa.” Unhone mera hath pakar kar dhire se khinch kar apne ubhre hue chunchee par rakh diya aur mai kuch nahe bol paya lekin apna hath unke chunchee par rakha rahane diya. Mujhe yehan kuch kuja raha hai, jara sahalao na.” Maine bra ke upar se hi unki chunchee ko sahalana shuru kiya. Bhabhi ne mera bra ke cup me ghusa kar sahalane ko kaha aur mera hath bra ke andar kar diya. Maine apna pura hath andar ghusa kar jor jor se unki chunchee ko ragarna shuru kar diya. Meri hathelee ki ragar pa kar bhabhi ke nipple kare ho gaye. Mulayam mans ke sparsh se mujhe bahut acchha lag raha tha lekin bra ke andar karke masalne me mujhe dikkat ho rahee thee. Achanak wo apni pith meri taraf ghuma kar bole, “lala yeh bra ka hoock khol do aur theek se sahalao.” Maine kanpte hue hathon se bhabhi ki bra ki hoock khol diya aur unhone apne badan se use utar kar neeche dal diya. Mere dono haton ko apne nangee chatee par le ga kar wo bolee, “thora kas kar dabao na.” Mai bhi kafi uttejit ho gaya aur josh me akar unki raseelee chunchee se jam kar khelne laga.

Bari bari chunchea thee. Karee karee chunchee aur lumbe lumbe nipple. Pahalee bar mai kisi aurat ki chunchee ko chhu raha tha. Bhabhi ko bhi mujhse apne chunchee ki maalish karwane me maza araha tha. Mera lund ab kara hone laga tha aur underwear se bahar nikalne ke liye jor laga raha tha. Mera 7.5” ka lund pure josh me aa gaya tha. Bhabhi ki chunchee masalte nasalte hue mai unke badan ke bilkul pas aa gaya tha aur mera lund unki jangho me ragar marne laga tha.Achanak wo bole, “lala eh meri tango me kya chuv raha hai?” Maine himmat karke jabab diya, “eh mera hatiyar hai. Tumne bhaia ka hatiyar to dekha hoga na?” Hath laga kar dekhun? Unhone pucha aur mere jabab dene se pahale apna hath mere lund par rakh kar usko tatolne lagee. Apni mutthee mere lund par kas ke band kar lee aur bole, “bapre, bahut karak hai.” Wo meri taraf ghumi aur apna hath mere underwear me ghusa kar mere phar-pharate hue lund ko elastic ke upar nikal liya. Lund ko kas kar pakare hue wo apna hath lund ke jar tak le gayee jisse supara bahar a gaya. Supare ki size aur akar dekh kar wo bahut hairan ho gayee. “Lala kahan chupa rakha tha itne din” unhone pucha. Maine kaha, “eheen to tha tumhare samne lekin tumne dhyan nahee diya. Bhabhi bole, “mujhe kya pata tha ki tumhara itna bara hoga, chote bhai ka laura bare bhai ke laure se bara bhi ho sakta hai, eh mai soch bhi nahee saktee thee.” Mujhe unki bindas bole par ascharya hua jab unhone “laura” kaha aur sath hi me bara maza aya. `

Wo mere lund ko apne hath me lekar kinch rahee thee aur kas kar daba rahee thee. Phir bhabhi ne apna petticoat apni kamar ke upar utha liya aur mere tane hue lund ko apni jangho ke bich le kar ragarne lagee. Wo meri taraf karbat le kar let gayee takee mere lund ko theekh tarah se pakar sake. Unki chunchee mere munh ke bilkul pas thee aur mai unhe kas kas kar daba raha tha. Achanak unhone apni ek chunchee mere munh me thelte hue kaha, “chuso inko munh me lekar.” Maine inki left chunchee apne munh me bhar liya aur jor jor se chusne laga. Thore der ke liye maine unki chunchee ko munh se nikala aur bola, “mai humesha tumhare blouse me kasi chunchee ko dekhta tha aur hairan hota tha. Inko chune ki bahut icchha hotee thee aur dil karta tha ki inhe munh me lekar chusu aur inka rus peeun. Par darta tha pata nahee tum kya socho aur kanhee mujhse naraz na ho jao. Tum nahee jantee bhabhe ki tumne mujhe aur mere lund ko kitna pareshan kiya hai?” “Acchha to aaj apni tamanna puri kar lo, jee bhar kar dabao, chuso aur maze lo; mai to aaj puri ki puri tumharee hun jaisa chahe waisa hi karo” bhabhi ne kaha. Phir kaya tha, bhabhi ki hari jhandee pakar mai yuy para bhabhi ki chunchee par. Meri jeev unke kare nipple ko mahasus kar rahee thee. Maine apni jeev bhabhi ke uthe hue kare nipple par ghumaya. Maine dono anaron ko kas ke pakare hue tha aur bari bari se unhe chus raha tha.

Mai aise kas kar chuncheeon ko daba raha tha jaise ki unka pura ka pura rus nichor lunga. Bhabhi bhi pura sath de rahee thee. Unke muhh se “oh! Oh! Ah! Ce, ce isssssssshhhhh ! Ki awaj nikal rahee thee. Mujhse puri taraf se sate hue wo mere lund ko buri tarah se masal rahee thee aur maror rahee thee. Unhone apni left tang ko mere kagh ke upar chara diya aur mere lund ko ko apni jabgho ke bich rakh liya. Mujhe unki jangho ke bich ek mulayam reshmi ehsas hua. Eh unki choot thee. Bhabhe ne panty nahee pahan rakhee thee aur mera lund ka supara unki jhantoo me ghum raha tha. Mera sabra ka bandh tut raha tha. Mai bhabhi se bola, “bhabhi mujhe kuch ho raha aur mai apne ape me nahee hun, please mujhe batao mai kya karon?” Bhabhi bole, “tumne kabhi kisi larkee ko choda hai aaj tak?” Maine bola, “nahee.” Kitne dukh ki bat hai. Koi bhi larkee isse dekh kar kaise mana kar saktee hai. Shadee tak aise hi rahne ka irada hai kya? Mai kya bolta. Mere munh me koi shabd nahee the.

Mai chupchap unke chere ko dekhte hue chunchee maslta raha. Unhone apna munh mere munh se bilkul sata diya aur phusphusa kar bolee, “apni bhabhi ko chodoge?’“Ka.. ka.. k...kyon nahee” mai bari musjkil se kaha paya. Mera gala such raha tha. Wo bare madak andaz me muskura di aur mere lund ko azad karte hue bole, “theek hai, lagata hai apne anari dewar raja ko mujhe hi sab kuch sikhana parega. Par guru dakhshina pure man se dena. Chalo apni chadhee utar kar pure nange ho jaoo.” Mai palang par se uter gaya aur apna underwear utar diya. Mai apne tane hue lund ko lekar nang dharang apni bhabhi ke samne khara tha. Bhabhi apne raselee hoton ko apne danto me daba kar dekhti rahee aur apne peticoat ka nara keench kar dhela kar diya. “Tum bhi isse utar kar nangee ho jao” kahate hue maine unka petticoat ko kheencha. Bhabhi apne chutar upar kar diya jisse ki petticoat unki tango uter kar alag ho gaya. Bhabhi ab puri tarah nangee ho kar mere samne chit pari hui thee. Bhabhi ne apni tango ko faila diya aur mujhe reshmi jhanto ke jangal ke bich chupi hue unki raseele gulabee choot ka nazara dekhne ko mila. Night lamp ki halkee roshni me chamakte hue nage jism ko ko dekhkar mai uttejit ho gaya aur mera lund mare khushi ke jhumne laga. Bhabhi ne ab mujhse apne upar charne ko kaha. Mai turant unke upar let gaya aur unki chunchee ko dabate hue unke raseele hont chusne laga. Bhabhi ne bhi mujhe kas kar apne alingan me kas kar jakar liya aur chumma ka jawab dete hue mere munh me apni jeev thel diya. Hai kya swadist aur raseele jeev thee. Mai bhi unki jeev ko jor shor se chusne laga. Humara chumma pahale pyar ke sath halke me tha aur phir pure josh ke sath.Kuch der tak to hum aise hi chipke rahe, phir mai apne hont bhabhi ki nazuk gallon par ragar ragar kar chumne laga.

Phir bhabhi ne meri pith par se hath upar la kar mera sar pakar liya aur use neeche ki taraf thela. Mai apne honth unke honto se unki thodi par laya aur kandho ko chumta hua chunchee par pahuncha. Mai ek bar phir unki chunchee ko masalta hua aur khelta hua katne aur chusne laga. Unhone badan ke nichle hisse ko mere badan ke neeche se nikal liya aur humaree tangee ek-dusre se door ho gaye. Apne dayen hath se wo mera lund pakar kar use mutthee me bandh kar sahalane lagee aur apne bayen hath se mera dahina hath pakar kar apni tangoo ke bich le gayee. Jaise hi mera hath unki choot par pahuncha unhone apni choot ke dane ko upar se ragar diya. Samajhdar ko ishara kafi tha. Mai unke chunchee ko chusta hua unki choot ko ragane laga. “Lala apni unglee andar dalo na?” Kahati hue bhabhi ne mera unglee apni choot ke munh par daba diya. Maine apni unglee unki choot ke darar me ghusa diya aur wo puri tarah andar chalee gaye. Jaise jaise maine unki choot ke andar muaina karte mera maza barta gaya. Jaise hi mera unglee unke choot ke dane se takraya unhone jor se siskari le kar apni jangho ko kas kar band kar liya aur chuta utha utha kar mere hath ko chodne lagee. Unki choot se pani baha raha tha. Thori der bad tak aise hi maza lene ke bad maine apni unglee unki choot se bahar nikal liya aur sidha ho kar unke upar let gaya. Bhabhi ne apni tange faila di aur mere farfarate hue lund ko pakar kar supara choot ke muhane par rakh liya. Unki jhanto ka sparsh mujhe pagal bana raha tha, phir bhabhi ne humse bole, “ab apna laura meri bur me ghusao, pyar se ghuserna naheeto mujhe dard hoga, ahhhhh!” Mai kaynki nausikhiya tha isiliye shuru shuru me mujhe apna lund unki tight choot me ghusane me kafi pareshani hue. Mai jab jor laga kar lund andar thelna chaha to unhe dard bhi hua. Lekin pahale se unglee se chudwa kar unki choot kafi gilee ho gaye thee. Bhabhi bhi hath se lund ko nishane par laga kar rasta dikha rahee thee aur arsta milte hi mera ek hi dhakke me supara andar chala gaya. Isse pahale ki bhabhi sambhle ya asan badale, maine dusra dhakka lagaya aur pura ka pura lund makhhan jaise choot ki jannat me dakhil ho gaya. Bhabhi chillaii, “uiiii iiiiiii iiiii maaaaaa uhuhuhhhhh oh sanjoooo, aise hi kuch der hilna dulna nahee, hi! Bara jaleem hai tumhara lund. Mar hi dala mujhe tumne dewar raja.” Bhabhe ko kafi dard ho raha lagta hai.

Paheli bar jo itna mota aur lumba lund unke bur me ghusa tha. Mai apna lund unki choot me ghusa kar chup chap para tha. Bhabhi ki choot pharak rahee thee aur andar hi andar mere laure ko masal rahee thee. Unki uthi uthi chunchean kafi tezi se upar neeche ho rahe thee. Maine hath barha kar dono chunchee ko pakar liya aur munh me lekar chusne laga. Bhabhi ko kuch rahat mili aur unhone kamar hilani shuru kar dii.Bhabhi mujhse bole, “lala shuru karo, chodo mujhe. Lelo maza jawanee ka mere rajjjja,” aur apni gand hilane lagee. Mai tahra anaaree. Samajh nahe paya ki kaise shuru karun. Pahale apni kamar upar kiya to lund choot se bahar a gaya. Phir jab neeche kiya to theek nishane par nahee baitha aur bhabhi ki choot ko ragarta hua neeche phisal kar gand me jakar phans gaya. Maine do teen dhakke lagaya par lund choot me wapas jane bajai phisal kar gand me chala jata. Bhabhi se raha nahee gaya aur tilmila kar kar tana deti hui bole, “ anaaree ka chodna aur choot ka satyanash, are mere bhole raja jara theek se nishana laga kar thelo nahee to choot ke upar laura ragar ragar kar jhar jaooge.” Mai bola, “bhabhi apne is anaaree dewar ko kuch sikhao, jindagee bhar tumhe guru manuga aur lund ki dakshina dunga.”``

Bhabhi lumbee sans leti hue boli, “han lala, mujhe hi kuch karna hoga nahee to dewrani akar kosegee ki tumhe kuch nahee sikhaya.” Mera hath apni chunchee par se hataya aur mere lund par rakhtee hui bole, “isse pakar kar meri choot ke munh par rakhho aur lagao dhakka jor se.” Maine waise hi kiya aur mera lund unki choot ko cherta hua pura ka pura andar chala gaya. Phir bhabhi bole, “ab lund ko bahar nikalo, lekin pura nahee. Supara andar hi rahane dena aur phir dobara pura lund andar pel dena, bas issi tarah se karte raho.” Maine waise hi karna shuru kiya aur mera lund dhira dhire unki choot me andar-bahar hone laga. Phir bhabhi ne speed barha kar karne ko kaha. Maine apni speed barha dee aue tazee se lund andar-bahar karne laga. Bhabhi ko puri mastee a rahee thee aur wo neeche se kamar utha utha kar har shot ka jawab dene lagee. Lekin jayada speed hone se bar bar mera lund bahar nikal jata. Isse chudai ka silsila tut jata. Akhir bhabhi se raha nahee gaya aur karwat le kar mujhe apne upar se utar diya aur mujhko chit leta kar mere upar char gayee. Apni jangho ko faila kar bagal kar ke apne gaddedar chutar rakhkar baith gayee. Unki choot mere lund par thee aur hath meri kamar ko pakare hue thee aur bole, “mai dikhatee hun ki kaise chodte hai,” aur mere upar let kar dhakka lagaya. Mera lund ghap se choot ke andar dakhil ho gaya. Bhabhi ne apni raseeli chunchee meri chatee par ragarte hue apne gulabee hont mere hont par rakh diya aur mere munh me jeev thel diya. Phir bhabhi ne maze se kamar hila hila kar shot lagana shuru kiya. Bare kas kas kar shot laga rahee thee meri pyari bhabhi. Choot mere lund ko apne me samaye hue tezee se upar neeche ho rahee thee. Mujhe lag raha tha ki mai jannat pahunch gaya hun. Ab position ultee ho gayee thee. Bhabhi mano mard thee jo ki apni mashuka ko kas kas kar chod raha tha. Jaise jaise bhabhi ki mastee barh rahee thee unke shot bhi tez hote ja rahe the. Ab bhabhi mere upar mere kandho ko pakar lar ghutne ke bal baith gayee aur jor jor se kamr hila kar lund ko tezee se andar-bahar lene lagee. Unka sara badan hil raha tha aur sanse tez tez chal rahee thee. Bhabhi ki chuncheea tezi se upar neeche ho rahee thee. Mujhse raha nahee gaya aur hath barha kar dono chunchee ko pakar liya aur jor jor se masalne laga. Bhabhi ek sadhe hue khilari ki tarah kaman apne haton me liye hue yhee aur kas kas kar shot laga rahee thee.











आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

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