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Saturday, June 12, 2010

बाप बेटी की कहानी - पापा की हेल्पिंग बेटी--1

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पापा की हेल्पिंग बेटी--1
हेलो दोस्तो आपका दोस्त राज शर्मा एक ओर नई कहानी लेकेर आपके सामने हाजिर है .

कहानी सुनाने से पहले मैं थोरा सा बॅकग्राउंड आप सब को बता दून.ये कहानी बाप ओर बेटी की चुदाई
की कहानी है . अब आप कहानी को उस लड़की की ज़ुबानी ही सुने तो ज़्यादा अच्छा ओर ज़्यादा मज़ा आएगा

मेरी मदर की 3 साल पहले ट्रॅफिक एक्सीडेंट मैं डेत हो गई थी. उस वक़्त मैं कोई 12 साल की थी और अपने पापा की अकेली बेटी थी. हम लोग काफ़ी साल पहले हयदेराबाद से रावलपिंडी शिफ्ट हो गये थे. यहाँ पिंडी मैं सिवाइ हमारे एक दो फॅमिली फ्रेंड्स के और कोई रिश्तेदार ना था. बस हम तीनो अकेले रहते थे. मम्मी की डेत के बाद हम सिर्फ़ 2 रह गये थे.

घर के एक कमरे मैं जोकि बाहर कमर्षियल स्ट्रीट की तरफ खुलता था, पापा ने बोहट अछा जनरल स्ट्रोरे खोला हुआ था जिस से हमारी बहुत अछी इनकम होती थी. मम्मी के जाने के बाद मुझे भी तन्हाई महसूस नही होती थी. सुबा मैं स्कूल चली जाती. काम वाली सुबा घर की सफाई वगेरा कर के खाना तय्यार कर के चली जाती. स्कूल से वापसी पेर हम दोनो बाप बेटी साथ खाना खाते. मम्मी की कमी बहुत महसूस होती थी. इसी तरह एक साल गुज़र गया. और मुझे यह कभी भी एहसास ना हुआ के अगर मुहज़े मम्मी की कमी महसूस होती है तो पापा का क्या हाल होता होगा. मैं जवानी की हदों को छू रही थी. मेरी छातियाँ अछी ख़ासी निकल आई थी. अक्सर मेरी चूत मैं भी मीठी मीठी खारिश होती थी. मगर ना मैं इन सब चीज़ों का मतलब जान सकी और ना ये महसूस कर सकी कि पापा मम्मी के बाद सेक्स को कितना मिस करते होंगे.

फिर एक रात वो हुआ जिसने हम दोनो बाप बेटी की ज़िंदगी बदल दी.

जुलाइ की रात थी. बहुत शेडेड गर्मी के बाद बहुत तेज़ बेरिश हो रही थी. बादल बहुत ज़ोर ज़ोर से गरज रहे थे. मैं अपने कमरे मैं सहमी हुई सोने की कोशिश कर रही थी, मगर डर के मारे नींद नही आ रही थी. अचानक जो एक दफ़ा बदल बहुत ज़ोर से गर्जे तो मेरी चीख निकल गई और मैं बेड से उठ कर पापा के बेडरूम की तरफ भागी.

जल्दी से मैने पापा के बेडरूम का दरवाज़ा खोला और पापा के बेड के बिल्कुल सामने जा खरी हुई. सूब कुछ इतना जल्दी मैं हुआ के मैं बेडरूम का दरवाज़ा खोलते हुआी यह भी ना देख सकी के मेरे पियारे पापा उस वक़्त अपने बेड पेर बिल्कुल नंगे हो कर अपने तने हुए सख़्त लंड को अपनी मुथि मैं पकरे, मुथि को लंड पेर ऊपर नीचे कर रहे थे. मैं ने ज़िंदगी मैं पहली बार लंड को इतना बरा (बिग) देखा था. पापा को भी मोक़ा ना मिल सका के वो अपने जिस्म पेर शीट डाल लेते. उनका मुँह खुला का खुला रह गया.

मेरे भी मुँह से सिवाए इसके और कुछ ना निकल सका "सॉरी पापा, मैं डर गई थी, इस लिये जिलदी मैं डोर पेर नॉक नही कर सकी".

पापा ने इतनी देर मैं अपने ऊपेर शीट डाल ली और घबरा कर उठ कर बेड पेर बैठ गाए, और बोले: "सॉरी बेटा के तुम ने मुझे इस"तरह देख लिया




आ जाओ और यहाँ मेरे पास बैठ जाओ. जब बारिश रुक जाए तो चली जाना अपने बेडरूम मैं".

"मगर पापा ..... आप डिस्टर्ब होंगे. आप कुत्छ कर रहे थे अभी?"

लेकिन पापा ने जवाब देने की बजाए मुझे हाथ पकड़ कर अपने साथ बेड पर बिठा लिया.

"पापा आप ने कुत्छ नही पहना ... मुझे शरम आती है." यह कहते हुए मुझे खुद अपने बारे मैं एहसास हुआ के मैं ने भी गर्मी की वजह से सिर्फ़ एक थी सी, सी-थ्रू क़िसम की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी. ब्रा भी नही पहनी थी, इस लिये मेरा जिस्म भी बिल्कुल रिवील हो रहा था. टी-शर्ट भागते हुए ऊपेर हो गई ही, जिस की वजह से मेरा पेट और मेरे टिट्स साफ नज़र आ रहे थे.

एक तरफ पापा को मैं नंगा अपना लंड पकड़े देख चुकी थी, और अब वो शीट डाले बैठे थे के पीछे से उनकी कमर नीचे तक नंगी थी. और दूसरी तरफ मैं भी सेमी-नेकेड उनके ब्राबार बैठी हुई थी. मेरी साँस फूल रही थी.

मुझे उस रात पापा के बराबर बैठ कर पहली दफ़ा एहसास हुआ के मेरा जिस्म बहुत सेक्सी है. मेरे बूब्स मेरी 13 साल की एज के मुक़ाबले मैं ज़ियादा बिग और राउंड हैं और सामने को निकले हुए हैं. मेरे हिप्स बहुत राउंड, हार्ड और बल्जिंग हैं. मेरा जिस्म भरा भरा लगता है.

अचानक बारिश का शोर और ज़ियादा हो गया और साथ ही बदल एक बार फिर बहुत ज़ोर से गर्जे के मैं डर के मारे एक दम पापा से लिपट गई. इस तरह लिपटने से पापा की शीट हट गई, और पापा फिर से नंगे हो गाए. मैं कोई 10 सेकेंड यूँही लिपटी रही, टब मुझे पता चला के मैं अपने पापा के नंगे जिसम से लिपटी हुई हूँ.

मैं ने घबरा कर पापा से अलग हो ने की कोशिश की तो पापा ने मेरी कमर मैं अपना हाथ डाल कर मुझे मज़बूती से अपने नंगे जिसम के साथ जाकड़ लिया.

"जानू ऐसे ही बैठी रहो"

मैं कुत्छ ना जवाब दे सकी. मैं पापा के लेफ्ट साइड से लिपटी हुई थी. मेरा सर पापा के सीने पर था. शीट हट जाने की वजह से पापा का खरा हुआ लंड मेरे फेस से एक फीट के फ़ासले पर था. पापा ने एक बार फिर अपने लंड को राइट हॅंड की मुथि मे जाकड़ लिया और हाथ को लंड पर आहिस्ता आहिस्ता ऊपेर नीचे करने लगे.

"पापा यह आप किया कर रहें हैं?"

"आज तुम्हारी मम्मी की बोहत याद आ रही हे" पापा ने जवाब दिया.

"छी पापा, जुब मम्मी की याद आती हे तो आप ऐसे करते हैं?"

"बेटा, वो तुम्हारी मा थी, लेकिन मेरी बीवी थी, और मियाँ बीवी का रिश्ता और तरह का होता हे".

"मैं समझी नही पापा!"

"बेटी क्या तुम्हे नही पता मियाँ बीवी का क्या जिन्सी रिश्ता होता हे?" पापा ने पूछा

"नही पापा, आप बताएँ"

"अब मैं कैसे तुम्हें बताऊं के मियाँ बीवी मैं सेक्स का रिश्ता होता. और इसी रिश्ते की वजह से तुम पैदा हुईं और आज तुम मेरे साथ इस तरह बैठी हो"

"वो कैसे पापा?" मेरी समझ मैं अब भी नहीं आ रहा था.

"शादी के बाद मियाँ अपनी बीवी के साथ सेक्स करता हे, यानी अपनी बीवी तो इस लंड से उसकी चूत को चोद्ता है. चोदते हुए जुब लंड से मनी चूत मैं निकलती है तो फिर 9 मंथ बाद बच्चा पैदा होता हे".

लंड और चूत का नाम तो मैं ने कहीं सुन रखा था, मगर "चोद्ता" मैं ने पहली बार सुना था.

"पापा यह "चोदता" क्या होता हे?"

पापा की साँस आहिस्ता आहिस्ता फूल रही थी. शिवरिंग सी आवाज़ मैं वो बोले.

"अब इस से आगे मैं जो तुम्हे बताऊँगा तो उसके लिये तुम्हे भी मेरी तरह कपड़े उतार कर नंगी होना परे गा. क्या तुम तय्यार हो."

मैं पापा की बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई और उनकी ग्रिफ्त से निकालने की कोशिश करने लगी.

लेकिन पापा ने ज़बरदस्ती मेरी शॉर्ट्स और टी-शर्ट उतार दी और हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगा होगाए.

अब पापा ने मेरा राइट हॅंड पकड़ कर अपना लंड मेरे हाथ मैं पकड़ा दिया, और साथ ही मेरी चिकनी और हेरलेस चूत पर उंगली फेरते हुए बोले.

"यह तुम ने मेरा लंड पकड़ा हुआ है और मैं तुम्हारी चूत पर उंगली फेर रहा हूँ. तुम्हे प्यार करते हुए अगर मैं अपने इस लंड को अपनी बेटी की चूत मैं डाल कर अपने लंड को तुम्हारी चूत मैं अंदर बाहर करूँ गा तो इसका मतलूब होगा के मैं तुम्हे चोद रहा हूँ, या तुम मुझ से चुदवा रही हो, और या मैं तुम्हे चोद्ता हूँ"

मेरी चूत पर पापा की उंगली लगते ही मेरी चूत मैं करेंट सा दौर गया. पापा ने जब मेरी चूत के दाने को उंगली से छेड़ा तो मैं ने बुरी तरह से मचल कर पापा के हाथ को अपनी रानो के दरमियाँ भींच लिया. इस के साथ ही मैं ने पापा के लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी. पापा का लंड मेरी मुठ्ठी मैं किसी ज़िंदा मखलूक़ की तरह मचल रहा था. मुझे अब एहसास हो रहा था के सेक्स क्या होता हे.

"पापा लंड मेरी चूत मैं डाल कर मुझे चोद के दिखाएँ" मैं ने पापा से कहा.

"जानू तुम अभी कुँवारी हो, और मेरी सग़ी बेटी हो. पहली बात तो हमे ऐसा नहीं करना चाहिये. लेकिन एक साल से मेरा लंड किसी चूत को चोदने के लिये तड़प रहा हे. बाहर जा कर मैं रंडी को नही चोदना चाहता. अगर तुम्हारी मर्ज़ी हो तो फिर मैं अपनी बेटी को चोद कर दिखा सकता हूँ"

"पापा मैं अभी सिर्फ़ 13 साल की हूँ, लेकिन अभी अभी आप के मेरी चूत को हाथ लगाने से जो मेरी हालत हो रही है, तो मैं आप की हालत भी समझ सकती हूँ .. ... पापा चोद के दिखाएँ मुझे, ता के मुझे भी पता चले के आप मेरी मम्मी को कैसे चोद्ते थे ... और पापा मेरी शकल सूरत भी चूँके मम्मी से बोहत मिलती है, इस लिये आप को चोद्ते हुए लगे गा के आप अपनी बीवी को चोद रहें हैं..."

"उफ़ जानू ... मेरी प्यारी बेटी ... तूने तो मेरी मुश्किल आसान करदी ...", यह कहते हुए पापा ने एक दम से उठा कर मुझे अपनी गौद मैं बिठा लिया. पापा का लंड मेरी रानो के बीच मैं से बाहर को निकल कर मेरे पेट से टच कर रहा था. पापा के लंड के मुँह से चिकना चिकना लेसडार पानी निकल कर मेरे पेट पर लग रहा था.

पापा ने मुझे अपने से लिपटा कर खूब मेरे मुँह पर, मेरे होंठो पर प्यार करना शुरू किया. मेरी दोनो छातियाँ पापा ने अपने हाथों मे पकड़ कर मसलनी शुरू करदी.

मेरे पूरे जिस्म मे जैसे आग सी लग गई. मैं भी बे-इकतियार हो कर अपने पापा को उसी तरह चूमने चाटने लगी. मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रहीं थी. मेरा पूरा जिस्म शिद्दत-ए-जज़्बात से काँप रहा था. पापा ने प्यार करते करते मुझे बेड पर लिटा दिया और खुद अपना लंड हाथ मैं ले कर मेरे मुँह के ऊपेर आ गाए, और लंड की टोपी को मेरे होंठो से लगाते हुए बोले: "शहला, मेरी प्यारी सी बेटी, अपने पापा का लंड चूसो मुँह मैं ले कर. पापा के लंड से मनी निकालने वाली है, फिर इसके बाद मैं अपनी बेटी को चोदुन गा".

"पापा यह मनी क्या होती हे?"

"अभी जब तुम्हारे मुँह मैं निकले गी तो देख लेना. यह वाइट क्रीम या मलाई की तरह होती हे, और बोहट गरम और मज़ेदार होती हे. लो अब चूसो पापा का लंड."

मैं ने मुँह पूरा खोल दिया, और पापा ने अपना हड्डी की तरह सख़्त लंड मेरे मुँह मैं डाल दिया. मैं लंड मुँह मैं ले कर लंड को अपने लिप्स से दबा लिया, और पापा होले होले मेरे मुँह को चोदने लगे.

"उफ़ शहला .... जानू .... मज़ा आरहा है .... चोद रहा हूँ अपनी बेटी शहला के मुँह को. उफ़ ... .... निकलने वाली है पापा के लंड से मनी...."

और इसके बाद चंद ही लम्हे मैं पापा के लंड से एक तेज़ पिट्‍चकारी मेरी मुँह के अंदर निकली, और उसके बाद तो जैसे पिचकारियो की लाइन लग गई. मेरा मुँह पापा की गरम गरम मनी से भर गया. पापा की मनी मुँह से बाहर ना निकल जाइ, इस ख़याल से मैं काफ़ी मनी पी गई.

पापा घहरी घहरी साँसे ले रहे थे और उनका लॉरा मेरे मुँह मैं ढीला परता जा रहा था.

पापा ने आख़िर अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया. मुझे पापा का लंड देख कर हँसी आ गई के वो अब बिकुल सुकर कर लुल्ली बन गया था. हंस ने की वजह से पापा की बाक़ी मनी मेरे मुँह से बाहर निकल कर मेरी छातियों पर बहने लगी.

गाढ़ी गाढ़ी, सुफैद क्रीम जैसी लेसडार मनी. मनी मैं से एक अजीब सी खट्टी मीठी खुश्बू उठ रही थी (जैसे आटा गूंधने के बाद आती हे).

"देखी अपने पापा की मनी? ऐसी होती है मनी. यह मनी जब लर्की या औरत की चूत के अंदर निकलती हे तो उस से औरत के पेट मैं बच्चा ठहर जाता है."

मैं इतनी ज़ियादा गरम हो चुकी थी के मैं ने पापा की मनी अपनी टिट्स पर मल्नि शुरू करदी.

"बेटी मैं अब तुम्हारी चूत को चाटून गा ता के तुम्हारी नन्ही मुन्नी चूत पापा के मोटे सख़्त लंड को अंदर लेने के लिये तय्यार हो जाए."

आज मैं अपने प्यारे पापा से जो कुत्छ भी चुदवाने के नाम पर करवाने जा रही थी, यह मेरी ज़िंदगी का सब से अनोखा तजर्बा था. आअज से पहले मैं अपनी चूत को सिर्फ़ पेशाब करने की जगह समझती थी. मुझे आज पहली बार पता चला के चूत मैं ऐसी खारिश भी होती हे जो सिर्फ़ लंड से मिट ती हे. मुझे आज और अभी पता चला के चूत को चाट ते भी हैं.






पापा अब खुद सीधे हो कर लेट गए और मुझे अपने ऊपेर आने को कहा. मैं पापा के ऊपेर इस तरह लेटी के मेरी चूत पापा के मुँह पर थी और पापा का दोबारा से खरा होता हुआ लंड मेरे होंठो के एन सामने था.

पापा ने पीछे से मेरी दोनो रानो को हाथ डाल कर खोलते हुए मेरी चूत को अपनी ज़बान से चाटना शुरू किया. पापा की ज़बान मेरी चूत मैं लगने की देर थी के मेरे सारे जिस्म मैं करेंट सा दौड़ने लगा. ऐसा ही करेंट जैसा बिजली के लाइव तार को छूने से होता हे. पापा की ज़बान मेरी चिकनी चिकनी नन्ही मुन्नी चूत के पंखों के बीच मैं घूम रही थ्री. कभी पापा मेरी चूत के दाने पर ज़बान फेरते, और मैं बुरी तरह से मचल जाती. फिर पापा उस जगह ज़बान फेरते जहाँ से मेरी पी निकलती हे. पी की जगह पेर ज़बान लगते ही मुझे अभी ज़ोर से पी आनी होने लगती के पापा एक दम मेरी चूत के चोदने वाले छेद मैं ज़बान डाल कर चाटना शुरू कर देते.

इधर मेरी आँखों के बिल्कुल सामने पापा का पूरी तरह तना हुआ लंड था. मैं इतने क़रीब से पापा के लंड को पहली दफ़ा देख रही थी और सोच रही थी के यही वो लंड है जिसने मम्मी को चोदा और उसकी वजह से मैं पैदा हुई, और आज खुद अपने बाप के ऊपेर लेट कर उसके लंड को सामने देख रही हूँ, हाथ मैं पकड़ रही हूँ और चूस रही हूँ, और पापा अपनी ही सग़ी बेटी की चूत को चाट और चूस रहे हैं.

"पापा मेरी चूत मैं बहुत खारिश हो रही हे ... उफ़ मर जाऊंगी ... पापा बहुत खुजली हो रही हे ..."

पापा ने जुब यह सुना तो मुहज़े अपने ऊपेर से उतार कर बेड पेर चित लिटा दिया, और मेरी टाँगों के बीच मैं घुटनो के बल बैठ कर बोले"

"जानू, अब पापा अपनी बेटी के साथ वो करने जा रहे हैं जो पापा तुम्हारी मम्मी के साथ करते थे. तय्यार हो तुम, शहला?"

"पापा क्या अब आप चोदन्गे मुझे? पापा बहुत मोटा और सख़्त लंड है आप का, और लंबा भी बहुत हे. इतना मोटा लंड कैसे मेरी चूत मैं जाएगा, पापा?"

"मैं ने अपनी बेटी की चूत चाट चाट कर इतनी चिकनी कर दी हे अब इस्मे हाथी का लंड भी चला जाएगा. डरो मूत शहला, मैं पहले सिर्फ़ अपने लंड के टोपी चूत मैं डालूँगा. फिर आहिस्ता आहिस्ता चोद्ते हुए पूरा लंड डालूं गा."

यह कहते हुए पापा ने मेरी दोनो टांगे उठा कर अपने कांधों पर रखीं, और मेरी गोल गोल गांद के नीचे पिल्लो रख दिया, जिस से मेरी गांद और चूत बिल्कुल ऊपेर उठ गई. पापा मेरे उपर आ गए और मेरी दोनो टिट्स को पकड़ते हुए कहा: "शहला .. पहली दफ़ा तुम मुझ से चुदवा रही हो.. अच्छा हे के बेटी अपने बाप का लंड खुद अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के छेद से लगाए."

मैं और पापा फुल मस्ती मैं थे. मैं ने राइट हॅंड से पापा का तना हुआ लंड जो मेरे चूसने की वजह से चिकना हो रहा था, पकड़ कर उसकी टोपी को अपनी चूत के मुँह से लगाया.

पापा ने होले से अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश किया, और इसके साथ ही मेरी चूत के छेद मैं पापा के लंड की टोपी फँस गई.

"मज़ा आया शहला?" पापा ने कहा

मेरी नज़रे पापा की नज़रों से मिली, और मैं शरम से आँखे बूँद करली. पापा ने बे इकतियार हो कर, मेरे गालों, मेरे होंठो और मेरी टिट्स को प्यार करना शुरू कर दिया.

अब जब के पापा का लंड अपनी बेटी की चूत मैं जा चुका था, तो मुझे शरम आ रही थी के आज मैं अपने ही सगे बाप से चुदवा रही हूँ.

"जानू, और लंड डालूं अंदर?"

मैं ने शरम से कुत्छ ना बोल पाई. पापा ने फिर कहा: "जानू, शर्मा क्यूँ रही हो अपने पापा से. अब तो पापा का लंड जा चुका हे तुम्हारी चिकनी चूत मैं. बोलो और डालूं अंदर; जानू मैं पूरी तरह लंड तुम्हारी चूत मैं डाल कर चोदना चाहता हूँ. वही सही चुदाई होती है".

मैं फिर भी कुत्छ ना बोली और सिर्फ़ मेरे मुँह से आहिस्ता से "हूँ" निकल सका.

पापा जैसे हे मेरी "हूँ" सुनी, और उन्हों ने एक हे झटके से अपना पूरा सख़्त और लंबा लंड मेरी चूत मैं डाल दिया. मेरी चूत चिकना चिकना पानी छोड़ रही थी, मगर फिर भी पहली दफ़ा तकलीफ़ की वजह से मेरी चीख निकल गई.

"मर गई पापा. दर्द हो रहा मेरी चूत मैं बहुत ज़ोर का. मेरी चूत फॅट गई पापा. उफ़ .... मर गई ..."

पापा ने मेरी टांगे अपने कांधो से उतार कर मेरे जिस्म को अपने जिस्म से सटा लिया. मेरी टांगे खुली हुई थी औरइस दर्मयान पापा का लंड पूरा का पूरा मेरी छोटी सी चूत मैं घुसा हुआ था. मेरी चीख सुन कर पापा ने मुझे प्यार करते हुए कहा: "जानू, पहली पहली बार दर्द होता है, 2 मिनिट मैं यह दर्द ख़तम हो जाए गा, और फिर मज़ा आने लगे गा. वैसे भी तुम्हारी चूत इस क़दर टाइट हे के रब्बर बॅंड की तरह मेरे लंड को जकड़ा हुआ है".

हम दोनो बाप बेटी कुत्छ देर तक उन्ही लिपटे रहे. इस दोरान पापा मुझे किस करते रहे. मेरी आँखों मैं तकलीफ़ की वजह से आँसू आ गए थे. पापा के प्यार करने से मैं ठीक होने लगी और मैं ने भी पापा के होंठो पेर प्यार करना शुरू किया. किस करते हुए पापा ने अपनी ज़बान मेरे मुँह मैं डाल दी, और मैं पापा की ज़बान को चूसने लगी. पापा की ज़बान से मुझे अपनी चूत का टेस्ट आ रहा था. मैं बहुत ज़्यादा गरम हो गई. उत्तेजना से मेरा बुरा हाल होने लगा. पापा ने फिर मेरे बूब्स को चूसना शुरू किया, और मैं बुरी तरह मचलने लगी.

दर्द अब बिल्कुल ख़तम हो गया था और उसकी जगह वाक़ई अब मुझे इतना मज़ा आ रहा था के मैं बता नहीं सकती. मैं सोच रही थी के मम्मी भी इसी तरह पापा से चुदवाते हुए मज़ा लेती होंगी.

जुब मज़ा मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया, और पापा उन्ही मेरे ऊपेर पड़े हुए थे, तो मुझ से रहा ना गया: "पापा, कुत्छ करो ना .... मेरी चूत मैं आग लगी हुई है ...."

इस के साथ ही मैं ने नीचे से पापा को ऊपेर की तरफ पुश किया. पापा अपनी बेटी का इशारा समझ गये.

"चलो अब अपनी जानू को गौद मैं ले कर चोदुन गा"

यह कहते हुए पापा ने मुझे अपनी गौद मैं भर लिया; इस तरह के मेरी दोनो टांगे उन्हो ने अपनी कमर (वेस्ट) के गिर्द लपट लीं, और मेरे दोनो बाज़ू अपनी नेक के गिर्द लपट लिये, और इस तरह मेरी गांद को नीचे से पकड़ते हुए वो बेड से उतर कर मुझे गौद मैं ले कर फर्श पर खड़े हो गये. पापा का लंड उसी तरह से पूरा मेरी चूत मैं फँसा हुआ था.

इसी तरह उठाए हुए पापा मुझे ड्रेसिंग रूम के फुल साइज़ मिरर के सामने ले गये.

"जानू, देखो मिरर मैं. कैसे लग रहे हैं हम दोनो बाप बेटी?"

मैं मिरर मैं देख कर बुरी तरह शर्मा गयी.

"पापा ... आप बड़े वो हैं ..."

पापा मिरर के सामने इस तरह खड़े थे के मेरी बॅक साइड मिरर की तरफ थी. मैं ने एक बार फिर अपनी नेक घुमा कर मिरर की तरफ देखा. हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगे थे. मैं पापा की गौद मैं बंदरिया की तरह लिपटी हुई थी. पापा ने अपने दोनो हाथों से मेरी गांद को थामा हुआ था. पापा की उंगलियाँ मुझे अपनी गांद के गोश्त के अंदर घुसती हुई दिखाई दे रही थी. मेरी गांद का सुराख पूरी तरह से खुला हुआ था. और उसके नीच पापा का मोटा सख़्त लंड जड़ तक मेरी चूत मैं फँसा हुआ था. मेरी चूत के छेद ने पापा के लंड को रब्बर बॅंड की तरह ग्रिप किया हुआ था.

"कैसी बुरी लग रही हूँ मैं पापा .... "

"नही जानू, तुम बहुत हसीन लग रही हो. बिल्कुल उतनी हसीन जितनी एक लड़की मज़े ले कर चुदवाते हुए लगती है.... इतना हसीन जिसम हे मेरी बेटी का .... बिल्कुल ब्लू बॅंड मार्जरिन की तरह .. देखो मिरर मैं, कैसे पापा ने अपनी बेटी की मोटी ताज़ी गांद को पकड़ा हुआ हे ... और मेरा लंड कैसा लग रहा अपनी जानू बेटी की टाइट चूत मैं ...."

पापा ने यह कहते हुए मेरी गांद को ऊपेर उठाया, यहाँ तक के उनका लंड खींचता हुआ टोपी तक बाहर आ गया.

"बहुत टाइट चूत हे मेरी बेटी की. उफ़ मज़ा आ गया जानू .... इस तरह तो 3 या 4 धक्कों मैं हे मेरी मनी निकल जाए गी"

यह कहते हुए पापा ने मेरी गांद को नीचे करते हुए अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश किया. फिर बाहर निकाला, फिर किया. और फिर बगैर रुके तेज़ी से वो अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करते रहे. पापा पूरी तरह जोश और मस्ती मैं आ गये था. उनके गले से अजीब अजीब आवाज़े निकल रही थी. मुझे अब पता चला के चुद रही हूँ. इसे चोदना कहते हैं. मेरी अपनी हालत खराब हो चुकी थी. मेरे मुँह से भी है हाई की और बिल्ली की तरह घुर्रने की आवाज़ निकल रही थी.

"चोद रहा हूँ अपनी जानू को .... लंड जा रहा तेरी चूत मैं जानू ... चुद मेरे लंड से .... चुद अपने पापा के लौरे से .... मज़ा आ रहा से .... टाइट चूत है मेरी बेटी की .... "

"पापा चोदो अपनी बेटी को .... चोदो मुझे ..... फाड़ दो मेरी चूत को ..... उफ़ मरगई पापा ... बोहत सख़्त लंड है आप का ...... उफ़ लंड पेट मैं चला गया मेरे ..... पापा फॅट गई मेरी चूत .... चोदो ..... चोदो ..... उफ़ चुद गई मैं मम्मी. ओ' मम्मी पापा ने चोद दिया मुझे ...... पापा ज़ोर से चोदो .... और ज़ोर से चोदो ..... धक्के लगाओ ज़ोर ज़ोर से ...... मज़ा आ रहा है ..."

अब मेरा जिस्म अकड़ना शुरू हो रहा था. मुझे अपना दिमाग़ घूमता हुआ महसूस हो रहा था. मेरी चूत के सारे मुस्छले अकड़ने लगे थे. और चूत के अंदर पापा का लंड फूलने और पिचकने लगा था.

"उफ़ जानू मेरी मनी निकल रही तेरी चूत मैं." इस के साथ ही पापा का जिस्म बुरी तरह मुझे गौद मैं लिये झटके मारने लगा. मेरी गांद को पूरा नीचे खींच कर अपने लंड के साथ जमा दिया, और नीचे से अपने पूरी तरह मेरी चूत मैं फँसा दिया.

पापा की गरम गरम मनी की पिचकारिया मुझे अपनी चूत की गहराइयों मैं जाती हुई सॉफ महसूस हो रही थी. इस के साथ ही मैं भी ख़तम हो रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.

हम दोनो बाप बेटी का जिसम अब ढीला पड़ता जा रहा था. पसीने मैं हम दोनो नहा चुके थे. मेरी चूत मैं बिल्कुल ठंडी पड़ गई थी. पापा का लंड भी ढीला पड़ने लगा था. मगर अभी तक मेरी चूत मैं ही.

पापा इसी तरह मुझे गौद मैं लिये लिये, सोफे पेर बैठ गये, और मैं अपने पापा के सीने के साथ यूँही चिपकी रही. मेरी पसीने मैं भीगी हुई छातियाँ पापा के बालों भरे सीने से पिसी हुई थी.

पापा का लंड आख़िर नरम हो कर मेरी चूत से बाहर निकल आया, और इसके साथ ही मेरी चूत से पापा की मनी बह बह कर बाहर आने लगी.

सोफा खराब ना हो जाए, इस ख़याल से मैं ने नीचे अपनी चूत पर हाथ रख दिया, और पापा की मनी अपने हाथो मैं ले ले कर अपने पैर ऑर बूब्स पर मलने लगी.
क्रमशः..................









Papa ab khud seedhay ho kar lait gaey aur mujhay apnay ooper anay ko kaha. Main papa ke ooper is tarah leti ke meri choot papa ke munh per thi aur papa ka dobara se khara hota hua lund meray honton ke ain samney tha.

Papa ne peechay se meri dono raano ko haath daal kar kholtay huay meri choot ko apni zaban se chaatna shru kia. Papa ki zaban meri choot main lagnay ki der thi ke meray sarey jism main current sa daurnay laga. Aisa hee current jaisa bijli ke live taar ko chooney se hota hay. Papa ki zaban meri chikni chikni nunni munni choot ke pankhon ke beech main ghoom rahi three. Kabhi papa meri choot ke daaney per zaban phertay, aur main buri tarah se machal jati. Phir papa us jagah zaban phertay jahan se meri pee nikalti hay. Pee ki jaga per zaban lagtay hee mujhay abhi zor se pee aani honey lagti ke papa ek dum meri choot ke chodnay waley ched main zaban daal kar chaatna shru kar detay.

Idhar meri aankhon ke bilkul saamnay papar ka puri tarah tana hua lund tha. Main itnay qarib se papa ke lund ko pehli dafa dekh rahi thi aur soch rahi thi ke yahi woh lund hay jisnay mummy ko choda aur uski wajah se main paida hui, aur aaj khud apnay baap ke ooper lait kar uskay lund ko saamney dekh rahi hoon, haath main pakar rahi hoon aur choos rahi hoon, aur papa apni he sagi beti ki choot ko chaat aur choos rahain hain.

"Papa meri choot main bhot khaarish ho rahi hay ... uf mar jaaoongi ... papa bhot khujli ho rahi hay ..."

Papa ne jub yeh suna tau muhjay apnay ooper say utar kar bed per chit lita dia, aur meri taangon ke beech main ghutno ke bal baith kar bolay"

"Janu, ab papa apni beti ke saath woh karnay ja rahain hain jo papa tumhari mummy ke saath kartey thay. Tayyar ho tum, Shehla?"

"Papa kia ab aap chodain gay mujhay? Papa bhot mota aur sakht lund hay aap ka, aur lamba bhi bhot hay. Itna motan lund kaisay meri choot main jayega, Papa?"

"Main ne apni beti ki choot chaat chaat kar itni chikni kar di hay ab ismay haathi ka lund bhi chala jayega. Daro mut Shehla, main pehlay sirf apnay lund ke topi choot main dalunga. Phir ahista ahista chodtay huay pura lund daalun ga."

Yeh kehtay huay papa ne meri dono taangay utha kar apnay kaandhon per rakhin, aur meri gol gol gaand ke neechay pillow rakh dia, jis se meri gaand aur choot bilku ooper uth gai. Papa meray opper aunhay ho gaey aur meri dono tits ko pakartay huay kaha: "Shehla .. pehli dafa tum mujh se chudwa rahi ho.. accha hay ke beti apnay baap ka lund khud apnay haath se pakar kar apni choot ke ched se lagai."

Main aur papa full masti main thay. Main ne right hand se papa ka tana hua lund jo meray choosnay ki wajah se chikna ho raha tha, pakar kar uski topi ko apni choot ke munh se lagaya.

Papa ne holay se apnay lund ko meri choot main push kia, aur iskay saath he meri choot ke ched main papa ke lund ki topi phans gai.

"Maza aya Shehla?" Papa ne kaha

Meri nazrain papa ki nazron se mili, aur main sharam se aankhain bund karleen. Papa ne bay ikhtiar ho kar, meray gaalon, meray honton aur meri tits ko pyar karna shru kar dia.

Ab jub kay papa ka lund apni beti ki choot main ja chuka tha, tau mujhay sharam aa rhai thi ke aaj main apnay hee sagay baap se chudwa rahi hoon.

"Jaanu, aur lund daalun andar?"

Main ne sharam se kutch na bol pai. Papa ne phir kaha: "Jaanu, sharma kyun rahi ho apnay papa se. Ab tau papa ka lund ja chuka hay tumhari chikni choot main. Bolo aur daalun andar; jaanu main puri tarah lund tumhari choot main daal kar chodna chahta hun. Wahi sahi chudai hoti hay".

Main phir bhi kutch na boli aur sirf meray munh se ahista se "hoon" nikal saka.

Papa jaisay he meri "hoon" suni, aur unhon ne ek he jhatkay se apna pura skaht aur lamba lund meri choot main daal dia. Meri choot chikna chikna paani chor rahi thi, magar phir bhi pehli dafa takleef ki wajah se meri cheekh nikal gai.

"Mar gai papa. Dard ho raha meri choot main bhot zor ka. Meri choot phat gai papa. Uf .... mar gai ..."

Papa ne meri taangain apnay kaandho se utaar kar meray jism ko apnay jism se chimta lia. Meri taangain khuli hui theen aur darmayan main papa ka lund pura ka pura meri choti see choot main ghusa hua tha. Meri cheekh sun kar papa ne mujhay pyar kartay huay kaha: "Jaanu, pehli pehli bar dard hota hai, 2 minute main yeh dard khatam ho jaey ga, aur phir maza aanay lagey ga. Waisey bhi tumhari choot is qadar tight hay ke rubber band ki tarah meray lund ko jakra hua hay".

Hum don baap beti kutch der tak unhi liptay rahey. Is doran papa mujhay kiss kartay rahey. Meri aankhon main talkeef ki wajah se aansu aa gaey thay. Papa ke pyar karnay se main theek honay lagi aur main ne bhi papa ke honton per pyar karna shru kia. Kiss kartay huay papa ne apni zaban meray munh main daal di, aur main papa ki zaban ko choosnay lagi. Papa ki zaban se mujhay apni choot ka taste aa raha tha. Main bhot ziad garam ho gai. Shehwat se mera bura haal honay laga. Papa ne phir meray boobs ko choosna shru kia, aur main buri tarah machalnay lagi.

Dard ab bilkul khatam ho gaya tha aur uski jaga waqai ab mujhay itna maza aa raha tha ke main bata nahin sakti. Main soch rahi thi ke mummy bhi isi tarah papa se chudwatey huay maza leti hongee.

Jub maza meri bardasht se bahar ho gaya, aur papa unhi meray ooper paray huay thay, tau mujh se raha na gaya: "Papa, kutch karain na .... meri choot main aag lagi hui hay ...."

Is kay saath hee main ne neechay se papa ko ooper ki taraf push kia. Papa apni beti ka ishara samjh gaye.

"Chalo ab apni jaanu ko gaud main le kar chodun ga"

Yeh kehtay huay papa ne mujhay apni gaud main bhar liya; is tarah ke meri dono taangain unho ne apni kamar (waist) ke gird lapait leen, aur meray dono baazu apni neck ke gird lapait liay, aur is tarah meri gaand ko neechay se pakartay huay woh bed se utar kar mujhay gaud main le kar farsh per kharay ho gaye. Papa ka lund usi tarah se pura meri choot main phansa hua tha.

Isi tarah uthaey huay papa mujhay dressing room ke full size mirron ke saamnay le gaye.

"Jaanu, dekho mirron main. Kaisay lag rahay hain hum dono baap beti?"

Main mirror main dekh kar buri tarah sharma gayee.

"Papa ... aap barey woh hain ..."

Papa mirror ke saamnay is tarah kharay thay ke meri back side mirror ki taraf thi. Main ne ek bar phir apni neck ghuma kar mirror ki taraf dekha. Hum dono baap beti bilkul nungay thay. Main papa ki gaud main bandarya ki tarah chimti hui thi. Papa ne apnay dono haathon se meri gaand ko thama hua tha. Papa ki unglian mujhay apni gaand ke gosht ke andar ghusti hui dikhai de rahi theen. Meri gaand ka surakh puri tarah se khula hua tha. Aur uskay neech papa ka mota sakht lund jur tak meri choot main phansa hua tha. Meri choot ke ched ne papa ke lund ko rubber band ki tarah grip kia hua tha.

"Kaisi buri lag rahi hoon main papa .... "

"Nahi jaanu, tum bhot haseen lag rahi ho. Bilkul utni haseen jitni ek larki mazey le kar chudwatey huay lagti hai.... Itna haseen jisam hay meri beti ka .... bilkul Blue Band Margarine ki tarah .. Dekho mirron main, kaisay papa ne apni beti ki moti tazi gaand ko pakra hua hay ... aur mera lund kaisa lag raha apni jaanu beti ki tight choot main ...."

Papa ne yeh kehtay huay meri gaand ko ooper uthaya, yahan tak ke unka lund khinchta hua topi tak bahar aa gaya.

"Bhot tight choot hay meri beti ki. Uf maza aa gaya jaanu .... is tarah tau 3 ya 4 dhakkon main he meri money nikal jai gi"

Yeh kehtay huay papa ne meri gaand ko neechay kartay huay apnay lund ko meri choot main push kia. Phir bahar nikala, phir kia. Aur phir baghair rukay teezi se woh apnay lund ko meri choot ke andar bahar kartay rahey. Papa puri tarah josh aur masti main aa gaye that. Unkay galey se ajeeb ajeeb awazain nikal rahi theen. Mujhay ab pata chala ke chud rahi hoon. Isay chodna kehtay hain. Meri apni haalat ghair ho chuki thi. Meray munh se bhi hai hai ki aur billi ki tarah ghurraney ki awaz nikal rahi thi.

"Chod raha hoon apni jaanu ko .... Lund ja raha teri choot main jaanu ... chud meray lund se .... Chud apnay papa ke lauray se .... Maza aar raha se .... Tight choot hai meri beti ki .... "

"Papa chodain apni beti ko .... Chodain mujhay ..... phaar dain meri choot ko ..... uf margai papa ... bohat sakht lund hay aap ka ...... uf lund pait main chala gaya meray ..... papa phat gai meri choot .... Chodain ..... chodain ..... uf chud gai main mummy. O' mummy papa ne chod dia mujhay ...... Papa zor se chodain .... Aur zor se chodain ..... dhakkay lagain zor zor se ...... maza aa raha hai ..."

Ab mera jism akarna shru ho raha tha. Mujhay apna dimag ghoomta hua mehsus ho raha tha. Meri choot ke saarey muschle akarnay lagay thay. Aur choot ke andar papa ka lund phoolnay aur pitchaknay laga tha.

"Uf jaanu meri money nikal rahi teri choot main." Is kay saath he papa ka jism buri tarah mujhay gaud main liay jhatkay marnay laga. Meri gaand ko pura neechay kheench kar apnay lund ke saath jama dia, aur neechay se apnay puri tarah meri choot main phansa dia.

Papa ki garam garam money ki pitchkarian mujhay apni choot ki gahraiyon main jaati hui saaf mehsus ho rahi thi. Is kay saath he main bhi khatam ho rahi thi aur meri choot ne paani chorna shru kar dia tha.

Hum dono baap beti ka jisam ab dheela parta ja raha tha. Paseenay main hum dono naha chukay thay. Meri choot main bilkul thand per gai thi. Papa ka lund bhi dheela parnaey laga tha. Magar abhi tak meri choot main hee.

Papa isi tarah mujhay gaud main liay liay, sofay per baith gaye, aur main apnay papa ke seenay ke saath unhi chipki rahi. Meri paseenay main bheegi hui chaatiyan papa ke balon bhary seenay se chimti hui theen.

Papa ka lund akhir naram ho kar meri choot se bahar nikal aaya, aur iskay saath hee meri choot se papa ki money beh beh kar bahar aaney lagi.

Sofa kharab na ho jaaye, is khayal se main ne neechay apni choot per haath rakh dia, aur papa ki money apnay haaton main le le kar apnay pair or boobs per malnay lagi.













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