Sunday, October 24, 2010

कामुक-कहानियाँ बदला पार्ट--34

कामुक-कहानियाँ

बदला पार्ट--34

गतान्क से आगे...
देविका पंचमहल केवल वसीयत के काम से नही आई थी बल्कि उसका मक़सद अपने
एस्टेट के बिज़्नेस के सप्लाइयर्स & खरीदारो से भी मिलने का था.इंदर भी
उसके साथ था & जितनी देर देविका कामिनी के साथ थी उतनी देर इंदर ने कुच्छ
काम निपटा लिए थे.देविका कामिनी के दफ़्तर से निकली & इंदर के साथ अपने 1
सप्लाइयर से मिलने चली गयी.उसके दफ़्तर पहुँच जैसे ही उसने कार से नीचे
कदम रखा की उसके मोबाइल पे प्रसून का फोन आ गया,"हां,बेटा बोलो..",बेटे
से बात करने मे उसे सड़क की भीड़ का ख़याल ही नही रहा & उसे बिल्कुल भी
पता नही चला की 1 कार उसकी तरफ से तेज़ी से बढ़ रही है.जब इंदर ने उसे
पकड़ के पीछे खींचा तो उसे ख़याल आया की वो सड़क के बीचे मे खड़ी थी.

"उसकी बाई बाँह पकड़ इंदर ने पीछे खींचा तो वो लड़खड़ा गयी & गिरने लगी
तब इंदर ने उसे अपनी बाहो मे संभाल लिया था.इंदर ने अपनी दोनो बाहे पीछे
से उसके बाजुओ पे लगा उसके गिरने को रोका & जब देविका खड़ी हुई तो उसकी
पीठ इंदर के सीने से सॅट गयी थी & उसे अपनी गंद पे इंदर के लंड का एहसास
हुआ मगर बस 2-3 पॅलो के लिए.देविका का बदन सिहर उठा था.इंदर ने उसे थामे
हुए रास्ता पार कराया,"आप ठीक है ना,मॅ'म?"

"हा..हां..".इंदर ने अपने हाथ उसके बदन से हटाए.

"चलिए.",दोनो सप्लाइयर के दफ़्तर की ओर बढ़ गये.

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रात देविका अपने बेडरूम मे लेटी दिन की बाते याद कर रही थी.कामिनी की बात
ने उसे चिंता मे डाल दिया था.उसे पूरा यकीन था की हो ना हो ये सब शिवा का
किया धरा था..कितना भरोसा किया था उसने उसपे & ये सिला दिया था उसने
इसका!शिवा की याद आई तो उसके दिल को उसके साथ बिताई राते याद आ गयी &
उसकी आँखे थोड़ी गीली हो गयी.उसने अपना ध्यान उस बेवफा इंसान से हटाया &
बाकी बातो के बारे मे सोचने लगी..वसीयत ने उसके बेटे का भविश्य महफूज़ कर
दिया था.आज उसने एस्टेट के बिज़्नेस से जुड़े सभी सप्लाइयर्स & एस्टेट के
प्रॉडक्ट्स के ग्राहको से मुलाकात कर बिज़्नेस के बारे मे सब समझ लिया
था.इंदर ने इसमे बहुत मदद की थी,हर जगह उसने देविका को ही सारी बाते करने
दी थी & फिर उस इंसान के बारे मे उस से उसकी राइ पुछि थी.इंदर ने उसके
बाद ही अपनी राइ बताई थी.देविका समझ गयी थी की इस बात से 2 मक़सद पूरे हो
रहे थे-पहला तो सारे लोगो को ये लगा की अब वो ही मालकिन है & दूसरा ये की
उसे इस तरह से हर इंसान की पहचान हो गयी & बिज़्नेस की बारीकिया भी समझ आ
गयी.

1 बार फिर इंदर की भलमांसाहत ने उसे च्छू लिया था.तभी उसे वो सड़क पार
करते हुए घाटी बात याद आई & उसके होंठो पे मुस्कान खेल गयी.इंदर की
मज़बूत बाँहो का एहसास होते ही उसका दिल किया था की वो अपने बदन को उनके
हवाले कर दे....& जब उसकी गंद पे उसके लंड ने च्छुआ था...अफ!..देविका के
तजुर्बे ने उसे ये बता दिया था की इंदर का लंड काफ़ी बड़ा था.उसका दिमाग़
बस नये-2 ख़यालो मे खोता जा रहा था.दिन का काम पूरा करते ही जैसे ही वो
लोग वापस एस्टेट के लिए रवाना होने लगे थे की इंदर ने उसके बाए पैर की ओर
इशारा किया था,"ये चोट कैसे लगी आपको,मॅ'म?"

देविका को तो पता भी नही था की उसके बाए पैर के अंगूठे के पास वो खरोंच
कैसे लगी जिसमे से अभी भी खून निकल रहा था.इंदर ने फ़ौरन कार रुकवाई & 1
दवा की दुकान से कुच्छ समान खरीद वापस कार मे आ बैठा & ड्राइवर को एस्टेट
चलने को कहा.दवा की दुकान से खरीदे समान के पॅकेट मे से उसने रूई & डेटोल
निकाला & दीर रूई को डेटोल से भिंगो के देविका के पैर पे लगाया तो देविका
जला से कराह उठी.इंदर झुका & होंठो से घाव पे फूँक वाहा डेटोल से पैदा
हुई जलन को शांत करने लगा मगर उसकी इस हरकत ने देविका के अंदर दूसरी ही
जलन पैदा कर दी.इंदर उसके दाए तरफ बैठा था & देविका ने अपना बाया पैर उठा
के अपने दाए घुटने पे रख दिया था.इंदर के होंठो की फूँक उसके जिस्म को
सिहरा रही थी.इंदर जानता था की देविका पे उसकी हर्कतो का के असर हो रहा
था.उसने घाव सॉफ करने के बाद उसपे मरहम लगाया & ऐसा करते वक़्त जानबूझ कर
देविका के पाँव के उपर उसकी सारी मे से निकली गोरी टाँग पे अपना बाया हाथ
रख दिया.देविका का गला सुख गया.इंदर ने मरहम के बाद पट्टी लगाई & अपना
हाथ खींच लिया.उस पल देविका को बहुत बुरा लगा,उसका दिल कर रहा था की वो
उसके हाथ को तोड़ा वैसे ही महसूस करती रहे.उसने हल्के से सर घुमा के इंदर
को देखा तो पाया की वो उसके जज़्बातो से बेख़बर फिर से किसी फाइल मे डूब
गया था.

ये बात याद आते ही देविका के जिस्म मे कसक सी उठी.उसे लगा था की शिवा के
जाने के बाद शायद ये एहसास उसे फिर कभी महसूस नही होगा मगर इंदर ने 1 बार
फिर उसके बदन को जगा दिया था.वो आँखे बंद कर उसके हाथो के एहसास को याद
करने लगी.1 बार फिर इंदर उसके पैर को छु रहा था मगर इस बार वो केवल पैर
तक नही रुका था बल्कि उपर बढ़ रहा था उसके घुटनो की तरफ फिर उस से भी
उपर.....हाथ देविका का था मगर उसके तस्साउर मे इस वक़्त इंदर अपने हाथो
से जन्नत की सैर करा रहा था.उसकी उंगलिया तेज़ी से उसकी पॅंटी मे घुसी
उसकी चूत से खेल रही थी...उसका दूसरा हाथ भी कपड़ो के उपर से ही उसकी
चूचियो को दबा रहा था......"ओह....इंदर.....!",झाड़ते ही उसके होंठो से
उसके दिल की ख्वाहिश ज़ुबान पे आ गयी.जिस्म मे उबाल रहा लहू जब शांत हुआ
तो देविका ने करवट बदल आँखे खोली.

वो अकेली थी बिस्तर पे,वाहा इंदर नही था.....क्या कभी वो होगा वाहा उसके
साथ?....काश ऐसा हो!..लेकिन वो तो उसकी तरफ देखता भी नही!देविका के चेहरे
पे झड़ने का जो सुकून था उसपे उदासी की परच्छाई पड़ गयी.वो पागल हो गयी
थी इंदर के लिए & उसे तो खबर ही नही थी!अपनी आँखे बंद कर उसने तकिये मे
मुँह च्छूपा लिया & सोने की कोशिश करने लगी.

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इंदर अपने क्वॉर्टर मे बैठा अपने फ़्लास्क से शराब के लूंबे-2 घूँट भर
रहा था.कार मे उसने देविका के चेहरे को पढ़ लिया था.वो जानता था की बस अब
कभी भी वो उसकी बाहो मे गिर जाएगी मगर नही वो खुद आगे कदम नही बढ़ाएगा
चाहे कुच्छ भी हो जाए..देविका खुद आएगी उसके पास..उसकी बाहो मे & फिर वो
उसे बताएगा की क्या होता है किसी का हक़ छ्चीनने का नतीजा!देविका सहाय
तुम्हारी ज़िंदगी की उल्टी गिनती भी अब शुरू हो गयी है!इंदर ने 1 लूंबा
घूँट भरा & आँखे बंद कर ली.

कामिनी 1 लूंबे,सफेद,झीने कपड़े मे लिपटी अपने हाथ हवा मे उठाए अपनी दाई
बाँह मे अपना चेहरा लगाए आँखे बंद किए खड़ी थी.बारिश की वजह से थोड़ी ठंड
हो गयी थी & इस कारण कामिनी के गुलाबी निपल्स कड़े हो गये थे & झीने
कपड़े मे से उभर रहे थे.वीरेन के हाथ तेज़ी से उसके रूप को कॅन्वस पे
उतारने मे जुटे थे.

उसने 1 नज़र अपनी महबूबा पे डाली.कपड़ा ऐसे लिपटा था बदन से मानो हवा मे
उड़ता आया & कामिनी के बदन से लग गया.कपड़े बाई आधी जाँघ & दाई टांग के
घुटने तक था.वीरेन ने कुच्छ आख़िरी स्ट्रोक्स लगाए अपने ब्रश के & फिर
अपनी प्रेमिका के पास आ खड़ा हुआ.

कामिनी ने जब उसकी गर्म साँसे अपने चेहरे पे महसूस की तब उसने अपनी आँखे
खोली.वीरेन उसे बाहो मे भर रहा था.कामिनी भी उस से लिपट गयी & दोनो 1
दूसरे के होंठो का रस पीने लगे.वीरेन के बेसबरा हाथो की हर्कतो से वो
पतला सा कपड़ा तुरंत ही कामिनी के बदन से अलग हो गया & वो पूरी की पूरी
नंगी अपने प्रेमी के बाहो मे क़ैद हो गयी.

दोनो बस 1 दूसरे को ऐसे चूमे जा रहे थे जैसे की अगर चूमना छ्चोड़ दिया तो
क़यामत आ जाएगी.कामिनी भी वीरेन के कपड़े उसके जिस्म से अलग करने मे जुटी
थी.कुच्छ ही पलो मे दोनो बिल्कुल नंगे 1 दूसरे से चिपते हुए थे.वीरेन का
लंड कामिनी के पेट पे दबा हुआ था & वो उसकी छुअन से पागल हो रही थी.

सांस लेने की गरज से दोनो आशिक़ो ने अपने होंठ अलग किए,"कमरे मे चलो.आज
यहा नही.",कामिनी की फरमाइश सुनते ही वीरेन ने उसे अपने मज़बूत बाजुओ मे
उठा लिया & उसे अपने बेडरूम मे ले आया.वीरेन के बिस्तर पे करीने से लगी
चादर थोड़ी ही देर मे सलवटो से भर गयी.दोनो प्रेमी 1 दूसरे से लिपटे उस
बिस्तर पे लोट रहे थे.

"आउच!!..",कामिनी ने वीरेन के बाल खींच उसे अपने सीने से उठाया,"..दाँत
नही बदतमीज़!",वीरेन ने उसकी बाई छाती पे हल्के से काट लिया
था,"..ऊव्वव...हा...हाअ....!",वीरेन ने उसकी दाँत को अनसुना करते हुए
अबके दाई छाती पे काट लिया & फिर अपनी नाक उसके पेट मे दफ़्न कर गुदगुदी
करने लगा जिस से कामिनी की हँसी छूट गयी.

"हा....हा...रूको...",कामिनी ने बालो को पकड़ उसे अपने पेट से उठाया &
फिर उसे पलट के उसके उपर चढ़ गयी & उसकी बाहे उसके सर के उपर ले जाके
अपने हाथो मे उसकी कलाई पकड़ के बिस्तर से लगा दी फिर झुकी & अपनी नाक से
वही हरकत वीरेन के पेट मे करने लगी.अब हंस-2 के पागल होने की बारी वीरेन
की थी.हंसते हुए वीरेन ने अपनी टाँगे उठा के अपनी कमर को ऐसे मोड़ा की
कामिनी उसके पेट से नीचे बिस्तर पे गिरी.उसके गिरते ही वीरेन उसके उपर
सवार हो गया तो कामिनी ने अपनी टाँगे कस के आपस मे भींच बंद कर ली.

"खोलो ना!",वीरेन ने अपने दाए घुटने से उसकी जाँघो को अलग करने की कोशिश की.

"ना!",आज कामिनी उसे तड़पने के मूड मे थी.

"तड़पाव मत जानेमन.देखो कैसे मचल रहा है तुम्हारे लिए.",वीरेन ने कामिनी
का दाया हाथ पकड़ा & उसने अपने जिस्मो के बीचे कामिनी की चूत के थोडा उपर
उसके पेट के निचले हिस्से पे दबे पाने लंड पे लगाया.

"मचलने दो.बहुत शरारती हो गये हो तुम & तुम्हारा ये!",उसने लंड को हल्के
से दबाया तो वीरेन का जोश और बढ़ गया,"..थोड़ी सज़ा मिलेगी तो सही हो
जाओगे दोनो!"

"प्लीज़,जान..खोलो ना!",वीरेन ने ज़िद की.

"नही.बिल्कुल नही!",कामिनी ने उसके गाल पे प्यार भारी चपत लगाई,"पहले 1
काम की बात सुनो."

"क्या?",वीरेन ने देखा की कामिनी मानने के मूड मे नही है तो उसने सर नीचे
झुकाया & उसकी दाई चूची पे जीभ चलाने लगा.

"उम्म....मना किया है ना!",कामिनी ने उसके बाल पकड़ उसे फिर से
उठाया,"..मैने तुम्हारी भाभी से बात की थी."

"कैसी बात?"

"वही दवा वाली."

"अच्छा.क्या कहा उसने?"

जैसा मैने सोचा था इसमे उनका कोई हाथ नही.मुझे लगता है उन्हे भी शिवा पे
ही शक़ है."

"तुम्हे अभी भी लगता है दोनो के बीच कुच्छ था?",वीरेन 1 बार फिर उसके
सीने पे झुक गया.

"हां."कामिनी ने उसका सर फिर से उठाया & करवट ले उसे अपने नीचे कर
दिया,"..उसमे मुझे कोई शक़ नही मगर अब शिवा ख़तरा बन गया है.",कामिनी
वीरेन के सीने को चूमते हुए नीचे बढ़ रही थी.लंड के पास पहुँच उसने
आस-पास चूमना शुरू कर दिया.वीरेन का दिल कर रहा था की कामिनी जल्दी से
उसके लंड को हाथो & मुँह मे ले उसकी तड़प को कुच्छ तो शांत करे मगर आज
कामिनी ने उसे उसी की दवा का स्वाद चखाने की ठानी थी.

कामिनी वीरेन की झांतो के बाहर उसकी जाँघ,उसके पेट को चूमे जा रही थी मगर
उसके ठुमकते हुए लंड की जैसे उसे कोई परवाह ही नही थी,"कामिनी.."

"शिवा कहा है क्या ये पता काम सकता है,वीरेन?",कामिनी ने उसकी बात को
अनसुना करते हुए उसकी दाई जाँघ को चूमते हुए नीचे बढ़ना शुरू किया.

"दफ़्तर से उसका पर्मनेंट अड्रेस निकलवा के शुरुआत की जा सकती
है.",कामिनी चूमते हुए उसके उपर तक पहुँच गयी & वीरेन की दाई टांग को उठा
उसके पैरो की उंगलियो को 1-1 कर चूसने लगी.ऐसी हर्कतो से वीरेन उसे पागल
बनाता था मगर आज वीरेन को पता चल रहा था की ऐसी तड़प मे कितना दर्द &
कितना मज़ा च्छूपा रहता है.

"..लेकिन मुझे नही लगता की उसके आगे कुच्छ हो सकता है.बहुत मुश्किल होगी
उसे ढूँदने मे क्यूकी ..आअहह....",कामिनी उसके पैर की उंगलियो से खेलने
के बाद वापस उसके लंड के पास आई थी & उसके आंडो के बीचोबीच बहुत ही हल्के
से चूमा था-इतना हल्के की उसके होंठ बस आंडो की सिकुड़ी सी स्किन को बस
च्छू से गये थे,"..क्यूकी वो चाहता नही होगा की कोई उसे ढूंदे.अब ऐसे
आदमी का पता लगाना तो दिक्कत भर काम होगा ही."

"ना..मेरी कसम है तुम्हे मिस्टर.वीरेन सहाय..",कामिनी ने उसके हाथो को
फिर से उसके सर के उपर ले जा के बिस्तर पे रख दिया,"..जब तक मैं ना काहु
मेरे जिस्म को नही च्छुओगे."कामिनी अब दोनो घुटने उसकी कमर के दोनो ओर
टिकाए उसके लंड के उपर बैठ रही थी.जैसे ही चूत लंड के बिल्कुल करीब
पहुँची कामिनी ने बैठना रोक दिया.वीरेन पागल हो अपनी कमर उचका के अपने
प्यासे लंड को चूत मे घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगा.

"चुपचाप लेटे रहो वरना चली जाऊंगी!",कामिनी की डाँट से तड़प्ता वीरेन
शांत हो नीचे लेट गया.कामिनी हौले-2 नीचे हुई & चूत को लंड की नोक से
च्छुउआ दिया.

"आहह..!",वीरेन आह भरता हुआ सर उठा के नीचे देखने लगा मगर कामिनी ने चूत
को और नीचे नही किया.वीरेन ने सोचा की बात बदली जाए तो शायद कामिनी का
ध्यान इस तड़प भरे खेल से थोड़ा हटे.

"आख़िर तुम उसे क्यू ढूंडना चाहती हो?"

"क्यूकी तुम्हारे परिवार को सबसे ज़्यादा ख़तरा उसी से है.अब उसे केवल
दौलत की हवस नही बल्कि बेइज़्ज़ती का गुस्सा भी होगा & वो ज़रूर बदला
लेना चाहेगा इस बात का.",कामिनी के नाख़ून वीरेन के सीने पे घूम रहे थे &
उसकी चूत अभी भी हवा मे ही थी.कामिनी झुकी & अपनी कमर हवा मे यू उठा दी
की वीरेन को उसकी चौड़ी गंद के दर्शन तो होते रहें मगर उसकी चूत उसके लंड
को ना च्छू पाए.

"ये काम कैसे होगा,कामिनी?",कामिनी ने वीरेन के सीने पे चूमते हुए अपनी
गंद बड़े मदहोशी भरे अंदाज़ मे लहराना शुरू कर दिया था.माशूक़ा की कसम से
बँधा वीरेन बस बेबस हो देख सकता था मगर अपनी जोशीली हसरातो को पूरा नही
कर सकता था.

"वो सब मुझपे छ्चोड़ो.कुच्छ सोचती हू.",कामिनी ने देखा की वीरेन के लंड
पे प्रेकुं की बूंदे चमक रही थी & वो बेचैनी से अपनी कमर बस बिस्तरे पे
गंद जमाए हुए हिला रहा था.कामिनी उसके सीने से उठी & अपने दोनो हाथ वाहा
जमा दिए & फिर से वीरेन के लंड पे बैठने लगी.इस बार उसने सू ज़्यादा नही
तडपया 7 चूत मे लंड को दाखिल होने दिया.

वीरेन के होंठो पे मुस्कान फैल गयी & आँखे मज़े मे बंद हो गयी मगर ये
सुकून बस कुच्छ ही देर के लिए था क्यूकी कामिनी उसके सूपदे से ज़्यादा
लंड को अंदर ले ही नही रही थी & बस अपनी कमर उसी पे हिला रही थी.वीरेन की
आहे कमरे मे गूँज रही थी,"ओह्ह्ह....कामिनी प्लीज़.....और नीचे हो....लंड
को पूरा अंदर लो ना!"

"लेती हू,जान.ऐसी भी क्या जल्दी है!",कामिनी ने उसे और तडपया मगर इस बार
थोड़ा और नीचे बैठ गयी,अब लंड आधा अंदर था & वीरेन नीचे से कमर हिला रहा
था.कामिनी ने अपने हाथ सीने से नीचे ला उसकी कमर के बगल मे लगाए & उसे
हिलने से रोक दिया.वीरेन की शक्ल देख के ऐसा लग रहा था की वो अब जैसे रो
देगा.

कामिनी को भी अब ज़्यादा तड़पाना ठीक नही लगा.वो और नीचे हुई & अब लंड जड
तक उसकी चूत मे था.वीरेन ने खुशी से मुस्कुराते हुए कमर हिला चुदाई शुरू
करनी चाही & अपने हाथ उसकी चूचियो की ओर बढ़ाए,"ना.अभी मैने नही कहा है."

वीरेन ने महबूबा की बात सुन हाथ पीछे खींच बिस्तर पे रख लिए & कमर भी
हिलाना रोक दिया.थोड़ी देर पहले तक उसकी ख्वाहिश थी की उसका लंड कामिनी
की नाज़ुक,कसी चूत मे जड तक धँस जाए-वो ख्वाहिश पूरी हो गयी थी मगर फिर
भी वो तड़प रहा था क्यूकी कामिनी उसके लंड को अंदर लिए बस शांत बैठी उसके
सीने के बालो मे उंगलिया फिरा रही थी जबकि वो चुदाई के लिए पागल हो रहा
था.

"प्लीज़,कामिनी...प्लीज़..मुझे चोदने दो!"

"लंड तो है ही अंदर.अब और क्या करना है.ऐसे ही कितना अच्छा लग रहा
है.",कामिनी ने अपनी बाहे उपर हवा मे ले जा अंगड़ाई ली & अपनी 38द साइज़
की कसी,मोटी चूचियो से अपने आशिक़ को ललचाया.वीरेन का दिल तो किया की
हाथो मे भर उसकी चूचियो को मसल्ते हुए वो उसे नीचे गिरा दे & फिर उसके
उपर सवार हो उसकी ऐसी चुदाई करे की वो ज़िंदगी भर याद रखे मगर वो बेबस
था-प्रेमिका ने कसम जो दे रखी थी उसे!

कामिनी ने वैसे ही हाथ उठाए हुए अपने बालो से खेलते हुए बहुत धीरे-2 अपनी
कमर हिलाई तो वीरेन को थोड़ा चैन पड़ा.उसका दिल कर रहा था की कामिनी तेज़
रफ़्तार से कमर हिलाए ताकि उसके तड़प्ते लंड को फ़ौरन सुकून मिल
जाए.कामिनी ने कमर हिलाते हुए अपने बाए घुटने को बिस्तर से उठाया & बाए
पैर को वीरेन के सीने पे रख दिया,उसका दाया घुटना भी बिस्तर से उठ चुका
था मगर दाया पैर उसकी गंद के बगल मे बिस्तर पे ही पड़ा था.वीरेन को चूत
मे धंसा उसका लंड & उसपे कसी कामिनी की गुलाबी चूत की हरकते सॉफ दिख रही
थी & उसकी मस्ती हर पल बढ़ती जा रही थी.

कामिनी ने बाए पैर के अंगूठे & उंगली के बीच वीरेन के दाए निपल को दबोच
के उसपे चूटी काट ली & फिर अंगूठे से उसके सीने पे दायरे बनाते हुए
खरोंछने लगी.वीरेन के लिए ये बिल्कुल नया तजुर्बा था.आमतौर पे लड़कियाँ
बिस्तर मे उसकी कामुक हर्कतो से बेचैन हो उसके सामने हथ्यार डाल देती थी
मगर आज पहली बार किसी लड़की ने उस से हथ्यार डलवाए थे...नही 1 और
थी.....वीरेन ने सर झटका & उस लड़की का ख़याल दिमाग़ से निकाला..वो उस
बेवफा को याद कर इस हसीन,मस्त लम्हे को बर्बाद नही करना चाहता था.

कामिनी ने अपने हाथ सहारे के लिए पीछे वीरेन की मज़बूत जाँघो पे टीका
दिया थे & अपने बाए पैर से उसके सीने को मसल्ते हुए वो अब तेज़ी से कमर
हिला रही थी.इस मस्त खेल ने उसकी धड़कने भी बहुत तेज़ कर दी थी.उसकी आँखो
मे जिस्म मे पैदा हो रहे मज़े की खुमारी सॉफ झलक रही थी.जिस्मानी खेल की
मस्ती से उसकी बोझल पलके उसकी काली आँखो को बड़ी नशीली बना रही थी.वीरेन
उन नशीली आँखो की शराब अपनी आँखो से पीता हुआ अपनी कमर हिला रहा
था.कामिनी की चूत अब सिकुड के उसके लंड को और कस रही थी.वो जानता था की
वो झड़ने वाली है.उसका हाल भी उसी के जैसा था.दोनो प्रेमी आँखो के ज़रिए
1 दूसरे के दिल का हाल समझते हुए चुदाई कर रहे थे.

"आनह...ऊओवव्व...उउन्न्ह.....ऊउउउईईईईईइ......!",कामिनी की आहे बहुत तेज़
हो गयी थी & उसकी कमर की रफ़्तार भी.उसकी चूत मे वही मस्ताना तनाव बन गया
था जिसके दूर होने पे उसे वो अनोखा मज़ा हासिल होता था जिसे दुनिया झड़ना
कहती थी.वीरेन ने इस वक़्त अपने हाथो को कैसे अपने काबू मे रखा था वोही
जानता था.उसके हाथ तड़प रहे थे माशूक़ा के गदराए बदन की गोलाईयो को
मसल्ने के लिए मगर उसकी हसरातो से भी बड़ी थी महबूबा की कसम जिसे वो किसी
भी कीमत पे नही तोड़ सकता था.

कामिनी उसके हाल को बखूबी समझ रही थी & उसे बहुत प्यार आ रहा था अपने
आशिक़ पर जो उसकी कसम की इतनी इज़्ज़त कर रहा था.उसने तो खेल-2 मे ऐसा
कहा था & उसे ज़रा भी उमीद नही थी की जब जोश दोनो के सर चढ़ जाएगा उस
वक़्त भी वीरेन उसकी कसम का ख़याल रखेगा मगर वीरेन ने उसकी कसम निभा उसके
दिल मे और बड़ी जगह बना ली थी.

दिल मे महबूब के लिए उमड़ते प्यार & चूत मे धन्से उसके लूंबे,तगड़े लंड
की हर्कतो से जिस्म मे पैदा होती मदहोशी ने अपना असर दिखाया & उसकी आहे
और तेज़ हो गयी,वो वीरेन की जंघे थामे और पीछे झुक गयी & अपनी चूचिया हवा
मे उठा दी.उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी & उसकी चूत लंड पे अपनी
मस्तानी हरकते कर रही थी.उसकी चूत का तनाव अपनी शिद्दत पे पहुचने के बाद
कम हो रहा था & उसे वोही अनोखा एहसास हो रहा था जिसे दुनिया झड़ना कहती
है.

उसे चूत मे कुच्छ गरम सा महसूस हुआ & कानो मे वीरेन की आहे सुनाई दी.उसने
आँखे खोली तो देखा की वीरेन का बदन भी झटके खा रहा है & उसका गढ़ा वीर्या
उसकी चूत मे भर रहा है.झड़ने के बाद दोनो लंबी-2 साँसे लेते हुए 1 दूसरे
को देख रहे थे,"वीरेन....जान..मुझे छुओ.",कामिनी ने अपनी कसम वापस ली तो
जैसे वीरेन को किसी क़ैद से छुटकारा मिला.हाथ बढ़ा उसने अपनी हसीन
माशुक़ा को अपने सीने पे गिराया & फिर बाँहो मे भर करवट ले उसे अपने नीचे
दबा उसे चूमने लगा.झड़ने के बावजूद लंड पूरा मुलायम नही हुआ था.वीरेन ने
आधे सख़्त लंड से ही फिर से धक्के लगाना शुरू कर दिया.कामिनी की मस्तानी
अदाओं ने उसे पागल कर दिया था & आज वो उसकी चूत से लंड निकालना ही नही
चाहता था.कामिनी भी उसकी हालत समझ गयी थी,उसने अपनी बाहो मे उसे कसा &
अपने होंठ उस से सटा दिए & उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

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क्रमशः.......

बदला पार्ट--34

गतान्क से आगे...
devika Panchmahal kewal vasiyat ke kaam se nahi aayi thi balki uska
maqsad apne estate ke business ke suppliers & kharidaro se bhi milne
ka tha.inder bhi uske sath tha & jitni der devika kamini ke sath thi
utni der inder ne kuchh kaam nipta liye the.devika kamini ke daftar se
nikli & inder ke sath apne 1 supplier se milne chali gayi.uske daftar
pahunch jaise hi usne car se neeche kadam rakha ki uske mobile pe
prasun ka fone aa gaya,"haan,beta bolo..",bete se baat karne me sue
sadak ki bhid ka khayal hi nahi raha & use bilkul bhi pata nahi chala
ki 1 car uski taraf se tezi se badh rahi hai.jab inder ne use pakad ke
peechhe khincha to use khayal aaya ki vo sadak ke beeche me khadi thi.

"uski bayi banh pakad inder ne peechhe khncha to vo ladkhada gayi &
girne lagi tab inder ne use apni baaho me sambhal liya tha.inder ne
apni dono baahe peechhe se uske bazuo pe laga uske gorne ko roka & jab
devika khadi hui to uski pith inder ke seene se sat gayi thi & use
apni gand pe inder ke lund ka ehsas hua magar bas 2-3 palo ke
liye.devika ka badan sihar utha tha.inder ne use thame hue rasta paar
karaya,"aap thik hai na,ma'am?"

"ha..haan..".inder ne apne hath uske badan se hataye.

"chaliye.",dono supplier ke daftar ki or badh gaye.

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raat devika apne bedroom me leti din ki baate yaad kar rahi thi.kamini
ki baat ne use chinta me daal diya tha.use pura yakin tha ki ho na ho
ye sab shiva ka kiya dhara tha..kitna bharosa kiya tha usne uspe & ye
sila diya tha usne iska!shiva ki yaad aayi to uske dil ko uske sath
bitayi raate yaad aa gayi & uski aankhe thodi gili ho gayi.usne apna
dhyan us bewafa insan se hataya & baki baato ke bare me sochne
lagi..vasiyat ne uske bete ka bhavishya mehfuz kar diya tha.aaj usne
estate ke business se jude sabhi suppliers & estate ke products ke
grahako se mulakat kar business ke bare me sab samajh liya tha.inder
ne isme bahut madad ki thi,har jagah usne devika ko hi sari baate
karne di thi & fir us insa ke bare me us se uski rai puchhi thi.inder
ne uske baad hi apni rai batai thi.devika samajh gayi thi ki is baat
se 2 maqsad pure ho rahe the-pehla to sare logo ko ye laga ki ab vo hi
malkin hai & dusra ye ki use is tarah se har insan ki pehchan ho gayi
& business ki barikiya bhi samajh aa gayi.

1 bar fir inder ki bhalmansahat ne use chhu liya tha.tabhi use vo
sadak parr karte hue ghati baat yaad aayi & uske hotho pe muskan khel
gayi.inder ki mazboot baho ka ehsas hote hi uska dil kiya tha ki vo
apne badan ko unke hawale kar de....& jab uski gand pe uske lund ne
chhua tha...uff!..devika ke tajurbe ne use ye bata diya tha ki inder
ka lund kafi bada tha.uska dimagh bas naye-2 khayalo me khota ja raha
tha.din ka kaam pura karte hi jaise hi vo log vapas estate ke liye
ravana hone lage the ki inder ne uske baaye pair ki or ishara kiya
tha,"ye chot kaise lagi aapko,ma'am?"

devika ko to pata bi nahi tha ki uske baye pair ke anguthe ke paas vo
kharonch kaise lagi jisme se abhi bhi khun nikal raha tha.inder ne
fauran car rukwai & 1 dawa ki dukan se kuchh saman kharid vapas car me
aa baitha & driver ko estate chalne ko kaha.dawa ki dukan se kharide
saman ke packete me se usne rui & dettol nikala & dir rui ko dettol se
bhingo ke devika ke pair pe lagaya to devika jala se karah uthi.inder
jhuka & hotho se ghav pe funk vaha dettol se paida hui jalan ko shant
karne laga magar uski is harkat ne devika ke andar dusri hi jalan
paida kar di.inder uske daye taraf baitha tha & devika ne apna baya
pair utha ke apne daye ghutne pe rakh diya tha.inder ke hotho ki
phoonk uske jism ko sihra rahi thi.inder janta tha ki devika pe uski
harkato ka kay asar ho raha tha.usne ghav saaf karne ke baad uspe
marham lagaya & aisa karte waqt jaanbujh kar devika ke panv ke upar
uski sari me se nikli gori tang pe apna baya hath rakh diya.devika ka
gala sukh gaya.inder ne marham ke baad patii lagayi & apna hath khicnh
liya.us pal devika ko bahut bura laga,uska dil kar raha tha ki vo uske
hath ko taumra vaise hi mehsus karti rahe.usne halke se sar ghuma ke
inder ko dekha to paya ki vo uske jazbato se bekhabar fir se kisi file
me dub gaya tha.

ye baat yaad aate hi devika ke jism me kasak si uthi.use laga tha ki
shiva ke jane ke baad shayad ye ehsas use fir kabhi mehsus nahi hoga
magar inder ne 1 baar fir uske badan ko jaga diya tha.vo aankhe band
kar uske hatho ke ehsas ko yaad karne lagi.1 bar fir inder uske pair
ko chhu raha tha magar is baar vo kewal pair tak nahi ruka tha balki
upar badh raha tha uske ghutno ki taraf fir us se bhi upar.....hath
devika ka tha magar uske tassavur me is waqt inder apne hatho se
jannta ki sair kara raha tha.uski ungliya tezi se uski panty me ghusi
uski chut se khel rahi thi...uska dusra hath bhi kapdo ke upar se hi
uski chhatiyo ko daba raha tha......"ohhhhh....inder.....!",jhadte hi
uske hotho se uske dil ki khwahish zuban pe aa gayi.jism me ubal raha
lahu jab shant hua to devika ne karwat badal aankhe kholi.

vo akeli thi bistar pe,vaha inder nahi tha.....kya kabhi vo hoga vaha
uske sath?....kash aisa ho!..lekin vo to uski taraf dekhta bhi
nahi!devika ke chehre pe jhadne ka jo sukun tha uspe udasi ki
parchhayi pad gayi.vo pagal ho gayi thi inder ke liye & use to khabar
hi nahi thi!apni aankhe band kar usne takiye me munh chhupa liya &
sone ki koshish karne lagi.

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inder apne quarter me baitha apne flask se sharab ke lumbe-2 ghunt
bhar raha tha.car me usne devika ke chehre ko padh liya tha.vo janta
tha ki bas ab kabhi bhi vo uski baaho me gir jayegi magar nahi vo khud
aage kadam nahi badhayega chahe kuchh bhi ho jaye..devika khud aayegi
uske paas..uski baaho me & fir vo use batayega ki kya hota hai kisi ka
haq chheenane ka nateeja!devika sahay tumhari zindagi ki ulti ginti
bhi ab shuru ho gayi hai!inder ne 1 lumba ghunt bhara & aankhe band
kar li.

Kamini 1 lumbe,safed,jhine kapde me lipti apne hath hawa me uthaye
apni dayi banh me apna chehra lagaye aankhe band kiye khadi thi.barish
ki vajah se thodi thand ho gayi thi & is karan kamini ke gulabi
nipples kade ho gaye the & jhine kapde me se ubhar rahe the.viren ke
hath tezi se uske roop ko canvas pe utarne me jute the.

usne 1 nazar apni mehbuba pe dali.kapda aise lipta tha badan se mano
hawa me udta aaya & kamini ke badan se lag gaya.kapde bayi aadhi jangh
& dayi tang ke ghutne tak tha.viren ne kuchh aakhiri strokes lagaye
apne brush ke & fir apni premika ke paas aa khada hua.

kamini ne jab uski garm saanse apne chehre pe mehsus ki tab usne apni
aankhe kholi.viren use baaho me bhar raha tha.kamini bhi us se lipat
gayi & dono 1 dusre ke hotho ka ras pine lage.viren ke besabra hatho
ki harkato se vo patla sa kapda turant hi kamini ke badan se alag ho
gaya & vo puri ki puri nangi apne premi ke baaho me qaid ho gayi.

dono bas 1 dusre ko aise chume ja rahe the jaise ki agar chumna chhod
diya to qayamat aa jayegi.kamini bhi viren ke kapde uske jism se alag
karne me juti thi.kuchh hi palo me dono bilkul nanage 1 dusre se
chipte hue the.viren ka lund kamini ke pet pe daba hua tha & vo uski
chhuan se pagal ho rahi thi.

sans lene ki garaj se dono aashiqo ne apne honth alag kiye,"kamre me
chalo.aaj yaha nahi.",kamini ki farmasih sunte hi viren ne use apne
mazbut bazuo me utha liya & use apne bedroom me le aaya.viren ke
bistar pe karine se lagi chadar thodi hi der me salwato se bhar
gayi.dono premi 1 dusre se lipte us bistar pe lot rahe the.

"ouch!!..",kamini ne viren ke baal khinch use apne seene se
uthaya,"..dant nahi badtamiz!",viren ne uski bayi chhati pe halke se
kaat liya tha,"..oowww...haa...haaa....!",viern ne uski dant ko ansuna
karte hue abke dayi chhati pe kaat liya & fir apni naak uske pet me
dafn kar gudgudi karne laga jis se kamini ki hansi chhut gayi.

"haa....haa...ruko...",kamini ne baalo ko pakad use apne pet se uthaya
& fir use palat ke uske upar chadh gayi & uski baahe uske sar ke upar
le jake apne hatho me uski kalaiya pakad ke bistar se laga di fir
jhuki & apni naak se vahi harkat viren ke pet me karne lagi.ab hans-2
ke pagal hone ki bari viren ki thi.hanste hue viren ne apni tange utha
ke apni kamar ko aise moda ki kamini uske pet se neeche bistar pe
giri.uske girte hi viern uske uapr sawar ho gaya to kamini ne apni
taneg kas ke aapas me bhinch band kar li.

"kholo na!",viren ne apne daye ghutne se uski jangho ko alag karne ki
koshish ki.

"na!",aaj kamini use tadpane ke mood me thi.

"tadpao mat janeman.dekho kaise machal raha hai tumhare liye.",viren
ne kamini ka daya hath pakda & usem adono jismo ke beeche kamini ki
chut ke thoda upar uske pet ke nichle hisse pe dabe pane lund pe
lagaya.

"machalne do.bahut shararati ho gaye ho tum & tumhara ye!",usne lund
ko halke se dabaya to viren ka josh aur badh gaya,"..thodi saza milegi
to sahi ho jaoge dono!"

"please,jaan..kholo na!",viren ne zid ki.

"nahi.bilkul nahi!",kamini ne uske gaal pe pyar bhari chapat
lagayi,"pehle 1 kaam ki baat suno."

"kya?",viren ne dekha ki kamini maanane ke mood me nahi hai to usne
sar neeche jhukaya & uski dayi choochi pe jibh chalane laga.

"umm....mana kiya hai na!",kamini ne uske baal pakad use fir se
uthaya,"..maine tumhari bhabhi se baat ki thi."

"kaisi baat?"

"vahi dawa wali."

"achha.kya kaha usne?"

jaisa maine socha tha isme unka koi hath nahi.mujhe lagta hai unhe bhi
Shiva pe hi shaq hai."

"tumhe abhi bhi lagta hai dono ke beech kuchh tha?",viren 1 bar fir
uske seene pe jhuk gaya.

"haan."kamini ne uska sar fir se uthaya & karwat le use apne neeche
kar diya,"..usme mujhe koi shaq nahi magar ab shiva khatra ban gaya
hai.",kamini viren ke seene ko chumte hue neeche badh rahi thi.lund ke
paas pahunch usne aas-pas chumna shuru kar diya.viren ka dil kar raha
tha ki kamini jaldi se uske lund ko hatho & munh me le uski tadap ko
kuchh to shant kare magar aaj kamini ne use usi ki dawa ka swad
chakhane ki thani thi.

kamini viren ki jhanto ke bahar uski jangh,uske pet ko chume ja rahi
thi magar uske thumakte hue lund ki jaise use koi parwah hi nahi
thi,"kamini.."

"shiva kaha hai kya ye pata kag sakta hai,viren?",kamini ne uski baat
ko ansuna karte hue uski dayi jangh ko chumte hue neeche badhna shuru
kiya.

"daftar se uska permanent address nikalwa ke shuruat ki ja sakti
hai.",kamini chumte hue suke apiro tak pahunch gayi & viren ki dayi
tang ko utha uske pairo ki ungliyo ko 1-1 kar chusne lagi.aisi harkato
se viren use pagal banata tha magar aaj viren ko pata chal raha tha ki
aisi tadap me kitna dard & kitna maza chhupa rehta hai.

"..lekin mujhe nahi lagta ki uske aage kuchh hosa kta hai.bahut
mushkil hogi use dhoondne me kyuki ..aaahhh....",kamini uske apiro ki
ungliyo se khelne ke baad vapas uske lund ke paas aayi thi & uske ando
ke beechobeech bahut hi halke se chuma tha-itna halke ki uske honth
bas ando ki sikiudi si skin ko bas chhu se gaye the,"..kyuki vo chahta
nahi hoga ki koi use dhunde.ab aise aadmi ka pata lagana to dikkat
bhar kaam hoga hi."

"na..meri kasam hai tumhe Mr.Viren Sahay..",kamini ne uske hatho ko
fir se uske sar ke upar le ja ke bistar pe rakh diya,"..jab tak main
na kahu mere jism ko nahi chhuoge."kamini ab dono ghutne uski kamar ke
dono or tikaye uske lund ke upar baith rahi thi.jaise hi chut lund ke
bilkul karib pahunchi kamini ne baithna rok diya.viren pagal ho apni
kamar uchka ke apne pyase lund ko chut me ghusane ki nakam koshish
karne laga.

"chupchap lete raho varna chali jaoongi!",kamini ki dant se tadapta
viren shant ho neeche let gaya.kamini haule-2 neeche hui & chut ko
lund ki nok se chhuua diya.

"aahh..!",viren aah bharta hua sar utha ke neeche dekhne laga magar
kamini ne chut ko aur neeche nahi kiya.viren ne socha ki baat badali
jaye to shayad kamini ka dhyan is tadap bhaer khel se thoda hate.

"aakhir tum use kyu dhundna chahti ho?"

"kyuki tumhare parivar ko sabse zyada khatra usi se hai.ab use kewal
daulat ki hawas nahi balki beizzati ka gussa bhi hoga & vo zarur badla
lena chahega is baat ka.",kamini ke nakhun viren ke seene pe ghum rahe
the & uski chut abhi bhi hawa me hi thi.kamini jhuki & apni kamar hawa
me yu utha di ki viren ko uski chaudi gand ke darshan to hote rahen
magar uski chut uske lund ko na chhu paye.

"ye kaam kaise hoga,kamini?",kamini ne viern ke seene pe chumte hue
apni gand bade madhoshi bhare andaz me lehrana shuru kar diya
tha.mashooqa ki kasam se bandha viren bas bebas ho dekh sakta tha
magar apni joshili hasrato ko pura nahi kar sakta tha.

"vo sab mujhpe chhodo.kuchh sochti hu.",kamini ne dekha ki viren ke
lund pe precum ki boonde chamak rahi thi & vo bechaini se apni kamar
bas bistare pe gand jamayae hue hila raha tha.kamini uske seene se
uthi & apne dono hath vaha jama diye & fir se viren ke lund pe baithne
lagi.is baar usne sue zyada nahi tadpaya 7 chut me lund ko dakhil hone
diya.

viren ke hotho pe muskan fail gayi & aankhe maze me band ho gayi magar
ye sukun bas kuchh hi der ke liye tha kyuki kamini uske supade se
zyada lund ko andar le hi nahi rahi thi & bas apni kamar usi pe hila
rahi thi.viren ki aahe kamre me gunj rahi thi,"ohhh....kamini
please.....aur neeche ho....lund ko puar andar lo na!"

"leti hu,jaan.aisi bhi kya jaldi hai!",kamini ne use aur tadpaya magar
is baar thoda aur neeche baith gayi,ab lund aadha andar tha & viren
neeche se kamar hila raha tha.kamini ne apne hath seene se neeche la
uski kamar ke bagal me lagaye & use hilne se rok diya.viren ki shakl
dekh ke aisa lag raha tha ki vo ab jaise ro dega.

kamini ko bhi ab zyada tadpana thik nahi laga.vo aur neeche hui & ab
lund jud tak uski chut me tha.viren ne khushi se muskurate hue kamar
hila chudai shuru karni chahi & apne hath uski choochiyo ki or
badhaye,"na.abhi maine nahi kaha hai."

viren ne mehbooba ki baat sun hath peechhe khinch bistar pe rakh liye
& kamar bhi hilana rok diya.thodi der pehle tak uski khwahish thi ki
uska lund kamini ki nazuk,kasi chut me jud tak dhans jaye-vo khwahish
puri ho gayi thi magar fir bhi vo tadap raha tha kyuki kamini uske
lund ko andar liye bas shant baithi uske seene ke balo me ungliya fira
rahi thi jabki vo chudai ke liye pagal ho raha tha.

"please,kamini...please..mujhe chodne do!"

"lund to hai hi andar.ab aur kya karna hai.aise hi kitna achha lag
raha hai.",kamini ne apni baahe upar hawa me le ja angdayi li & apni
38D size ki kasi,moti choochiyo se apne aashiq ko lalchaya.viren ka
dil to kiya ki hatho me bhar uski choochiyo ko masalte hue vo use
neeche gira de & fir uske upar sawar ho uski aisi chudai akre ki vo
zinadagi bhar yaad rakhe magar vo bebas tha-premika ne kasam jo de
rakhi thi use!

kamini ne vaise hi hath uthaye hue apne baalo se khelte hue bahut
dheere-2 apni kamar hilayi to viren ko thoda chain pada.uska dil kar
raha tha ki kamini tez raftar se kamar hilaye taki uske tadapte lund
ko fauran sukun mil jaye.kamini ne kamar hilate hue apne baye ghutne
ko bistar se uthaya & baye pair ko viren ke seene pe rakh diya,uska
daya ghutna bhi bistar se utha chuka tha magar daya pair uski gand ke
bagal me bistar pe hi pada tha.viren ko chut me dhansa uska lund &
uspe kasi kamini ki gulabi chut ki harkate saaf dikh rahi thi & uski
masti har pal baadhti ja rahi thi.

kamini ne baye pair ke anguthe & ungli ke beech viren ke daye nipple
ko daboch ke uspe chuti kaat li & fir anguthe se uske seene pe dayre
banate hue kharonchne lagi.viren ke liye ye bilkul naya tajurba
tha.aamtaur pe ladkiyan bistar me uski kamuk harkato se bechain ho
uske samne hathyar daal deti thi magar aaj pehli baar kisi ladki ne us
se hathyar dalwaye the...nahi 1 aur thi.....viren ne sar jhatka & us
ladki ka khayal dimagh se nikala..vo us bewafa ko yaad kar is
hasin,mast lamhe ko barbad nahi karna chahta tha.

kamini ne pane hath ashare ke liye peechhe viren ki mazbut jangho pe
tika diya the & apne baye pair se uske seene ko masalte hue vo ab tezi
se kamar hila rahi thi.is mast khel ne uski dhadkane bhi bahut tez kar
di thi.uski aankho me jism me paida ho rahe maze ki khumari saaf
jhalak rahi thi.jismani khel ki masti se uski bojhal palke uski kali
aankho ko badi nashili bana rahi thi.viren un nashili aankho ki sharab
apni aankho se pita hua apni kamar hila raha tha.kamini ki chut ab
sikud ke uske lund ko aur kas rahi thi.vo janta tha ki vo jhadne wali
hai.uska haal bhi usi ke jaisa tha.dono premi aankho ke zariye 1 dusre
ke dil ka haal samajhte hue chudai kar rahe the.

"aanhhh...ooowww...uunnhhhh.....oouuuiiiiiiiiiii......!",kamini ki
aahe bahut tez ho gayi thi & uski kamar ki raftar bhi.uski chut me
vahi mastana tanav ban gaya tha jiske dur hone pe use vo anokha maza
hasil hota tha jise duniya jhadna kehti thi.viren ne is waqt apne
hatho ko kaise apne kabu me rakha tha vohi janta tha.uske hath tadap
rahe mashooqa ke gadraye badan ki golaiyo ko masalne ke liye magar
uski hasrato se bhi badi thi mehbooba ki kasam jise vo kisi bhi keemat
pe nahi tod sakta tha.

kamini uske haal ko bakhubi samajh rahi thi & use bahut pyar aa raha
tha apne aashiq par jo uski kasam ki itni izzat kar raha tha.usne to
khel-2 me aisa kaha tha & use zara bhi umeed nahi thi ki jab josh dono
ke sar chadh jayega us waqt bhi viren uski kasam ka khayal rakhega
magar viren ne uski kasam nibha uske dil me aur badi jagah bana li
thi.

dil me mehboob ke liye umadte pyar & chut me dhanse uske lumbe,tagde
lund ki harkato se jism me paida hoti madhoshi ne apna sar dikhaya &
uski aahe aur tez ho gayi,vo viren ki janghe thame aur peechhe jhuk
gayi & apni chhatiya hawa me utha di.uski kamar bahut tezi se hil rahi
thi & uski chut lund pe apni mastani harkate kar rahi thi.uski chut ka
tanav apni shiddat pe pahuchne ke baad kam ho raha tha & use vohi
anokha ehsas ho raha tha jise duniya jhadna kehti hai.

use chut me kuchh garam sa mehsus hua & kano me viren ki aahe sunai
di.usne aankhe kholi to dekha ki viren ka badan bhi jhatke kha raha
hai & uska gadha virya uski chut me bhar raha hai.jahdne ke baad dono
lumbi-2 sanse lete hue 1 dusre ko dekh rahe the,"viren....jaan..mujhe
chhua.",kamini ne apni kasam vapas li to jasie viren ko kisi qaid se
chhutkara mila.hath badha usne apni hasin mashuqa ko apne seene pe
giraya & fir baho me bhar karwat le use apne neeche daba use chumne
laga.jhadne ke bavjood lund pura mulayam nahi hua tha.viren ne aadhe
sakht lund se hi fir se dhakke lagana shuru kar diya.kamini ki mastani
adaon ne sue pagal kar diya tha & aaj vo uski chut se lund nikalna hi
nahi chahta tha.kamini bhi uski halat samajh gayi thi,usne apni baaho
me use kasa & apne honth us se sata diye & uski chudai ka lutf uthane
lagi.

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kramashah.......

आपका दोस्त राज शर्मा साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,मंदिर जाकर जाप भी कर
लेता हूँ ..मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी
कर लेता हूँआपका दोस्तराज शर्मा(¨`·.·´¨) Always`·.¸(¨`·.·´¨) Keep
Loving &(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !`·.¸.·´ -- raj

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