Friday, April 23, 2010

रेप कहानिया-गाओं की मस्ती पार्ट--8

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गाओं की मस्ती पार्ट--8
गतान्क से आगे............

बस और क्या चाहिए. जया अपनी चुदाई से जल्दी ही पेट से हो गयी. जैसे जैसे जया की दिन पूरे होते गये तो वो जगन या देव का लंड चूस कर ही अपना काम चल लिया करती थी. और जगन और देव बारी बारी से जया का चूत चूस दिया करते थे. देवकी दोनो मर्दों का पूरा का पूरा ख़याल रखती थी और इससे जया को कभी कभी जलन महसूस हुआ करता था. .देवकी और जया की मा अपनी बेटी को संभालने जया के अन्तीम हफ्ते मे इन लोगों के घर पहुँच गयी.
मा के आने से इन लोगों का सारा का सारा मामला बंद हो गया और सब चुप चाप रहने लगे. एक दिन शाम को जया को दर्द चढ़ा और उसको हस्पताल मे भरती कर दिया गया. हस्पताल मे जया को एक रात के लिया रखा गया और सब मिल कर जया के पास ही रात को रुक गये. सुबेरा होने पर डॉक्टर ने बताया की जया को बच्चा होने मे अभी कुच्छ समय और लगेगा और हो सकता है कि जया का बच्चा रात को हो. फिर यह तय हुआ कि देवकी अपनी बहन के पास रात के लिए रुक जाएगी और मा घर जा कर आराम करेंगी. देव भी देवकी के रुकने के लिए तैइय्यार हो गया और जगन फिर अपनी सास के साथ घर वापस चला आया.
जगन अपने सास के साथ करीब सुबह दस बजे गाओं पहुँचा. जगन रास्ते की दुकान से डबल रोटी नाश्ते के लिए खरीद लिया. घर जाकर वो पहले नहा लिया और कमरे मे बैठ कर अख़बार परहने लगा. जगन की सास, छ्हम्मो देवी, अपने कमरे मे नहाने के लिए तैयारिया कर रही थी. छ्हम्मो अपने कमरे से बोली,
"जगन मैं नहा लेती हूँ फिर तुमको चाइ बना कर पिलाती हूँ." अख़बार से अपनी आँख उठा कर अपनी सास को देख जगन चौंक गया. इस समय छ्हम्मो सिर्फ़ अपने पेटिकोट मे थी और उस पेटिकोट को उन्होने अपने चूंची तक उठा बाँध रखा था और इस'से सास की आधे से ज़्यादा सुडोल चिकनी जंघें खुली दिख रही थी. उनकी चूंची भी करीब आधे से ज़्यादा पेटिकोट के बाहर दिख रहा था. छ्हम्मो अपने एक हाथ से अपने कपरे ले रखी थी. जैसे ही जगन की सास दरवाजे के पास खरी हुई तो जगन को बाहर की लाइट से उनकी सुडोल जंघे और चूतर साफ साफ देखाई परा. जगन को अपना लंड के खरा होने का आभास लगने लगा क्योंकि उसकी लूँगी धीरे धीरे उठ रही थी.
जगन जल्दी से दूसरी तरफ देख कर हामी भर दिया. छ्हम्मो बाथरूम मे जाकर नहा धो कर बाहर निकल चाइ बनाने लगी. जगन की अपने सास की तरफ देखने की हिम्मत नही पर रही थी, लेकिन वो बिना देखे रुक भी नही सकता. इस समय छ्हम्मो एक सफेद रंग का ब्लाउस पहने हुए थी, लेकिन गीला होने से लग रहा था उनके ब्लाउस के नीचे और कुच्छ भी नही है. उनका पेटिकोट इस समय उनके चूतर पर थी लेकिन यह यकीन था कि पेटिकोट के नीचे भी कुच्छ नही है. जैसे ही छ्हम्मो अप'ने कमरे मे गयी तो वो जगन के तरफ देख कर मुस्कुरई. जगन उनके हिलते हुए चूतर देखता रहा.
जगन अख़बार परहने के बहाने अपने कमरे मे बैठ कर अपने सास का इन्तिजार करने लगा. छ्हम्मो जल्दी ही कमरे से बाहर निकल कर किचन की तरफ गयी, लेकिन उनका पहनावा अभी भी वही था. जल्दी ही छ्हम्मो किचन से चाइ बना कर नाश्ता लेकर निकली. उन्होने चाइ और नाश्ता ज़मीन पर आमने सामने रखा और जगन को नाश्ता लेने बुलाई. जगन कमरे मे आ कर ज़मीन पर पालती मार कर अपनी सास के सामने बैठ गया और नाश्ते के लिए इंतिज़ार करने लगा.
छ्हम्मो भी तब ज़मीन पर पालती मार कर बैठ गयी. पालती मार कर बैठने से छ्हम्मो की पेटीकोआट उनकी ज्ञगहों तक उठ गयी और जगन को अपने सास की सुडोल, चिकनी और गोरी गोरी जंघे दिखने लगी. छ्हम्मो झुक कर कुच्छ ब्रेड के टुकड़े उठाए और जगन से भी ब्रेड लेने के लिए बोली. जगन ब्रेड लेकर खाते खाते अपने सास के जांघों के देख रहा था. जैसे ही छ्हम्मो अपने पैर थोरी फैलाई तो जगन को उनकी भरा पूरा शेव किया हुआ चूत दिखने लगा.
जैसे जैसे वो लोग नाश्ता करने लगे, छ्हम्मो खुद ही जगन से हल्की फुल्की बात करना शुरू कर दिया. लेकिन जगन को अपने सास के बातों मे कोई ध्यान नही था. छ्हम्मो तब अपनी दोनो टाँगों को फैला दिया और अब जगन को छ्हम्मो की चूत कमरे की रोशनी मे साफ साफ दिखाई देने लगा. जगन को अपना आँख छ्हम्मो की चूत पर से हटाना मुश्किल पर गया. जगन का लंड अब पूरी तरह से खरा हो गया. जगन अपने खरा लंड को अपने हाथों से छुपाने की कोशिस करने लगा लेकिन उसका 10" लूंबा खरा लंड उसके हाथों से छुप नही रहा था.
"तुम्हे पसंद है?" जगन की सास पूछी.
"उन! क्या पुछा?" जगन छ्हम्मो से पुचछा.
"मुझको लग रहा है की जो तुम अपनी आँख गढ़ा कर देख रहे हो, वो तुम्हे पसंद है और तुम्हारा खरा लंड इस बात की गवाही है," छ्हम्मो जगन से बोली. जगन अब दोनो हाथों से खरा लंड को च्छुपाने की कोशिस करने लगा. इस बात से जगन की सास हंस परी और जगन से बोली,
"जगन, बेबकूफी मत करो. तुम्हारा उतना बरा लंड जो कि इस समय खरा हो गया है हाथों से च्छुपाना मुश्किल है. तुम मत घबराव, हुमारी बेटी ने हमसे तुम्हारे लंड के बारे मे सब कुच्छ बता दिया है. अब तुम से क्या च्चिपाना, मैं भी इस लंड का स्वाद लेना चाहती हूँ. मैने करीब पेच्छ'ले एक-दो हफ्ते से अपनी चूत नही चुडवाई है, और यह बात मेरे जैसी चुद्दकऱ औरत के बर्दस्त के बाहर है. मेरी चूत मे तीन-चार दीनो से खुजली हो रही है. चलो जल्दी से अपना नाश्ता ख़तम करो, मुझे तुमसे अभी चुद्वना है." जगन जब सास की यह सब बात सुनी तब वो छ्हम्मो से बोला,
"अगर एही आपकी इक्च्छा है तो मैं आपकी इक्च्छा को टाल नही सकता हूँ," और जगन जल्दी जल्दी अपना नाश्ता ख़तम किया और उठ कर अपना हाथ धोने चला गया. च्चाम्मो भी अपनी नाश्ता जल्दी से ख़तम करके हाथ धो लिया और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और जगन के पास जाकर खरी हो गयी. जगन का खरा लंड को जो कि लूँगी से बाहर निकल चुक्का था पाकर कर अप'ने हाथों से धीरे धीरे सहलाने लगी.
"ओह! तुम्हारा लंड तो वाकई बहुत बरा और मोटा है. मेरी बेटियाँ बहुत ही भाग्यशाली हैं जो तुमको पाया है. ओह! कितना करा है, चलो जल्दी से मुझको चोदो," इतना कहा कर छ्हम्मो हाथों से जगन को पकर कर बेडरूम मे ले गयी. बेडरूम मे घुस कर छ्हम्मो जल्दी से अपनी पेटिकोट का नारा खींच कर खोल दिया और उनकी पेटिकोट ज़मीन पर गिर गया. अब जगन के सामने उसकी सास नंगी खरी थी और जगन उनके नंगे रूप को देख कर मचल गया. तब छ्हम्मो घूम कर जगन के सामने पीठ करके खरी हो गयी और अपनी ब्लाउस को उतारने के लिए बोली.
जैसे जैसे जगन उनकी ब्लाउस के हुक खोल रहा था, उसका लंड तन कर उनकी चूतर से रगड़ रहा था. चूतर पर जगन के लंड की ठोकर महसूस करने के बाद छ्हम्मो ने अपनी चूतर पिछे की तरफ धकेल दिया और अपनी चूतर जगन के लंड पर मलने लगी. जगन अपनी सास का ब्लाउस उतार दिया और इनकी नंगी पीठ पर चुम्मा देने लगा. फिर उसने अपना हाथ आगे करके उनकी चूंचियो से खेलने लगा. फिर अपना लंड छ्हम्मो के गंद पर रख कर घुमाने लगा और उसकी इस हरकत से छ्हम्मो अपनी गंद हिला करके जगन के तरफ कर दिया. अब छ्हम्मो जगन के तरफ घूम गयी और उससे बोली,
"चलो अपना लॉरा मुझको दो, मैने बहुत दीनो से लौरा नही चूसा है, मैं तुम्हारे लौरे को चूसना चाहती हूँ," और छ्हम्मो झुक कर जगन के सामने बैठ गयी और जगन का लौरा को बच्चो जैसा चूसने लगी. छ्हम्मो के मूह से लार बह रही थी और वो जगन के लौरे को जितना हो सके मूह मे घुसेर कर बरे आराम से चूस रही थी. जगन को सुपरे पर सास की जीव का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. छ्हम्मो सर को आगे पिछे कर के जगन के लौरे को धीरे धीरे मूह मे घुसेर रही थी और नीकाल रही थी और होठों से सुपरा को चूस रही थी. जगन का लौरा खरा हो कर तन्ना गया था और अपनी सास की मूह के अंदर थुकी मार रहा था. जगन की सास को लंड चुसाइ की कला बहुत अच्छे तरह से आती थी और बरे मज़े लेकर दामाद का लंड चूस रही थी.
"बहुत अच्च्चे, मा, ऊ! बहुत मज़े आ रहा है, हाँ ऐसे ही मेरे लौरे को चुसिये. आप बहुत अच्छे तरह से लंड चूस रही हैं." जगन धीरे धीरे अपना कमर चला कर अपना लंड सास के मूह मे डाल रहा था और निकाल रहा था.
"और ज़ोर से चूसो माजी, और ज़ोर से मेरे लंड की चुसिये," जगन सास से बोला. लेकिन छ्हम्मो को मालूम था कि कैसे दामाद का लंड चूसना है और वो कोई जल्दबाज़ी नही कर रही थी. छ्हम्मो धीरे धीरे ज़मीन पर बीछे बिस्तेर पर लेट गयी और पैरों को फैला कर जगन से बोली,

क्रमशः........................
दोस्तों पूरी कहानी जानने के लिए नीचे दिए हुए पार्ट जरूर पढ़े .................................
आपका दोस्त
राज शर्मा


गाओं की मस्ती पार्ट--1

गाओं की मस्ती पार्ट--2

गाओं की मस्ती पार्ट--3

गाओं की मस्ती पार्ट--4

गाओं की मस्ती पार्ट--5

गाओं की मस्ती पार्ट--6

गाओं की मस्ती पार्ट--7

गाओं की मस्ती पार्ट--8

गाओं की मस्ती पार्ट--9

गाओं की मस्ती पार्ट--10


GAON KEE MASTEE paart--8

gataank se aage............

Bas aur kya chahiye. Jaya apni chudai se jaldee hi pet se ho gayee. Jaise jaise Jaya ki din pure hote gaye to wo Jagan ya Deva ka lund chus kar hi apna kam chal liya kartee thee. Aur Jagan aur Deva bari bari se Jaya ka choot chus diya karte the. Devkee dono mardon ka pura ka pura khayal rakhtee thee aur isse Jaya ko kabhi kabhi jalan mahasus hua karta tha. .Devkee aur Jaya ki maa apni beti ko sambhalne Jaya ke anteem hafte me in logon ke ghar pahunch gayee.
Maa ke ane se in logon ka sara ka sara mamla band ho gaya aur sab chup chap rahane lage. Ek din sham ko Jaya ko dard charha aur usko haspatal me bhartee kar diya gaya. Haspatal me Jaya ko ek rat ke liya rakhha gaya aur sab mi kar Jaya ke pas hi rat ko ruk gaye. Subera hone par doctor ne bataya ki Jaya ko bachha hone me abhi kuchh samay aur lagega aur ho sakta hai ki Jaya ka bacha rat ko ho. Phir yah tay hua ki Devkee apni bahan ke pas rat ke liye tuk jayegee aur maa ghar ja kar aram karengee. Deva bhi Devkee ke rukne ke liye taiyyaar ho gaya aur Jagan phir apnee sas ke sath ghar wapas chala aaya.
Jagan apne sas ke sath kareeb subah das baje gaon pahuncha. Jagan raste ki dukan se dabal rotee nashte ke liye khareed liya. Ghar jakar wo pahale naha liya aur kamare me baith kar akhbar parhne laga. Jagan ki saas, Chhammo Devi, apne kamare me nahane ke liye tayarian kar rahee thee. Chhammo apne kamare se boli,
"Jagan mai naha letee hun phir tumko chai bana kar pilatee hun." Akhbar se apni ankh utha kar apnee saas ko dekh Jagan chaunk gaya. Is samamay Chhammo sirf apne petticoat me thee aur us petticoat ko unhone apne chunchee tak utha bandh rakha tha aur is'se saas ki adhe se jyada sudol chikni janghen khulee dikh rahee thee. Unki chunchee bhi kareeb adhe se jyada petticoat ke bahar dikh raha tha. Chhammo apne ek hath se apne kapare le rakhee thee. Jaise hi Jagan ki saas darwaje ke pas kharee huee to Jagan ko bahar ki light se unki sudol janghe aur chutar saf saf dekhayee para. Jagan ko apna lund ke khara hone ka aabhas lagne laga kyonki uski lungee dhire dhire uth rahee thee.
Jagan jaldee se dusree taraf dekh kar hami bahr diya. Chhammo bathroom me jakar naha dho kar bahar nikal chai banane lagee. Jagan kee apne saas ki taraf dekhne ki himmat nahee par rahee thee, lekin wo bina dekhe ruk bhi nahee sakta. Is samay Chhammo ek safed rang ka blouse pahane hue thee, lekin gila hone se lag raha tha unke blouse ke neeche aur kuchh bhi nahee hai. Unka petticoat is samay unke chutar par thee lekin yah yakeen tha ki petticoat ke neeche bhi kuchh nahee hai. Jaise hi Chhammo ap'ne kamare me gayee to wo Jagan ke taraf dekh kar muskuraee. Jagan unke hilte hue chutar dekhta raha.
Jagan akhbar parhne ke bahane apne kamare me baith kar apne saas ka intijar karne laga. Chhammo jaldee hi kamare se bahar nikal kar kitchen ki taraf gayee, lekin unka pahanawa abhi bhi wahee tha. Jaldee hi Chhammo kitchen se chai bana kar nashta lekar niklee. Unhone chai aur nashta jameen par amne samne rakha aur Jagan ko nashta lene bulaee. Jagan kamare me aa kar jameen par palthee mar kar apnee saas ke samne baith gaya aur nashte ke liye intizar karne laga.
Chhammo bhi tab jameen par palthee mar kar baith gayee. Palthee mar kar baithne se Chhammo ki petiicoat unki jnghon tak uth gayee aur Jagan ko apne saas ki sudol, chiknee aur gori gori janghe dikhne lagee. Chhammo jhuk kar kuchh bread ke tukre uthaye aur Jagan se bhi bread lene ke liye boli. Jagan bread lekar khate khate apne saas ke janghon ke delh raha tha. Jaise hi Chhammo apne pair thori phailaee to Jagan ko unki bhara pura shave kiya hua choot dhikhne laga.
Jaise jaise wo log nashta karne lage, Chhammo khud hi Jagan se halkee phulkee baat karna shuru kar diya. Lekin Jagan ko apne saas ke baton me koi dhyan nahee tha. Chhammo tab apni dono tangon ko phaila diya aur ab Jagan ko Chhammo ki choot kamare ki roshnee me saf saf dikhaee dene laga. Jagan ko apana ankh Chhammo ki choot par se hatana mushkil par gaya. Jagan ka lund ab puree tarah se khara ho gaya. Jagan apne khara lund ko apne hathon se chupane ki koshis karne laga lekin uska 10" lumba khara lund uske hathon se chhup nahee raha tha.
"Tumhe pasand hai?" Jagan ki saas puchhhee.
"Un! kya puchhha?" Jagan Chhammo se puchha.
"Mujhko lag raha hai ki jo tum apni ankh gara kar dekh rahe ho, wo tumhe pasand hai aur tumhara khara lund is baat ki gawahee hai," Chhammo Jagan se boli. Jagan ab dono hathon se khara lund ko chhupane ki koshis karne laga. Is baat se Jagan ki saas hans paree aur Jagan se boli,
"Jagan, bebkoofee mat karo. Tumhara utna bara lund jo ki is samay khara ho gaya hai hathon se chhupana mushkil hai. Tum mat ghabarao, humari betee ne humse tumhare lund ke bare me sab kuchh bata diya hai. Ab tum se kya chhipana, mai bhi is lund ka swad lena chahatee hun. Maine kareeb pechh'le ek-do hafte se apni choot nahee chudwayee hai, aur yah baat mere jaisee chuddakaR aurat ke bardast ke bahar hai. Meri choot me teen-char dino se khujlee ho rahee hai. Chalo jaldee se apna nashta khatam karo, mujhe tumse abhi chudwana hai." Jagan jab saas ki yah sab baat suni tab wo Chhammo se bola,
"agar ehee apki icchha hai to mai apki icchha ko tal nahee sakta hun," aur Jagan jaldee jaldee apna nashta khatam kiya aur uth kar apna hath dhone chala gaya. Chhammo bhi apni nashta jaldee se khatam karke hath dho liya aur kamre ka darwaja band kar diya aur Jagan ke pas jakar kharee ho gayee. Jagan ka khara lund ko jo ki lungee se bahar nikal chukka tha pakar kar ap'ne hathon se dhire dhire sahalane lagee.
"Oh! Tumhara lund to wakai bahut bara aur mota hai. Meri betian bahut hi bhagyashalee hain jo tumko paya hai. Oh! Kitna kara hai, chalo jaldee se mujhko chodo," itna kaha kar Chhammo hathon se Jagan ko pakar kar bedrom me le gayee. Bedroom me ghus kar Chhammo jaldee se apni petticoat ka nara khinch kar khol diya aur unki petticoat jameen par gir gaya. Ab Jagan ke samne uski saas nangee kharee thee aur Jagan unke nange roop ko dekh kar machal gaya. Tab Chhammo ghum kar Jagan ke samne peeth karke kharee ho gayee aur apni blouse ko utarne ke liye boli.
Jaise jaise Jagan unki blouse ke hook khol raha tha, uska lund tan kar unki chutar se tagad raha tha. chutar apr Jagan ke lund kee thokar mahasus karne ke bad Chhammo ne apni chutar pichhe ki taraf dhakel diya aur apni chutar Jagan ke lund par malne lagee. Jagan apni saas ka blouse utar diya aur inki nangee peeth par chumma dene laga. Phir usne apna hath age karke unki chuncheon se khelne laga. phir apna lund Chhammo ke gand par rakh kar ghumane laga aur uskee is harkat se Chhammo apni gand hila karke Jagan ke taraf kar diya. Ab Chhammo Jagan ke taraf ghum gayee aur usse boli,
"Chalo apna laura mujhko do, maine bahut dino se laura nahee chusa hai, mai tumhare laure ko chusna chahatee hun," aur Chhammo jhuk kar Jagan ke samne baith gayee aur Jagan ka laura ko bachho jaisa chusne lagee. Chhammo ke muh se laar baha rahee thee aur wo Jagan ke laure ko jitna ho sake muh me ghuser kar bare aram se chus rahee thee. Jagan ko supare par saas ki jeev ka sparsh bahut achha lag raha tha. Chhammo sar ki aage pichhe kar ke Jagan ke laure ko dhire dhire muh me ghuser rahee thee aur neekal rahee thee aur hothon se supara ko chus rahee thee. Jagan ka laura khara ho kar tanna gaya tha aur apni saas ki muh ke andar thukee mar raha tha. Jagan ki saas ko lund chusai ki kala bahut achchhe tarah se atee thee aur bare maze lekar damad ka lund chus rahee thee.
"Bahut achchhe, Ma, ooh! Bahut maze aa raha hai, han aise hi mere laure ko chusiye. Aap bahut achchhe tarah se lund chus rahee hain." Jagan dhire dhire apna kamar chala kar apna lund saas ke muh me dal raha tha aur nikal raha tha.
"Aur jor se chuso Maajee, aur jor se mere lund ki chusiye," Jagan saas se bola. Lekin Chhammo ko malum tha ki kaise damad ka lund chusna hai aur wo koi jaldbazee nahee kar rahee thee. Chhammo dhire dhire jameen par beechhe bister par let gayee aur pairon ko phaila kar Jagan se boli,











आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj

















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